RBI ने लोन नियमों में बड़े बदलाव किए, गोल्ड लोन और क्रेडिट एक्सपोज़र पर नई राह

1 अक्टूबर से तीन उपाय लागू होंगे, चार मसौदा प्रस्तावों पर 20 अक्टूबर तक सुझाव आमंत्रित

Last Modified:
Tuesday, 30 September, 2025
BWHindi

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने सोमवार को कई अहम नियामकीय बदलावों की घोषणा की जिनका उद्देश्य मौद्रिक नीति के असर को तेज़ी से उपभोक्ताओं तक पहुंचाना, गोल्ड लोन मानदंडों को आसान बनाना और बड़े क्रेडिट एक्सपोज़र नियमों को तर्कसंगत करना है. सात उपायों में से तीन 1 अक्टूबर से लागू होंगे, जबकि चार मसौदा रूप में सार्वजनिक परामर्श के लिए जारी किए गए हैं.

नए दिशानिर्देशों के तहत बैंकों को फ्लोटिंग-रेट लोन पर स्प्रेड कम करने की अनुमति होगी, भले ही मौजूदा तीन साल की लॉक-इन अवधि पूरी न हुई हो. इससे उधारकर्ताओं तक पॉलिसी रेट कटौती का असर तेज़ी से पहुंचेगा और ईएमआई व ब्याज़ लागत कम होगी. साथ ही, लोन रीसेट के समय उधारकर्ताओं को फिक्स्ड-रेट लोन चुनने का विकल्प मिलेगा, हालांकि यह अब अनिवार्य नहीं होगा.

जेम्स और ज्वैलरी सेक्टर को राहत देते हुए, RBI ने सोने और चांदी की गिरवी पर लोन दायरा बढ़ा दिया है. अब बैंक और टियर-3 व टियर-4 अर्बन कोऑपरेटिव बैंक किसी भी उधारकर्ता को वर्किंग कैपिटल लोन दे सकेंगे, न कि केवल ज्वैलर्स को.

पूंजी मोर्चे पर, RBI ने बेसल-III मानदंडों में संशोधन कर विदेशी मुद्रा या विदेश में जारी रुपये-मूल्यांकित बॉन्ड्स में परपेचुअल डेट इंस्ट्रूमेंट्स (PDI) की पात्र सीमा बढ़ा दी है. इससे बैंकों को ऑफशोर बाज़ारों से अतिरिक्त टियर-1 कैपिटल जुटाने में अधिक लचीलापन मिलेगा.

मसौदा प्रस्ताव

आरबीआई ने चार मसौदा प्रस्ताव भी जारी किए हैं जिनमें शामिल हैं:

गोल्ड मेटल लोन (GML) की अदायगी अवधि 180 दिन से बढ़ाकर 270 दिन करना.

नॉन- मैन्युफैक्चरिंग ज्वैलर्स को आउटसोर्स्ड प्रोडक्शन के लिए GML उपलब्ध कराना.

विदेशी बैंक शाखाओं के लिए बड़े क्रेडिट एक्सपोज़र ढांचे को इंट्राग्रुप मानकों के साथ संरेखित करना.

क्रेडिट डेटा की रिपोर्टिंग साप्ताहिक आधार पर करना (अब तक पखवाड़ेवार थी), त्रुटि सुधार को तेज़ करना और उपभोक्ता रिपोर्ट में CKYC नंबर को अनिवार्य करना.

केंद्रीय बैंक ने इन मसौदा परिपत्रों पर जनता से 20 अक्टूबर तक सुझाव मांगे हैं.

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