AU बैंक की नई दरें लागू, जानें FD, RD और सेविंग्स पर कितना मिलेगा रिटर्न

यह बढ़ोतरी खासतौर पर 12 से 36 महीने की FD और 36 महीने तक की RD पर लागू होगी, जो निवेशकों के बीच सबसे लोकप्रिय अवधि मानी जाती है.

रितु राणा by
Published - Thursday, 23 April, 2026
Last Modified:
Thursday, 23 April, 2026
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बेहतर रिटर्न की तलाश कर रहे ग्राहकों के लिए एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक (AU Small Finance Bank) ने बड़ी राहत दी है. बैंक ने सेविंग्स अकाउंट, फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) और रिकरिंग डिपॉजिट (RD) पर ब्याज दरों में बढ़ोतरी की घोषणा की है. नई दरें 23 अप्रैल 2026 से लागू हो गई हैं, जिसके तहत सीनियर सिटिजन्स को 7.75% तक और सामान्य ग्राहकों को 7.25% तक ब्याज मिलेगा.

FD और RD पर ज्यादा रिटर्न

बैंक के नए फैसले के बाद टर्म डिपॉजिट (FD और RD) पर निवेश करने वाले ग्राहकों को बेहतर रिटर्न मिलेगा. सीनियर सिटिजन्स को अधिकतम 7.75% प्रति वर्ष तक ब्याज मिलेगा, जबकि सामान्य ग्राहकों के लिए यह दर 7.25% तक है. यह बढ़ोतरी खासतौर पर 12 से 36 महीने की FD और 36 महीने तक की RD पर लागू होगी, जो निवेशकों के बीच सबसे लोकप्रिय अवधि मानी जाती है.

उदाहरण के तौर पर देखा जाए, तो अगर कोई सामान्य ग्राहक ₹1 लाख की FD एक साल के लिए 7.25% ब्याज पर करता है, तो उसे करीब ₹7,250 का ब्याज मिलेगा और मैच्योरिटी पर कुल रकम लगभग ₹1,07,250 हो जाएगी. वहीं सीनियर सिटिजन को 7.75% की दर से करीब ₹7,750 का ब्याज मिलेगा और मैच्योरिटी अमाउंट लगभग ₹1,07,750 तक पहुंच सकता है. वास्तविक रिटर्न कंपाउंडिंग और अवधि के अनुसार थोड़ा अलग हो सकता है.

वहीं, RD के मामले में, अगर कोई ग्राहक हर महीने ₹5,000 एक साल तक जमा करता है, तो कुल निवेश ₹60,000 होगा. इस पर 7.25% ब्याज दर के हिसाब से लगभग ₹2,300 से ₹2,500 तक ब्याज मिल सकता है और मैच्योरिटी पर कुल रकम करीब ₹62,300 से ₹62,500 के आसपास हो सकती है. सीनियर सिटिजन्स के लिए यह रिटर्न थोड़ा ज्यादा रहेगा.

सेविंग्स अकाउंट भी हुआ आकर्षक

सिर्फ FD और RD ही नहीं, बैंक ने सेविंग्स अकाउंट पर भी ब्याज दर बढ़ा दी है. अब ग्राहकों को सेविंग्स अकाउंट पर अधिकतम 6.75% प्रति वर्ष तक ब्याज मिलेगा. यह ब्याज दैनिक बैलेंस के आधार पर दिया जाता है, जिससे ग्राहकों को बेहतर लिक्विडिटी के साथ रिटर्न भी मिलता है.

उदाहरण के तौर पर, अगर किसी ग्राहक के अकाउंट में औसतन ₹1 लाख का बैलेंस रहता है, तो उसे सालाना करीब ₹6,750 तक का ब्याज मिल सकता है. इससे साफ है कि सेविंग्स अकाउंट अब सिर्फ पैसे रखने का जरिया नहीं, बल्कि बेहतर रिटर्न देने वाला विकल्प भी बनता जा रहा है.

नए और पुराने सभी ग्राहकों को फायदा

बैंक ने स्पष्ट किया है कि ये नई ब्याज दरें सभी ग्राहकों, नए और मौजूदा पर समान रूप से लागू होंगी. ग्राहक इन दरों का लाभ बैंक की शाखाओं और डिजिटल प्लेटफॉर्म दोनों के जरिए उठा सकते हैं.

तीनों निवेश विकल्पों का संतुलन

AU स्मॉल फाइनेंस बैंक के ये तीन प्रमुख डिपॉजिट प्रोडक्ट अलग-अलग जरूरतों को पूरा करते हैं.

1. सेविंग्स अकाउंट: दैनिक जरूरतों के लिए लिक्विडिटी
2. RD: नियमित बचत और फंड बनाने का विकल्प
3. FD: एकमुश्त निवेश पर तय रिटर्न

इन तीनों में बदलाव से ग्राहकों को शॉर्ट टर्म से लेकर लॉन्ग टर्म निवेश तक बेहतर विकल्प मिलेंगे.

ब्याज दरों में यह बढ़ोतरी ऐसे समय पर आई है जब निवेशक सुरक्षित और स्थिर रिटर्न की तलाश में हैं. AU स्मॉल फाइनेंस बैंक का यह कदम सेविंग्स और डिपॉजिट प्रोडक्ट्स को और आकर्षक बनाता है, खासकर सीनियर सिटिजन्स के लिए.
 

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₹15,000 तक बिना OTP ऑटो पेमेंट, डिजिटल पेमेंट नियमों में बड़ा बदलाव

आरबीआई के अनुसार, ई-मैंडेट से जुड़े इन नियमों में बदलाव इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स और कंपनियों से मिले सुझावों के आधार पर किए गए हैं. इसका मकसद डिजिटल पेमेंट को ज्यादा सुरक्षित, सरल और यूजर-फ्रेंडली बनाना है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Wednesday, 22 April, 2026
Last Modified:
Wednesday, 22 April, 2026
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डिजिटल पेमेंट को और आसान और सुरक्षित बनाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने नए नियम लागू किए हैं. अब कार्ड बदलने पर भी ऑटोमैटिक पेमेंट (ई-मैंडेट) बाधित नहीं होगा और छोटे ट्रांजैक्शन के लिए बार-बार OTP डालने की जरूरत भी खत्म हो जाएगी.

आरबीआई के ताजा निर्देशों के मुताबिक, अगर किसी ग्राहक का डेबिट या क्रेडिट कार्ड दोबारा जारी होता है, तो पुराने कार्ड पर एक्टिव ई-मैंडेट अपने आप नए कार्ड पर ट्रांसफर हो जाएगा. इससे ग्राहकों को बार-बार ऑटो-पेमेंट सेट करने की झंझट से राहत मिलेगी.

