Saïd Business School में बोलते हुए BW बिजनेसवर्ल्ड के चेयरमैन और एडिटर-इन-चीफ ने दुनिया से आग्रह किया कि वह भारत की भू-राजनीतिक आत्मविश्वास, सॉफ्ट पावर और सभ्यतागत नेतृत्व को पहचाने
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
21 जून 2025 को, BW बिजनेसवर्ल्ड मीडिया ग्रुप के चेयरमैन और एडिटर-इन-चीफ तथा exchange4media के फाउंडर अनुराग बत्रा ने ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के सईद बिजनेस स्कूल (Saïd Business School) में आयोजित एक विशेष मंच पर दुनिया के सामने एक स्पष्ट संदेश रखा - अब समय आ गया है कि भारत को अलग नजरिए से देखा जाए. ऑक्सफोर्ड के प्रतिष्ठित नेल्सन मंडेला लेक्चर थिएटर में आयोजित इस कार्यक्रम में बत्रा, आध्यात्मिक नेता गौरांग दास (Gauranga Das) और भाजपा के विदेश मामलों के विभाग प्रमुख विजय चौथईवाले (Vijay Chauthaiwale) जैसी प्रभावशाली भारतीय हस्तियों के साथ मंच पर मौजूद थे.
डॉ बत्रा का संबोधन एक भावनात्मक, विचारोत्तेजक और विश्लेषणात्मक प्रस्तुति थी - जिसमें उन्होंने भारत की वैश्विक भूमिका, सांस्कृतिक आत्मविश्वास और अपनी व्यक्तिगत यात्रा के अनुभवों को मिश्रित करते हुए भारत की बदलती छवि का खाका खींचा. उन्होंने मंच से श्रोताओं को प्रतीकात्मक रूप से आमंत्रित किया: “चाय को सूंघिए” (smell the chai). यह सिर्फ चाय नहीं, बल्कि आधुनिक भारत की बहुलतावादी आत्मा से जुड़ने का एक आह्वान था.
विश्व मंच पर आत्मविश्वास से भरा भारत
दिल्ली की गलियों में अपने माता-पिता के साथ चाय पीने की यादों से शुरुआत करते हुए बत्रा ने यह दर्शाया कि भारत अब विश्व मामलों में सिर्फ दर्शक नहीं, बल्कि एक आत्मविश्वासी निर्णायक बन चुका है. उन्होंने कहा, “भारत अब वैश्विक मामलो में कोई शर्मीला बच्चा नहीं रहा,” और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बहुपक्षीय मंचों पर बढ़ती भूमिका का उल्लेख करते हुए यह स्पष्ट किया कि अब दुनिया भारत की बात सुनना चाहती है.
डॉ बत्रा ने भारत की कूटनीतिक समझदारी से लेकर ऑपरेशन सिंदूर जैसी रक्षा रणनीतियों का उदाहरण देते हुए कहा, “भारत आज एक ऐसे देश की तरह मंच पर उतरता है जिसे अपनी कीमत पता है.”
मीडिया की एकतरफा दृष्टि पर सवाल
डॉ बत्रा ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया के भारत को देखने के नजरिए पर भी सीधा सवाल उठाया. उन्होंने CNN के रिज़ ख़ान (Riz Khan) और BBC के टिम सेबास्टियन (Tim Sebastian) जैसे पत्रकारों के साथ अपने अनुभव साझा किए और पश्चिमी पत्रकारिता की सराहना की ,लेकिन साथ ही उनके द्वारा भारत की सीमित और अक्सर नकारात्मक प्रस्तुति पर नाराजगी जताई.
उन्होंने कहा, “भारत की कूटनीतिक परिपक्वता को संक्षिप्त और सतही हेडलाइनों से परे समझने की ज़रूरत है.” उन्होंने अपने पहले लिखे कॉलम ‘Hello CNN, BBC And The World Media - Time To Tune Into India’ का ज़िक्र करते हुए अंतरराष्ट्रीय मीडिया से भारत को एक संतुलित नजरिए से देखने की अपील दोहराई.
