Green Energy में शिफ्ट होने पर जा सकती हैं इतनी नौकरियां?  दुनियाभर में पड़ सकता है असर 

2021 में ग्‍लासगों में आयोजित हुई UN क्‍लाइमेट चर्चा में सभी देशों के बीच ये सहमति बनी थी कि फेज वाइस तरीके से कोल के इस्‍तेमाल को कम किया जाएगा. ये उसी का एक हिस्‍सा है. 

Last Modified:
Tuesday, 10 October, 2023
Coal Worker

ग्‍लोबल वार्मिंग के कारण लगातार बढ़ते तापमान को देखते हुए पूरी दुनिया जीवाश्‍म ईंधन की खपत कम करने को लेकर प्रयास कर रही है. ग्‍लासगो समिट में सभी देशों ने आने वाले सालों में ग्रीन एनर्जी की ओर शिफ्ट होने का जो वचन दिया है उसके कारण एक बड़ी संख्‍या में नौकरी जाने की आशंका पैदा हो रही है. यूनाइटेड स्‍टेट का एक सर्वे बता रहा है कि दुनिया में अभी कोयले को लेकर जितने मजदूर काम कर रहे हैं आने वाले दो दशकों में उसके केवल 10 प्रतिशत से भी कम 250000 कर्मचारियों की जरूरत रह जाएगी. अगर ऐसा हुआ तो बड़ी संख्‍या में नौकरी जा सकती है. 

भारत पर क्‍या पड़ेगा इसका असर?
यूएस बेस्‍ड थिंक टैंक ग्‍लोबल एनर्जी मीटर की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत ने वर्ष 2050 तक जीवाश्‍म ईंधन से ग्रीन एनर्जी पर शिफ्ट होने की बात कही है. मौजूदा समय में कोल इंडिया भारत सरकार की एक ऐसी कंपनी है जिसमें सबसे ज्‍यादा कर्मचारी इसी काम में लगे हुए हैं. इस थिंक टैंक की रिपोर्ट कहती है कि अगर भारत 2050 तक ग्रीन एनर्जी पर जाता है तो इससे 73800 लोगों की नौकरियों पर असर पड़ सकता है. सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में इसके कारण एक मिलियन (10 लाख) से ज्‍यादा लोगों की नौकरी जाने की संभावना है. 

भारत और चीन पर पड़ेगा इसका सबसे बड़ा असर 
ग्रीन एनर्जी की ओर शिफ्ट करने के कारण जाने वाली नौकरियों का सबसे बड़़ा असर भारत और चीन पर पड़ने की आशंका है. इन दोनों देशों की अर्थव्‍यस्‍था में ऐसे क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों की बहुतायत में है. अकेले इन दो देशों में 241900 लोगों की नौकरी जाने की संभावना जताई जा रही है. अंतराष्‍ट्रीय श्रम संगठन ने इसके लिए जस्‍ट ट्रांजिशन जैसा शब्‍द दिया है. 

भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा कोल प्रोडयूसर 
भारत समूची दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा कोयला पैदा करने वाला देश है. कोयले की इन खदान में काम करने वाले लोगों की संख्‍या चीन के शांसी प्रोविंस के बराबर है. अगर भारत के कोल माइन्‍स में काम करने वाले लोगों की संख्‍या पर नजर डालें तो ये आधिकारिक संख्‍या 337400 तक है.  इस क्षेत्र पर हुए कई अध्‍ययन कहते हैं कि एक डायरेक्‍ट कर्मचारी पर चार इनडायरेक्‍ट कर्मचारी काम करता है. रिपोर्ट कहती है कि लगभग 4 लाख से ज्‍यादा कर्मचारी 2035 तक इससे प्रभावित हो जाएंगे. उस अनुसार हर रोज 100 वर्कर प्रभावित हो रहे हैं.