ब्लॉक डील के लिए फ्लोर प्राइस ₹251.68 प्रति शेयर तय किया गया है, जो जोमैटो के लिए सोमवार के बंद भाव से 4 फीसद छूट है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
फूड डिलीवरी कंपनी जोमैटो लिमिटेड (Zomato Ltd.) के शेयरों में बड़ी डील होने वाली है. एंटफिन सिंगापुर (Antfin Singapore) इस कंपनी के अपने शेयरों को बेचने की तैयारी में है. एंटफिन सिंगापुर का इरादा ब्लॉक डील के जरिये 13.6 करोड़ शेयरों यानी कुल 1.54 हिस्सेदारी बेचने का है. सूत्रों के मुताबिक, इस ब्लॉक डील के लिए मॉर्गन स्टैनली और गोल्डमैन सैक्स को प्लेसमेंट एजेंट नियुक्त किया गया है.
एंटफिन के पास है 4.24 पर्सेट हिस्सेदारी
जून तिमाही के आखिर में कंपनी में एंटफिन सिंगापुर होल्डिंग प्राइवेट लिमिटेड की 4.24 पर्सेट हिस्सेदारी थी. जोमैटो में एंटफिन की हिस्सेदारी 10,000 करोड़ रुपये थी. 19 अगस्त के शेयरों की क्लोजिंग प्राइस के हिसाब से देखा जाए, तो जोमैटो में एंटफिन की हिस्सेदारी की वैल्यू 10,000 करोड़ रुपये है. ब्लॉक डील के लिए फ्लोर प्राइस 251.68 रुपये प्रति शेयर तय की गई है, जो 19 अगस्त को जोमैटो की क्लोजिंग प्राइस से 4 पर्सेट डिस्काउंट पर है.
डील की वैल्यू 3,420 करोड़ रुपये
फ्लोर प्राइस के लिहाज से ब्लॉक डील की वैल्यू 40.8 करोड़ डॉलर यानी 3,420 करोड़ रुपये हो सकती है. बिक्री करने वाले शेयरहोल्डर्स के पास शेयरों की और बिक्री के लिए 90 दिनों का लॉक-इन पीरियड होगाय सूत्रों के मुताबिक, इस ब्लॉक डील के लिए मॉर्गन स्टैनली और गोल्डमैन सैक्स को प्लेसमेंट एजेंट नियुक्त किया गया है.
ब्लॉक डील के लिए फ्लोर प्राइस ₹251.68
ब्लॉक डील के लिए फ्लोर प्राइस ₹251.68 प्रति शेयर तय किया गया है, जो जोमैटो के लिए सोमवार के बंद भाव से 4% छूट है. फ्लोर प्राइस पर ब्लॉक डील की कीमत 408 मिलियन डॉलर या ₹3,420 करोड़ होने की संभावना है. बेचने वाले शेयरधारक के पास शेयरों की आगे की बिक्री के लिए 90 दिनों की लॉक-इन पीरियड भी रहेगा.
₹320 कर दिया टार्गेट प्राइस
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक मॉर्गन स्टेनली और गोल्डमैन सैक्स को इस ब्लॉक डील के लिए प्लेसमेंट एजेंट बताया जा रहा है. ब्रोकरेज फर्म UBS ने जोमैटो पर अपनी 'Buy' सिफारिश को बनाए रखा है और स्टॉक पर अपने टार्गेट प्राइस को पहले के ₹260 से बढ़ाकर ₹320 कर दिया है. जोमैटो पर UBS का ₹320 का टार्गेट प्राइस CLSA के ₹350 के टार्गेट प्राइस के बाद स्ट्रीट पर दूसरा सबसे अधिक है.
3500 करोड़ रुपये के सौदे से बदलेगा भारतीय बीमा बाजार का समीकरण, कंपनी एचसीएल ग्रुप के साथ नया हेल्थ इंश्योरेंस वेंचर भी लॉन्च करेगी.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
ब्रिटेन की वैश्विक बीमा कंपनी प्रूडेंशियल पीएलसी ने भारतीय बीमा बाजार में बड़ा कदम उठाते हुए भारती एंटरप्राइजेज प्रवर्तित भारती लाइफ इंश्योरेंस में 75 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने का ऐलान किया है. यह सौदा करीब 3500 करोड़ रुपये में होगा और इसके लिए नियामकीय मंजूरियां ली जाएंगी. इसके साथ ही कंपनी ने एचसीएल ग्रुप के साथ मिलकर हेल्थ इंश्योरेंस क्षेत्र में नया संयुक्त उद्यम शुरू करने की भी घोषणा की है.
आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल में हिस्सेदारी घटाएगी कंपनी
प्रूडेंशियल पीएलसी ने बताया कि वह आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस में अपनी हिस्सेदारी लगभग 22 फीसदी से घटाकर 10 फीसदी करेगी. कंपनी के अनुसार, हिस्सेदारी बिक्री से प्राप्त राशि का एक हिस्सा भारती लाइफ के विस्तार में लगाया जाएगा, जबकि शेष पूंजी कंपनी के मुक्त अधिशेष में रखी जाएगी.
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रूडेंशियल अपनी हिस्सेदारी ब्लॉक डील के जरिए सेकंडरी मार्केट में बेचने की तैयारी कर रही है. वहीं फरवरी में आईसीआईसीआई बैंक बोर्ड ने बीमा कंपनी में अतिरिक्त 2 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने को मंजूरी दी थी.
नियमों के कारण उठाना पड़ा यह कदम
मौजूदा नियमों के तहत कोई भी कंपनी एक से अधिक बीमा कंपनियों में 10 फीसदी से ज्यादा हिस्सेदारी नहीं रख सकती. इसी वजह से प्रूडेंशियल को आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल में अपनी हिस्सेदारी कम करनी पड़ रही है. वर्तमान में आईसीआईसीआई बैंक की कंपनी में 50.89 फीसदी हिस्सेदारी है.
यह हाल के समय का दूसरा बड़ा उदाहरण है जब किसी वैश्विक बीमा कंपनी ने पुरानी साझेदारी से बाहर निकलकर नई रणनीतिक साझेदारी चुनी है. इससे पहले अलायंज ने बजाज फिनसर्व के साथ साझेदारी समाप्त कर जियो फाइनैंशियल के साथ हाथ मिलाने का फैसला किया था.
