प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी : विकसित भारत के एक शिल्पकार

राष्ट्र की सुरक्षा, आंतरिक शांति, महिला सशक्तिकरण, आर्थिक सुधार, तकनीकी प्रगति और सांस्कृतिक पुनर्जागरण के क्षेत्रों में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने निर्णायक नेतृत्व दिखाया है.

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Tuesday, 16 September, 2025
BWHindi

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत एक विकसित राष्ट्र की परिकल्पना की ओर निरंतर अग्रसर है. इस यात्रा के केंद्र में अंत्योदय समाज के अंतिम व्यक्ति का उत्थान और एकात्म मानववाद की भावना है, जिसे पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने प्रतिपादित किया था.

पिछले एक दशक में देश ने जीवन के लगभग हर क्षेत्र में परिवर्तनकारी बदलाव देखा है, जिससे 1.4 अरब भारतीयों के जीवन स्तर में स्पष्ट सुधार हुआ है. जब श्री मोदी जी ने 2014 में पहली बार सेंट्रल हॉल में भाषण दिया, तो उन्होंने कहा कि उनकी सरकार गरीबों, किसानों, पिछड़े वर्गों, वंचित समुदायों, युवाओं और महिलाओं की होगी. यह केवल एक भाषण नहीं था, बल्कि शासन की मार्गदर्शक भावना बन गई.

स्वच्छ भारत मिशन से लेकर प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना, जन धन, आयुष्मान भारत, किसान सम्मान निधि, गरीब कल्याण अन्न योजना, जल जीवन मिशन और अन्य अनेक योजनाओं तक, सरकार का ध्यान हमेशा समाज के हाशिए पर खड़े लोग किसानों, श्रमिकों, अनुसूचित जातियों, जनजातियों और सबसे गरीब परिवारों पर रहा है. दशकों तक, इन वर्गों को केवल एक वोट बैंक के रूप में देखा गया. श्री मोदी के नेतृत्व में, ये बदलाव के प्रत्यक्ष लाभार्थी बन गए हैं.

प्रधानमंत्री श्री मोदी को विशिष्ट बनाने वाली बात है उनका उद्देश्य के प्रति स्पष्टता और वैचारिक प्रतिबद्धता. उन्हें वंशवादी राजनीति और अंशकालिक राजनीति की संस्कृति को समाप्त करने का श्रेय दिया जाता है. उनका राजनीतिक विश्वास उनकी अथक मेहनत और संकट के समय देश के साथ दृढ़ता से खड़े रहने की प्रतिष्ठा पर आधारित है.

हर निर्णय, चाहे वह आर्थिक हो या रणनीतिक, दीर्घकालिक प्रासंगिकता के आधार पर परखा जाता है. इसका एक स्पष्ट उदाहरण है राष्ट्रीय सुरक्षा. एक समय पर निरंतर आतंकी हमलों से जूझता भारत अब ‘शून्य सहिष्णुता’ की नीति अपनाता है. दुनिया ने इसे ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में देखा, जो पहलगाम में पाकिस्तान प्रायोजित हमले के जवाब में शुरू किया गया था. भारतीय सशस्त्र बलों की साहसी सीमा-पार कार्रवाई ने आतंकी शिविरों को ध्वस्त कर दिया और यह स्पष्ट संदेश दिया कि ऐसे कृत्यों का निर्णायक प्रतिशोध होगा. इसी तरह, नक्सलवाद को जड़ से समाप्त करने का सरकार का मिशन आंतरिक शांति सुनिश्चित करने की अडिग प्रतिबद्धता को दर्शाता है.

जैसे सरदार वल्लभभाई पटेल ने देश को एक किया था, वैसे ही श्री मोदी ने राष्ट्रीय एकता के मामलों में दृढ़ता दिखाई है. अनुच्छेद 370 और 35-ए का निरस्तीकरण एक ऐतिहासिक निर्णय के रूप में खड़ा है, जो डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के स्वप्न को साकार करता है और जम्मू, कश्मीर तथा लद्दाख को विकास की मुख्यधारा में लाता है.

