रूस-यूक्रेन युद्ध से लेकर मुद्रास्फीति और तेल की कीमतों तक, ऐसे कई कारक थे जो पूरे वर्ष बाजारों में उतार-चढ़ाव करते देखे गए.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
नए निवेशकों को अनिश्चितता से घिरे एक साल से लेकर तेजी और मंदी की राह पर चलने वाले साल तक, 2022 वास्तव में शेयर बाजार के लिए उतार-चढ़ाव भरा रहा. रूस-यूक्रेन युद्ध से लेकर मुद्रास्फीति और तेल की कीमतों तक, ऐसे कई कारक थे जो पूरे वर्ष बाजारों में उतार-चढ़ाव करते देखे गए.
2023 में कदम रखने से पहले बाजार में शीर्ष लाभ और हानि का एक त्वरित फ्लैशबैक यहां दिया गया है:
जनवरी-
जनवरी ने देखा कि बैंकिंग क्षेत्र बढ़ रहा है. एक्सिस बैंक, एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और कोटक बैंक इस महीने के टॉप गेनर्स रहे. शीर्ष लूजर्स में मारुति, अल्ट्राटेक सीमेंट, टेक महिंद्रा और एचसीएल टेक शामिल थे.
फरवरी-
प्यार का महीना बाजारों के लिए कुछ खास प्रेम प्रसंग नहीं रहा. इस महीने रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध जैसी स्थिति और भू-राजनीतिक तनाव के कारण दुनिया भर के बाजारों में तबाही देखी गई. इससे पहले हफ्ते में 3.58 फीसदी की गिरावट आई थी.
निफ्टी 50 सूचकांक सप्ताह के लिए एक मजबूत नकारात्मक नोट पर बंद हुआ, महत्वपूर्ण समर्थन क्षेत्र से लगभग 16,800 के स्तर से नीचे टूट गया. डॉ रेड्डीज, एशियन पेंट्स, टीसीएस, एलएंडटी, इंडसइंड बैंक, एचडीएफसी जुड़वाँ और बजाज फिनसर्व के साथ सेंसेक्स 2-3 प्रतिशत की गिरावट के साथ लाल रंग में बंद हुआ.
मार्च-
इस महीने भवन निर्माण सामग्री, उद्योगों और पीएसयू कंपनियों में शुरुआती निवेश से निवेशकों को फायदा हुआ. रियल एस्टेट पर आशावादी दृष्टिकोण और बढ़ते ऑर्डर प्रवाह के कारण इंफ्रा और इंफ्रा से संबंधित शेयरों में तेजी आई.
आईटी, फार्मा और केमिकल्स के शेयरों में निवेशकों को अच्छी बढ़त देखने को मिली. एनएसई के एफएंडओ सेगमेंट में रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल), इंफोसिस और टाटा स्टील शीर्ष कारोबार वाले व्यक्तिगत स्टॉक वायदा अनुबंध थे.
अप्रैल-
अप्रैल को स्टॉक खरीदने के लिए साल के सबसे खराब महीनों में से एक माना जाता है, फिर भी अप्रैल की शुरुआत सकारात्मक नोट पर हुई. दूसरे सप्ताह से अग्रिम पंक्ति के आईटी शेयरों में बिकवाली ने रफ्तार पकड़ी. अप्रैल 2022 के लिए, इक्विटी में एफपीआई की बिक्री 17,144 करोड़ रुपये और कुल मिलाकर 22,688 करोड़ रुपये थी. ऑटोमोबाइल शेयरों में निवेश करने वालों के चेहरे पर मुस्कान थी, क्योंकि ऑटोमोबाइल ने 4.99 फीसदी का रिटर्न दिया, जबकि तेल और गैस क्षेत्र ने 4.18 फीसदी का रिटर्न दिया.
हालांकि, चिप की कमी ने उत्पादन को कम कर दिया, जिससे उनकी मूल्य निर्धारण शक्ति में मदद मिली. तेल और गैस कच्चे तेल की मजबूत कीमतों का परिणाम थे, जो उच्च जीआरएम के साथ-साथ उच्च इन्वेंट्री ट्रांसलेशन लाभ का संकेत देते हैं. रिलायंस अप्रैल में बड़ा चालक था क्योंकि इसका मार्केट कैप 19 ट्रिलियन रुपये के सर्वकालिक उच्च स्तर को छू गया था. अप्रैल 2022 में आईटी इंडेक्स -12.93 फीसदी गिरा था.
मई-
मई के उमस भरे महीने ने शेयर बाजारों के लिए भी गर्मी का रुख देखा. एसएंडपी बीएसई सेंसेक्स 0.34 प्रतिशत बढ़कर 52,973.84 पर और निफ्टी 50 60.15 0.38 प्रतिशत चढ़कर 15,842.30 पर बंद हुआ. दोनों सूचकांक पहले 16 मई को एक सकारात्मक नोट पर खुले थे और जैसे-जैसे व्यापार आगे बढ़ा, सेंसेक्स 53,428.28 के उच्च स्तर पर और निफ्टी 15,977.95 के उच्च स्तर पर पहुंच गया.
एक तरफ एनटीपीसी, बजाज फाइनेंस, मारुति सुजुकी इंडिया, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई), हाउसिंग डेवलपमेंट फाइनेंस कॉरपोरेशन (एचडीएफसी) और कोटक महिंद्रा बैंक इस महीने के टॉप गेनर्स रहे, वहीं दूसरी तरफ अल्ट्राटेक सीमेंट, एशियन पेंट्स , आईटीसी , टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस), डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज और एचसीएल टेक्नोलॉजीज ने चार्ट पर अच्छा प्रदर्शन नहीं किया.
जून-
यह एक ऐसा महीना था जब मेटल्स में तेजी से बदलाव देखा गया, इसके बाद कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, यूटिलिटीज, मेटल्स, हेल्थकेयर, रियल्टी और आईटी स्टॉक्स का नंबर आता है.
जुलाई-
हालांकि इस साल मॉनसून देर से आया, लेकिन शेयर बाजार के लिए कुछ खुशियों की बारिश हुई. जुलाई में निफ्टी में 8.6 फीसदी की उछाल के साथ भारतीय शेयर बाजार ने 2022 के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ महीना देखा. धातु, रियल्टी, एफएमसीजी और बैंकिंग शेयरों ने महीने के दौरान बाजारों में शानदार खरीदारी की. निफ्टी हैवीवेट बजाज फाइनेंस और बजाज फिनसर्व महीने में 38 फीसदी तक बढ़ गए. मजबूत ऋण वृद्धि, शानदार कमाई और स्टॉक-विभाजन की चर्चा ने शेयर रैली को बढ़ावा दिया.
बढ़ती महंगाई और उच्च ब्याज दर के माहौल के बीच, बैंकों और उपभोक्ता कंपनियों ने अच्छी संख्या की सूचना दी. इसके उलट आईटी और मेटल पर इस महीने सबसे ज्यादा मार पड़ी है. आईटी इंडेक्स मार्जिन में गिरावट, उच्च निकासी, बढ़ते उप-ठेकेदार और यात्रा लागत, अमेरिका में बढ़ती ब्याज दरों और मंदी के बारे में चिंताओं के कारण दबाव में आया.
