मुंबई-नागपुर-झारसुगुड़ा और श्रीकाकुलम-अंगुल गैस पाइपलाइन परियोजनाओं की लागत और समयसीमा में हुआ संशोधन
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
सरकारी स्वामित्व वाली गैस कंपनी गेल (इंडिया) लिमिटेड ने सोमवार को जानकारी दी कि वह डाभोल-उरण-दहेज-पनवेल (DUPL-DPPL) प्राकृतिक गैस पाइपलाइन नेटवर्क की क्षमता विस्तार के लिए ₹844 करोड़ का निवेश करेगी. यह परियोजना देश में बढ़ती ऊर्जा मांग को पूरा करने के लिए अगले तीन वर्षों में पूरी की जाएगी.
इस विस्तार के बाद पाइपलाइन की क्षमता 19.9 मिलियन स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर प्रति दिन (mmscmd) से बढ़कर 22.5 mmscmd हो जाएगी. कंपनी के निदेशक मंडल ने 23 जून को हुई बैठक में इस निवेश प्रस्ताव को मंजूरी दी.
एमएनजेपीएल परियोजना में देरी, लागत में इज़ाफा
गेल ने अपने प्रमुख 1,702 किलोमीटर लंबे मुंबई-नागपुर-झारसुगुड़ा पाइपलाइन (MNJPL) परियोजना की संशोधित समयसीमा और लागत का भी एलान किया. भूमि अधिग्रहण और नियामकीय मंज़ूरियों में देरी के चलते इस परियोजना की पूर्णता तिथि अब 30 जून 2025 से बढ़ाकर 30 सितंबर 2025 कर दी गई है.
इसके साथ ही परियोजना लागत में ₹411.12 करोड़ की वृद्धि हुई है, जिससे संशोधित कुल लागत ₹8,255.37 करोड़ हो गई है—जो कि पहले अनुमानित ₹7,844.25 करोड़ से 5.24% अधिक है.
गेल के अनुसार, 693 किमी लंबे मुंबई-नागपुर खंड का कार्य लगभग पूरा हो चुका है, केवल 1 किमी का काम बाकी है. वहीं 692 किमी के नागपुर-झारसुगुड़ा हिस्से में 98% यांत्रिक कार्य पूरा हो चुका है, जबकि नागपुर-जबलपुर की 317 किमी लाइन में 97% कार्य पूरा है. कंपनी ने देरी का कारण वन्यजीव बोर्ड (NBWL) से मंज़ूरी, हाईवे अनुमति और स्थानीय भूमि अधिग्रहण में अड़चनों को बताया है.
श्रीकाकुलम-अंगुल पाइपलाइन भी देरी की राह पर
गेल ने 744 किमी लंबे श्रीकाकुलम-अंगुल गैस पाइपलाइन परियोजना की समयसीमा में भी बदलाव की घोषणा की है. यह परियोजना पहले जून 2025 तक पूरी होनी थी, लेकिन अब इसे दिसंबर 2025 तक पूरा किया जाएगा. कंपनी के अनुसार, 422 किमी मुख्य पाइपलाइन का यांत्रिक कार्य पूरा हो चुका है और कमीशनिंग शुरू हो गई है. हालांकि, 322 किमी की स्पर लाइनों में से केवल 252 किमी पाइप बिछाई जा चुकी है. इसके पीछे कारण वन मंजूरी में देरी बताया गया है—56 किमी में से केवल 45 किमी हिस्से की ही मंजूरी अब तक मिल पाई है.
गेल की यह परियोजनाएं भारत के गैस आधारित ऊर्जा ढांचे को मज़बूत करने और प्राकृतिक गैस की पहुंच को अंतिम छोर तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाएंगी.