भारत सही दिशा में बढ़ रहा है, 64% शहरी भारतीय आशावादी: इप्सोस रिपोर्ट

ईरान-इज़रायल संघर्ष से पढ़ाई बाधित, लेकिन मुद्रास्फीति और बेरोज़गारी को लेकर चिंता कम

Last Modified:
Thursday, 03 July, 2025
BWHindi

दुनिया भर में नकारात्मकता के माहौल के बीच, भारत के शहरी नागरिकों में भविष्य को लेकर जबरदस्त आशावाद देखने को मिल रहा है. इप्सोस की 'व्हाट वरीज़ द वर्ल्ड' रिपोर्ट (जून 2025) के अनुसार, 64% शहरी भारतीयों का मानना है कि देश सही दिशा में आगे बढ़ रहा है. यह आंकड़ा भारत को वैश्विक स्तर पर आशावाद के मामले में चौथे स्थान पर रखता है, जहाँ केवल सिंगापुर (81%), इंडोनेशिया (70%) और मलेशिया (67%) ही भारत से आगे हैं.

इप्सोस इंडिया के सीईओ अमित अडारकर ने कहा, “हर देश में नागरिकों की अपनी-अपनी धारणाएं होती हैं, लेकिन भारत में लचीलापन और आशावाद गहराई से महसूस किया जा रहा है। इसका बड़ा कारण है—सरकार द्वारा समय पर और सटीक फैसलों के ज़रिये कई चुनौतियों का समाधान.”

ईरान-इज़रायल तनाव के बीच, भारत सरकार ने 'ऑपरेशन सिंधू' के तहत फंसे भारतीयों को सुरक्षित निकाला, जिसमें बड़ी संख्या में छात्र भी शामिल थे. यह कार्रवाई तेज़ और प्रभावी रही, लेकिन इससे छात्रों की पढ़ाई और भविष्य की योजनाएं प्रभावित हुईं, जिससे शिक्षा अब भारतीयों की शीर्ष तीन चिंताओं में शामिल हो गई है.

अडारकर ने बताया कि “भारतीय रिज़र्व बैंक ने ब्याज दरों में कटौती जैसे कई महत्त्वपूर्ण निर्णय लिए हैं जिससे आर्थिक स्थिरता बनी हुई है. इसके अलावा, सरकार ने ईंधन मूल्य और महंगाई पर कड़ी निगरानी रखी है ताकि आम नागरिकों पर बोझ न बढ़े.” इन सब प्रयासों के चलते, भारतीयों के बीच महंगाई, बेरोज़गारी और आतंकवाद को लेकर चिंता में गिरावट आई है, जो जून 2025 में सार्वजनिक भावनाओं में स्थिरता और विश्वास को दर्शाती है.

इसके विपरीत, रिपोर्ट में बताया गया है कि 30 में से 24 देशों में अधिकांश नागरिकों को लगता है कि उनका देश गलत दिशा में जा रहा है. 63% वैश्विक नागरिकों ने अपने देश के प्रति निराशाजनक दृष्टिकोण जताया है. इसका मुख्य कारण वैश्विक स्तर पर जारी संघर्ष जैसे कि गाज़ा, ईरान और यूक्रेन की स्थितियाँ, आर्थिक मंदी, बढ़ता अपराध, सामाजिक असमानता और गरीबी है.

 

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