भारती लाइफ में हिस्सेदारी का नया समीकरण
फिलहाल भारती एंटरप्राइजेज के पास भारती लाइफ वेंचर्स के जरिए 85 फीसदी हिस्सेदारी है, जबकि 360 वन एसेट मैनेजमेंट के पास 15 फीसदी हिस्सेदारी मौजूद है.
सौदा पूरा होने के बाद 360 वन पूरी तरह बाहर हो जाएगी और भारती एंटरप्राइजेज की हिस्सेदारी घटकर 25 फीसदी रह जाएगी. वहीं प्रूडेंशियल कंपनी में नियंत्रणकारी हिस्सेदारी हासिल कर लेगी.
भारत को बताया रणनीतिक बाजार
प्रूडेंशियल पीएलसी ने भारत को अपने लिए बेहद आकर्षक और रणनीतिक बाजार बताया है. कंपनी का कहना है कि इस सौदे से भारतीय ग्राहकों की बीमा जरूरतों को बेहतर तरीके से पूरा किया जा सकेगा.
कंपनी ने कहा कि भारती की मजबूत स्थानीय पहुंच और प्रूडेंशियल की वैश्विक बीमा विशेषज्ञता मिलकर भारतीय ग्राहकों तक जीवन और स्वास्थ्य सुरक्षा समाधान पहुंचाने में अहम भूमिका निभाएंगे.
एचसीएल के साथ हेल्थ इंश्योरेंस कारोबार में एंट्री
प्रूडेंशियल पीएलसी ने एचसीएल ग्रुप प्रवर्तकों के साथ मिलकर ‘प्रूडेंशियल एचसीएल हेल्थ इंश्योरेंस’ शुरू करने की योजना भी घोषित की है. कंपनी फिलहाल नियामकीय मंजूरियों पर काम कर रही है और 2026 में कारोबार शुरू होने की उम्मीद है.
सौदा पूरा होने के बाद भारत में प्रूडेंशियल के कारोबार में भारती लाइफ इंश्योरेंस में बहुल हिस्सेदारी के साथ-साथ नई हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी और दो सूचीबद्ध कंपनियों में अल्पांश हिस्सेदारी शामिल होगी.
क्या बोले कंपनी और भारती समूह के प्रमुख
प्रूडेंशियल पीएलसी के सीईओ अनिल वाधवानी ने कहा कि भारत कंपनी के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण बाजार है. उन्होंने कहा कि लगभग 180 वर्षों की वैश्विक बीमा विशेषज्ञता और भारती की मजबूत स्थानीय उपस्थिति मिलकर भारतीय ग्राहकों की बचत और सुरक्षा जरूरतों को बेहतर तरीके से पूरा करेगी.
वहीं भारती एंटरप्राइजेज के संस्थापक और चेयरमैन सुनील भारती मित्तल ने कहा कि प्रूडेंशियल का वैश्विक अनुभव और भारती का मजबूत ट्रैक रिकॉर्ड भारतीय जीवन बीमा क्षेत्र की विशाल संभावनाओं को नई दिशा देगा. उन्होंने कहा कि यह साझेदारी कर्मचारियों के लिए नए अवसर पैदा करेगी और भारत-ब्रिटेन रणनीतिक संबंधों को भी मजबूत बनाएगी.
प्रधानमंत्री मोदी और नीदरलैंड के प्रधानमंत्री रॉब जेटेन के बीच हुई वार्ता में दोनों देशों ने राजनीतिक, आर्थिक, रक्षा और तकनीकी सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति जताई.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दो दिवसीय नीदरलैंड यात्रा भारत के लिए तकनीक, व्यापार और रणनीतिक साझेदारी के लिहाज से बेहद अहम साबित हुई है. इस दौरान भारत और नीदरलैंड के बीच सेमीकंडक्टर, हरित ऊर्जा, रक्षा सहयोग, महत्वपूर्ण खनिज, कृषि, डेरी और समुद्री लॉजिस्टिक्स समेत 17 प्रमुख क्षेत्रों में बड़े समझौतों पर सहमति बनी. दोनों देशों ने अपने रिश्तों को “रणनीतिक साझेदारी” के स्तर तक ले जाने का फैसला किया, जिससे आने वाले वर्षों में व्यापार, निवेश और हाईटेक सेक्टर में सहयोग को नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है.
भारत-नीदरलैंड रिश्तों को मिला रणनीतिक साझेदारी का दर्जा
प्रधानमंत्री मोदी और नीदरलैंड के प्रधानमंत्री रॉब जेटेन के बीच हुई वार्ता में दोनों देशों ने राजनीतिक, आर्थिक, रक्षा और तकनीकी सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति जताई. दोनों पक्षों ने नियमित और योजनाबद्ध सहयोग के जरिए संबंधों को नई ऊंचाई देने के लिए रणनीतिक साझेदारी की कार्य योजना तैयार करने का फैसला किया.
नीदरलैंड यूरोप में भारत का एक बड़ा व्यापारिक साझेदार है. वर्ष 2024-25 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 27.8 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जबकि 55.6 अरब डॉलर के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के साथ नीदरलैंड भारत का चौथा सबसे बड़ा निवेशक बना हुआ है.
सेमीकंडक्टर सेक्टर में बड़ा कदम
यात्रा के दौरान सबसे अहम समझौता गुजरात के धोलेरा में भारत के पहले हाईटेक सेमीकंडक्टर फैब को लेकर हुआ. टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और डच कंपनी ASML के बीच साझेदारी को दोनों प्रधानमंत्रियों ने ऐतिहासिक बताया.
ASML दुनिया की अग्रणी कंपनी है, जो सेमीकंडक्टर चिप निर्माण के लिए जरूरी हाई-प्रिसीजन लिथोग्राफी उपकरण बनाती है. इस साझेदारी से भारत की सेमीकंडक्टर निर्माण क्षमता को बड़ा बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.
इसके अलावा इंडो-डच सेमीकंडक्टर ऑनलाइन स्कूल और “ब्रेन ब्रिज” कार्यक्रम के तहत डच विश्वविद्यालयों और भारतीय तकनीकी संस्थानों के बीच सहयोग को भी मंजूरी दी गई. इसमें IISc, IIT दिल्ली, IIT मुंबई, IIT चेन्नई और IIT गांधीनगर जैसे संस्थान शामिल होंगे.
