योगी या कठपुतलीबाज? चित्रा रामकृष्ण घोटाले में असली हिमालयी गुरु कौन है?

चित्रा की हिमालयी धोखाधड़ी कोई आध्यात्मिक गाथा नहीं थी. यह रहस्यवाद की आड़ में सत्ता को छुपाने की एक मास्टरक्लास थी और सीबीआई? वे तो जादूगर हैं, जिन्होंने भारत का सबसे रसीला घोटाला गायब कर दिया, जबकि सत्ता के गलियारे बिना किसी खरोंच के मुस्कुराते रहे.

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Friday, 19 September, 2025
BWHindi

पल्क शाह

ओह, भारत के वित्तीय बाजारों को क्या दिव्य हास्य नाटक परोसा गया है! चित्रा रामकृष्ण, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) की पूर्व रानी, अपने ट्रिलियन डॉलर के एक्सचेंज साम्राज्य के शिखर पर बैठी थीं, दावा करते हुए कि उन्हें एक “हिमालयी योगी” द्वारा मार्गदर्शन मिला था, एक निराकार, अमूर्त स्वामी जो कहीं धुंधले पहाड़ों में तैरते हुए, Outlook ईमेल अकाउंट ([Rigyajursama@outlook.com](mailto:Rigyajursama@outlook.com)) के माध्यम से पवित्र शेयर बाजार सूत्र फूंकते थे. एक ऐसा नाम जो तीन वेदों के नाम पर इतनी श्रद्धा से रखा गया था कि कोई पंडित भी शरमा जाए. लेकिन यह कोई आत्मज्ञान नहीं था. यह एक ऐसा घोटाला था जो किसी मसाला फिल्म को भी मात दे सकता था. और फिर सीबीआई, एक उनींदी भैंस जैसी ऊर्जा के साथ, इस रहस्यमयी गुरु का ठीकरा आनंद सुब्रमणियन के सिर फोड़ देती है, जो एक महिमामंडित सहायक थे जबकि असली “योगी” जो डोर खींच रहा था, उसे चकमा दे देती है. क्यों? क्योंकि दिल्ली और मुंबई की सत्ता की गलियों में कुछ हाथ इतने पवित्र हैं कि उन पर थप्पड़ मारने की हिम्मत किसी में नहीं.

2015 में, एनएसई की पहली महिला सीईओ चित्रा अपनी जिंदगी के सबसे अच्छे दिन जी रही थीं, कथित तौर पर एक निराकार संत के आदेशों का पालन करते हुए जिसे वह “Thee,” “Swami Ji,” और “Your Lordship” कहकर बुलाती थीं. 20 सालों तक, उन्होंने कसम खाई, यह योगी उन्हें दिव्य मार्गदर्शन देता रहा, किसी भौतिक पते की ज़रूरत नहीं, बस एक ईमेल जिसमें वैदिक ऊर्जा की बौछार हो.

लेकिन जब सेबी ने 2022 में उसका इनबॉक्स खोला, तो वह “सिद्ध-पुरुष” भविष्यवक्ता कम और प्लेबॉय ज़्यादा निकला. मार्च 2015 में, जब को-लोकेशन घोटाले ने एनएसई की साख जला दी थी, उसने लिखा: “Keep bags ready. I am planning a travel to Seychelles next month. If you know swimming then we could enjoy a sea bath in Seychelles and rest on the beach.” आध्यात्मिक? जरूर, अगर आपका निर्वाण का विचार कॉकटेल और तमिल भक्ति गानों वाली प्लेलिस्ट हो. योगी ने यहां तक कहा, “Today you are looking Awesome. You must learn different ways to platt your hair which will make your looks interesting and appealing!!… Did you hear that Makara Kundala song I sent?” ऋषिकेश जाओ परे, यह गुरु समुद्र तट की बीट्स और चित्रा की चोटी में रम गया था.

लेकिन सब कुछ इश्क़-मजाक नहीं था. यह योगी एनएसई के अंदरूनी सिस्टम को किसी सर्जन की तरह जानता था और दिल्ली की सत्ता की गलियों से सीधा जुड़ा हुआ था. दिसंबर 2015 के एक ईमेल में, वह एनएसई की सेल्फ-लिस्टिंग के लिए आईपीओ से बचने की साजिश रच रहा था: “Knock on the doors of FM, PMO, Cabinet Secretary, Economic Advisor, and finally the PM… Kanchan is the straw, I’ll be the suction force.” कंचन? वह आनंद सुब्रमणियन था, चित्रा का वफादार प्यादा, जिसे उन्होंने एक 15 लाख रुपये के कंसल्टेंसी जॉब से उठाकर 4 करोड़ रुपये के एनएसई सीओओ पद पर बैठा दिया, सिर्फ योगी के कहने पर सुब्रमणियन, जो दिल्ली की खतरनाक राजनीति में कोई नहीं था, पीएमओ-स्तर की लॉबिंग कर रहा था? यह तो ऐसे है जैसे किसी चायवाले को मैकियावेली की भूमिका दे दी जाए.

