मोदी से खुश है आवाम, बेरोज़गारी, महंगाई जैसे मुद्दों के बीच PM की अप्रूवल रेटिंग 70%

महंगाई और बेरोज़गारी जैसे तमाम मुद्दों के बीच प्रधानमंत्री मोदी के कामकाज से अधिकांश लोग खुश हैं. एक सर्वे में यह बात सामने आई है.

Last Modified:
Saturday, 24 August, 2024
BWHindi

आम चुनावों में अनुमान से कम सीटें हासिल करने के बाद भी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) की अप्रूवल रेटिंग 70 प्रतिशत पर बनी हुई है. Ipsos IndiaBus PM's Approval Rating के अनुसार, अगस्त 2024 में मोदी की अप्रूवल रेटिंग 70 प्रतिशत कायम है. मई से इसमें कोई बदलाव देखने को नहीं मिला है.   

दक्षिण में लोकप्रियता घटी
भारत उच्च बेरोजगारी, उतार-चढ़ाव वाली मुद्रास्फीति और देश की कम प्रति व्यक्ति आय जैसे आर्थिक मुद्दों से जूझ रहा है. हालांकि सर्वे में शामिल कई लोगों ने प्रधानमंत्री के रूप में मोदी के प्रदर्शन की सराहना की. उल्लेखनीय रूप से, इप्सोस सर्वेक्षण ने इस बात पर प्रकाश डाला कि पीएम मोदी की लोकप्रियता कुछ क्षेत्रों, विशेषकर उत्तरी भारत के राज्यों और टियर 1 शहरों में अभी भी काफी ज्यादा है. सर्वेक्षण के परिणाम बताते हैं कि देश के उत्तर क्षेत्र (89 प्रतिशत), टियर 1 शहर (81 प्रतिशत) और पश्चिम क्षेत्र (77 प्रतिशत) के लोगों ने PM मोदी को अच्छी रेटिंग दी. जबकि दक्षिण क्षेत्र में यह 35 प्रतिशत के साथ काफी कम रही.  कुल मिलाकर उनकी ओवरऑल अप्रूवल रेटिंग 70% रही है.  

इन्होंने कामकाज सराहा
हाल ही में पेपर लीक विवादों के बीच, इस सर्वेक्षण से पता चला कि मोदी को उनके प्रदर्शन के आधार पर छात्रों ने 75 प्रतिशत, अंशकालिक/पूर्णकालिक नौकरीपेशा लोगों ने 72 प्रतिशत, निम्न शिक्षा वाले नागरिकों ने 72 प्रतिशत, टियर 3 शहरों के लोगों ने 70 प्रतिशत, फुल टाइम पैरेंट्स/होममेकर  ने 68 प्रतिशत, टियर 2 शहरों में रहने वालों  ने 67 प्रतिशत के साथ उच्च रेटिंग की है. जबकि सेल्फ-एम्प्लॉयमेंट वाले (58 प्रतिशत) और मेट्रो शहरों के निवासियों (61 प्रतिशत) ने पीएम मोदी को कम रेटिंग दी है. 

लोगों की मिश्रित प्रतिक्रिया 
इप्सोस इंडिया के ग्रुप सर्विस लाइन लीडर, पब्लिक अफेयर्स, कॉरपोरेट रेपुटेशन, सीएसआर और ईएसजी, पारिजात चक्रवर्ती ने कहा कि प्रमुख मुद्दों पर मोदी 3.0 सरकार के प्रदर्शन को लेकर एक मिश्रित प्रतिक्रिया सामने आई है, लेकिन अभी किसी भी नतीजे पर पहुंचना जल्दबाजी होगी, क्योंकि नई सरकार को कामकाज करते हुए अभी केवल दो महीने ही हुए हैं. सर्वेक्षण में 65 प्रतिशत लोगों ने शिक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार के कामकाज को मंजूरी दी, जबकि 19 प्रतिशत लोगों ने इस मामले में न प्रसन्नता जाहिर की और न ही असहमति जताई. 15 प्रतिशत ऐसे रहे, जिन्हें सरकार का कामकाज पसंद नहीं आया. इसके विपरीत, स्वच्छता और सफाई के क्षेत्र में सरकार के प्रयासों को लेकर उदासीन प्रतिक्रिया मिली. 49 प्रतिशत लोगों ने इसे सराहा, 27 प्रतिशत  तटस्थ रहे और 21 प्रतिशत इससे नाखुश मिले. 

