अमेरिका से भारत पैसे भेजना होगा महंगा, ट्रंप का ये नया टैक्स भारतीयों पर पड़ सकता है भारी

अमेरिका में ट्रंप प्रशासन द्वारा विदेश भेजे जाने वाले धन पर 5% कर लगाने के प्रस्ताव से अमेरिका में रहने वाले भारतीयों के लिए भारत में पैसे भेजना महंगा हो सकता है.

Last Modified:
Saturday, 17 May, 2025
BWHindi

अमेरिका में रह रहे लाखों भारतीयों के लिए ये खबर निराश करने वाली है. अब अमेरिका में रहने वाले एनआरआई को अपने घर पैसे भेजने के लिए 5 प्रतिशत का अतिरिक्त टैक्स लग सकता है. ये टैक्स एच1 बी वीजाधारक और ग्रीन कार्डधारकों समेत जो भी दूसरे देश के लोग रहे हैं, उन्हें देना होगा. अमेरिकी संसद में लाए गए इस बिल के पास हो जाने के बाद लाखों भारतीयों के ऊपर असर होगा, जो वहां पर काम करते हैं और नियमित तौर पर वहां से अपने घर पैसे भेजते रहते हैं. 

'द वन बिग ब्यूटिफुल बिल' शीर्षक के साथ लाए गए इस बिल को यूएस हाउस वेज एंड मीन्स कमेटी की तरफ से हाल में जारी किया गया है. 389 पन्नों के इस डॉक्यूमेंट्स के 327वें पेज पर ऐसे सभी तरह के पैसों के ट्रांसफर करने पर 5 प्रतिशट टैक्स लगाने के प्रावधान का जिक्र किया गया है. हालांकि, इसमें न्यूनतम पैसों का कोई उल्लेख नहीं है.

अमेरिका से पैसा भेजने पर अब देना होगा टैक्स

इसका मतलब ये है कि अब अमेरिका से कम पैसे भेजने पर भी उसे टैक्स देना होगा, अगर वो अमेरिकी नागरिक न हो या फिर उसे अमेरिकी नागरिकता न मिली हो. ये टैक्स जहां से पैसा ट्रांसफर किया जाएगा, वहीं पर काटा जाएगा. गौरतलब है कि बड़ी तादाद में अमेरिका में भारतीय रहते हैं. 

एनआरआई से सबसे ज्यादा पैसा भेजे जाने वाले शीर्ष देशों की सूची में भारत भी शामिल है. 2024 के मार्च में जारी रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के एक सर्वे के मुताबिक, साल 2023-24 के दौरान अमेरिका में रह रहे भारतीयों ने वहां से 32 अरब डॉलर अपने देश में अपने परिवार और रिश्तेदारों को भेजे थे.

प्रवासी क्यों चिंतित हैं?

इस टैक्स की वजह से भारतीय परिवारों को सालाना लगभग 14,000 करोड़ रुपये का नुकसान होगा. शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और बुजुर्गों की देखभाल के लिए भेजे जाने वाले पैसे पर असर पड़ेगा. भारतीय रियल एस्टेट और शेयर बाजार में एनआरआई निवेश कम होने की संभावना है. नए नियम के तहत, घर भेजे जाने वाले प्रत्येक 1 लाख रुपये (डॉलर में) पर 5,000 रुपये (डॉलर में) टैक्स देना होगा. अभी तक अमेरिका में धन प्रेषण पर कोई टैक्स नहीं था, इसलिए यह एक बड़ा नीतिगत बदलाव है.