CHIT-SOM: वह सुराग जिसे सीबीआई केवल अगरबत्ती का धुआं मानती है

यहीं पर कहानी और गहरी हो जाती है और सीबीआई की रीढ़ और पतली. योगी के ईमेल, जो अंदरूनी जानकारी से भरे थे, एक रहस्यमयी साइन-ऑफ से खत्म होते थे: “All checked CHIT-SOM.” चित्रा, जो पूरी तरह समर्पित थीं, उसकी हर बात को मानती रहीं, लेकिन यह कोई वैदिक मंत्र नहीं था. यह गुरु की पहचान का सीधा संकेत था, एक ऐसा पॉवर प्लेयर जिसके शुरुआती अक्षर इतने गर्म थे कि लुटियंस की लॉन भी जल जाएं. कोई पहाड़ी साधु नहीं, बल्कि एक ऐसा ताकतवर व्यक्ति जो वित्त मंत्रियों को धक्का दे सके, सेबी को मना सके, और पीएमओ में कानाफूसी कर सके. ईमेल चिल्ला रहे थे: यह व्यक्ति किसी गुफा में ध्यान नहीं कर रहा था. वह साउथ ब्लॉक में सिंगल मॉल्ट चुसक रहा था और जैसे कोई सत्ता से भरा कठपुतलीबाज एनएसई की डोर खींच रहा था.

फिर भी, सीबीआई ने सुब्रमणियन को ही इस पूरे मामले का 'योगी' यानी मास्टरमाइंड घोषित कर दिया. उनके खिलाफ जो चार्जशीट 2022 में और फिर "अंतिम" रूप से 17 सितंबर 2025 को दायर की गई, वह एक कमजोर EY फॉरेंसिक रिपोर्ट पर आधारित है। इस रिपोर्ट का दावा है कि Rigyajursama नाम से जुड़ा IP पता सुब्रमणियन से संबंधित था. सेबी, जो कोई शरलॉक होम्स नहीं है, ने भी इस रिपोर्ट को "बेमतलब और असंगत" बताया है.  अपना करियर बाल्मर लॉरी में फाइलें उठाकर शुरू करने वाले सुब्रमणियन, (यह वो कंपनी है जो स्टील बैरल, औद्योगिक ग्रीस, लुब्रिकेंट्स, कॉरपोरेट ट्रैवल और लॉजिस्टिक्स में काम करती है) को अब यह कहकर पेश किया जा रहा है कि वही बोर्ड की नियुक्तियों की साजिश ("अभय हवालदार को चेयरमैन बनाओ, जस्टिस श्रीकृष्णा, गोल्डमैन सैक्स के जरिए सईफ का बैलेंस रखो") और संगठनात्मक धांधलियों ("लाला को आगे लाओ... सीमा प्यारी बच्ची है, उसे चमकाओ") का मास्टरमाइंड था? वास्तव में, वह आदमी तो एनएसई की कैंटीन तक ठीक से नहीं पहुंच सकता. फिर वह कैसे मुंबई की सत्ता की गलियों और दिल्ली की नौकरशाही के जाल में घूम सकता है?लेकिन सीबीआई अपनी बनाई हुई परी-कथा पर अड़ी हुई ह,  शायद इसलिए कि अगर जांच और गहराई से की गई, तो कोई ऐसा नाम सामने आ सकता है जिसे वे अपनी चार्जशीट में डालने की हिम्मत नहीं कर सकते... क्योंकि वो नाम "बहुत पवित्र" है.

को-लोकेशन कवर-अप: एक योगी की शतरंज की बिसात

चलिए फरवरी 2015 पर वापस चलते हैं, जब एक व्हिसलब्लोअर ने को-लोकेशन घोटाले का पर्दाफाश किया, जहां ब्रोकरों को एनएसई के डेटा तक अवैध हाई-स्पीड पहुंच मिल रही थी, जिससे वे करोड़ों कमा रहे थे जबकि छोटे निवेशक धूल फांक रहे थे. योगी ने कोई कसर नहीं छोड़ी, चित्रा को एक नया ऑर्ग चार्ट ईमेल कर दिया: “Suprabhat Lala to be brought up… Kasam to be removed… Seema to SME as head.”