₹15,000 तक के ऑटो-पेमेंट पर नहीं लगेगा OTP

नए नियमों के तहत हर महीने होने वाले ₹15,000 तक के ऑटोमैटिक पेमेंट के लिए अब OTP या पासवर्ड (AFA) की जरूरत नहीं होगी. इससे ओटीटी सब्सक्रिप्शन, बिजली बिल या अन्य नियमित भुगतान पहले से ज्यादा आसान हो जाएंगे. हालांकि, ₹15,000 से ज्यादा के ट्रांजैक्शन के लिए OTP आधारित वेरिफिकेशन अनिवार्य रहेगा.

कुछ मामलों में बढ़ाई गई लिमिट

आरबीआई ने कुछ जरूरी भुगतान कैटेगरी के लिए इस सीमा को बढ़ाया भी है.

1. इंश्योरेंस प्रीमियम
2. म्यूचुअल फंड की किश्तें
3. क्रेडिट कार्ड बिल पेमेंट

इन मामलों में ₹1 लाख तक के ऑटो-पेमेंट बिना OTP के किए जा सकेंगे, जिससे बड़े वित्तीय भुगतान भी सहज हो पाएंगे.

ग्राहकों से नहीं वसूला जाएगा कोई अतिरिक्त चार्ज

केंद्रीय बैंक ने साफ किया है कि ई-मैंडेट सुविधा देने के बदले ग्राहकों से किसी भी तरह का अतिरिक्त शुल्क या फीस नहीं ली जाएगी. यह कदम डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उठाया गया है.

शिकायत के लिए मजबूत सिस्टम जरूरी

आरबीआई ने बैंकों को निर्देश दिया है कि हर ऑटो-पेमेंट नोटिफिकेशन के साथ ग्राहकों को शिकायत दर्ज करने का पूरा तरीका बताया जाए. साथ ही, शिकायतों के समाधान के लिए एक मजबूत और पारदर्शी सिस्टम विकसित करना भी जरूरी होगा.

आरबीआई के अनुसार, ई-मैंडेट से जुड़े इन नियमों में बदलाव इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स और कंपनियों से मिले सुझावों के आधार पर किए गए हैं. इसका मकसद डिजिटल पेमेंट को ज्यादा सुरक्षित, सरल और यूजर-फ्रेंडली बनाना है.

इन नए नियमों से ग्राहकों को ऑटो-पेमेंट में सुविधा मिलेगी, फेल ट्रांजैक्शन कम होंगे और डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम में भरोसा बढ़ेगा. खासतौर पर सब्सक्रिप्शन और बिल पेमेंट करने वाले यूजर्स को बड़ा फायदा मिलेगा.
 


SBI से AXIS तक पर्सनल लोन की तुलना, जानिए कहां मिल रहा सबसे सस्ता लोन

लोन लेते समय सिर्फ ब्याज दर ही नहीं, बल्कि प्रोसेसिंग फीस भी महत्वपूर्ण होती है. यह अलग-अलग बैंकों में 0.5% से लेकर 5% तक हो सकती है, जो कुल लोन लागत को प्रभावित करती है. 

Last Modified:
Tuesday, 21 April, 2026
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महंगाई के इस दौर में अचानक आने वाले बड़े खर्चों को पूरा करने के लिए पर्सनल लोन लोगों के लिए एक आसान विकल्प बनता जा रहा है. लेकिन सवाल यह है कि आखिर सबसे सस्ता पर्सनल लोन किस बैंक में मिल रहा है और EMI का बोझ कितना पड़ेगा. SBI, HDFC, ICICI और Axis Bank जैसे बड़े बैंकों के बीच ब्याज दरों में फर्क सीधे आपकी जेब पर असर डालता है. ऐसे में सही बैंक चुनना आपके हजारों रुपये बचा सकता है. 

पर्सनल लोन लेते समय किन बातों का रखें ध्यान

विशेषज्ञों के अनुसार, पर्सनल लोन की EMI सीधे तौर पर उसकी ब्याज दर पर निर्भर करती है. कम ब्याज दर का मतलब है कम EMI. इसके अलावा अच्छा क्रेडिट स्कोर या सिबिल स्कोर होने पर बैंक बेहतर रेट पर लोन ऑफर करते हैं.

किस बैंक में मिल रहा सबसे सस्ता पर्सनल लोन

HDFC बैंक लगभग 9.99% ब्याज दर पर पर्सनल लोन दे रहा है, जबकि टाटा कैपिटल 10.99% तक चार्ज करता है, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) 10% से 15% के बीच ब्याज दर ऑफर करता है, ICICI बैंक भी करीब 9.99% पर लोन देता है, बैंक ऑफ बड़ौदा की दरें 10.15% से 18% तक जाती हैं, वहीं एक्सिस बैंक सबसे कम करीब 9.6% से लोन ऑफर कर रहा है, कोटक महिंद्रा बैंक लगभग 10.99% तक ब्याज लेता है, बैंक ऑफ इंडिया 10.85% से 16.15% के बीच लोन देता है, केनरा बैंक की दरें 9.70% से 15.15% तक हैं और पंजाब नेशनल बैंक (PNB) 10.25% से 16.80% के बीच पर्सनल लोन उपलब्ध कराता है.

विभिन्न बैंकों की ब्याज दरों की तुलना करने पर पता चलता है कि Axis Bank सबसे कम दर पर पर्सनल लोन दे रहा है. यहां ब्याज दर करीब 9.6% से शुरू होती है. अगर कोई व्यक्ति 5 लाख रुपये का लोन 5 साल के लिए लेता है, तो EMI लगभग ₹10,525 के आसपास बनती है. वहीं 1 लाख रुपये के लोन पर EMI करीब ₹2,105 रहती है.

SBI और ICICI बैंक की ब्याज दरें

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) और ICICI बैंक भी प्रतिस्पर्धी दरों पर पर्सनल लोन ऑफर कर रहे हैं. दोनों बैंकों की ब्याज दरें लगभग 9.99% से शुरू होती हैं, जो ग्राहक की प्रोफाइल और क्रेडिट स्कोर के आधार पर बदल सकती हैं.

प्रोसेसिंग फीस भी बढ़ाती है कुल खर्च

लोन लेते समय सिर्फ ब्याज दर ही नहीं, बल्कि प्रोसेसिंग फीस भी महत्वपूर्ण होती है. यह अलग-अलग बैंकों में 0.5% से लेकर 5% तक हो सकती है, जो कुल लोन लागत को प्रभावित करती है. अगर आप सबसे सस्ता पर्सनल लोन ढूंढ रहे हैं तो केवल ब्याज दर ही नहीं, बल्कि क्रेडिट स्कोर, प्रोसेसिंग फीस और लोन टर्म की तुलना करना जरूरी है. मौजूदा डेटा के अनुसार Axis Bank और कुछ अन्य बैंक अपेक्षाकृत कम दरों पर लोन ऑफर कर रहे हैं.

