देखन में मजाक लगे, घाव करे गंभीर, नितिन गडकरी ने फिर चलाए शब्दों के बाण 

मोदी सरकार के मंत्री नितिन गडकरी मजाक-मजाक में बड़ी बात कह जाते हैं. उनके इस अंदाज को देखकर कवी बिहारी की रचना याद आ जाती है - देखन में छोटे लगै, घाव करें गंभीर.

Last Modified:
Tuesday, 01 October, 2024
BWHindi

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी अपने बयानों को लेकर अक्सर चर्चा में रहते हैं. अब उन्होंने फिर कुछ ऐसा कह दिया है कि चर्चा शुरू हो गई है. गडकरी ने न केवल महाराष्ट्र की 'लड़की बहिन योजना' पर सवाल उठाए हैं, बल्कि सरकार की तुलना विषकन्या से कर दी है. वहीं, विपक्ष ने गडकरी के बयान को आधार बनाकर राज्य की एकनाथ शिंदे सरकार पर निशाना साधा है.   

योजना के लिए फंड चाहिए
एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, मोदी सरकार के मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि  महाराष्ट्र की 'लड़की बहिन योजना' के चलते अन्य सेक्टरों को मिलने वाली सब्सिडी प्रभावित होगी. नागपुर में एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि यह तय नहीं है कि निवेशकों को उनकी सब्सिडी समय पर मिल पाएगी, क्योंकि सरकार को लड़की बहिन योजना के लिए भी फंड देना है. गडकरी ने यह भी कहा कि आंत्रप्रेन्योर्स को निवेश के लिए आगे आना चाहिए, सब कुछ सरकार पर ही नहीं छोड़ा जा सकता. 

मजाक में कही बड़ी बात
इतना ही नहीं, नितिन गडकरी ने सरकार की तुलना 'विषकन्या' से कर डाली. उन्होंने कहा कि यह मायने नहीं रखता कि किस पार्टी की सरकार है, लेकिन सरकार विषकन्या जैसी ही होती है. केंद्रीय मंत्री ने कारोबारियों से मजाकिया अंदाज में अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि सरकार विषकन्या की तरह है, जिसके साथ भी जाती है, उसका नाश कर देती है. लिहाजा इस मामले में मत पड़ो.  

सब्सिडी के भरोसे न रहें
गडकरी ने कारोबारियों को सब्सिडी के भरोसे न रहने की नसीहत देते हुए कहा कि अगर आपको सब्सिडी मिलती है तो उसे लें, लेकिन यह भरोसा नहीं है कि वह कब मिलेगी. अब जबकि लड़की बहिन योजना की शुरुआत हो चुकी है तो सरकार को उसके लिए भी फंड का इस्तेमाल करना है. गौरतलब है कि चुनाव से पहले मतदाताओं को लुभाने के लिए एकनाथ शिंदे सरकार ने राज्य की 21 से 65 साल तक की महिलाओं को प्रति माह 1500 रुपए देने का प्रावधान किया है. यह योजना उन महिलाओं के लिए होगी, जिनके परिवार की सालाना कमाई 2.5 लाख रुपए से कम है. 

सालाना इतना बढ़ेगा बोझ 
वित्त विभाग का अनुमान है कि इस योजना पर सरकार को सालाना 46000 करोड़ रुपए खर्च करने होंगे. कुछ दिन पहले भाजपा विधायक टेकचंद सावरकर ने भी 'लड़की बहिन योजना' को लेकर कहा था कि यह महिलाओं के वोटों का जुगाड़ करने की कोशिश है. अब एक तरह से गडकरी ने भी इस पर सवाल उठा दिए हैं. मालूम हो कि मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह के कार्यकाल में सबसे पहले इस तरह की योजना की शुरुआत हुई थी. आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की योजना सियासी दलों के लिए वोट की जुगाड़ भले ही कर दे, लेकिन राज्य की आर्थिक स्थिति के लिए यह बेहद हानिकारक है.