COP30 में घोषित पहल का लक्ष्य - अत्यधिक गर्मी, वायु प्रदूषण और जलवायु-संवेदनशील बीमारियों से निपटने के लिए तेज़ कार्रवाई; बेलें हेल्थ एक्शन प्लान को मिलेगा बड़ा प्रोत्साहन
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
ब्राज़ील के बेलें में आयोजित COP30 के दौरान वैश्विक परोपकारी संस्थानों के एक समूह ने जलवायु परिवर्तन और स्वास्थ्य संकट से निपटने के लिए 300 मिलियन डॉलर की शुरुआती प्रतिबद्धता की घोषणा की है. यह पहली बार है जब इतने बड़े पैमाने पर फंडर्स एक साथ आए हैं ताकि जलवायु और स्वास्थ्य को एकीकृत कर समाधान तेज़ी से आगे बढ़ाए जा सकें.
क्लाइमेट एंड हेल्थ फंडर्स कोएलिशन की यह पहली फंडिंग अत्यधिक गर्मी, वायु प्रदूषण और जलवायु-संवेदनशील संक्रामक रोगों से निपटने के लिए अनुसंधान, नीति-निर्माण और नवाचार को बढ़ावा देगी. इसके साथ ही, जलवायु व स्वास्थ्य आंकड़ों को एकीकृत कर स्थानीय स्वास्थ्य-प्रणालियों को अधिक सुदृढ़ बनाने पर भी जोर होगा.
यह कदम हाल ही में पेश किए गए बेलें हेल्थ एक्शन प्लान के अनुरूप है, जो ग्लोबल क्लाइमेट एक्शन के केंद्र में मानव स्वास्थ्य को स्थापित करने की मांग करता है.
वैश्विक फाउंडेशनों का गठजोड़
इस कोएलिशन में शामिल प्रमुख संस्थानों में ब्लूमबर्ग फिलैंथ्रॉपीज़, चिल्ड्रन्स इन्वेस्टमेंट फंड फाउंडेशन, गेट्स फाउंडेशन, आईकेईए फाउंडेशन, क्वाड्रेटर क्लाइमेट फाउंडेशन, द रॉकफेलर फाउंडेशन, टेमासेक ट्रस्ट का फिलैंथ्रॉपी एशिया अलायंस, और वेलकम शामिल हैं.
इनका उद्देश्य है—सबसे अधिक जोखिम वाले समुदायों तक तेज़ी से समाधान पहुंचाना, ठोस नीति हस्तक्षेपों को समर्थन देना और अनुसंधान व तकनीक में निवेश बढ़ाना.
बढ़ते तापमान से बढ़ रहा स्वास्थ्य संकट
पिछले दस साल सबसे गर्म दशक रहे हैं और अगले पांच वर्षों तक रिकॉर्ड गर्मी जारी रहने की आशंका है. विशेषज्ञों का कहना है कि यदि तापमान में बढ़ोतरी 1.5°C से ऊपर चली गई, तो दुनिया को कहीं अधिक गंभीर स्वास्थ्य प्रभावों का सामना करना पड़ेगा.
बढ़ती गर्मी के कारण:
घातक हीटवेव.
बढ़ता वायु प्रदूषण.
कुपोषण की स्थिति बिगड़ना.
मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य पर खतरा.
मलेरिया और डेंगू जैसी बीमारियों का प्रसार.
इसके अलावा, चरम मौसम खाद्य और जल आपूर्ति को बाधित कर रहा है तथा स्वास्थ्य ढांचे पर भी दबाव बढ़ा रहा है—विशेषकर उन क्षेत्रों में जहां संसाधनों की कमी पहले से है.
“कोई भी संस्था यह अकेले नहीं कर सकती.”
रॉकफेलर फाउंडेशन के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट (हेल्थ) नवीन राव ने कहा: “जलवायु परिवर्तन हमारे समय का सबसे बड़ा स्वास्थ्य खतरा है, और इसे कोई भी संस्था, समुदाय या देश अकेले नहीं झेल सकता. यह कोएलिशन मिलकर प्राथमिकताओं को संरेखित कर समाधान को तेज़ कर सकता है, अधिक समुदायों तक पहुंच सकता है और बड़े पैमाने पर प्रभाव डाल सकता है.”