देश में स्वदेशी रक्षा उत्पादन ने रचा रिकॉर्ड, 2023-24 में पहुंचा Rs 1,27,434 करोड़

अधिकारियों का कहना है कि इस वृद्धि के पीछे कई दीर्घकालिक सुधार और उद्योग की बढ़ती भागीदारी मुख्य कारक हैं

Last Modified:
Friday, 21 November, 2025
BWHindi

भारत के स्वदेशी रक्षा निर्माण क्षेत्र ने एक दशक में अपनी सबसे तेज़ वृद्धि दर्ज की है. वित्त वर्ष 2023-24 में घरेलू रक्षा उत्पादन Rs 1,27,434 करोड़ तक पहुंच गया, जो रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है. यह आंकड़ा 2014-15 के Rs 46,429 करोड़ की तुलना में लगभग तीन गुना वृद्धि को दर्शाता है, जो लगातार नीतिगत सुधारों, बढ़े हुए बजटीय प्रावधानों और आत्मनिर्भरता के प्रति सरकार की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता का परिणाम है.

अधिकारियों का कहना है कि इस वृद्धि के पीछे कई दीर्घकालिक सुधार और उद्योग की बढ़ती भागीदारी मुख्य कारक हैं. पिछले दस वर्षों में रक्षा बजट में उल्लेखनीय विस्तार हुआ है. 2013-14 में कुल रक्षा आवंटन Rs 2.53 लाख करोड़ था, जो 2025-26 में बढ़कर Rs 6.81 लाख करोड़ हो गया है. यह वृद्धि सैन्य ढांचे को मजबूत करने और आयात पर निर्भरता कम करने की रणनीतिक दिशा को स्पष्ट करती है.

रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों (DPSUs) और अन्य PSUs ने 2024-25 में कुल उत्पादन में 77 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ अपना दबदबा बनाए रखा है. हालांकि, निजी क्षेत्र की भागीदारी भी बढ़कर 23 प्रतिशत हो गई है, जो पिछले वित्त वर्ष के 21 प्रतिशत से अधिक है. सरकार का मानना है कि निजी क्षेत्र का बढ़ता योगदान एक परिपक्व होती रक्षा इकोसिस्टम का संकेत है, जिसे आसान लाइसेंसिंग, उदार FDI नीतियों और खरीद प्रक्रियाओं में सुधारों ने और गति दी है.

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