हाथरस हादसा- जानिए कौन हैं भोले बाबा? जिनके कार्यक्रम में गई 100 से ज्यादा की जान

भगदड़ के जिम्मेदार माने जा रहा भोले बाबा का सत्संगी करियर 15 साल पहले शुरू हुआ था. कासगंज जिले के सूरज पाल सिंह पुलिस में SI के पद पर तैनात थे जो नौकरी छोड़कर भोले बाबा बन गए.

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Wednesday, 03 July, 2024
BWHindi

उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले में मंगलवार को बड़ा हादसा हो गया. यहां साकार हरि बाबा का एक दिवसीय सत्संग चल रहा था. वहां पर बच्चों के साथ महिलाएं और पुरुष बाबा का प्रवचन सुन रहे थे. लगभग पौने दो बजे सत्संग खत्म हुआ, बाबा के अनुयायी बाहर सड़क की ओर जाने लगे. तभी भगदड़ मच गई. हादसे में अब तक करीब 120 लोगों की मौत की खबर है. इस बड़े हादसे के बाद हर शख्स यह जानना चाहता है कि आखिर कथावाचक साकार हरि बाबा उर्फ भोले बाबा कौन हैं. जिसके सत्संग में इतनी ज्यादा तादाद में अनुयायी पहुंचे हुए थे. आइए जानते हैं बाबा साकार हरि उर्फ भोले बाबा के बारे में.

कौन हैं ‘भोले बाबा’?

नारायण साकार हरि या साकार विश्व हरि उर्फ भोले बाबा का जन्म उत्तर प्रदेश के एटा जिले में हुआ था. पटियाली तहसील में गांव बहादुर में जन्मे भोले बाबा खुद को गुप्तचर यानी इंटेलीजेंस ब्यूरो (IB) का पूर्व कर्मचारी बताते हैं. दावा है कि 26 साल पहले बाबा सरकारी नौकरी छोड़ धार्मिक प्रवचन करने लगे. भोले बाबा के पश्चिमी उत्तर प्रदेश सहित उत्तराखंड, हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली समेत देशभर में लाखों अनुयायी हैं. खास बात यह है कि इंटरनेट के जमाने में अन्य साधु सतों और कथावाचकों से इतर सोशल मीडिया से दूर हैं. बाबा का कोई आधिकारिक अकाउंट किसी भी प्लेटफॉर्म पर नहीं है. कथित भक्तों का दावा है कि नारायण साकार हरि यानी भोले बाबा के जमीनी स्तर पर खासे अनुयायी हैं.

सूट-बूट में रहते हैं बाबा

बाबा के बारे में कुछ लोग कहते हैं कि ये यूपी पुलिस में दरोगा हुआ करते थे. कुछ इन्हें आईबी से जुड़ा भी बताते हैं. इसीलिए बताया जाता है कि बाबा पुलिस के तौर-तरीकों से परिचित हैं. वर्दी धारी स्वयंसेकों की लंबी-चौड़ी फौज खड़ी करने में यह काफी मददगार साबित हुआ. बाबा आम साधु-संतों की तरह गेरुआ वस्त्र नहीं पहनते हैं. ज्यादातर वह महंगे गॉगल, सफेद पैंटशर्ट पहनते हैं. अपने प्रवचनों में बाबा पाखंड का विरोध भी करते हैं. चूंकि बाबा के शिष्यों में बड़ी संख्या में समाज के हाशिए वाले, गरीब, दलित आदि शामिल हैं. उन्हें बाबा का पहनावा और यह रूप बड़ा लुभाता है.

30 एकड़ में आश्रम और कारों का काफिला

10 साल पहले मैनपुरी पहुंचा बाबा का गांव में आश्रम 30 एकड़ में फैला हुआ है. जहां किसी देवता की मूर्ति नहीं है. 2014 में उसने बहादुर नगर से मैनपुरी के बिछवा में अपना ठिकाना बदल लिया और आश्रम का प्रबंधन स्थानीय प्रशासक के हाथों में छोड़ दिया. सूत्रों ने बताया कि उसके ठिकाना बदलने के बावजूद आश्रम में हर दिन 12,000 तक लोग आते थे. वह कारों 'के काफिले के साथ चलता है. इसके साथ ही भोले बाबा पर जमीन कब्जाने के भी कई आरोप हैं. कानपुर के बिधनू थाना कषेत्र के करसुई गांव में साकार विश्वहरि ग्रुप पर 5 से 7 बीघा जमीन पर अवैध कब्जा करने का आरोप लगा था.

राजनेताओं से भी है कनेक्शन

बाबा का कनेक्शन सियासत से भी है. कुछ मौकों पर UP के कई बड़े नेताओं को उनके मंच पर देखा गया. इसमें समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव का नाम भी शामिल है. अखिलेश यादव ने जनवरी, 2023 में एक समागम में हिस्सा लिया था. उन्होंने 4 तस्वीर X अकाउंट पर पोस्ट की जिसमें लिखा- नारायण साकार हरि की संपूर्ण ब्रह्मांड में सदा-सदा के लिए जय जयकार हो.