आत्म-विश्वास पर आधारित विकास का खाका
डॉ बत्रा का संदेश केवल बाहरी नजरिए की आलोचना नहीं था, बल्कि भारत के भीतरी बदलावों का उत्सव भी था. उन्होंने कोविड-19 महामारी के दौरान भारत के वैक्सीन कार्यक्रम की सफलता, यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) की वैश्विक पहचान और IIT जैसे संस्थानों पर बढ़ते गर्व का उल्लेख किया.
उन्होंने कहा, “हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, जो एक ही ढाबे पर चाय पीते हैं - यही हमारी धड़कन है.”
डॉ बत्रा ने इस बात पर भी ध्यान दिलाया कि वैश्विक मीडिया ने भारत की वैक्सीन उपलब्धियों को सराहा तो, लेकिन 'अब भी लाखों को टीका नहीं मिला' जैसे वाक्यों से उसकी गंभीरता को कम कर दिया. उनके अनुसार, संकट की घड़ी में भारत की तेज़, समावेशी और आत्मनिर्भर प्रतिक्रिया, एक नए भारत की पहचान है.
दिल से दुनिया को जोड़ने वाली भारत की सॉफ्ट पावर
सिर्फ शक्ति नहीं, संस्कृति भी - इस सोच को आगे बढ़ाते हुए डॉ बत्रा ने भारत की सॉफ्ट पावर की बात की. योग दिवस से लेकर बॉलीवुड, भारतीय त्योहारों और विश्वभर में बसे भारतीयों की सफलता को उन्होंने भारत की 'सीमा नहीं, सेतु' बनाने वाली सोच का प्रमाण बताया. उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा - हमारा 3.2 करोड़ का प्रवासी समुदाय, दुनिया भर में हमारी चाय पिलाने वाली संस्कृति का प्रतिनिधि है. उनके मुताबिक, यह भारत की सबसे बड़ी रणनीतिक ताकत है - बिना ज़ोर डाले असर पैदा करना.
भारत का 'ना' भी रणनीति है
डॉ बत्रा ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत का दृष्टिकोण केवल उत्साह या उम्मीदों पर आधारित नहीं है, बल्कि यह सोच-समझकर अपनाई गई रणनीति है. उन्होंने हाल के व्यापार समझौते को ठुकराने, भारत-पाकिस्तान मसले में तीसरे पक्ष की मध्यस्थता न स्वीकारने और एक स्वतंत्र बहुपक्षीय नीति अपनाने जैसे उदाहरण देकर बताया कि भारत अब अपनी शर्तों पर वैश्विक संबंध बना रहा है.
डॉ बत्रा ने कहा कि हाल ही में एक व्यापार समझौता जो भारत के दीर्घकालिक फायदे का नहीं था, उसे भारत ने ठुकरा दिया.
भारत को फिर से देखने की अपील
अपने भाषण के अंत में डॉ बत्रा ने श्रोताओं और वैश्विक समुदाय को, भारत को पुरानी धारणाओं और पूर्वग्रहों से परे देखने की अपील की. उन्होंने कहा, “भारत सिर्फ एक राष्ट्र नहीं, एक वाइब है - एक विश्वगुरु जो दुनिया को राह दिखा रहा है.”
व्यक्तिगत अनुभवों, सटीक आंकड़ों और वैश्विक परिप्रेक्ष्य के साथ डॉ बत्रा ने भारत को एक उभरती ताकत नहीं, बल्कि लोकतंत्र, बहुलवाद, आत्मविश्वास और करुणा के एक उभरते मॉडल के रूप में पेश किया. उन्होंने एक भावनात्मक पंक्ति में समापन किया: “अपना कप उठाइए उस राष्ट्र के लिए, जो सिर्फ चाय नहीं, बल्कि एक नई वैश्विक कहानी भी बनाता है।”
एक महत्वपूर्ण मंच
ऑक्सफोर्ड के सईद बिजनेस स्कूल में आयोजित इस मंच का संचालन खुद अनुराग बत्रा ने किया. मंच पर गौरांग दास और विजय चौथईवाले जैसे वक्ताओं ने भी भारत के सामाजिक और रणनीतिक दृष्टिकोण को साझा किया. चर्चा का केंद्रबिंदु यह था कि भारत कैसे एक बहुध्रुवीय विश्व में अपनी सांस्कृतिक जड़ों और राजनीतिक प्राथमिकताओं के साथ वैश्विक विमर्श को दिशा दे रहा है.