Zomato ने पूरा किया 16 साल का सफर, इस खास मौके को दीपिंदर गोयल ने कुछ ऐसे किया सेलिब्रेट

जोमैटो (Zomato) की शुरुआत जुलाई 2008 में हुई थी. आज यानी 10 जुलाई को जोमैटो ने अपनी स्थापना के 16 साल पूरे कर लिए हैं.

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Wednesday, 10 July, 2024
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भारत की दिग्गज फूड डिलीवरी कंपनी जोमैटो (Zomato) की स्थापना को पूरे 16 साल हो गए हैं. इस दिन को जोमैटो के फाउंडर और सीईओ दीपिंदर गोयल ने कुछ खास अंदाज में सेलिब्रेट किया, जिसकी फोटो उन्होंने सोशल मीडिया पर भी शेयर की हैं. साथ ही उन्होंने एक अखबार में जोमैटो के 16वें जन्मदिन का बड़ा विज्ञापन भी दिया, जिसे देखकर पेटीएम के सीईओ विजय शेखर शर्मा ने दीपिंदर गोयल की कामयाबी की तारीफ कर उन्हें शुभकामनाएं दी. तो चलिए जानते हैं दीपिंदर गोयल ने इस खास दिन को कैसे सेलिब्रेट किया?

स्कूल में जाकर बच्चों के साथ किया सेलिब्रेशन

दीपिंदर गोयल ने जोमैटो का 16वां स्थापना दिवस जोमैटो की फीड इंडिया (Feeding India) संस्था द्वारा संचालित स्कूल में जाकर वहां पढ़ने वाले बच्चों के साथ सेलिब्रेट किया. उन्होंने स्कूल के बच्चों के साथ केक कटिंग की और बच्चों ने भी उन्हें काफी प्यार दिया. इस खास मौके की तस्वीरें उन्होंने सोशल मीडिया पर भी शेयर की हैं. उनकी इस पोस्ट को लोगों का काफी प्यार मिल रहा है.

पेटीएम के सीईओ ने कैसे की तारीफ?

पेटीएम के सीईओ विजय शेखर शर्मा जोमैटो के विज्ञापन से खुश हुए. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स (x) पर पोस्ट करके लिखा कि जोमैटो के 16वें जन्मदिन पर, प्रमुख दीपिंदर जी व उनकी कार्यकारिणी के सभी सदस्यों को हार्दिक भगवान करे उनके ऐसे अति सराहनीय विज्ञापन हमको हमेशा हमेशा मिलते रहें.

ग्राहकों के लिए विशेष ऑफर

कंपनी ने अपने 16वें जन्मदिन के मौके पर ग्राहकों के लिए एक ख़ास ऑफर भी पेश किया. जिसमें 6 महीने की अवधि के लिए ग्राहक गोल्ड मेंबरशिप केवल 30 रुपये में खरीद सकते हैं. हालांकि ये ऑफर केवल एक ही दिन के लिए यानी 10 जुलाई के लिए ही दिया गया है.

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भारत के आठ शहरों में एयरबस शुरू करेगी मैन्‍युफैक्‍चरिंग यूनिट, इस कंपनी के साथ हुआ गठजोड़

कंपनी भारत की तेजी से आगे बढ़ती अर्थव्‍यवस्‍था के बीच अपने लिए यहां बड़ा बाजार देख रही है. कंपनी का मानना है कि आने वाले 20 सालों में वो 500 हेलीकॉप्‍टर का उत्‍पादन करेगी.

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Monday, 22 July, 2024
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दुनिया भर की एविएशन कंपनियों के लिए एयरक्राफ्ट बनाने वाली कंपनी एयरबस देश में बड़ी असेंबली लाइन शुरू करने की तैयारी कर रही है. कंपनी ने इसके लिए देश के आठ शहरों का नाम फाइनल किया है. कंपनी ने इसके लिए टाटा एडवांस्‍ड सिस्‍टम लिमिटेड के साथ हाथ मिलाया है. कंपनी यहां एडवांस्‍ड किस्‍म के हेलीकॉप्‍टर बनाएगी. sकंपनी जल्‍द ही अपनी पहली असेंबली लाइन का उद्घाटन करने जा रही है. पहली असेंबली लाइन में कंपनी सी 295 एयरक्राफ्ट का निर्माण करने जा रही है. 

कंपनी के चेयरमैन ने कही ये बात 
एयरबस के एग्जिक्‍यूटिव चेयरमैन oliviear Micalon ने कहा कि हमने इन प्‍लांट के लिए आठ शहरों का चयन किया है. हालांकि उन्‍होंने इन शहरों के नाम नहीं बताए. कंपनी इन शहरों में अपनी आखिरी असेंबली लाइन को शुरू करने की योजना बना रही है. उन्‍होंने कहा कि ये कंपनी के चौथा प्‍लांट होगा, जहां सिंगल इंजन के हेलीकॉप्‍टर बनाए जाएंगे. इससे पहले कंपनी सिंगल इंजन के हेलीकॉप्‍टर अमेरिका, फ्रांस और ब्राजील जैसे देशों में इन्‍हें बना रही है. अगर सबकुछ ठीक रहा और कंपनी अपने इन प्‍लांट को शुरू करने में कामयाब रहती है तो ये प्राइवेट सेक्‍टर में सिविल हेलीकॉप्‍टर बनाने वाली पहली कंपनी होगी. 

कंपनी के लिए बड़ा बाजार साबित होगा भारत 
कंपनी भारत की तेजी से आगे बढ़ती अर्थव्‍यवस्‍था के बीच अपने लिए यहां बड़ा बाजार देख रही है. कंपनी का मानना है कि आने वाले 20 सालों में वो 500 हेलीकॉप्‍टर का उत्‍पादन करेगी. कंपनी को उम्‍मीद है कि वो हर साल एक प्‍लांट से 10 हेलीकॉप्‍टर का उत्‍पादन करने में कामयाब रहेगी. कंपनी का कहना है कि भारत में बनने वाले हेलीकॉप्‍टर कम समय में बनने के साथ साथ आसपास के देशों की डिमांड को भी पूरा करेंगे. कंपनी का ये भी मानना है कि एच 125 हेलीकॉप्‍टर भारत में ए 320 एयरबस के समान ही सफल होंगे. एयरबस की पहली असेंबली लाइन गुजरात में बन रही है जहां वो बनकर लगभग तैयार हो चुकी है. 

