29.9 प्रतिशत के साथ सबसे अधिक युवा उत्तर प्रदेश में हैं. इसके बाद युवाओं की सबसे ज्यादा संख्या 29.3 प्रतिशत कश्मीर में है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
नई दिल्ली: राजनेताओं को ऐसा कहते आपने कई बार सुना होगा कि जितनी अधिक संख्या में युवा होंगे, तरक्की उतनी तेजी से होगी. पर क्या वास्तव में ऐसा होता है? यदि सचमुच ऐसा होता तो फिर रोजगार और आमदनी के मामले में सबसे आगे यूपी, बिहार और राजस्थान होते, क्योंकि यहां युवाओं की संख्या बहुत ज्यादा है. पर अफसोस इन राज्यों में बेरोजगारी भी सबसे ज्यादा है और कमाई के मामले में भी ये राज्य बहुत पीछे हैं.
आइए, इसे अब आंकड़ों से समझते हैं
स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक 29.9 प्रतिशत के साथ सबसे अधिक युवा उत्तर प्रदेश में हैं. इसके बाद युवाओं की सबसे ज्यादा संख्या 29.3 प्रतिशत कश्मीर में है. उत्तराखंड में 29.2 प्रतिशत युवा हैं. वहीं, झारखंड में 29.1 प्रतिशत और बिहार में युवाओं की संख्या 28.8 प्रतिशत है. राजस्थान में 28.7 प्रतिशत युवा हैं. स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, 11 राज्यों में 15-29 साल की युवा आबादी की राष्ट्रीय औसत 27.2 प्रतिशत से ज्यादा है.
सबसे ज्यादा बेरोजगारी वाले राज्य
अब बात करते हैं भारत में सबसे ज्यादा बेरोजगार वाले राज्य कौन से हैं. राजस्थान में 28.7 प्रतिशत युवा हैं, पर इस राज्य में बेरोजगारी सबसे ज्यादा है. इस राज्य में बेरोजगारी दर 23.8 प्रतिशत है. कश्मीर में 29.3 प्रतिशत युवा हैं, पर यहां बेरोजगारी दर 23.2 प्रतिशत है. हरियाणा में बेरोजगारी दर 22.9 प्रतिशत है. वहीं, 29.1 प्रतिशत युवा वाले राज्य झारखंड में बेरोजगारी दर 12.2 प्रतिशत है. बिहार में बेरोजगारी दर 11.4 प्रतिशत है, जबकि इस राज्य में युवाओं की संख्या 28.8 प्रतिशत है. इसी तरह दिल्ली में 9.6 प्रतिशत, महाराष्ट्र में 4 प्रतिशत, तमिलनाडु में 4.1 प्रतिशत, आंध्र प्रदेश में 4.8 प्रतिशत, केरल में 6.4 प्रतिशत, पंजाब में 7 प्रतिशत और हिमाचल प्रदेश में 9.2 प्रतिशत बेरोजगारी दर है. CMIE की सितंबर 2022 की रिपोर्ट के मुताबिक, देश में औसत बेरोजगारी दर 6.43 प्रतिशत है.
किस राज्य में प्रति व्यक्ति आमदनी कितनी है
इस कैटेगरी में सबसे पीछे बिहार है. 28.8 प्रतिशत युवाओं वाले राज्य बिहार में प्रति व्यक्ति आय 46,292 रुपये सालाना है. वहीं, उत्तर प्रदेश में प्रति व्यक्ति आय 65,431 रुपये सालाना है, जबिक इस राज्य में 29.9 प्रतिशत के साथ सबसे अधिक युवा रहते हैं. झारखंड में प्रति व्यक्ति आय 75,587 रुपये सालाना है, जबकि इस राज्य में 29.1 प्रतिशत युवा हैं. 28.7 प्रतिशत युवा वाले राज्य राजस्थान में प्रति व्यक्ति आया 1,09,386 रुपये सालाना है. पंजाब में प्रति व्यक्ति आय 1,51,367 रुपये, हिमाचल प्रदेश में 1,83,286 रुपये, केरल में 2,21,904 रुपये और तमिलनाडु में प्रति व्यक्ति आय 2,25,106 रुपये सालाना है. देश की बात करें तो प्रति व्यक्ति आय 1,47,210 रुपये सालाना है. 2020-21 की रिपोर्ट के मुताबिक, यूपी, बिहार और झारखंड प्रति व्यक्ति आय के मामले में देश में सबसे पीछे हैं. वहीं, गोवा प्रति व्यक्ति 4.72 लाख रुपये सालाना के साथ टॉप पर है.
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प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, यह संस्थान भारत के सबसे प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों में से एक है और इसके 100 वर्ष पूरे होना एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित कॉलेज श्री रामं कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) ने शुक्रवार को अपने 100वें स्थापना वर्ष के उपलक्ष्य में शताब्दी समारोह की औपचारिक शुरुआत की. यह आयोजन University of Delhi के नॉर्थ कैंपस में आयोजित किया गया. कॉलेज द्वारा जारी बयान के अनुसार, इस कार्यक्रम की अध्यक्षता दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. योगेश सिंह ने की. इस अवसर पर एसआरसीसी गवर्निंग बॉडी के चेयरमैन अजय एस श्रीराम भी उपस्थित रहे.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दी शुभकामनाएं
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने संदेश में एसआरसीसी को बधाई दी. उन्होंने कहा कि यह संस्थान भारत के सबसे प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों में से एक है और इसके 100 वर्ष पूरे होना एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है. उन्होंने यह भी बताया कि इस अवसर पर एक स्मारक डाक टिकट (Commemorative Stamp) भी जारी किया गया है.
वैश्विक पहचान वाला संस्थान: कुलपति
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कुलपति प्रो. योगेश सिंह ने एसआरसीसी को वैश्विक स्तर पर पहचान रखने वाला संस्थान बताया. उन्होंने कहा, “100 साल किसी भी संस्थान के लिए एक लंबा समय होता है. इस दौरान संस्थान पीढ़ियों को तैयार करता है, देश की दिशा को प्रभावित करता है. एसआरसीसी ने यह तीनों कार्य सफलतापूर्वक किए हैं.” उन्होंने यह भी कहा कि अब संस्थानों को ऐसे नेताओं को तैयार करना चाहिए जो जिम्मेदारी के साथ नेतृत्व करें और नए उद्यम स्थापित करें.
पूरे वर्ष होंगे शैक्षणिक और वैश्विक कार्यक्रम
शताब्दी वर्ष के तहत कॉलेज कई शैक्षणिक सम्मेलन, नीति संवाद, पूर्व छात्रों (Alumni) के कार्यक्रम और अंतरराष्ट्रीय सहयोग गतिविधियां आयोजित करेगा. इन कार्यक्रमों में शिक्षाविद, नीति-निर्माता और उद्योग जगत के प्रतिनिधि भाग लेंगे.
