डील के बाद दोनों कंपनियों का संयुक्त मार्केट शेयर 24 फीसदी से ऊपर चला जाएगा.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
नई दिल्लीः भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) ने मंगलवार को जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड के सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और बांग्ला एंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड जो सोनी का एक हिस्सा है उसके साथ विलय को मंजूरी दे दी. सीसीआई ने दोनों कंपनियों द्वारा पिछले दिसंबर में घोषित सौदे के लिए प्रस्तावित संशोधनों को स्वीकार करते हुए यह मंजूरी दी है. डील के बाद दोनों कंपनियों का संयुक्त मार्केट शेयर 24 फीसदी से ऊपर चला जाएगा.
इन कंपनियों का भी होगा ग्रुप में विलय
सीसीआई के फैसले के अनुसार ZEE में बांग्ला एंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड के साथ ही कल्वर मैक्स एंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड का भी विलय किया जाएगा. ये कंपनी सोनी ग्रुप का हिस्सा है जो मोशन पिक्चर्स और दूसरे कंटेंट के अधिकार प्राप्त करने में लगी हुई है. सीसीआई ने कहा कि कल्वर मैक्स एंटरटेनमेंट के पास भारत और वैश्विक बाजारों में फिल्म, खेल और बच्चों के चैनल हैं. भारत में, यह समूह 700 मिलियन से अधिक दर्शकों तक अपनी रीच बना रहा है.
सीसीआई के नियमों का किया गया पालन
डील के आकार का उल्लेख किए बिना,सीसीआई ने कहा कि $10 बिलियन डील मर्जर और अधिग्रहण और समामेलन (amalgamation) के नियमों का पूरी तरह से पालन करती है. सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया (एसपीएन) का प्रतिनिधित्व करने वाले शार्दुल अमरचंद मंगलदास एंड कंपनी ने एक बयान में कहा कि कंपनी को अब कल्वर मैक्स एंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड के नाम से जाना जाता है.
एसपीएन लॉन्च करेगी नई कंपनी
एसपीएन ने एक बयान में कहा, “हम ZEEL को SPN में विलय करने के लिए CCI की मंजूरी प्राप्त करके प्रसन्न हैं. अब हम नई मर्ज की गई कंपनी को लॉन्च करने के लिए शेष रेग्यूलेटरी अप्रूवल का इंतजार करेंगे. विलय की गई कंपनी भारतीय उपभोक्ताओं के लिए असाधारण वैल्यू पैदा करेगी और अंततः पारंपरिक पे टीवी से डिजिटल फ्यूचर में उपभोक्ता ट्रांजिशन का नेतृत्व करेगी.
ZEE बंद करेगी एक प्रमुख चैनल
मामले की जानकारी रखने वाले एक व्यक्ति ने कहा कि सीसीआई द्वारा स्वीकृत लेनदेन में किए गए संशोधन के अनुसार ZEE को लेनदेन से एक प्रमुख सामान्य मनोरंजन चैनल को बाहर करना शामिल है। व्यक्ति ने कहा, "सीसीआई ने कंपनियों द्वारा प्रस्तावित स्वैच्छिक उपाय को स्वीकार कर लिया है," यह कहते हुए कि इसमें चैनल को बेचा जा सकता है या इसे बंद किया जा सकता है.
यह कदम सीसीआई की इस चिंता को कम करने का प्रयास करता है कि भारत के सबसे बड़े मीडिया विलय से ZEE-सोनी को अभूतपूर्व मूल्य निर्धारण शक्ति मिल सकती है, जिससे मनोरंजन प्रसारण उद्योग में अन्य टीवी चैनलों की संभावनाओं को नुकसान हो सकता है. हालांकि ZEE ने एक बयान में सीसीआई को प्रस्तावित उपायों को साझा नहीं किया, लेकिन उसने कहा: "आज जारी अपने आधिकारिक लेटर में, सीसीआई ने कंपनी द्वारा किए गए आधिकारिक कानूनी और आर्थिक सबमिशन का मूल्यांकन करने के बाद चरण -1 में मंजूरी दे दी है."
सोनी के पास होगी ज्यादा हिस्सेदारी
दिसंबर 2021 में, दोनों कंपनियों ने एक संयुक्त बयान में कहा कि विलय की गई इकाई में जापानी कंपनी की 50.86% हिस्सेदारी होगी, जबकि ZEE एंटरटेनमेंट के प्रमोटरों के पास 3.99% की हिस्सेदारी होगी. ZEE एंटरटेनमेंट के सार्वजनिक शेयरधारक शेष 45.15% के मालिक होंगे.
पुनीत गोयनका होंगे कंपनी के एमडी व सीईओ
सौदे के हिस्से के रूप में, ZEE के संस्थापक सुभाष चंद्रा के बेटे पुनीत गोयनका, संयुक्त कंपनी के एमडी और सीईओ बने रहेंगे. इसके अलावा सोनी, ZEE के प्रमोटरों को एक गैर-प्रतिस्पर्धा शुल्क का भुगतान करेगा, जिसका उपयोग वे एसपीएन में प्राथमिक इक्विटी पूंजी डालने के लिए करेंगे, जिससे वे कंपनी के शेयर खरीद सकेंगे. शेयर अंततः संयुक्त कंपनी के शेयरों के लगभग 2.11% के बराबर होंगे.
कंपनी के अधिकांश संयुक्त निदेशकों को सोनी द्वारा नामित किया जाएगा और इसमें एसपीएन के वर्तमान प्रबंध निदेशक और सीईओ एनपी सिंह शामिल होंगे। वह सोनी पिक्चर्स एंटरटेनमेंट इंक (एसपीई) में सोनी पिक्चर्स इंडिया के अध्यक्ष के रूप में एक व्यापक कार्यकारी पद भी ग्रहण करेंगे. सिंह सोनी पिक्चर्स एंटरटेनमेंट के ग्लोबल टेलीविजन स्टूडियोज के चेयरमैन रवि आहूजा को रिपोर्ट करेंगे.
मीडिया उद्योग के विश्लेषकों ने बताया है कि दोनों फर्म एक दूसरे के पूरक हैं। जहां सोनी के पास खेल और मुख्यधारा के सामान्य मनोरंजन चैनलों (जीईसी) की एक समृद्ध सूची है, वहीं रीजनल में ZEE का दबदबा है उन्होंने कहा कि दोनों के पास बहुत मजबूत फिल्म लाइब्रेरी हैं.
नहीं बंद होगा कोई फ्लैगशिप चैनल
एलारा कैपिटल लिमिटेड के एक विश्लेषक करण तौरानी ने कहा कि दोनों कंपनियों के बीच कोई बड़ा ओवरलैप नहीं है और किसी बड़े फ्लैगशिप टीवी चैनल के बंद होने की उम्मीद नहीं है. “सभी शैलियों में दर्शकों की हिस्सेदारी के मामले में, ZEE और सोनी सभी शैलियों में एक संयुक्त इकाई के रूप में 40% से नीचे हैं, फिल्म शैली को छोड़कर, जो 50% से ऊपर है. इसलिए, किसी भी ब्रॉडकास्टर द्वारा किसी प्रमुख शहरी जीईसी चैनल को बंद करने का कोई भी संकेत एक बड़ा जोखिम है क्योंकि यह उच्च मूल्य निर्धारण के कारण राजस्व का एक उचित हिस्सा चलाता है."
24 फीसदी है दोनों कंपनियों का मार्केट शेयर
बीएआरसी के आंकड़ों के अनुसार, ZEE और सोनी की कुल टीवी दर्शकों की हिस्सेदारी लगभग 24% (वित्त वर्ष 22 के अनुसार) है, जो स्टार (20%) की तुलना में थोड़ा अधिक है. तौरानी ने कहा कि स्टार टीवी ने सामग्री और वितरण पर सही रणनीति दी है.
VIDEO: 5जी के साथ भारत में पहली बार आ रहा है प्राइवेट नेटवर्क। आखिर क्या है ये अपने तरह की नई सुविधा
कोर्ट ने 29 सितंबर 2020 को जारी निषेधाज्ञा आदेश को भी रद्द कर दिया. कोर्ट ने कहा कि प्रतिवादियों को सार्वजनिक रूप से जो नुकसान और अपमान झेलना पड़ा, उसके मद्देनजर वादी कंपनी को ₹10 लाख की लागत प्रतिवादियों को चुकानी होगी.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
दिल्ली की साकेत कोर्ट ने ‘जागरण’ ट्रेडमार्क विवाद मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए जागरण प्रकाशन लिमिटेड द्वारा दायर मुकदमे को पूरी तरह खारिज कर दिया है. अदालत ने न केवल ‘कृषि जागरण’ को इस मामले में राहत दी, बल्कि वादी कंपनी पर ₹10 लाख का जुर्माना भी लगाया है. कोर्ट ने माना कि ‘कृषि जागरण’ वर्ष 1996 से इस नाम का वैध और पूर्व उपयोगकर्ता है.
साकेत कोर्ट ने रद्द किया पुराना निषेधाज्ञा आदेश
दक्षिण जिला, साकेत कोर्ट के जिला न्यायाधीश अरुल वर्मा ने 25 मई 2026 को दिए अपने फैसले में कहा कि वादी द्वारा दायर मुकदमा निराधार था और इससे प्रतिवादियों को अनावश्यक रूप से लंबी कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी.
अदालत ने 29 सितंबर 2020 को जारी निषेधाज्ञा (Injunction) आदेश को भी रद्द कर दिया. कोर्ट ने कहा कि प्रतिवादियों को सार्वजनिक रूप से जो नुकसान और अपमान झेलना पड़ा, उसके मद्देनजर वादी कंपनी को ₹10 लाख की लागत प्रतिवादियों को चुकानी होगी.
‘कृषि जागरण’ ने फैसले को बताया बड़ी नैतिक जीत
‘कृषि जागरण’ के संस्थापक और एडिटर-इन-चीफ एम.सी. डॉमिनिक ने इस फैसले को सिर्फ कानूनी जीत नहीं बल्कि भारतीय कृषि, किसानों और ग्रामीण पत्रकारिता के लिए लगभग तीन दशकों की सेवा की मान्यता बताया. उन्होंने कहा कि यह सफर लंबा और चुनौतीपूर्ण रहा. कई प्रयासों के बावजूद ‘कृषि जागरण’ ने हमेशा सच्चाई, पेशेवर ईमानदारी और किसानों के हितों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता बनाए रखी.