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Economic Survey का अनुमान, AI से बढ़ेगी प्रोडक्टिविटी, लेकिन नौकरियां भी होंगी प्रभावित

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) कंप्यूटर विज्ञान में एक उभरता हुआ क्षेत्र है. इससे लाखों नौकरियां खत्म हो सकती हैं और असमानता बढ़ सकती है. हालांकि, इसके आने से नई जॉब्स भी पैदा हो सकती हैं.

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Monday, 22 July, 2024
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वित्त वर्ष 2023-24 के लिए आर्थिक सर्वे (Economic Survey) को पेश कर दिया गया है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में पिछले वित्त वर्ष के लिए आर्थिक सर्वेक्षण को पेश किया है. सर्वे के मुताबिक वित्त वर्ष 2024-25 में भारत की जीडीपी 6.5 - 7 फीसदी रहने का अनुमान है. वहीं मौजूदा वित्त वर्ष में महंगाई दर के 4.5 फीसदी रहने का अनुमान जताया गया है जबकि वित्त वर्ष 2025-26 में महंगाई दर 4.1 फीसदी रहने का अनुमान है. आर्थिक सर्वे में जो भी अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए सुझाव दिए गए हैं उसकी झलक बजट में देखने को मिल सकती है. इसके साथ ही AI को लेकर भी अनुमान जताया है, आइए जानते है क्या है वो अनुमान?  

AI से बढ़ेगी प्रोडक्टिविटी

23 जुलाई को बजट 2024 पेश होने से पहले वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 22 जुलाई को आर्थिक सर्वेक्षण 2023-24 को संसद में पेश किया, इसमें अन्य बातों के साथ-साथ यह भी कहा गया है कि हर तरह के स्किल लेवल्स में कर्मचारियों पर आर्टिफीशियल इंटेलीजेंस (AI) के पड़ने वाले असर को लेकर काफी अनश्चितता है. सर्वे में यह अनुमान जताया गया है कि नए जमाने की टेक्नोलॉजी से प्रोडक्टिविटी में तो वृद्धि होगी, लेकिन कुछ क्षेत्रों में रोजगार पर प्रतिकूल असर पड़ सकते हैं.

AI से आएगा बड़े पैमाने पर बदलाव

सर्वे में कहा गया है कि AI, इनोवेशन की अपनी तेज रफ्तार और प्रसार में आसानी के मामले में बेजोड़ है. लेकिन इससे आने वाले वक्त में काम के तौर-तरीकों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है. आर्थिक सर्वे के अनुसार, आर्टिफीशियल इंटेलीजेंस के आने से सभी स्तरों के वर्कर्स पर इसके प्रभाव के बारे में अनिश्चितता की स्थिति बनी हुई है. भविष्य में काम के तौर तरीकों को लेकर सबसे बड़ा डिसरप्शन, AI में तेजी से हो रही वृद्धि है. यह वैश्विक अर्थव्यवस्था में बड़े पैमाने पर बदलाव लाने के लिए तैयार है.

भारत भी बदलाव से नहीं रहेगा अछूता

इकोनॉमिक सर्वे में यह भी कहा गया है कि भारत इस बदलाव से अछूता नहीं रहेगा. AI को बिजली और इंटरनेट की तरह एक सामान्य उद्देश्य वाली तकनीक के रूप में मान्यता दी जा रही है, जो इनोवेशन की अपनी तीव्र गति और प्रसार में आसानी के कारण बेजोड़ है. जैसे-जैसे AI बेस्ड प्रणाली 'स्मार्ट' होगी, इसकी स्वीकार्यता बढ़ेगी और काम का तौर-तरीका बदलेगा.

क्या प्रमुख बदलाव दिख सकते हैं?

सर्वे में आगे गया कि AI में प्रोडक्टिविटी बढ़ाने की काफी क्षमता है, लेकिन कुछ क्षेत्रों में यह नौकरियों को प्रभावित भी कर सकती है. ग्राहक सेवा समेत रूटीन टास्क्स में उच्च स्तर के ऑटोमेशन की संभावना है. क्रिएटिव सेक्टर्स में, इमेज और वीडियो क्रिएशन के लिए AI टूल्स का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल देखने को मिल सकता है. साथ ही पर्सनलाइज्ड AI शिक्षक, शिक्षा को नया रूप दे सकते हैं और हेल्थकेयर जैसे क्षेत्रों में दवाओं की खोज में तेजी आ सकती है.
 


विशेष राज्‍य के दर्जे को लेकर टूट गया बिहार का सपना, जानिए कैसे मिलता है Special Status?

 14वां वित्‍त आयोग पहाड़ी राज्‍यों को छोड़कर बाकी राज्‍यों के लिए विशेष राज्‍य का दर्जा खत्‍म कर चुका है. केन्‍द्र सरकार ने ब्‍याज की हिस्‍सेदारी 32 से 42% तक कर दी है.

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Monday, 22 July, 2024
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बिहार राज्‍य के लिए विशेष राज्‍य के दर्जे की मांग पिछले एक दशक से भी लंबे समय से हो रही है. पिछले दस सालों में बिहार के मुख्‍यमंत्री नीतिश कुमार बीजेपी के साथ रहे या विपक्ष में लेकिन उन्‍होंने इस मांग को नहीं छोड़ा. लेकिन आज केन्‍द्र सरकार ने संसद में साफ कर दिया है कि बिहार को विशेष राज्‍य का दर्जा नहीं दिया जा सकता है. इसकी वजह वित्‍त राज्‍य मंत्री ने जो बताई उसने बिहार के नेताओं से लेकर वहां के 13 करोड़ लोगों को बड़ा झटका दे दिया है. 

संसद में वित्‍त राज्‍य मंत्री ने कही क्‍या बात? 
सोमवार को वित्‍त राज्‍य मंत्री पंकज चौधरी ने इसे लेकर कहा कि बिहा को विशेष राज्‍य का दर्जा नहीं दिया जा सकता है. इस मामले को लकर संसद में पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए वित्‍त राज्‍य मंत्री पंकज चौधरी ने कहा कि पहले देश के कुछ राज्‍यों को विशेष राज्‍य का दर्जा दिया जा चुका है. उन्‍होंने कहा कि विशेष राज्‍य का दर्जा देने के लिए सरकार की ओर से कुछ नियम कायदे बनाए गए हैं. किसी भी राज्‍य को विशेष राज्‍य का दर्जा राष्‍ट्रीय विकास परिषद (NDC) की ओर से दिया जाता है. NDC किसी भी राज्‍य को तभी विशेष राज्‍य राज्‍य का दर्जा देता है जब वो सरकार द्वारा बनाए गए नियमों पर खरा उतरता है. उन्‍होंने कहा कि बिहार इन शर्तों पर खरा नहीं उतरता है. उन्‍होंने कहा कि राष्ट्रीय विकास परिषद ने बिहार की डिमांड पर विचार करते हुए 30 मार्च 2012 को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत पेश की थी. विकास परिषद इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि मौजूदा एनडीसी मानदंडों के आधार पर, बिहार के लिए विशेष राज्य के दर्जे का मामला नहीं बनता है.

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अब जानिए क्‍या है विशेष राज्‍य की शर्तें
बिहार को लेकर आई इस खबर के बाद ये भी जानना जरूरी है कि आखिर भारत सरकार ने किसी भी राज्‍य को स्‍पेशल कैटेगिरी का द र्जा देने के लिए क्‍या नियम बनाए हैं. इनमें प्रमुख तौर पर 
1-    राज्‍य को या तो पहाड़ी क्षेत्र होना चाहिए या उसका कठिन भूभाग होना चाहिए. 
2-    कम जनसंख्‍या घनत्‍व होना चाहिए या महत्‍वपूर्ण जनजातीय क्षेत्र होना चाहिए. 
3-    सीमाओं से सटा विशेष रणनीतिक क्षेत्र होना चाहिए. 
4-    आर्थिक एवं अवसंरचनात्‍मक पिछड़ापन 
5-    राज्‍य के वित्‍त की अव्‍यवहार्य प्रकृति 
अगर कोई राज्‍य इन परिस्थितियों पर खरा उतरता है तभी उसे विशेष राज्‍य का दर्जा दिया जाता है. 

अब तक इन राज्‍यों को मिल चुका है विशेष राज्‍य का दर्जा
अगर बीते समय में जिन राज्‍यों को विशेष राज्‍य का दर्जा दिया गया है उनमें ज्‍यादातर राज्‍य पहाड़ी ही हैं. इनमें असम, नागालैंड, मिजोरम, हिमाचल, मणिपुर, सिक्किम, त्रिपुरा, अरुणाचल प्रदेश, उत्‍तराखंड और तेलंगाना शामिल हैं. तेलंगाना को आंध्र प्रदेश से अलग होने के बाद विशेष राज्‍य दिया गया है. लेकिन 14वें वित्‍त आयोग ने पहाड़ी राज्‍यों को छोड़कर बाकी राज्‍यों के लिए विशेष राज्‍य का दर्जा खत्‍म कर दिया है. आयोग ने ये कदम टैक्‍स ट्रांसफर की सीमा को बढ़ाकर किया. पहले जहां राज्‍यों को केन्‍द्र से 32 प्रतिशत टैक्‍स जाता था वहीं इसे अब 42 प्रतिशत कर दिया गया है. मौजूदा समय में बीजेपी की दो प्रमुख सहयोगी जदयू और टीडीपी अपने अपने राज्‍यों के लंबे समय से विशेष राज्‍य का  दर्जा मांगते आ रहे हैं.  


बजट में रेलवे को मिलेगा बहुत कुछ, ये घोषणाएं कर सकती हैं वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण! 

कल पेश होने वाले बजट में रेलवे से जुड़ी कई महत्वपूर्ण घोषणाएं हो सकती हैं. वित्तमंत्री का सुरक्षित सफर पर जोर रहेगा.

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Monday, 22 July, 2024
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वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण कल पेश होने वाले बजट में रेलवे के लिए भी सौगातों का पिटारा खोलेंगी. माना जा रहा है कि वित्तमंत्री रेलवे को 2.85 से 3 लाख करोड़ रुपए का बजट आवंटित कर सकती हैं, जो पिछले वर्ष की अपेक्षा 10-15 प्रतिशत अधिक होगा. बजट 2024 में हाई स्पीड और सेमी हाईस्पीड ट्रेनों को प्राथमिकता मिलने की संभावना है. फाइनेंस मिनिस्टर उत्तर, पूर्व और दक्षिण भारत में तीन नए हाई स्पीड कॉरिडोर बनाने की घोषणा कर सकती हैं. इसके साथ ही बजट में वंदे भारत और वंदे मेट्रो की संख्या बढ़ाने का भी ऐलान संभव है. 

मिल सकती हैं 200 नई ट्रेनें 
एक मीडिया रिपोर्ट की मानें, तो वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण बजट में आधुनिक और तेज गति वाली 200 से ज्यादा नई नॉन एसी ट्रेनें चलाने की घोषणा कर सकती है. इन रेल गाड़ियों के जरिए पहली बार देश के 75 छोटे शहरों को रेल कनेक्टिविटी से जोड़ा जाएगा. शुरुआत में इन ट्रेनों में केवल स्लीपर-जनरल कोच होंगे, लेकिन डिमांड के अनुसार कुछ रूट्स पर एसी कोच लगाए जा सकते हैं. इन ट्रेनों का मकसद उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, झारखंड और मध्यप्रदेश जैसे राज्यों से रोजगार की तलाश में देश के महानगरों का रुख करने वाले लोगों का सफर आसान बनाना है. इन अमृत भारत ट्रेनों का किराया सामान्य मेल-एक्सप्रेस की तरह ही रखा जा सकता है. 

