भारत और कनाडा के बीच चल रहा विवाद गहराता जा रहा है. अब भारत ने अपने नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी की है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
भारत और कनाडा (India-Canada) के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है. इस बीच, भारत ने अपने नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी की है. विदेश मंत्रालय (Ministry of External Affairs) की तरफ से जारी इस एडवाइजरी में भारतीय नागरिकों और कनाडा की यात्रा करने वालों से अत्यधिक सावधानी बरतने का आग्रह किया गया है. एडवाइजरी में कहा गया है कि हाल ही में भारतीय राजनयिकों और उन भारतीयों को निशाना बनाया गया है, जो भारत विरोधी एजेंडे के खिलाफ हैं. इसलिए भारतीय नागरिकों को सलाह दी जाती है कि वे कनाडा के उन क्षेत्रों और संभावित स्थानों की यात्रा करने से बचें, जहां ऐसी घटनाएं सामने हैं.
कनाडा में भारतीयों की आबादी
विदेश मंत्रालय की तरफ से कहा गया है कि भारतीय उच्चायोग/वाणिज्य दूतावास कनाडा में भारतीय समुदाय की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्थानीय अधिकारियों के साथ संपर्क में रहेगा. गौरतलब है कि 4 करोड़ की कुल आबादी वाले कनाडा में भारतीय मूल के करीब 15 लाख लोग रहते हैं. इनमें 2021 की जनगणना के अनुसार, सिखों की संख्या 7 लाख 70 हजार है. पंजाब के लोग न केवल कनाडा में नौकरी करते हैं, बल्कि वहां के कारोबारी जगह में भी उनका अच्छा-खासा दबदबा है. खासकर, कृषि और डेयरी फार्मिंग आदि सेक्टर पर पंजाबियों का कब्जा है. पंजाब के अलावा, कनाडा में दिल्ली, यूपी, हरियाणा, राजस्थान और दक्षिण भारतीय राज्यों के लोग भी बड़ी संख्या में हैं.
स्टूडेंट्स पर लटकती तलवार
भारत से हर साल हजारों स्टूडेंट्स कनाडा पढ़ाई करने जाते हैं. अगर दोनों देशों के रिश्ते और बिगड़ते हैं, तो इन स्टूडेंट्स पर भी संकट आ सकता है. स्थानीय सरकार भारतीय स्टूडेंट्स के लिए नियम सख्त कर सकती है. इसके अलावा, उनका स्टूडेंट वीजा रद्द कर उन्हें डिपोर्ट करने का अधिकार भी उसके पास है. उधर, दोनों देशों के बीच चल रहे तनाव से व्यापारियों में भी चिंता का माहौल है. भारत और कनाडा के बीच व्यापारिक संबंध काफी अच्छे रहे हैं. दोनों देश एक-दूसरे के यहां से कुछ न कुछ मंगवाते रहे हैं और अपनी जरूरतों को पूरा करते रहे हैं. फाइनेंशियल ईयर 2023 में भारत ने कनाडा 4.11 अरब डॉलर (करीब 34 हजार करोड़ रुपए) का सामान निर्यात किया था. जबकि उसका आयात 4.17 अरब डॉलर (करीब 35 हजार करोड़ रुपए) का था. वित्त वर्ष 2021-22 के दौरान दोनों देशों के बीच 7 अरब डॉलर का व्यापार हुआ था. वित्त वर्ष 2022-23 में यह आंकड़ा बढ़कर 8.16 अरब डॉलर पहुंच गया. व्यापारियों को डर है कि विवाद सुलझने के बजाए और उलझ गया, तो उन्हें घाटा उठाना पड़ सकता है.
आखिर क्या है पूरा विवाद?
भारत और कनाडा के बीच खालिस्तान को लेकर विवाद की स्थिति पहले भी निर्मित होती रही है, लेकिन ताजा विवाद की शुरुआत नई दिल्ली में हुए G-20 शिखर सम्मेलन के दौरान हुई. PM मोदी ने G-20 समिट में भाग लेने पहुंचे कनाडाई पीएम जस्टिन ट्रूडो के सामने कनाडा में बढ़ रही खालिस्तानी गतिविधियों का मुद्दा उठाया. साथ ही उनसे उनकी धरती पर चल रही अलगाववादी गतिविधियां रोकने के लिए जरूरी कदम उठाने को भी कहा. इस पर कनाडा के PM ट्रूडो ने कह डाला कि भारत सरकार को कनाडा के घरेलू मामलों में दखल नहीं देनी चहिए. कनाडा पहुंचते ही जस्टिन ट्रूडो ने संसद में बयान दिया कि खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर कनाडा का नागरिक था और भारत पर उसकी हत्या करवाने का आरोप लगाया. इसके साथ ही उन्होंने एक भारतीय डिप्लोमैट को देश से निकाल दिया. जवाब में भारत सरकार ने दिल्ली में मौजूद कनाडा के डिप्लोमैट को 5 दिन में देश छोड़ने का आदेश दिया है.