फौरन उठाएं ये कदम वरना आपका क्रेडिट स्कोर हो सकता है खराब!

लोन से संबंधित सभी कागजात इकट्ठा करना शुरू करें और सभी ट्रांजेक्शनों, रसीद और बैंक स्टेटमेंट को इकट्ठा कर लें.

Last Modified:
Saturday, 13 January, 2024
Persnol Loan

अक्सर अपनी आवश्यक जरूरतों को पूरा करने के लिए लोग लोन लेते हैं लेकिन लोन का भुगतान कर देने भर से आपको पूरी तरह वित्तीय स्वतंत्रता नहीं मिल जाती. ये भी बहुत जरूरी है कि आपको लोन देने वाली आपके द्वारा किए हुए भुगतान को पूरी तरह स्वीकार करे और अपने रिकार्ड्स को पूरी तरह से अपडेटेड रखे. आमतौर पर एक लोन का भुगतान करने के बाद भी, खासकर पर्सनल लोन के बाद भी, लोन देने वाली कंपनी आपको EMI के भुगतान के लिए कह सकती है. 

किस तरह करें खुद का बचाव?
आपके साथ ऐसा न हो इसलिए आवाश्यक है कि आप पूरी तरह जागरूक रहें और बाकी बची प्रक्रिया को भी पूरा करें. लेकिन अगर फिर भी आपके साथ ऐसा हो जाता है तो आपको जल्द से जल्द एक्शन लेना चाहिए. विसंगति को ठीक करना अत्यंत आवश्यक होता है ताकि संभावित प्रतिक्रियाओं को रोका जा सके. इस चुनौतीपूर्ण परिदृश्य से निपटने के लिए आप ये कदम उठा सकते हैं: 

सभी डॉक्यूमेंट इकट्ठे करें: बिना किसी देरी के लोन से संबंधित सभी कागजात इकट्ठा करना शुरू करें और सभी ट्रांजेक्शनों, रसीद और बैंक स्टेटमेंट को इकट्ठा कर लें. इसके साथ ही लोन की अवधी के दौरान या फिर बाद में किसी भी प्रकार के आदान-प्रदान से सभी कागजात संभाल कर रखें. 

कम्युनिकेशन की शुरुआत करें: लोन देने वाली कंपनी या फिर संस्था से सीधे बात करें और पेमेंट से संबंधित सभी सबूतों को इकट्ठा करके रखें. किसी भी लोन देने वाली कंपनी या फिर संस्था से बात करते हुए इस बात का ध्यान रखें कि आपका व्यवहार शांत हो और स्थिति को समझते हुए अपने मामले को तर्कसंगत तरीके से पेश करें. लोन देने वाली संस्था से निवेदन करें कि वह अपने रिकॉर्ड को ढंग से चेक करें और लोन के भुगतान से संबंधित स्टेटस को चेक कर लें. 

लिखकर डॉक्यूमेंट करें: बातचीत के साथ-साथ मेल या फिर पत्र के द्वारा भी अपनी बातचीत का रिकॉर्ड बनाकर रखें. यदि आपके पास लिखित दस्तावेज होंगे तो वह बहुत ही प्रमुख रूप से आपकी मदद कर पाएंगे और मामले में आगे बढ़ने के लिए यह आपके लिए काफी मददगार साबित हो सकते है. 

गलत रिपोर्टिंग से खराब होगा क्रेडिट स्कोर: किसी भी लोन देने वाली संस्था की गलती की वजह से आपकी क्रेडिट रिपोर्ट पर काफी बुरा प्रभाव पड़ सकता है. क्रेडिट से संबंधित जानकारी ब्यूरो के लिए बहुत ही आवश्यक होती है. कोई भी ब्यूरो क्रेडिट देने से पहले आपके क्रेडिट स्कोर को ही जांचता है और गलत क्रेडिट रिपोर्ट आपके लिए मुसीबत बन सकती है. 
 

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बैंक ऑफ बड़ौदा का bob PAL लॉन्च, शेयर और म्यूचुअल फंड गिरवी रखकर 5 करोड़ तक की क्रेडिट लिमिट

इस सुविधा के तहत ग्राहक अपने निवेश को बेचे बिना निजी या कारोबारी जरूरतों के लिए फंड का इस्तेमाल कर सकेंगे.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Monday, 21 September, 2026
Last Modified:
Monday, 21 September, 2026
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बैंक ऑफ बड़ौदा ने अपने ग्राहकों के लिए bob PAL (Portfolio-backed Approved Limit) नाम से डिजिटल ओवरड्राफ्ट सुविधा शुरू की है. इसके तहत पात्र ग्राहक अपने इक्विटी शेयर, म्यूचुअल फंड, बॉन्ड, डिबेंचर और सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड जैसी सिक्योरिटीज को गिरवी रखकर 1 लाख रुपये से 5 करोड़ रुपये तक की क्रेडिट लिमिट हासिल कर सकते हैं. इस सुविधा के तहत ग्राहक अपने निवेश को बेचे बिना निजी या कारोबारी जरूरतों के लिए फंड का इस्तेमाल कर सकेंगे.

क्या है bob PAL?

bob PAL सिक्योरिटीज के बदले मिलने वाली डिजिटल ओवरड्राफ्ट सुविधा है. इसका उद्देश्य ग्राहकों को अपने निवेश को भुनाए बिना जरूरत के समय फंड उपलब्ध कराना है. बैंक के मुताबिक, यह सुविधा निवेश पोर्टफोलियो को बनाए रखते हुए अल्पकालिक वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए इस्तेमाल की जा सकती है.

किन निवेशों के बदले मिलेगा लोन?

इस सुविधा के तहत पात्र ग्राहक कई तरह की सिक्योरिटीज को गिरवी रख सकते हैं. इनमें इक्विटी शेयर, म्यूचुअल फंड, बॉन्ड, डिबेंचर और सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) शामिल हैं. मिलने वाली क्रेडिट लिमिट गिरवी रखी गई सिक्योरिटीज और लागू नियमों के आधार पर तय होगी.

1 करोड़ रुपये तक की लिमिट के लिए डिजिटल सुविधा

बैंक के मुताबिक, 1 करोड़ रुपये तक की ओवरड्राफ्ट लिमिट के लिए डिजिटल ऑनबोर्डिंग और प्रोसेसिंग की सुविधा उपलब्ध है. ग्राहक bob World, इंटरनेट बैंकिंग और बैंक की वेबसाइट के जरिए इस सुविधा का लाभ ले सकते हैं.

जितना इस्तेमाल, उतना ब्याज

bob PAL ओवरड्राफ्ट सुविधा है, इसलिए ग्राहक को पूरी स्वीकृत लिमिट पर ब्याज नहीं देना होगा. ब्याज इस्तेमाल की गई राशि पर लगेगा. इससे जरूरत के मुताबिक उपलब्ध क्रेडिट का इस्तेमाल करने की सुविधा मिलती है.

निवेश बेचने की जरूरत नहीं

इस सुविधा की एक प्रमुख विशेषता यह है कि ग्राहक फंड की जरूरत पूरी करने के लिए अपने निवेश को बेचने के बजाय उसे सिक्योरिटी के तौर पर इस्तेमाल कर सकते हैं. ऐसे में गिरवी रखे गए निवेश से मिलने वाले लागू लाभ, जैसे डिविडेंड और बोनस, निवेशक को मिलते रह सकते हैं, हालांकि यह संबंधित सिक्योरिटी और बैंक की शर्तों के अधीन होगा.