लाला, जो एनएसई के सर्विलांस हेड थे और घोटाले के आरोपी अजय शाह के साले भी, उन्हें बढ़ावा दिया गया. रवि वरनासी, जिसे बाद में सेबी ने को-लोकेशन चूक के लिए दोषी ठहराया, को “Chief BD-New Products” के पद पर शिफ्ट किया गया. बोर्ड की नियुक्तियाँ? योगी ने वो भी तय कर दी: “Saif’s a troublemaker, make him monitor to shut him up.”

यह कोई दैवीय हस्तक्षेप नहीं था; यह तो दोषियों को बचाने के लिए एक क्लीनअप ऑपरेशन था.

जब चित्रा ने एनएसई के वित्तीय अनुमानों को लीक किया, तो एक्सचेंज की डेटा लॉस प्रिवेंशन प्रणाली ने उसे पकड़ लिया. योगी ने शिकायत की, और चित्रा ने उंगली हिलाई, जिससे आईटी हेड नारायण नीलकंठन ने [rigyajursama@outlook.com](mailto:rigyajursama@outlook.com) को अनब्लॉक कर दिया.

वे लैपटॉप जिनमें सबूत थे? अरे डार्लिंग, उन्हें एनएसई द्वारा ई-वेस्ट में रीसायकल कर दिया गया.

सीबीआई की प्रतिक्रिया? एक सामूहिक कंधे उचकाना

न तो कोई IP ट्रेस मिला, न ही “सेशु” (योगी का ट्रैवल फिक्सर) की तलाश हुई, न ही पीएमओ के ईमेल की जांच.

इसके बजाय, उन्होंने 2022 में चित्रा और सुब्रमणियन को पकड़ लिया, जिन्हें 2023 में अदालतों ने जमानत दे दी, यह कहते हुए कि सीबीआई की जांच “अधपकी” थी.

2025 तक, सीबीआई इस केस को बंद करने को तैयार है, मानो योगी गाथा कभी घटी ही नहीं.

छिपे हुए हाथ और सीबीआई की पट्टी

क्या यह कवर-अप की बदबू दिल्ली के स्मॉग से भी ज्यादा घनी है?

योगी के शुरुआती अक्षर एक ऐसे दिग्गज की ओर इशारा करते हैं जो इतना अछूता है कि सीबीआई ने पूरी तरह से गर्दन रेत में करके शुतुरमुर्ग वाला रवैया अपना लिया है, 

यह सुब्रमणियन की बात नहीं है, जो दोपहर के खाने का ऑर्डर भी नहीं संभाल सकता था, एनएसई के भविष्य की तो बात ही छोड़िए.

यह उन छिपे हाथों की बात है, दिल्ली और मुंबई का अभिजात वर्ग, जो मंत्रालयों और उच्च न्यायालयों के बीच ऐसे चलता है जैसे रेशमी हवा, बिना किसी फिंगरप्रिंट के.

“CHITSOM” की तह तक जाना मतलब उन पिंजड़ों को हिलाना है जिन्हें छूने की सीबीआई में हिम्मत नहीं है.

भारत के शेयर बाजार पहले ही विदेशी निवेशकों की बिकवाली और ऊंचे मूल्यांकन की चिंता से डगमगाए हुए हैं. ऐसे में अगर किसी बड़े नाम का खुलासा हो जाए, तो बाज़ार में भरोसे को और भी गहरी चोट लग सकती है. शायद यही वजह है कि मौजूदा सरकार को यह पूरी कहानी बहुत ‘समझदारी’ से समझाई गई.

इसलिए सीबीआई अपनी "मूंछें ऐंठती है", और सुब्रमणियन को ‘योगी’ घोषित करके केस को वहीं खत्म कर देती है.

उधर, असली ‘गुरु’ शायद कहीं किसी आलीशान दफ्तर में बैठकर ‘मकर कुंडला’ का रीमिक्स सुन रहे हैं और उनका पवित्र उपनाम, आज भी बेदाग़ बना हुआ है.

चित्रा की यह 'हिमालयी' धोखाधड़ी कोई आध्यात्मिक कथा नहीं थी; यह सत्ता को रहस्यवाद की ओट में छिपाने का एक बेहतरीन और सुनियोजित अभ्यास था.

और सीबीआई? वे जांचकर्ता नहीं हैं; वे जादूगर हैं, जिन्होंने भारत के सबसे रसीले घोटाले को ऐसे गायब किया मानो वह कभी था ही नहीं, जबकि सत्ता के गलियारे बेधड़क, मुस्कुराते खड़े हैं.

शाबाश सीबीआई, आपने जलती बंदूक को अगरबत्ती के धुएं में बदल डाला.

नमस्ते