जापान ने काशीवाज़ाकी-कारीवा न्यूक्लियर प्लांट की पुनः संचालन की मंजूरी दी

फुकुशिमा आपदा के बाद सबसे बड़े परमाणु संयंत्र के रीस्टार्ट से जापान की ऊर्जा नीति में बड़ा बदलाव

Last Modified:
Friday, 21 November, 2025
BWHindi

जापान ने बड़े पैमाने पर परमाणु ऊर्जा को पुनर्जीवित करने की दिशा में एक कदम बढ़ाया है, जब अधिकारियों ने काशीवाज़ाकी-कारीवा प्लांट को फिर से चालू करने की मंजूरी दे दी. यह संयंत्र दुनिया का सबसे बड़ा परमाणु संयंत्र माना जाता है. यह फैसला जापान की फुकुशिमा आपदा के बाद की ऊर्जा नीति में महत्वपूर्ण बदलाव को दर्शाता है, जो रिएक्टरों को वापस लाने के मामले में सतर्क रही है.

नीगाता प्रिफेक्चर के गवर्नर से मिली मंजूरी ने संयंत्र को पुनः संचालन की तैयारी शुरू करने की राह आसान कर दी है, हालांकि प्लांट को जापान के परमाणु सुरक्षा नियामक द्वारा तय सभी आवश्यकताओं को पूरा करना होगा. सरकार इस रीस्टार्ट को ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने, आयातित ईंधन पर निर्भरता कम करने और बिजली की कीमतों को स्थिर करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा मान रही है. फुकुशिमा शटडाउन के बाद जापान की ऊर्जा संरचना महंगे जीवाश्म ईंधनों पर अत्यधिक निर्भर रही है, जिससे उपभोक्ताओं और उद्योग दोनों पर दबाव बढ़ा है.

काशीवाज़ाकी-कारीवा स्टेशन टोक्यो इलेक्ट्रिक पावर कंपनी द्वारा संचालित है, जो फुकुशिमा दाईइची संयंत्र भी चलाती है. इस संयंत्र में सात रिएक्टर हैं और यह जापान की ऊर्जा प्रणाली का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है. 2011 की आपदा के बाद यह कई वर्षों तक निष्क्रिय रहा, जब जनता का परमाणु ऊर्जा पर विश्वास टूट गया और सुरक्षा नियमों को कड़ा कर दिया गया.

मंजूरी मिलने के बावजूद, तकनीकी जांच और राजनीतिक चर्चाओं के चलते प्रक्रिया में समय लगेगा. यदि इसे सफलतापूर्वक पूरा किया गया, तो यह जापान के परमाणु क्षेत्र में पिछले एक दशक में सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक होगी.

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