1996 से ‘कृषि जागरण’ नाम का इस्तेमाल
अदालत ने अपने फैसले में माना कि ‘कृषि जागरण’ लंबे समय से इस नाम का उपयोग कर रहा है और वह इस ट्रेडमार्क का पूर्व और वैध उपयोगकर्ता है. इसी आधार पर कोर्ट ने वादी कंपनी के दावों को खारिज कर दिया. यह मामला मीडिया और ट्रेडमार्क अधिकारों से जुड़े क्षेत्र में काफी चर्चित रहा, क्योंकि इसमें दो बड़े मीडिया ब्रांड आमने-सामने थे.
मीडिया और कृषि जगत का जताया आभार
एम.सी. डॉमिनिक ने अपने बयान में मीडिया जगत, उद्योग जगत और कृषि क्षेत्र से जुड़े उन सभी लोगों का आभार जताया, जिन्होंने इस कानूनी लड़ाई के दौरान ‘कृषि जागरण’ का समर्थन किया. उन्होंने कहा कि ‘कृषि जागरण’ आगे भी भारतीय कृषि और ग्रामीण भारत के लिए पहले से अधिक मजबूती और प्रतिबद्धता के साथ काम करता रहेगा.
क्या था पूरा मामला
जागरण प्रकाशन लिमिटेड ने ‘कृषि जागरण’ के खिलाफ ट्रेडमार्क और नाम उपयोग को लेकर अदालत में मामला दायर किया था. इस पर 2020 में कोर्ट ने अंतरिम निषेधाज्ञा जारी की थी. हालांकि, अब अंतिम फैसले में अदालत ने वादी के सभी दावों को खारिज करते हुए प्रतिवादियों के पक्ष में फैसला सुनाया है.
कंपनी लागत नियंत्रण और डिजिटल ऑपरेशन को अधिक प्रभावी बनाने की कोशिश में जुट गई है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
जागरण ग्रुप की डिजिटल शाखा, जागरण न्यू मीडिया, अपने कई कर्मचारियों को आंतरिक पुनर्गठन के तहत मूल कंपनी जागरण प्रकाशन लिमिटेड में स्थानांतरित कर रही है. सूत्रों के अनुसार, इस कदम का उद्देश्य लागत को नियंत्रित करना और नुकसान को कम करना बताया जा रहा है. अब इन कर्मचारियों का वेतन सीधे जागरण प्रकाशन लिमिटेड द्वारा भुगतान किया जाएगा. कुछ कर्मचारियों को पहले ही पेरेंट कंपनी से भुगतान मिलना शुरू हो गया है.
कर्मचारियों और संचालन पर असर
प्रभावित कर्मचारियों को इस बदलाव की जानकारी दे दी गई है और इसे डिजिटल कारोबार को अधिक लागत-कुशल बनाने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है. वहीं, अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि कुछ वरिष्ठ पदों पर कार्यरत कर्मचारियों को कंपनी से बाहर निकलने के लिए कहा गया है.
डिजिटल मीडिया पर बढ़ती प्रतिस्पर्धा
उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि यह पुनर्गठन डिजिटल मीडिया क्षेत्र में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और राजस्व दबाव के बीच हुआ है. कंपनी ने अभी तक इस पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है. इस कदम से जागरण ग्रुप का लक्ष्य अपने डिजिटल व्यवसाय को अधिक स्थिर और प्रभावी बनाना है, जबकि कर्मचारियों की भूमिका और संसाधनों का पुनर्संगठन भी किया जा रहा है.
विशेषज्ञों का मानना है कि यह पुनर्गठन Network18 को तेजी से बदलते मीडिया परिदृश्य में अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने में मदद करेगा.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
मीडिया नेटवर्क Network18 ने अपने शीर्ष प्रबंधन में बड़ा फेरबदल करते हुए अगली पीढ़ी के नेतृत्व को आगे बढ़ाने की दिशा में अहम कदम उठाया है. इस बदलाव की जानकारी कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर राहुल जोशी ने एक आंतरिक नोट के जरिए दी.
नई संरचना के तहत स्मृति मेहरा, एस शिवकुमार और मितुल सांगानी सीधे ग्रुप लीडरशिप को रिपोर्ट करेंगे. ये तीनों अब गणेश अय्यर और अभिनय चौहान के साथ कंपनी के कोर लीडरशिप फ्रेमवर्क का हिस्सा होंगे.
राजस्व और प्रोडक्ट ग्रोथ पर जोर
फेरबदल के तहत, फोर्ब्स के बिजनेस हेड प्रभात चटर्जी और AETN-18 के प्रेसिडेंट अरुण थापर अब स्मृति मेहरा को रिपोर्ट करेंगे. इस बदलाव का उद्देश्य कंपनी के राजस्व में वृद्धि और प्रोडक्ट डेवलपमेंट को मजबूत करना है. वहीं, मल्लिका नाथ हांडा को भी मेहरा की टीम में शामिल किया गया है, जहां वे विशेष प्रोजेक्ट्स और नॉन-लीनियर बिजनेस संभालेंगी.
