सेंट एलोयसियस हाई स्कूल जबलपुर 1975 बैच का गोल्डन जुबली सेलिब्रेशन: यादें, मुलाकातें और प्रेरणादायक कहानियाँ

सेंट एलोयसियस हाई स्कूल, जबलपुर की 1975 बैच के पूर्व छात्रों ने अपने गोल्डन जुबली समारोह के दौरान पुरानी यादों को ताज़ा किया, एक-दूसरे से फिर जुड़ाव महसूस किया और अपने जीवन के अनुभवों को साझा किया.

Last Modified:
Monday, 14 April, 2025
BWHindi

जबलपुर स्थित सेंट एलोयसियस हाई स्कूल (St Aloysius High School) के 1975 बैच के पूर्व छात्रों ने मध्य प्रदेश में एक शानदार गेट-टूगेदर का आयोजन किया, जहां एक बार फिर ये सभी एक साथ जुटे हैं. इस बार अपने गोल्डन जुबली सेलिब्रेशन के बहाने, इस भव्य सप्ताहभर चलने वाले आयोजन में पुराने दोस्तों ने फिर से मुलाकात की, बचपन की सुनहरी यादों को ताजा किया और एक-दूसरे के अनुभवों से प्रेरणा लेने के लिए भावनात्मक और व्यावसायिक स्तर पर फिर से जुड़ाव महसूस किया.

व्यवसायी और प्रोफेशनल एक साथ
पूर्व छात्र आज जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में अपनी मजबूत पहचान बना चुके हैं, चाहे वो डॉक्टर हों, इंजीनियर, चार्टर्ड अकाउंटेंट, सरकारी अधिकारी, बिजनेस लीडर या समाजसेवी, सभी ने स्कूल में बिताए अपने शुरूआती वर्षों की स्मृतियों को परिवार के साथ साझा किया और एक बार फिर उन्हीं गलियों और क्लासरूम्स की भावनाओं में डूब गए जहाँ से उन्होंने उड़ान भरी थी.

प्रमुख चेहरे और उनकी प्रेरणादायक यात्रा
•    सतिंदर सिंह सेठी, जो अपने बेटे के साथ जबलपुर का प्रसिद्ध नंबर 7 मल्टीकुजीन रेस्टोरेंट चलाते हैं, आज कई रेस्टोरेंट्स और व्यवसायों के मालिक हैं.
•    सुनील अग्रवाल, जो कई व्यवसायों के संचालक हैं, मानते हैं कि, "ऐसी मुलाकातें हमारे विविध अनुभवों को साझा करने और मिलकर आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं."
•    कृष्णा वर्मा और शांतनु मोइत्रा, दोनों इलेक्ट्रॉनिक्स और टेलीकॉम इंजीनियर्स हैं, जिन्होंने विभिन्न मल्टीनेशनल कंपनियों में निदेशक, सीनियर वाइस प्रेसिडेंट और सलाहकार के रूप में सेवाएं दी हैं. उनका मानना है कि, "स्कूल में सिखाई गई मजबूत नैतिकता और मूल्य हमारे करियर की नींव बने."
•    श्रवि, चार्टर्ड अकाउंटेंट और बीएसई (बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज) के पूर्व चेयरमैन, का मानना है कि, "ऐसे कार्यक्रम न सिर्फ स्कूल की प्रतिष्ठा को बढ़ाते हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्त्रोत भी बनते हैं."

समाज हित में सहयोग की भावना
इस बैच के छात्र आज भी सामाजिक विकास के लिए एकजुट हैं और इस तरह की पुनर्मिलन सभाएं सामाजिक कल्याण के लिए सहयोग को प्रोत्साहित करती हैं. इसके साथ ही, स्कूल के वर्तमान छात्रों को विभिन्न पेशों में आगे बढ़ने और समाज की सेवा के लिए प्रेरित भी करती हैं.

बांधवगढ़ में यादों की शाम
इस समय यह बैच मध्यप्रदेश के सुरम्य वनक्षेत्र बांधवगढ़ में इकट्ठा होकर अपने बचपन की गहराइयों में डूबा हुआ है, जहाँ हर बातचीत में बीते वर्षों की महक है और हर मुस्कान में पुराने रिश्तों की गर्माहट है.