बैंक ने क्या कहा?

बैंक ऑफ बड़ौदा के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर संजय मुदलियार ने कहा कि फंड की जरूरत पूरी करने के लिए लंबे समय में संपत्ति बनाने की प्रक्रिया पर असर नहीं पड़ना चाहिए. उनके मुताबिक, bob PAL ग्राहकों को अपने निवेश को बनाए रखते हुए जरूरत के समय उनकी वित्तीय संपत्तियों की वैल्यू का इस्तेमाल करने की सुविधा देता है. उन्होंने कहा कि ओवरड्राफ्ट स्ट्रक्चर और डिजिटल प्रक्रिया के जरिए बैंक ग्राहकों को सुविधाजनक और लचीला वित्तीय समाधान उपलब्ध कराने की दिशा में काम कर रहा है.

bob PAL की प्रमुख बातें

1. क्रेडिट लिमिट: 1 लाख रुपये से 5 करोड़ रुपये तक
2. सिक्योरिटी: इक्विटी शेयर, म्यूचुअल फंड, बॉन्ड, डिबेंचर और SGB
3. ब्याज: इस्तेमाल की गई राशि पर
4. निवेश: सिक्योरिटी गिरवी रखने के बाद भी निवेश पोर्टफोलियो बरकरार
5. डिजिटल सुविधा: 1 करोड़ रुपये तक की लिमिट के लिए उपलब्ध
6. डिजिटल माध्यम: bob World, इंटरनेट बैंकिंग और बैंक की वेबसाइट

 


बॉन्ड और एफडी के बाद पैसाबाजार का MF में प्रवेश, ₹10 से डेली SIP की शुरुआत

अनियमित आय वाले लोगों के लिए रोजाना छोटी रकम निवेश करने का विकल्प; पिछले साल बॉन्ड और एफडी के बाद कंपनी ने बढ़ाया निवेश उत्पादों का दायरा

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Friday, 18 September, 2026
Last Modified:
Friday, 18 September, 2026
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पैसाबाजार ने म्यूचुअल फंड निवेश के लिए अपना प्लेटफॉर्म लॉन्च किया है. इसके साथ कंपनी ने बचत और निवेश से जुड़े उत्पादों का दायरा बढ़ाया है. कंपनी ने बताया कि प्लेटफॉर्म पर निवेशकों को अलग-अलग म्यूचुअल फंड योजनाओं को खोजने, उनकी तुलना करने और निवेश करने की सुविधा मिलेगी. म्यूचुअल फंड प्लेटफॉर्म के साथ कंपनी ने ‘डेली SIP’ की सुविधा भी शुरू की है. इसके तहत निवेशक हर महीने एकमुश्त रकम निवेश करने के बजाय रोजाना छोटी राशि से निवेश कर सकते हैं. कंपनी के मुताबिक, इस सुविधा में न्यूनतम ₹10 से रोजाना निवेश किया जा सकता है.

अनियमित आय वालों के लिए विकल्प

डेली SIP का उद्देश्य ऐसे लोगों के लिए नियमित निवेश को आसान बनाना है, जिनकी आय हर महीने एक समान नहीं रहती. इसमें स्वरोजगार करने वाले लोग, छोटे कारोबारी और दुकानदार जैसे उपभोक्ता शामिल हो सकते हैं.

रोजाना छोटी राशि निवेश करने का विकल्प निवेशकों को अपने नकदी प्रवाह के अनुसार निवेश करने की सुविधा दे सकता है. हालांकि, म्यूचुअल फंड निवेश बाजार जोखिम के अधीन होते हैं और किसी भी योजना में निवेश से पहले उससे जुड़े जोखिमों और शर्तों को समझना जरूरी है.

बॉन्ड और एफडी के बाद म्यूचुअल फंड

पैसाबाजार ने पिछले साल बॉन्ड और फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) से जुड़े उत्पाद शुरू किए थे. अब म्यूचुअल फंड को जोड़ने के साथ कंपनी लोन, बचत और निवेश से जुड़े उत्पाद एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराने की दिशा में आगे बढ़ रही है.

पैसाबाजार के सीईओ संतोष अग्रवाल ने कहा कि कंपनी की मौजूदा गतिविधियों में क्रेडिट की भूमिका बनी रहेगी, लेकिन उपभोक्ताओं की वित्तीय जरूरतें केवल लोन तक सीमित नहीं हैं. उनके मुताबिक, म्यूचुअल फंड की शुरुआत कंपनी के वित्तीय उत्पादों के विस्तार का हिस्सा है.

कई एएमसी की योजनाओं में निवेश की सुविधा

कंपनी के अनुसार, उसके म्यूचुअल फंड प्लेटफॉर्म पर विभिन्न एसेट मैनेजमेंट कंपनियों (AMCs) की योजनाएं उपलब्ध हैं. निवेशक इन योजनाओं को देख और उनकी तुलना कर सकते हैं तथा अपनी जरूरत के अनुसार निवेश कर सकते हैं. पैसाबाजार में म्यूचुअल फंड के प्रमुख तुषार गुप्ता ने कहा कि डेली SIP के जरिए अलग-अलग आय पैटर्न वाले लोगों के लिए निवेश को अधिक सुविधाजनक बनाने की कोशिश की गई है. 

 


EPFO में बड़ा बदलाव: ₹15,000 से बढ़कर ₹25,000 हुई वेतन सीमा, 51 लाख से ज्यादा नए कर्मचारी जुड़ेंगे

12 साल बाद बढ़ाई गई EPFO की अनिवार्य कवरेज सीमा, 15,000 से 25,000 रुपये तक वेतन पाने वाले कर्मचारियों को मिलेगा सामाजिक सुरक्षा का लाभ

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Thursday, 17 September, 2026
Last Modified:
Thursday, 17 September, 2026
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केंद्र सरकार ने कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा को लेकर बड़ा फैसला किया है. केंद्रीय कैबिनेट ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) में अनिवार्य रूप से शामिल होने के लिए वेतन की ऊपरी सीमा 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये प्रति माह करने को मंजूरी दे दी है. सरकार के मुताबिक, इस बदलाव से 51 लाख से ज्यादा अतिरिक्त कर्मचारी EPFO के दायरे में आ सकेंगे.

आसान भाषा में समझें तो अभी तक जिन नए कर्मचारियों का वेतन 15,000 रुपये प्रति माह से ज्यादा था, वे अनिवार्य EPF कवरेज में नहीं आते थे. अब यह सीमा 25,000 रुपये होने के बाद 15,000 से ज्यादा और 25,000 रुपये तक वेतन पाने वाले कर्मचारियों को भी अनिवार्य EPFO कवरेज में शामिल किया जा सकेगा.

कर्मचारियों को क्या मिलेगा फायदा?

EPFO के दायरे में आने वाले कर्मचारियों को नियमों के मुताबिक भविष्य निधि, पेंशन और बीमा से जुड़ी सामाजिक सुरक्षा सुविधाओं का लाभ मिलता है. EPF के जरिए कर्मचारी के रिटायरमेंट के लिए बचत होती है. वहीं, कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) के तहत पेंशन और कर्मचारी जमा बीमा योजना (EDLI) के तहत बीमा सुरक्षा का प्रावधान है.

सरकार का कहना है कि वेतन सीमा बढ़ाने से बड़ी संख्या में ऐसे कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाया जा सकेगा, जो मौजूदा 15,000 रुपये की सीमा के कारण अनिवार्य EPF कवरेज से बाहर थे.

12 साल बाद बदली EPFO की वेतन सीमा

EPFO की वेतन सीमा में करीब 12 साल बाद बदलाव किया गया है. सितंबर 2014 में इसे बढ़ाकर 15,000 रुपये प्रति माह किया गया था. इसके बाद से इस सीमा में कोई बदलाव नहीं हुआ था. सरकार के अनुसार, पिछले 12 वर्षों में कर्मचारियों की आय और वेतन स्तर में बदलाव आया है. कई राज्यों और अलग-अलग क्षेत्रों में न्यूनतम वेतन भी मौजूदा 15,000 रुपये की सीमा के करीब पहुंच गया है. ऐसे में अब अनिवार्य EPFO कवरेज की सीमा को बढ़ाकर 25,000 रुपये किया गया है.

क्या मौजूदा कर्मचारियों का PF भी बढ़ जाएगा?

नई वेतन सीमा का मतलब यह नहीं है कि सभी मौजूदा कर्मचारियों के PF योगदान में अपने आप एक तय रकम की बढ़ोतरी हो जाएगी. सरकार ने सीमा बढ़ाने को मंजूरी दी है, लेकिन इसके लागू होने के बाद अलग-अलग वेतन वर्ग के कर्मचारियों के PF योगदान और पेंशन की गणना पर कितना असर पड़ेगा, यह संबंधित नियमों और प्रक्रिया से स्पष्ट होगा.

श्रम एवं रोजगार मंत्रालय और EPFO को इस फैसले को लागू करने के लिए जरूरी कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी करनी होगी. इसलिए अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि पहले से EPF का लाभ ले रहे हर कर्मचारी के खाते में हर महीने निश्चित रूप से ज्यादा रकम जमा होगी.

सरकार पर कितना बढ़ेगा खर्च?

सरकार के अनुमान के मुताबिक, इस फैसले के बाद सालाना खर्च करीब 11,339 करोड़ रुपये रहने की उम्मीद है. फिलहाल इस मद में सरकार की सालाना बजटीय मदद करीब 10,250 करोड़ रुपये है.

अगले पांच वर्षों में सरकार का कुल खर्च करीब 56,696 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है. इस प्रस्ताव पर अलग-अलग मंत्रालयों के बीच चर्चा हुई थी और 16 जून 2026 को व्यय वित्त समिति ने भी इसकी सिफारिश की थी.

अभी कितने कर्मचारी EPFO से जुड़े हैं?

सरकार के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, EPFO के करीब 7.98 करोड़ ऐसे सदस्य हैं, जिनके खातों में फिलहाल योगदान किया जा रहा है. ये कर्मचारी करीब 7.68 लाख कंपनियों और अन्य संस्थानों से जुड़े हैं. इसके अलावा कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) के तहत करीब 82 लाख लोगों को पेंशन मिल रही है.

नई वेतन सीमा कब से लागू होगी?

केंद्रीय कैबिनेट ने EPFO की वेतन सीमा को 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये करने को मंजूरी दे दी है. हालांकि, नई व्यवस्था किस तारीख से लागू होगी और PF योगदान की गणना में किस तरह बदलाव होगा, इसकी पूरी जानकारी श्रम एवं रोजगार मंत्रालय और EPFO की ओर से जारी होने वाले नियमों और निर्देशों से स्पष्ट होगी.

इसलिए फिलहाल कर्मचारियों के लिए सबसे अहम बदलाव यह है कि 25,000 रुपये तक वेतन पाने वाले ज्यादा संख्या में नए कर्मचारी अनिवार्य EPFO कवरेज के दायरे में आ सकेंगे.


JioBlackRock का नया Balanced Advantage Fund लॉन्च, इक्विटी-डेट में बदलेगा निवेश आवंटन

नया फंड इक्विटी और डेट के बीच बाजार की परिस्थितियों के अनुसार निवेश का आवंटन बदलेगा. NFO 11 सितंबर को खुला है और 25 सितंबर 2026 को बंद होगा.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Wednesday, 16 September, 2026
Last Modified:
Wednesday, 16 September, 2026
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जियोब्लैकरॉक एएमसी (JioBlackRock Asset Management) ने JioBlackRock Balanced Advantage Fund लॉन्च किया है. यह एक ओपन-एंडेड डायनेमिक एसेट एलोकेशन फंड है, जिसका निवेश इक्विटी और डेट इंस्ट्रूमेंट्स के बीच बाजार की परिस्थितियों के अनुसार किया जाएगा. फंड का न्यू फंड ऑफर (NFO) 11 सितंबर 2026 को खुला है और 25 सितंबर को बंद होगा.

फंड का उद्देश्य लंबी अवधि में पूंजी में बढ़ोतरी के साथ आय अर्जित करना है. इसके लिए पोर्टफोलियो में इक्विटी और डेट का आवंटन बाजार के अलग-अलग संकेतकों के आधार पर गतिशील तरीके से किया जाएगा.

तीन स्तरों पर निवेश रणनीति

जियोब्लैकरॉक के मुताबिक, फंड की निवेश रणनीति में तीन प्रमुख हिस्से शामिल हैं. इनमें बाजार के कई संकेतकों के आधार पर इक्विटी और डेट में आवंटन बदलने वाला डायनेमिक एसेट एलोकेशन फ्रेमवर्क, सिस्टमैटिक इक्विटी पोर्टफोलियो निर्माण और एक अनुशासित फिक्स्ड इनकम रणनीति शामिल है. फंड नियामकीय प्रावधानों और स्कीम इन्फॉर्मेशन डॉक्यूमेंट (SID) के तहत डेरिवेटिव्स का भी इस्तेमाल कर सकता है. इसका उद्देश्य बाजार में एक्सपोजर को मैनेज करना और इक्विटी-ओरिएंटेड टैक्सेशन बनाए रखना है.

बाजार में बदलाव के हिसाब से पोर्टफोलियो में बदलाव

जियोब्लैकरॉक एएमसी के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ सिड स्वामीनाथन ने कहा कि यह फंड निवेशकों के लिए टेक्नोलॉजी आधारित निवेश समाधान उपलब्ध कराने की कंपनी की रणनीति का हिस्सा है. उनके मुताबिक, निवेशकों के लिए चुनौती सिर्फ यह तय करना नहीं है कि कहां निवेश करना है, बल्कि बाजार में कब निवेश बढ़ाना, कब निवेश बनाए रखना और अनिश्चितता के दौर से कैसे निपटना है, यह भी महत्वपूर्ण है.

जियोब्लैकरॉक एएमसी के चीफ इन्वेस्टमेंट ऑफिसर ऋषि कोहली ने कहा कि बाजार में लगातार एक जैसी दिशा में बदलाव नहीं होता. ऐसे में डायनेमिक एसेट एलोकेशन रणनीति इक्विटी और डेट में एक्सपोजर को बाजार की परिस्थितियों के अनुसार बदलने में मदद करती है. इसके साथ सिस्टमैटिक स्टॉक चयन, रिसर्च और रिस्क मैनेजमेंट का इस्तेमाल किया जाएगा.

फंड का निवेश उद्देश्य और बेंचमार्क

JioBlackRock Balanced Advantage Fund का निवेश उद्देश्य इक्विटी और डेट इंस्ट्रूमेंट्स के डायनेमिक पोर्टफोलियो में निवेश के जरिए लंबी अवधि में पूंजी में बढ़ोतरी के साथ आय अर्जित करना है. हालांकि, फंड के निवेश उद्देश्य को हासिल किए जाने की कोई गारंटी नहीं है. इसका बेंचमार्क Nifty 50 Hybrid Composite Debt 50:50 Index (TRI) होगा. इसमें Direct और Regular दोनों प्लान उपलब्ध होंगे. इसमें Growth विकल्प के साथ लंपसम, SIP, STP और SWP की सुविधा मिलेगी. SIP की सुविधा NFO अवधि के दौरान और इसके बाद भी जारी रहेगी.

 


60 साल से पहले रिटायरमेंट की चाह बढ़ी, लेकिन लक्ष्य का सिर्फ 28% रिटायरमेंट कॉर्पस तैयार: रिपोर्ट

एक्सिस मैक्स लाइफ की IRIS 6.0 स्टडी के मुताबिक, शहरी भारतीयों ने अपने लक्ष्य रिटायरमेंट कॉर्पस का औसतन सिर्फ 28% जमा किया है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Wednesday, 16 September, 2026
Last Modified:
Wednesday, 16 September, 2026
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भारत में रिटायरमेंट को लेकर लोगों की सोच तेजी से बदल रही है. बड़ी संख्या में शहरी भारतीय पारंपरिक रिटायरमेंट उम्र का इंतजार नहीं करना चाहते, लेकिन रिटायरमेंट के लिए वित्तीय तैयारी उनकी इस इच्छा के मुकाबले काफी पीछे है. एक्सिस मैक्स लाइफ (Axis Max Life) और कंतार (Kantar) की 'भरोसा टॉक्स इंडिया रिटायरमेंट इंडेक्स स्टडी 6.0’ (Bharosa Talks IRIS 6.0) के मुताबिक, आर्थिक रूप से सक्षम होने पर 10 में से 7 शहरी भारतीय 58-60 साल की उम्र से पहले रिटायर होना चाहते हैं. इनमें से करीब आधे लोग 50 साल की उम्र से पहले फाइनेंशियल इंडिपेन्डेंस एंड रिटायर अर्ली (FIRE) का लक्ष्य हासिल करना चाहते हैं.

हालांकि, सर्वे में शामिल लोगों ने अपने लक्ष्य रिटायरमेंट फंड का औसतन सिर्फ 28% ही जमा किया है. यही नहीं, सिर्फ 11% लोगों को भरोसा है कि उनकी रिटायरमेंट बचत पूरी जिंदगी चलेगी, जबकि 39% को आशंका है कि उनका फंड रिटायरमेंट के बाद पांच साल भी नहीं चल पाएगा.

Gen X+ को काम जारी रखने की चिंता

रिटायरमेंट के करीब पहुंच रही पीढ़ी के बीच वित्तीय चिंता ज्यादा स्पष्ट दिखाई देती है. 45 साल से अधिक उम्र वाले Gen X+ वर्ग के 82% लोगों को लगता है कि नियमित आय की जरूरत के कारण उन्हें शायद कभी काम या बिजनेस से पूरी तरह रिटायर होने का मौका नहीं मिलेगा. इस वर्ग में 91% लोगों को इस बात का अफसोस है कि उन्होंने रिटायरमेंट के लिए निवेश पहले शुरू नहीं किया. Gen X+ ने अपने लक्ष्य रिटायरमेंट कॉर्पस का औसतन 29% जमा किया है.

पहली सैलरी से शुरू करना चाहते हैं रिटायरमेंट प्लानिंग

रिटायरमेंट प्लानिंग को लेकर युवा पीढ़ी में जल्दी शुरुआत करने की सोच मजबूत हो रही है. सर्वे के मुताबिक, हर दो में से एक शहरी भारतीय का मानना है कि रिटायरमेंट प्लानिंग पहली सैलरी मिलने के साथ ही शुरू कर देनी चाहिए. लोगों के मुताबिक रिटायरमेंट सेविंग्स के बारे में सोचना औसतन 31 साल की उम्र में शुरू होना चाहिए. Gen Z के लिए यह उम्र 29 साल, Millennials के लिए 31 साल और Gen X+ के लिए 34 साल है. वहीं, Gen Z के 62% लोगों ने रिटायरमेंट के लिए निवेश शुरू कर दिया है. Millennials में यह आंकड़ा 70% और Gen X+ में 75% है.

1 करोड़ रुपये के रिटायरमेंट फंड पर भरोसा घटा

रिटायरमेंट के लिए कितने फंड की जरूरत होगी, इसे लेकर भी लोगों की धारणा बदली है. 1 करोड़ रुपये या उससे कम की रकम को आरामदायक रिटायरमेंट के लिए पर्याप्त मानने वालों का अनुपात 2025 के 77% से घटकर 2026 में 70% हो गया. 15 लाख रुपये से ज्यादा सालाना घरेलू आय वाले लोगों में सिर्फ 51% लोगों ने 1 करोड़ रुपये या उससे कम के रिटायरमेंट कॉर्पस को पर्याप्त माना. मेट्रो शहरों में यह आंकड़ा 63% रहा.

रिटायरमेंट की तैयारी में थोड़ा सुधार

स्टडी के अनुसार, 2026 में ‘Bharosa Talks IRIS 6.0’ का कुल स्कोर 49 रहा, जबकि 2025 में यह 48 और 2022 में 44 था. वित्तीय तैयारी का स्कोर 51 से बढ़कर 52 हुआ. वहीं, हेल्थ प्रिपेयर्डनेस का स्कोर 46 पर स्थिर रहा और इमोशनल प्रिपेयर्डनेस का स्कोर 58 से घटकर 57 हो गया.

टियर-2 शहरों में तैयारी बढ़ी

रिटायरमेंट की तैयारी में टियर-2 शहरों का प्रदर्शन सुधरा है. इन शहरों का IRIS स्कोर 2025 के 44 से बढ़कर 2026 में 48 हो गया. मेट्रो शहरों का स्कोर 50 पर स्थिर रहा, जबकि टियर-1 शहरों का स्कोर 48 रहा.

क्षेत्रों के आधार पर पूर्वी भारत का स्कोर 52 रहा. पश्चिमी और दक्षिणी क्षेत्र 49-49 के स्कोर के साथ रहे, जबकि उत्तरी क्षेत्र का स्कोर 47 रहा. दक्षिणी क्षेत्र में हेल्थ प्रिपेयर्डनेस का स्कोर 43 से बढ़कर 47 हो गया.

रिटायरमेंट के लिए सेहत भी अहम

रिटायरमेंट प्लानिंग में वित्तीय तैयारी के साथ स्वास्थ्य को लेकर भी चिंता सामने आई है. सर्वे में 75% लोगों ने उम्मीद जताई कि वे रिटायरमेंट के बाद स्वस्थ और फिट रहेंगे. 52% लोगों ने हेल्थ इंश्योरेंस होने की बात कही. नियमित शारीरिक गतिविधियों में शामिल लोगों में 44% रोजाना ऐसी गतिविधियां करते हैं, जबकि 21% लोग अपनी सेहत पर नजर रखने के लिए वियरेबल डिवाइस का इस्तेमाल करते हैं.