हिंदी और रीजनल बाजार पर फोकस
दूसरी ओर, ILC के चीफ रेवेन्यू ऑफिसर सिद्धार्थ नेवतिया और मार्केटिंग हेड पंकज सोनी अब मितुल सांगानी को रिपोर्ट करेंगे. उनकी जिम्मेदारी खासकर हिंदी और क्षेत्रीय बाजारों विशेष रूप से टियर-2 और टियर-3 शहरों में दर्शकों की पहुंच बढ़ाने और राजस्व में इजाफा करने पर केंद्रित होगी.
कंटेंट ऑपरेशंस का इंटीग्रेशन
एक अन्य अहम बदलाव में Moneycontrol के ब्रांडेड कंटेंट ऑपरेशंस को News18 स्टूडियो के साथ जोड़ा जा रहा है. इस संयुक्त इकाई को डॉन जर्रार, एस शिवकुमार के साथ मिलकर संभालेंगे.
अंतरराष्ट्रीय विस्तार की जिम्मेदारी
प्रणव बक्शी को भी विस्तारित जिम्मेदारी दी गई है. अब वे सोशल और कनेक्टेड टीवी के साथ-साथ कंपनी के अंतरराष्ट्रीय ऑपरेशंस को भी देखेंगे.
टेक्नोलॉजी और इंफ्रास्ट्रक्चर में बदलाव
टेक्नोलॉजी क्षेत्र में, पुनीत सिंहवी को ब्रॉडकास्ट टेक्नोलॉजी, आईटी और सिक्योरिटी की जिम्मेदारी सौंपी गई है. उनके अधीन राजेश शर्मा, राहुल सिंह और भूपेंद्र भारद्वाज काम करेंगे.
बेहतर तालमेल और कंटेंट रणनीति पर जोर
इसके अलावा, सेल्स स्ट्रैटेजी के प्रमुख दर्शिल पारेख एग्जीक्यूटिव ऑफिस के साथ मिलकर विभिन्न बिजनेस टीमों के बीच बेहतर तालमेल सुनिश्चित करेंगे. वहीं, जीतमित्र मोहंती, संतोष मेनन के साथ मिलकर ऑडियंस इनसाइट्स को प्रभावी कंटेंट रणनीति में बदलने पर काम करेंगे.
भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयारी
विशेषज्ञों का मानना है कि यह पुनर्गठन Network18 को तेजी से बदलते मीडिया परिदृश्य में अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने में मदद करेगा.
Zingabad ने अपनी अनोखी मार्केटिंग रणनीति और म्यूजिक के जरिए दर्शकों से भावनात्मक जुड़ाव बनाकर डिजिटल दुनिया में जोरदार शुरुआत की है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
रोहित सावल ने भारतीय मीडिया परिदृश्य में नई दिशा देते हुए Zingabad नामक डिजिटल-फर्स्ट प्लेटफॉर्म लॉन्च किया है, जिसे खास तौर पर Gen Z दर्शकों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है. ABP नेटवर्क में अपने लंबे करियर के बाद सावल ने इस नए स्टार्टअप की कमान संभाली है.
लॉन्च एंथम बना सुपरहिट
Zingabad की शुरुआत यो यो हनी सिंह के एंथम के साथ हुई, जिसने रिलीज होते ही जबरदस्त लोकप्रियता हासिल की. 14 मार्च को रिलीज हुए इस एंथम को 10 मिलियन से अधिक व्यूज और 200 मिलियन से ज्यादा रीच मिली. यह यूट्यूब पर #1 ट्रेंडिंग वीडियो भी रहा.
सेलिब्रिटी सपोर्ट से मिली मजबूती
इस प्लेटफॉर्म को कई बड़े सितारों का समर्थन मिला है, जिनमें अनुपम खेर, कपिल शर्मा, शहनाज गिल, एमसी स्क्वायर, राघव जुयाल, मोहम्मद शमी, बोनी कपूर, रकुल प्रीत सिंह, सोनम बाजवा, जैकी भगनानी, सोनू सूद, नुसरत भरुचा जैसे नाम शामिल हैं. इसके अलावा एल्विश यादव, अमित भड़ाना, अवनीत कौर और भावेश मंग्लानी जैसे सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स ने भी इसे प्रमोट किया है.
युवाओं को सशक्त बनाने पर फोकस
रोहित सावल का कहना है कि आज के युवा सिर्फ जानकारी नहीं, बल्कि सशक्तिकरण चाहते हैं. इसी सोच के साथ Zingabad को डिजाइन किया गया है, जो कम गुणवत्ता वाले डिजिटल कंटेंट के ट्रेंड को चुनौती देता है. यह प्लेटफॉर्म एंटरटेनमेंट और गहन जानकारी का अनोखा मिश्रण पेश करता है.
कंटेंट और रणनीति में नया प्रयोग
Zingabad “वायरलिटी” के बजाय “वाइटैलिटी” पर जोर देता है. यह प्लेटफॉर्म सामाजिक मुद्दों से लेकर लाइफस्टाइल और टेक्नोलॉजी तक के विषयों को आधुनिक डिजिटल दर्शकों के अनुरूप प्रस्तुत करता है. इसका उद्देश्य सिर्फ कंटेंट देना नहीं, बल्कि एक नया मीडिया स्टैंडर्ड स्थापित करना है.
