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Special Story: आज ही के दिन भारत ने चांद पर रचा था इतिहास, चंद्रयान-1 की सफलता की कहानी

ISRO ने इन चित्रों के जरिये ये बताया कि भारत ने चांद पर पानी की खोज की है, बाद में NASA ने भी इसकी पुष्टि की.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

नई दिल्ली: आज 22 अक्टूबर है, ये दिन इतिहास के पन्नों में भारत के पहले अंतरिक्ष मिशन की कामयाबी के तौर पर दर्ज है. हमारे वैज्ञानिकों की कई सालों की कड़ी मेहनत, अनगिनत असफलताओं और कभी न खत्म होने वाले संघर्षों के बाद 22 अक्टूबर 2008 की वो सुबह भारतीय अंतरिक्ष मिशन के लिये एक नई रौशनी लेकर आई थी.

22 अक्टूर को चंद्रयान-1 का लॉन्च
सुबह का वक्त था, चारों तरफ बारिश और तूफान के थपेड़ों के बीच आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्पेसपोर्ट पर चंद्रयान-1 आसमान की ओर सिर उठाये खड़ा था, ये भारत का पहला मानव रहित चंद्र मिशन था. इस सुबह के लिए वैज्ञानिकों ने न जाने कितनी रातें काली की थीं. घड़ी में सुबह के 6:22 बजते ही पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (PSLV)-XL रॉकेट अंधेरे आसमान को भेदता हुआ निकल गया. ठीक 18 मिनट 20 सेकेंड के बाद रॉकेट के चौथे चरण ने च्रंदयान-1 को 9.25 किलोमीटर प्रति सेकेंड की रफ्तार से आरंभिक कक्षा में स्थापित कर दिया. ये भारत के पहले चंद्र मिशन की कामयाबी थी. श्रीहरिकोटा में बैठे वैज्ञानिक इस पल का 4 साल से इंतजार कर रहे थे, कक्षा में स्थापित होते ही हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा, वैज्ञानिकों ने जीत के संकेत दिखाकर अपनी खुशी जाहिर की. 

''हमारी चांद की यात्री शुरू''
उस समय भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के अध्यक्ष जी माधवन नायर ने लॉन्च के बाद कहा, "चंद्रमा की हमारी यात्रा शुरू हो चुकी है, सब कुछ बिल्कुल ठीक चल रहा है, यह पीएसएलवी का शानदार प्रदर्शन है. अपने लॉन्च के 17 दिनों के बाद व्हीकल सफलतापूर्वक चांद की कक्षा में स्थापित हो गया. इस मिशन को पूरा करने में 400 करोड़ रुपये लगे थे. ये मिशन भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है. रिमोट सेंसिंग लुनार सैटेलाइट, जिसका वजह लॉन्च के समय 1380 किलो था, चंद्र की कक्षा में ये 675 किलो का हो गया, ये अपने साथ हाई रिजोल्यूशन उपकरण लेकर गया था. 

भारत ने खोजा चांद पर पानी
मून इम्पैक्ट प्रोब 14 नवंबर, 2008 को चंद्रयान ऑर्बिटर से अलग हो गया और दक्षिणी ध्रुव से टकराया, जिससे भारत उन देशों के एक बहुत ही चुनिंदा गुट में शामिल हो गया, जिनके झंडे चांद पर हैं. एक क्रेटर के पास सतह से टकराने के बाद, इसने भूमिगत मिट्टी को बाहर निकाल दिया, जिसके बाद चांद पर पानी का परीक्षण किया गया. चंद्रयान-1 ने रिमोट सेंसिंग के जरिए चित्र भेजे. ISRO ने इन चित्रों के जरिये ये बताया कि भारत ने चांद पर पानी की खोज की है, बाद में चंद्रयान मिशन के दौरान जो डेटा भेजे गए थे, उसका अध्ययन करने के बाद अमेरिका की NASA ने भी इसकी पुष्टि की और भारत के दावे को सही माना. इसरो ने दावा किया कि चांद पर पानी समुद्र, झरने, तालाब या बूंदों के रूप में नहीं बल्कि चट्टानों की सतह के भीतर मौजूद है. यह एक बड़ी उपलब्धि थी. 

जब टूट गया चंद्रयान-1 से संपर्क 
चंद्रयान लॉन्च के 9 महीने बाद इसके स्टार सेंसर्स में कुछ तकनीकी दिक्कत आने लगी. ISRO ने बताया की सूर्य के अत्याधिक रेडिएशन की वजह से सेंसर में खराबी आई है. इस मिशन का कार्यकाल 2 साल के लिए निर्धारित किया गया था, लेकिन इस तकनीकी दिक्कत की वजह से अचानक ही चंद्रयान ने सिग्नल भेजना बंद कर दिया, जिसकी वजह से 29 अगस्त 2009 को बीच में ही कक्ष से संपर्क टूट जाने की वजह से इस मिशन को बंद कर दिया गया. ये मिशन 312 दिन तक चला. हालांकि मिशन ने अपने 95 परसेंट लक्ष्य को हासिल कर लिया था. 

 


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