ग्रीन एनर्जी और हरित हाइड्रोजन पर फोकस
भारत और नीदरलैंड ने हरित हाइड्रोजन विकास के लिए साझा रोडमैप लॉन्च किया. इसके तहत स्वच्छ ऊर्जा, ऊर्जा सुरक्षा और ग्रीन ट्रांजिशन में सहयोग बढ़ाया जाएगा. नीदरलैंड नीति आयोग के साथ मिलकर क्षमता निर्माण में सहयोग करेगा, जबकि ग्रोनिंगन यूनिवर्सिटी और भारतीय IIT संस्थानों के बीच शैक्षणिक साझेदारी को भी बढ़ावा दिया जाएगा.
रक्षा और समुद्री सहयोग को बढ़ावा
दोनों देशों ने रक्षा उद्योगों और रिसर्च संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाने के लिए रक्षा औद्योगिक कार्य योजना पर काम करने का फैसला किया. साथ ही संयुक्त त्रि-सेवा वार्ता और रक्षा तकनीक सहयोग के नए रास्ते तलाशने पर भी सहमति बनी.
भारत को रणनीतिक “ग्रीन और डिजिटल मैरीटाइम कॉरिडोर” विकसित करने में भी डच विशेषज्ञता का लाभ मिलेगा. रॉटरडैम बंदरगाह को भारतीय निर्यातकों के लिए यूरोप में प्रवेश का अहम केंद्र माना जा रहा है.
कृषि, डेरी और जल प्रबंधन में भी सहयोग
दोनों देशों ने कृषि, डेरी और जल प्रबंधन के क्षेत्र में भी साझेदारी बढ़ाने का निर्णय लिया. बेंगलुरु में डेरी प्रशिक्षण केंद्र, पश्चिम त्रिपुरा में फ्लोरिकल्चर सेंटर और कृषि उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने की योजना पर सहमति बनी. इसके अलावा गुजरात की कल्पसर परियोजना के लिए जल प्रबंधन में डच विशेषज्ञता हासिल करने पर भी समझौता हुआ.
वैश्विक मुद्दों पर भी हुई चर्चा
प्रधानमंत्री मोदी और रॉब जेटेन ने रूस-यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया संकट और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर इसके प्रभावों को लेकर भी चर्चा की. दोनों नेताओं ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्वतंत्र नौवहन, क्षेत्रीय अखंडता और शांतिपूर्ण माहौल बनाए रखने पर जोर दिया.
स्वीडन पहुंचेंगे पीएम मोदी
नीदरलैंड दौरे के बाद प्रधानमंत्री मोदी स्वीडन पहुंचे, जहां वह प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टर्सन से मुलाकात करेंगे और यूरोपीय उद्योग गोलमेज सम्मेलन को संबोधित करेंगे. यह दौरा भारत और यूरोप के बीच रणनीतिक और आर्थिक सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है.
शुक्रवार को BSE सेंसेक्स 2,090.2 अंक यानी करीब 2.7 प्रतिशत टूट गया, जबकि NSE निफ्टी 532.65 अंक यानी 2.2 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
पिछले सप्ताह शेयर बाजार में आई भारी गिरावट और टॉप कंपनियों के मार्केट कैप में बड़ी टूट के बाद आज यानी 18 मई को निवेशकों की नजर बाजार के मूड और चुनिंदा शेयरों की चाल पर रहेगी. कच्चे तेल की ऊंची कीमतों, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और वैश्विक तनाव के बीच बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है. वहीं कंपनियों के तिमाही नतीजे, बड़े निवेश सौदे, डिफेंस सेक्टर से जुड़े अपडेट और 5G विस्तार जैसी खबरों के चलते Adani Ports, HAL, Vodafone Idea, Uno Minda और Coal India समेत कई शेयरों में आज तेज हलचल देखने को मिल सकती है.
सेंसेक्स और निफ्टी में बड़ी गिरावट
पिछले सप्ताह घरेलू शेयर बाजार में चौतरफा दबाव देखने को मिला. 30 शेयरों वाला बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स 2,090.2 अंक यानी करीब 2.7 प्रतिशत टूट गया, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) निफ्टी 532.65 अंक यानी 2.2 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ. बाजार में कमजोरी का असर देश की दिग्गज कंपनियों के बाजार पूंजीकरण पर साफ दिखाई दिया.
रिलायंस समेत बड़ी कंपनियों को नुकसान
टॉप 10 कंपनियों में से 9 के बाजार मूल्य में तेज गिरावट दर्ज की गई. इनमें सबसे अधिक नुकसान रिलायंस इंडस्ट्रीज को हुआ, जिससे कंपनी के निवेशकों को बड़ा झटका लगा. बाजार में जारी कमजोरी का असर बैंकिंग, ऊर्जा और वित्तीय कंपनियों के शेयरों पर भी देखने को मिला.
तेल की कीमतों ने बढ़ाई चिंता
विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 105 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचने से भारत के लिए आयातित महंगाई का दबाव बढ़ा है. इससे कंपनियों की लागत और मुनाफे पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है. साथ ही राजकोषीय दबाव और रुपये की कमजोरी ने निवेशकों की चिंता और गहरा दी है.
भू-राजनीतिक तनाव और एफआईआई बिकवाली का असर
पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव, विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और महंगाई को लेकर बढ़ती आशंकाओं ने बाजार का sentiment कमजोर किया. विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले कुछ हफ्तों से जारी कंसोलिडेशन के बाद बाजार ने निचले स्तर की ओर रुख किया, जिससे निवेशकों में घबराहट बढ़ी और बिकवाली तेज हो गई.
आज इन शेयरों पर रखें नजर
सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में कई बड़े शेयर निवेशकों के फोकस में रहेंगे. तिमाही नतीजों, फंड जुटाने की योजनाओं, डिफेंस सेक्टर के अपडेट और बड़े निवेश सौदों के चलते बाजार में शेयर आधारित हलचल देखने को मिल सकती है. Adani Ports की सहायक कंपनी द्वारा मेरिडियन ट्रांसपोर्टेस मैरिटिमोस SA में 51 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदने की खबर से कंपनी के शेयर चर्चा में रह सकते हैं, वहीं Hindustan Aeronautics Limited पर तेजस Mk-1A लड़ाकू विमान सौदे में संभावित बदलावों के कारण दबाव बन सकता है. Uno Minda ने मजबूत तिमाही नतीजों के साथ महाराष्ट्र में नए ईवी पावरट्रेन प्रोजेक्ट में 550 करोड़ रुपये निवेश की घोषणा की है. Vodafone Idea ने 5G विस्तार, फंड जुटाने और ग्राहक आधार बढ़ने का अपडेट दिया है, जबकि Coal India की सहायक कंपनी MCL की संभावित लिस्टिंग को भी मंजूरी मिल गई है. इसके अलावा Aurobindo Pharma को कैंसर उपचार से जुड़ी दवा के लिए बड़ी मंजूरी मिली है, जबकि Emcure Pharmaceuticals को US FDA से सात ऑब्जर्वेशन के साथ Form 483 जारी हुआ है. Shree Cement को 153 करोड़ रुपये का टैक्स नोटिस मिला है और Garware Hi-Tech Films के CFO ने इस्तीफा दे दिया है. आज Indian Oil Corporation, Ola Electric Mobility, Astral, Indraprastha Gas, Puravankara और Zydus Wellness जैसी कई बड़ी कंपनियों के तिमाही नतीजे भी जारी होंगे, जिससे संबंधित शेयरों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है.
(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)
रिपोर्ट के अनुसार, सोने के आयात पर सख्ती के चलते चालू खाता घाटा (CAD) कुछ हद तक कम हो सकता है. बैंक ने वित्त वर्ष 2027 के लिए CAD का अनुमान GDP के 1.8 प्रतिशत से घटाकर 1.5 प्रतिशत कर दिया है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत का व्यापार घाटा अप्रैल 2026 में बढ़कर 28.4 अरब डॉलर पहुंच गया. मार्च में यह 20.7 अरब डॉलर था. तेल और सोने के आयात में तेज बढ़ोतरी इसकी मुख्य वजह रही. हालांकि निर्यात में हाल के महीनों की तुलना में मजबूत बढ़त दर्ज की गई है. यस बैंक (Yes Bank) की इकोनॉमिक्स रिसर्च टीम की रिपोर्ट के मुताबिक. घरेलू मांग मजबूत रहने से आयात तेजी से बढ़ रहा है. जबकि निर्यात वृद्धि अभी उस गति को पूरी तरह संतुलित नहीं कर पा रही है.
अप्रैल में निर्यात में मजबूत सुधार
अप्रैल में भारत का कुल निर्यात सालाना आधार पर 13.8 प्रतिशत बढ़कर 43.6 अरब डॉलर पहुंच गया. मार्च में इसमें 7.4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी. पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात में सबसे ज्यादा तेजी देखी गई. यह एक महीने में 85.1 प्रतिशत बढ़ा. वैश्विक कीमतों में उछाल इसका बड़ा कारण रहा. इसके अलावा रत्न एवं आभूषण. इलेक्ट्रॉनिक सामान और लौह अयस्क के निर्यात में भी बढ़त दर्ज की गई. हालांकि गैर-तेल निर्यात में केवल 0.7 प्रतिशत की मामूली वृद्धि हुई और यह 34 अरब डॉलर पर पहुंचा. इससे साफ संकेत मिलता है कि ऊर्जा क्षेत्र को छोड़कर निर्यात की रफ्तार अभी भी कमजोर बनी हुई है.
आयात बिल में भी तेज उछाल
अप्रैल में कुल आयात बिल 71.9 अरब डॉलर रहा. यह सालाना आधार पर 10 प्रतिशत अधिक है. गैर-तेल और गैर-सोना आयात 47.7 अरब डॉलर पर मजबूत बना रहा. तेल आयात बिल मार्च के 12.2 अरब डॉलर से बढ़कर अप्रैल में 18.6 अरब डॉलर हो गया. रिपोर्ट के मुताबिक. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में युद्धविराम की घोषणा के बाद तेल आपूर्ति में फिर से तेजी आई. वहीं, सोने का आयात 83.8 प्रतिशत बढ़कर 5.6 अरब डॉलर पहुंच गया. अप्रैल में कुल आयात में सोने की हिस्सेदारी 7.8 प्रतिशत रही.
सरकार ने सोने के आयात पर बढ़ाई सख्ती
सरकार ने 13 मई से सोने और चांदी पर आयात शुल्क 5 प्रतिशत से बढ़ाकर 10 प्रतिशत कर दिया है. साथ ही कृषि एवं अवसंरचना विकास उपकर (AIDC) को 1 प्रतिशत से बढ़ाकर 5 प्रतिशत किया गया है. इससे कुल प्रभावी आयात शुल्क 15 प्रतिशत हो गया है.
इसके अलावा एडवांस ऑथराइजेशन योजना के तहत निर्माताओं के लिए 100 किलोग्राम तक की आयात सीमा तय की गई है. नई लाइसेंस शर्तों के तहत कम से कम 50 प्रतिशत पुराने निर्यात दायित्व पूरे करना भी जरूरी होगा. यस बैंक का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2027 में सोने का आयात घटकर करीब 420 टन रह सकता है. जबकि वित्त वर्ष 2026 में यह लगभग 720 टन रहने का अनुमान है.
चालू खाता घाटे के अनुमान में सुधार
रिपोर्ट के अनुसार, सोने के आयात पर सख्ती के चलते चालू खाता घाटा (CAD) कुछ हद तक कम हो सकता है. बैंक ने वित्त वर्ष 2027 के लिए CAD का अनुमान GDP के 1.8 प्रतिशत से घटाकर 1.5 प्रतिशत कर दिया है.
ब्रेंट क्रूड की कीमत 85 डॉलर प्रति बैरल रहने के अनुमान के आधार पर बैंक का कहना है कि केवल सोने के आयात में कमी से करीब 23 अरब डॉलर की बचत हो सकती है. अब वित्त वर्ष 2027 में सोने के कुल आयात का अनुमान 57 अरब डॉलर लगाया गया है. इससे पहले यह अनुमान 80 अरब डॉलर था.
रुपये पर दबाव बना रह सकता है
हालांकि चालू खाता घाटे में राहत के बावजूद यस बैंक ने चेतावनी दी है कि पूंजी प्रवाह पर दबाव बना रह सकता है. बैंक के मुताबिक. भुगतान संतुलन घाटा 30 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है. रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि डॉलर के मुकाबले रुपया साल के मध्य तक 97 से 97.50 के स्तर तक पहुंच सकता है.
सेवा क्षेत्र का शुद्ध अधिशेष अप्रैल में थोड़ा घटकर 20.6 अरब डॉलर रह गया. मार्च में यह 20.9 अरब डॉलर था. सेवा निर्यात महीने-दर-महीने 2.5 प्रतिशत घटा. हालांकि सालाना आधार पर इसमें 13.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई.
केवल सोना नियंत्रण से नहीं सुलझेगी चुनौती
यस बैंक का कहना है कि केवल सोने के आयात पर रोक लगाने से भुगतान संतुलन की पूरी समस्या हल नहीं होगी. असली चुनौती ऐसे समय में पर्याप्त विदेशी पूंजी निवेश आकर्षित करना है. जब वैश्विक बाजार में जोखिम लेने की क्षमता कमजोर बनी हुई है और रुपये पर लगातार दबाव बना हुआ है.
RBL Bank के अनुसार, यह निवेश प्राथमिक पूंजी निवेश के रूप में किया जाएगा. Emirates NBD Bank तरजीही निर्गम के जरिए 280 रुपए प्रति शेयर के भाव पर 959,045,636 इक्विटी शेयर खरीदेगा.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत के निजी बैंकिंग सेक्टर में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है. दरअसल, वित्त मंत्रालय ने दुबई स्थित एमिरेट्स एनबीडी बैंक (Emirates NBD Bank) को आरबीएल बैंक (RBL Bank) में 74 प्रतिशत तक हिस्सेदारी अधिग्रहित करने की अंतिम मंजूरी दे दी है. इस मंजूरी के साथ करीब 26,850 करोड़ रुपए के बड़े विदेशी निवेश का रास्ता साफ हो गया है. यह सौदा भारतीय बैंकिंग सेक्टर के सबसे बड़े अंतरराष्ट्रीय निवेशों में से एक माना जा रहा है. अधिग्रहण प्रस्ताव की घोषणा 18 अक्टूबर 2025 को की गई थी.
अब नए निवेशकों के हाथ में होगी बैंक की कमान
वित्त मंत्रालय की मंजूरी के बाद आरबीएल बैंक में मालिकाना हक और नियंत्रण का बड़ा हिस्सा नए प्रमोटर समूह के पास चला जाएगा. बैंक ने शेयर बाजार को दी जानकारी में बताया कि वित्तीय सेवा विभाग की ओर से भेजे गए पत्र में 49 प्रतिशत से अधिक और 74 प्रतिशत तक हिस्सेदारी खरीदने की अनुमति दी गई है.
इस तरह के बड़े बैंकिंग सौदों में रिजर्व बैंक और वित्त मंत्रालय की मंजूरी बेहद अहम मानी जाती है. इससे पहले भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India) और भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) भी इस प्रस्ताव को मंजूरी दे चुके हैं.
किस तरह पूरी होगी डील
आरबीएल बैंक के अनुसार, यह निवेश प्राथमिक पूंजी निवेश के रूप में किया जाएगा. एमिरेट्स एनबीडी बैंक तरजीही निर्गम के जरिए 280 रुपए प्रति शेयर के भाव पर 959,045,636 इक्विटी शेयर खरीदेगा. इस डील के बाद विदेशी बैंक की हिस्सेदारी 51 प्रतिशत से 74 प्रतिशत के बीच रह सकती है. हालांकि अंतिम हिस्सेदारी नियामकीय शर्तों पर निर्भर करेगी. लेनदेन पूरा होने के बाद बैंक में विदेशी बैंक की अनुषंगी इकाई वाला मॉडल लागू होगा और एमिरेट्स एनबीडी बैंक को प्रमोटर के रूप में मान्यता मिलेगी.
बैंक की ग्रोथ को मिलेगा बड़ा सहारा
बैंक का कहना है कि यह निवेश उसे विकास के अगले चरण के लिए मजबूत स्थिति में लाएगा. पूंजी बढ़ने से बैंक की कर्ज देने की क्षमता. डिजिटल विस्तार और नए कारोबार क्षेत्रों में निवेश को मजबूती मिलेगी. विशेषज्ञों का मानना है कि इस डील से भारतीय बैंकिंग सेक्टर में विदेशी निवेशकों का भरोसा भी मजबूत होगा.
शेयर बाजार में बढ़ सकती है हलचल
वित्त मंत्रालय की मंजूरी के बाद आने वाले कारोबारी सत्रों में आरबीएल बैंक के शेयरों में हलचल देखने को मिल सकती है. शुक्रवार को बैंक का शेयर 1.05 रुपए की तेजी के साथ 338 रुपए पर बंद हुआ. कारोबार के दौरान शेयर 339.55 रुपए के दिन के उच्च स्तर तक पहुंचा था. वहीं बैंक के शेयर का 52 हफ्तों का उच्चतम स्तर 349.75 रुपए रहा है. फिलहाल शेयर अपने 52 हफ्तों के हाई से करीब 10 से 11 रुपए नीचे कारोबार कर रहा है.
भारतीय बैंकिंग सेक्टर के लिए अहम सौदा
विशेषज्ञों के अनुसार. यह सौदा भारतीय बैंकिंग सेक्टर में विदेशी रणनीतिक निवेश के लिहाज से एक बड़ा कदम माना जा रहा है. इससे न केवल आरबीएल बैंक को पूंजी और वैश्विक विशेषज्ञता मिलेगी. बल्कि भारतीय बैंकिंग बाजार में अंतरराष्ट्रीय बैंकों की दिलचस्पी भी बढ़ सकती है.
वर्कर्स ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द राहत नहीं मिली, तो आने वाले दिनों में बड़े स्तर पर आंदोलन किया जा सकता है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
देशभर में ऐप आधारित टैक्सी ड्राइवरों और डिलीवरी वर्कर्स ने बढ़ती ईंधन कीमतों और कम भुगतान दरों के खिलाफ शनिवार को 5 घंटे की अस्थायी हड़ताल का आह्वान किया है. गिग और प्लेटफॉर्म सर्विसेज वर्कर्स यूनियन (GIPSWU) ने दोपहर 12 बजे से शाम 5 बजे तक सेवाएं बंद रखने की अपील की है. इस हड़ताल का असर कैब बुकिंग और फूड डिलीवरी जैसी सेवाओं पर पड़ सकता है.
यूनियन का कहना है कि लगातार बढ़ती पेट्रोल-डीजल की कीमतों और ऐप कंपनियों की कम भुगतान दरों के कारण हजारों ड्राइवरों और डिलीवरी पार्टनर्स के सामने रोजी-रोटी का संकट गहराता जा रहा है.
सोशल मीडिया के जरिए आंदोलन की अपील
यूनियन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर देशभर के गिग वर्कर्स से इस आंदोलन में शामिल होने की अपील की. यूनियन ने कहा कि ऐप कंपनियां किराए और इंसेंटिव में पर्याप्त बढ़ोतरी नहीं कर रही हैं. जबकि ड्राइवरों का खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है. GIPSWU के मुताबिक. बढ़ती महंगाई के बीच मौजूदा भुगतान ढांचा वर्कर्स के लिए आर्थिक रूप से टिकाऊ नहीं रह गया है.
पेट्रोल-डीजल की कीमतों में फिर बढ़ोतरी
हाल ही में सरकारी तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में करीब 3 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है. इसके बाद दिल्ली में पेट्रोल की कीमत लगभग 97.77 रुपए प्रति लीटर और डीजल 90.67 रुपए प्रति लीटर तक पहुंच गई है. वहीं हैदराबाद में पेट्रोल 110.8 रुपए प्रति लीटर और डीजल 98.9 रुपए प्रति लीटर हो गया है.
बताया जा रहा है कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बढ़ते तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है. कच्चा तेल 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर करीब 105 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच चुका है.
‘कमाई से ज्यादा खर्च बढ़ रहा है’
कैब ड्राइवर्स का कहना है कि हर बार पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने पर सबसे ज्यादा असर ड्राइवरों पर पड़ता है. उन्होंने कहा कि ईंधन की लागत बढ़ने के बावजूद किराए में उसी अनुपात में बढ़ोतरी नहीं होती. उनका कहना है कि कमीशन और ईंधन का खर्च निकालने के after बहुत कम पैसा बचता है. कई बार घर चलाना भी मुश्किल हो जाता है. कई डिलीवरी वर्कर्स ने भी कहा कि उनका ज्यादातर समय सड़क पर गुजरता है. ऐसे में ईंधन की बढ़ती कीमतें सीधे उनकी कमाई को प्रभावित करती हैं.
तेल कंपनियों पर भी बढ़ा दबाव
तेल कंपनियों के अधिकारियों के मुताबिक. हालिया बढ़ोतरी के बावजूद कंपनियां अभी भी अपनी लागत पूरी तरह वसूल नहीं कर पा रही हैं. क्रिसिल के अनुमान के अनुसार. सरकारी ईंधन खुदरा विक्रेताओं को पेट्रोल पर करीब 10 रुपए प्रति लीटर और डीजल पर लगभग 13 रुपए प्रति लीटर का नुकसान हो रहा है.
भारतीय रिफाइनरियों के लिए कच्चे तेल की लागत फरवरी के 69 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर मई में 106 डॉलर प्रति बैरल से अधिक हो गई है. इस दौरान पेट्रोल और डीजल की कीमतों में करीब 75 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई है.
बड़े आंदोलन की चेतावनी
गिग वर्कर्स का कहना है कि इस अस्थायी हड़ताल का उद्देश्य सरकार और ऐप कंपनियों तक अपनी समस्याएं पहुंचाना है. उनका कहना है कि बढ़ती महंगाई और कम भुगतान के बीच परिवार चलाना मुश्किल होता जा रहा है. वर्कर्स ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द राहत नहीं मिली. तो आने वाले दिनों में बड़े स्तर पर आंदोलन किया जा सकता है.
IHC के नियंत्रण में आने के बाद Sammaan Capital के लिए यह कदम रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है. इससे कंपनी की वित्तीय स्थिति, वैश्विक पहुंच और तकनीकी क्षमताओं में बड़ा बदलाव देखने की उम्मीद है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत की प्रमुख हाउसिंग फाइनेंस कंपनी Sammaan Capital Limited ने एक बड़े कॉर्पोरेट बदलाव का ऐलान किया है. अंतरराष्ट्रीय निवेश कंपनी International Holding Company PJSC (IHC) के निवेश और ओपन ऑफर के पूरा होने के बाद अब Sammaan Capital आधिकारिक तौर पर IHC ग्रुप कंपनी बन गई है. इसके साथ ही कंपनी ने नए प्रमोटर और बोर्ड स्तर पर अहम बदलावों की भी घोषणा की है.
कंपनी ने यह जानकारी 15 मई 2026 को स्टॉक एक्सचेंजों को भेजी गई सूचना में दी. IHC दुनिया की सबसे बड़ी सूचीबद्ध निवेश कंपनियों में से एक है. कंपनी का मार्केट कैप करीब 232 अरब अमेरिकी डॉलर और कुल संपत्ति 117 अरब डॉलर से अधिक है. IHC की मौजूदगी 100 से ज्यादा देशों में है. कंपनी ने भारत को अपने सबसे अहम रणनीतिक बाजारों में शामिल बताया है.
सम्मान कैपिटल को मिलेंगे कई बड़े फायदे
सम्मान कैपिटल ने कहा कि IHC के साथ यह साझेदारी कंपनी के लिए कई बड़े बदलाव लेकर आएगी. इसमें पूंजी की मजबूती, वैश्विक स्तर की वित्तीय विश्वसनीयता, बेहतर क्रेडिट रेटिंग और कम उधारी लागत जैसे फायदे शामिल हैं. कंपनी के अनुसार, दो रेटिंग एजेंसियां पहले ही उसकी रेटिंग अपग्रेड कर चुकी हैं, जबकि अन्य एजेंसियां भी जल्द समीक्षा करेंगी.
AI और टेक्नोलॉजी पर रहेगा फोकस
कंपनी ने बताया कि IHC समूह के विशेषज्ञ अब सम्मान कैपिटल की टीमों के साथ आईटी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), जोखिम प्रबंधन, क्रेडिट और फाइनेंस जैसे क्षेत्रों में काम कर रहे हैं. इससे कंपनी की परिचालन क्षमता और तकनीकी दक्षता को मजबूती मिलेगी. सम्मान कैपिटल ने कहा कि IHC का मजबूत टेक्नोलॉजी और AI इकोसिस्टम कंपनी के दीर्घकालिक विकास, नवाचार और परिचालन दक्षता को बढ़ावा देगा.
कॉर्पोरेट गवर्नेंस को मिलेगी मजबूती
कंपनी ने कहा कि IHC के साथ जुड़ाव से कॉर्पोरेट गवर्नेंस के उच्चतम मानकों और संस्थागत प्रक्रियाओं को और मजबूती मिलेगी. इससे निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा और कंपनी की बाजार छवि मजबूत होगी.
अल्विन दिनेश क्रास्टा बने नए निदेशक
कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने 15 मई 2026 को हुई बैठक में कई अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी. बोर्ड ने आधिकारिक रूप से नोट किया कि IHC के स्वामित्व वाली Avenir Investment RSC Ltd ने ओपन ऑफर पूरा कर लिया है और अब वह कंपनी की प्रमोटर बन गई है. इसके अलावा बोर्ड ने अल्विन दिनेश क्रास्टा को अतिरिक्त गैर-कार्यकारी गैर-स्वतंत्र निदेशक नियुक्त करने को मंजूरी दे दी है. यह नियुक्ति 15 मई 2026 से पांच वर्षों के लिए प्रभावी होगी. हालांकि वे रोटेशन के आधार पर रिटायर होने वाले निदेशक रहेंगे.
25 वर्षों का वित्तीय अनुभव
अल्विन दिनेश क्रास्टा वर्तमान में IHC समूह में ग्रुप चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें वित्तीय सेवाओं, कृषि, सप्लाई चेन, उपभोक्ता वस्तु और निवेश क्षेत्रों में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वे मार्च 2018 से अबू धाबी स्थित IHC में बड़े वित्तीय संचालन, निवेश, कॉर्पोरेट गवर्नेंस और विलय एवं अधिग्रहण गतिविधियों का नेतृत्व कर रहे हैं.
कंपनी ने स्पष्ट किया कि अल्विन दिनेश क्रास्टा का कंपनी के किसी अन्य निदेशक से कोई संबंध नहीं है. साथ ही उन्हें सेबी या किसी अन्य प्राधिकरण द्वारा निदेशक पद संभालने से प्रतिबंधित नहीं किया गया है.
आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल में भारत का वस्तु निर्यात 13.8% बढ़कर 43.56 अरब डॉलर पर पहुंच गया, जो पिछले चार वर्षों का सर्वोच्च स्तर है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में बाधाओं के बावजूद भारत के विदेश व्यापार ने अप्रैल में मजबूत प्रदर्शन दर्ज किया. वस्तु निर्यात में तेज बढ़ोतरी देखने को मिली, लेकिन इसी दौरान सोने-चांदी के भारी आयात ने व्यापार घाटे को भी बढ़ा दिया. वाणिज्य मंत्रालय की ओर से आज जारी आंकड़ों के अनुसार, यह स्थिति भारत के बाहरी व्यापार में तेजी और असंतुलन दोनों को दर्शाती है.
अप्रैल में निर्यात 4 साल के उच्च स्तर पर
आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल में भारत का वस्तु निर्यात 13.8% बढ़कर 43.56 अरब डॉलर पर पहुंच गया, जो पिछले चार वर्षों का सर्वोच्च स्तर है. यह बढ़ोतरी ऐसे समय में दर्ज हुई है जब पश्चिम एशिया में संकट के कारण वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित थी. वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, कमोडिटी कीमतों में तेजी और भारतीय उद्योगों द्वारा नए बाजारों में विस्तार की रणनीति ने निर्यात को मजबूती दी.
आयात में भी उछाल, व्यापार घाटा बढ़कर 28.38 अरब डॉलर
आयात में भी अप्रैल के दौरान 10% की वृद्धि दर्ज की गई और यह 71.94 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो पिछले छह महीनों का उच्च स्तर है. इस बढ़ोतरी का बड़ा कारण सोना और चांदी का भारी आयात रहा. इसके चलते व्यापार घाटा बढ़कर 28.38 अरब डॉलर हो गया, जो पिछले तीन महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है.
पेट्रोलियम और इलेक्ट्रॉनिक्स ने संभाली निर्यात की रफ्तार
निर्यात वृद्धि में पेट्रोलियम उत्पादों और इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं की अहम भूमिका रही. पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात 34.7% बढ़कर 9.59 अरब डॉलर हो गया, जबकि इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं का निर्यात 40.3% की छलांग लगाकर 5.18 अरब डॉलर तक पहुंच गया.
सोने-चांदी के आयात में तेज बढ़ोतरी
आयात के मोर्चे पर सबसे बड़ा असर कीमती धातुओं से पड़ा. सोने का आयात 81.7% बढ़कर 5.63 अरब डॉलर हो गया, जबकि चांदी का आयात दोगुने से अधिक होकर 41.10 करोड़ डॉलर तक पहुंच गया. इस वृद्धि ने कुल आयात बिल को काफी बढ़ा दिया.
सेवाओं के व्यापार में भी मजबूत प्रदर्शन
सेवा क्षेत्र में भी भारत ने सकारात्मक प्रदर्शन किया. अप्रैल में सेवाओं का निर्यात 13.4% बढ़कर 37.24 अरब डॉलर रहा, जबकि सेवाओं का आयात घटकर 16.66 अरब डॉलर रह गया. इससे भारत को लगभग 20.58 अरब डॉलर का सेवा व्यापार अधिशेष प्राप्त हुआ. भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा अंतिम आंकड़े बाद में जारी किए जाएंगे.
वैश्विक तनाव का क्षेत्रीय व्यापार पर असर
पश्चिम एशिया संकट का असर भारत के कुछ प्रमुख व्यापारिक साझेदारों पर भी दिखा. संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के साथ व्यापार में निर्यात और आयात दोनों में 30% से अधिक की गिरावट दर्ज की गई. कच्चे तेल के आयात में भी 10% की गिरावट रही और यह 18.63 अरब डॉलर पर आ गया.
अमेरिका अप्रैल में भारत का सबसे बड़ा निर्यात गंतव्य बना रहा, जहां निर्यात 8.48 अरब डॉलर तक पहुंचा. वहीं आयात 4.7% घटकर 5.27 अरब डॉलर रहा. सिंगापुर को निर्यात लगभग तीन गुना बढ़कर 3.20 अरब डॉलर हो गया. चीन को निर्यात 27% बढ़कर 1.77 अरब डॉलर रहा, जबकि चीन से आयात 20.9% बढ़कर 11.97 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जिससे वह भारत का सबसे बड़ा आयात स्रोत बना रहा.
गोपीनाथ की टिप्पणी ने एक बार फिर इस मांग को मजबूत किया है कि वैश्विक नीति निर्माण और निर्णय लेने वाले मंचों पर अधिक विविधता सुनिश्चित की जाए.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की पूर्व प्रथम उप प्रबंध निदेशक गीता गोपीनाथ ने हाल ही में अमेरिका और चीन के बीच हुई एक उच्चस्तरीय बैठक में महिलाओं की अनुपस्थिति को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया दी है. उनकी टिप्पणी के बाद वैश्विक स्तर पर लैंगिक प्रतिनिधित्व और नेतृत्व में विविधता को लेकर नई बहस शुरू हो गई है.
