भारत और चीन के बीच साझेदारी केवल द्विपक्षीय रिश्तों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह 21वीं सदी की वैश्विक और एशियाई राजनीति की दिशा भी तय करेगी.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने भारत-चीन सीमा मुद्दे का ‘निष्पक्ष, उचित और पारस्परिक रूप से स्वीकार्य’ समाधान खोजने की दिशा में काम करने पर सहमति जताई. दोनों नेताओं ने कहा कि मतभेद विवादों में नहीं बदलने चाहिए और सीमा पर शांति एवं सौहार्द बनाए रखना द्विपक्षीय संबंधों के लिए आवश्यक है. थ्यानचिन (उत्तरी चीन) में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन से इतर हुई इस बैठक में व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने पर खास ध्यान दिया गया. इसे लेकर विदेश मंत्रालय ने जानकारी साझा की है. तो आइए इस बैठक के बारे में विस्तार से जानते हैं.
साझेदारी पर बल, प्रतिस्पर्धा पर नहीं
विदेश मंत्रालय द्वारा जारी बयान के अनुसार दोनों नेताओं ने वैश्विक व्यापार को स्थिर करने में भारत और चीन की अहम भूमिका को स्वीकार किया और द्विपक्षीय व्यापार घाटे को कम करने के लिए राजनीतिक एवं रणनीतिक रूप से आगे बढ़ने की आवश्यकता बताई. मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि भारत और चीन विकास साझेदार हैं, न कि प्रतिद्वंद्वी. दोनों देशों के बीच आपसी सम्मान और हितों पर आधारित स्थिर संबंध 21वीं सदी के बहुध्रुवीय एशिया और विश्व व्यवस्था के लिए आवश्यक हैं. विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने कहा कि सीमा पर शांति, भारत-चीन संबंधों के लिए बीमा पॉलिसी जैसी है.
राष्ट्रपति शी के सुझाव
शी चिनफिंग ने संबंध सुधारने के लिए चार सुझाव दिए—
1. रणनीतिक संचार को मजबूत करना और आपसी विश्वास बढ़ाना.
2. पारस्परिक लाभ के लिए सहयोग और आदान-प्रदान का विस्तार करना.
3. एक-दूसरे की चिंताओं को समझना.
4. साझा हितों की रक्षा के लिए बहुपक्षीय सहयोग को बढ़ावा देना.
मोदी-शी की सकारात्मक समीक्षा
मोदी ने कहा कि भारत और चीन दोनों ही सामरिक स्वायत्तता चाहते हैं और संबंधों को किसी तीसरे देश के नजरिये से नहीं देखना चाहिए. उन्होंने कजान (रूस) में हुई पिछली मुलाकात के बाद मिले सकारात्मक परिणामों का जिक्र करते हुए सीमा पर शांति बनाए रखने को अहम बताया.
‘हाथी और ड्रैगन’ का साथ
राष्ट्रपति शी ने कहा कि भारत और चीन को एक-दूसरे की सफलता का जश्न मनाना चाहिए. दोनों प्राचीन सभ्यताओं और ग्लोबल साउथ के पुराने सदस्य हैं, इसलिए हाथी (भारत) और ड्रैगन (चीन) को साथ मिलकर काम करना चाहिए.
सीमा तनाव कम करने की दिशा में कदम
जून 2020 में गलवान घाटी में हुई झड़पों के बाद दोनों देशों के रिश्तों में आई तल्खी को दूर करने के लिए हाल में कई प्रयास किए गए हैं. मोदी की यह चीन यात्रा सात साल से अधिक समय बाद हुई है. विदेश मंत्रालय ने कहा कि दोनों नेताओं ने सीमा मुद्दे पर विशेष प्रतिनिधियों के बीच हुई हालिया वार्ता को आगे बढ़ाने और समर्थन देने की सहमति जताई.
जन-जन के रिश्ते मजबूत करने की पहल
मोदी और शी ने कैलाश मानसरोवर यात्रा, सीधी उड़ानों और पर्यटक वीजा सुविधा बहाल करने के जरिए लोगों के बीच संबंध मजबूत करने पर जोर दिया.
आगामी शिखर सम्मेलन का आमंत्रण
मोदी ने चीन की सफल एससीओ अध्यक्षता के लिए शी को बधाई दी और उन्हें 2026 में भारत में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने का निमंत्रण दिया. शी ने निमंत्रण स्वीकार करते हुए भारत की अध्यक्षता को पूरा समर्थन देने का आश्वासन दिया.