संस्थापक को श्रद्धांजलि से कार्यक्रम की शुरुआत
कार्यक्रम की शुरुआत संस्थान के संस्थापक सर श्री राम को श्रद्धांजलि देकर की गई. उन्होंने 1920 के दशक में स्वतंत्रता पूर्व भारत में स्वदेशी व्यापार शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इस संस्थान की स्थापना की थी. एसआरसीसी की प्राचार्य स्मृति कौर ने कहा कि पिछले 100 वर्षों में संस्थान ने नैतिकता और उद्देश्य के मूल्यों को बनाए रखा है. साथ ही, यह बदलती शैक्षणिक और औद्योगिक जरूरतों के अनुसार खुद को लगातार ढालता रहा है.
इस कार्यक्रम में कई प्रमुख पूर्व छात्र जस्टिस एके सिकरी, विजय गोयल और स्मिनू जिंदल शामिल भी शामिल हुए, यह शताब्दी समारोह एसआरसीसी की ऐतिहासिक विरासत, शैक्षणिक उत्कृष्टता और भविष्य की दिशा को दर्शाने वाला एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है.
दीक्षांत समारोह के दौरान संस्थान ने अपने पूर्व छात्रों को भी विभिन्न श्रेणियों में सम्मानित किया. इसमें विशिष्ट पूर्व छात्र सम्मान और युवा पूर्व छात्र उपलब्धि सम्मान जैसे पुरस्कार शामिल रहे.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट टेक्नोलॉजी गाजियाबाद में 2026 बैच का दीक्षांत समारोह आयोजित किया गया, जिसमें 745 से अधिक छात्रों को विभिन्न स्नातकोत्तर प्रबंधन कार्यक्रमों में डिप्लोमा प्रदान किए गए. इस अवसर पर मुख्य अतिथियों ने छात्रों को सफलता को उद्देश्य और नैतिकता से जोड़ने का संदेश दिया
शशि थरूर ने सफलता को उद्देश्य से जोड़ने पर दिया जोर
मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सांसद शशि थरूर ने कहा कि सफलता को केवल व्यक्तिगत उपलब्धि के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए. उन्होंने पेशेवर जीवन में नैतिकता को दीर्घकालिक मूल्य का आधार बताया. उन्होंने छात्रों को ‘ट्रिपल बॉटम लाइन’ यानी लाभ, लोग और पर्यावरण के संतुलन पर ध्यान देने की सलाह दी. उनका कहना था कि उद्देश्य आधारित करियर ही लंबे समय में प्रभावशाली साबित होते हैं. साथ ही उन्होंने अनिश्चित परिस्थितियों में ईमानदारी और संवेदनशीलता को अहम गुण बताया.
एक अन्य संबोधन में आईएमटी गाजियाबाद के मुख्य मार्गदर्शक कमल नाथ, ने नेतृत्व में जिज्ञासा, साहस और जिम्मेदारी की भावना को महत्वपूर्ण बताया. उन्होंने कहा कि बदलते समय में सफल नेतृत्व के लिए इन गुणों का होना जरूरी है.
मेधावी पूर्व छात्रों को किया गया सम्मानित
दीक्षांत समारोह के दौरान संस्थान ने अपने पूर्व छात्रों को भी विभिन्न श्रेणियों में सम्मानित किया. इसमें विशिष्ट पूर्व छात्र सम्मान और युवा पूर्व छात्र उपलब्धि सम्मान जैसे पुरस्कार शामिल रहे. संस्थान के निदेशक अतीश चट्टोपाध्याय ने प्रबंधन की बदलती भूमिका पर प्रकाश डाला. उन्होंने बताया कि आज के समय में प्रौद्योगिकी के साथ सहयोग और अनिश्चित परिस्थितियों में काम करने की क्षमता बेहद जरूरी हो गई है. उन्होंने संस्थान के उस बदलाव का भी जिक्र किया, जिसमें प्रशिक्षण को उद्योग की बदलती जरूरतों के अनुरूप ढालने के लिए भूमिका-आधारित दक्षता ढांचा अपनाया जा रहा है.
इस दीक्षांत समारोह के साथ 2026 बैच के शैक्षणिक कार्यक्रम का औपचारिक समापन हो गया. यह आयोजन छात्रों के लिए एक नए पेशेवर सफर की शुरुआत का प्रतीक रहा.
समिट से उभरकर आने वाला संदेश साफ है. अनिश्चितता भले ही अपरिहार्य हो, लेकिन करियर की दिशा पूरी तरह परिस्थितियों के हवाले नहीं होती. अनुशासन, सहयोग, मूल्य, जिज्ञासा और सीखने की निरंतर इच्छा ऐसे आधार हैं, जिन पर टिकाऊ और सार्थक करियर खड़े होते हैं.
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रितु राणा
तेजी से बदलती अर्थव्यवस्था, अस्थिर जॉब मार्केट और करियर के कम पूर्वानुमेय होते रास्तों के बीच, सफलता की पारंपरिक परिभाषा पर सवाल खड़े हो रहे हैं. वरिष्ठ पेशेवरों का मानना है कि अब दीर्घकालिक करियर स्थिरता केवल पद, वेतन या रैखिक प्रगति से नहीं, बल्कि मूल्यों, सहयोग, अनुशासन और निरंतर सीखने की क्षमता से तय होती है. यही विमर्श हाल ही में आयोजित सनावर सक्सेस समिट के केंद्र में रहा. इस समिट में मुख्य अतिथि के रुप में शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग के सचिव आईएएस संजय कुमार भी शामिल हुए.
नेतृत्व की समझ कैसे बदली
समित के तीसरे सत्र की शुरुआत करते हुए कंसोर्टियम गिफ्ट्स के संस्थापक गौरव भगत ने भारत सरकार के नेचुरल रिसॉर्स मैनेजमेंट और एग्रोइकोलॉजी विभाग के निदेशक राजीव अहल से पूछा कि क्या समय के साथ उनके लिए सफलता और व्यक्तिगत उपलब्धि का अर्थ बदला है, और कब यह सोच लोगों और संस्थानों की जिम्मेदारी की ओर मुड़ने लगी.
इस पर राजीव अहल ने कहा कि नेतृत्व हमेशा उस संदर्भ से परिभाषित होता है जिसमें व्यक्ति काम कर रहा होता है. अलग-अलग प्रणालियों और चुनौतियों के लिए नेतृत्व के अलग रूप होते हैं. उनके अनुसार, सतत विकास से जुड़ा काम, जैसे जंगलों का संरक्षण, जल प्रबंधन और ग्रामीण गरीबों की आय बढ़ाना, किसी एक व्यक्ति के प्रयास से संभव नहीं है.
