जून में ध्रुव कपूर और अंकिती बोस ने कंपनी को खरीदने के लिए बोर्ड के सामने एक पिच भी तैयार की थी लेकिन उससे भी कोई मदद नहीं मिली.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
इंडियन मीडिया और इन्फोर्मेशन प्लेटफॉर्म Inc42 द्वारा जारी की गयी एक रिपोर्ट की मानें तो फैशन टेक्नोलॉजी प्लेटफार्म Zilingo की पूर्व CEO और को-फाउंडर अंकिती बोस ने बिना बोर्ड की मंजूरी लिए ही अपनी सैलरी को 10 गुना बढ़ा लिया. इसी मामले में कंपनी ने अंकिती बोस पर मुकदमा दर्ज करवा दिया है.
अंकिती और महेश मूर्ति का विवाद
2017 से 2019 के बीच अंकिती बोस ने कथित तौर पर अपनी सैलरी में 10 गुना, अपने को-फाउंडर ध्रुव कपूर की सैलरी में 3 गुना और COO (चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर) आदी वैद्य की सैलरी में 7 गुना की वृद्धि की थी. रिपोर्ट की मानें तो 2017 में अंकिती बोस की सैलरी 5,500 SGD हुआ करती थी और 2019 तक अंकिती की सैलरी बढ़कर 58,900 पर पहुंच गयी थी. यह सभी खुलासे एक ऐसे वक्त पर हो रहे हैं जब अंकिती ने इन्वेस्टर महेश मूर्ति के खिलाफ 100 मिलियन डॉलर्स का मानहानि का मुकदमा दर्ज किया था. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इन्वेस्टर महेश मूर्ति ने अंकिती पर B2B मार्केटप्लेस स्टार्टअप से गैर कानूनी रूप से पैसे लेने का आरोप लगाया था.
Zilingo ने शुरू की लिक्विडिटी की प्रक्रिया
इतना सब होने के साथ Zilingo ने अपनी लिक्विडिटी की प्रक्रिया को भी शुरू कर दिया है. कंपनी को लोन देने वाले दो प्रमुख ग्रुप Varde Partners और Indies Capital Partners ने कंपनी के कुछ एसेट्स के लिए खरीददार को ढूँढ़ लिया है. इन एसेट्स को इनके नए मालिकों के पास ट्रान्सफर कर दिया गया है लेकिन इन एसेट्स की कीमत को लेकर अभी तक कोई खुलासा नहीं हुआ है. कंपनी के लिए मुश्किलों की शुरुआत तब हुई जब फंडिंग के नए राउंड के दौरान की गयी एक जांच में खामियां सामने आई और एक मुखबिर ने कंपनी में फाइनेंशियल गलतियों को लेकर कुछ अन्य खुलासे किये जिनमें अंकिती बोस का नाम भी शामिल था. ऑडिटिंग में सामने आई जानकारी ने कंपनी की रफ्तार को ही बदल कर रख दिया.
अंकिती ने भेजा नोटिस
पिछले साल मई में Zilingo ने गंभीर वित्तीय शिकायतों के चलते अंकिती बोस को CEO के पद से हटा दिया था. इसी दौरान अंकिती ने कंपनी के बोर्ड को परेशान करने और उनका दुरूपयोग करने के लिये कानूनी रूप से नोटिस भी भेजा था. इस नोटिस में यह खुलासा भी किया गया था कि जब उन्होंने ध्रुव कपूर और आदी वैद्य को कंपनी द्वारा परेशान किये जाने के बारे में जानकारी दी थी तो उन्होंने भी अंकिती की कोई मदद नहीं की थी. जून में ध्रुव कपूर और अंकिती बोस ने कंपनी को खरीदने के लिए बोर्ड के सामने एक पिच भी तैयार की थी लेकिन उससे भी कोई मदद नहीं मिली.
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जून 2026 तिमाही में कंपनी का समेकित परिचालन राजस्व बढ़कर 15,712 करोड़ रुपये हो गया, जो एक साल पहले की समान अवधि के 13,351 करोड़ रुपये के मुकाबले 17.7% अधिक है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
आईटी सेवा क्षेत्र की दिग्गज कंपनी Tech Mahindra ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में मजबूत वित्तीय प्रदर्शन दर्ज किया है. कंपनी का राजस्व, मुनाफा, ऑपरेटिंग मार्जिन और बड़े डील्स (Deal Wins) सभी में सालाना और तिमाही आधार पर बढ़ोतरी हुई है. हालांकि, कंपनी ने अपनी परंपरा के अनुरूप पहली तिमाही के लिए अंतरिम डिविडेंड (Interim Dividend) का ऐलान नहीं किया. वहीं, कर्मचारियों की संख्या में लगातार गिरावट का सिलसिला भी जारी रहा, हालांकि एट्रिशन रेट में और कमी आई है.
लगातार तीसरी तिमाही में 1 अरब डॉलर से ज्यादा के डील्स मिले
Tech Mahindra के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) और प्रबंध निदेशक (MD) मोहित जोशी ने कहा कि कंपनी ने स्थिर मुद्रा (Constant Currency) के आधार पर 6.1% की सालाना वृद्धि दर्ज की है. साथ ही लगातार तीसरी तिमाही में 1 अरब डॉलर से अधिक के नए डील्स हासिल किए हैं. उन्होंने कहा कि 5 करोड़ डॉलर (50 Million Dollar) से अधिक कारोबार करने वाले ग्राहकों की संख्या में सात की बढ़ोतरी हुई है और सभी प्रमुख बिजनेस वर्टिकल्स ने सालाना आधार पर वृद्धि दर्ज की है.
राजस्व और मुनाफे में मजबूत बढ़ोतरी
जून 2026 तिमाही में कंपनी का समेकित परिचालन राजस्व बढ़कर 15,712 करोड़ रुपये हो गया, जो एक साल पहले की समान अवधि के 13,351 करोड़ रुपये के मुकाबले 17.7% अधिक है. वहीं, पिछली तिमाही के 15,076 करोड़ रुपये की तुलना में इसमें 4.2% की बढ़ोतरी हुई. कंपनी का समेकित शुद्ध लाभ (PAT) बढ़कर 1,465 करोड़ रुपये पहुंच गया. यह पूरा मुनाफा कंपनी के इक्विटी शेयरधारकों के हिस्से में आया.
ऑपरेटिंग मार्जिन में जबरदस्त सुधार
तिमाही के दौरान कंपनी का EBIT बढ़कर 2,264 करोड़ रुपये हो गया, जो सालाना आधार पर 53.3% और तिमाही आधार पर 8.6% अधिक है. EBIT मार्जिन बढ़कर 14.4% पहुंच गया, जो पिछले साल की तुलना में 330 बेसिस प्वाइंट और पिछली तिमाही के मुकाबले करीब 60 बेसिस प्वाइंट अधिक है. वहीं, कर-पूर्व लाभ (PBT) बढ़कर 2,042 करोड़ रुपये रहा, जो एक साल पहले 1,618 करोड़ रुपये था.
1 अरब डॉलर से ज्यादा के नए डील्स
Tech Mahindra की ऑर्डर बुक भी मजबूत हुई है. कंपनी ने जून तिमाही में 1.078 अरब डॉलर (USD 1.078 Billion) के नए डील्स हासिल किए, जो पिछले साल की तुलना में 33.3% अधिक हैं. पिछले 12 महीनों में कंपनी के कुल डील्स का मूल्य (TCV) बढ़कर 4.063 अरब डॉलर पहुंच गया, जिसमें 37.5% की सालाना वृद्धि दर्ज की गई. यह आने वाले समय में कंपनी के राजस्व के लिए बेहतर संभावनाओं का संकेत माना जा रहा है.
दोनों प्रमुख कारोबार से मिला ग्रोथ का सहारा
कंपनी के सबसे बड़े कारोबार IT Services से राजस्व बढ़कर 13,245 करोड़ रुपये हो गया, जबकि एक साल पहले यह 11,264 करोड़ रुपये था. वहीं, बिजनेस प्रोसेस सर्विसेज (BPS) से आय भी बढ़कर 2,467 करोड़ रुपये पहुंच गई, जो पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में 2,088 करोड़ रुपये थी. दोनों सेगमेंट में वृद्धि ने कंपनी के कुल राजस्व को मजबूती दी.
कैश फ्लो मजबूत, बैलेंस शीट भी बेहतर
Tech Mahindra ने तिमाही के दौरान 167 मिलियन डॉलर का फ्री कैश फ्लो दर्ज किया, जो पिछले साल की तुलना में 94% अधिक है. कंपनी के पास जून 2026 के अंत तक 9,695 करोड़ रुपये की नकदी और नकदी समकक्ष मौजूद थे. वर्किंग कैपिटल का प्रमुख संकेतक DSO 84 दिनों पर स्थिर रहा.
कर्मचारियों की संख्या घटी, एट्रिशन में आई कमी
जून तिमाही के अंत तक कंपनी में कुल 1,46,760 कर्मचारी थे, जो पिछली तिमाही की तुलना में 863 कम हैं. हालांकि, कर्मचारियों के नौकरी छोड़ने की दर (IT Attrition) घटकर 11.8% रह गई, जबकि मार्च तिमाही में यह 12.1% और एक साल पहले 12.6% थी. इसके साथ ही IT बिजनेस में उपयोग बढ़कर 87% हो गया.
पहली तिमाही में नहीं दिया डिविडेंड
Tech Mahindra ने इस तिमाही में अंतरिम डिविडेंड का ऐलान नहीं किया. कंपनी ने पिछले वर्षों की तरह इस बार भी पहली तिमाही में डिविडेंड नहीं देने की परंपरा को बरकरार रखा. कुल मिलाकर, जून तिमाही में Tech Mahindra ने राजस्व, मुनाफा, ऑपरेटिंग मार्जिन, कैश फ्लो और डील बुकिंग के मोर्चे पर मजबूत प्रदर्शन किया. हालांकि, लागत नियंत्रण के तहत कर्मचारियों की संख्या में कटौती का सिलसिला जारी रहा, जबकि एट्रिशन रेट में कमी और बेहतर उपयोग दर कंपनी के परिचालन प्रदर्शन को और मजबूत बनाती है.
Crisil का मानना है कि सिक्योरिटाइजेशन और म्युनिसिपल बॉन्ड बाजार को विकसित करने से पूंजी का बेहतर पुनर्चक्रण होगा. इससे शहरी बुनियादी ढांचे के लिए फंडिंग बढ़ेगी और सरकार पर वित्तीय बोझ भी कम होगा.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत को 2047 तक 30 ट्रिलियन डॉलर से अधिक की अर्थव्यवस्था बनाने के लिए निजी क्षेत्र से बड़े पैमाने पर वित्तपोषण की जरूरत होगी. इसी वजह से देश का गैर-सरकारी (Non-Sovereign) कर्ज मौजूदा करीब 84% GDP से बढ़कर 2047 तक लगभग 150% GDP तक पहुंच सकता है. रेटिंग एजेंसी Crisil की एक रिपोर्ट में यह अनुमान लगाया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक, इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए बैंकों के साथ-साथ डेट कैपिटल मार्केट की भूमिका भी काफी अहम होगी.
विकसित देशों के बराबर पहुंच सकता है कर्ज का स्तर
Crisil का कहना है कि यदि भारत की अर्थव्यवस्था तेज रफ्तार से बढ़ती है, तो गैर-सरकारी कर्ज का स्तर उन विकसित अर्थव्यवस्थाओं के समान हो सकता है, जहां आर्थिक विस्तार के दौर में कर्ज का अनुपात काफी अधिक रहा था. इनमें अमेरिका, ब्रिटेन, यूरो क्षेत्र और जापान जैसे देश शामिल हैं.
अकेले बैंक पूरी नहीं कर पाएंगे फंडिंग की जरूरत
रिपोर्ट के अनुसार, आने वाले वर्षों में भारत की बढ़ती कर्ज जरूरतों को केवल बैंकिंग सिस्टम पूरा नहीं कर पाएगा. हाल के वर्षों में जमा की वृद्धि अपेक्षाकृत धीमी रही है, जबकि मार्च 2026 तक बैंकों का क्रेडिट-डिपॉजिट अनुपात 82% से अधिक पहुंच चुका है. इससे बैंकों की कर्ज देने की क्षमता पर दबाव बढ़ा है. ऐसे में कॉरपोरेट बॉन्ड, सिक्योरिटाइज्ड इंस्ट्रूमेंट्स, म्युनिसिपल बॉन्ड और मनी मार्केट इंस्ट्रूमेंट्स जैसे डेट कैपिटल मार्केट के विभिन्न माध्यमों की भूमिका भविष्य में और महत्वपूर्ण होगी.
भारत का डेट मार्केट अभी काफी छोटा
Crisil की रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 के अंत तक भारत का डेट कैपिटल मार्केट GDP के केवल 22% के बराबर था, जबकि सकल बैंक ऋण GDP के 62% तक पहुंच चुका था. इससे साफ है कि भारत में डेट मार्केट की गहराई अभी विकसित अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में काफी कम है.
चुनिंदा कंपनियों तक सीमित है कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत का कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार अभी कुछ चुनिंदा कंपनियों तक सीमित है. AAA और AA रेटिंग वाले बॉन्ड कुल बकाया कॉरपोरेट बॉन्ड का 80% से अधिक हिस्सा रखते हैं. वहीं, वित्त वर्ष 2022-23 के बाद से सरकारी स्वामित्व वाली कंपनियों और वित्तीय संस्थानों का वार्षिक बॉन्ड जारी करने में 80% से ज्यादा योगदान रहा है. इसके अलावा, रिटेल और विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी कुल बकाया कॉरपोरेट बॉन्ड में 10% से भी कम है, जो इस बाजार में व्यापक भागीदारी की कमी को दर्शाता है.
क्या हैं Crisil के सुझाव?
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत को अपने कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार का विस्तार करने के लिए बीमा कंपनियों, पेंशन फंड और अन्य दीर्घकालिक संस्थागत निवेशकों की भागीदारी बढ़ानी होगी. साथ ही नियामकीय सुधारों के जरिए A और BBB रेटिंग वाले बॉन्ड में भी निवेश को प्रोत्साहित करना होगा.
Crisil का मानना है कि सिक्योरिटाइजेशन और म्युनिसिपल बॉन्ड बाजार को विकसित करने से पूंजी का बेहतर पुनर्चक्रण होगा. इससे शहरी बुनियादी ढांचे के लिए फंडिंग बढ़ेगी और सरकार पर वित्तीय बोझ भी कम होगा.
इस अधिग्रहण के जरिए कंपनी यूरोप, एशिया, मध्य पूर्व, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका में Delivery Hero के कारोबार को अपने Uber Eats प्लेटफॉर्म के साथ जोड़ना चाहती है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
ऑनलाइन फूड डिलीवरी बाजार में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए अमेरिकी कंपनी Uber Technologies ने जर्मनी की फूड डिलीवरी कंपनी Delivery Hero के अधिग्रहण के लिए 14.8 अरब डॉलर (करीब 1.27 लाख करोड़ रुपये) की सार्वजनिक बोली (Public Takeover Bid) पेश की है. यह सौदा पूरा होने पर चीन के बाहर दुनिया का सबसे बड़ा फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म बन जाएगा. Delivery Hero के प्रबंधन और सुपरवाइजरी बोर्ड ने भी इस प्रस्ताव का समर्थन किया है.
प्रति शेयर 47.57 डॉलर की पेशकश
Uber ने Delivery Hero के लिए 47.57 डॉलर प्रति शेयर की पेशकश की है. इस अधिग्रहण के जरिए कंपनी यूरोप, एशिया, मध्य पूर्व, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका में Delivery Hero के कारोबार को अपने Uber Eats प्लेटफॉर्म के साथ जोड़ना चाहती है.
अगर यह सौदा पूरा हो जाता है, तो संयुक्त कंपनी 99 देशों में कारोबार करेगी. इसका अनुमानित ग्रॉस मर्चेंडाइज वैल्यू (GMV) 236 अरब डॉलर होगा, जिससे यह चीन की दिग्गज फूड डिलीवरी कंपनी Meituan के सबसे बड़े वैश्विक प्रतिद्वंद्वियों में शामिल हो जाएगी.
नियामकीय मंजूरी पर टिकी है डील
इस अधिग्रहण के लिए Uber को Delivery Hero के 50% से अधिक शेयर हासिल करने होंगे. इसके अलावा विभिन्न देशों के नियामकीय संस्थानों से मंजूरी भी लेनी होगी. प्रतिस्पर्धा (Antitrust) से जुड़ी संभावित चिंताओं को दूर करने के लिए Delivery Hero ने अपनी 14 देशों में मौजूद परिचालन इकाइयों को निवेश फर्म SSW Partners को 1.6 अरब डॉलर में बेचने पर सहमति जताई है. यह प्रक्रिया मुख्य सौदा पूरा होने से पहले की जाएगी.
जर्मनी में निवेश और कर्मचारियों को लेकर बड़ा वादा
Uber ने भरोसा दिया है कि वह कम से कम 2029 तक Delivery Hero के बर्लिन मुख्यालय और कर्मचारियों को बनाए रखेगी. इसके अलावा कंपनी 2031 तक जर्मनी में 2.29 अरब डॉलर का निवेश भी करेगी. कंपनी को उम्मीद है कि शेयरधारकों और नियामकीय मंजूरी मिलने के बाद यह सौदा 2027 की दूसरी छमाही तक पूरा हो जाएगा.
फूड डिलीवरी सेक्टर में तेज हो रहा है एकीकरण
वैश्विक फूड डिलीवरी इंडस्ट्री में पिछले कुछ समय से बड़े पैमाने पर विलय और अधिग्रहण (M&A) का दौर चल रहा है. कंपनियां मुनाफा बढ़ाने और प्रतिस्पर्धा में बढ़त हासिल करने के लिए अपने कारोबार का विस्तार कर रही हैं.
हाल के महीनों में DoorDash द्वारा Deliveroo के अधिग्रहण और Prosus द्वारा Just Eat Takeaway.com की खरीद जैसे बड़े सौदों ने इस क्षेत्र में एकीकरण की रफ्तार तेज कर दी है. ऐसे में यदि Uber और Delivery Hero का यह सौदा मंजूर हो जाता है, तो यह फूड डिलीवरी उद्योग के इतिहास के सबसे बड़े अधिग्रहणों में से एक होगा.
भारतीय रेल की इस हाइड्रोजन ट्रेन में 10 कोच लगाए गए हैं. जिंद से सोनीपत के बीच चलने वाली यह ट्रेन दुनिया की सबसे लंबी और सबसे शक्तिशाली हाइड्रोजन ट्रेनों में शामिल है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत ने हरित परिवहन की दिशा में एक और बड़ा कदम बढ़ाया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार (17 जुलाई) को देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया. जिंद से सोनीपत के बीच चलने वाली यह ट्रेन दुनिया की सबसे लंबी और सबसे शक्तिशाली हाइड्रोजन ट्रेनों में शामिल है. 10 कोच वाली इस ट्रेन में एक साथ 2,600 यात्री सफर कर सकेंगे, जबकि दुनिया के अधिकांश देशों में चलने वाली हाइड्रोजन ट्रेनों में केवल दो या तीन कोच ही होते हैं.
दुनिया की सबसे लंबी हाइड्रोजन ट्रेनों में शामिल
भारतीय रेल की इस हाइड्रोजन ट्रेन में 10 कोच लगाए गए हैं, जो इसे वैश्विक स्तर पर संचालित अधिकांश हाइड्रोजन ट्रेनों से अलग बनाते हैं. मौजूदा समय में दुनिया के कई देशों में हाइड्रोजन ट्रेनें छोटे क्षेत्रीय मार्गों पर दो या तीन कोच के साथ चलती हैं, जबकि भारत ने अधिक क्षमता वाली ट्रेन विकसित की है. इसमें एक बार में करीब 2,600 यात्री यात्रा कर सकेंगे.
गैर-विद्युतीकृत रेल मार्गों पर बनेगी डीजल का विकल्प
यह ट्रेन उन रेल मार्गों पर चलाई जाएगी, जहां अभी तक विद्युतीकरण नहीं हुआ है. 1,200 किलोवाट क्षमता वाले इंजन, आधुनिक सुरक्षा प्रणाली और समर्पित हाइड्रोजन इंफ्रास्ट्रक्चर से लैस यह परियोजना राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन को गति देने के साथ-साथ भारत के नेट-जीरो लक्ष्य को हासिल करने में भी मदद करेगी.
हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक से होगी आवाजाही
यह ट्रेन हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक पर आधारित है, जिसमें हाइड्रोजन से बिजली तैयार कर ट्रेन संचालित की जाती है. इस पूरी प्रक्रिया में केवल जल वाष्प (वॉटर वेपर) निकलती है, जिससे संचालन के दौरान कार्बन उत्सर्जन लगभग शून्य रहता है. यही वजह है कि इसे पर्यावरण के अनुकूल परिवहन का महत्वपूर्ण विकल्प माना जा रहा है.
डीजल पर निर्भरता होगी कम, प्रदूषण भी घटेगा
रेलवे के अनुसार, हाइड्रोजन ट्रेनें डीजल इंजन की तुलना में टेलपाइप उत्सर्जन को पूरी तरह समाप्त करती हैं. इससे जीवाश्म ईंधन के आयात पर निर्भरता कम होगी और रेल संचालन अधिक स्वच्छ बनेगा. इसके अलावा इन ट्रेनों का शोर स्तर भी पारंपरिक डीजल ट्रेनों की तुलना में काफी कम है.
एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया कि हाइड्रोजन तकनीक फिलहाल महंगी जरूर है, लेकिन भारतीय रेलवे उभरती तकनीकों को अपनाने में पीछे नहीं रहना चाहता. शुरुआती चरण में इस ट्रेन को विरासत (हेरिटेज) मार्गों पर चलाया जाएगा और इसके प्रदर्शन के आधार पर भविष्य में इसका विस्तार किया जाएगा.
अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों के अनुरूप तैयार की गई ट्रेन
रेलवे ने बताया कि हाइड्रोजन अत्यधिक ज्वलनशील गैस होने के कारण इस परियोजना में सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है. ट्रेन का डिजाइन अंतरराष्ट्रीय मानकों NFPA-2 और ISO 19880 श्रृंखला के अनुरूप तैयार किया गया है. इसके साथ ही पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव्स सेफ्टी ऑर्गेनाइजेशन (PESO) की सभी वैधानिक आवश्यकताओं का पालन किया गया है.
कमीशनिंग से पहले पूरी प्रणाली का स्वतंत्र सुरक्षा मूल्यांकन जर्मनी की प्रतिष्ठित तकनीकी निरीक्षण एवं प्रमाणन संस्था TÜV SÜD द्वारा किया गया, जिसके बाद इसे संचालन के लिए मंजूरी मिली.
RBI के नए निर्देशों के तहत बैंक अब फंसे कर्ज की वसूली के दौरान अपने कब्जे में आई अचल संपत्तियों को लंबे समय तक अपने पास नहीं रख सकेंगे.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
फंसे कर्ज (NPA) की वसूली प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकों के लिए नए दिशानिर्देश जारी किए हैं. अब कर्ज की वसूली के दौरान जब्त की गई मकान, जमीन और अन्य अचल संपत्तियों का निपटान अधिकतम 7 साल के भीतर करना अनिवार्य होगा. केंद्रीय बैंक ने कहा है कि इन संपत्तियों की बिक्री सार्वजनिक नीलामी के जरिए जल्द से जल्द की जानी चाहिए. यह नया नियम 1 अक्टूबर 2026 से लागू होगा.
NPA की वसूली के लिए RBI का नया नियम
RBI के नए निर्देशों के तहत बैंक अब फंसे कर्ज की वसूली के दौरान अपने कब्जे में आई अचल संपत्तियों को लंबे समय तक अपने पास नहीं रख सकेंगे. केंद्रीय बैंक का मानना है कि ऐसी संपत्तियों का समयबद्ध निपटान होने से बैंकों की पूंजी तेजी से मुक्त होगी और उसे उत्पादक गतिविधियों में लगाया जा सकेगा.
7 साल के भीतर करना होगा संपत्तियों का निपटान
संशोधित दिशानिर्देशों के अनुसार, बैंक अपनी नीति के तहत चिन्हित गैर-वित्तीय परिसंपत्तियों (SNFA) का निपटान अधिकतम 7 साल के भीतर करेंगे. RBI ने साफ किया है कि इस समयसीमा का पालन सभी बैंकों के लिए अनिवार्य होगा, ताकि जब्त संपत्तियां वर्षों तक बिना उपयोग के पड़ी न रहें.
सार्वजनिक नीलामी के जरिए होगी बिक्री
केंद्रीय बैंक ने निर्देश दिया है कि जब्त की गई अचल संपत्तियों की बिक्री सार्वजनिक नीलामी के माध्यम से की जाए. इस दौरान बैंकों को SARFAESI अधिनियम, 2002 के तहत निर्धारित नीलामी प्रक्रिया और पारदर्शिता से जुड़े सभी नियमों का पालन करना होगा.
SARFAESI कानून के तहत लागू होंगे नियम
RBI के ये निर्देश सिक्योरिटाइजेशन एंड रिकंस्ट्रक्शन ऑफ फाइनेंशियल एसेट्स एंड एनफोर्समेंट ऑफ सिक्योरिटी इंटरेस्ट (SARFAESI) अधिनियम के तहत जब्त की गई संपत्तियों पर लागू होंगे. इस कानून के तहत बैंक उन उधारकर्ताओं की संपत्तियां अपने कब्जे में लेते हैं, जो समय पर कर्ज का भुगतान नहीं कर पाते.
1 अक्टूबर 2026 से प्रभावी होंगे नए दिशानिर्देश
RBI ने कहा है कि यह व्यवस्था चिन्हित गैर-वित्तीय परिसंपत्तियों (SNFA) के लिए तैयार किए गए नए प्रूडेंशियल फ्रेमवर्क का हिस्सा है. सभी बैंक और वित्तीय संस्थान इन संशोधित नियमों का पालन 1 अक्टूबर 2026 से करेंगे.
क्यों लिया गया यह फैसला?
केंद्रीय बैंक का कहना है कि बैंकों का मुख्य काम रियल एस्टेट का स्वामित्व रखना या संपत्तियों का कारोबार करना नहीं है. इसलिए कर्ज वसूली के दौरान जब्त की गई संपत्तियों को जल्द बेचकर पूंजी को बैंकिंग गतिविधियों में वापस लाना जरूरी है. इससे बैंकों की बैलेंस शीट मजबूत होगी, फंसे कर्ज के मामलों का तेजी से निपटान होगा और वित्तीय प्रणाली की कार्यक्षमता भी बेहतर होगी.
कंपनी की लेनदार समिति ने प्रस्तावित समझौते को मंजूरी दे दी है. अब इस मामले पर 18 अगस्त को राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT) की बेंगलुरु पीठ में सुनवाई होगी.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
संकटग्रस्त एडटेक कंपनी BYJU'S की पैरेंट कंपनी थिंक एंड लर्न (Think & Learn Pvt Ltd) को आकाश एजुकेशनल सर्विसेज (Aakash Educational Services) की शेयरहोल्डिंग से जुड़े लंबे समय से चल रहे विवाद में बड़ी राहत मिली है. कंपनी की लेनदार समिति ने प्रस्तावित समझौते को मंजूरी दे दी है. अब इस मामले पर 18 अगस्त को राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT) की बेंगलुरु पीठ में सुनवाई होगी.
CoC की मंजूरी से विवाद सुलझने की उम्मीद
NCLT की बेंगलुरु पीठ में सुनवाई के दौरान थिंक एंड लर्न की ओर से पेश वकील ने बताया कि कंपनी की लेनदार समिति ने प्रस्तावित समझौते को मंजूरी दे दी है. इसके बाद ट्रिब्यूनल ने मामले की अगली सुनवाई 18 अगस्त के लिए तय कर दी है. इस दौरान दोनों पक्ष अपनी अंतिम रिपोर्ट पेश करेंगे, जिसके आधार पर न्यायाधिकरण फैसला ले सकता है.
Aakash की शेयरहोल्डिंग को लेकर चल रहा है विवाद
प्रस्तावित समझौते का उद्देश्य आकाश एजुकेशनल सर्विसेज की शेयरहोल्डिंग पर चल रहे दावों और विवादों का समाधान करना है. Aakash, BYJU'S के सबसे महत्वपूर्ण और मूल्यवान एसेट्स में से एक है. यदि NCLT इस समझौते को मंजूरी दे देता है, तो कंपनी की स्वामित्व संरचना को लेकर बनी अनिश्चितता दूर हो सकती है और इस प्रमुख परिसंपत्ति से बेहतर मूल्य प्राप्त करने का रास्ता साफ हो जाएगा.
NCLT की मंजूरी के बाद ही लागू होगा समझौता
हालांकि लेनदारों की मंजूरी को इस मामले में अहम उपलब्धि माना जा रहा है, लेकिन प्रस्तावित समझौता तभी प्रभावी होगा जब उसे NCLT की अंतिम मंजूरी मिल जाएगी. फिलहाल सभी की नजर 18 अगस्त को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी है, जहां ट्रिब्यूनल इस मामले में आगे का फैसला करेगा.
क्यूब हाईवे ट्रस्ट का यह IPO पूरी तरह ऑफर फॉर सेल (OFS) होगा. यानी इसमें कोई नई यूनिट जारी नहीं की जाएगी, बल्कि मौजूदा यूनिटधारक अपनी हिस्सेदारी बेचेंगे.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
इंफ्रास्ट्रक्चर इनवेस्टमेंट ट्रस्ट (InvIT) क्यूब हाईवे ट्रस्ट (Cube Highways Trust) ने अपने ₹5,000 करोड़ के आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) के लिए प्रति यूनिट ₹151-152 का प्राइस बैंड तय कर दिया है. यह इश्यू 22 जुलाई को खुलेगा और 24 जुलाई को बंद होगा. इस आईपीओ के जरिए कंपनी पहली बार शेयर बाजार में सूचीबद्ध (लिस्ट) होगी.
पूरी तरह ऑफर फॉर सेल होगा IPO
क्यूब हाईवे ट्रस्ट का यह IPO पूरी तरह ऑफर फॉर सेल (OFS) होगा. यानी इसमें कोई नई यूनिट जारी नहीं की जाएगी, बल्कि मौजूदा यूनिटधारक अपनी हिस्सेदारी बेचेंगे. सार्वजनिक निर्गम 22 जुलाई को खुलेगा और 24 जुलाई को बंद होगा.
एंकर निवेशकों से पहले ही जुटाए ₹1,250 करोड़
आईपीओ से पहले Cube Highways Trust ने पांच रणनीतिक निवेशकों से ₹1,250 करोड़ जुटा लिए हैं. इससे इस इश्यू में संस्थागत निवेशकों की मजबूत दिलचस्पी का संकेत मिला है. इन निवेशकों में Prazim Trading and Investment Company Pvt. Ltd., HDFC Life Insurance Company, HDFC Pension Fund Management, Axis Max Life Insurance Company और WhiteOak Capital REIT & InvIT Alternatives Fund-I शामिल हैं.
इस आईपीओ का प्रबंधन कोटक महिंद्रा कैपिटल कंपनी, एचडीएफसी बैंक, एचएसबीसी सिक्योरिटीज एंड कैपिटल मार्केट्स (India) Pvt. Ltd. और जेएम फाइनेंशियल कर रहे हैं.
क्यों लाई जा रही है पब्लिक लिस्टिंग?
इन्वेस्टमेंट मैनेजर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) विनय सी. सेकर ने कहा कि पब्लिक लिस्टिंग का उद्देश्य निवेशकों का दायरा बढ़ाना और भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास में अधिक भागीदारी सुनिश्चित करना है. उनके मुताबिक, घरेलू निवेशक ऐसे विकल्प तलाश रहे हैं जो स्थिर नकदी प्रवाह के साथ लंबी अवधि में बेहतर रिटर्न की संभावना भी दें. लिस्टिंग से यूनिट्स में लिक्विडिटी बढ़ेगी, बेहतर प्राइस डिस्कवरी होगी और ज्यादा निवेशकों को उच्च गुणवत्ता वाली हाईवे परिसंपत्तियों में निवेश का मौका मिलेगा.
उन्होंने बताया कि मार्च 2026 के अंत तक ट्रस्ट का नेट डेट-टू-एंटरप्राइज वैल्यू अनुपात 46.8 फीसदी था, जो नियामकीय सीमा 70 फीसदी से काफी कम है. साथ ही ट्रस्ट की AAA क्रेडिट रेटिंग भविष्य में नई परिसंपत्तियों के अधिग्रहण के लिए वित्तीय लचीलापन प्रदान करती है.
रिटेल निवेशकों के लिए बड़ा मौका
ग्रुप मुख्य वित्तीय अधिकारी (CFO) पंकज वासनी ने कहा कि यह पब्लिक लिस्टिंग रिटेल निवेशकों को इंफ्रास्ट्रक्चर परिसंपत्तियों में निवेश का अवसर देगी. अब तक इस तरह की उच्च गुणवत्ता वाली परिचालन हाईवे परिसंपत्तियों में निवेश का अवसर मुख्य रूप से संस्थागत और निजी निवेशकों तक ही सीमित था.
उन्होंने कहा कि भारत का सड़क क्षेत्र जीडीपी आधारित विकास, थोक मूल्य सूचकांक (WPI) से जुड़ी टोल दरों में संशोधन, बढ़ते ट्रैफिक और सरकार के लगातार इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश के कारण लंबी अवधि के लिए आकर्षक निवेश अवसर बना हुआ है.
27 हाईवे परियोजनियों का बड़ा पोर्टफोलियो
क्यूब हाईवे ट्रस्ट के पास भारत के सबसे बड़े विविधीकृत सड़क पोर्टफोलियो में से एक है. ट्रस्ट के पास 12 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में फैली 27 हाईवे परियोजनाएं हैं. इनमें 18 टोल रोड और 9 एन्युटी आधारित परियोजनाएं शामिल हैं, जिससे ट्रैफिक आधारित आय और स्थिर नकदी प्रवाह का संतुलित मिश्रण मिलता है.
ट्रस्ट का पोर्टफोलियो करीब 8,800 लेन किलोमीटर में फैला है और इसके प्रबंधनाधीन परिसंपत्तियों का मूल्य लगभग ₹36,800 करोड़ है. इन परिसंपत्तियों का औसत परिचालन इतिहास नौ वर्ष से अधिक है, जबकि औसत शेष रियायत अवधि 18 वर्ष से ज्यादा है, जिससे लंबी अवधि तक नियमित नकदी प्रवाह की संभावना बनी रहती है.
InvIT में बढ़ रही निवेशकों की दिलचस्पी
क्यूब हाईवे ट्रस्ट का पब्लिक इश्यू ऐसे समय आ रहा है, जब भारत में सड़क और परिवहन अवसंरचना पर लगातार निवेश बढ़ रहा है और InvIT जैसे निवेश माध्यम नियमित नकद वितरण के कारण निवेशकों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं.
गुरुवार को BSE सेंसेक्स 1.44 अंक की मामूली बढ़त के साथ 77,186.87 पर बंद हुआ, जबकि NSE निफ्टी 5.75 अंक फिसलकर 24,072.75 के स्तर पर बंद हुआ.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
घरेलू शेयर बाजार गुरुवार को शुरुआती बढ़त बरकरार नहीं रख सका और कारोबार के अंत में लगभग सपाट स्तर पर बंद हुआ. सेंसेक्स मामूली बढ़त के साथ बंद हुआ, जबकि निफ्टी हल्की गिरावट में रहा. बैंकिंग और वित्तीय शेयरों में बिकवाली के दबाव के बीच आईटी, ऑटो और चुनिंदा ब्लूचिप शेयरों ने बाजार को सहारा दिया. अब शुक्रवार को निवेशकों की नजर जून तिमाही के नतीजों और कई बड़े कॉरपोरेट अपडेट्स पर रहेगी, जिनके चलते चुनिंदा शेयरों में तेज हलचल देखने को मिल सकती है.
शुरुआती तेजी के बाद फीकी पड़ी बाजार की रफ्तार
एशियाई बाजारों से मिले कमजोर संकेतों और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार ने बढ़त के साथ शुरुआत की, लेकिन दिनभर के उतार-चढ़ाव के बाद बढ़त कायम नहीं रख सका. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स 1.44 अंक की मामूली बढ़त के साथ 77,186.87 पर बंद हुआ, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) निफ्टी 5.75 अंक फिसलकर 24,072.75 के स्तर पर बंद हुआ. इस दौरान डॉलर के मुकाबले रुपया 0.1 फीसदी कमजोर होकर 96.3450 पर बंद हुआ.
बैंकिंग शेयरों में बिकवाली, आईटी और ऑटो ने दिया सहारा
सेंसेक्स की 30 में से 15 कंपनियों के शेयर गिरावट के साथ बंद हुए. Eternal में सबसे ज्यादा 2.82 फीसदी की गिरावट रही. इसके अलावा BEL, Bajaj Finserv, HDFC Bank, Trent, UltraTech Cement, Axis Bank और Kotak Mahindra Bank के शेयर भी दबाव में रहे. वहीं InterGlobe Aviation (IndiGo), HCL Tech, Bajaj Finance, Maruti Suzuki, Mahindra & Mahindra, Tech Mahindra, ITC, Titan और TCS के शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली, जिससे बाजार को सहारा मिला.
सेक्टोरल इंडेक्स में मिला-जुला रुख
सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो निफ्टी रियल्टी, बैंक और फाइनेंशियल सर्विसेज इंडेक्स में सबसे ज्यादा कमजोरी रही. वहीं निफ्टी केमिकल और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स इंडेक्स बढ़त के साथ बंद हुए. कमोडिटी बाजार में ब्रेंट क्रूड 0.29 फीसदी की गिरावट के साथ 84.74 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा.
आज इन शेयरों पर रहेगी बाजार की नजर
शुक्रवार के कारोबार में कई कंपनियों से जुड़े बड़े अपडेट निवेशकों के फोकस में रहेंगे. Jio Financial Services ने जून तिमाही में 156 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 830 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा दर्ज किया है. HCL Tech ने अमेरिका की Guardian Life Insurance Company के साथ सात साल की बड़ी डील की है, जिसके तहत वह Guardian India ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर का अधिग्रहण करेगी. इसके अलावा Reliance Industries, JSW Steel, Federal Bank, Central Bank of India, Tata Technologies, Havells India, RBL Bank, Poonawalla Fincorp और Oberoi Realty समेत कई कंपनियां आज अपने अप्रैल-जून तिमाही के नतीजे जारी करेंगी.
इन कंपनियों से जुड़े अपडेट भी रहेंगे अहम
PC Jeweller ने QIP के जरिए 1,000 करोड़ रुपये जुटाने की मंजूरी दी है. Maruti Suzuki ने रायपुर जिला उपभोक्ता आयोग के आदेश को चुनौती देने का फैसला किया है. Coal India को गुजरात के खावड़ा सोलर प्रोजेक्ट के 200 मेगावाट हिस्से के लिए कमीशनिंग सर्टिफिकेट मिला है. Laser Power and Infra में कई बड़े संस्थागत निवेशकों ने हिस्सेदारी बढ़ाई है. वहीं Wipro के उम्मीद से कमजोर तिमाही नतीजों के कारण उसके शेयर दबाव में रह सकते हैं. Piramal Finance का शुद्ध मुनाफा भी सालाना आधार पर 67 फीसदी बढ़कर 461 करोड़ रुपये पहुंचा है.
बाजार की दिशा पर रहेगी नतीजों और वैश्विक संकेतों की नजर
विश्लेषकों का मानना है कि वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, रुपये की चाल और जून तिमाही के कॉरपोरेट नतीजे शुक्रवार के कारोबार में बाजार की दिशा तय करेंगे. ऐसे में रिलायंस इंडस्ट्रीज, Jio Financial, HCL Tech, Wipro, Maruti Suzuki और PC Jeweller समेत कई शेयरों में अच्छी-खासी हलचल देखने को मिल सकती है.
(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)
स्ट्रैटेजिक टेक्नोलॉजीज वर्किंग ग्रुप के तहत भारत और EU संयुक्त आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) रोडमैप तैयार करेंगे. दोनों पक्ष जिम्मेदार AI के विकास और नियमन पर मिलकर काम करेंगे, जिसमें स्वास्थ्य क्षेत्र को प्राथमिकता दी जाएगी.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत और यूरोपीय संघ (EU) ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), सेमीकंडक्टर, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, स्वच्छ प्रौद्योगिकी और मजबूत सप्लाई चेन जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग को नई ऊंचाई पर ले जाने का फैसला किया है. दोनों पक्षों ने ट्रेड एंड टेक्नोलॉजी काउंसिल (TTC) को अधिक परिणाम-केंद्रित मंच बनाने और 2030 तक व्यापक रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने पर सहमति जताई.
ब्रुसेल्स में हुई तीसरी TTC मंत्रीस्तरीय बैठक
भारत-यूरोपीय संघ ट्रेड एंड टेक्नोलॉजी काउंसिल (TTC) की तीसरी मंत्रीस्तरीय बैठक 15 जुलाई को बेल्जियम की राजधानी ब्रुसेल्स में आयोजित हुई. बैठक की सह-अध्यक्षता विदेश मंत्री एस. जयशंकर, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद और यूरोपीय आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों ने की.
ट्रेड एंड टेक्नोलॉजी काउंसिल की स्थापना अप्रैल 2022 में भारत और EU के बीच व्यापार, भरोसेमंद तकनीक और आर्थिक सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए की गई थी. दोनों पक्षों ने जनवरी 2026 में हुए 16वें भारत-EU शिखर सम्मेलन में अपनाए गए 'Towards 2030: A Joint India-European Union Comprehensive Strategic Agenda' के अनुरूप इस मंच को और मजबूत करने पर सहमति जताई.
AI और सेमीकंडक्टर पर बढ़ेगा सहयोग
स्ट्रैटेजिक टेक्नोलॉजीज वर्किंग ग्रुप के तहत भारत और EU संयुक्त आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) रोडमैप तैयार करेंगे. दोनों पक्ष जिम्मेदार AI के विकास और नियमन पर मिलकर काम करेंगे, जिसमें स्वास्थ्य क्षेत्र को प्राथमिकता दी जाएगी.
इसके अलावा, सेमीकंडक्टर क्षेत्र में निवेश, रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D), एडवांस्ड मैटेरियल्स और क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाया जाएगा. इसके लिए Semicon India 2026 के दौरान संयुक्त राउंडटेबल आयोजित करने पर भी सहमति बनी है. साथ ही भारत के सेमीकंडक्टर मिशन और EU Chips Act के तहत चल रही परियोजनाओं के बीच सहयोग की संभावनाएं भी तलाशी जाएंगी.
DigiLocker और EU Digital Identity Wallet को जोड़ने पर चर्चा
डिजिटल सहयोग के तहत दोनों पक्ष डिजिटल पहचान प्रणाली की इंटरऑपरेबिलिटी पर चर्चा जारी रखेंगे. इसके तहत भारत के DigiLocker और EU Digital Identity Wallet को जोड़ने के लिए पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने की संभावना पर भी विचार किया जाएगा. इसके अलावा क्वांटम टेक्नोलॉजी, हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग (HPC), 6G मानकों और डिजिटल स्किल डेवलपमेंट के क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाया जाएगा.
Horizon Europe कार्यक्रम में शामिल हो सकता है भारत
संयुक्त बयान के मुताबिक, भारत को यूरोपीय संघ के 93.5 अरब यूरो के प्रमुख रिसर्च एवं इनोवेशन प्रोग्राम Horizon Europe से जोड़ने के लिए औपचारिक बातचीत शुरू होगी. दोनों पक्ष 2026 के अंत तक इस प्रक्रिया को पूरा करने का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं, ताकि 2027 से भारतीय शोधकर्ता इस कार्यक्रम में पूर्ण रूप से भाग ले सकें.
EV चार्जिंग और क्लीन टेक्नोलॉजी पर बनेगा इनोवेशन हब
भारत और EU इलेक्ट्रिक वाहन (EV) चार्जिंग तकनीक और टेस्टिंग पर केंद्रित अपना पहला संयुक्त इनोवेशन हब भी स्थापित करेंगे. इस पहल का नेतृत्व यूरोपीय आयोग के ज्वाइंट रिसर्च सेंटर और ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) करेंगे.
दोनों पक्षों ने नवीकरणीय हाइड्रोजन, समुद्री प्रदूषण और इलेक्ट्रिक वाहन बैटरी रीसाइक्लिंग से जुड़े संयुक्त अनुसंधान परियोजनाओं की प्रगति की भी समीक्षा की. इन परियोजनाओं में अगले चार वर्षों में संयुक्त रूप से 6 करोड़ यूरो का निवेश किया जाएगा.
सप्लाई चेन और व्यापार सहयोग होगा मजबूत
भारत और EU ने कृषि, फार्मास्यूटिकल्स और क्लीन टेक्नोलॉजी क्षेत्रों में मजबूत और लचीली सप्लाई चेन विकसित करने की प्रतिबद्धता दोहराई. दोनों पक्ष एक्टिव फार्मास्यूटिकल इंग्रीडिएंट्स (API), खाद्य सुरक्षा, नवीकरणीय ऊर्जा तकनीकों और हाइड्रोजन क्षेत्र में सहयोग जारी रखेंगे.
इसके अलावा, बिजनेस-टू-बिजनेस (B2B) सहयोग को बढ़ावा देने, बाजार पहुंच से जुड़ी बाधाओं को दूर करने, सैनिटरी और फाइटोसैनिटरी मानकों, तकनीकी नियमों तथा ऑर्गेनिक उत्पादों की पारस्परिक मान्यता पर भी बातचीत जारी रखने पर सहमति बनी.
WTO सुधार और कार्बन टैक्स पर भी चर्चा
बैठक में दोनों पक्षों ने विश्व व्यापार संगठन (WTO) में सुधार की आवश्यकता पर समर्थन दोहराया. साथ ही यूरोपीय संघ के कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा जारी रखने का फैसला किया, ताकि भारतीय कंपनियों को मान्यता प्राप्त सत्यापन एजेंसियों तक समय पर पहुंच मिल सके.
Deep-Tech स्टार्टअप्स को मिलेगा बढ़ावा
भारत और EU ने डीप-टेक स्टार्टप पार्टनरशिप शुरू करने पर भी सहमति जताई. इस पहल में यूरोपियन इनोवेशन काउंसिल और स्टार्टप इंडिया मिलकर स्टार्टअप्स को निवेश, बाजार तक पहुंच और व्यावसायीकरण के अवसर उपलब्ध कराएंगे.
इसके अलावा 'Blue Valleys' पहल के तहत रणनीतिक क्षेत्रों में औद्योगिक क्लस्टर विकसित करने के लिए सरकारों, उद्योगों, स्टार्टअप्स और शोध संस्थानों को जोड़ने वाले एक विशेष प्लेटफॉर्म की संभावनाएं भी तलाशी जाएंगी.
2027 में नई दिल्ली में होगी अगली बैठक
दोनों पक्षों ने भारत-EU बिजनेस फोरम का हर साल आयोजन करने और प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में उद्योग जगत के साथ नियमित संवाद जारी रखने पर सहमति जताई. भारत-EU ट्रेड एंड टेक्नोलॉजी काउंसिल की अगली मंत्रीस्तरीय बैठक 2027 में नई दिल्ली में आयोजित की जाएगी.
कंपनी का कहना है कि इन पहलों का मकसद ग्राहकों को बेहतर रिवॉर्ड्स, प्रीमियम कॉफी एक्सपीरियंस और पर्सनलाइज्ड सुविधाएं उपलब्ध कराना है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
टाटा स्टारबक्स ने भारत में अपने प्रीमियम कॉफी कारोबार को नई रफ्तार देने के लिए दो बड़े ऐलान किए हैं. कंपनी ने एक ओर स्टारबक्स रिजर्व (Starbucks Reserve) लॉयल्टी प्रोग्राम को पूरी तरह नया रूप देते हुए ग्रीन, गोल्ड और नया रिजर्व टियर लॉन्च किया है, वहीं दूसरी ओर दिल्ली एयरोसिटी में अपना नया Starbucks Reserve™ स्टोर शुरू किया है. कंपनी का कहना है कि इन दोनों पहलों का उद्देश्य ग्राहकों को बेहतर रिवॉर्ड्स, पर्सनलाइज्ड अनुभव और विश्वस्तरीय कॉफी संस्कृति से जोड़ना है.
एनसीआर में खुला तीसरा Starbucks Reserve
टाटा स्टारबक्स ने दिल्ली एयरोसिटी के वर्ल्डमार्क-5 स्थित वर्ल्ड स्ट्रीट में नया स्टारबक्स रिजर्व स्टोर शुरू किया है. यह एनसीआर का तीसरा स्टारबक्स रिजर्व स्टोर है. कंपनी के मुताबिक, एयरोसिटी तेजी से उभरता हुआ ऐसा केंद्र है, जहां वैश्विक यात्रियों, कॉर्पोरेट प्रोफेशनल्स और कॉफी प्रेमियों का बड़ा वर्ग मौजूद है. ऐसे में यहां प्रीमियम कॉफी अनुभव उपलब्ध कराने की बड़ी संभावना है.
स्टोर को स्टारबक्स की 'थर्ड प्लेस' अवधारणा के अनुरूप तैयार किया गया है, ताकि लोग घर और ऑफिस के अलावा यहां आराम से समय बिता सकें, बातचीत कर सकें और कॉफी संस्कृति का आनंद ले सकें. यहां दुर्लभ और प्रीमियम कॉफी वैरायटी, सिग्नेचर एस्प्रेसो बेवरेज, हैंडक्राफ्टेड ड्रिंक्स, चुनिंदा फूड आइटम और नया Bake-In मेन्यू उपलब्ध कराया गया है.
स्टोर में अत्याधुनिक Black Eagle Espresso Machine लगाई गई है, जिससे कॉफी मास्टर्स ब्रूइंग और एक्सट्रैक्शन पर अधिक सटीक नियंत्रण रख सकेंगे. मेन्यू में Ube Coconut Martini, Ube Coconut Cold Brew, Jamaican Rum Stardust, Gin Cocobotanica और Espresso Martini जैसे प्रीमियम सिग्नेचर ड्रिंक्स भी शामिल हैं. इसके अलावा ग्राहकों के लिए Zero-Proof Cocktails, Protein Coffee, कम कैफीन वाले पेय और पसंद के अनुसार पूरी तरह कस्टमाइज्ड ड्रिंक्स भी उपलब्ध होंगे.
Starbucks Rewards प्रोग्राम को मिला नया स्वरूप
टाटा स्टारबक्स की हेड ऑफ प्रोडक्ट एंड मार्केटिंग मिताली माहेश्वरी ने बताया कि कंपनी ने अपने स्टारबक्स रिवॉर्ड्स प्रोग्राम को भी पूरी तरह री-डिजाइन किया है. इसमें ग्रीन और गोल्ड के साथ पहली बार रिजर्व टियर को शामिल किया गया है. नया प्रोग्राम ग्राहकों को पहले की तुलना में तेजी से स्टार्स अर्जित करने, उन्हें आसानी से रिडीम करने और अधिक पर्सनलाइज्ड बेनिफिट्स देने पर केंद्रित है.
ग्रीन एंट्री-लेवल टियर होगा, जबकि एक साल में 1,000 स्टार्स अर्जित करने वाले ग्राहक गोल्ड टियर में पहुंच जाएंगे. वहीं, एक वर्ष में 5,000 या उससे अधिक स्टार्स अर्जित करने वाले ग्राहकों को नए Reserve टियर में अपग्रेड किया जाएगा.
रिजर्व सदस्यों को उनके नाम और सदस्य बनने के वर्ष के साथ एक पर्सनलाइज्ड ब्लैक कार्ड मिलेगा. मिताली ने बताया यह टियर कंपनी के सबसे सक्रिय और वफादार ग्राहकों के लिए तैयार किया गया है, ताकि उन्हें विशेष पहचान और प्रीमियम अनुभव मिल सके.
अब हर 10 रुपये पर मिलेगा एक स्टार
मिताली ने बताया नए रिवॉर्ड्स प्रोग्राम के तहत ग्राहक हर 10 रुपये खर्च करने पर एक स्टार अर्जित करेंगे, यानी पहले की तुलना में कहीं तेजी से स्टार्स जमा होंगे. गोल्ड सदस्य हर 10 रुपये पर 1.2 गुना और रिजर्व सदस्य 1.3 गुना स्टार्स प्राप्त करेंगे. कंपनी ने रिवॉर्ड्स रिडीम करने की न्यूनतम सीमा भी कम कर दी है, जिससे ग्राहक कम स्टार्स में भी अपने पसंदीदा लाभ हासिल कर सकेंगे.
अब ग्राहक अपने स्टार्स का इस्तेमाल केवल फ्री बेवरेज तक सीमित नहीं रखेंगे. वे फूड आइटम, मर्चेंडाइज, बिल पर डिस्काउंट और अन्य ऑफर्स के लिए भी इन्हें रिडीम कर सकेंगे. इसके अलावा बर्थडे रिवॉर्ड्स, माइलस्टोन सेलिब्रेशन, Double Stars Days और एक्सक्लूसिव मेंबर ऑफर्स भी मिलेंगे.
Reserve सदस्यों के लिए होंगे एक्सक्लूसिव अनुभव
रिजर्व टियर के सदस्यों को सिर्फ अतिरिक्त स्टॉर्स ही नहीं, बल्कि कई विशेष अनुभव भी मिलेंगे. इनमें Free Customized Mondays, एक्सक्लूसिव मर्चेंडाइज, क्यूरेटेड कॉफी सेशन, विशेष आयोजनों में भाग लेने का अवसर और सदस्य-विशेष सुविधाएं शामिल हैं.
मिताली ने बताया कि कंपनी चुनिंदा रिजर्व सदस्यों को उन देशों की ऑल-एक्सपेंस पेड यात्रा भी कराती है, जहां Single Origin Coffee उगाई जाती है. इससे ग्राहक कॉफी की खेती से लेकर कप तक की पूरी यात्रा को करीब से समझ पाते हैं. उन्होंने कहा कि कंपनी ऐसा इकोसिस्टम बनाना चाहती है, जिसमें हर स्तर के ग्राहक को उसकी वफादारी के अनुरूप बेहतर अनुभव और अधिक मूल्य मिले.