वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि टैक्स डिपार्टमेंट 'पहले विश्वास और बाद में जांच' की नीति पर काम करेगा.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 2025 का आम बजट पेश किया. यह सीतारमण का लगातार आठवां बजट था. वित्त मंत्री ने अगले सप्ताह संसद में नया टैक्स विधेयक पेश करने की घोषणा की है. उन्होंने कहा कि सरकार टैक्सपेयर्स की सुविधा के लिए एक दशक से टैक्स रिफॉर्म्स लागू करने में लगी है. इनमें फेसलेस एसेसमेंट, टैक्सपेयर चार्टर और रिटर्न का तेजी से प्रोसेसिंग शामिल है. लेकिन सरकार ने ऐसे समय में एक कड़ा संदेश देने का फैसला किया है.
दो या तीन हिस्सों में हो सकता है नया कानून
हालांकि नए इनकम टैक्स बिल को लेकर कई मीडिया रिपोर्ट में पहले से ही दावा किया जा रहा था. उम्मीद की जा रही है इस बार बजट सत्र के दौरान नए प्रत्यक्ष कर कानून (New Direct Tax Law) के लिए एक विधेयक पेश किया जा सकता है. यह विधेयक प्रत्यक्ष कर कानून के प्रावधानों को आसान बनाने पर फोकस करेगा. इस बार नए कानून में अधूरे और अप्रचलित प्रावधान को खत्म करके भाषा को सामान्य लोगों के लिए ज्यादा समझने योग्य बनाने की कोशिश रहेगी. सूत्रों के अनुसार 63 साल पुराने आयकर अधिनियम (Income Tax Act) की जगह लेने वाला नया कानून दो या तीन हिस्सों में हो सकता है.
सरकार क्यों उठा रही यह कदम?
सरकार ने पहले यह भी कहा था कि अधिकारियों की समिति की तरफ से तैयार किये जाने वाले कानूनी मसौदा को लोगों की राय के लिए जारी किया जाएगा. लेकिन अब उम्मीद है कि सरकार सीधे संसद में विधेयक पेश करेगी. सरकार की तरफ यह कदम इसलिए उठाया जा रहा है क्योंकि जटिल टैक्स नियमों को लेकर सरकार की आलोचना हो रही है. सरकार का मानना है कि जनता और जानकारों से मिलने वाले फीडबैक के आधार पर विधेयक में बाद में बदलाव किये जा सकते हैं. इसके लिए वित्त मंत्रालय और पीएमओ अधिकारियों ने पिछले छह-आठ हफ्ते में समिति के साथ मिलकर तेजी से काम किया, ताकि इसे बजट पेश होने तक तैयार किया जा सके. वित्त मंत्री की घोषणा के बाद यह तय हो गया है कि नए इनकम टैक्स एक्ट को बजट सत्र के पहले सेशन में पेश किया जाएगा.
पहले भी हो चुकी है बदलाव की कोशिश
आपको बता दें यह कम से कम तीसरी मौका है जब इनकम टैक्स एक्ट को बदलने की कोशिश की जा रही है. इससे पहले 2010 में भी ऐसा करने की कोशिश की गई थी. लेकिन उस समय बनाए गए कानून को लागू नहीं किया गया. इसके बाद मोदी सरकार ने भी एक समिति बनाई थी, लेकिन उसकी सिफारिशों को भी नहीं माना गया. अब जो समिति बनी है, उससे कहा गया है कि नए कानून में उन सभी छोटे-छोटे नियमों को हटा दिया जाए जो कानून को बहुत जटिल बनाते हैं.
नया एक्ट काफी आसान होगा
कई नियम जो अब जरूरी नहीं हैं, उन्हें आयकर अधिनियम से हटा दिया गया है और नए कानून में भी शामिल नहीं किया जाएगा. एक सूत्र ने बताया कि नया कानून इतना सरल होगा कि आम आदमी भी उसे आसानी से समझ सके. हालांकि, सरकार प्रस्तावित कानून में अभी कोई नए मामले शामिल नहीं कर रही है. अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि भाषा में बदलाव से मुकदमेबाजी हो सकती है क्योंकि करदाता कई मामलों में नई व्याख्या चाहेंगे.