अगस्त-
महीने के अंत में भारतीय शेयर बाजार हरे रंग में बंद हुआ. जबकि बीएसई सेंसेक्स 58,833.87 पर बंद हुआ और 59 अंक या 0.10 प्रतिशत ऊपर था, निफ्टी 50 36 अंक या 0.21 प्रतिशत से अधिक 17558.90 पर बंद हुआ. एनटीपीसी का शेयर 2.80 फीसदी की तेजी के साथ 163.40 रुपये पर बंद हुआ.
टाइटन का शेयर बंद भाव से 0.50 फीसदी की तेजी के साथ 2532.55 रुपये पर बंद हुआ. गुरुवार के फिनाले प्राइस से बीएसई पर पावर ग्रिड का शेयर 1.92 फीसदी की तेजी के साथ 230.60 रुपये पर बंद हुआ. कोटक महिंद्रा बैंक का शेयर 1.71 फीसदी की तेजी के साथ 1901.35 रुपये पर बंद हुआ.
लेकिन इंडसइंड बैंक जैसे कुछ खिलाड़ियों के लिए यह महीना इतना अच्छा नहीं रहा, जिनके शेयर बीएसई पर 1.92 फीसदी की गिरावट के साथ 1068.45 रुपये पर बंद हुए. एचडीएफसी का शेयर 1.20 फीसदी की गिरावट के साथ 2394.75 रुपये पर बंद हुआ. एशियन पेंट्स का शेयर 1.18 फीसदी की गिरावट के साथ 3323.35 रुपये पर बंद हुआ.
सितंबर-
यह महीना आम तौर पर शेयर बाजार के लिए एक सकारात्मक महीना था, जिसमें निफ्टी 50 पिछले 17 वर्षों में सिर्फ सात बार नुकसान हुआ था. फिर भी, डॉलर के मजबूत होने, ब्याज दरों में बढ़ोतरी की चिंताओं और मंदी की चिंताओं के कारण इस बार एफआईआई में तेजी आई है.
निफ्टी रियल्टी, निफ्टी ऑयल एंड गैस, निफ्टी कमोडिटीज और निफ्टी आईटी प्रमुख विफलताओं में से थे, जो महीने के दौरान 10.2 प्रतिशत तक गिर गए. मजबूत सकल घरेलू उत्पाद विकास डेटा, पर्याप्त ऑटो बिक्री संख्या और पिछले महीने में एफआईआई द्वारा मजबूत प्रवाह के साथ भारतीय शेयर बाजार ने महीने की शुरुआत पूरी तरह से की, पहले सप्ताह के दौरान भावनाओं में वृद्धि हुई.
अंतिम सप्ताह में, महीने के अंतिम दिन तक निफ्टी अत्यधिक अस्थिर रहा. आरबीआई की दर में 0.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी उम्मीद के मुताबिक आने के बाद महीने के आखिरी दिन निफ्टी ने 1.64 प्रतिशत की जोरदार वापसी की.
अक्टूबर-
लाभ व्यापक-आधारित थे, क्योंकि सभी क्षेत्रीय सूचकांक सकारात्मक रूप से समाप्त हुए. वित्तीय सेवा, आईटी, फार्मा, ऑटो और कंज्यूमर ड्यूरेबल इंडेक्स प्रत्येक में 1 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई, जबकि अन्य भी 1 प्रतिशत तक बढ़ गए.
अल्ट्राटेक सीमेंट, सन फार्मा, एचडीएफसी जुड़वाँ, एलएंडटी, एमएंडएम, बजाज जुड़वाँ, भारती एयरटेल, एशियन पेंट्स, इंफोसिस, टेक एम, कोटक बैंक, एचयूएल, टाइटन और आईटीसी 1-4 प्रतिशत उछले. नकारात्मक पक्ष पर, एनटीपीसी, डॉ. रेड्डीज लैब्स, इंडसइंड बैंक और नेस्ले ही सेंसेक्स में हारने वाले थे.
नवंबर-
सोमवार (28 नवंबर) को सूचकांक रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंचने के साथ ही भारतीय शेयर बाजार नकारात्मक वैश्विक संकेतों के प्रति प्रतिरक्षित रहा, लेकिन अंत में कुछ लाभ कम हो गए. मजबूत प्रदर्शन ने सेंसेक्स को 62,500 अंक से ऊपर बंद करने में मदद की और निफ्टी 18,600 इंट्राडे को पार कर गया. सेंसेक्स 211 अंक बढ़कर 62,504 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 अंक बढ़कर 18,562 पर बंद हुआ.
वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के कारण तेल और गैस के शेयरों में तेजी आई, सूचकांक में 1.5 फीसदी की उछाल आई. ऑटो शेयरों में भी मजबूती रही. धातु आज के सत्र में संघर्ष करती रही और 1 प्रतिशत गिर गई. बीपीसीएल ने 5 फीसदी की छलांग लगाई, उसके बाद रिलायंस इंडस्ट्रीज और हीरो मोटोकॉर्प का स्थान रहा. मेटल इंडेक्स में गिरावट में हिंडाल्को और जेएसडब्ल्यू स्टील का योगदान रहा.
दिसंबर-
यह फिर से कई उतार-चढ़ाव के साथ उतार-चढ़ाव भरा रहा. सेंसेक्स 721 अंक उछला और फिर से 60,000 अंक का दावा करते हुए 60,566 पर बंद हुआ. इसी तरह निफ्टी 207 अंकों की बढ़त के साथ 18,000 के ऊपर जाकर 18,014 पर बंद हुआ.
भारतीय शेयर बाजार 26 दिसंबर को मजबूत रहा क्योंकि सेंसेक्स 60,500 से ऊपर और निफ्टी 18,000 अंक से ऊपर बंद हुआ. एसबीआई, इंडसइंड बैंक और हिंडाल्को में उछाल; Divi's Lab, Cipla, और Dr Reddy's को घसीटा गया. पीएसयू बैंक, मेटल, मीडिया और रियल्टी में बढ़त, जबकि फार्मा कमजोर रहा.
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टेक्नोलॉजी, डेटा सेंटर और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) में बढ़ते निवेश से राज्य को मिला फायदा
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
कर्नाटक में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है. वित्त वर्ष 2025-26 में राज्य ने 13 अरब डॉलर का FDI इक्विटी निवेश आकर्षित किया, जो पिछले साल की तुलना में करीब दोगुना है. टेक्नोलॉजी सेक्टर, डेटा सेंटर और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) में बढ़ते निवेश ने राज्य में विदेशी पूंजी प्रवाह को मजबूत किया है.
टेक और GCC विस्तार से बढ़ा निवेश
कर्नाटक में निवेश बढ़ने की सबसे बड़ी वजह डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की बढ़ती मांग और वैश्विक टेक कंपनियों द्वारा अपने ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) का विस्तार करना रहा है. राज्य के मजबूत टेक इकोसिस्टम, कुशल मानव संसाधन और आईटी सेक्टर में लंबे समय से बनी पकड़ ने विदेशी कंपनियों को आकर्षित किया है.