हेल्थकेयर मन कम रेटिंग
उल्लेखनीय रूप से, हेल्थकेयर सिस्टम को लेकर मोदी सरकार की अप्रूवल रेटिंग 43 प्रतिशत से थोड़ी कम है. 28 प्रतिशत इस मामले में तटस्थ रहे जबकि 25 प्रतिशत ने सरकार के कामकाज पर नाखुशी जाहिर की. मोदी 3.0 सरकार के प्रदर्शन के बारे में बात करते हुए, चक्रवर्ती ने कहा कि पीएम मोदी और उनकी सरकार को प्रदर्शन के आधार पर रेटिंग देना अभी जल्दबाजी होगी. हालांकि, हमारा सर्वेक्षण दिखाता है कि केंद्र में गठबंधन सरकार के बावजूद, पीएम मोदी की लोकप्रियता कम नहीं हुई है.

इन पर ध्यान देना ज़रूरी
निश्चित तौर पर आने वाला समय सरकार के प्रदर्शन और PM मोदी की लोकप्रियता का सटीक आकलन कर पाएगा, लेकिन कुछ ऐसे मुद्दे हैं जिन पर गंभीरता से काम नहीं किया गया तो इस रेटिंग में नकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकता है. इसमें सबसे प्रमुख है बेरोज़गारी. BW बिजनेसवर्ल्ड भी लगातार इस पर प्रकाश डालता रहा है कि देश में उच्च बेरोजगारी, उतार-चढ़ाव वाली मुद्रास्फीति और कम प्रति व्यक्ति आय जैसे आर्थिक मुद्दे बड़ी समस्या बने हुए हैं. देश के 78वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने जलवायु परिवर्तन के मुद्दे से निपटने के देश के प्रयासों में हरित नौकरियों के महत्व पर जोर दिया. यहां तक ​​कि केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मंडाविया ने भी कहा है कि जॉब लॉस को लेकर चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है. उन्होंने भविष्यवाणी की कि निकट भविष्य में भारत की बेरोजगारी दर 3 प्रतिशत से नीचे आ जाएगी.

नौकरी के लिए भगदड़
हाल ही में एक नाटकीय घटनाक्रम में, गुजरात के भरूच जिले में भगदड़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई, जहां 40 पदों के वॉक-इन इंटरव्यू के लिए 800 से अधिक आवेदक पहुंच गए. ये घटना भारत में विशेष रूप से युवाओं के बीच बेरोजगारी संकट की गंभीरता को उजागर करती है. हालांकि, ये बात अलग है कि केंद्र सरकार इस समस्या को स्वीकार करने से कतराती है. मुंबई के कलिना इलाके में भी ऐसी ही स्थिति निर्मित हो गई थी जब एयर इंडिया एयरपोर्ट सर्विसेज के 600 पदों के लिए आयोजित वॉक-इन इंटरव्यू में युवाओं की भीड़ उमड़ पड़ी थी.  इसका एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था. 

ILO ने भी जताई चिंता 
अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) ने अपनी हालिया रिपोर्ट में कहा है कि भारतीय युवाओं की बेरोज़गारी दर वयस्कों की तुलना में ज़्यादा है. पिछले कई दशकों से युवाओं में बेरोज़गारी की दर बढ़ रही है - 2000 में 5.6 प्रतिशत से बढ़कर 2012 में 6.2 प्रतिशत और फिर तीन गुना बढ़कर 2018 में लगभग 18 प्रतिशत और 2020 में लगभग 15.1 प्रतिशत तक पहुंच गई. आईएलओ की इस रिपोर्ट पर अपनी चिंता व्यक्त करने के बाद, मोदी सरकार ने सिटीग्रुप की उस रिपोर्ट पर सवाल उठाया, जिसमें कहा गया कि भारत सात प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि दर के साथ भी पर्याप्त रोजगार अवसर पैदा करने के लिए संघर्ष करेगा. वहीं, भारत की सकल घरेलू उत्पाद वृद्धि के बारे में बात करते हुए, रेटिंग एजेंसी इक्रा ने अनुमान लगाया है कि सकल घरेलू उत्पाद का साल-दर-साल (YoY) विस्तार Q1FY25 में छह तिमाहियों के निचले स्तर 6.0 प्रतिशत पर आ जाएगा, जो Q4FY24 में 7.8 प्रतिशत था.