 


नई ITR गाइडलाइन: अब इनकम टैक्स रिटर्न फॉर्म में देना होगा दो पता और दो मोबाइल नंबर

नए ITR फॉर्म में बदलावों का उद्देश्य टैक्स सिस्टम को अधिक पारदर्शी, सरल और व्यवस्थित बनाना है जिसमें दो पते और दो संपर्क विवरण जैसी नई व्यवस्था के साथ कुछ जटिल रिपोर्टिंग नियमों में राहत दी गई है.

Last Modified:
Tuesday, 14 April, 2026
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इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरने वालों के लिए वित्त वर्ष 2025-26 से जुड़े असेसमेंट ईयर 2026-27 के फॉर्म में सरकार ने अहम बदलाव किए हैं. हाल ही में जारी किए गए अपडेटेड ITR फॉर्म्स में सबसे बड़ा बदलाव व्यक्तिगत जानकारी वाले सेक्शन में देखने को मिला है, जहां अब टैक्सपेयर्स को अधिक विस्तृत संपर्क और पते की जानकारी देनी होगी. इन बदलावों का उद्देश्य टैक्स फाइलिंग प्रक्रिया को अधिक सटीक और सरल बनाना बताया जा रहा है.

ITR फॉर्म में बड़ा बदलाव

नए नियमों के तहत ITR-1 से लेकर ITR-7 तक सभी फॉर्म्स में ‘पर्सनल इंफॉर्मेशन’ सेक्शन को अपडेट किया गया है. अब टैक्सपेयर्स को सिर्फ एक नहीं, बल्कि दो पते देने का विकल्प मिलेगा. पहले फॉर्म में केवल एक पता दर्ज करना होता था, लेकिन अब प्राइमरी (मुख्य) पता अनिवार्य होगा और इसके साथ सेकेंडरी (दूसरा) पता भी दर्ज किया जा सकेगा. यह बदलाव उन लोगों के लिए उपयोगी माना जा रहा है जो नौकरी या व्यवसाय के चलते अलग-अलग स्थानों पर रहते हैं.

प्राइमरी और सेकेंडरी डिटेल जरूरी

फॉर्म में संपर्क जानकारी वाले सेक्शन में भी बड़ा बदलाव किया गया है. अब एक प्राइमरी मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी के साथ-साथ एक सेकेंडरी मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी देने का विकल्प भी मिलेगा. इससे आयकर विभाग को टैक्सपेयर्स से संपर्क करने में अधिक सुविधा मिलेगी और रिकॉर्ड भी अधिक व्यवस्थित रहेगा.

टैक्स प्रतिनिधियों के लिए फॉर्म हुआ आसान

जो लोग किसी अन्य व्यक्ति की ओर से टैक्स रिटर्न दाखिल करते हैं, उन्हें ‘प्रतिनिधि’ कहा जाता है. पहले प्रतिनिधि से कई विस्तृत जानकारियां मांगी जाती थीं, लेकिन नए फॉर्म में प्रक्रिया को सरल कर दिया गया है. अब प्रतिनिधि के लिए केवल नाम, मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी जैसी तीन मुख्य जानकारियां देना पर्याप्त होगा. इस बदलाव से रिटर्न फाइलिंग प्रक्रिया तेज और कम जटिल होने की उम्मीद है.

कैपिटल गेन रिपोर्टिंग में भी राहत

नए ITR फॉर्म में डुअल रिपोर्टिंग (दोहरी जानकारी देने) की व्यवस्था को हटा दिया गया है. पहले कुछ मामलों में अलग-अलग समय और दरों के आधार पर कैपिटल गेन की विस्तृत रिपोर्टिंग करनी होती थी, लेकिन चूंकि पिछले वर्ष 2024-25 में टैक्स स्लैब में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ, इसलिए अब इस जटिल रिपोर्टिंग की आवश्यकता नहीं रही. इससे टैक्स फाइलिंग का ढांचा पहले की तुलना में अधिक सरल हो गया है.

 


हाई-वैल्यू डिजिटल ट्रांसफर पर RBI का बड़ा प्रस्ताव, 1 घंटे की देरी लागू करने की तैयारी

आरबीआई ने 50,000 रुपये से अधिक के हाई-वैल्यू ट्रांजैक्शन पर अतिरिक्त ऑथेंटिकेशन की सिफारिश भी की है. इसमें विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांग व्यक्तियों के लिए “ट्रस्टेड पर्सन” द्वारा पुष्टि की व्यवस्था शामिल हो सकती है.

Last Modified:
Friday, 10 April, 2026
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भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India) ने डिजिटल पेमेंट फ्रॉड पर लगाम कसने के लिए एक बड़ा प्रस्ताव पेश किया है. प्रस्ताव के तहत 10,000 रुपये से अधिक के खाते-से-खाते ट्रांसफर पर एक घंटे की देरी (cooling-off period) लागू करने की बात कही गई है. इसका उद्देश्य तेजी से बढ़ रहे डिजिटल धोखाधड़ी मामलों को कम करना है.

भारतीय रिजर्व बैंक के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में डिजिटल पेमेंट फ्रॉड के मामलों में तेज वृद्धि हुई है. अधिकतर मामले “ऑथराइज़्ड पुश पेमेंट (APP) फ्रॉड” के हैं, जहां उपयोगकर्ताओं को धोखे से खुद ही पैसे ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया जाता है.

1 घंटे का “कूलिंग-ऑफ पीरियड” प्रस्ताव

प्रस्ताव के मुताबिक, 10,000 रुपये से अधिक के ट्रांसफर पर 1 घंटे की देरी होगी. इस दौरान ग्राहक अपने ट्रांजैक्शन को कैंसिल भी कर सकेंगे और बैंक संदिग्ध गतिविधियों की जांच कर सकेंगे. इससे धोखेबाजों की तेजी से पैसे निकालने की रणनीति कमजोर होगी.

50,000 रुपये से ज्यादा ट्रांजैक्शन पर अतिरिक्त सुरक्षा

भारतीय रिजर्व बैंक ने 50,000 रुपये से अधिक के हाई-वैल्यू ट्रांजैक्शन पर अतिरिक्त ऑथेंटिकेशन की भी सिफारिश की है. इसमें विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांग व्यक्तियों के लिए “ट्रस्टेड पर्सन” द्वारा पुष्टि की व्यवस्था शामिल हो सकती है.

म्यूल अकाउंट्स पर सख्ती का प्रस्ताव

डिजिटल फ्रॉड में इस्तेमाल होने वाले “म्यूल अकाउंट्स” को रोकने के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक ने एक और प्रस्ताव रखा है. इसके तहत कुछ खातों में सालाना 25 लाख रुपये तक की क्रेडिट लिमिट तय की जा सकती है, जब तक कि अतिरिक्त जांच पूरी न हो जाए.