टेक्नोलॉजी और इससे जुड़े क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर विदेशी निवेश आने से कर्नाटक देश के सबसे तेजी से उभरते निवेश केंद्रों में शामिल हो गया है.
महाराष्ट्र अब भी सबसे बड़ा FDI प्राप्तकर्ता
हालांकि, FDI आकर्षित करने के मामले में महाराष्ट्र अब भी देश में शीर्ष स्थान पर बना हुआ है. लेकिन वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान राज्य में विदेशी निवेश प्रवाह में गिरावट दर्ज की गई है. इसके उलट कर्नाटक ने तेज वृद्धि दर्ज करते हुए निवेश के लिहाज से अपनी स्थिति और मजबूत की है.
GCC विस्तार से रोजगार के नए अवसर
विशेषज्ञों के मुताबिक, कर्नाटक में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) का लगातार विस्तार आने वाले समय में निवेश और रोजगार दोनों को बढ़ावा देगा. बहुराष्ट्रीय कंपनियां भारत में अपने रिसर्च, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन केंद्रों का विस्तार कर रही हैं, जिसका सबसे ज्यादा फायदा कर्नाटक जैसे टेक हब को मिल रहा है.
कर्नाटक की यह बढ़त भारत के FDI परिदृश्य में राज्य की बढ़ती भूमिका को दर्शाती है और इसे देश के प्रमुख निवेश गंतव्यों में और मजबूत स्थिति प्रदान करती है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को जारी एक मेमोरेंडम में कहा कि व्यापार प्रतिनिधि की सलाह के बाद उन देशों से आने वाले सामान पर 10% शुल्क लगाया जाएगा, जिन्होंने जबरन मजदूरी से जुड़े प्रतिबंधों को लागू करने की दिशा में कदम उठाए हैं.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
अमेरिका ने भारत को टैरिफ मोर्चे पर राहत दी है. अमेरिकी प्रशासन ने भारत समेत 17 देशों से आयात होने वाले सामान पर 10% शुल्क लगाने का फैसला किया है, जबकि पहले भारत पर 12.5% टैरिफ लगाने का प्रस्ताव था. यह राहत भारत की ओर से जबरन मजदूरी (Forced Labour) से तैयार किए गए सामान के आयात पर रोक लगाने के लिए विदेश व्यापार नीति में किए गए बदलाव के बाद मिली है.
भारत समेत 17 देशों पर 10% टैरिफ
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को जारी एक मेमोरेंडम में कहा कि व्यापार प्रतिनिधि की सलाह के बाद उन देशों से आने वाले सामान पर 10% शुल्क लगाया जाएगा, जिन्होंने जबरन मजदूरी से जुड़े प्रतिबंधों को लागू करने की दिशा में कदम उठाए हैं.
अमेरिका ने ट्रेड एक्ट 1974 की धारा 301 के तहत 60 देशों पर नए आयात शुल्क लगाने का फैसला किया है. इनमें से भारत, कनाडा, ब्रिटेन, बांग्लादेश और पाकिस्तान समेत 17 देशों पर 10% टैरिफ लगाया गया है, जबकि बाकी 43 देशों पर 12.5% शुल्क लागू होगा.
भारत ने बदली थी विदेश व्यापार नीति
अमेरिकी प्रशासन ने अपने फैसले में भारत के उस कदम का जिक्र किया है, जिसमें नई दिल्ली ने 14 जून को विदेश व्यापार नीति में संशोधन कर जबरन मजदूरी से बने सामान के आयात पर रोक लगाने का प्रावधान किया था. अमेरिका का कहना है कि इस तरह के नियम लागू करने से वैश्विक स्तर पर श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा होगी और व्यापार में असमानता को कम करने में मदद मिलेगी.
किन सामानों पर नहीं लगेगा शुल्क?
अमेरिका ने कुछ उत्पादों और कच्चे माल को नए शुल्क से छूट दी है. ऐसे कच्चे माल जिन पर टैरिफ लगाने से अमेरिकी घरेलू आपूर्ति प्रभावित हो सकती है, उन्हें शुल्क के दायरे से बाहर रखा गया है. इसके अलावा ऐसे उत्पाद, जिनका अमेरिका में पर्याप्त उत्पादन संभव नहीं है या जिनसे अर्थव्यवस्था पर व्यापक असर पड़ सकता है, उन्हें भी छूट दी गई है.
अमेरिका-भारत व्यापार पर असर
अमेरिका भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार और भारतीय निर्यात का सबसे बड़ा बाजार है. वाणिज्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 2025 में दोनों देशों के बीच वस्तुओं का द्विपक्षीय व्यापार करीब 141 अरब डॉलर रहा था. इसमें भारत का निर्यात लगभग 87.3 अरब डॉलर था.
विशेषज्ञों का मानना है कि 12.5% से घटाकर 10% किया गया टैरिफ प्रतिशत के लिहाज से भले ही छोटा बदलाव है, लेकिन यह भारत-अमेरिका आर्थिक संबंधों के लिए सकारात्मक संकेत है.
व्यापार वार्ता के बीच आया फैसला
भारत ने अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (USTR) की ओर से शुरू की गई दोनों जांचों का विरोध किया था. भारत का कहना है कि इन मुद्दों पर दोनों देशों के बीच चल रही द्विपक्षीय व्यापार समझौते की बातचीत के तहत चर्चा की जा सकती है.
उद्योग विशेषज्ञों के मुताबिक, टैरिफ में यह कटौती दिखाती है कि अमेरिका व्यापार नियमों को लागू करने के साथ-साथ भारत के साथ रणनीतिक आर्थिक साझेदारी को भी संतुलित रखना चाहता है.
Amazon CEO पद छोड़ने के बाद दोबारा ऑपरेशनल रोल में लौटे बेजोस, इंडस्ट्रियल AI स्टार्टअप बना मुख्य फोकस
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
अमेरिकी कारोबारी और Amazon के संस्थापक जेफ बेजोस ने कहा है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में हो रही तेज प्रगति ने उन्हें दोबारा सक्रिय नेतृत्व की भूमिका में लौटने के लिए प्रेरित किया. Amazon के CEO पद से हटने के कुछ साल बाद बेजोस अब इंडस्ट्रियल AI स्टार्टअप Prometheus पर अपना ज्यादा समय दे रहे हैं. उनका मानना है कि AI इंजीनियरिंग और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में बड़ा बदलाव ला रहा है, जिससे खुद को इससे दूर रखना मुश्किल था.
Prometheus पर बेजोस का मुख्य फोकस
मीडिया से बातचीत में जेफ बेजोस ने बताया कि वह अब AI स्टार्टअप Prometheus को को-CEO विक बजाज के साथ मिलकर लीड कर रहे हैं. इसके अलावा वह Amazon के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन और स्पेस कंपनी Blue Origin की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं.
बेजोस ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जिस तेजी से इंडस्ट्री को बदल रहा है, उसे देखते हुए वह "सिर्फ दर्शक बनकर नहीं रह सकते थे". उन्होंने बताया कि शुरुआत में उन्होंने Prometheus में निवेशक के तौर पर निवेश किया था, लेकिन बाद में कंपनी में सक्रिय ऑपरेशनल भूमिका संभाल ली.
क्या करती है Prometheus?
Prometheus ऐसे AI मॉडल विकसित कर रही है, जो इंजीनियरों को फिजिकल प्रोडक्ट्स के डिजाइन, टेस्टिंग और मैन्युफैक्चरिंग को ज्यादा तेज और प्रभावी बनाने में मदद कर सकें. कंपनी का फोकस उपभोक्ताओं के लिए बनाए जाने वाले AI चैटबॉट और असिस्टेंट से अलग है.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, Prometheus ने हाल ही में नई फंडिंग जुटाई है और कंपनी का वैल्यूएशन करीब 41 अरब डॉलर आंका गया है. यह इंडस्ट्रियल AI में निवेशकों की बढ़ती रुचि को दिखाता है.
तेजी से बढ़ रहा है इंडस्ट्रियल AI बाजार
इंडस्ट्रियल AI अब AI इकोसिस्टम के सबसे तेजी से बढ़ते क्षेत्रों में शामिल हो रहा है. कंपनियां इसका इस्तेमाल प्रोडक्ट डिजाइन, इंजीनियरिंग, सिमुलेशन, मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई चेन को बेहतर बनाने के लिए कर रही हैं.
कंज्यूमर AI एप्लिकेशन की तुलना में इंडस्ट्रियल AI का उद्देश्य एयरोस्पेस, ऑटोमोबाइल और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में उत्पादकता बढ़ाना और नए उत्पादों के विकास की प्रक्रिया को तेज करना है.
Amazon भी बढ़ा रही AI पर पकड़
Amazon ने भी CEO एंडी जेसी के नेतृत्व में अपनी AI रणनीति को मजबूत किया है. कंपनी ने AI इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार किया है और Nova नाम से फाउंडेशन AI मॉडल विकसित किए हैं. इसके अलावा Amazon ने Amazon Bedrock प्लेटफॉर्म को मजबूत किया है और AI स्टार्टअप Anthropic में अरबों डॉलर का निवेश किया है. बेजोस ने कहा कि वह Amazon की लंबी अवधि की AI रणनीति का समर्थन जारी रखेंगे, हालांकि उनका मौजूदा फोकस Prometheus पर है.
AI इंसानों की जगह नहीं, क्षमता बढ़ाएगा: बेजोस
जेफ बेजोस का मानना है कि AI इंसानों को पूरी तरह बदलने के बजाय उनकी क्षमताओं को बढ़ाने का काम करेगा. उन्होंने कहा कि AI इंजीनियरिंग और प्रोडक्ट डेवलपमेंट में आने वाली बाधाओं को दूर कर उत्पादकता बढ़ा सकता है.
उनके अनुसार, AI की मदद से इंजीनियर नए विचारों और इनोवेशन पर ज्यादा ध्यान दे पाएंगे और फिजिकल प्रोडक्ट्स की डिजाइनिंग और मैन्युफैक्चरिंग प्रक्रिया को तेजी से पूरा किया जा सकेगा.
AI की रेस में बढ़ रही है प्रतिस्पर्धा
बेजोस की सक्रिय भूमिका में वापसी ऐसे समय में हुई है जब टेक कंपनियां और स्टार्टअप AI के क्षेत्र में तेजी से निवेश कर रहे हैं. जहां अब तक जनरेटिव AI असिस्टेंट पर ज्यादा ध्यान केंद्रित रहा है, वहीं इंडस्ट्रियल AI में भी निवेशकों की दिलचस्पी तेजी से बढ़ रही है.
जेफ बेजोस का दोबारा ऑपरेशनल भूमिका में आना इस बात का संकेत है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब सिलिकॉन वैली के बड़े उद्यमियों और निवेशकों की प्राथमिकताओं को बदल रहा है. कंपनियां अब कंज्यूमर AI के साथ-साथ एंटरप्राइज और इंडस्ट्रियल AI के भविष्य पर भी बड़ा दांव लगा रही हैं.
इस फैसले से Amazon और Flipkart जैसी कंपनियों को बड़ा फायदा मिलेगा. हालांकि, घरेलू बाजार में इन्वेंटरी आधारित ई-कॉमर्स मॉडल पर विदेशी निवेश की पाबंदी पहले की तरह जारी रहेगी.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
केंद्र सरकार ने विदेशी निवेश (FDI) से जुड़ी ई-कॉमर्स नीति में बड़ा बदलाव करते हुए विदेशी स्वामित्व वाली कंपनियों को भारत में बने उत्पादों के निर्यात के लिए इन्वेंटरी (स्टॉक) रखने की अनुमति दे दी है. इस फैसले से Amazon और Walmart के स्वामित्व वाली Flipkart जैसी कंपनियों को बड़ा फायदा मिलेगा. हालांकि, घरेलू बाजार में इन्वेंटरी आधारित ई-कॉमर्स मॉडल पर विदेशी निवेश की पाबंदी पहले की तरह जारी रहेगी.
निर्यात के लिए इन्वेंटरी मॉडल को मिली मंजूरी
उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) ने प्रेस नोट-3 (2026 सीरीज) जारी कर भारत में निर्मित और उत्पादित वस्तुओं के निर्यात के लिए इन्वेंटरी आधारित ई-कॉमर्स कंपनियों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की अनुमति दे दी है. विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह फैसला विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के तहत अधिसूचना जारी होने की तारीख से प्रभावी होगा.
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार सरकार के इस फैसले का स्वागत करते हुए Amazon के प्रवक्ता ने कहा कि नई नीति भारतीय कारोबारियों, खासकर छोटे शहरों के निर्माताओं और MSME को वैश्विक बाजारों तक पहुंचाने में मदद करेगी. कंपनी ने कहा कि वह 2030 तक भारत से 80 अरब डॉलर के संचयी निर्यात के लक्ष्य की दिशा में काम कर रही है और यह फैसला 'ब्रांड इंडिया' को वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाएगा.
पहले क्या था नियम?
अब तक सरकार मार्केटप्लेस आधारित ई-कॉमर्स मॉडल में 100% FDI की अनुमति देती थी, लेकिन इन्वेंटरी आधारित मॉडल में विदेशी निवेश पर रोक थी. नए फैसले के बाद केवल भारत में बने सामान के निर्यात के लिए इन्वेंटरी आधारित मॉडल में FDI की मंजूरी दी गई है. हालांकि, घरेलू बाजार के लिए विदेशी कंपनियां अब भी इन्वेंटरी मॉडल के तहत कारोबार नहीं कर सकेंगी.
क्या होता है इन्वेंटरी और मार्केटप्लेस मॉडल?
