16 वर्षीय प्रीथम ने माउंट किलिमंजारो की चोटी फहराया तिरंगा, एनसीसी और स्कूल का झंडा

दिल्ली पब्लिक स्कूल के चार छात्र पर्वतारोहियों के एक समूह ने विभिन्न चुनौतियों का सामना करते हुए माउंट किलिमंजारो की चोटी पर सफलतापूर्वक चढ़ाई की.

Last Modified:
Tuesday, 20 August, 2024
BWHindi

16 वर्षीय छात्र प्रीथम गोली ने इतिहास रचते हुए अपने शहर के सबसे युवा पर्वतारोहियों में से एक बनकर माउंट किलिमंजारो की चोटी पर सफलतापूर्वक चढ़ाई की. इस महत्वाकांक्षी युवा पर्वतारोही ने 8 दिन की कैंपेनिंग के बाद माउंट किलिमंजारो चोटी पर पहुंचकर अपनी शारीरिक सहनशक्ति और मानसिक दृढ़ता का परिचय दिया है. प्रीथम ने चोटी पर पहुंचकर गर्व से तिरंगा सहित एनसीसी और अपने स्कूल का झंडा भी फहराकर एक विशेष रिकॉर्ड बना लिया है.   

12वीं कक्षा के छात्र हैं प्रीथम

प्रीथम दिल्ली पब्लिक स्कूल में 12वीं कक्षा के छात्र हैं, जिन्होंने 12 जुलाई को 4 पर्वतारोहियों के एक समूह के साथ अपनी यात्रा शुरू की. समूह का नेतृत्व अनुभवी पर्वतारोही सत्यरूप सिद्धांत ने किया. चढ़ाई के दौरान समूह को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन प्रीथम के दृढ़ संकल्प और हिम्मत ने उन्हें शिखर तक पहुंचा दिया.

प्रथम ने साझा किया अपना अनुभव

प्रीथम ने बताया कि एवरेस्ट बेस कैंप पूरा करने के बाद भी वह संतुष्ट नहीं थे, वह और अधिक करना चाहता थे और ऊंचाईयों तक पहुंचना चाहते थे, इसलिए उन्होंने किलिमंजारो की चोटी की चढ़ाई की. उन्होंने बताया कि किलिमंजारो की चढ़ाई करते समय उन्हें कभी-कभी अकेलापन महसूस होता था, लेकिन उन्होंने इसका आनंद लिया. सबसे दूर होने के कारण उन्हें यह भी एहसास हुआ कि हमारी ये जिंदगी कितनी सरल है. उन्हें वहां शांति महसूस होती थी, जो पहले कभी महसूस नहीं की थी.

सुबह-सुबह 3 बजे शिखर पर की चढ़ाई

प्रीथम ने बताया कि सबसे कठिन दिन उनके लिए शिखर पर चढ़ाई करने का दिन था, उन्होंने सुबह सुबह 3 बजे ठंडी हवाओं के बीच चढ़ाई शुरू की. उन्होंने बताया कि चढ़ाई बिल्कुल खड़ी थी, महीन बजरी व रेत से बनी फिसलन भरी जमीन के कारण चोटी पर चढ़ने का रास्ता बहुत कठिन था. शिखर पर पहुंचने से बिल्कुल पहले, उन्हें तेज सिर दर्द शुरू हो गया, जो ऊंचाई के कारण सामान्य है, इसलिए उन्होंने बस आगे बढ़ते रहने का फैसला किया. जब वह शिखर पर पहुंचे तो जो एहसास हुआ वह जादुई था, चढ़ाई के दौरान आई सभी मुश्किलें अचानक गायब हो गईं, हालांकि समूह ने क्रेटर कैंप में ठहरने की योजना बनाई थी, लेकिन खराब मौसम के कारण उन्हें उसी रात बाराफू कैंप में उतरना पड़ा.

अपने स्कूल और सहयोगियों को दिया श्रेय

प्रीथम ने कहा है वह अपने दिल्ली पब्लिक स्कूल, नचाराम के सहयोग के लिए धन्यवाद करते हैं और विशेष रूप से सत्यरूप सिद्धांत सर का भी धन्यवाद करते हैं, जिन्होंने उन्हें पर्वत की चोटी तक पहुंचने में मदद की. उनके बिना यह चढ़ाई बहुत कठिन होती, इसलिए वह अपने स्कूल और सत्यरूप सिद्धांत सर को इसका श्रेय देते हैं.