4.8 लाख करोड़ रुपये पहुंचा कृषि GVA, 22% सालाना बढ़त; उत्तर प्रदेश शीर्ष पर
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
भारत के कृषि और संबद्ध क्षेत्रों का सकल मूल्य वर्धन (GVA) वित्त वर्ष 2024 (FY24) में तीन गुना बढ़कर 4.8 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गया, जो FY12 में महज 1.5 लाख करोड़ रुपये था. यह जानकारी सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा शुक्रवार को जारी 'Statistical Report on Value of Output from Agriculture and Allied Sectors' में सामने आई.
कृषि क्षेत्र अब भी भारतीय अर्थव्यवस्था की मज़बूत रीढ़ बना हुआ है, जो GDP में करीब 16% का योगदान करता है और देश की 46% से अधिक आबादी को आजीविका देता है. रिपोर्ट के मुताबिक, FY24 में कृषि GVA में लगभग 22% की सालाना वृद्धि हुई. इसी अवधि में सकल उत्पादन मूल्य (GVO) भी FY12 के 1.9 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 3 लाख करोड़ रुपये हो गया - जो 55% की छलांग है.
हालांकि रिपोर्ट में वृद्धि के कारण नहीं बताए गए हैं, लेकिन क्षेत्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि इसमें अनुकूल मानसून और सरकार की लक्षित कृषि योजनाओं की अहम भूमिका रही है, जिससे पैदावार और किसानों की आय दोनों में सुधार हुआ.
कृषि GVO में फसलों की हिस्सेदारी 54% से अधिक रही. अनाज और फल-सब्जियां मिलाकर 52% से अधिक योगदान देते हैं. केवल धान और गेहूं ही अनाज GVO का 85% हिस्सा बनाते हैं. FY24 में एक दिलचस्प बदलाव देखने को मिला — केले ने आम को पीछे छोड़कर सबसे मूल्यवान फल का स्थान हासिल किया. केले का GVO 47 हजार करोड़ रुपये, जबकि आम का GVO 46.1 हजार करोड़ रुपये रहा. सब्जियों में आलू सबसे आगे रहा, जिसका GVO FY12 के 21.3 हजार करोड़ रुपये से बढ़कर 37.2 हजार करोड़ रुपये पहुंच गया.
उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय कृषि GVO में 17% की हिस्सेदारी के साथ शीर्ष पर रहा. इसके बाद मध्य प्रदेश, पंजाब, तेलंगाना और हरियाणा जैसे राज्य रहे, जो मिलकर 53% उत्पादन करते हैं.
पशुपालन GVO FY12 के 4.88 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर FY24 में 9.19 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया. इसमें दूध का वर्चस्व बना रहा, हालांकि इसकी हिस्सेदारी थोड़ी घटकर 66% रह गई, जबकि मांस की हिस्सेदारी बढ़कर 24% हो गई.
फ्लोरीकल्चर (पुष्पविकास) ने भी जबरदस्त ग्रोथ दर्ज की - GVO FY12 के 17.4 हजार करोड़ रुपये से बढ़कर FY24 में 28.1 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जिससे बागवानी विविधीकरण में व्यापारिक रुचि का इज़ाफा दर्शाया गया.
यह रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि भारत का कृषि क्षेत्र अब सिर्फ खाद्य सुरक्षा तक सीमित नहीं, बल्कि आर्थिक विविधीकरण और ग्रामीण रोजगार में भी प्रमुख भूमिका निभा रहा है.