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बड़े-बड़े नेताओं की नाक में दम करने वाली ED के बारे में जानते हैं?

ED सुर्खियों में है, लेकिन क्या आप इस संघीय संस्था के बारे में सबकुछ जानते हैं?

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 4 years ago

प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate) यानी ED का नाम अक्सर सुनने में आ जाता है. नेशनल हेराल्ड मामले में सोनिया गांधी और राहुल गांधी को समन भेजने को लेकर एक बार फिर से ED सुर्खियों में हैं. लेकिन क्या आप इस संघीय संस्था के बारे में सबकुछ जानते हैं? यदि नहीं, तो चलिए सरल शब्दों में समझते हैं.

ये हैं ED के प्रमुख कार्य

ED की स्थापना 1956 में हुई थी. यह भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग के अधीन एक विशेष वित्तीय जांच एजेंसी है. इसका मुख्यालय नई दिल्ली में है. इसके कार्यों की बात करें, तो ED के प्रमुख कार्यों में; हवाला लेन-देन, विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम, 1999 (फेमा) के प्रावधानों के उल्लंघन, धनशोधन निवारण अधिनियम, 2002 (PMLA) से जुड़े मामलों की जांच करना शामिल है. इसके 5 क्षेत्रीय कार्यालय मुंबई, चेन्नई, चंडीगढ़, कोलकाता तथा दिल्‍ली में हैं. ईडी के पास फेमा के उल्लंघन के दोषियों की प्रापर्टी अटैच करने की शक्ति भी है. कुल मिलाकर ED देश में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्यवाही करती है.

क्या है प्रापर्टी अटैचमेंट?

अब बात करते हैं प्रापर्टी अटैचमेंट के बारे में. अप्रैल में प्रवर्तन निदेशालय ने शिवसेना नेता और राज्यसभा सदस्य संजय राउत से संबंधित और सत्येंद्र जैन के परिवार की करोड़ों की संपत्ति अटैच की थी. तो क्या इसका ये मतलब हुआ कि संबंधित व्यक्ति उस प्रॉपर्टी को इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे? ईडी प्रिवेंसन ऑफ मनी लांड्रिंग एक्ट के तहत किसी की संपत्ति अटैच करती है. ED की इस कार्रवाई को अदालत में चुनौती दी जा सकती है. हालांकि, ED की इस कार्रवाई का मतलब ये नहीं होता कि प्रॉपर्टी का इस्तेमाल नहीं हो सकता. उसका व्यक्तिगत या कामर्शियल इस्तेमाल हो सकता है, बस उसकी खरीद-फरोख्त नहीं हो सकती. साथ ही संपत्ति को किसी के नाम पर ट्रांसफर नहीं किया जा सकता.

फाइनल फैसले के बाद क्या?

प्रापर्टी अटैच करने के बाद ED उसके पूरे सबूत-दस्तावेज जुटाती है और फिर संबंधित मामले को अदालत में ले जाया जाता है. फैसला होने तक प्रापर्टी ED के पास अटैच ही रहती है. हां, अगर कोई उस मकान या संपत्ति में रह रहा है तो वो आमतौर पर फाइनल फैसला आने तक उसका इस्तेमाल कर सकता है. लेकिन यदि फाइनल फैसला ईडी के पक्ष में आता है, तो जिस प्रापर्टी को अटैच किया गया है, उसे मालिक से लेकर कुर्क कर दिया जाता है.


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