यूजर कंट्रोल और “किल स्विच” की सुविधा

भारतीय रिजर्व बैंक ने सुझाव दिया है कि ग्राहकों को अपने डिजिटल ट्रांजैक्शन पर ज्यादा नियंत्रण दिया जाए. इसमें ट्रांजैक्शन लिमिट सेट करने और ऑन/ऑफ करने की सुविधा शामिल होगी. साथ ही, “किल स्विच” फीचर भी प्रस्तावित है, जिससे किसी भी संदिग्ध स्थिति में तुरंत डिजिटल ट्रांजैक्शन बंद किए जा सकेंगे.

डिजिटल पेमेंट ग्रोथ के साथ बढ़ते खतरे

पिछले एक दशक में डिजिटल पेमेंट ट्रांजैक्शन में 38 गुना वृद्धि हुई है. लेकिन इसके साथ ही फ्रॉड के मामले भी तेजी से बढ़े हैं. राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल के अनुसार, 2021 में 2.6 लाख मामलों में 551 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था, जबकि 2025 में यह बढ़कर 28 लाख मामलों में 22,931 करोड़ रुपये तक पहुंच गया.

सोशल इंजीनियरिंग फ्रॉड बड़ी चुनौती

भारतीय रिज़र्व बैंक ने कहा है कि अब अधिकतर फ्रॉड सिस्टम हैकिंग से नहीं बल्कि सोशल इंजीनियरिंग, फर्जी पहचान, दबाव और डीपफेक जैसे तरीकों से किए जा रहे हैं. यह डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम के लिए एक नई चुनौती बन चुका है.

फायदे और चुनौतियां

इन प्रस्तावों से जहां उपभोक्ताओं की सुरक्षा बढ़ने की उम्मीद है, वहीं ट्रांजैक्शन में देरी और बैंकों पर बढ़ते अनुपालन बोझ जैसी चुनौतियां भी सामने आ सकती हैं. भारतीय रिज़र्व बैंक ने इस पर 8 मई तक हितधारकों से सुझाव मांगे हैं, जिसके बाद ड्राफ्ट गाइडलाइंस जारी की जाएंगी.

 


कोटक का नया मल्टी-एसेट फंड लॉन्च, इक्विटी-डेट-कमोडिटी में निवेश का मौका

इस स्कीम का सब्सक्रिप्शन 8 अप्रैल 2026 को खुल चुका है और यह 22 अप्रैल 2026 तक निवेश के लिए उपलब्ध रहेगा.

Last Modified:
Friday, 10 April, 2026
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कोटक महिंद्रा एसेट मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड (KMAMC) ने ‘Kotak Multi Asset Active FOF’ लॉन्च करने की घोषणा की है. यह एक ओपन-एंडेड फंड ऑफ फंड स्कीम है, जो इक्विटी-ओरिएंटेड, डेट-ओरिएंटेड और कमोडिटी-आधारित स्कीम्स में निवेश करेगी. इस स्कीम का सब्सक्रिप्शन 8 अप्रैल 2026 को खुल चुका है और यह 22 अप्रैल 2026 तक निवेश के लिए उपलब्ध रहेगा.

रिस्क-एडजस्टेड रिटर्न पर रहेगा फोकस

कोटक मल्टी एसेट एक्टिव FOF का उद्देश्य विभिन्न एसेट क्लास में निवेश के जरिए जोखिम-समायोजित (risk-adjusted) रिटर्न को बेहतर बनाना है. यह फंड सक्रिय रूप से प्रबंधित इक्विटी, डेट और कमोडिटी स्कीम्स में निवेश करेगा.

निवेशकों के लिए आसान मल्टी-एसेट समाधान

कोटक महिंद्रा एसेट मैनेजमेंट कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर निलेश शाह ने कहा कि मल्टी-एसेट पोर्टफोलियो को खुद मैनेज करना आसान लगता है, लेकिन असल में यह जटिल होता है. इसमें कई स्कीम्स पर नजर रखनी पड़ती है, रिबैलेंसिंग करनी होती है और हर बदलाव पर टैक्स का असर भी पड़ता है.

उन्होंने कहा कि यह नया फंड निवेशकों को एक ही फंड स्ट्रक्चर के तहत एसेट एलोकेशन, रिबैलेंसिंग और स्कीम चयन की सुविधा देगा, जिससे इक्विटी, डेट और कमोडिटी में डायवर्सिफिकेशन आसान होगा और टैक्स का बोझ भी कम होगा.

सक्रिय रणनीति के साथ स्थिरता और ग्रोथ का संतुलन

फंड मैनेजर देवेंद्र सिंगल ने कहा कि बाजार स्वभाव से चक्रीय (cyclical) होते हैं और कोई भी एक एसेट क्लास हमेशा बेहतर प्रदर्शन नहीं करता. यह फंड एक्टिव एलोकेशन स्ट्रेटजी अपनाएगा, जिसका उद्देश्य लॉन्ग टर्म ग्रोथ और स्थिरता के बीच संतुलन बनाना है. उन्होंने कहा कि डायवर्सिफिकेशन और अनुशासित रिबैलेंसिंग के जरिए यह फंड निवेशकों को बाजार की अस्थिरता से निपटने और लंबे समय तक निवेशित रहने में मदद करेगा.

निवेश की शर्तें और विवरण

इस स्कीम में न्यूनतम निवेश राशि 1,000 रुपये रखी गई है और इसके बाद किसी भी राशि का निवेश किया जा सकता है. अधिक जानकारी के लिए निवेशक कोटक म्यूचुअल फंड की आधिकारिक वेबसाइट पर जा सकते हैं.

कंपनी ने स्पष्ट किया है कि निवेशकों को किसी भी संदेह की स्थिति में अपने वित्तीय सलाहकार और टैक्स एक्सपर्ट से परामर्श लेना चाहिए. यह भी बताया गया है कि म्यूचुअल फंड निवेश बाजार जोखिमों के अधीन होते हैं.

(डिस्क्लेमर: म्युचुअल फंड्स बाजार निवेश जोखिमों के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)


बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद इक्विटी म्यूचुअल फंड में बढ़ा निवेश, फरवरी में 8% उछाल

फरवरी महीने में म्यूचुअल फंड की 11 इक्विटी कैटेगरी में फ्लेक्सी-कैप फंड सबसे ज्यादा निवेश आकर्षित करने में सफल रहे. इस कैटेगरी में कुल 6,924 करोड़ रुपये का इनफ्लो दर्ज किया गया.