महिला सशक्तिकरण ने भी भारत की विकास गाथा को आकार दिया है. खुले में शौच की प्रथा को समाप्त करने से लेकर तीन तलाक की प्रथा को समाप्त करने तक, ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ से लेकर विधायिकाओं में महिलाओं को 33% आरक्षण सुनिश्चित करने वाले ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ तक, श्री मोदी की नीतियों ने महिलाओं को विकास में समान भागीदार बनाने का प्रयास किया है. इसके प्रत्यक्ष परिणामों में सुधरता हुआ लिंगानुपात एक प्रमुख संकेत है.

‘न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन’ के सिद्धांत से प्रेरित होकर श्री मोदी ने भारत की आर्थिक व्यवस्था को पुनर्परिभाषित किया है. जीएसटी सुधार, आवास योजनाएं, और ‘विश्वकर्मा योजना’ जैसी योजनाएं गरीबों और मध्यम वर्ग को मौद्रिक नीति के केंद्र में लाती हैं. ‘गरीबी हटाओ’ जैसे पुराने नारों के विपरीत, ये सुधार आम नागरिकों को वास्तविक राहत प्रदान करते हैं.

भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा में भी तीव्र वृद्धि हुई है. चंद्रयान-3 की सफलता, जो वैश्विक अभियानों की तुलना में बहुत कम लागत पर पूरी हुई, 400 से अधिक विदेशी उपग्रहों का प्रक्षेपण, और ‘मेक इन इंडिया’ के तहत स्वदेशी रक्षा निर्माण, देश की तकनीकी शक्ति का प्रमाण हैं.

श्री मोदी के नेतृत्व ने न केवल भारत की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा को मजबूत किया है, बल्कि सांस्कृतिक पहचान को भी पुनर्जीवित किया है. अयोध्या में भव्य रामलला मंदिर का निर्माण, केदारनाथ का पुनरुद्धार, और वाराणसी व प्रयागराज जैसे पवित्र स्थलों का विकास एक सांस्कृतिक पुनर्जागरण को जन्म दे रहा है. इन पहलों ने पर्यटन को भी बढ़ावा दिया है और स्थानीय रोजगार सृजन किया है, जिससे आध्यात्मिक धरोहर को टिकाऊ आजीविका से जोड़ा गया है.

एक ऐसे समय में जब उपभोक्तावाद से उत्पन्न जलवायु संकट ने पूरी दुनिया को चुनौती दी है, भारत ने समावेशी और सतत विकास का एक वैकल्पिक मॉडल प्रस्तुत किया है. “कृण्वन्तो विश्वमार्यम्” (संपूर्ण विश्व को श्रेष्ठ बनाएं) की प्राचीन भावना में निहित होकर, श्री मोदी ने भारत को वैश्विक मंच पर नैतिक और पर्यावरणीय नेतृत्वकर्ता के रूप में प्रस्तुत किया है.

जबकि वे अपने आठवें दशक में प्रवेश कर रहे हैं, श्री नरेंद्र मोदी अब भी अतुलनीय ऊर्जा और समर्पण के साथ सेवा कर रहे हैं. उनकी ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास’ की नीति सहभागी शासन का ढांचा बन गई है, जो सुनिश्चित करती है कि प्रगति में सभी की भागीदारी हो.

कई लोगों के लिए श्री मोदी केवल एक संरक्षक नहीं हैं, वे भारत के परिवर्तन के ऐसे शिल्पकार हैं जो आर्थिक सुधार, सामाजिक न्याय, राष्ट्रीय सुरक्षा, सांस्कृतिक गर्व और पर्यावरणीय उत्तरदायित्व को समाहित करते हैं. हर मायने में, उन्होंने एक नेता की भूमिका को राष्ट्र के ‘प्रधान सेवक’ के रूप में पुनर्परिभाषित किया है.

– ब्रजेश पाठक, उपमुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश