“मराठा मिलिट्री लैंडस्केप्स ऑफ इंडिया” को यूनेस्को की मान्यता मिलना भारत की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
भारत को अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और वैश्विक पहचान की दिशा में बड़ी सफलता मिली है. “मराठा मिलिट्री लैंडस्केप्स ऑफ इंडिया” को यूनेस्को ने विश्व धरोहर का दर्जा प्रदान किया है. इस सूची में छत्रपति शिवाजी महाराज से जुड़े 12 ऐतिहासिक किलों को शामिल किया गया है, जो मराठा साम्राज्य की सैन्य रणनीति, स्थापत्य कौशल और शासन व्यवस्था के प्रतीक माने जाते हैं.
यह मान्यता पेरिस स्थित यूनेस्को मुख्यालय में भारतीय प्रतिनिधिमंडल के सतत कूटनीतिक और सांस्कृतिक प्रयासों के बाद मिली. यूनेस्को में भारत के राजदूत एच.ई. श्री विशाल शर्मा ने इस पूरी प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. उन्होंने नामांकन, परामर्श और मूल्यांकन के विभिन्न चरणों में भारतीय प्रतिनिधियों को सहयोग और समन्वय प्रदान किया.
महाराष्ट्र के नेता आशीष शेलार ने इस उपलब्धि पर राजदूत विशाल शर्मा के प्रति आभार व्यक्त किया. उन्होंने कहा कि फ्रांस में नामांकन प्रक्रिया के दौरान भारतीय प्रतिनिधिमंडल को मिला उनका सहयोग और आतिथ्य सराहनीय रहा. शेलार के अनुसार, यह सफलता सरकार, धरोहर विशेषज्ञों और कूटनीतिक तंत्र के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है.
यूनेस्को की इस मान्यता से मराठा किलों के रणनीतिक, ऐतिहासिक और स्थापत्य महत्व को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी. ये किले 17वीं शताब्दी में छत्रपति शिवाजी महाराज के नेतृत्व में विकसित सैन्य दृष्टि और प्रशासनिक व्यवस्था को दर्शाते हैं.
अधिकारियों का मानना है कि इस वैश्विक दर्जे से संरक्षण कार्यों को गति मिलेगी, पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और मराठा कालीन विरासत के प्रति अंतरराष्ट्रीय जागरूकता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी.