AI और औपचारिक क्षेत्र में बढ़ती नौकरियां, युवाओं की भागीदारी में भी इज़ाफा
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
भारत की रोज़गार स्थिति कुल मिलाकर स्थिर और सकारात्मक बनी हुई है, भले ही मई महीने में मौसमी कारणों से बेरोजगारी दर में मामूली वृद्धि देखी गई हो. यह जानकारी वित्त मंत्रालय की मई 2025 की मासिक आर्थिक समीक्षा में दी गई, जो श्रम भागीदारी दर में निरंतर वृद्धि, औपचारिक रोजगार में विस्तार और डिजिटल सेक्टर की मजबूती को उजागर करती है.
आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (PLFS) के आंकड़ों के अनुसार, मई में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों में श्रम बल भागीदारी दर (LFPR) 54.8 प्रतिशत रही, जबकि बेरोजगारी दर अप्रैल के 5.1 प्रतिशत से बढ़कर मई में 5.6 प्रतिशत हो गई. मंत्रालय ने इस वृद्धि को "मौसमी कारक" बताया, खासकर रबी फसल की कटाई के बाद ग्रामीण कृषि क्षेत्र में रोजगार में आई गिरावट (45.9% से घटकर 43.5%) को इसका मुख्य कारण माना गया.
रिपोर्ट में कहा गया कि ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा से जुड़े संक्रमण काल, मौसम से प्रभावित बाहरी कार्यों की बाधाएं और बदलते आर्थिक पैटर्न भी अस्थायी रूप से रोजगार को प्रभावित कर रहे हैं. हालांकि, समग्र रूप से रोजगार की स्थिति मजबूत बनी हुई है.
सफेदपोश नौकरियों (white-collar jobs) में मामूली बढ़त दर्ज की गई, जहां Naukri JobSpeak के अनुसार सालाना आधार पर 0.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई. कृत्रिम बुद्धिमत्ता/मशीन लर्निंग (AI/ML) में नौकरियों की मांग में 25 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई. बीमा क्षेत्र में 6 प्रतिशत और रियल एस्टेट में 5 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई. इसके अलावा, 16 वर्ष से अधिक अनुभव वाले वरिष्ठ पेशेवरों की मांग में 6 प्रतिशत की बढ़त आई, जो नेतृत्व स्तर की नियुक्तियों में मजबूती का संकेत है.
PMI रोजगार उप-सूचकांक के अनुसार, निर्माण क्षेत्र में यह सूचकांक 54.9 और सेवा क्षेत्र में 57.1 पर रहा—दोनों क्षेत्रों में यह बहु-मासिक उच्च स्तर पर है, जो भर्ती गतिविधियों में निरंतर विस्तार को दर्शाता है.
रोज़गार का औपचारिकरण भी जारी रहा. कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने अप्रैल 2025 में 19.1 लाख नए सब्सक्राइबर्स जोड़े, जिनमें से लगभग 58 प्रतिशत 18–25 वर्ष की आयु वर्ग के थे. यह युवा श्रमिकों के बढ़ते औपचारिक भागीदारी का संकेत है.
ई-श्रम पोर्टल पर 24 जून 2025 तक 30.9 करोड़ असंगठित श्रमिकों का पंजीकरण हुआ, जिससे उन्हें यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) के ज़रिए सामाजिक सुरक्षा योजनाओं तक पहुंच मिली है. मंत्रालय ने इसे समावेशी श्रमिक कल्याण की दिशा में एक अहम कदम बताया.
रिपोर्ट में कहा गया कि मौसमी बेरोजगारी कुछ संरचनात्मक चुनौतियों की ओर इशारा करती है, लेकिन समग्र श्रम बाजार लचीलापन दर्शाता है. मंत्रालय ने डिजिटल अर्थव्यवस्था, औपचारिक रोजगार में वृद्धि और समावेशी नीतियों को भारत के रोज़गार तंत्र के प्रमुख स्तंभों के रूप में चिन्हित किया है.