Last Modified:
Thursday, 12 March, 2026
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शेयर बाजार में जारी उतार-चढ़ाव के बावजूद म्यूचुअल फंड उद्योग में निवेशकों का भरोसा फिर से मजबूत होता दिखाई दे रहा है. फरवरी 2026 के दौरान इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश बढ़कर 25,977 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो पिछले महीने के मुकाबले करीब 8% अधिक है. हालांकि सालाना आधार पर देखें तो यह आंकड़ा अभी भी पिछले वर्ष फरवरी के स्तर से कम है. फरवरी 2025 में इक्विटी म्यूचुअल फंड में कुल 29,303 करोड़ रुपये का निवेश दर्ज किया गया था.

जनवरी की गिरावट के बाद आई तेजी

एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक फरवरी में इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश में सुधार देखा गया. इससे एक महीने पहले जनवरी 2026 में इनफ्लो में लगभग 24% की गिरावट आई थी और कुल निवेश 24,028 करोड़ रुपये पर सिमट गया था. वहीं, दिसंबर 2025 में इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश 28,054 करोड़ रुपये रहा था. ऐसे में फरवरी का आंकड़ा निवेशकों की वापसी का संकेत देता है.

फ्लेक्सी-कैप फंड निवेशकों की पहली पसंद

फरवरी महीने में म्यूचुअल फंड की 11 इक्विटी कैटेगरी में फ्लेक्सी-कैप फंड सबसे ज्यादा निवेश आकर्षित करने में सफल रहे. इस कैटेगरी में कुल 6,924 करोड़ रुपये का इनफ्लो दर्ज किया गया. इसके अलावा मिडकैप और स्मॉलकैप फंड में भी निवेशकों की दिलचस्पी बनी रही. मिडकैप फंड में 4,002 करोड़ रुपये और स्मॉलकैप फंड में 3,881 करोड़ रुपये का निवेश आया.

सेक्टोरल और थीमेटिक फंड में जोरदार उछाल

फरवरी के दौरान सेक्टोरल और थीमेटिक फंड में निवेश में जबरदस्त उछाल देखने को मिला. मासिक आधार पर इन फंड्स में इनफ्लो करीब 187% बढ़कर 2,987 करोड़ रुपये तक पहुंच गया. हालांकि फ्लेक्सी-कैप फंड में निवेश में हल्की गिरावट भी दर्ज की गई. जनवरी 2026 में जहां इस कैटेगरी में 7,672 करोड़ रुपये का निवेश हुआ था, वहीं फरवरी में यह घटकर 6,924 करोड़ रुपये रह गया.

लार्ज, मिड और स्मॉल-कैप फंड में भी बढ़ा निवेश

इक्विटी फंड की प्रमुख कैटेगरी में भी फरवरी के दौरान निवेश में बढ़ोतरी देखी गई. लार्ज-कैप फंड में निवेश लगभग 5% बढ़ा, जबकि मिडकैप फंड में 26% और स्मॉलकैप फंड में करीब 32% की वृद्धि दर्ज की गई. इसके विपरीत कुछ कैटेगरी में गिरावट भी देखने को मिली. डिविडेंड यील्ड फंड में निवेश 56% घट गया, जबकि फोकस्ड फंड में लगभग 42% की गिरावट दर्ज की गई. वहीं वैल्यू और कॉन्ट्रा फंड में निवेश 27% घटकर 727 करोड़ रुपये रह गया.

डेट फंड में लगातार दूसरा महीना पॉजिटिव इनफ्लो

फरवरी 2026 में डेट म्यूचुअल फंड में भी लगातार दूसरे महीने निवेश सकारात्मक रहा. हालांकि मासिक आधार पर इसमें 44% की गिरावट दर्ज की गई और कुल इनफ्लो घटकर 42,106 करोड़ रुपये रह गया. जनवरी में यह आंकड़ा 74,827 करोड़ रुपये था. डेट फंड की 16 सब-कैटेगरी में लिक्विड फंड ने सबसे अधिक निवेश आकर्षित किया, जहां 59,077 करोड़ रुपये का इनफ्लो दर्ज किया गया. इसके बाद मनी मार्केट फंड में 6,266 करोड़ रुपये का निवेश आया. ओवरनाइट फंड में 14,006 करोड़ रुपये का इनफ्लो रहा, जबकि अल्ट्रा शॉर्ट ड्यूरेशन फंड में 4,373 करोड़ रुपये का आउटफ्लो दर्ज किया गया.

निवेशकों का भरोसा फिर मजबूत

विशेषज्ञों का मानना है कि शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद निवेशक दीर्घकालिक निवेश के रूप में म्यूचुअल फंड को प्राथमिकता दे रहे हैं. खासकर इक्विटी फंड की अलग-अलग कैटेगरी में लगातार निवेश यह संकेत देता है कि निवेशकों का भरोसा अभी भी बाजार की दीर्घकालिक संभावनाओं पर कायम है.
 


Swiggy-HDFC ने लॉन्च किए नए क्रेडिट कार्ड: फूड, ग्रॉसरी और ट्रैवल पर मिलेगा भारी कैशबैक और रिवॉर्ड्स

इन कार्ड्स को लॉन्च करने का उद्देश्य ग्राहकों को फूड डिलीवरी, ग्रॉसरी, ऑनलाइन शॉपिंग, ट्रैवल और एंटरटेनमेंट पर अतिरिक्त कैशबैक और डिस्काउंट देना है.

Last Modified:
Monday, 09 March, 2026
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ऑनलाइन फूड डिलीवरी और क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म स्विगी (Swiggy) ने एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank) के साथ मिलकर दो नए को-ब्रांडेड क्रेडिट कार्ड लॉन्च किए हैं. Swiggy BLCK और Swiggy Ornge कार्ड्स का उद्देश्य ग्राहकों को फूड डिलीवरी, ग्रॉसरी, ऑनलाइन शॉपिंग, ट्रैवल और एंटरटेनमेंट पर अतिरिक्त कैशबैक और डिस्काउंट देना है. कंपनियों का दावा है कि नियमित खर्च करने वाले ग्राहक इन कार्ड्स के जरिए सालभर में करीब 48,000 रुपये तक बचत कर सकते हैं.

दो नए कार्ड वेरिएंट्स
नई श्रृंखला में Swiggy BLCK HDFC Bank Credit Card और Swiggy Ornge HDFC Bank Credit Card शामिल हैं. BLCK कार्ड हाई स्पेंडिंग यूजर्स के लिए है, जबकि Ornge कार्ड रोजमर्रा के खर्च करने वाले ग्राहकों के लिए बनाया गया है. दोनों कार्ड्स का उद्देश्य डिजिटल खर्च करने वाले ग्राहकों को अधिक रिवॉर्ड और कैशबैक देना है. Swiggy BLCK और Ornge कार्ड्स को चरणबद्ध तरीके से जारी किया जाएगा. इच्छुक ग्राहक Swiggy ऐप या HDFC Bank के डिजिटल प्लेटफॉर्म से आवेदन कर सकते हैं. 

