भारत-पाकिस्तान में युद्धविराम पर बनी सहमति, ट्रंप और रुबियो ने जताई सराहना

भारतीय पक्ष से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, सेना प्रमुख और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने इस बातचीत में भाग लिया.

Last Modified:
Saturday, 10 May, 2025
BWHindi

भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव पर विराम लगाते हुए दोनों देशों ने तत्काल युद्धविराम और संवाद की बहाली पर सहमति जताई है. इस ऐतिहासिक कदम की पुष्टि अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने की है, जिन्होंने बीते 48 घंटों में दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व से गहन बातचीत की. भारतीय पक्ष से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, सेना प्रमुख और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने इस बातचीत में भाग लिया. वहीं पाकिस्तान की ओर से प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, सेना प्रमुख असीम मुनीर और एनएसए असीम मलिक शामिल रहे.

मार्को रुबियो ने एक्स ( x) पर लिखा है कि उन्होंने और वीपी वेंस ने बीते 48 घंटों में दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व से गहन बातचीत की. इसमें भारतीय पक्ष से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, सेना प्रमुख और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने इस बातचीत में भाग लिया. वहीं पाकिस्तान की ओर से प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, सेना प्रमुख असीम मुनीर और एनएसए असीम मलिक शामिल रहे.उन्होंने लिखा “भारत और पाकिस्तान अब एक तटस्थ स्थल पर व्यापक मुद्दों पर संवाद के लिए तैयार हैं. हम प्रधानमंत्री मोदी और शरीफ की समझदारी, विवेक और दूरदृष्टि की सराहना करते हैं.”

इस बीच, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने एक ट्वीट में लिखा: “Great news coming out of South Asia! Proud to see India and Pakistan stepping back from the brink. Strong leadership from Modi and Sharif. Peace is the way forward!”
(दक्षिण एशिया से शानदार खबर. भारत और पाकिस्तान को युद्ध के मुहाने से पीछे हटते देखना गर्व की बात है. मोदी और शरीफ की सशक्त नेतृत्व क्षमता दिखी है. शांति ही भविष्य का रास्ता है.)

गौरतलब है कि बीते कुछ सप्ताहों से सीमा पर स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई थी. दोनों देशों की सेनाएं सतर्क थीं और युद्ध जैसे हालात की आशंका जताई जा रही थी. ऐसे में यह कदम पूरे उपमहाद्वीप के लिए राहत लेकर आया है.अब सभी की निगाहें उस तटस्थ स्थल पर होने वाली वार्ता पर टिकी हैं, जहां उम्मीद की जा रही है कि पुराने मुद्दों का समाधान शांतिपूर्ण तरीके से निकाला जाएगा.