परिवार भी रिटायरमेंट के बाद की योजना का अहम हिस्सा बना हुआ है. 87% लोगों को उम्मीद है कि वे रिटायरमेंट के बाद अपने बच्चों के साथ रहेंगे. हालांकि, परिवार और समाज से भविष्य में मिलने वाले सहयोग को लेकर भरोसा 87% से घटकर 84% हो गया.

महिलाओं और पुरुषों का स्कोर बराबर

महिलाओं का IRIS 6.0 स्कोर 49 रहा, जो पुरुषों के बराबर है. सर्वे में 62% महिलाओं ने कहा कि उन्हें पता है कि रिटायरमेंट के लिए कितनी रकम की जरूरत होगी. 52% महिलाओं के पास हेल्थ इंश्योरेंस है, जबकि 41% महिलाएं नियमित शारीरिक गतिविधियों में शामिल रहती हैं. वहीं, 30% महिलाओं का मानना है कि उनका रिटायरमेंट फंड 10 साल से ज्यादा समय तक चल सकता है.

एक्सिस मैक्स लाइफ इंश्योरेंस के MD एवं CEO सुमित मदान ने कहा कि स्टडी से पता चलता है कि कई भारतीयों के लिए रिटायरमेंट अब भी वित्तीय चुनौती बना हुआ है. उन्होंने कहा कि Gen X+ के 82% लोगों को नियमित आय के लिए काम जारी रखने की आशंका है, जबकि युवा भारतीय रिटायरमेंट की तैयारी पहले शुरू कर रहे हैं. कंतार की साउथ एशिया की मैनेजिंग डायरेक्टर और चीफ क्लाइंट ऑफिसर सौम्या मोहंती के मुताबिक, अलग-अलग पीढ़ियों और क्षेत्रों में रिटायरमेंट प्लानिंग का तरीका बदल रहा है. उन्होंने कहा कि युवा भारतीय जल्दी प्लानिंग शुरू कर रहे हैं और टियर-2 शहरों में भी रिटायरमेंट की तैयारी में सुधार हुआ है.
 


म्यूचुअल फंड निवेशकों के लिए इस हफ्ते 5 नए NFO, डिफेंस से रियल एस्टेट तक निवेश के विकल्प

15 सितंबर से एचडीएफसी म्यूचुअल फंड, इनवेस्को म्यूचुअल फंड, कोटक म्यूचुअल फंड और टाटा म्यूचुअल फंड के पांच नए फंड ऑफर (NFO) खुलेंगे.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Monday, 14 September, 2026
Last Modified:
Monday, 14 September, 2026
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म्यूचुअल फंड (MF) निवेशकों के लिए यह सप्ताह नए निवेश विकल्प लेकर आ रहा है. 15 सितंबर से एचडीएफसी म्यूचुअल फंड, इनवेस्को म्यूचुअल फंड, कोटक म्यूचुअल फंड और टाटा म्यूचुअल फंड के पांच नए फंड ऑफर (NFO) खुलेंगे. इनमें डिफेंस, केमिकल, कैपिटल मार्केट और रियल एस्टेट जैसे क्षेत्रों पर केंद्रित इक्विटी योजनाओं के साथ शॉर्ट टर्म डेट फंड भी शामिल है. इनमें ज्यादातर इक्विटी योजनाएं हैं, जिन्हें बहुत अधिक जोखिम वाली श्रेणी में रखा गया है.

HDFC BSE REITs एंड कमर्शियल रियल एस्टेट इंडेक्स फंड

एचडीएफसी म्यूचुअल फंड का यह ओपन-एंडेड इक्विटी फंड सेक्टोरल कैटेगरी में आता है. इसका बेंचमार्क BSE REITs एंड कमर्शियल रियल एस्टेट इंडेक्स TRI है. NFO 15 सितंबर को खुलेगा और 17 सितंबर को बंद होगा. इसमें न्यूनतम 100 रुपये से निवेश किया जा सकता है.

फंड में ग्रोथ और IDCW दोनों विकल्प उपलब्ध हैं. इसमें लॉक-इन नहीं है. हालांकि, तीन महीने के भीतर रिडेम्पशन करने पर 0.5 फीसदी एग्जिट लोड लगेगा. रिस्कोमीटर पर इसे वेरी हाई रिस्क कैटेगरी में रखा गया है. नंदिता मेनेजेस और अरुण अग्रवाल इसके फंड मैनेजर हैं.

इनवेस्को इंडिया निफ्टी इंडिया डिफेंस इंडेक्स फंड

इनवेस्को का यह ओपन-एंडेड इक्विटी फंड निफ्टी इंडिया डिफेंस इंडेक्स को ट्रैक करेगा. इसका उद्देश्य इंडेक्स में शामिल कंपनियों के शेयरों और इक्विटी से जुड़े साधनों में निवेश के जरिए इंडेक्स के प्रदर्शन के अनुरूप रिटर्न देने की कोशिश करना है. इसका NFO 15 सितंबर को खुलेगा और 29 सितंबर को बंद होगा. न्यूनतम 100 रुपये से निवेश किया जा सकता है. फंड में ग्रोथ और IDCW विकल्प उपलब्ध हैं. इसमें लॉक-इन और एग्जिट लोड नहीं है. इसे वेरी हाई रिस्क कैटेगरी में रखा गया है. अभिषेक बहिनीपति इसके फंड मैनेजर हैं.

इनवेस्को इंडिया निफ्टी केमिकल इंडेक्स फंड

इनवेस्को का दूसरा NFO निफ्टी केमिकल इंडेक्स पर आधारित है. यह ओपन-एंडेड इक्विटी स्कीम सेक्टोरल कैटेगरी में आती है. फंड का लक्ष्य निफ्टी केमिकल इंडेक्स के प्रदर्शन को दोहराने की कोशिश करना है. NFO 15 सितंबर से 29 सितंबर तक खुला रहेगा. इसमें न्यूनतम 100 रुपये का निवेश किया जा सकता है. ग्रोथ और IDCW विकल्प उपलब्ध हैं. इसमें कोई लॉक-इन या एग्जिट लोड नहीं है. रिस्कोमीटर पर इसे वेरी हाई रिस्क कैटेगरी में रखा गया है. अभिषेक बहिनीपति इस फंड के भी फंड मैनेजर हैं.

कोटक निफ्टी कैपिटल मार्केट्स इंडेक्स फंड

कोटक म्यूचुअल फंड का यह ओपन-एंडेड इक्विटी इंडेक्स फंड कैपिटल मार्केट्स से जुड़ी कंपनियों पर फोकस करेगा. इसका उद्देश्य निफ्टी कैपिटल मार्केट्स TRI के प्रदर्शन के अनुरूप रिटर्न देने की कोशिश करना है. इसका NFO 15 सितंबर को खुलेगा और 29 सितंबर को बंद होगा. इसमें न्यूनतम 1,000 रुपये से निवेश किया जा सकता है. ग्रोथ और IDCW दोनों विकल्प उपलब्ध हैं. लॉक-इन और एग्जिट लोड नहीं है. यह फंड वेरी हाई रिस्क कैटेगरी में आता है. जीतू वलेच्छा सोनार, सतीश डोंडापति और अभिषेक बिसेन इसके फंड मैनेजर हैं.