बड़े बदलाव के लिए सहयोग क्यों जरूरी है
राजीव अहल ने कहा कि भोजन, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और शासन जैसे क्षेत्र आपस में गहराई से जुड़े हुए हैं. ऐसे में व्यापक और टिकाऊ बदलाव लाने के लिए सहयोग अनिवार्य हो जाता है. उन्होंने प्रसिद्ध कहावत का जिक्र करते हुए कहा कि अगर तेज जाना है तो अकेले जाओ, लेकिन अगर दूर तक जाना है तो साथ चलना होगा.
उनके अनुसार, चाहे वह किसी गांव में छोटे एनजीओ के साथ काम कर रहे हों या आज बड़े अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ मिलकर कई मंत्रालयों और राज्यों के साथ काम कर रहे हों, अनुभव ने यही सिखाया है कि साझा प्रयास के बिना ठोस नतीजे नहीं मिलते.
पदनाम नहीं, भूमिका पर फोकस
अहल ने बताया कि उनके लिए सबसे प्रभावी तरीका पदनामों से आगे बढ़कर भूमिकाओं पर ध्यान देना रहा है. भूमिकाओं को स्पष्ट रूप से परिभाषित करना और लोगों को उन्हें सही मायनों में निभाने के लिए सशक्त बनाना बेहतर परिणाम देता है. उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि नेतृत्व में प्रतिस्पर्धा और सहयोग के बीच संतुलन बनाना आसान नहीं होता. कई बार अहंकार और पहचान अनावश्यक प्रतिस्पर्धा को जन्म देती है, जबकि असल जरूरत सहयोग की होती है.
जोड़ी में काम करने की रणनीति
अपने अनुभव साझा करते हुए राजीव अहल ने बताया कि उनके लिए एक कारगर रणनीति यह रही है कि हर अहम विषय पर हमेशा दो लोग साथ काम करें. इससे विचारों और दृष्टिकोण में विविधता आती है और काम की निरंतरता बनी रहती है. अगर एक व्यक्ति अनुपलब्ध हो, तो दूसरा काम को आगे बढ़ा सकता है.
अनिश्चितता में मूल्य बनते हैं सहारा
समिट में अनिश्चितता के दौर में मूल्यों की भूमिका पर भी गहन चर्चा हुई. गौरव भगत ने कहा कि विश्वास के संकट से जूझती दुनिया में, दीर्घकालिक सफलता के लिए मूल्य ही एकमात्र गैर-समझौता योग्य आधार हैं. उनके अनुसार, आज सफलता को केवल वित्तीय नतीजों से नहीं आंका जा रहा, बल्कि उद्देश्य, विश्वसनीयता और सामाजिक योगदान भी उतने ही अहम हो गए हैं. जिन करियरों में नैतिक आधार नहीं होता, वे समय के साथ अपनी गति खो देते हैं.
जिज्ञासा और सीख की भूमिका
भारत के योजना आयोग के पूर्व सदस्य अरुण मैरा ने करियर में अनुकूलन क्षमता विकसित करने में जिज्ञासा की अहमियत पर ज़ोर दिया. उन्होंने कहा कि जिज्ञासा आजीवन सीखने की नींव है. जब कोई चीज अप्रासंगिक लगती है, वही पल गहरे सवाल पूछने का होता है. उनके अनुसार, बदलते समय में वही पेशेवर आगे बढ़ पाते हैं जो सीखने के लिए खुले रहते हैं और नए संदर्भों को समझने की कोशिश करते हैं.
“Networks for AI/ML Systems” पाठ्यक्रम का शुभारंभ न केवल IIIT-दिल्ली के लिए बल्कि भारत की AI शिक्षा और शोध पारिस्थितिकी के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
इंद्रप्रस्थ सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली (IIIT-दिल्ली) ने मार्वेल टेक्नोलॉजी, इंक. की भारतीय सहयोगी कंपनी के साथ मिलकर “Networks for AI/ML Systems” नामक एक उन्नत अकादमिक-उद्योग पाठ्यक्रम की सफल शुरुआत की है. यह पाठ्यक्रम आधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के सिस्टम लेयर पर केंद्रित है, जहाँ नेटवर्किंग फैब्रिक्स, मेमोरी हाइरार्की और डिस्ट्रिब्यूटेड एक्जीक्यूशन बड़े पैमाने पर प्रदर्शन तय करते हैं.
AI सिस्टम्स की नई चुनौतियों पर फोकस
जैसे-जैसे AI मॉडल्स ट्रिलियन पैरामीटर्स तक पहुँच रहे हैं, चुनौतियाँ केवल कंप्यूट तक सीमित नहीं रह गई हैं. अब डेटा मूवमेंट, इंटरकनेक्ट्स और वितरित सिस्टम्स के बीच समन्वय सबसे बड़ी बाधाएँ बन चुकी हैं. यह पाठ्यक्रम इन्हीं वास्तविकताओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है, जैसा कि वे प्रोडक्शन-लेवल AI इंफ्रास्ट्रक्चर में दिखाई देती हैं.
अकादमिक-उद्योग साझेदारी का अनूठा उदाहरण
इस पाठ्यक्रम को IIIT-दिल्ली के डॉ. रिंकू शाह और मार्वेल के निदेशक अबेद मोहम्मद कमालुद्दीन ने मिलकर डिजाइन किया है और संयुक्त रूप से पढ़ाया जा रहा है. इसके साथ ही मार्वेल के इंजीनियर और आर्किटेक्ट्स छात्रों को तकनीकी मेंटरशिप प्रदान कर रहे हैं. समानांतर रूप से, IIIT-दिल्ली और मार्वेल AI नेटवर्किंग और सिस्टम्स के क्षेत्र में संयुक्त शोध पर भी कार्य कर रहे हैं, जिसमें यह पाठ्यक्रम महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है.
भारत और विश्व में अपनी तरह का पहला कोर्स
IIIT-दिल्ली के कंप्यूटर साइंस एवं इंजीनियरिंग विभाग के प्रमुख प्रो. पुष्पेंद्र सिंह ने कहा, “Networks for AI/ML Systems भारत का पहला और विश्व में अपनी तरह का पहला ज्ञात पाठ्यक्रम है. इसमें AI नेटवर्किंग, CXL-आधारित मेमोरी सिस्टम्स और AI-स्केल सिमुलेशन को एकीकृत किया गया है, जिससे छात्रों को सिस्टम-लेवल चुनौतियों से रूबरू कराया जाता है, जिन्हें पारंपरिक पाठ्यक्रमों में शायद ही पढ़ाया जाता है.”
प्रोजेक्ट-आधारित और सहकर्मी-प्रेरित शिक्षण
इस कोर्स के पहले संस्करण में B.Tech., M.Tech. और Ph.D. कार्यक्रमों के लगभग 45 छात्रों ने भाग लिया. पाठ्यक्रम की संरचना प्रोजेक्ट-फर्स्ट और पीयर-ड्रिवन शिक्षण पद्धति पर आधारित थी. कोर्स के बाद किए गए सर्वे में छात्रों के बीच AI सिस्टम्स, नेटवर्क फैब्रिक्स और डिस्ट्रिब्यूटेड मशीन-लर्निंग वर्कफ्लो को समझने में आत्मविश्वास बढ़ने के स्पष्ट संकेत मिले.
छात्रों के प्रोजेक्ट्स: सिस्टम्स की गहराई तक समझ
छात्रों के प्रोजेक्ट्स में AI फैब्रिक्स और ट्रांसपोर्ट्स, CXL-अवेयर ट्रेनिंग और इंफरेंस, डिस्ट्रिब्यूटेड ट्रेनिंग व सर्विंग पाइपलाइंस, इन-नेटवर्क कंप्यूट, टेलीमेट्री-ड्रिवन ऑप्टिमाइजेशन तथा ML-आधारित सिक्योरिटी और ऑब्जर्वेबिलिटी जैसे विषय शामिल थे. छात्रों ने बताया कि प्रोजेक्ट्स की ओपन-एंडेड और सिस्टम-हैवी प्रकृति ने उन्हें केवल टूल्स लागू करने के बजाय जटिल सिस्टम व्यवहार को समझाने में सक्षम बनाया.
उद्योग विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया
डॉ. रिंकू शाह ने कहा, “छात्रों को शायद ही कभी यह देखने को मिलता है कि AI सिस्टम्स बड़े पैमाने पर कैसे व्यवहार करते हैं. यह कोर्स उन्हें फैब्रिक-लेवल और मेमोरी-लेवल चुनौतियों से परिचित कराता है, जो आधुनिक AI क्लस्टर्स में बेहद महत्वपूर्ण हैं. मार्वेल के साथ सहयोग इस दिशा में निर्णायक रहा.”
IIIT-दिल्ली की यात्रा के दौरान मार्वेल की भारतीय सहयोगी कंपनी के एवीपी प्रसून कपूर ने छात्रों से बातचीत की और उनके प्रोजेक्ट्स की समीक्षा की. उन्होंने कहा, “यह कोर्स छात्रों को अत्याधुनिक ML नेटवर्क फैब्रिक तकनीकों से परिचित कराता है, जो उद्योग में तेजी से विकसित हो रही हैं. यह उनके सिस्टम्स थिंकिंग में स्केल, डेटा मूवमेंट और वास्तविक इंफ्रास्ट्रक्चर सीमाओं की समझ को दर्शाता है.”
मार्वेल के निदेशक अबेद मोहम्मद कमालुद्दीन ने कहा, “आधुनिक AI सिस्टम्स को ऐसे इंजीनियरों की आवश्यकता है जो फैब्रिक्स, मेमोरी और एक्ज़ीक्यूशन को एक साथ समझ सकें. यह कोर्स उसी एंड-टू-एंड सिस्टम्स माइंडसेट को विकसित करने के लिए बनाया गया है.”
भविष्य की दिशा
यह पाठ्यक्रम उभरते हुए सिस्टम्स डोमेन में उद्योग-अकादमिक सहयोग के प्रभाव को दर्शाता है. यह भारत में AI/ML सिस्टम्स और फैब्रिक्स के लिए प्रशिक्षित शुरुआती समूहों में से एक को तैयार करता है और AI कंप्यूट व सेमीकंडक्टर क्षमताओं से जुड़ी राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप है.
IIIT-दिल्ली और मार्वेल आने वाले समय में इस सहयोग को संयुक्त शोध पहलों, उन्नत पाठ्यक्रमों और निरंतर मेंटरशिप के माध्यम से और मजबूत करने की योजना बना रहे हैं, ताकि अगली पीढ़ी के AI सिस्टम्स और नेटवर्क फैब्रिक्स में भारत की भूमिका और सुदृढ़ हो सके.
IIT रुड़की और मसाई की इस साझेदारी से न सिर्फ युवाओं को नई तकनीकों में प्रशिक्षित होने का मौका मिलेगा, बल्कि इंडस्ट्री को भी जॉब-रेडी और स्किल्ड प्रोफेशनल्स मिल सकेंगे.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
रुड़की, उत्तराखंड. 12 जनवरी 2026. देश में तेजी से बढ़ती डिजिटल और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित अर्थव्यवस्था की जरूरतों को देखते हुए आईआईटी रुड़की और मसाई (Masai) ने मिलकर जॉब-रेडी डिजिटल टैलेंट तैयार करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. आईआईटी रुड़की की E&ICT एकेडमी और मसाई के बीच हुए समझौता ज्ञापन (MoU) के तहत अब कई ऑनलाइन सर्टिफिकेशन टेक्नोलॉजी प्रोग्राम शुरू किए जाएंगे.
AI और सॉफ्टवेयर ट्रेनिंग पर रहेगा फोकस
इस साझेदारी के तहत सभी प्रोग्राम E&ICT एकेडमी, आईआईटी रुड़की द्वारा डिजाइन और संचालित किए जाएंगे. इन कोर्सेज में डेटा साइंस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग, एआई के साथ सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग, प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग जैसे आधुनिक और हाई-डिमांड विषय शामिल होंगे. पढ़ाई में थ्योरी के साथ-साथ प्रैक्टिकल ट्रेनिंग और इंडस्ट्री से जुड़े कौशल पर विशेष जोर दिया जाएगा.
स्टूडेंट्स और वर्किंग प्रोफेशनल्स दोनों को मिलेगा फायदा
तेजी से बदलती टेक इंडस्ट्री को ऐसे प्रोफेशनल्स की जरूरत है जो न सिर्फ प्रोग्रामिंग जानते हों, बल्कि AI और मशीन लर्निंग टूल्स का जिम्मेदारी से इस्तेमाल भी कर सकें और रियल-वर्ल्ड प्रोजेक्ट्स पर काम कर सकें. ये प्रोग्राम नए छात्रों, वर्किंग प्रोफेशनल्स और नॉन-टेक्निकल बैकग्राउंड से आने वाले लोगों के लिए भी उपयोगी होंगे. ट्रेनिंग लाइव क्लासेज और हैंड्स-ऑन लर्निंग के जरिए दी जाएगी.
