7वां ICSE सम्मेलन: हरित अर्थव्यवस्था के लिए शिक्षा और कौशल के बीच पुल का निर्माण जरूरी

ICSE 2025 ने इस कान्फ्रेंस के माध्यम से यह संदेश दिया कि सतत शिक्षा ही हरित आजीविका के द्वार खोल सकती है और भारत के सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने में कारगर साबित होगी.

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Friday, 19 September, 2025
BWHindi

नई दिल्ली के इंडिया हैबिटेट सेंटर में "हरित नौकरियों के लिए सतत शिक्षा" थीम पर आयोजित दो दिवसीय 7वें इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन सस्टेनेबिलिटी एजुकेशन (ICSE 2025) का समापन हुआ. इस सम्मेलन ने शिक्षाविदों, नीति-निर्माताओं, उद्योग विशेषज्ञों और युवाओं को एक मंच पर लाकर शिक्षा को हरित अर्थव्यवस्था की जरूरतों के अनुरूप बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण संवाद स्थापित किया. सम्मेलन में नवीकरणीय ऊर्जा, सतत कृषि, सर्कुलर अर्थव्यवस्था, ब्लू इकोनॉमी और जैव विविधता संरक्षण जैसे क्षेत्रों में हरित रोजगार के अवसरों पर गहन चर्चा हुई.

सम्मेलन में उपस्थित प्रमुख अतिथियों ने भी इस विषय पर अपनी महत्वपूर्ण प्रतिक्रियाएं दीं. यूनेस्को साउथ एशिया के प्रमुख डॉ. बेनो बोअर ने कहा, "सरकारों और निजी क्षेत्र के बीच सहयोग को मजबूत करना होगा ताकि हरित रोजगार के नए अवसर पैदा किए जा सकें और दुनिया को अधिक न्यायसंगत और टिकाऊ बनाया जा सके."

IREDA के चेयरमैन प्रदीप कुमार दास ने कहा, "भारत के नेट-जीरो लक्ष्य के लिए अनुशासित कार्बन कटौती और हरित शिक्षा पर विशेष ध्यान देना अनिवार्य है. नवीकरणीय ऊर्जा के प्रति व्यापक जागरूकता और किसान सशक्तिकरण इस दिशा के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं."  वहीं, नीति आयोग के अमित वर्मा ने जोर देते हुए कहा, "हरित अर्थव्यवस्था की मांग को पूरा करने के लिए शिक्षा और व्यावसायिक प्रशिक्षण को सुधारना होगा, जिससे नवाचार को जमीन पर उतारा जा सके." 

श्री पद्मपत सिंघानिया विश्वविद्यालय के अध्यक्ष एवं कुलपति प्रो. पृथ्वी यादव ने कहा, "हरित नौकरियों के लिए तकनीकी ज्ञान के साथ-साथ पर्यावरणीय जिम्मेदारी की सोच भी जरूरी है. विश्वविद्यालयों को ऐसे युवा तैयार करने होंगे जो न केवल नौकरी के लिए तैयार हों, बल्कि जिम्मेदार वैश्विक नागरिक भी बनें."

वहीं, सेंटर फॉर एनवायरनमेंट एजुकेशन (CEE) के संस्थापक निदेशक कार्तिकेय साराभाई ने कहा, "शिक्षा संस्थानों को अनुभवात्मक और समस्या-आधारित सीखने के माध्यम से सततता के लिए तैयार करना होगा ताकि युवा अर्थव्यवस्था के हरित भविष्य में योगदान दे सकें."

सम्मेलन के समापन सत्र में ICSE संयोजक व मोबियस फाउंडेशन के सलाहकार ने डॉ. राम बूझ, ने कहा "ICSE सात वर्षों से विचार और क्रिया का मंच बना हुआ है. इस बार की थीम ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक शिक्षा को हरित आजीविका से नहीं जोड़ा जाएगा, तब तक सतत विकास अधूरा रहेगा." 

मोबियस फाउंडेशन के अध्यक्ष प्रदीप बर्मन ने जोर देकर कहा कि सतत विकास के लिए शिक्षा को मजबूत आधार बनाना बेहद जरूरी है. और अध्यक्ष प्रवीण गर्ग ने कहा कि शिक्षा प्रणाली को तेजी से विकसित कर अगली पीढ़ी को हरित, समावेशी और लचीली अर्थव्यवस्था के लिए तैयार करना होगा. ICSE 2025 ने न केवल शिक्षा और कौशल के बीच सेतु बनाया बल्कि भारत के सतत विकास के लिए एक ठोस रोडमैप भी प्रस्तुत किया.