टाटा क्रिसिल-आईबीएक्स फाइनेंशियल सर्विसेज 3-6 मंथ्स डेट इंडेक्स फंड

टाटा म्यूचुअल फंड का यह ओपन-एंडेड डेट फंड अल्ट्रा शॉर्ट टर्म कैटेगरी में आता है. यह CRISIL-IBX Financial Services 3-6 Months Debt Index को ट्रैक करेगा. इसका उद्देश्य संबंधित इंडेक्स के प्रदर्शन के अनुरूप रिटर्न देने की कोशिश करना है. इसका NFO 15 सितंबर से 22 सितंबर तक खुला रहेगा. इसमें न्यूनतम 5,000 रुपये का निवेश किया जा सकता है. इसमें ग्रोथ और IDCW विकल्प उपलब्ध हैं और कोई लॉक-इन नहीं है. हालांकि, 30 दिनों के भीतर रिडेम्पशन करने पर 0.25 फीसदी एग्जिट लोड लगेगा. इसे लो टू मॉडरेट रिस्क कैटेगरी में रखा गया है. धवल जोशी और अमित सोमानी इसके फंड मैनेजर हैं.

डिस्क्लेमर: म्यूचुअल फंड में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है. निवेश का फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श करें.
 


बदलते बाजार में सेक्टर चुनने की टेंशन खत्म! कोटक का नया फंड लॉन्च, 1,000 रुपये से निवेश

नई योजना में अलग-अलग सेक्टर आधारित इक्विटी म्यूचुअल फंड योजनाओं में निवेश किया जाएगा, जरूरत के अनुसार किया जा सकेगा पोर्टफोलियो में बदलाव

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Friday, 11 September, 2026
Last Modified:
Friday, 11 September, 2026
BWHindia

कोटक महिंद्रा एसेट मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड (KMAMC) ने कोटक मल्टी सेक्टर ओम्नी फंड ऑफ फंड (Kotak Multi Sector Omni FoF) लॉन्च किया है. यह एक ओपन-एंडेड फंड ऑफ फंड योजना है, जो इक्विटी आधारित सेक्टर-केंद्रित सक्रिय और/या निष्क्रिय म्यूचुअल फंड योजनाओं की यूनिट्स में निवेश करेगी. इस नए फंड ऑफर (NFO) की शुरुआत 8 सितंबर से हुई है और यह 22 सितंबर 2026 को बंद होगा.

बदलती बाजार परिस्थितियों के अनुसार निवेश में बदलाव

कंपनी के मुताबिक, इस योजना में अलग-अलग सेक्टर में निवेश के लिए फंड का चयन एक तय प्रक्रिया के तहत किया जाएगा. बाजार और आर्थिक परिस्थितियों में बदलाव के साथ निवेश का आवंटन भी बदला जा सकेगा. इसका उद्देश्य निवेशकों को अलग-अलग सेक्टर आधारित योजनाओं का चयन, निगरानी और समय-समय पर पुनर्संतुलन खुद करने की जरूरत को कम करना है.

कोटक महिंद्रा एसेट मैनेजमेंट कंपनी के प्रबंध निदेशक निलेश शाह ने कहा कि अर्थव्यवस्था और बाजार के अलग-अलग चक्रों के साथ सेक्टरों का प्रदर्शन और नेतृत्व बदलता रहता है. ऐसे में निवेशकों के लिए चुनौती केवल अगले बेहतर प्रदर्शन करने वाले सेक्टर की पहचान करना नहीं, बल्कि सेक्टर नेतृत्व में बदलाव के दौरान निवेश अनुशासन बनाए रखना भी है.

उन्होंने कहा कि यह फंड एक ही समाधान के जरिए अलग-अलग सेक्टर आधारित रणनीतियों में निवेश का विकल्प उपलब्ध कराने के लिए तैयार किया गया है. इसमें कई सेक्टर-केंद्रित रणनीतियों को एक संरचित आवंटन और पुनर्संतुलन प्रक्रिया के साथ जोड़ा गया है.

सक्रिय और निष्क्रिय दोनों योजनाओं में निवेश

कोटक महिंद्रा एसेट मैनेजमेंट कंपनी के फंड मैनेजर देवेंद्र सिंघल ने कहा कि सेक्टर आधारित निवेश के लिए लगातार शोध, योजनाओं का चयन और समय पर पोर्टफोलियो में बदलाव जरूरी होता है. अलग-अलग सेक्टर आर्थिक वृद्धि, नीतिगत बदलाव, कंपनियों की आय और बाजार धारणा में परिवर्तन के प्रति अलग-अलग प्रतिक्रिया देते हैं.

उन्होंने कहा कि कोटक मल्टी सेक्टर ओम्नी फंड ऑफ फंड सक्रिय और निष्क्रिय दोनों तरह की सेक्टर आधारित योजनाओं में अवसर तलाशने के लिए शोध आधारित प्रक्रिया का इस्तेमाल करेगा. बाजार की परिस्थितियों में बदलाव के अनुसार विभिन्न योजनाओं में आवंटन को पुनर्संतुलित किया जाएगा.

न्यूनतम निवेश कितना है?

इस योजना में शुरुआती निवेश (गैर-एसआईपी) 1,000 रुपये से किया जा सकता है. इसके बाद 500 रुपये और उसके गुणकों में अतिरिक्त निवेश किया जा सकता है. एसआईपी के जरिए निवेश के लिए न्यूनतम राशि 500 रुपये है. इसमें कम से कम दो एसआईपी किस्तों का निवेश करना होगा और प्रत्येक किस्त कम से कम 500 रुपये की होगी.

निवेशकों को योजना में निवेश से पहले योजना सूचना दस्तावेज (SID) और संबंधित दस्तावेजों को ध्यान से पढ़ने की सलाह दी गई है. कंपनी ने यह भी कहा है कि पिछला प्रदर्शन भविष्य में जारी रहेगा, इसकी कोई गारंटी नहीं है. निवेश से जुड़े निर्णय लेने से पहले निवेशकों को अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह लेने की सलाह दी गई है.

(डिस्क्लेमर: म्यूचुअल फंड शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)


एक्सिस बैंक का नया फीचर, अब ग्राहक खुद तय करेंगे यूपीआई भुगतान की सीमा; सभी ऐप पर होगा लागू

व्यक्तिगत, घरेलू दुकानदार और अंतरराष्ट्रीय भुगतान के लिए ग्राहक अपनी जरूरत और सुरक्षा के हिसाब से तय कर सकेंगे अलग-अलग सीमा; सभी जुड़े यूपीआई ऐप पर होगा लागू

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Wednesday, 02 September, 2026
Last Modified:
Wednesday, 02 September, 2026
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एक्सिस बैंक (Axis Bank) ने डिजिटल भुगतान को ज्यादा सुरक्षित और ग्राहकों के लिए सुविधाजनक बनाने के लिए ‘यूपीआई सीमा प्रबंधन’ सुविधा शुरू की है. इसके तहत ग्राहक अब अपने यूपीआई भुगतान की सीमा खुद तय कर सकेंगे. ग्राहक एक्सिस मोबाइल बैंकिंग ऐप के जरिए व्यक्ति को किए जाने वाले भुगतान, घरेलू दुकानदारों को भुगतान और अंतरराष्ट्रीय यूपीआई लेनदेन के लिए अपनी पसंद की सीमा निर्धारित कर सकेंगे.