कवच पर रहेगा जोर
बजट में बढ़ते ट्रेन एक्सीडेंट की रोकथाम के लिए भी उपाए किये जा सकते हैं. वित्तमंत्री कुछ रूट्स पर टक्कर रोधी तकनीक कवच के वर्जन 4 की घोषणा कर सकती हैं. इसके तहत 35,736 किलोमीटर के रेल रूट्स पर कवच लगाया जाएगा. कवच एक ऑटोमेटिक प्रोटेक्शन सिस्टम है, जिसमें इंसानों की गलती से सिग्नल पास करने या ओवर-स्पीड की वजह से होने वाले ट्रेन हादसों को टाला जा सकता है. Kavach को भारतीय रेलवे ने रिसर्च डिजाइन एंड स्टैंडर्ड ऑर्गनाइजेशन (RDSO) की  मदद से 2012 में विकसित किया था. इसके अलावा भी रेल सफर को सुरक्षित और आरामदायक बनाने से जुड़ी कुछ घोषणाएं बजट में हो सकती हैं. 

इन स्टॉक्स में उछाल संभव
उधर, बजट के बाद रेलवे से जुड़े स्टॉक्स को पंख लगने की संभावना भी जताई जा रही है. दरअसल, एक्सपर्ट्स को उम्मीद है कि बजट में रेलवे के लिए आवंटन में वृद्धि होगी. खासतौर पर, रेलवे के आधुनिकीकरण, सुरक्षा और डेडिकेटिड फ्रेट कॉरिडोर के विकास अपर ध्यान दिया जाएगा. इससे रेलवे से जुड़ी कंपनियों को भी फायदा होगा और उनके शेयरों में उछाल आने की संभावना बनी रहेगी. गौरतलब है कि रेल विकास निगम लिमिटेड (RVNL) सहित रेलवे से किसी न किसी रूप में जुड़ी अधिकांश कंपनियों के शेयर बजट से पहले ही तेजी से भाग रहे हैं. RVNL के शेयर आज करीब 2 प्रतिशत की उछाल के साथ 625.50 रुपए पर बंद रहे. 
 


व्यापारी मोदी 3.0 के पूर्ण बजट से पहले बाजारों में ले रहे हैं शॉर्ट पोजीशन, जानिए क्यों?

अगर बजट में कुछ सकारात्मक हो या कुछ भी नकारात्मक न हो, तो शॉर्ट कवरिंग रैली निफ्टी और सेंसेक्स को तेजी से ऊपर ले जा सकती है.

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Monday, 22 July, 2024
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भारत के घरेलू व्यापारियों के बीच निराशा का माहौल है, क्योंकि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीसरे कार्यकाल की शुरुआत में बजट पेश करने जा रही हैं. 22 जुलाई को वित्त मंत्री मौजूदा सरकार का पहला पूर्ण वर्ष का बजट पेश करेंगी, जो जून में सत्ता में वापसी के बाद उनका पहला बजट होगा. व्यापारी इसलिए निराश है क्योकि डेटा से पता चला है कि घरेलू व्यापारी इंडेक्स वायदा में 2.12 लाख अनुबंधों पर शॉर्ट पोजीशन (बिक्री की शर्तें) ले रहे हैं, जो इस साल की सबसे ऊंची 2.95 लाख अनुबंधों से सिर्फ 28 प्रतिशत कम है (सभी समय की सबसे ऊँची शॉर्ट पोजीशन 22 सितंबर, 2016 को 5.83 लाख अनुबंध थी). वर्तमान नेट शॉर्ट पोजीशन 2017 के बाद से सबसे बड़ी है. विशेषज्ञों का कहना है कि इसका मतलब है कि घरेलू व्यापारी बजट को लेकर बहुत कम उम्मीदें लेकर चल रहे हैं.

बेंचमार्क निफ्टी इंडेक्स 4 जून को लगभग 22,000 स्तर पर गिर गया था क्योंकि बीजेपी को लगातार तीसरी बार सरकार बनाने के लिए साधारण बहुमत से कम सीटें मिलने की संभावना थी, लेकिन इसके बाद के दिनों में जैसे ही पीएम मोदी ने तीसरी बार शपथ ली, निफ्टी इंडेक्स धीरे-धीरे 24,000 के पार चला गया और 24,854 का नया उच्चतम स्तर छू लिया. बाजार अपने उच्चतम स्तरों के पास मंडरा रहे हैं, घरेलू ब्रोकरेज और व्यापारी हालिया रैली के बाद मुख्य रूप से बिकवाली की सलाह दे रहे हैं.

स्ट्राइक मनी एनालिटिक्स और इंडिया चार्ट्स के संस्थापक रोहित श्रीवास्तव ने कहा कि चुनाव परिणामों के बाद बाजार में उम्मीद से काफी ज्यादा तेजी आई है, बजट से पहले बढ़ता निराशावाद चुनाव परिणामों से पहले बढ़ते निराशावाद के समान है.
 
अब तक इस महीने में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने नकद सेगमेंट में 21,664 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की है जबकि घरेलू संस्थागत निवेशक (DII) ने केवल 779 करोड़ रुपये की खरीदारी की है. जुलाई में नकद बाजार में FPI की शुद्ध खरीदारी कैलेंडर वर्ष के लिए नकद बाजार में सबसे अधिक मासिक प्रवाह है. जून में नकद बाजार में FPI का शुद्ध प्रवाह केवल 2037 करोड़ रुपये था जबकि डीआईआई ने 28,633 करोड़ रुपये डाले थे. मई में, जब FII ने नकद इक्विटी 42,214 करोड़ रुपये बेचीं, तो DII ने 55,733 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की थी.