कैपस्टोन प्रोजेक्ट से बनेगा मजबूत पोर्टफोलियो
हर कोर्स के अंत में प्रतिभागियों को एक कैपस्टोन प्रोजेक्ट करना होगा. इससे स्टूडेंट्स अपना मजबूत स्किल-पोर्टफोलियो तैयार कर सकेंगे और वास्तविक बिजनेस समस्याओं पर काम करने का अनुभव भी हासिल करेंगे.
E&ICT एकेडमी के चीफ इन्वेस्टिगेटर प्रो. संजीव मनहास ने कहा कि आज के डिजिटल दौर में ऐसे प्रोफेशनल्स की जरूरत है जो AI, मशीन लर्निंग और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट की मदद से वास्तविक दुनिया की समस्याओं का समाधान कर सकें. उन्होंने कहा कि आईआईटी रुड़की का उद्देश्य अकादमिक और इंडस्ट्री के बीच की दूरी को कम करना है ताकि विद्यार्थी उभरती तकनीकों का व्यावहारिक और जिम्मेदार उपयोग सीख सकें.
आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रो. के. के. पंत ने कहा कि संस्थान उच्च शिक्षा और स्किल डेवलपमेंट की अपनी राष्ट्रीय जिम्मेदारी के तहत डिजिटल और AI आधारित तकनीकों में क्षमता निर्माण पर लगातार काम कर रहा है. ऐसे सहयोग देश को जॉब-रेडी डिजिटल टैलेंट देने में अहम भूमिका निभाएंगे.
मसाई के सीईओ और को-फाउंडर प्रतीक शुक्ला ने कहा कि आईआईटी रुड़की के साथ यह साझेदारी छात्रों को ऐसे प्रोग्राम देगी, जिनमें अकादमिक गहराई और प्रैक्टिकल ट्रेनिंग का बेहतरीन संतुलन होगा. इससे छात्र तेजी से बदलती AI आधारित जॉब मार्केट के लिए बेहतर तरीके से तैयार हो सकेंगे.
सर्टिफिकेट और कैंपस इमर्शन का भी मिलेगा मौका
कोर्स और मूल्यांकन सफलतापूर्वक पूरा करने वाले प्रतिभागियों को E&ICT एकेडमी, आईआईटी रुड़की का सर्टिफिकेट दिया जाएगा. इसके अलावा, स्टूडेंट्स को आईआईटी रुड़की कैंपस में 2 से 3 दिन के इमर्शन प्रोग्राम में भाग लेने का विकल्प भी मिलेगा, जहां प्रोजेक्ट प्रेजेंटेशन के साथ सर्टिफिकेट और ग्रेडशीट दी जाएगी.
मसाई की यह पहल भारत में वैश्विक स्तर की AI और डेटा शिक्षा को सुलभ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत में AI और डेटा स्किल्स की बढ़ती मांग को देखते हुए एजुकेशन प्लेटफॉर्म मसाई (Masai) ने दुनिया के दो प्रतिष्ठित संस्थानों मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) के Institute for Data, Systems and Society (IDSS) और यूनिवर्सिटी ऑफ टोरंटो के Rotman School of Management के साथ रणनीतिक शैक्षणिक साझेदारी की घोषणा की है. इन सहयोगों के तहत भारत में दो नए एडवांस सर्टिफिकेशन प्रोग्राम लॉन्च किए गए हैं, जो जेनरेटिव AI, मशीन लर्निंग और डेटा-ड्रिवन निर्णय-निर्माण जैसे उभरते क्षेत्रों पर केंद्रित हैं.
MIT IDSS के साथ मशीन लर्निंग में एडवांस सर्टिफिकेशन
MIT IDSS के साथ साझेदारी के तहत मसाई ने “Machine Learning with Python: From Linear Models to Deep Learning” नामक छह महीने का सर्टिफिकेशन प्रोग्राम शुरू किया है. मसाई इस माइक्रोमास्टर्स-संबंधित कोर्स में MIT IDSS के साथ सहयोग करने वाला भारत का पहला शैक्षणिक भागीदार बन गया है.
इस प्रोग्राम की खास बात यह है कि प्रतिभागियों को MIT के पीएचडी स्कॉलर्स द्वारा लाइव टीचिंग असिस्टेंट सपोर्ट मिलेगा. यह कोर्स उन प्रोफेशनल्स के लिए तैयार किया गया है जो AI और मशीन लर्निंग में मजबूत सैद्धांतिक ज्ञान के साथ व्यावहारिक अनुभव हासिल करना चाहते हैं.
हैंड्स-ऑन लर्निंग और रियल-वर्ल्ड केस स्टडीज पर जोर
इस सर्टिफिकेशन प्रोग्राम के पाठ्यक्रम में डेटा हैंडलिंग, मॉडल डेवलपमेंट, ऑप्टिमाइजेशन तकनीकें, न्यूरल नेटवर्क और डीप लर्निंग जैसे अहम विषय शामिल हैं. हैंड्स-ऑन प्रोजेक्ट्स, सिमुलेशन और रियल-वर्ल्ड केस स्टडीज़ के माध्यम से प्रतिभागियों को मशीन लर्निंग के पूरे लाइफ-साइकिल की गहरी समझ विकसित करने का अवसर मिलेगा, जिससे वे टेक्नोलॉजी-ड्रिवन भूमिकाओं के लिए बेहतर रूप से तैयार हो सकें.
रॉटमैन स्कूल के साथ जेनरेटिव AI पर एग्जीक्यूटिव प्रोग्राम
वहीं, Rotman School of Management के साथ साझेदारी के तहत मसाई ने भारत में “Data-Driven Decision Making with Generative AI” नामक पांच महीने का एग्जीक्यूटिव प्रोग्राम पेश किया है. यह प्रोग्राम खासतौर पर कार्यरत प्रोफेशनल्स और भविष्य के लीडर्स के लिए डिजाइन किया गया है.
इस कोर्स में जेनरेटिव AI की मदद से डेटा तैयारी, इनसाइट जनरेशन, सीनारियो एनालिसिस और रणनीतिक निर्णय-निर्माण जैसे व्यावहारिक कौशल सिखाए जाएंगे. साथ ही AI-जनित आउटपुट की व्याख्या, नैतिक पहलुओं और गवर्नेंस से जुड़े मुद्दों पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा.
भारत में वैश्विक मानकों की AI शिक्षा को बढ़ावा
इन नई शैक्षणिक साझेदारियों के जरिए मसाई का लक्ष्य भारत में ग्लोबल-स्टैंडर्ड AI और डेटा एजुकेशन को सुलभ बनाना है. कंपनी ऐसे प्रोफेशनल्स तैयार करना चाहती है जो तेजी से बदलते टेक्नोलॉजी परिदृश्य में डेटा और AI आधारित निर्णयों के माध्यम से संगठनों का नेतृत्व कर सकें.
