PM मोदी ने राष्ट्र के नाम संबोधम में कहा, जीएसटी 2.0 से भारत विकसित भारत की ओर एक और कदम बढ़ा रहा है. आइए हम सब संकल्प लें, भारतीय उत्पाद खरीदें, उद्योगों का समर्थन करें और आत्मनिर्भर, समृद्ध राष्ट्र बनाएं.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
देश में टैक्स सुधारों की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार यानी 21 सितबर को राष्ट्र के नाम संबोधन में जीएसटी 2.0 की घोषणा की. उन्होंने इसे "हर भारतीय के लिए बचत का त्योहार" बताते हुए कहा कि यह नई व्यवस्था देश की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देगी. 22 सितंबर 2025 से लागू होने वाली इस प्रणाली में कर ढांचे को सरल बनाकर आम जनता, किसानों, छोटे कारोबारियों और उद्योगों को राहत देने की कोशिश की गई है. जहां आवश्यक वस्तुओं और जीवनरक्षक दवाओं पर टैक्स कम किया गया है, वहीं तंबाकू, पान मसाला और लग्जरी उत्पादों पर उच्च दरें रखकर राजस्व संतुलन बनाए रखने की रणनीति अपनाई गई है.
आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया जैसे अभियानों को मजबूती
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि यह सुधार आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया जैसे अभियानों को मजबूती देगा और गरीब व मध्यम वर्ग को सीधी राहत पहुंचाएगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जीएसटी 2.0 को "हर भारतीय के लिए बचत का त्योहार" बताते हुए कहा कि यह सुधार देश की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देगा. जीएसटी 2.0 के तहत कर ढांचे को सरल बनाते हुए अब सिर्फ दो स्लैब 5% और 18% रखे गए हैं. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “2017 में जीएसटी ने भारत को ‘वन टैक्स, वन मार्केट, वन नेशन’ का रूप दिया था. अब जीएसटी 2.0 उस यात्रा का अगला चरण है, जिससे हर वर्ग को राहत मिलेगी.”
घरेलू उपभोक्ताओं और किसानों को राहत
- आवश्यक घरेलू सामान जैसे साबुन, टूथपेस्ट, खाने का तेल और भारतीय ब्रेड अब 5% या शून्य जीएसटी स्लैब में आएंगे.
- जीवनरक्षक दवाओं पर कर दर 12% से घटाकर शून्य या 5% कर दी गई है.
- टू-व्हीलर, छोटे कार, टीवी, एसी और सीमेंट जैसे उत्पाद अब 28% के बजाय 18% जीएसटी पर उपलब्ध होंगे.
- किसानों के लिए सिंचाई उपकरण, ट्रैक्टर और कृषि मशीनरी पर कर घटाकर 5% कर दिया गया है.
मोदी ने कहा, “यह सुधार खेती की लागत घटाएगा और किसानों की आय बढ़ाएगा.”
एमएसएमई और आत्मनिर्भर भारत को बढ़ावा
प्रधानमंत्री ने कहा कि जीएसटी 2.0 छोटे व्यापारियों और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) के लिए वरदान साबित होगा. सरल कर प्रणाली से उनके नकदी प्रवाह में सुधार होगा और अनुपालन संबंधी बाधाएं कम होंगी. उन्होंने लोगों से "मेक इन इंडिया" उत्पादों को प्राथमिकता देने का भी आह्वान किया.
राज्यों के बीच समानता और सहमति
जीएसटी 2.0 राज्यों की आय को मजबूत करेगा और मुआवजा उपकर पर निर्भरता कम करेगा. हाल ही में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में हुई जीएसटी काउंसिल की 56वीं बैठक में सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की सहमति से इन सुधारों को मंजूरी मिली.
विलासिता और हानिकारक उत्पादों पर कड़ा कर
जहां आम उपभोक्ताओं को राहत दी गई है, वहीं तंबाकू, पान मसाला, सॉफ्ट ड्रिंक्स और लग्ज़री सामान पर 40% जीएसटी लगाया गया है ताकि राजस्व संतुलन बना रहे और हानिकारक उत्पादों की खपत पर रोक लगे.
गरीब और मध्यम वर्ग के लिए बड़ा सहारा
मोदी ने बताया कि 2014 से अब तक लगभग 25 करोड़ भारतीय गरीबी से निकलकर नव-मध्यवर्ग में आए हैं. जीएसटी 2.0 इसी वर्ग को राहत देने के लिए बनाया गया है. उन्होंने कहा, “हमने 12 लाख रुपये तक की आय पर प्रत्यक्ष कर छूट दी है और अब जीएसटी राहत से आमजन को वास्तविक सशक्तिकरण का अनुभव होगा.” पर्यटन और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर को राहत देने के लिए होटल टैक्स भी कम कर दिया गया है.