जो हवाईअड्डे अब परिचालन में नहीं हैं, उनमें डोनकोंडा, दापारिजो, जोगबनी, मुजफ्फरपुर, रक्सौल, दीसा, चकुलिया, धालभूमगढ़, खंडवा, पन्ना, शेला, आइजोल, तंजावुर, वेल्लोर, नादिरगुल, वारंगल, कैलाशहर, कमलपुर, खोवाई, आसनसोल, बालुरघाट और मालदा शामिल हैं
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) के तहत संचालित हवाईअड्डों को पिछले 10 वित्तीय वर्षों में कुल 10,852.9 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है. इनमें से 22 हवाईअड्डे अब परिचालन में नहीं हैं. नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री Murlidhar Moholने 4 अगस्त को राज्यसभा में यह जानकारी दी.
कांग्रेस सांसद Jebi Mather Hisam के प्रश्न के जवाब में Murlidhar Mohol ने बताया कि दिल्ली का सफदरजंग हवाईअड्डा सबसे अधिक घाटे में रहा, जहां 673.91 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ. इसके बाद अगरतला (605.23 करोड़ रुपये), हैदराबाद (564.97 करोड़ रुपये), देहरादून (488.01 करोड़ रुपये) और विजयवाड़ा (483.69 करोड़ रुपये) का स्थान है. अन्य प्रमुख घाटे वाले हवाईअड्डों में भोपाल (480.43 करोड़ रुपये), औरंगाबाद (447.83 करोड़ रुपये), तिरुपति (363.71 करोड़ रुपये), खजुराहो (355.53 करोड़ रुपये) और इम्फाल (355.19 करोड़ रुपये) शामिल हैं.
मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, सफदरजंग हवाईअड्डा ऐतिहासिक रूप से राजधानी का मुख्य हवाईअड्डा रहा है, लेकिन अब यहां से वाणिज्यिक उड़ानें संचालित नहीं होतीं. यह मुख्य रूप से वीवीआईपी को इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे तक ले जाने के लिए इस्तेमाल होता है.
जो हवाईअड्डे अब परिचालन में नहीं हैं, उनमें डोनकोंडा, दापारिजो, जोगबनी, मुजफ्फरपुर, रक्सौल, दीसा, चकुलिया, धालभूमगढ़, खंडवा, पन्ना, शेला, आइजोल, तंजावुर, वेल्लोर, नादिरगुल, वारंगल, कैलाशहर, कमलपुर, खोवाई, आसनसोल, बालुरघाट और मालदा शामिल हैं.
मोहोळ ने बताया कि 21 अक्टूबर 2016 को शुरू की गई क्षेत्रीय संपर्क योजना – ‘उड़े देश का आम नागरिक’ (RCS-UDAN) के तहत एयरलाइंस को वायबिलिटी गैप फंडिंग दी जाती है, ताकि संचालन लागत और संभावित राजस्व के बीच की कमी को पूरा किया जा सके. वित्त वर्ष 2025-26 के लिए इस योजना के लिए 300 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं. अब तक इस योजना के तहत 92 unserved और underunserved हवाईअड्डे, जिनमें 15 हेलीपोर्ट और दो वाटर एयरोड्रोम शामिल हैं, को परिचालन में लाया गया है.