तेजी से बढ़ती जेनरेटिव AI इकोनॉमी में अवसर
यह पहल ऐसे समय में की गई है जब वैश्विक अनुमानों के मुताबिक 2035 तक जेनरेटिव AI का आर्थिक प्रभाव करीब 2.9 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच सकता है. दुनिया भर की कंपनियां तेजी से इन टूल्स को अपने मुख्य बिज़नेस ऑपरेशंस का हिस्सा बना रही हैं, जिससे AI और डेटा स्किल्स वाले टैलेंट की मांग लगातार बढ़ रही है.
IIIT दिल्ली ने देश का पहला बी.टेक. कोर्स पेश किया है, जिसमें कंप्यूटर साइंस और इकनॉमिक थिंकिंग का अनोखा समावेश होगा.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
इंद्रप्रस्थ सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (IIIT Delhi) ने इस वर्ष एक अनोखा बीटेक कोर्स शुरू किया है जो कंप्यूटर साइंस और आर्थिक सोच (Economic Thinking) को जोड़ता है. यह देश का पहला ऐसा कोर्स है जो तकनीकी और आर्थिक विश्लेषण को एक साथ सिखाएगा. यह जानकारी शनिवार को IIIT दिल्ली के 14वें दीक्षांत समारोह के दौरान संस्थान के निदेशक प्रो रंजन बोस ने दी. उन्होंने कहा कि आज के समय में समस्याओं का समाधान किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहा है, इसलिए यह इंटरडिसिप्लिनरी (Interdisciplinary) कोर्स छात्रों को बहुआयामी दृष्टिकोण के साथ प्रशिक्षित करेगा.
मानव-कंप्यूटर इंटरैक्शन पर नया पीजी डिप्लोमा
प्रोफेसर रंजन ने बताया कि IIIT Delhi ने ‘ह्यूमन-कंप्यूटर इंटरैक्शन’ पर एक नया पीजी डिप्लोमा कोर्स और माइनर प्रोग्राम भी लॉन्च किया है. संस्थान का कहना है कि भविष्य में मानव और कंप्यूटर का जुड़ाव और गहरा होगा, इसलिए यह आवश्यक है कि तकनीक को डिजाइन करते समय मानव केंद्रित दृष्टिकोण अपनाया जाए.
फ्रांस के साथ संयुक्त मास्टर्स प्रोग्राम
संस्थान ने फ्रांस की टॉप यूनिवर्सिटी Université Côte d’Azur के साथ एक संयुक्त मास्टर्स प्रोग्राम भी शुरू किया है. यह “वन-प्लस-वन” टाइप का कोर्स है जिसमें भारतीय और फ्रेंच छात्र एक साथ दोनों संस्थानों में अध्ययन करेंगे. इससे छात्रों को वैश्विक अनुभव और अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान के अवसर मिलेंगे.
साइबर सिक्योरिटी पर फोकस, हरियाणा पुलिस के साथ प्रोजेक्ट
संस्थान की फैकल्टी REC Foundation के सहयोग से हरियाणा पुलिस के साथ दो करोड़ रुपये के साइबर सिक्योरिटी प्रोजेक्ट पर काम कर रही है. इस प्रोजेक्ट के तहत एक ग्राफ डेटाबेस और विजुअलाइजेशन टूल तैयार किया जा रहा है जो संगठित अपराधों और साइबर हमलों का विश्लेषण करने में मदद करेगा. संस्थान उद्योग और सरकारी पेशेवरों को साइबर सिक्योरिटी और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में निरंतर प्रशिक्षण भी दे रहा है.
AI अनुसंधान में अग्रणी
IIIT Delhi में 25 से अधिक फैकल्टी सदस्य AI (Artificial Intelligence) से जुड़ी रिसर्च में कार्यरत हैं. संस्थान का Infosys Centre for AI फेडरेटेड लर्निंग, जीनोमिक्स, ड्रग डिस्कवरी और फिनटेक जैसे क्षेत्रों में काम कर रहा है. AI आधारित ड्रग डिस्कवरी और *सिंगल-सेल जीनोमिक्स* पर चल रहे प्रोजेक्ट देश को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में अहम कदम माने जा रहे हैं.
स्टार्टअप्स और इनोवेशन को प्रोत्साहन
संस्थान का iHub Anubhuti Incubation Centre अब तक 100 से अधिक स्टार्टअप्स को सहयोग दे चुका है जिनमें से 49 वर्तमान में सक्रिय हैं. पिछले एक वर्ष में इसने स्टार्टअप्स को ₹6.5 करोड़ की सीड फंडिंग* दी है. IIIT Delhi स्टार्टअप्स को टेक्नोलॉजिकल सपोर्ट देने के साथ-साथ इंडस्ट्री को रिसर्च-बेस्ड सॉल्यूशंस भी उपलब्ध करा रहा है.
AI आधारित हेल्थकेयर सॉल्यूशंस
IIIT Delhi के फैकल्टी ने AI आधारित एक सिस्टम तैयार किया है जो AIIMS के ICU में मरीजों के स्वास्थ्य का रियल टाइम डेटा विश्लेषण कर यह भविष्यवाणी कर सकता है कि अगले 24 घंटे में कौन-सा मरीज अधिक जोखिम में है. यह मॉडल डॉक्टरों को प्राथमिकता तय करने और बेहतर निगरानी में मदद करेगा.
स्पेस टेक्नोलॉजी सेंटर और नेशनल प्रोजेक्ट्स
IIIT Delhi ने हाल ही में Space Technology Centre की स्थापना की है जो अब सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है. यह केंद्र Manekshaw Centre के साथ जुड़े राष्ट्रीय कंसोर्टियम का हिस्सा है जिसमें IIT Kanpur, IIT Guwahati, IIT Dhanbad और IIT Jodhpur जैसे संस्थान शामिल हैं.
AI और अकादमिक रिसर्च में संतुलन पर जोर
संस्थान के निदेशक ने बताया कि UGC के दिशानिर्देशों के अनुसार शोधपत्रों में 10% तक AI टूल्स (जैसे Grammarly या ChatGPT) का उपयोग स्वीकार्य है, परंतु रिसर्च की मौलिकता बनाए रखना जरूरी है. संस्थान इस दिशा में छात्रों को प्रशिक्षण दे रहा है कि वे AI को सहायक के रूप में उपयोग करें, न कि पूर्ण निर्भरता के रूप में.