टीम में बड़े नाम शामिल
Zingabad की ग्रोथ को आगे बढ़ाने के लिए नेहा टंडन को चीफ ग्रोथ ऑफिसर नियुक्त किया गया है. उन्हें ABP डिजिटल, ABP नेटवर्क, द क्विंट और नेटवर्क18 में काम करने का व्यापक अनुभव है और वे प्लेटफॉर्म के विस्तार की जिम्मेदारी संभालेंगी. वहीं, कंटेंट की कमान दर्पण साह को चीफ कंटेंट ऑफिसर के रूप में सौंपी गई है, जो पहले द लल्लनटॉप से जुड़े रहे हैं. वे प्लेटफॉर्म की क्रिएटिव दिशा और कंटेंट रणनीति का नेतृत्व करेंगे.
डिजिटल स्पेस में मजबूत एंट्री
Zingabad ने अपनी अनोखी मार्केटिंग रणनीति और म्यूजिक के जरिए दर्शकों से भावनात्मक जुड़ाव बनाकर डिजिटल दुनिया में जोरदार शुरुआत की है. यह प्लेटफॉर्म युवाओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है और आने वाले समय में एक बड़े डिजिटल मीडिया ब्रांड के रूप में उभरने की क्षमता रखता है.
यह बड़ी सफलता दिखाती है कि ABP न्यूज अपने दर्शकों को भरोसेमंद और रोचक खबरें देने के लिए हमेशा समर्पित है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत का प्रमुख हिंदी न्यूज चैनल ABP न्यूज ने हिंदी न्यूज बाजार में अपनी मजबूत पकड़ बना ली है. मार्च के आखिरी हफ्ते में संभल ग्राउंड रिपोर्ट्स और अपडेट्स की कवरेज के दौरान, यह वीडियो ऑन डिमांड (VOD) के लिए सबसे ज्यादा देखा जाने वाला चैनल बन गया. डेटा बीइंग्स के अनुसार, 13वें हफ्ते के व्यूअरशिप आंकड़ों में ABP न्यूज ने हिंदी न्यूज वीडियो ऑन डिमांड देखने वालों के बीच 21% हिस्सेदारी हासिल की और इस कैटेगरी में टॉप पर रहा.
ABP न्यूज ने हिंदी न्यूज कैटेगरी में कुल 178 मिलियन वीडियो व्यूज़ हासिल किए. इसने अपने नजदीकी प्रतिद्वंद्वियों News18 India और TimesNow Navbharat को 35 मिलियन व्यूज़ के बड़े अंतर से पीछे छोड़ दिया, जिससे डिजिटल न्यूज में इसकी मजबूत स्थिति फिर से साबित हुई. यह बड़ी सफलता दिखाती है कि ABP न्यूज अपने दर्शकों को भरोसेमंद और रोचक खबरें देने के लिए हमेशा समर्पित है. यह चैनल अलग-अलग डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बेहतरीन खबरें पहुंचाने का काम कर रहा है.
ABP नेटवर्क के बारे में
ABP नेटवर्क एक आधुनिक मीडिया और कंटेंट बनाने वाली कंपनी है, जो टीवी और डिजिटल दोनों जगहों पर अपनी विश्वसनीय पहचान रखती है. इसके कई भाषाओं में न्यूज चैनल हैं, जो भारत में 535 मिलियन (53.5 करोड़) लोगों तक पहुंचते हैं. ABP नेटवर्क की एक शाखा ABP स्टूडियोज है, जो ABP क्रिएशंस के अंतर्गत आती है. यह न्यूज के अलावा नए और अनोखे कंटेंट बनाती, प्रोड्यूस करती और बेचती है. ABP नेटवर्क, ABP ग्रुप का हिस्सा है, जिसकी स्थापना करीब 100 साल पहले हुई थी और आज भी यह भारत की बड़ी मीडिया कंपनियों में शामिल है.
रिलायंस और डिज्नी ने एक बाइंडिंग पैक्ट यानी बाध्यकारी समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) और वॉल्ट डिज्नी ने एक बड़ी डील की तरफ कदम बढ़ाया है. वॉल्ट डिज्नी ने अपने भारत में मीडिया ऑपरेशन को मर्ज करने के लिए RIL के साथ एक बाइंडिंग पैक्ट यानी बाध्यकारी समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं. ब्लूमबर्ग के हवाले से आई इस रिपोर्ट के मुताबिक, मर्ज की गई यूनिट में रिलायंस और उसके पार्टनर्स की मीडिया यूनिट की कम से कम 61% प्रतिशत हिस्सेदारी होगी, जबकि शेष हिस्सेदारी डिज्नी के पास रहेगी. हालांकि, इस पैटर्न में बदलाव भी संभव है. डील क्लोज होने तक डिज्नी के अन्य लोकल एसेट्स को मर्जर में कैसे शामिल किया जाता है, उसके आधार पर हिस्सेदारी में बदलाव हो सकता है.