श्रीवास्तव के अनुसार, बजट केवल यह संकेत दे सकता है कि किन क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करना है. सरकार अपनी खुद की बाजार रैली को मारने की संभावना नहीं है. यह केवल ऊर्जा को सही दिशा में ले जा सकता है. पैसा उन हिस्सों का पीछा करेगा जो अभी भी सही मूल्य पर हैं और सकारात्मक गति को बनाए रखेंगे. घरेलू खिलाड़ियों के विपरीत, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) उत्साही मूड में बजट में जा रहे हैं और लंबी स्थिति रखते हैं. डेटा से पता चलता है कि FPI 3.58 लाख अनुबंधों की शुद्ध लंबी या तेजी की शर्तें रखते हैं और उनकी हाल की शुद्ध लंबी ऊंचाई 4 जुलाई को 3.92 लाख अनुबंध थी.

आगामी बजट और आने वाले हफ्तों में फोकस पीएसयू (सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों) के स्टॉक्स पर हो सकता है क्योंकि मोदी सरकार सरकारी कंपनियों की भूमि मुद्रीकरण के लिए तैयारी कर रही है. विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी कंपनियां देश में सबसे बड़ी जमीन मालिक हैं और इन वास्तविक संपत्तियों को बिक्री पर रखने का कोई भी कदम बजट की अपेक्षाओं के बाहर सरकार को बड़ी आय दिलाएगा. 

(लेखक- पलक शाह, BW रिपोर्टर. पलक शाह ने "द मार्केट माफिया-क्रॉनिकल ऑफ इंडिया हाई-टेक स्टॉक मार्केट स्कैंडल एंड द कबाल दैट वेंट स्कॉट-फ्री" नामक पुस्तक लिखी है. पलक लगभग दो दशकों से मुंबई में पत्रकारिता कर रहे हैं, उन्होंने द इकोनॉमिक टाइम्स, बिजनेस स्टैंडर्ड, द फाइनेंशियल एक्सप्रेस और द हिंदू बिजनेस लाइन जैसी प्रमुख वित्तीय अखबारों के लिए काम किया है).


दुकानों पर नेम प्‍लेट लगाने को लेकर यूपी सरकार को लगा झटका,SC ने कहा सिर्फ ये बताइए…

इस मामले में याचिकाकर्ता के वकील सीयू सिंह ने कहा कि प्रशासन दुकानदारों में नाम लगाने को लेकर दबाव बना रहा है. जबकि पुलिस के पास ऐसा कोई अधिकार नहीं है.

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Monday, 22 July, 2024
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कांवड़ यात्रा मार्ग पर दुकानदारों के लिए नाम लगाने के यूपी सरकार के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि नाम लगाने की जरूरत नहीं है बल्कि उसकी जगह दुकानदारों को बताना होगा कि उनके वहां मांसाहारी भोजन मिल रहा है या शाकाहारी. इस मामले की अगली सुनवाई 26 जुलाई को होगी. यूपी सरकार के इस आदेश की उनके ही सहयोगी दलों द्वारा निंदा की जा रही थी. विपक्षी दलों ने इस मामले को संसद में भी उठाने की बात कही थी. इस मामले में एक एनजीओ की ओर से याचिका लगाई गई थी जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने ये आदेश दिया. 

सुप्रीम कोर्ट ने आखिर क्‍या कहा? 
यूपी सरकार के इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्‍शन ऑफ सिविल राइट्स ने चुनौती दी थी. इस मामले की सुनवाई जस्टिस ऋषिकेश राय और जस्टिस एवीएन भट्टी की बेंच ने की. इस मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस भट्टी ने कहा कि इस मामले में मेरा भी अनुभव है. उन्‍होंने कहा कि मैं जब केरल में था तब वहां एक शाकाहारी होटल था जो हिंदू का था दूसरा मुस्लिम का था. उन्‍होंने कहा कि मैं मुस्लिम वाले होटल में जाता था क्‍योंकि वो दुबई से आया था और सफाई के मामले में इंटरनेशनल स्‍टैंडर्ड को फॉलो करता था. सुप्रीम कोर्ट ने जानना चाहा कि क्‍या इसे लेकर यूपी सरकार की ओर से इस संबंध में कोई आदेश जारी किया गया है. 

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याचिकाकर्ता ने कही ये बात 
इस मामले में याचिकाकर्ता के वकील सीयू सिंह ने कहा कि प्रशासन दुकानदारों में नाम लगाने को लेकर दबाव बना रहा है. जबकि पुलिस के पास ऐसा कोई अधिकार नहीं है. उन्‍होंने कहा कि पुलिस खाने की क्‍वॉलिटी से लेकर दूसरी चीजों की जांच कर सकती है लेकिन किसी पर उसे नाम लगाने को  लेकर दबाव नहीं बना सकती है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ये मामला पूरी तरह से स्‍वैच्छिक है इसे अनिवार्य नहीं बनाया जा सकता है. इस पर याचिकाकर्ता ने हरिद्वार पुलिस का हवाला देकर कहा कि वहां कहा गया है कि जो ऐसा नहीं करेगा उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. याचिकाकर्ता ने कहा‍ कि ये दुकानदारों के लिए आर्थिक मृत्‍यु जैसी है. 

26 जुलाई को होगी अगली सुनवाई 
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में तीन राज्‍यों को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने को कहा है. सुप्रीम कोर्ट ने मध्‍य प्रदेश, उत्‍तराखंड और उत्‍तर प्रदेश को नोटिस जारी कर अगली सुनवाई से पहले जवाब दाखिल करने को कहा है. माना जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले सुनवाई पूरी करने के बाद फैसला सुना सकता है. इस मामले की अलगी सुनवाई 26 जुलाई को होनी है. वहीं इस मामले को लेकर राजनीति भी गर्मा गई है. जबकि विपक्षी दलों का कहना है कि वो इस मामले को संसद में भी उठाएगी. 
 


बढ़ते F&O ट्रेड पर SEBI की चेतावनी, अर्थव्यवस्था पर डालने लगा है असर, जानिए कैसे?

बाजार नियामक सेबी की चेयरपर्सन माधबी पुरी बुच से लेकर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण तक फ्यूचर एंड ऑप्शंस में लोगों की बढ़ती दिलचस्पी पर चिंता जाहिर की चुकी हैं.