बैंक के मुताबिक, एक बार ग्राहक द्वारा सीमा तय किए जाने के बाद यह उनके एक्सिस बैंक खाते से जुड़े सभी यूपीआई ऐप पर लागू हो जाएगी. इससे ग्राहकों को अपने डिजिटल खर्च पर बेहतर नियंत्रण मिलने के साथ अनधिकृत या गलती से होने वाले बड़े भुगतान का जोखिम कम करने में मदद मिलेगी.

किन भुगतानों की सीमा तय कर सकेंगे?

नई सुविधा के तहत ग्राहक तीन प्रमुख श्रेणियों में अपनी भुगतान सीमा तय कर सकेंगे. इनमें व्यक्ति से व्यक्ति भुगतान, घरेलू दुकानदारों को भुगतान और अंतरराष्ट्रीय यूपीआई भुगतान शामिल हैं. बैंक ने अभी तक किसी निश्चित अधिकतम राशि की घोषणा नहीं की है. हालांकि, ग्राहक बैंक और यूपीआई व्यवस्था के तहत लागू अधिकतम सीमा के भीतर अपनी जरूरत के मुताबिक कम सीमा तय कर सकेंगे.

मसलन, अगर कोई ग्राहक आमतौर पर किसी दूसरे व्यक्ति को बड़ी रकम का भुगतान नहीं करता है, तो वह व्यक्ति से व्यक्ति भुगतान के लिए कम सीमा निर्धारित कर सकता है. ऐसे में गलती से या बिना अनुमति के बड़ी रकम भेजे जाने की स्थिति में संभावित नुकसान को सीमित किया जा सकता है.

सभी यूपीआई ऐप पर लागू होगी तय सीमा

इस सुविधा की खास बात यह है कि ग्राहक द्वारा एक्सिस मोबाइल बैंकिंग ऐप में तय की गई सीमा सिर्फ एक्सिस बैंक के ऐप तक सीमित नहीं रहेगी. यह ग्राहक के एक्सिस बैंक खाते से जुड़े सभी यूपीआई ऐप पर लागू होगी, यानी ग्राहक ने अगर अपने खाते के लिए किसी खास श्रेणी में कम भुगतान सीमा तय की है, तो उस सीमा से अधिक भुगतान दूसरे जुड़े यूपीआई ऐप के जरिए भी नहीं किया जा सकेगा.

मौजूदा यूपीआई सीमा से कैसे अलग है?

यूपीआई लेनदेन पर पहले से ही भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम और बैंकों की ओर से अलग-अलग सीमाएं लागू होती हैं. संबंधित बैंक और लेनदेन की श्रेणी के आधार पर यह सीमा अलग हो सकती है. एक्सिस बैंक की नई सुविधा ग्राहकों को इन निर्धारित अधिकतम सीमाओं के भीतर अपनी ओर से एक और सीमा तय करने का विकल्प देती है. यानी बैंक या यूपीआई व्यवस्था की अधिकतम सीमा के मुकाबले ग्राहक अपने खाते के लिए कम सीमा निर्धारित कर सकता है.

ग्राहक मोबाइल बैंकिंग ऐप में त्वरित लिंक, सुरक्षा केंद्र, यूपीआई मॉड्यूल और नियंत्रण केंद्र के जरिए अपनी भुगतान सीमा देख या बदल सकते हैं. सीमा में बदलाव के लिए मोबाइल पिन और एक बार इस्तेमाल होने वाले पासवर्ड के जरिए सत्यापन करना होगा.

फिलहाल चुनिंदा ग्राहकों के लिए सुविधा

एक्सिस बैंक ने यह सुविधा फिलहाल चुनिंदा ग्राहकों के लिए शुरू की है. बैंक इसे चरणबद्ध तरीके से लागू कर रहा है और आने वाले समय में सभी ग्राहकों के लिए उपलब्ध कराने की योजना है.

विदेश यात्रा के लिए भी नई सुविधा

एक्सिस बैंक ने चुनिंदा ऋण कार्ड ग्राहकों के लिए ‘अंतरराष्ट्रीय यात्रा घोषणा’ नाम से एक अन्य सुविधा भी शुरू की है. इसके तहत ग्राहक विदेश यात्रा पर जाने से पहले बैंक को अपनी यात्रा की जानकारी दे सकेंगे.

बैंक के पास यात्रा की पहले से जानकारी होने पर विदेश में होने वाले वास्तविक खर्च और संदिग्ध लेनदेन के बीच अंतर करने में मदद मिलेगी. इससे यात्रा के दौरान वैध कार्ड भुगतान के अस्वीकार होने या सुरक्षा कारणों से कार्ड के अनावश्यक रूप से अवरुद्ध होने की संभावना कम हो सकती है.

इस सुविधा का इस्तेमाल करने के लिए ग्राहक एक्सिस मोबाइल बैंकिंग ऐप में ‘ऋण कार्ड’, ‘नियंत्रण केंद्र’ और फिर ‘अंतरराष्ट्रीय यात्रा’ विकल्प पर जाकर यात्रा का विवरण दर्ज कर सकते हैं. एक्सिस बैंक के मुताबिक, इन दोनों पहलों का उद्देश्य ग्राहकों को अपने डिजिटल भुगतान और कार्ड के इस्तेमाल पर ज्यादा नियंत्रण देना और बैंकिंग लेनदेन को अधिक सुरक्षित बनाना है.

 


रेंट पेमेंट के लिए क्रेडिट कार्ड का करते हैं इस्तेमाल? ये गलतियां पड़ सकती हैं भारी

किराए पर लगने वाले अतिरिक्त शुल्क, कार्ड लिमिट का बड़ा हिस्सा इस्तेमाल होना और समय पर पूरा बिल न चुकाना आपकी वित्तीय स्थिति पर दबाव बढ़ा सकता है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Saturday, 22 August, 2026
Last Modified:
Saturday, 22 August, 2026
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हर महीने क्रेडिट कार्ड से किराया चुकाना सुविधाजनक जरूर है, लेकिन छिपे चार्ज, बढ़ता क्रेडिट यूटिलाइजेशन और बिल भुगतान में देरी आपकी जेब के साथ क्रेडिट स्कोर पर भी भारी पड़ सकती है. दरअसल, डिजिटल पेमेंट के दौर में क्रेडिट कार्ड से मकान का किराया चुकाना आसान हो गया है. कुछ क्लिक में किराए की रकम मकान मालिक तक पहुंच जाती है और कई लोग इसे रिवॉर्ड पॉइंट्स या कैश फ्लो मैनेज करने का बेहतर तरीका भी मानते हैं. लेकिन यह सुविधा हर बार फायदे का सौदा नहीं होती.

किराए पर लगने वाले अतिरिक्त शुल्क, कार्ड लिमिट का बड़ा हिस्सा इस्तेमाल होना और समय पर पूरा बिल न चुकाना आपकी वित्तीय स्थिति पर दबाव बढ़ा सकता है. अगर आप भी क्रेडिट कार्ड से हर महीने रेंट पेमेंट करते हैं, तो इन 5 गलतियों से बचना जरूरी है.