इन्वेंटरी आधारित मॉडल में ई-कॉमर्स कंपनी खुद सामान का स्टॉक रखती है और सीधे ग्राहकों को बेचती है. वहीं, मार्केटप्लेस मॉडल में कंपनी केवल एक डिजिटल प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराती है, जहां विक्रेता और खरीदार आपस में लेनदेन करते हैं. इस मॉडल में कंपनी खुद स्टॉक नहीं रखती.
विशेषज्ञों के अनुसार, सरकार की यह अधिसूचना लंबे समय से चली आ रही नीतिगत अस्पष्टताओं को दूर करती है. इससे ई-कॉमर्स कंपनियों को निर्यात कारोबार में अधिक स्पष्टता मिलेगी और भारत के विनिर्माण तथा निर्यात क्षेत्र को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है.
गुरुवार को सेंसेक्स 363.66 अंक यानी 0.47% गिरकर 76,391.39 अंक पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 126.65 अंक यानी 0.53% टूटकर 23,869.60 अंक पर आ गया.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
घरेलू शेयर बाजार में लगातार चार कारोबारी सत्रों की गिरावट के बाद आज निवेशकों की नजर बाजार की शुरुआती चाल पर रहेगी. पश्चिम एशिया में जारी तनाव, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, विदेशी निवेशकों (FII) की गतिविधियां, तिमाही नतीजे और कई कंपनियों से जुड़ी अहम घोषणाएं आज बाजार की दिशा तय कर सकती हैं. पिछले कारोबारी सत्र में सेंसेक्स 363.66 अंक और निफ्टी 126.65 अंक की गिरावट के साथ बंद हुए थे.
लगातार चौथे दिन गिरावट के साथ बंद हुआ था बाजार
गुरुवार को कारोबार के दौरान पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल का असर घरेलू शेयर बाजार पर साफ दिखा. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स 363.66 अंक यानी 0.47% गिरकर 76,391.39 अंक पर बंद हुआ, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) निफ्टी 126.65 अंक यानी 0.53% टूटकर 23,869.60 अंक पर आ गया. कारोबार के दौरान सेंसेक्स 400 अंक से अधिक और निफ्टी 23,900 के नीचे तक फिसल गया था.
इन ब्लूचिप शेयरों में रही सबसे ज्यादा बिकवाली
सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 17 गिरावट के साथ बंद हुए. सबसे ज्यादा दबाव अदाणी पोर्ट्स पर रहा, जिसके शेयर 2.26% टूट गए. इसके अलावा बजाज फाइनेंस, इंडिगो, एक्सिस बैंक, रिलायंस इंडस्ट्रीज, टाटा स्टील, एसबीआई, एशियन पेंट्स और मारुति सुजुकी में भी 1% से अधिक की गिरावट दर्ज की गई. दूसरी ओर महिंद्रा एंड महिंद्रा, टीसीएस, इटरनल, एचसीएल टेक, बजाज फिनसर्व और कोटक महिंद्रा बैंक के शेयर बढ़त के साथ बंद हुए.
सेक्टोरल इंडेक्स में कहां रहा सबसे ज्यादा दबाव?
सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो निफ्टी रियल्टी, निफ्टी केमिकल और निफ्टी ऑयल एंड गैस सबसे ज्यादा दबाव में रहे. वहीं निफ्टी मीडिया और निफ्टी ऑटो इंडेक्स ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया. इससे साफ है कि निवेशकों ने चुनिंदा सेक्टर्स में खरीदारी जारी रखी, जबकि जोखिम वाले सेक्टर्स में मुनाफावसूली देखने को मिली.
आज इन शेयरों पर रहेगी सबसे ज्यादा नजर
आज के कारोबार में कई कंपनियों से जुड़ी अहम खबरों के चलते उनके शेयर निवेशकों के फोकस में रहेंगे. गांधार ऑयल रिफाइनरी इंडिया में सोसाइटी जेनरल ने 19.22 करोड़ रुपये में 0.7% हिस्सेदारी खरीदी है. हिंदाल्को इंडस्ट्रीज ने अगले तीन वर्षों में भारत में 50,000 करोड़ रुपये के निवेश की योजना का ऐलान किया है. इंडिगो को जून तिमाही में 238 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा हुआ है, जबकि साइएंट का तिमाही शुद्ध लाभ 90% बढ़कर 104 करोड़ रुपये पहुंच गया है.
इसके अलावा लॉजिस्टिक्स कंपनी शैडोफैक्स टेक्नोलॉजीज में Eight Roads, Flipkart और IMM India Fund 9.08% तक हिस्सेदारी बेचने की तैयारी में हैं. ओसवाल पंप्स में VQ FasterCap Fund ने 0.52% हिस्सेदारी बेची है. ई-कॉमर्स कंपनी मीशो का तिमाही घाटा घटकर 133 करोड़ रुपये रह गया है. आईटी कंपनी कोफोर्ज ने अपना नया AI ऑपरेटिंग सिस्टम 'Coforge Nuuron' लॉन्च किया है. वहीं, स्विगी के बोर्ड ने विदेशी हिस्सेदारी की सीमा 49.5% तक तय करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है.
आज बाजार की चाल किन फैक्टर्स से तय होगी?
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक आज निवेशकों की नजर पश्चिम एशिया में जारी तनाव, कच्चे तेल की कीमतों, विदेशी निवेशकों की खरीद-बिक्री, वैश्विक बाजारों के संकेत, रुपये की चाल और पहली तिमाही के कॉरपोरेट नतीजों पर रहेगी. यदि अंतरराष्ट्रीय बाजारों से सकारात्मक संकेत मिलते हैं और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आती है तो घरेलू बाजार में रिकवरी देखने को मिल सकती है. हालांकि, भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने या क्रूड ऑयल में और तेजी आने की स्थिति में बाजार पर दबाव बना रह सकता है.
(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)
कंपनी के अनुसार, यह फंड जुटाव उसके इंटीग्रेटेड बिजनेस मॉडल, एग्री-सोलर माउंटिंग स्ट्रक्चर में विशेषज्ञता, EPC और ट्रांसमिशन कारोबार के विस्तार तथा भारत के लंबी अवधि के रिन्यूएबल एनर्जी और ग्रिड आधुनिकीकरण अभियान में उसकी भूमिका पर निवेशकों के भरोसे को दर्शाता है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
जयपुर. रिन्यूएबल एनर्जी, ट्रांसमिशन और ऊर्जा दक्षता क्षेत्र में काम करने वाली Raydean Enterprises Limited ने इक्विटी और डेट के मिश्रण से ₹200 करोड़ की पूंजी जुटाई है. कंपनी ने बताया कि इस फंडिंग में संस्थागत निवेशकों, फैमिली ऑफिस और हाई नेटवर्थ इंडिविजुअल्स (HNIs) ने इक्विटी के जरिए भागीदारी की, जबकि डेट फंडिंग प्रमुख राष्ट्रीयकृत बैंकों से जुटाई गई है.
कंपनी के अनुसार, यह फंड जुटाव उसके इंटीग्रेटेड बिजनेस मॉडल, एग्री-सोलर माउंटिंग स्ट्रक्चर में विशेषज्ञता, EPC और ट्रांसमिशन कारोबार के विस्तार तथा भारत के लंबी अवधि के रिन्यूएबल एनर्जी और ग्रिड आधुनिकीकरण अभियान में उसकी भूमिका पर निवेशकों के भरोसे को दर्शाता है.
नए इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग प्लांट में होगा निवेश
Raydean Enterprises ने बताया कि जुटाई गई इक्विटी राशि का एक बड़ा हिस्सा नए पूरी तरह इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग प्लांट के विकास में लगाया जाएगा. इस प्लांट में माउंटिंग स्ट्रक्चर, सोलर ट्रैकर्स, ट्रांसमिशन टावर और अन्य फैब्रिकेशन उत्पादों को एक ही अत्याधुनिक परिसर में तैयार किया जाएगा.
इस सुविधा में इन-हाउस गैल्वनाइजेशन, ऑटोमेटेड फैब्रिकेशन लाइन और आधुनिक क्वालिटी कंट्रोल सिस्टम शामिल होंगे. कंपनी को उम्मीद है कि इससे लागत दक्षता बढ़ेगी, उत्पादन क्षमता में सुधार होगा और अधिक वैल्यू-एडेड सॉल्यूशंस उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी.
भारत के ऊर्जा बदलाव से बढ़ेंगे अवसर
कंपनी ने कहा कि भारत में रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर तेजी से विस्तार कर रहा है. सरकार की PM-KUSUM योजना, PM Surya Ghar रूफटॉप सोलर कार्यक्रम और ट्रांसमिशन व डिस्ट्रीब्यूशन इंफ्रास्ट्रक्चर में बढ़ते निवेश से सोलर वैल्यू चेन में लंबे समय तक मांग बनी रहने की उम्मीद है.
इसके अलावा, सोलर ट्रैकर्स का बढ़ता इस्तेमाल और ग्रामीण व अर्ध-शहरी क्षेत्रों में ऊर्जा दक्ष उत्पादों की बढ़ती मांग भी कंपनी के लिए नए अवसर पैदा कर रही है. Raydean फिलहाल राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में परियोजनाओं पर काम कर रही है.
MD ने कहा- ऊर्जा बदलाव में निभाएंगे अहम भूमिका
Raydean Enterprises Limited के मैनेजिंग डायरेक्टर समर्थ दक्षिनी ने कहा, "यह फंड जुटाव Raydean की यात्रा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है. कंपनी एक स्ट्रक्चर मैन्युफैक्चरर से विकसित होकर अब भारत की रिन्यूएबल, ट्रांसमिशन और कंजम्पशन वैल्यू चेन को सपोर्ट करने वाली इंटीग्रेटेड एनर्जी इंजीनियरिंग प्लेटफॉर्म बन चुकी है."
उन्होंने कहा कि भारत ऊर्जा बदलाव और ग्रिड आधुनिकीकरण के कई दशकों के चक्र के शुरुआती दौर में है और Raydean अपनी मजबूत मैन्युफैक्चरिंग क्षमता और नए समाधानों के जरिए इस अवसर का लाभ उठाने के लिए तैयार है. इस लेनदेन में Kumbhat Investment Banking ने Raydean Enterprises Limited के एक्सक्लूसिव फाइनेंशियल एडवाइजर के रूप में काम किया.
NSDL के सेक्टर आधारित आंकड़ों के अनुसार, जुलाई के पहले पखवाड़े में विदेशी निवेशकों ने सबसे ज्यादा निवेश कंज्यूमर सर्विसेज सेक्टर में किया. इस सेक्टर में ₹7,361 करोड़ का विदेशी निवेश आया.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने भारतीय शेयर बाजार में एक बार फिर भरोसा दिखाया है. नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (NSDL) के आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई में अब तक विदेशी निवेशकों ने भारतीय इक्विटी बाजार में शुद्ध रूप से ₹17,227 करोड़ का निवेश किया है. इसके साथ ही FPIs की लगातार चार महीने से जारी बिकवाली का सिलसिला खत्म हो गया है.
22 जुलाई तक के आंकड़ों के अनुसार, जुलाई में हुआ निवेश इस साल का केवल दूसरा महीना है, जब विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाजार में नेट खरीदार बने हैं. इससे पहले फरवरी में FPIs ने ₹22,615 करोड़ का निवेश किया था. हालांकि, जुलाई में खरीदारी के बावजूद साल 2026 में विदेशी निवेशक अब भी कुल मिलाकर शुद्ध विक्रेता बने हुए हैं. 22 जुलाई तक भारतीय इक्विटी बाजार से FPIs की कुल निकासी ₹2.57 लाख करोड़ रही है. साल की शुरुआत में भारी बिकवाली के कारण यह आंकड़ा अभी भी ऊंचे स्तर पर बना हुआ है.
मार्च से जून तक जारी रही भारी बिकवाली
इससे पहले विदेशी निवेशकों ने लगातार चार महीनों तक भारतीय बाजार से पैसा निकाला था. आंकड़ों के मुताबिक, जून में FPIs ने ₹49,340 करोड़, मई में ₹32,963 करोड़, अप्रैल में ₹60,847 करोड़ और मार्च में ₹1.18 लाख करोड़ की निकासी की थी.
वहीं, जनवरी में विदेशी निवेशकों ने ₹35,962 करोड़ की बिकवाली की थी. इसके बाद फरवरी में वे नेट खरीदार बने थे, लेकिन मार्च से जून तक फिर से बिकवाली का दबाव देखने को मिला.
कंज्यूमर सर्विसेज और मेटल सेक्टर में सबसे ज्यादा निवेश
NSDL के सेक्टर आधारित आंकड़ों के अनुसार, जुलाई के पहले पखवाड़े में विदेशी निवेशकों ने सबसे ज्यादा निवेश कंज्यूमर सर्विसेज सेक्टर में किया. इस सेक्टर में ₹7,361 करोड़ का विदेशी निवेश आया.
इसके बाद मेटल्स और माइनिंग सेक्टर में ₹5,993 करोड़ और हेल्थकेयर सेक्टर में ₹4,101 करोड़ का निवेश हुआ. जुलाई के पहले दो हफ्तों में विदेशी निवेशक लगातार दूसरी पखवाड़े में नेट खरीदार रहे, जो फरवरी की शुरुआत के बाद सबसे मजबूत खरीदारी का दौर रहा. हालांकि, ऑटोमोबाइल, कैपिटल गुड्स और पावर सेक्टर में विदेशी निवेशकों की ओर से अब भी शुद्ध निकासी जारी रही.
विदेशी निवेश में सुधार के संकेत
जुलाई में FPIs की वापसी भारतीय इक्विटी बाजार के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है. चार महीने की लगातार बिकवाली के बाद विदेशी निवेशकों की खरीदारी से बाजार में सेंटीमेंट को मजबूती मिली है. हालांकि, पूरे साल के आंकड़े अभी भी नकारात्मक बने हुए हैं और विदेशी निवेशकों की कुल हिस्सेदारी में सुधार आने में समय लग सकता है.
कंपनी के अनुसार, देश के लगभग 40% क्रिप्टो यूजर्स टियर-2 और टियर-3 शहरों से आते हैं. इसी को ध्यान में रखते हुए इस प्लेटफॉर्म को अलग-अलग भाषाओं और विभिन्न पृष्ठभूमि के लोगों के लिए सुलभ बनाया गया है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
वर्चुअल डिजिटल एसेट (VDA) ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म BitDelta India ने भारत में क्रिप्टो निवेशकों के लिए पहला स्ट्रक्चर्ड लर्निंग और सर्टिफिकेशन इकोसिस्टम 'CrypTution' लॉन्च किया है. यह प्लेटफॉर्म निवेशकों को क्रिप्टो बाजार में उतरने से पहले ब्लॉकचेन और डिजिटल एसेट्स की शिक्षा, वर्चुअल ट्रेडिंग का व्यावहारिक अनुभव और योग्यता आधारित सर्टिफिकेशन उपलब्ध कराएगा. इस पहल के लिए कंपनी ने अमेरिका एकेडमी ऑफ फाइनेंशियल मैनेजमेंट (AAFM) के साथ साझेदारी की है.
कंपनी का कहना है कि आज क्रिप्टो से जुड़ी जानकारी इंटरनेट पर आसानी से उपलब्ध है, लेकिन संरचित और भरोसेमंद शिक्षा की कमी के कारण अधिकांश निवेशक अधूरी या बिखरी हुई जानकारी पर निर्भर रहते हैं. CrypTution इसी अंतर को भरने का प्रयास करेगा. इसमें निवेशकों को वास्तविक निवेश से पहले प्रशिक्षण, वर्चुअल मार्केट सिमुलेशन और योग्यता आधारित सर्टिफिकेशन की सुविधा मिलेगी.
जिम्मेदार और सुरक्षित निवेश संस्कृति विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम सा
BitDelta India के मुताबिक, देश के लगभग 40% क्रिप्टो यूजर्स टियर-2 और टियर-3 शहरों से आते हैं. इसी को ध्यान में रखते हुए इस प्लेटफॉर्म को अलग-अलग भाषाओं और विभिन्न पृष्ठभूमि के लोगों के लिए सुलभ बनाया गया है. BitDelta India के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) विकास एम. सचदेवा ने कहा कि जिस तरह म्यूचुअल फंड और शेयर बाजार में निवेशक शिक्षा ने लोगों की भागीदारी बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई, उसी तरह क्रिप्टो सेक्टर को भी व्यवस्थित शिक्षा की जरूरत है. उन्होंने कहा कि फिलहाल भारत में VDA के प्रति जागरूकता 30% से कम है और हर पांच में से एक सक्रिय निवेशक मानता है कि वह अभी भी इस बाजार को समझने की प्रक्रिया में है. ऐसे में CrypTution जिम्मेदार और सुरक्षित निवेश संस्कृति विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा.
तीन चरणों में होगा प्रशिक्षण
CrypTution का लर्निंग मॉडल 'पढ़ो, सीखो और बढ़ो' के तीन चरणों पर आधारित है.
1. 'पढ़ो' चरण में ब्लॉकचेन, वर्चुअल डिजिटल एसेट्स, बाजार की बुनियादी समझ, सुरक्षा और जोखिम प्रबंधन की पढ़ाई कराई जाएगी.
2.'सीखो' चरण में प्रतिभागियों को बिना वास्तविक पैसा लगाए वर्चुअल मार्केट सिमुलेशन के जरिए ट्रेडिंग का व्यावहारिक अनुभव मिलेगा.
3. 'बढ़ो' चरण में सफल प्रतिभागियों को BitDelta India के प्लेटफॉर्म पर लाइव मार्केट ट्रेडिंग की दिशा में आगे बढ़ाया जाएगा.
AAFM India के साथ साझेदारी
CrypTution के 'पढ़ो' मॉड्यूल को American Academy of Financial Management (AAFM) India के सहयोग से तैयार किया गया है. AAFM India इस पहल में नॉलेज और एजुकेशन पार्टनर की भूमिका निभाएगा. संस्था को BFSI शिक्षा क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का अनुभव है और वह एक लाख से ज्यादा वित्तीय पेशेवरों को प्रशिक्षण दे चुकी है.
तीन सर्टिफिकेशन कोर्स
CrypTution के तहत अलग-अलग जरूरतों के अनुसार तीन सर्टिफिकेशन कोर्स शुरू किए गए हैं. इनमें शुरुआती निवेशकों के लिए 'Certified Virtual Asset Investor', वित्तीय सलाहकारों के लिए 'Certified Virtual Asset Practitioner' और एडवांस ट्रेडिंग, मार्केट एनालिसिस तथा जोखिम प्रबंधन सीखने के इच्छुक लोगों के लिए 'Certified Virtual Asset Trader' शामिल हैं.
कंपनी के अनुसार, CrypTution केवल सर्टिफिकेट देने तक सीमित नहीं रहेगा. इस प्लेटफॉर्म पर शिक्षार्थियों को वर्चुअल मार्केट सिमुलेशन, मार्केट इंटेलिजेंस, वेबिनार, विशेषज्ञों की मेंटरशिप, परीक्षाएं और कम्युनिटी नेटवर्किंग जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी. कंपनी का लक्ष्य भारत में वर्चुअल डिजिटल एसेट्स (VDA) के क्षेत्र में अधिक जागरूक, प्रशिक्षित और जिम्मेदार निवेशक तैयार करना है.
कंपनी जमीन अधिग्रहण, टरबाइन की आपूर्ति, बैलेंस ऑफ प्लांट (BoP), इंजीनियरिंग, निर्माण, कमीशनिंग और लंबे समय तक संचालन एवं रखरखाव (O&M) सहित पूरी EPC सेवाएं प्रदान करेगी.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
देश की सबसे बड़ी विंड एनर्जी कंपनी Suzlon Energy को Waaree Group की पहली विंड एनर्जी परियोजना के लिए 201.6 मेगावाट (MW) का बड़ा ऑर्डर मिला है. आंध्र प्रदेश में विकसित होने वाली इस परियोजना के तहत Suzlon अपने DevCo (डेवलपमेंट कंपनी) मॉडल पर जमीन अधिग्रहण, इंजीनियरिंग, खरीद, निर्माण (EPC), टरबाइन की स्थापना और संचालन एवं रखरखाव (O&M) तक की पूरी जिम्मेदारी संभालेगी. यह साझेदारी दोनों कंपनियों के लिए रिन्यूएबल एनर्जी क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण रणनीतिक कदम मानी जा रही है.
64 विंड टरबाइन लगाएगी Suzlon
इस परियोजना के तहत Suzlon अपनी S144 विंड टरबाइन जनरेटर (WTG) की 64 यूनिट लगाएगी. प्रत्येक टरबाइन की क्षमता 3.15 मेगावाट होगी. कंपनी जमीन अधिग्रहण, टरबाइन की आपूर्ति, बैलेंस ऑफ प्लांट (BoP), इंजीनियरिंग, निर्माण, कमीशनिंग और लंबे समय तक संचालन एवं रखरखाव (O&M) सहित पूरी EPC सेवाएं प्रदान करेगी.
DevCo मॉडल पर बढ़ रहा जोर
कंपनी के अनुसार, जैसे-जैसे रिन्यूएबल एनर्जी परियोजनाएं बड़ी और जटिल होती जा रही हैं, एंड-टू-एंड DevCo मॉडल की मांग भी बढ़ रही है. यह मॉडल परियोजनाओं के विकास से जुड़े जोखिम कम करने, समय पर निष्पादन और बड़े स्तर पर विस्तार में मदद करता है.
'दो अग्रणी कंपनियों का रणनीतिक गठजोड़'
Suzlon Group के वाइस चेयरमैन गिरीश तांती ने कहा कि यह साझेदारी रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे रिन्यूएबल एनर्जी क्षेत्र की दो प्रमुख कंपनियां एक साथ आई हैं. उनके मुताबिक, Waaree ने सोलर सेक्टर में और Suzlon ने विंड एनर्जी क्षेत्र में मजबूत पहचान बनाई है. अब दोनों कंपनियां ग्राहकों को एकीकृत (Integrated) रिन्यूएबल एनर्जी समाधान उपलब्ध कराने की दिशा में काम करेंगी, जहां अलग-अलग तकनीकों के बजाय समग्र समाधान की मांग बढ़ रही है.
Waaree ने विंड एनर्जी में रखा पहला कदम
Waaree Forever Energies के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) पवन अग्रवाल ने कहा कि कंपनी सोलर एनर्जी से आगे बढ़कर विविधीकृत रिन्यूएबल एनर्जी पोर्टफोलियो तैयार कर रही है. उन्होंने कहा कि आंध्र प्रदेश में 201.6 मेगावाट की यह विंड एनर्जी परियोजना कंपनी के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है और इससे भारत की बढ़ती स्वच्छ ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी.
Suzlon और Waaree की मजबूत मौजूदगी
करीब 33% बाजार हिस्सेदारी के साथ Suzlon भारत की सबसे बड़ी विंड एनर्जी कंपनी है. वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी का राजस्व 1.75 अरब डॉलर से अधिक रहा और 1 जून 2026 तक उसका मार्केट कैप 7.5 अरब डॉलर के पार पहुंच चुका था. कंपनी अब तक 17 देशों में लगभग 21.7 गीगावाट विंड एनर्जी क्षमता स्थापित कर चुकी है.
वहीं, 1990 में स्थापित Waaree Energies भारत की प्रमुख रिन्यूएबल एनर्जी कंपनियों में शामिल है. कंपनी की वैश्विक सोलर पीवी मॉड्यूल और सोलर सेल निर्माण क्षमता 22.77 गीगावाट है तथा उसका कारोबार भारत समेत 25 से अधिक देशों में फैला हुआ है.
वेस्ट एशिया तनाव और महंगे कच्चे तेल ने बिगाड़ा तेल कंपनियों का गणित, HPCL को ₹12,265 करोड़ और BPCL को ₹3,962 करोड़ का नुकसान
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
वेस्ट एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल का असर अब भारतीय तेल कंपनियों के वित्तीय नतीजों पर दिखाई देने लगा है. सरकारी तेल कंपनियां हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (HPCL) और भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (BPCL) को वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में भारी घाटा उठाना पड़ा है.
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बावजूद कंपनियों ने लंबे समय तक पेट्रोल, डीजल और LPG की कीमतों में बड़ा बदलाव नहीं किया, जिससे उन्हें लागत और बिक्री मूल्य के बीच भारी अंतर का सामना करना पड़ा. हालांकि, रिफाइनरी कारोबार से अच्छी कमाई हुई, लेकिन ईंधन बिक्री में हुए नुकसान ने पूरे मुनाफे को खत्म कर दिया.
HPCL को ₹12,265 करोड़ का घाटा
हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (HPCL) ने जून तिमाही में 12,265 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा दर्ज किया है. पिछले साल इसी अवधि में कंपनी को 4,111 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ था. कंपनी के मुख्य कारोबार (स्टैंडअलोन ऑपरेशंस) के आधार पर देखें तो HPCL को 11,526 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ, जबकि एक साल पहले इसी अवधि में कंपनी ने 4,371 करोड़ रुपये का लाभ कमाया था.
हालांकि, कंपनी की कुल आय में बढ़ोतरी दर्ज की गई. अप्रैल-जून तिमाही में HPCL की कुल आय बढ़कर 1.45 लाख करोड़ रुपये पहुंच गई, जो पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले करीब 21 प्रतिशत ज्यादा है. लेकिन कच्चे तेल की महंगाई और ईंधन बिक्री में दबाव के कारण आय बढ़ने के बावजूद कंपनी मुनाफे में नहीं आ सकी.
BPCL को 15 तिमाहियों बाद हुआ नुकसान
भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (BPCL) भी पहली तिमाही में घाटे में रही. कंपनी को अप्रैल-जून 2026 तिमाही में 3,962 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ. यह BPCL का करीब 15 तिमाहियों के बाद पहला घाटा है. पिछले साल इसी तिमाही में कंपनी ने 6,124 करोड़ रुपये का मुनाफा दर्ज किया था.
BPCL की कुल आय बढ़कर 1.59 लाख करोड़ रुपये हो गई, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 1.35 लाख करोड़ रुपये था. यानी कंपनी का कारोबार बढ़ा, लेकिन लागत बढ़ने और मार्जिन घटने के कारण मुनाफा घाटे में बदल गया.
क्यों हुआ इतना बड़ा नुकसान?
तेल कंपनियों के घाटे की सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल रही. वेस्ट एशिया में तनाव और ईरान से जुड़े घटनाक्रमों के कारण कच्चे तेल के दामों में भारी तेजी आई.
आमतौर पर कच्चा तेल महंगा होने पर पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ाई जाती हैं, ताकि कंपनियां बढ़ी हुई लागत की भरपाई कर सकें. लेकिन इस बार सरकारी तेल कंपनियों ने करीब ढाई महीने तक पेट्रोल और डीजल के दामों में बदलाव नहीं किया.
बाद में मई के दूसरे हिस्से में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 7.50 रुपये प्रति लीटर से ज्यादा की बढ़ोतरी की गई. साथ ही घरेलू LPG सिलेंडर की कीमतों में भी बदलाव हुआ, लेकिन तब तक कंपनियों को बड़ा नुकसान हो चुका था.
आगे भी बनी रह सकती है चुनौती
तेल कंपनियों के लिए आने वाली तिमाहियां भी चुनौतीपूर्ण रह सकती हैं, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी है. अगर भू-राजनीतिक तनाव लंबे समय तक बना रहता है तो ईंधन कीमतों, रिफाइनिंग मार्जिन और कंपनियों के मुनाफे पर इसका असर जारी रह सकता है.