केवल पुरुष प्रतिनिधियों की मौजूदगी पर जताई आपत्ति
बैठक की तस्वीरों पर प्रतिक्रिया देते हुए गोपीनाथ ने इसे “मेरिटोक्रेसी के अंत की तस्वीर” बताया. उन्होंने कहा कि ऐसे उच्चस्तरीय वैश्विक मंचों पर महिलाओं की अनुपस्थिति निर्णय लेने की प्रक्रिया में विविधता और समावेशिता की कमी को दर्शाती है. उनकी यह टिप्पणी तेजी से नीति विशेषज्ञों, अर्थशास्त्रियों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर चर्चा का विषय बन गई, जहां कई लोगों ने वैश्विक नेतृत्व में महिलाओं की कम भागीदारी पर चिंता जताई.
वैश्विक आर्थिक चुनौतियों पर हुई थी अहम बैठक
यह बैठक दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं अमेरिका और चीन के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच वैश्विक आर्थिक मुद्दों पर चर्चा के लिए आयोजित की गई थी. हालांकि, महिला प्रतिनिधित्व की अनुपस्थिति ने चर्चा का केंद्र बदल दिया और नेतृत्व संरचनाओं में मौजूद असमानताओं पर सवाल खड़े कर दिए.
विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं और कॉरपोरेट नेतृत्व में धीरे-धीरे सुधार हुआ है, लेकिन भू-राजनीतिक और उच्चस्तरीय बैठकों में अब भी लैंगिक असंतुलन स्पष्ट रूप से दिखाई देता है.
वैश्विक मंचों पर विविधता की मांग तेज
गोपीनाथ की टिप्पणी ने एक बार फिर इस मांग को मजबूत किया है कि वैश्विक नीति निर्माण और निर्णय लेने वाले मंचों पर अधिक विविधता सुनिश्चित की जाए. विशेषज्ञों का मानना है कि आर्थिक सुधार, व्यापार और जलवायु वित्त जैसे विषयों पर बेहतर परिणाम के लिए समावेशी प्रतिनिधित्व जरूरी है.
‘मेरिट’ और ‘प्रतिनिधित्व’ के बीच बढ़ती बहस
इस घटना ने यह भी चर्चा तेज कर दी है कि क्या केवल मेरिटोक्रेसी पर्याप्त है या फिर समान प्रतिनिधित्व भी उतना ही जरूरी है. कई विश्लेषकों का कहना है कि विविधता न केवल नीतियों की गुणवत्ता बढ़ाती है बल्कि उनकी वैधता को भी मजबूत करती है.
वैश्विक संस्थानों पर बढ़ा दबाव
जैसे-जैसे यह मामला चर्चा में आ रहा है, सरकारों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं पर यह दबाव बढ़ता जा रहा है कि वे नेतृत्व स्तर पर लैंगिक समावेशन को केवल नीति तक सीमित न रखकर वास्तविक प्रतिनिधित्व में भी बदलें.
लगातार दो हफ्तों की गिरावट के बाद विदेशी मुद्रा भंडार में जोरदार वापसी हुई है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
देश के विदेशी मुद्रा भंडार में एक बार फिर मजबूती देखने को मिली है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक, भारत के फॉरेक्स रिजर्व में 6.295 अरब डॉलर यानी करीब 60 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. लगातार दो हफ्तों की गिरावट के बाद आए इस उछाल को भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है.
दिलचस्प बात यह है कि हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने, विदेशी यात्राओं को टालने और सोना-चांदी की खरीद में सावधानी बरतने की अपील की थी. माना जा रहा है कि सरकार का फोकस देश के विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत बनाए रखने पर है.
696 अरब डॉलर के करीब पहुंचा फॉरेक्स रिजर्व
आरबीआई के अनुसार, 8 मई को समाप्त सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार बढ़कर 696.988 अरब डॉलर हो गया. इससे पहले वाले सप्ताह में इसमें 7.794 अरब डॉलर की गिरावट दर्ज की गई थी और रिजर्व घटकर 690.693 अरब डॉलर पर पहुंच गया था. इस साल फरवरी के अंत में भारत का फॉरेक्स रिजर्व 728.494 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया था. हालांकि बाद में पश्चिम एशिया संकट और रुपए पर बढ़ते दबाव के कारण इसमें गिरावट देखने को मिली. उस दौरान रुपए को स्थिर रखने के लिए आरबीआई को विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर बेचकर हस्तक्षेप करना पड़ा था.
विदेशी मुद्रा संपत्तियों में भी बढ़ोतरी
आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां यानी फॉरेन करेंसी असेट्स भी बढ़ी हैं. 8 मई को समाप्त सप्ताह में ये 562 मिलियन डॉलर बढ़कर 552.387 अरब डॉलर हो गईं. इन परिसंपत्तियों में यूरो, पाउंड और येन जैसी गैर-अमेरिकी मुद्राओं के मूल्य में बदलाव का असर भी शामिल होता है. डॉलर के मुकाबले इन मुद्राओं में मजबूती आने से विदेशी मुद्रा संपत्तियों का मूल्य बढ़ा है.
गोल्ड रिजर्व ने भी बढ़ाई ताकत
देश के गोल्ड रिजर्व में भी मजबूत इजाफा देखने को मिला है. आरबीआई के मुताबिक, सोने के भंडार का मूल्य 5.637 अरब डॉलर बढ़कर 120.853 अरब डॉलर हो गया. इसके अलावा, विशेष आहरण अधिकार (SDRs) में 84 मिलियन डॉलर की बढ़ोतरी हुई और यह 18.873 अरब डॉलर तक पहुंच गया. वहीं अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के पास भारत की आरक्षित स्थिति भी बढ़कर 4.875 अरब डॉलर हो गई.
अर्थव्यवस्था के लिए क्यों अहम है फॉरेक्स रिजर्व
फॉरेक्स रिजर्व किसी भी देश की आर्थिक मजबूती का बड़ा संकेतक माना जाता है. इससे आयात भुगतान, विदेशी कर्ज और रुपए की स्थिरता बनाए रखने में मदद मिलती है. रिजर्व मजबूत होने से वैश्विक स्तर पर निवेशकों का भरोसा भी बढ़ता है. विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में अगर विदेशी निवेश और निर्यात में सुधार जारी रहता है, तो भारत का विदेशी मुद्रा भंडार फिर से रिकॉर्ड स्तर की ओर बढ़ सकता है.