उपभोक्ता विश्वास को डिजिटल वाणिज्य की नींव बताते हुए उद्योग निकाय ने कहा कि जिम्मेदार तरीके से एआई का इस्तेमाल सुरक्षा और नवाचार दोनों सुनिश्चित कर सकता है
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
भारत के तेजी से बढ़ते ई-कॉमर्स क्षेत्र में धोखाधड़ी और नकली उत्पादों से निपटने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को एक अग्रिम रक्षा तंत्र के रूप में अपनाना जरूरी है. यह बात पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (PHDCCI) ने उपभोक्ता मामलों के विभाग के सहयोग से आयोजित एक उच्चस्तरीय सम्मेलन में कही.
सम्मेलन में सरकारी अधिकारियों, नियामकों और कॉर्पोरेट नेताओं ने भाग लिया और चर्चा की कि उपभोक्ता विश्वास की रक्षा के लिए एआई का कैसे इस्तेमाल किया जा सकता है. उद्योग निकाय ने उपभोक्ता विश्वास को डिजिटल वाणिज्य की नींव बताया.
मुख्य वक्तव्य देते हुए उपभोक्ता मामलों के विभाग की सचिव निधि खरे ने कहा कि खुदरा और ई-कॉमर्स में नवाचार कभी भी उपभोक्ता सुरक्षा की कीमत पर नहीं होना चाहिए. उन्होंने कहा, “उपभोक्ता विश्वास ई-कॉमर्स की नींव है. नवाचार जारी रहना चाहिए, लेकिन कभी भी उपभोक्ता सुरक्षा की कीमत पर नहीं. एआई हमें दोनों हासिल करने का साधन देता है — बशर्ते हम इसका जिम्मेदारी से इस्तेमाल करें.”
उनकी यह टिप्पणी उस समय आई है जब ऑनलाइन घोटालों से उपभोक्ताओं को होने वाले नुकसान में तेजी से वृद्धि हुई है. केवल 2025 के पहले पांच महीनों में ही उपभोक्ताओं को करीब Rs 7,000 करोड़ का नुकसान हुआ है, यह आंकड़े सम्मेलन में साझा किए गए. भारतीय रिजर्व बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक, बीते वर्ष धोखाधड़ी के मामलों की संख्या घटी है, लेकिन उनका कुल मूल्य FY25 में तीन गुना बढ़कर Rs 36,000 करोड़ हो गया.
नियामक दृष्टिकोण से, पीएचडीसीसीआई की रिटेल, ई-कॉमर्स और उपभोक्ता मामलों की समिति के अध्यक्ष और रिलायंस रिटेल के प्रेसिडेंट रवि गांधी ने कहा कि दूरसंचार और ई-कॉमर्स के अभिसरण ने नई कमजोरियां पैदा की हैं. उन्होंने चेतावनी दी कि फिशिंग, फर्जी कॉल और साइबर घोटाले अब और अधिक जटिल हो रहे हैं. “एआई और डेटा एनालिटिक्स हमारी पहली रक्षा पंक्ति बन सकते हैं, जो उन अनियमितताओं और संकेतों को पकड़ लें जिन्हें मानवीय निगरानी नजरअंदाज कर सकती है. वास्तविक उपभोक्ता विश्वास बनाने के लिए हमें लगातार अपने नियम अपडेट करने होंगे और इन नई तकनीकों को अपनाना होगा.”
उद्योग जगत ने भी यही चिंताएं साझा कीं. अमेज़न के पब्लिक पॉलिसी निदेशक और पीएचडीसीसीआई के सदस्य अमन जैन ने कहा कि नकली उत्पाद अभी भी ग्राहक विश्वास और वास्तविक व्यवसायों की आय को नुकसान पहुंचा रहे हैं. उन्होंने कहा, “नकली उत्पादों के खिलाफ लड़ाई अकेले नहीं लड़ी जा सकती. सहयोग ही एकमात्र रास्ता है. एआई के साथ हमारे पास यह मौका है कि हम धोखाधड़ी होने के बाद प्रतिक्रिया देने से आगे बढ़कर वास्तव में उसे रोक सकें.”