महाकुंभ 13 जनवरी से शुरू हुआ है और 26 फरवरी तक चल चलेगा. यह महाकुंभ 144 सालों बाद आया है और बेहद खास माना जा रहा है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
महाकुंभ का शुभारंभ हो चुका है, पौष पूर्णिमा पर आज पहला स्नान था. आज लगभग 44 घाटों पर डेढ़ करोड़ से ज्यादा श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाई. भक्तों पर 20 क्विंटल फूलों की वर्षा की गई, महाकुंभ 144 साल में दुर्लभ खगोलीय संयोग में हो रहा है. देश के कोने-कोने से भक्त प्रयागराज आए हैं. भीड़ इतनी है कि कई लोग अपने से बिछड़ गए हैं. विदेशी श्रद्धालु बड़ी तादाद में कुंभ में स्नान करने पहुंचे हैं. प्रशासन के मुताबिक, जर्मनी, ब्राजील, रूस समेत 20 देशों से भक्त पहुंचे हैं. हर घंटे संगम में 2 लाख श्रद्धालु स्नान कर रहे हैं. आज से ही श्रद्धालु 45 दिन का कल्पवास शुरू करेंगे.
संगम पर एंट्री के सभी रास्तों पर भक्तों की भीड़ है, वाहनों की एंट्री बंद है. श्रद्धालु बस और रेलवे स्टेशन से 10-12 किलोमीटर पैदल चलकर संगम पहुंच रहे हैं. 60 हजार जवान सुरक्षा और व्यवस्था संभालने में लगे हैं. पुलिसकर्मी स्पीकर से लाखों की संख्या में आई भीड़ को मैनेज कर रहे हैं. जगह-जगह कमांडो और पैरामिलिट्री फोर्स के जवान भी तैनात हैं.
सबसे पहले महानिर्वाणी अटल करेंगे अमृत स्नान
महाकुम्भ के दौरान कुल छह स्नान होंगे, इनमें से तीन अमृत (शाही) स्नान होंगे। अखाड़े अमृत स्नान करते हैं. पहला अमृत स्नान मकर संक्रांति पर 14 जनवरी, दूसरा मौनी अमावस्या पर 29 जनवरी और तीसरा वसंत पंचमी पर तीन फरवरी को होगा.
इस बार महाकुंभ बेहद खास है, महाकुंभ में 144 साल के बाद समुद्र मंथन के संयोग बन रहे हैं. शनि की कुंभ राशि एवं शुक्र तथा बृहस्पति के राशि परिवर्तन की स्थिति का यह संयोग 144 सालों के बाद बन रहा है. सूर्य, चंद्र और शनि तीनों ग्रह शनि की राशि मकर एवं कुंभ में गोचर कर रहे हैं. यह संयोग देवासुर संग्राम के समय निर्मित हुआ था. असुर गुरु शुक्र उच्च राशि में होकर बृहस्पति की राशि में तथा बृहस्पति शुक्र की राशि में हैं. इसके अलावा श्रवण नक्षत्र सिद्धि योग में सूर्य चंद्र की स्थिति तथा उच्च शुक्र एवं कुंभ राशि के शनि के कारण यह महाकुंभ परम योगकारी होगा.
हर वर्ग में दिखा उत्साह
बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं तड़के से ही संगम स्नान के लिए पहुंचने लगे. आस्था का ऐसा आलम था कि सिर पर गठरी का वजन भी उनके उत्साह को कम नहीं कर सका. संगम नोज, एरावत घाट और वीआईपी घाट समेत समस्त घाटों पर सुबह से ही श्रद्धालु स्नान करते नजर आए. युवाओं ने इस पावन क्षण को कैमरे में कैद किया और सोशल मीडिया पर साझा किया.
इस बार युवाओं में सनातन संस्कृति और आध्यात्मिकता के प्रति खासा उत्साह देखने को मिला. संगम स्नान और दान-पुण्य में बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया. स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने पवित्र संगम तट पर पूजा-अर्चना और दान कर पुण्य लाभ अर्जित किया.