सोने की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव से बढ़ सकता है गोल्ड लोन NBFCs पर दबाव, Ind-Ra की चेतावनी

इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च (Ind-Ra) ने अपनी नई रिपोर्ट में कहा है कि कई ऋणदाता बढ़ती अस्थिरता के दौरान सुरक्षा बफर में हो रही कमी का कम आकलन कर रहे हैं

Last Modified:
Friday, 21 November, 2025
BWHindi

गोल्ड लोन देने वाली नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियां (NBFCs) सोने की कीमतों में तेज़ उतार-चढ़ाव और नए नियामकीय ढांचे के तहत आक्रामक प्रोडक्ट स्ट्रक्चरिंग के कारण बढ़ते दबाव का सामना कर सकती हैं. इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च (Ind-Ra) ने अपनी नई रिपोर्ट में कहा है कि कई ऋणदाता बढ़ती अस्थिरता के दौरान सुरक्षा बफर में हो रही कमी का कम आकलन कर रहे हैं.

Ind-Ra के अनुसार, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के अपडेटेड नियमों और खपत-आधारित ऋण (CL) तथा आय-सृजन ऋण (IGL) के विभाजन ने NBFCs को लोन-टू-वैल्यू (LTV) की गणना में अधिक लचीलापन दिया है. लेकिन इसने जोखिम बढ़ाने वाले व्यवहार को भी प्रोत्साहित किया है, खासकर तब जब सोने की कीमतें लगातार बढ़ रही हों और अस्थिरता तेज़ हो.

इंड-रा के डायरेक्टर (फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस) करण गुप्ता के मुताबिक, कुछ ऋणदाता ऐसे नॉन-बुलेट प्रोडक्ट तैयार कर रहे हैं जिनमें 85 प्रतिशत LTV की पेशकश की जा रही है, और इसमें संचित ब्याज को LTV गणना से बाहर रखा जा रहा है. उन्होंने कहा, “इससे प्रोडक्ट की मार्जिन ऑफ सेफ्टी कम हो जाती है.” गुप्ता के अनुसार, CL को इस तरह स्ट्रक्चर करना कि संचित ब्याज को मैच्योरिटी से सिर्फ एक महीने पहले क्लियर किया जाए, अस्थिरता बढ़ने पर LTV के अचानक उछलने की संभावना बढ़ाता है.

NBFCs आम तौर पर सोने का मूल्यांकन 30-दिन के इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) एवरेज या मौजूदा बाजार मूल्य—जो भी कम हो—के आधार पर करती हैं. यह जोखिम को 4–5 प्रतिशत तक घटा देता है. इसके अलावा, सोने के वजन को अशुद्धियों के लिए डिस्काउंट करना भी एक अतिरिक्त सुरक्षा बफर देता है. लेकिन Ind-Ra का कहना है कि तेज़ अस्थिरता की स्थिति में ये उपाय नए ऋणों के लिए पर्याप्त साबित नहीं हो सकते.

एजेंसी ने कहा कि हालिया ऑरिजिनेशन पर रियल-टाइम निगरानी बेहद ज़रूरी है और संचित ब्याज को LTV गणना में शामिल करना चाहिए, ताकि छिपे हुए जोखिम जमा न हों. यदि गिरवी रखे सोने का मूल्य स्वीकार्य स्तर से नीचे जाता दिखे तो समय पर नीलामी जैसे सुधारात्मक कदम उठाना आवश्यक है.

Ind-Ra ने IGL कैटेगरी को और बड़ा जोखिम बताया है. Rs 2.5 लाख से ऊपर के ऋण IGL श्रेणी में आते हैं और हाल के महीनों में तेजी से बढ़े हैं. सोने की कीमतों में पिछले 24 महीनों में लगभग दोगुनी बढ़ोतरी के चलते कई NBFCs ने अपनी बुक को IGL की ओर मोड़ा है, जिससे उधारकर्ताओं को नियामकीय ढांचे के तहत अधिक LTV का लाभ मिल रहा है. इससे एसेट अंडर मैनेजमेंट तो बढ़ा है, लेकिन कुल टन भार में वृद्धि नहीं दिखी है, जो बताता है कि ग्राहक आधार के बजाय टिकट साइज ही बढ़ रहा है.

Ind-Ra का कहना है कि इस स्थिति में गोल्ड लोन देने वाले संस्थान सोने की कीमतों में तेज़ उतार-चढ़ाव के अधिक जोखिम में आ जाते हैं, जो बड़ी मात्रा में नीलामी और नुकसान की संभावना बढ़ाता है. ऐतिहासिक तौर पर सोने की कीमतों में 15–20 प्रतिशत की अस्थिरता देखी गई है, जब LTV कैप 75 प्रतिशत था. लेकिन अब कई मामलों में LTV 85 प्रतिशत से अधिक है, जिससे सुरक्षा बफर काफी घट गया है और समान उतार-चढ़ाव लौटने पर पोर्टफोलियो तनाव बढ़ने की आशंका है.

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