इसी हफ्ते होगी घोषणा
RIL और डिज्नी ने इस समझौते के बारे में अभी कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन माना जा रहा है कि इसी सप्ताह डील की घोषणा हो सकती है. पिछले महीने ZEE-Sony डील टूटने के बाद RIL और डिज्नी की डील को भारतीय मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है. डिज्नी की टाटा समूह ले ब्रॉडकास्ट सर्विस प्रोवाइडर 'टाटा प्ले लिमिटेड' में भी हिस्सेदारी है. रिलायंस इस हिस्सेदारी को भी खरीद सकती है. गौरतलब है कि डिज्नी को भारत में कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन उसकी स्थिति मजबूत है. वहीं, रिलायंस मीडिया एवं एंटरटेनमेंट सेक्टर में मजबूती से पैर जमाने में लगी है. ऐसे में ऐसे में रिलायंस और डिज्नी मीडिया सेक्टर में तहलका मचा सकते हैं.
इतने वैल्यूएशन पर होगी डील
हाल ही में डिज्नी ने अपने भारतीय बिजनेस का 60% हिस्सा वायाकॉम 18 को करीब 33,000 करोड़ रुपए के वैल्यूएशन पर बेचने पर सहमति व्यक्त की थी. वायाकॉम-18 के मालिक रिलायंस के चेयरमैन मुकेश अंबानी हैं. पिछले साल अक्टूबर में रिलायंस द्वारा डिज्नी के इंडिया एसेट्स के वैल्यूएशन की खबर सामने आई थी, जिसमें डिज्नी+हॉटस्टार स्ट्रीमिंग सर्विस और स्टार इंडिया शामिल है. पिछले महीने यह बात सामने आई थी कि डिज्नी स्टार और वायाकॉम-18 आगामी इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) 2024 में एडवरटाइजिंग राइट्स हासिल करने की तैयारी कर रहे हैं.
लगातार बढ़ रहा है बाजार
भारत के वीडियो स्ट्रीमिंग मार्केट की बात करें, तो यह लगातार बड़ा होता जा रहा है. 2021 में यह बाजार 5390 करोड़ रुपए का था. 2022 में बढ़कर 6850 करोड़, 2023 में 7333 करोड़ रुपए का रहा और अगले साल यानि 2025 तक इसके 9120 करोड़ रुपए का होने का अनुमान है. एक्सपर्ट्स मानते हैं कि रिलायंस और डिज्नी की डील दोनों कंपनियों के लिए फायदेमंद रहेगी. डिज्नी को जहां रिलायंस की मजबूत उपस्थिति से फायदा होगा. वहीं, रिलायंस को डिज्नी के रूप में एक बना-बनाया प्लेटफॉर्म मिलेगा. उनका यह भी कहना है कि दोनों कंपनियां मिलकर इंडस्ट्री में तूफान ला सकती हैं.
जी न्यूज के साथ पिछले काफी समय से जुड़े रहे रजनीश आहूजा ने संपादक के पद से इस्तीफा दे दिया है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
जी न्यूज (ZEE News) के संपादक रजनीश आहूजा (Rajnish Ahuja) ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. आहूजा पिछले 2 सालों से यह जिम्मेदारी संभाल रहे थे. विश्वसनीय सूत्रों ने हमारी सहयोगी वेबसाइट e4m से इसकी पुष्टि की है. हालांकि, फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि आहूजा अपनी नई पारी कहां से शुरू करेंगे.
25 सालों का अनुभव
रजनीश आहूजा के पास विभिन्न संपादकीय टीमों में पत्रकारिता का 25 वर्षों से अधिक का अनुभव है. ZEE का हिस्सा बनने से पहले वह ABP न्यूज में वरिष्ठ उपाध्यक्ष - कॉर्पोरेट कम्युनिकेशंस के रूप में कार्यरत थे. इससे पहले, वह इसी कंपनी में डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर के रूप में कंटेंट और संपादकीय टीम का नेतृत्व कर रहे थे.
रजनीश आहूजा ANI रॉयटर्स टीवी के साथ न्यूज ऑपरेशंस के प्रमुख के रूप में भी जुड़े रहे हैं. साथ ही उन्होंने TV टुडे और DD न्यूज में भी अपनी सेवाएं दी हैं.
ZEE और Sony के मर्जर की फाइनल डेट क्या होगी, इस पर अब तक संशय बना हुआ है. ZEE ने डेडलाइन बढ़ाने की मांग की है, लेकिन सोनी अब तक कोई फैसला नहीं ले पाया है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड (ZEEL) के डेडलाइन बढ़ाने के अनुरोध पर सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया (SPNI) ने अब तक कोई फैसला नहीं लिया है. सोनी की तरफ से मंगलवार को बताया गया कि मर्जर की डेडलाइन बढ़ाने के ZEEL के अनुरोध पर अभी तक सहमत नहीं बनी है. बता दें कि 10 अरब डॉलर की नई मीडिया एवं एंटरटेनमेंट कंपनी बनाने के लिए ZEE और Sony मर्जर की मौजूदा समय सीमा 21 दिसंबर है.
Punit Goenka को है उम्मीद
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया ने एक बयान में कहा कि उसने ZEEL के अनुरोध पर अब तक कोई फैसला नही लिया है. हम ZEE से उसके प्रस्ताव और योजनाओं के बारे में जानेंगे कि उसका लक्ष्य शेष महत्वपूर्ण समापन शर्तों को कैसे पूरा करना है. जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड (ZEEL) के अनुरोध और उस पर अब Sony के इस जवाब से ऐसा प्रतीत हो रहा है कि ZEE-Sony मर्जर जल्द पूरा होने की संभावना बेहद कम है. रविवार को Zeel ने Sony से मर्जर प्लान को प्रभावी बनाने के लिए 21 दिसंबर, 2023 की डेडलाइन आगे बढ़ाने का अनुरोध किया था. ZEEL के सीईओ पुनीत गोयनका (Punit Goenka) ने उम्मीद जताई है कि सोनी इस अनुरोध की समीक्षा करेगा.
2021 में बनी थी मर्जर की सहमति
Zee और Sony ने 22 दिसंबर, 2021 को एक मर्जर एग्रीमेंट समझौता किया था, लेकिन तमाम कारणों के चलते ये मर्जर अब तक पूरा नहीं हो सका है. ZEEL ने सोनी, जिसे अब कल्वर मैक्स एंटरटेनमेंट के नाम से जाना जाता है, से डेडलाइन बढ़ाने को कहा है, लेकिन ये स्पष्ट नहीं है कि उसने मर्जर की डेडलाइन कितने समय के लिए बढ़ाने का अनुरोध किया है. दोनों कंपनियों के मर्जर की प्रक्रिया कई वजहों से कई बार अटकी है. इसमें रेगुलेटरी जांच, कानूनी मुकदमे, SEBI की सख्ती आदि प्रमुख रहे हैं. हालांकि, माना जा रहा था कि 21 दिसंबर, 2023 की डेडलाइन को पूरा कर लिया जाएगा, लेकिन अब मामला एक फिर लटक गया है.
नेतृत्व को लेकर है विवाद?
कुछ रिपोर्ट्स में यह दावा भी किया गया है कि Zee और Sony के बीच मर्जर के बाद बनने वाली कंपनी के नेतृत्व को लेकर भी विवाद है. जहां सोनी के पास विलय की गई इकाई पर बोर्ड के अधिकांश सदस्यों को नामांकित करने का अधिकार है. वहीं, अग्रीमेंट में एक शर्त यह भी जोड़ी गई है कि पुनीत गोयनका नई कंपनी के MD और CEO होंगे. चूंकि, गोयनका को सेबी की जांच का सामना करना पड़ रहा है, इसलिए सोनी उन्हें नई कंपनी के एमडी और सीईओ के रूप में नियुक्त करने को लेकर सावधान है.
जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड और सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया के मर्जर की डेडलाइन एक बार फिर बढ़ने वाली है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड (ZEEL) और सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया के मर्जर (Zee-Sony Merger) की डेडलाइन एक बार फिर बढ़ने वाली है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, Zeel ने सोनी से मर्जर प्लान को प्रभावी बनाने के लिए 21 दिसंबर, 2023 की डेडलाइन आगे बढ़ाने के लिए कहा है. ZEEL के सीईओ पुनीत गोयनका (Punit Goenka) ने उम्मीद जताई है कि सोनी इस अनुरोध की समीक्षा करेगा. बता दें कि Zee और Sony ने 22 दिसंबर, 2021 को एक मर्जर एग्रीमेंट समझौता किया था, लेकिन तमाम कारणों के चलते ये मर्जर अब तक पूरा नहीं हो सका है.
कई वजहों से अटकी प्रक्रिया
ZEEL ने सोनी, जिसे अब कल्वर मैक्स एंटरटेनमेंट के नाम से जाना जाता है, से डेडलाइन बढ़ाने को कहा है, लेकिन ये स्पष्ट नहीं है कि उसने मर्जर की डेडलाइन कितने समय के लिए बढ़ाने का अनुरोध किया है. दोनों कंपनियों के मर्जर की प्रक्रिया कई वजहों से कई बार अटकी है. इसमें रेगुलेटरी जांच, कानूनी मुकदमे, SEBI की सख्ती आदि प्रमुख रहे हैं. हालांकि, माना जा रहा था कि 21 दिसंबर, 2023 की डेडलाइन को पूरा कर लिया जाएगा, लेकिन अब मामला एक फिर लटक गया है. अब देखने वाली बात ये होगी कि ZEEL के इस अनुरोध पर सोनी की क्या प्रतिक्रिया होती है.
दोनों कंपनियों में विवाद!
कुछ रिपोर्ट्स में यह दावा भी किया गया है कि Zee और Sony के बीच मर्जर के बाद बनने वाली कंपनी के नेतृत्व को लेकर भी विवाद है. जहां सोनी के पास विलय की गई इकाई पर बोर्ड के अधिकांश सदस्यों को नामांकित करने का अधिकार है. वहीं, अग्रीमेंट में एक शर्त यह भी जोड़ी गई है कि पुनीत गोयनका नई कंपनी के MD और CEO होंगे. चूंकि, गोयनका को सेबी की जांच का सामना करना पड़ रहा है, इसलिए सोनी उन्हें नई कंपनी के एमडी और सीईओ के रूप में नियुक्त करने को लेकर सावधान है.