Swiggy BLCK: हाई स्पेंडिंग यूजर्स के लिए
BLCK कार्ड खास तौर पर उन ग्राहकों के लिए है जो फूड डिलीवरी, ट्रैवल और ऑनलाइन शॉपिंग पर अधिक खर्च करते हैं. इस कार्ड के तहत Swiggy पर किए गए खर्च पर 10 प्रतिशत तक कैशबैक मिलेगा, जबकि एंटरटेनमेंट, ट्रैवल और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर अधिकतम 5 प्रतिशत तक का कैशबैक दिया जाएगा. इसके अलावा, सभी अन्य ट्रांजैक्शन पर 1 प्रतिशत कैशबैक मिलेगा और ग्राहकों को तीन महीने की complimentary Swiggy One BLCK मेंबरशिप भी प्राप्त होगी. यह कार्ड उन यूजर्स के लिए फायदेमंद है जो नियमित रूप से Swiggy ऐप के माध्यम से ऑर्डर करते हैं और लाइफस्टाइल कैटेगरी में अधिक खर्च करते हैं.

Swiggy Ornge: नियमित खर्च करने वालों के लिए
Ornge कार्ड रोजमर्रा के खर्च करने वाले ग्राहकों के लिए डिजाइन किया गया है. इस कार्ड के जरिए Swiggy और अन्य रोजमर्रा की ऑनलाइन कैटेगरी में 5 प्रतिशत तक कैशबैक मिलेगा, जबकि सभी अन्य ट्रांजैक्शन पर 1 प्रतिशत कैशबैक लागू होगा. इसके साथ ही कार्डधारकों को 12 महीने की Swiggy One मेंबरशिप का लाभ भी मिलेगा. यह कार्ड उन ग्राहकों के लिए उपयोगी है जो फूड डिलीवरी और ग्रॉसरी ऑर्डर के साथ-साथ सामान्य ऑनलाइन खरीदारी भी करते हैं.

पार्टनर प्लेटफॉर्म्स पर अतिरिक्त लाभ
दोनों कार्ड्स में Swiggy के अलावा कई पार्टनर प्लेटफॉर्म्स पर भी 5 प्रतिशत तक कैशबैक का लाभ मिलेगा. इसमें Amazon, Flipkart, Myntra, Nykaa और Cleartrip जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म शामिल हैं, जिससे ग्राहकों को एंटरटेनमेंट, ट्रैवल बुकिंग और ई-कॉमर्स सेवाओं पर खर्च करते समय अतिरिक्त फायदा मिल सकता है.

यात्रा और शॉपिंग पर भी खास ऑफर हैं. Cleartrip पर होटल बुकिंग करने पर ग्राहकों को सीधे 19 प्रतिशत की छूट मिलेगी और 5 प्रतिशत अतिरिक्त कैशबैक का लाभ मिलेगा. फ्लाइट टिकट बुकिंग पर 6 प्रतिशत का फ्लैट डिस्काउंट और 5 प्रतिशत कैशबैक दिया जाएगा. Nykaa ऐप पर ब्यूटी और पर्सनल केयर प्रोडक्ट्स खरीदने पर 5 प्रतिशत फ्लैट डिस्काउंट और अतिरिक्त 5 प्रतिशत कैशबैक मिलेगा. इस तरह, कार्डधारक फूड ऑर्डरिंग से लेकर शॉपिंग और ट्रैवल तक कई कैटेगरी में फायदा उठा सकते हैं.

डिजिटल खर्च को बढ़ावा देने की रणनीति
Swiggy और HDFC Bank का उद्देश्य ग्राहकों को फूड ऑर्डरिंग से आगे बढ़कर शॉपिंग, ट्रैवल और अन्य लाइफस्टाइल खर्चों पर अधिक फायदे देना है. कंपनियों का मानना है कि भारत में तेजी से बढ़ती डिजिटल खरीदारी और ऑनलाइन सेवाओं के ट्रेंड को देखते हुए, ऐसे कार्ड्स ग्राहकों को बेहतर मूल्य और रिवॉर्ड प्रदान कर सकते हैं.

पुराने कार्डधारकों को भी लाभ
Swiggy और HDFC Bank ने बताया कि 2023 में लॉन्च किए गए Swiggy HDFC Bank Credit Card के मौजूदा कार्डधारकों को भी Swiggy इकोसिस्टम और पार्टनर मर्चेंट्स पर कैशबैक का लाभ मिलता रहेगा. कंपनियों के अनुसार नए BLCK और Ornge कार्ड उपभोक्ताओं की लाइफस्टाइल खर्चों को ध्यान में रखकर तैयार किए गए हैं. HDFC Bank की क्रेडिट और डेबिट कार्ड पोर्टफोलियो प्रमुख Vidya Pradeep ने कहा कि दो अलग-अलग वेरिएंट पेश करने का मकसद ग्राहकों को लचीलापन और उच्च खर्च वाली श्रेणियों में बेहतर रिवॉर्ड देना है.

 


SEBI का नया नियम: इक्विटी म्यूचुअल फंड अब गोल्ड और सिल्वर में भी लगा सकेंगे पैसा

नए नियम के तहत अब एक्टिवली मैनेज्ड इक्विटी म्यूचुअल फंड अपने पोर्टफोलियो का एक हिस्सा सोना और चांदी जैसी कीमती धातुओं में भी निवेश कर सकेंगे.

Last Modified:
Monday, 09 March, 2026
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भारतीय शेयर बाजार के नियामक भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री से जुड़ा एक बड़ा बदलाव किया है. नए नियम के तहत अब एक्टिवली मैनेज्ड इक्विटी म्यूचुअल फंड अपने पोर्टफोलियो का एक हिस्सा सोना और चांदी जैसी कीमती धातुओं में भी निवेश कर सकेंगे. इस कदम का मकसद निवेशकों के पोर्टफोलियो को अधिक सुरक्षित, संतुलित और बाजार के उतार-चढ़ाव से बेहतर तरीके से बचाने लायक बनाना है. हालांकि इसके साथ कुछ संभावित जोखिम भी जुड़े हुए हैं, जिन पर निवेशकों को ध्यान देना जरूरी होगा.

इक्विटी फंड में आएगा नया निवेश विकल्प

अब तक इक्विटी म्यूचुअल फंड मुख्य रूप से कंपनियों के शेयरों में ही निवेश करते थे. निवेश का बचा हुआ हिस्सा आमतौर पर नकद, डेट इंस्ट्रूमेंट्स या अन्य सुरक्षित विकल्पों में रखा जाता था, लेकिन SEBI के संशोधित नियमों के बाद अब एक्टिवली मैनेज्ड इक्विटी फंड अपनी मुख्य इक्विटी निवेश सीमा पूरी करने के बाद शेष पोर्टफोलियो का अधिकतम 35% हिस्सा सोना, चांदी और इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (InvITs) में लगा सकेंगे. इस बदलाव से फंड मैनेजरों को बाजार की परिस्थितियों के अनुसार पोर्टफोलियो को अधिक लचीले ढंग से प्रबंधित करने का अवसर मिलेगा.