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Monday, 22 July, 2024
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डेरिवेटिव सेगमेंट यानी फ्यूचर एंड ऑप्शंस के प्रति लोगों के बीच बढ़ते आकर्षण से बाजार नियामक सेबी की चिंताएं बढ़ी हुई हैं. नियामक की चेयरपर्सन माधबी पुरी बुच ने एक बार फिर से इसके बढ़ते ट्रेंड पर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि अब यह व्यापक मुद्दा बन गया है और अब इसकी समीक्षा करने की जरूरत है और इसके साथ ही चेतावनी भी जारी कर दी है.

अर्थव्यवस्था के स्तर का मुद्दा बना ये ट्रेड

कैपिटल मार्केट रेगुलेटर SEBI की चेयरपर्सन माधबी पुरी बुच (Madhabi Puri Buch) ने कहा कि वायदा और विकल्प (F&O) सेगमेंट में बढ़ता ट्रेड एक व्यापक मुद्दा बन गया है और अब अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रहा है. इसके साथ ही उन्होंने कहा- पहले यह एक इन्वेस्टर के स्तर का छोटा मसला (माइक्रो इश्यू) था, लेकिन अब अर्थव्यवस्था के स्तर का बड़ा मसला (मैक्रो इश्यू) बन गया है. यही कारण है कि हम समीक्षा करने के लिए बाध्य महसूस कर रहे हैं.

10 में 9 सौदों में नुकसान

सेबी चेयरपर्सन बुच का कहना है कि घरेलू बचत सट्टेबाजी में जा रही है और युवा ऐसे कारोबार में ढेर सारा पैसा खो रहे हैं. इससे घरेलू बचत का इस्तेमाल पूंजी निर्माण के लिए नहीं हो पा रहा है. बुच के मुताबिक, बढ़ता F&O ट्रेड निवेशकों के एक छोटे से मुद्दे से अर्थव्यवस्था के एक व्यापक मुद्दे में बदल गया है. सेबी की एक रिसर्च के मुताबिक, निवेशक F&O सेगमेंट में 10 में 9 सौदों में नुकसान उठाते हैं. जोखिम का खुलासा करने पर जोर देने से शुरू करते हुए, सेबी हाल ही में इस क्षेत्र से निवेशकों को दूर रखने के लिए सक्रिय रूप से प्रयास कर रहा है.

युवा उठा रहे हैं सबसे ज्यादा नुकसान

बकौल सेबी प्रमुख, फ्यूचर एंड ऑप्शंस सेगमेंट पूरी तरह से स्पेकुलेशन पर आधारित है. लोगों को जिस पैसे का इस्तेमाल पूंजी बनाने के लिए करना चाहिए, वह स्पेकुलेशन पर आधारित फ्यूचर एंड ऑप्शंस में घुस रहा है. युवा इस तरह के ट्रेड में भारी स्तर पर पैसे डूबा रहे हैं. उन्होंने इस बात के साफ संकेत दिए कि आने वाले दिनों में सेबी ऐसे ट्रेड से निवेशकों को दूर करने के लिए अधिक सक्रिय भूमिका निभा सकता है.

वित्त मंत्री भी जता चुकी हैं चिंता

सेबी इससे पहले भी कई बार फ्यूचर एंड ऑप्शंस ट्रेडिंग पर चिंता जाहिर कर चुका है. बाजार नियामक एफएंडओ सेगमेंट के प्रति आकर्षण को कम करने के लिए समय-समय पर विभिन्न उपाय भी करते रहता है. अभी तक सेबी के प्रयास मुख्य रूप से निवेशकों को जागरूक व शिक्षित बनाकर सतर्क करने का रहा है. फ्यूचर एंड ऑप्शंस में निवेशकों की बढ़ती भागीदारी पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण भी चिंता जाहिर कर चुकी हैं.
 


Economic Survey में सामने आई देश की सेहत, FM ने बताया इतने लोग कर रहे हैं स्‍वरोजगार

सोमवार को आर्थिक सर्वेक्षण पेश करने के बाद अब वित्‍त मंत्री मंगलवार को बजट पेश करेंगी. सबसे खास बात ये है कि वित्‍त मंत्री सातवीं बार बजट पेश करने जा रही हैं.

Last Modified:
Monday, 22 July, 2024
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देश की आर्थिक तस्‍वीर की झलक पेश करने वाला इकोनॉमिक सर्वे आखिरकार वित्‍त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पेश कर दिया. आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार इस साल देश की ग्रोथ रेट 6.5 प्रतिशत से 7 प्रतिशत रहने की उम्‍मीद है. आर्थिक सर्वेक्षण में सरकार देश की अर्थव्‍यवस्‍था की सही समीक्षा देश के सामने रखती है. आर्थिक सर्वेक्षण में रोजगार को लेकर भी वित्‍त मंत्री ने अहम बात कही है और बताया है कि सर्विसेज में रोजगार में इजाफा हो रहा है. जबकि स्‍वरोजगार के आंकड़े भी उत्‍साहजनक हैं. 

आर्थिक सर्वेक्षण में क्‍या बोली वित्‍त मंत्री? 
देश की संसद में सोमवार को दोपहर 12 बजे पेश हुए आर्थिक सर्वेक्षण में निर्मला सीतारमण ने बताया कि ग्रोथ रेट के 6.5 प्रतिशत से लेकर 7 प्रतिशत के बीच रहने का अनुमान है. वित्‍त मंत्री निर्मला सीतारमण ने देश के सामने एक चुनौती का भी का भी जिक्र किया और कहा कि आने वाले महीनों में देश के एक्‍सपोर्ट को थोड़ा झटका लग सकता है. लेकिन उन्‍होंने ये भी बताया कि सरकार इसके लिए पूरी तरह से तैयार है. उन्‍होंने ये भी कहा कि ग्‍लोबल चुनौतियों से भारतीय कारोबार पर असर पड़ने की संभावना है. इसका असर देश के कैश फ्लो पर भी देखने को मिल सकता है. 

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रोजगार को लेकर वित्‍त मंत्री ने ये कही बात 
वित्‍त मंत्री ने देश के सामने इस इकोनॉमिक सर्वे में रोजगार को लेकर भी अहम बात कही. उन्‍होंने कहा कि कोरोना के बाद सामने आई डेमोग्राफी में बदलाव को देखते हुए बेरोजगारी में गिरावट देखने को मिल रही है. मार्च 2024 तक के आंकड़ों पर नजर डालें तो शहरी बेरोजगारी दर पिछले वर्ष के 6.8 प्रतिशत से घटकर 6.7 प्रतिशत पर आ गई है. उन्‍होंने देश में स्‍वरोजगार को लेकर भी आंकड़ा पेश किया और कहा कि 57 प्रतिशत लोग इससे जुड़े हुए हैं. वहीं युवा बेराजगारी दर 2017-18 में जहां 17.8 प्रतिशत गिरकर 2022-23 में 10 प्रतिशत पर आ गई है. इकोनॉमिक सर्वे के अनुसार, 2023-24 में इसमें 9 प्रतिशत की ग्रोथ देखने को मिली है. 

जानिए कब से शुरू हुई इकोनॉमिक सर्वे की परंपरा 
 देश में आर्थिक सर्वेक्षण की परंपरा 1950-51 के समय से शुरू हुई थी. लेकिन तब ये बजट दस्‍तावेजों का ही हिस्‍सा हुआ करता था. लेकिन 1960 का दशक आते ही इसे अलग कर दिया गया और तब से ये बजट से एक दिन पहले पेश हो रहा है. इसके पेश होने के अगले दिन वित्‍त मंत्री बजट पेश करती हैं. सोमवार को आर्थिक सर्वेक्षण पेश करने के बाद अब वित्‍त मंत्री मंगलवार को बजट पेश करेंगी. सबसे खास बात ये है कि वित्‍त मंत्री सातवीं बार बजट पेश करने जा रही हैं. इस बजट को पेश करने के साथ ही वो सबसे ज्‍यादा बार बजट पेश करने का इतिहास रच देंगी. 
 


कैसा होगा कल पेश होने वाला Budget? कुछ PM मोदी ने बताया, कुछ हम बताते हैं

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण कल मोदी 3.0 का पहला बजट पेश करेंगी. फरवरी में सरकार ने अंतरिम बजट पेश किया था.

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Monday, 22 July, 2024
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पूरे देश की निगाहें कल पेश होने वाले बजट पर हैं. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 23 जुलाई को मोदी 3.0 का पहला बजट पेश करने वाली हैं. पिछली बार के मुकाबले इस बार सरकार के नजरिए से हालात काफी अलग हैं, इसलिए बजट के लोकलुभावन होने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है. लोकसभा चुनाव से पहले फरवरी में अंतरिम बजट पेश किया गया था, इसलिए उसमें कोई बड़ी घोषणा देखने को नहीं मिली थी. कल पेश होने वाला बजट कैसा होगा, इस बारे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कुछ संकेत दिए हैं. 

दिशा तय करेगा ये बजट
PM मोदी ने कहा कि हम कल मजबूत बजट पेश करने वाले हैं, जो साल 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र के रूप में पेश करने पर केंद्रित होगा. उन्होंने यह भी कहा कि आने पांच वर्ष सरकार के लिए बेहद खास हैं. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मैं देशवासियों को जो गारंटी देता रहा हूं, उन गारंटियों को पूरा करने के लक्ष्य पर हमें आगे बढ़ना है. अमृतकाल का ये बेहद महत्वपूर्ण बजट है, जो हमारे पांच साल के कार्य की दिशा तय करेगा. हमने 2047 तक विकसित भारत के सपने को पूरा करने का लक्ष्य हमने रखा है, कल पेश होने वाला बजट उस पर क्रेंदित होगा. देश की अर्थव्यवस्था पर बात करते हुए PM ने कहा कि भारत लगातार सबसे तेजी से आगे बढ़ने वाला देश बना हुआ है. हम लगातार तीन बार से 8% ग्रोथ के साथ विकास पथ पर आगे बढ़ रहे हैं.  

NPS बनेगा अधिक आकर्षक 
नई मोदी सरकार के बजट में कई ऐसी घोषणाएं संभव हैं, जो जनता को खुश कर सकती हैं. यह भी माना जा रहा है कि बजट में नेशनल पेंशन स्कीम (NPS) को ज्यादा आकर्षक बनाने से जुड़े ऐलान संभव हैं. रिपोर्ट्स के अनुसार, NPS में शामिल कर्मचारियों को उनकी आखिरी सैलरी का 50% पेंशन के रूप में देने की व्यवस्था सरकार कर सकती है. 2004 से भर्ती होने वाले कर्मचारी NPS के दायरे में आते हैं. NPS को लेकर कर्मचारी खुश नहीं हैं. वह लगातार OPS यानी ओल्ड पेंशन स्कीम बहाली की मांग कर रहे हैं. इसे लेकर विरोध-प्रदर्शन भी हो चुके हैं. लेकिन सरकार उनकी इस मांग को मानने के लिए तैयार नहीं है. हालांकि, कर्मचारियों नाराज़गी को कम  करने के लिए मोदी सरकार एनपीएस के दायरे में आने वाले केंद्रीय कर्मचारियों को उनके अंतिम वेतन का 50% पेंशन के रूप में देने की व्यवस्था ज़रूर कर सकती है.

टैक्सपेयर्स को मिलेगा लाभ! 
इसी तरह, टैक्स स्लैब में बदलाव किया जा सकता है. हालांकि, इसका फायदा केवल उन्हीं लोगों को मिलेगा जो न्यू टैक्स रिजीम चुनते हैं. बजट में इस रिजीम के तहत इनकम टैक्स छूट सीमा को 3 लाख से बढ़ाकर 5 लाख किया जा सकता है. न्यू टैक्स रिजीम में सालाना 15 लाख रुपए से अधिक की कमाई पर 30% टैक्स का प्रावधान है, जिसे बढ़ाकर 20 लाख रुपए किया जा सकता है. न्यू टैक्स रिजीम में कुल 6 स्लैब हैं - 3 लाख तक 0% टैक्स. 3-6 लाख तक 5% टैक्स. 6-9 लाख तक 10% टैक्स. 9-12 लाख तक 15%. 12-15 लाख तक 20% और 15 लाख से अधिक की कमाई पर 30% टैक्स. जबकि पुराने टैक्स रिजीम में स्लैब की संख्या कम है. इसमें 2.5 लाख तक की इनकम पर कोई टैक्स नहीं लगता. 2.5 से 5 लाख तक की आय पर 5% टैक्स देना होता है. 5 से 10 लाख पर 20%, 10 लाख से अधिक इनकम पर 30% टैक्स लगता है. सरकार चाहती है कि ज्यादा से ज्यादा लोग न्यू टैक्स रिजीम को अपनाएं, इसलिए उसे और आकर्षक बनाने के लिए इनकम टैक्स में छूट का दायरा बढ़ाया जा सकता है.  

80C को लेकर घोषणा संभव
माना यह भी जा रहा है कि सरकार 80C की लिमिट में भी कोई बदलाव कर सकती है. महंगाई बढ़ने के बावजूद सरकार ने पिछले 10 साल में इसमें कोई बदलाव नहीं किया है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि इसमें बदलाव से न केवल टैक्सपेयर्स को महंगाई से निपटने में मदद मिलेगी, बल्कि ELSS, टैक्स सेवर FDs, PPF जैसे सेविंग स्कीम्स में निवेश को भी बढ़ावा मिलेगा. मोदी सरकार ने अपने पहले बजट में 80C के तहत छूट को 1 लाख से बढ़ाकर डेढ़ लाख किया था. इसी तरह, होम लोन के ब्याज पर छूट डेढ़ लाख से बढ़ाकर 2 लाख कर दी गई थी. 2014-15 के बजट में टैक्स छूट की लिमिट 2 लाख से बढ़ाकर ढाई लाख की गई थी. जबकि सीनियर सिटीजंस के लिए छूट का दायरा ढाई लाख से बढ़ाकर 3 लाख किया गया था.
 


जानते हैं IT Engineer से ज्‍यादा कमा रहे हैं फूड डिलीवरी मैन,आखिर क्‍या है इस कमाई का राज? 

एक ओर जहां इन डिलीवरी मैन की कमाई आकर्षित करती है वहीं दूसरी ओर उनके काम के चैलेंज भी अपने आप में बड़ी चुनौती वाले हैं. यही नहीं लंबे समय तक ड्राइव करने से स्‍वास्‍थ्‍य पर भी कई तरह के असर पड़ते हैं. 

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पिछले कुछ सालों में फूड डिलीवरी साइट के द्वारा घर तक खाना पहुंचाने का बिजनेस तेजी से बढ़ा है. फूड डिलीवर करने वाली कंपनियों के द्वारा दिए जाने वाले इंसेटिव का नतीजा ये है कि दिन के हर पहर में लोग आसानी से खाना घर या ऑफिस में मंगाकर खा सकते हैं. लगातार तेजी से बढ़ते इस बिजनेस के चलते इससे जुड़े डिलीवरी करने वालों की कमाई भी बढ़ाई है. उनकी कमाई का आंकड़ा आईटी सेक्‍टर में काम करने वालों से ज्‍यादा हैं. ये बात यूट्यूबर लवीना कामथ के वीडियो में सामने आई है. जो काफी वायरल हो रहा है.  

आखिर क्‍या दिखा रहा है ये वीडियो? 
इस वीडियो में लवीना जोमैटो और स्विगी के डिलीवरी मैन से बात कर रही हैं जो बता रहे हैं कि वो महीने में आराम से 40 से 50 हजार रुपये तक कमा लेते हैं. वो जब एक डिलीवरी मैन का जोमैटो प्रोफाइल देखती हैं तो उन्‍हें नजर आ जाता है कि वो जो कह रहा है वो सही कह रहा है. उन्‍होंने ये इनवेस्टिगेशन बेंगलुरु के जोमैटो और स्विगी डिलीवरी ब्‍यॉव से की है. इसमें वो कह रहे हैं कि हर दिन कोई 1500 से 2000 रुपये तक कमा लेते हैं जबकि महीने में 50 हजार रुपये तक कमा लेते हैं. 

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पेमेंट और काम के घंटे हैं डिलीवरी मैन की पसंद 
इस वीडियो में उनकी इन कंपनियों से होने वाली कमाई के बारे में भी विस्‍तार से बताया गया है. इस फील्‍ड में काम करने वाली दो बड़ी कंपनियां जोमैटो और स्विगी इसके लिए किसी भी तरह की फिक्‍स सैलरी नहीं देते हैं. ये काम पूरी तरह से फ्रीलांस तरीके से किया जाता है. फूड डिलीवर करने वाले एजेंट को इसमें डिलीवरी पूरी करने से लेकर उसके द्वारा तय की दूरी और नंबर ऑफ डिलीवरी पूरी पर करने पर उसी अनुसार पेमेंट मिलती है. इसमें एक तय नंबर की डिलीवरी पूरी पर करने कंपनी की ओर से इंसेंटिव दिया जाता है. 

लेकिन ये पहलू भी हैं रखते हैं अहम भूमिका 
लवीना कामथ का वीडियो ये भी बता रहा है कि इस क्षेत्र में काम करने वाले डिलीवरी ब्‍वॉय की कमाई कई चीजों पर निर्भर करती है. कुछ  जहां अच्‍छी कमाई करते हैं वहीं सभी के साथ ऐसा नहीं है. इसमें उनके काम करने की लोकेशन, बाइक की सर्विस, और दूसरे भी कई फैक्‍टर ऐसे हैं जो उनकी कमाई पर असर डालते हैं. इस क्षेत्र में काम करने वालों को जहां जोमैटो हेल्‍थ इंश्‍योरेंस मुहैया करा रहा है वहीं अगर एक्‍सीडेंट हो जाए तो होने वाले नुकसान में भी मदद करता है. जोमैटो डिलीवरी ब्‍वॉय बनना बेहद आसान है तो ऐसे में ज्‍यादा से ज्‍यादा लोग इससे जुड़ रहे हैं.