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NCLAT से मिली है राहत
हाल ही में जी-सोनी मर्जर (Zee-Sony Merger) को लेकर नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) से एक बड़ी खबर आई थी. NCLAT ने इस मर्जर पर रोक लगाने का आदेश जारी करने से इनकार कर दिया है. Axis Finance और IDBI बैंक ने 10 बिलियन डॉलर की दिग्गज मीडिया कंपनी बनाने के इस मर्जर पर रोक के लिए NCLAT का दरवाजा खटखटाया था. याचिका पर सुनवाई के दौरान, आईडीबीआई बैंक की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एन वेंकटरमन ने तर्क दिया कि जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज (ZEEL) ने Essel एंटिटी को दिए गए कर्ज के लिए गारंटी दी थी और यदि मर्जर होता है, तो बैंक कर्ज की वसूली नहीं कर पाएगा. इसलिए मर्जर की प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए.
अधिकार पर ही उठाए सवाल
वहीं ZEEL की तरफ से पेश वकीलों ने कहा था कि मर्जर पर रोक का कोई आधार नहीं है. साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि कानून के अनुसार एक्सिस फाइनेंस और IDBI बैंक इसके खिलाफ याचिका दायर करने का अधिकार ही नहीं रखते. NCLAT ने कहा कि चूंकि ये मर्जर अदालत के आदेशों के अधीन है, लेकिन वे मेरिट के आधार पर मामले की सुनवाई किए बिना इस पर रोक नहीं लगा सकते. इसके साथ ही ट्रिब्यूनल ने मामले की सुनवाई को 8 जनवरी तक के लिए स्थगित कर दिया.
अडानी समूह अब काफी हद तक हिंडनबर्ग के प्रभाव से बाहर निकल आया है. समूह अब अपनी विस्तार योजनाओं पर फोकस कर रहा है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
गौतम अडानी (Gautam Adani) विस्तार की योजनाओं पर वापस लौट चुके हैं. हिंडनबर्ग की रिपोर्ट के चलते उन्हें कुछ समय के लिए इन योजनाओं पर ब्रेक लगाना पड़ा था. अब जब हिंडनबर्ग का प्रभाव लगभग खत्म हो चुका है, अडानी ने 'ब्रेक' से पैर हटाकर 'एक्सीलेटर' पर रख लिया है. अडानी समूह (Adani Group) के चेयरमैन गौतम अडानी इस समय दो सेक्टर्स पर ज्यादा ध्यान केंद्रित कर रहे हैं. पहला सीमेंट और दूसरा मीडिया. कुछ दिन पहले ही उन्होंने सीमेंट सेक्टर की कंपनी सांघी सीमेंट (Sanghi Cement) का अधिग्रहण किया है और अब मीडिया कंपनी IANS को भी अपना बना लिया है.
1986 में हुई थी स्थापना
आईएएनएस यानी Indo-Asian News Service एक प्रतिष्ठित न्यूज एजेंसी है. इसकी स्थापना 1986 में भारतीय अमेरिकी पब्लिशर Gopal Raju ने India Abroad News Service के रूप में की थी, बाद में इसका नाम बदल दिया गया. IANS अंग्रेजी के साथ-साथ हिंदी में भी समाचार उपलब्ध कराती है. इसकी हिंदी सेवा की शुरुआत 1995 में हुई थी. हिंदी सेवा के तहत हर रोज करीब 150 स्टोरी तैयार की जाती हैं. अडानी समूह के इस न्यूज एजेंसी को अपना बनाने की खबर अचानक ही सामने आई है. हालांकि, फिलहाल ये साफ नहीं है कि अडानी ने यह सौदा कितने में किया है.
इन्हें भी बनाया है अपना
उद्योगपतियों का मीडिया से प्यार कोई नया नहीं है. मीडिया अपने साथ तमाम तरह के फायदे लाता है और साथ ही इसमें अपार संभावनाएं भी मौजूद हैं. इसलिए गौतम अडानी भी खुद को इस सेक्टर में मजबूत करना चाहते हैं. IANS के अधिग्रहण के साथ उनके मीडिया पोर्टफोलियो में कंपनियों की संख्या बढ़कर 3 हो गई है. पिछले साल मार्च में अडानी ने क्विंटिलियन बिजनेस मीडिया (Quintillion Business Media) का अधिग्रहण किया था. क्विंटिलियन डिजिटल प्लेटफॉर्म BQ प्राइम का संचालन करता है. इसी तरह, अडानी ग्रुप एनडीटीवी (NDTV) को भी अपना बना चुका है. NDTV के अधिग्रहण को लेकर देश में काफी बवाल मचा था, लेकिन अडानी ने बड़े आराम से डील पूरी कर ली.
और भी हो सकती हैं डील!
एक्सपर्ट्स मानते हैं कि अडानी समूह मीडिया सेक्टर में मजबूती से पैर जमाने की स्थिति में आ गया है. उसके पास NDTV जैसा बड़ा मीडिया हाउस है और IANS जैसी दिग्गज न्यूज़ एजेंसी. उनका यह भी कहना है कि गौतम अडानी आने वाले समय में कुछ और मीडिया कंपनियों को भी अपने पोर्टफोलियो में शामिल कर सकते हैं. अडानी के NDTV के अधिग्रहण से ही यह साफ हो गया था कि उन्होंने इस सेक्टर को लेकर बड़ा प्लान बना रखा है. अब IANS की डील लॉक करके उन्होंने फिर यह साबित कर दिया है. बता दें कि वित्त वर्ष 2022-23 में आईएएनएस का रिवेन्यु 11.86 करोड़ रुपए रहा था.