IIIT-दिल्ली का 14वां दीक्षांत समारोह ने यह स्पष्ट किया कि भारत की नई तकनीकी पीढ़ी न केवल ज्ञान में अग्रणी है, बल्कि देश को आत्मनिर्भर और विकसित बनाने की दिशा में नेतृत्व करने को भी तैयार है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
इंद्रप्रस्थ सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान, दिल्ली (IIIT-Delhi) ने शनिवार को अपना 14वां दीक्षांत समारोह बड़े उत्साह के साथ मनाया. इस अवसर पर स्नातक, स्नातकोत्तर और डॉक्टरेट कार्यक्रमों के कुल 780 विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान की गईं. कार्यक्रम में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को कुलाधिपति स्वर्ण पदक, संस्थान रजत पदक, सर्वांगीण प्रदर्शन पदक, सर्वश्रेष्ठ बी.टेक. परियोजना पुरस्कार, एम.टेक. उत्कृष्ठता स्वर्ण पदक, श्रेष्ठ एम.टेक. शोध प्रबंध पुरस्कार और पीएच.डी. शोध प्रबंध पुरस्कार प्रदान किए गए.
517 बी.टेक., 226 एम.टेक. और 34 पीएच.डी. छात्रों को मिली डिग्रियां
इस वर्ष कुल 517 बी.टेक. विद्यार्थियों ने डिग्री प्राप्त की, जिनका अध्ययन कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशंस, कंप्यूटर साइंस एंड एप्लाइड मैथमेटिक्स, कंप्यूटर साइंस एंड डिज़ाइन, कंप्यूटर साइंस एंड सोशल साइंसेज़, कंप्यूटर साइंस एंड बायोसाइंसेज, और कंप्यूटर साइंस एंड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों में हुआ था. इसके अलावा 226 एम.टेक. छात्रों (जिनमें तीन द्वैध डिग्री धारक शामिल हैं) और 34 पीएच.डी. शोधार्थियों को भी उपाधि दी गई. इनके अनुसंधान क्षेत्र कम्प्यूटेशनल बायोलॉजी, कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशंस, ह्यूमन-सेंटर्ड डिज़ाइन, गणित, तथा समाज विज्ञान और मानविकी रहे.
दिल्ली के उपराज्यपाल और संस्थान के कुलाधिपति विनय कुमार सक्सेना ने विद्यार्थियों, शिक्षकों, अभिभावकों और मार्गदर्शकों को बधाई दी. उन्होंने कहा कि यह सफलता केवल विद्यार्थियों की नहीं, बल्कि उन सभी की है जिन्होंने उनके साथ कदम से कदम मिलाकर उनका साथ दिया.
मुख्य अतिथि के रूप में शामिल पर्सिस्टेंट सिस्टम्स के संस्थापक और चेयरमैन डॉ. आनंद देशपांडे ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा, “आप सभी अब अपने पेशेवर जीवन की नई शुरुआत करने जा रहे हैं. IIIT-दिल्ली के प्रशिक्षित और ऊर्जावान स्नातक भारत की तकनीक और इंजीनियरिंग को नई दिशा देंगे. यह वही पीढ़ी है जो ‘स्वावलंबी और विकसित भारत’ के प्रधानमंत्री मोदी के विजन को साकार करने में अहम भूमिका निभाएगी.”
नवाचार और प्रगति का वर्ष रहा 2024-25
संस्थान के निदेशक प्रो. रंजन बोस ने इस अवसर पर वार्षिक रिपोर्ट 2024-25 प्रस्तुत की. उन्होंने बताया कि यह वर्ष अकादमिक नवाचार, अत्याधुनिक शोध, उद्यमशील पहल और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियों वाला रहा. स्नातकों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, “IIIT-दिल्ली में आपने यह सीखा है कि हर चुनौती एक अवसर है, अवसर अलग ढंग से सोचने का, सीखने का और अपनी क्षमता को पहचानने का. जैसे ही आप नई दुनिया में कदम रख रहे हैं, अपने ज्ञान को करुणा और जिम्मेदारी के साथ उपयोग करें. नवाचार करें, परिवर्तन लाएँ, लेकिन हमेशा मानवीयता को साथ रखें.”
बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के चेयरमैन प्रो. राजेश श्रीवास्तव ने समारोह की अध्यक्षता करते हुए कहा, “IIIT-दिल्ली ने अपनी स्थापना के मूल उद्देश्यों नवाचार, उत्कृष्टता और सामाजिक प्रभाव को निरंतर आगे बढ़ाया है. चौदहवें दीक्षांत समारोह के इस अवसर पर यह देखकर खुशी होती है कि संस्थान शिक्षा, शोध और उद्यमशीलता के क्षेत्र में लगातार अग्रणी बना हुआ है. हमारे स्नातक न केवल तकनीकी ज्ञान लेकर जा रहे हैं, बल्कि यह जिम्मेदारी भी कि वे तकनीक को और अधिक मानवीय और उपयोगी बनाएं.”
दीक्षांत समारोह में सम्मानित विद्यार्थी
बी.टेक. पुरस्कार प्राप्तकर्ता:
1. कुलाधिपति स्वर्ण पदक: अर्नव अग्रवाल, नलिश जैन
2. संस्थान रजत पदक: अल्हद सेठी, सिद्धार्थ गुप्ता, एन नारोतम, जुबैदा फातिमा, शिवम कुरदा
3. सर्वांगीण प्रदर्शन पदक: नलिश जैन, वेदांत गुप्ता, आदित्य गिर्धर
4. सर्वश्रेष्ठ बी.टेक. परियोजना पुरस्कार: सेजल खुराना
एम.टेक. पुरस्कार प्राप्तकर्ता:
1. उत्कृष्ठ शैक्षणिक प्रदर्शन हेतु स्वर्ण पदक: पुनीत कुमार
2. श्रेष्ठ एम.टेक. शोध प्रबंध पुरस्कार: अमीषा गुप्ता, अल्का सिंह, आदित्य पीर, पुनीत कुमार, जीत टेकचंदानी, अभिषेक जैन
पीएच.डी. शोध प्रबंध पुरस्कार:
अविनाश आनंद, ख्याति, यमन कुमार, जस्मीत कौर, मानसी गोयल, गायत्री पांडा, आयुषी मित्तल, असीम श्रीवास्तव और विशाखा
SBI की यह पहल भारत में कार्यस्थल पर लैंगिक समानता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और दूरदर्शी कदम है. इससे बैंकिंग सेक्टर में महिलाओं की भागीदारी में वृद्धि होगी और उन्हें नेतृत्व की भूमिकाओं में सक्रिय रूप से शामिल होने का अवसर मिलेगा.
