यह वर्ग सबसे कम ट्रेडिंग वेलोसिटी दर्ज करता है, जिसका अर्थ है कि बार-बार खरीद-फरोख्त के बजाय स्थिर और सोच-समझकर लंबी अवधि की इक्विटी होल्डिंग बनाई जा रही है
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
भारत में लंबे समय के निवेशकों का एक नया वर्ग तेजी से उभर रहा है, जिसकी अगुवाई सैलरीड मिलेनियल्स कर रहे हैं. ‘हाउ इंडिया इन्वेस्ट्स 2025’ रिपोर्ट (बैन और ग्रो) के अनुसार मेट्रो और टियर-1 शहरों में रहने वाले सैलरीड मिलेनियल्स अपने पोर्टफोलियो का 64 प्रतिशत हिस्सा म्यूचुअल फंड्स में लगाते हैं, जो किसी भी प्रमुख निवेशक समूह से सबसे अधिक है. इनका झुकाव लंप-सम की बजाय सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) की ओर है, जो प्रोफेशनल मैनेजमेंट और भविष्य के वित्तीय लक्ष्यों पर उनके फोकस को दर्शाता है.
डिजिटल प्लेटफॉर्म पर इनके व्यवहार में भी यह अनुशासन साफ दिखता है. यह वर्ग सबसे कम ट्रेडिंग वेलोसिटी दर्ज करता है, जिसका अर्थ है कि बार-बार खरीद-फरोख्त के बजाय स्थिर और सोच-समझकर लंबी अवधि की इक्विटी होल्डिंग बनाई जा रही है. टियर-2 और छोटे शहरों के सैलरीड मिलेनियल्स भी यही पैटर्न अपना रहे हैं, जो बताता है कि लंबी अवधि का निवेश अब बड़े शहरों से आगे देशभर में फैल रहा है.
इस बदलाव को आगे बढ़ाने वाले कारकों में स्थिर आय, कार्यस्थलों पर औपचारिक वित्त का बढ़ता अनुभव और डिजिटल प्लेटफॉर्म के प्रति बढ़ती सहजता शामिल हैं. जैसे-जैसे भरोसा बढ़ रहा है, निवेशक अपने SIP की मासिक रकम भी बढ़ा रहे हैं. रिपोर्ट के अनुसार पिछले दो वर्षों में निवेशकों के बीच म्यूचुअल फंड की प्राथमिकता 6 प्रतिशत अंक तक बढ़ी है.
अनुशासित पूंजी का यह उभार भारतीय बाजारों की मजबूती को नया आधार दे रहा है. म्यूचुअल फंड होल्डिंग्स का वह हिस्सा, जो 5 वर्ष से अधिक समय तक बना रहता है, दोगुने से अधिक हो चुका है. यह बदलाव शॉर्ट-टर्म से लांग-टर्म वेल्थ क्रिएशन की संरचनात्मक शिफ्ट को दर्शाता है. आने वाले दशक में घरेलू निवेशक भागीदारी दोगुनी होने का अनुमान है, और सैलरीड मिलेनियल्स घरेलू पूंजी निर्माण की रीढ़ बनकर उभर रहे हैं.
जैसे-जैसे भारत आर्थिक रूप से अधिक सुरक्षित भविष्य की ओर बढ़ रहा है, देश की सबसे स्थिर निवेश आदतें अब उसके युवा सैलरीड कमाने वालों से आ रही हैं.