1. एक्स्ट्रा चार्ज को नजरअंदाज करना: क्रेडिट कार्ड से किराया चुकाने पर कई प्लेटफॉर्म कन्वीनिएंस या प्रोसेसिंग फीस लेते हैं. अगर यह शुल्क करीब 2% है और आपका मासिक किराया 30,000 रुपये है, तो हर महीने लगभग 600 रुपये अतिरिक्त खर्च हो सकते हैं. सालभर में यह रकम 7,200 रुपये तक पहुंच सकती है, जिस पर टैक्स अलग हो सकता है. ऐसे में रिवॉर्ड पॉइंट्स से मिलने वाला फायदा काफी कम हो सकता है.

2. क्रेडिट लिमिट का बड़ा हिस्सा इस्तेमाल कर लेना: किराया आमतौर पर एक बड़ा मासिक खर्च होता है. ऐसे में कार्ड से रेंट पेमेंट करने पर आपकी उपलब्ध क्रेडिट लिमिट का बड़ा हिस्सा एक साथ इस्तेमाल हो सकता है. इससे क्रेडिट यूटिलाइजेशन बढ़ सकता है और दूसरे जरूरी खर्चों के लिए उपलब्ध लिमिट कम हो सकती है.

3. सिर्फ मिनिमम ड्यू भरकर राहत महसूस करना: क्रेडिट कार्ड बिल में केवल मिनिमम अमाउंट ड्यू चुकाना आसान विकल्प लग सकता है, लेकिन बाकी बकाया रकम पर ब्याज लगना जारी रहता है. अगर रेंट की बड़ी रकम अगले बिलिंग साइकिल तक चली जाती है, तो ब्याज का बोझ तेजी से बढ़ सकता है.

4. किराया देने से CIBIL स्कोर बढ़ने की गारंटी मान लेना: सिर्फ क्रेडिट कार्ड के जरिए किराया चुकाने से CIBIL स्कोर अपने आप बेहतर हो जाएगा, यह जरूरी नहीं है. क्रेडिट स्कोर पर मुख्य असर आपके भुगतान व्यवहार, बकाया राशि और क्रेडिट यूटिलाइजेशन जैसे कारकों का पड़ता है. इसलिए रेंट पेमेंट को स्कोर सुधारने का आसान तरीका मानना गलत हो सकता है.

5. क्रेडिट कार्ड बिल की ड्यू डेट भूल जाना: सबसे बड़ी गलती समय पर कार्ड का बिल न चुकाना है. इससे लेट फीस और ब्याज लग सकता है, साथ ही आपके क्रेडिट रिकॉर्ड पर भी नकारात्मक असर पड़ सकता है. इसलिए अगर किराया क्रेडिट कार्ड से चुका रहे हैं, तो कोशिश करें कि ड्यू डेट से पहले पूरा बकाया चुका दें. क्रेडिट कार्ड से किराया चुकाना तभी समझदारी हो सकता है, जब आप अतिरिक्त शुल्क, अपनी कार्ड लिमिट और बिल चुकाने की क्षमता को पहले से ध्यान में रखें. सिर्फ सुविधा या रिवॉर्ड के लिए हर महीने किराया कार्ड पर डालना, बिना पूरा हिसाब लगाए, आपकी जेब पर भारी पड़ सकता है.

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SBI ने बदले कैश निकासी के नियम, महीने में 4 बार के बाद हर निकासी पर लगेगा 15 रुपये चार्ज

नए नियम में सबसे बड़ा बदलाव डिजिटल लेनदेन को लेकर है. पहले चार मुफ्त लेनदेन की सीमा में डिजिटल लेनदेन को शामिल नहीं किया जाता था. अब SBI ने यह सुविधा खत्म कर दी है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Wednesday, 19 August, 2026
Last Modified:
Wednesday, 19 August, 2026
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देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने बेसिक सेविंग्स बैंक डिपॉजिट (BSBD) अकाउंट से नकद निकासी के नियमों में बदलाव किया है. नए नियम 1 अक्टूबर 2026 से लागू होंगे. इसके तहत महीने में चार नकद निकासी मुफ्त रहेंगी, लेकिन पांचवीं और उसके बाद की हर नकद निकासी पर 15 रुपये और GST का शुल्क देना होगा. खास बात यह है कि नए नियमों में डिजिटल लेनदेन को भी चार मुफ्त निकासी की सीमा में शामिल किया जाएगा.

1 अक्टूबर से लागू होगा नया नियम

SBI के BSBD अकाउंट होल्डर्स के लिए यह बदलाव 1 अक्टूबर 2026 से प्रभावी होगा. ग्राहक महीने में चार बार तक बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के नकद निकासी कर सकेंगे. इसके बाद पांचवीं या उससे अधिक बार कैश निकालने पर प्रत्येक लेनदेन के लिए 15 रुपये और लागू GST देना होगा.

डिजिटल लेनदेन भी फ्री ट्रांजैक्शन की सीमा में

नए नियम में सबसे बड़ा बदलाव डिजिटल लेनदेन को लेकर है. पहले चार मुफ्त लेनदेन की सीमा में डिजिटल लेनदेन को शामिल नहीं किया जाता था. अब SBI ने यह सुविधा खत्म कर दी है. यानी BSBD अकाउंट में तय चार मुफ्त लेनदेन की सीमा में डिजिटल लेनदेन भी गिने जाएंगे.

क्या है BSBD अकाउंट?

बेसिक सेविंग्स बैंक डिपॉजिट (BSBD) अकाउंट उन ग्राहकों के लिए है, जो बिना न्यूनतम बैलेंस की शर्त के बैंकिंग सुविधाओं का लाभ लेना चाहते हैं. इस खाते में न्यूनतम बैलेंस बनाए रखना जरूरी नहीं होता, इसलिए यह कम आय वाले ग्राहकों के लिए खास तौर पर उपयोगी माना जाता है.

BSBD अकाउंट के जरिए ग्राहक ATM या बैंक शाखा में निकासी फॉर्म के माध्यम से पैसे निकाल सकते हैं. SBI इस खाते के साथ बेसिक RuPay ATM-कम-डेबिट कार्ड भी उपलब्ध कराता है.

BSBD अकाउंट खोलने की क्या है शर्त?

SBI में BSBD अकाउंट रखने वाले ग्राहक के नाम पर कोई दूसरा सेविंग्स अकाउंट नहीं होना चाहिए. अगर ग्राहक के पास पहले से SBI का सेविंग्स अकाउंट है, तो BSBD अकाउंट खोलने के 30 दिनों के भीतर पुराने सेविंग्स अकाउंट को बंद करना होगा.

किन सेवाओं के लिए नहीं देना पड़ता शुल्क?

BSBD अकाउंट के साथ मिलने वाला बेसिक RuPay डेबिट कार्ड मुफ्त होता है और इस पर वार्षिक मेंटेनेंस चार्ज नहीं लिया जाता. NEFT और RTGS जैसे इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से खाते में पैसा आने पर भी शुल्क नहीं लिया जाता.

इसके अलावा केंद्र या राज्य सरकार के चेक जमा करने या कलेक्ट करने की सुविधा भी मुफ्त है. लंबे समय से निष्क्रिय खाते को दोबारा सक्रिय कराने पर भी कोई शुल्क नहीं लिया जाता. हालांकि, खाता बंद करने पर निर्धारित शुल्क लागू हो सकता है.