राज्य सरकार ने महाराष्ट्र मेड लिकर (MML) श्रेणी की घोषणा की, बंद और कम क्षमता पर चल रहे PLL यूनिट्स को पूरी क्षमता से संचालन की अनुमति
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
महाराष्ट्र सरकार ने अनाज आधारित शराब के उत्पादन को मंजूरी दे दी है और बंद या कम क्षमता पर चल रहे पोटेबल लिकर लाइसेंस (PLL) यूनिट्स को पूरी क्षमता से संचालन की अनुमति दे दी है. गुरुवार को जारी सरकारी आदेश के अनुसार, इस कदम से राज्य को करीब 3,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आमदनी होने का अनुमान है.
यह पहल उस समय आई है जब राज्य पर वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 9.32 लाख करोड़ रुपये का कर्ज होने का अनुमान है और सरकार ‘लाडकी बहिन योजना’ जैसी जनकल्याणकारी योजनाओं के लिए नए राजस्व स्रोत तलाश रही है.
आदेश के तहत महाराष्ट्र मेड लिकर (MML) नाम की एक नई श्रेणी शुरू की गई है, जो इंडियन मेड लिकर (IML) और इंडियन मेड फॉरेन लिकर (IMFL) के साथ होगी. MML केवल महाराष्ट्र में निर्मित होगी. जनवरी में उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली सरकार ने अतिरिक्त मुख्य सचिव वल्सा नायर की अध्यक्षता में एक समिति गठित की थी, जिसने अप्रैल में रिपोर्ट सौंपी. राज्य मंत्रिमंडल ने इसे 10 जून को मंजूरी दी.
अनाज से बनी MML की 180 एमएल बोतल की न्यूनतम कीमत 148 रुपये तय की गई है. इसमें अधिकतम 42.8 प्रतिशत अल्कोहल (25 अंडर प्रूफ) होगा. वोडका और जिन वेरिएंट में अल्कोहल की ताकत 37.5 प्रतिशत से 42.8 प्रतिशत के बीच होगी. योजना का उद्देश्य देशी शराब और IMFL के बीच मूल्य अंतर को कम करना है.
MML का उत्पादन केवल महाराष्ट्र में किया जा सकेगा और इसे देशी शराब, IML, बीयर या वाइन श्रेणी में नहीं बनाया जा सकेगा. लाइसेंसधारी का पंजीकृत मुख्यालय महाराष्ट्र में होना जरूरी है. इनमें कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष विदेशी निवेश नहीं होना चाहिए और कम से कम 25 प्रतिशत प्रमोटर या लाइसेंसधारी महाराष्ट्र के स्थायी निवासी होने चाहिए.
MML केवल स्वामित्व वाले ब्रांड के लिए ही बनाई जा सकेगी. सभी MML उत्पादों पर ‘For Sale in Maharashtra State Only’ और MML का लोगो होना अनिवार्य होगा. निर्यात के लिए भी MML लोगो लगाना जरूरी है.
महाराष्ट्र में फिलहाल 70 PLL यूनिट्स हैं, जिनमें से 22 बंद हैं, 16 केवल रिटेलर के रूप में काम कर रही हैं और 32 शराब का निर्माण कर रही हैं. इनमें से 10 यूनिट्स राज्य के IMFL उत्पादन का 70 प्रतिशत बनाती हैं. इस कदम से इन यूनिट्स को पूरी क्षमता से चलाने में मदद मिलने की उम्मीद है.
यह पहली बार नहीं है जब महाराष्ट्र ने अनाज आधारित शराब को बढ़ावा देने की कोशिश की है. 2007 में कांग्रेस-एनसीपी सरकार ने ‘फूड ग्रेन-बेस्ड डिस्टिलरी एंड इंटीग्रेटेड यूनिट फाइनेंशियल एड’ योजना शुरू की थी. लेकिन खाद्यान्न की कमी, कुपोषण और सूखे की स्थिति में अनाज के मोड़ने को लेकर आपत्तियां उठी थीं. नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने योजना में खामियां बताई थीं और 2010 में बॉम्बे हाईकोर्ट ने 23 डिस्टिलरी को 50 करोड़ रुपये की फंडिंग पर रोक लगा दी थी.