बाजार गिरने पर मिल सकता है सुरक्षा कवच

विशेषज्ञों का मानना है कि सोना और चांदी जैसे कमोडिटी एसेट्स शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव के दौरान निवेश को संतुलित करने में मदद करते हैं. जब शेयर बाजार में गिरावट आती है, तब अक्सर सोने की कीमतों में मजबूती देखी जाती है. ऐसे में यदि फंड का एक हिस्सा कीमती धातुओं में निवेशित है, तो यह गिरते बाजार में नुकसान को कुछ हद तक कम करने में सहायक हो सकता है. इसी वजह से इस कदम को निवेश पोर्टफोलियो में “डाइवर्सिफिकेशन” बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है.

क्या बदल जाएगी इक्विटी फंड की पहचान?

कुछ निवेशकों के मन में यह सवाल भी उठ रहा है कि अगर इक्विटी फंड कमोडिटी में निवेश करने लगेंगे तो क्या उनका स्वरूप हाइब्रिड फंड जैसा हो जाएगा. हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसा नहीं होगा. इक्विटी फंड का मूल ढांचा और निवेश का मुख्य फोकस कंपनियों के शेयर ही रहेंगे. सोना आमतौर पर एक “पोर्टफोलियो स्टेबलाइजर” की तरह काम करता है, जबकि चांदी को इलेक्ट्रॉनिक्स और सौर ऊर्जा जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में बढ़ती मांग का फायदा मिलता है. इसलिए इन धातुओं में सीमित निवेश केवल जोखिम संतुलन के लिए किया जाएगा.

‘पोर्टफोलियो ओवरलैप’ का खतरा

जानकारी के अनुसार आजकल कई निवेशक पहले से ही सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड, गोल्ड ETF या फिजिकल गोल्ड में निवेश करते हैं. ऐसी स्थिति में अगर उनके इक्विटी म्यूचुअल फंड भी सोना-चांदी में निवेश करने लगेंगे तो कुल पोर्टफोलियो में इन धातुओं की हिस्सेदारी जरूरत से ज्यादा बढ़ सकती है. विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि निवेशकों को अपने कुल एसेट एलोकेशन की समय-समय पर समीक्षा करनी चाहिए ताकि निवेश का संतुलन बना रहे.

कमोडिटी निवेश में भी मौजूद हैं जोखिम

हालांकि सोना और चांदी पोर्टफोलियो में विविधता लाते हैं, लेकिन इनके अपने जोखिम भी हैं. कमोडिटी की कीमतें वैश्विक आर्थिक स्थिति, मुद्रा विनिमय दर और भू-राजनीतिक घटनाओं से तेजी से प्रभावित होती हैं. उदाहरण के तौर पर जनवरी 2026 में एक ही कारोबारी सत्र में गोल्ड ETF में लगभग 9–10% और सिल्वर ETF में 15–24% तक की गिरावट दर्ज की गई थी. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कमोडिटी में अत्यधिक निवेश किया जाए तो लंबे समय में इक्विटी फंड की संभावित ग्रोथ भी प्रभावित हो सकती है, क्योंकि ऐतिहासिक रूप से लंबी अवधि में इक्विटी का रिटर्न कमोडिटी से बेहतर रहा है.

निवेशकों के लिए क्या है सही रणनीति

विशेषज्ञों का मानना है कि म्यूचुअल फंड्स द्वारा सोना-चांदी में निवेश सीमित और रणनीतिक होगा. फंड मैनेजर इस विकल्प का इस्तेमाल मुख्य रूप से तब करेंगे जब बाजार में अस्थिरता, महंगाई या भू-राजनीतिक तनाव बढ़ेगा. इसलिए निवेशकों को घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन उन्हें अपने पूरे पोर्टफोलियो का संतुलन बनाए रखना चाहिए और जरूरत पड़ने पर वित्तीय सलाहकार से सलाह लेना बेहतर होगा.


EPFO का बड़ा फैसला, 8.25% ब्याज दर बरकरार, ट्रस्टों के लिए एमनेस्टी स्कीम और ऑटो-सेटलमेंट को मंजूरी

EPFO ने निवेश की निगरानी और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए एक नई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) को भी मंजूरी दी है. इससे फंड प्रबंधन और निवेश प्रक्रिया अधिक सुव्यवस्थित और जवाबदेह बनेगी.

Last Modified:
Tuesday, 03 March, 2026
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रिटायरमेंट फंड का प्रबंधन करने वाली संस्था कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए भविष्य निधि (EPF) जमा पर 8.25 प्रतिशत ब्याज दर को बरकरार रखने की सिफारिश की है. इसके साथ ही ट्रस्टों के लिए एक बार की एमनेस्टी स्कीम, बंद पड़े खातों के ऑटो-सेटलमेंट और नई सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को भी मंजूरी दी गई है. ये फैसले सोमवार को केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मांडवीय की अध्यक्षता में हुई सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज (CBT) की बैठक में लिए गए.

लगातार तीसरे साल ब्याज दर स्थिर

EPFO ने लगातार तीसरे साल पीएफ जमा पर ब्याज दर में कोई बदलाव नहीं किया है. वित्त मंत्रालय की मंजूरी के बाद यह दर आधिकारिक रूप से लागू होगी. वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बावजूद संस्था ने स्थिर रिटर्न देने पर जोर दिया है, जिससे करोड़ों खाताधारकों को राहत मिलेगी.

ट्रस्टों के लिए छह महीने की एमनेस्टी स्कीम

बैठक में आयकर नियमों के तहत आने वाले उन ट्रस्टों के लिए एक बार की ‘एमनेस्टी स्कीम’ को मंजूरी दी गई है, जो अभी तक EPF कानून के दायरे में नहीं आए हैं. यह योजना छह महीने के लिए प्रभावी रहेगी. इस स्कीम का उद्देश्य कंपनियों और ट्रस्टों को नियामकीय ढांचे में लाना और कर्मचारियों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है. जो ट्रस्ट अपने कर्मचारियों को कानून के बराबर या उससे बेहतर लाभ दे रहे हैं, उन्हें जुर्माना और ब्याज में राहत दी जाएगी.

नई सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को हरी झंडी

बैठक में Code on Social Security, 2020 के तहत नई सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को भी मंजूरी दी गई. इसके तहत नई EPF योजना, EPS 2026 और EDLI योजना 2026 मौजूदा योजनाओं की जगह लेंगी. इन बदलावों का मकसद पुराने नियमों से नए ढांचे में सहज संक्रमण सुनिश्चित करना और पीएफ, पेंशन व बीमा लाभों के लिए मजबूत कानूनी आधार तैयार करना है.

बंद खातों के लिए ऑटो-सेटलमेंट पायलट

लंबे समय से निष्क्रिय (इनऑपरेटिव) पड़े खातों के निपटारे के लिए बोर्ड ने एक पायलट प्रोजेक्ट को मंजूरी दी है. इसके तहत जिन खातों में 1,000 रुपये या उससे कम की लावारिस राशि है, उनका सेटलमेंट स्वतः शुरू हो जाएगा. अगर यह पायलट सफल रहता है, तो 1,000 रुपये से अधिक राशि वाले खातों के लिए भी ऑटो-सेटलमेंट की सुविधा शुरू की जाएगी. इससे लाखों छोटे खाताधारकों को राहत मिलने की उम्मीद है.

निवेश में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए नई SOP

EPFO ने निवेश की निगरानी और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए एक नई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) को भी मंजूरी दी है. इससे फंड प्रबंधन और निवेश प्रक्रिया अधिक सुव्यवस्थित और जवाबदेह बनेगी.

खाताधारकों के लिए क्या मायने

8.25 प्रतिशत ब्याज दर बरकरार रहने से करोड़ों कर्मचारियों को स्थिर रिटर्न मिलेगा. वहीं, एमनेस्टी स्कीम और ऑटो-सेटलमेंट जैसे कदम प्रणाली को सरल और पारदर्शी बनाने की दिशा में अहम माने जा रहे हैं. नई सामाजिक सुरक्षा योजनाएं लागू होने के बाद कर्मचारियों को पीएफ, पेंशन और बीमा से जुड़े लाभ अधिक स्पष्ट और सुरक्षित कानूनी ढांचे में मिलेंगे.


SBI MF का नया मोमेंटम ETF: मिडकैप के 50 हाई-ग्रोथ शेयरों में निवेश का मौका

फंड हाउस के अनुसार, इस स्कीम का मुख्य उद्देश्य है कि यह अंडरलाइंग इंडेक्स में शामिल स्टॉक्स के कुल रिटर्न के जितना संभव हो सके उतना करीब रिटर्न दे. हालांकि, इसमें ट्रैकिंग एरर हो सकता है और यह गारंटी नहीं दी जा सकती कि स्कीम अपने निवेश लक्ष्य को पूरा करेगी.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Tuesday, 17 February, 2026
Last Modified:
Tuesday, 17 February, 2026
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एसबीआई म्युचुअल फंड (SBI MF) ने निवेशकों के लिए नया मौका पेश किया है. कंपनी का नया ETF, SBI Nifty Midcap150 Momentum 50, मंगलवार (17 फरवरी) से सब्सक्रिप्शन के लिए खुल गया. यह फंड मिडकैप कैटेगरी के हाई मोमेंटम वाले 50 स्टॉक्स में निवेश करने का अवसर देता है. ETF का लक्ष्य है Nifty Midcap 150 Momentum 50 Index को ट्रैक करना और निवेशकों को पारदर्शी और अनुशासित तरीके से मिडकैप सेक्टर में हिस्सेदारी दिलाना. NFO 24 फरवरी 2026 तक खुला रहेगा.

न्यूनतम निवेश और SIP विकल्प

एसबीआई म्युचुअल फंड ने बताया कि NFO के दौरान न्यूनतम आवेदन राशि 5,000 रुपये है. इसके बाद निवेशक 1 रुपये के मल्टीपल में अतिरिक्त निवेश कर सकते हैं. नियमित निवेश के लिए भी विकल्प मौजूद हैं. निवेशक इस ETF में डेली, वीकली, मंथली, क्वार्टरली, हाफ-ईयरली और एनुअल SIP के जरिए पैसा लगा सकते हैं. ETF के फंड मैनेजर विरल छडवा हैं, जो कंपनी की कई पैसिव स्कीम्स का भी प्रबंधन कर रहे हैं.

निवेश का उद्देश्य क्या है?

फंड हाउस के अनुसार, इस स्कीम का मुख्य उद्देश्य है कि यह अंडरलाइंग इंडेक्स में शामिल स्टॉक्स के कुल रिटर्न के जितना संभव हो सके उतना करीब रिटर्न दे. हालांकि, इसमें ट्रैकिंग एरर हो सकता है और यह गारंटी नहीं दी जा सकती कि स्कीम अपने निवेश लक्ष्य को पूरा करेगी.

एसबीआई फंड्स के एमडी एंड सीईओ नंद किशोर कहते हैं, "हम ऐसे पैसिव इन्वेस्टमेंट समाधान तैयार करते हैं जो निवेशकों की बदलती जरूरतों को पूरा करें. SBI Nifty Midcap150 Momentum 50 ETF मिडकैप सेक्टर में मोमेंटम-ड्रिवन अवसरों तक पहुंच देता है और पोर्टफोलियो डाइवर्सिफिकेशन में मदद करता है."

ETF का निवेश पैटर्न

फंड हाउस के मुताबिक, यह ETF अपनी कुल वेल्थ का 95% से 100% तक Nifty Midcap 150 Momentum 50 Index में शामिल स्टॉक्स में निवेश करेगा. शेष 5% तक यह सरकारी सिक्योरिटीज (G-Secs, SDLs, ट्रेजरी बिल), ट्राईपार्टी रेपो और लिक्विड म्यूचुअल फंड की यूनिट्स में रखा जा सकता है.

मोमेंटम स्ट्रैटेजी कैसे काम करती है?

ETF अपने पैरेंट इंडेक्स Nifty Midcap 150 में से 50 हाई मोमेंटम स्टॉक्स में निवेश करता है. इन स्टॉक्स का चयन नॉर्मलाइज्ड मोमेंटम स्कोर के आधार पर होता है, जो प्रत्येक कंपनी के 6 और 12 महीने के प्राइस रिटर्न को वोलैटिलिटी के हिसाब से एडजस्ट करके तय किया जाता है. स्टॉक्स का वेटेज उनके मोमेंटम स्कोर और फ्री-फ्लोट मार्केट कैपिटलाइजेशन के अनुसार निर्धारित किया जाता है.

एसबीआई फंड्स के डिप्टी एमडी और जॉइंट सीईओ डी पी सिंह बताते हैं, "मोमेंटम स्ट्रैटेजी का मकसद ऐसे स्टॉक्स को पहचानना है जिनका प्रदर्शन लगातार बेहतर रहता है. यह ETF निवेशकों को इस स्टाइल की इन्वेस्टिंग तक पहुंच का एक और विकल्प देता है और पोर्टफोलियो डाइवर्सिफिकेशन में मदद करता है."

(डिस्क्लेमर: म्युचुअल फंड बाजार जोखिमों के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)