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रितु राणा
भारत के सबसे बड़े सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक अहम घोषणा की है. बैंक ने अगले पांच वर्षों में महिला कर्मचारियों की संख्या को बढ़ाकर 30% तक करने का लक्ष्य तय किया है. इस कदम से न केवल बैंकिंग सेक्टर में महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी, बल्कि यह कार्यस्थल पर समावेशी संस्कृति को भी मजबूती देगा.
वर्तमान में 2.4 लाख से अधिक कर्मचारी, जिनमें फ्रंटलाइन पर 33% महिलाएं
वर्तमान में SBI के पास देशभर में 2.4 लाख से ज्यादा कर्मचारी हैं. इनमें लगभग 33% महिलाएं यानी करीब 65,000 महिला कर्मचारी फ्रंटलाइन स्टाफ के तौर पर कार्यरत हैं, जबकि कुल महिला कर्मचारियों की हिस्सेदारी 27% है. एसबीआई के केंद्रीय बोर्ड में गैर कार्यकारी स्वतंत्र निदेशक स्वाति गुप्ता ने बताया कि बैंक अब इस अंतर को कम करने और लैंगिक संतुलन को बेहतर बनाने के लिए सक्रिय प्रयास कर रहा है. बैंक सभी स्तरों पर महिलाओं की भागीदारी को प्रोत्साहित करने की दिशा में काम कर रहा है. उन्होंने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह न केवल महिलाओं को सशक्त बनाएगा, बल्कि उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा भी देगा.
महिलाओं के लिए बेहतर कार्यस्थल की पहल
स्वाति गप्ता ने बताया कि एसबीआई लंबे समय से अपनी महिला कर्मचारियों के लिए एक सहयोगी वातावरण बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है. इसके लिए SBI ने क्रेच भत्ता, महिला स्वास्थ्य पहल, फैमिली कनेक्ट प्रोग्राम, और लंबी छुट्टी के बाद वापस लौटने वाली महिला कर्मचारियों के लिए विशेष ट्रेनिंग जैसी कई योजनाएं चलाई हैं. बैंक की ओर से इस समय देशभर में 340 से अधिक ऐसी शाखाएं चलाई जा रही हैं, जहां सिर्फ महिला कर्मचारी तैनात हैं. आने वाले वर्षों में इनकी संख्या बढ़ाने की योजना है.
'Empower Her' पहल से मिलेगी नेतृत्व में भागीदारी
SBI की एक विशेष पहल ‘Empower Her’ के माध्यम से महिलाओं को नेतृत्व की भूमिकाओं के लिए तैयार किया जा रहा है. इसका उद्देश्य है एक ऐसी महिला नेतृत्व टीम तैयार करना जो भविष्य में बैंक का प्रतिनिधित्व कर सके. स्वाति गुप्ता ने कहा SBI की यह पहल केवल भर्ती तक सीमित नहीं है, बल्कि संगठनात्मक संस्कृति में बदलाव की दिशा में भी प्रयास हो रहे हैं. बैंक नेतृत्व विकास, रोल रिडिजाइन और महिला प्रतिभाओं को दीर्घकालिक रूप से बनाए रखने के लिए विशेष कार्यक्रम चला रहा है. इसके साथ ही, तकनीकी और नेतृत्व क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाने के लिए कोचिंग, मेंटरिंग और स्पेशल ट्रेनिंग की व्यवस्था की जा रही है, जिससे एक समावेशी और भविष्य-तैयार कार्यबल का निर्माण हो सके.
महिला कर्मकारियों के लिए गरिमा नीति
एसबीआई की “गरिमा नीति” भी महिलाओं को यौन उत्पीड़न और भेदभाव से सुरक्षा प्रदान करती है. इस नीति के अंतर्गत बैंक ने कॉर्पोरेट स्तर, एलएचओ, एओ और आरबीओ स्तरों पर चार सदस्यीय आंतरिक समिति गठित की है, जो किसी भी प्रकार के उत्पीड़न या भेदभाव से महिला कर्मचारियों की रक्षा करती है. 30% आरक्षण नीति से बैंकिंग उद्योग में महिलाओं की भागीदारी में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और इससे महिलाओं की सामाजिक व आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा मिलेगा.
मुर्शिदाबाद का 75 साल पुराना संस्थान अब उद्योगोन्मुख पाठ्यक्रम और आधुनिक ढांचा अपनाएगा.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
मुर्शिदाबाद स्थित श्रीपत सिंह कॉलेज, जो इस साल अपनी स्थापना के 75 साल पूरे कर रहा है, अब एक व्यापक परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है. कॉलेज प्रशासन ने इस बदलाव के लिए कोलकाता स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ लीडरशिप, एंटरप्रेन्योरशिप एंड डेवलपमेंट (ILEAD) के साथ साझेदारी की है.
कॉलेज अब पारंपरिक शैक्षणिक पाठ्यक्रमों की जगह रोजगारोन्मुख और उद्योग प्रासंगिक कोर्स शुरू करने की दिशा में काम कर रहा है. इसमें व्यवसाय, उद्यमिता, डेटा, और तकनीक जैसे क्षेत्रों से जुड़े नए विषय शामिल होंगे.
इस प्रक्रिया को डूगर फैमिली फाउंडेशन का वित्तीय सहयोग प्राप्त है. यह फाउंडेशन अमेरिका में बसे सिएटल निवासी प्रोफेसर राजीव डूगर के नेतृत्व में कॉलेज के बुनियादी ढांचे के उन्नयन के लिए संसाधन उपलब्ध करा रहा है. डूगर परिवार ऐतिहासिक रूप से श्रीपत सिंह कॉलेज और कठगोला गार्डन जैसे संस्थानों से जुड़ा रहा है.
कॉलेज परिसर में चल रहे कार्यों में कक्षाओं और प्रयोगशालाओं का आधुनिकीकरण, छात्रावासों में नई सुविधाएं, कंप्यूटर लैब और साझा स्थानों जैसे फुटबॉल मैदान व शौचालयों का नवीनीकरण शामिल है.
संस्थान की योजना है कि आगामी वर्षों में यह कॉलेज एक ऐसा शिक्षा केंद्र बने, जो न सिर्फ मुर्शिदाबाद या पश्चिम बंगाल, बल्कि पूरे भारत और पड़ोसी देशों से आने वाले विद्यार्थियों को आकर्षित कर सके. इस समय कॉलेज में लगभग 3,000 छात्र पंजीकृत हैं, जिनमें से 1,000 छात्रावास में रहते हैं.
कॉलेज प्रशासन के अनुसार, यह बदलाव क्षेत्रीय उच्च शिक्षा संस्थानों में गुणवत्ता सुधार की दिशा में एक प्रयास है, जिससे ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में पढ़ने वाले छात्रों को बेहतर अवसर मिल सकें.