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सेबी चीफ के चक्कर में घिरी Wockhardt की आई सफाई, जानिए आरोपों पर क्या बोली कंपनी
कांग्रेस ने सेबी चीफ माधबी पुरी बुच पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं. इन आरोपों की जद में वोकहार्ट की सहयोगी कंपनी कैरोल इंफो सर्विस भी आ गई है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
सेबी चीफ माधबी पुरी बुच (Madhabi Puri Buch) को लेकर खबरों आई कंपनी वोकहार्ट (Wockhardt) ने कांग्रेस के आरोपों का जवाब देने का प्रयास किया है. प्रयास इसलिए कि उसने पूरी बात नहीं बताई है. कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि वोकहार्ट की सहयोगी कंपनी कैरोल इंफो सर्विस ने सेबी की चेयरपर्सन माधबी पुरी बुच को किराए के रूप में एक बड़ी रकम चुकाई है.
क्या लगे हैं आरोप?
कांग्रेस के मीडिया एवं पब्लिसिटी डिपार्टमेंट के हेड पवन खेड़ा ने 6 सितंबर को आरोप लगायाकि माधबी पुरी बुच 2018 से 2024 के बीच पहले सेबी की होल-टाइम सदस्य और बाद में चेयरपर्सन रही हैं. इस दौरान उन्हें कैरोल इंफो सर्विसेज से किराए के रूप में 2.16 करोड़ रुपए मिले. बुच 2018 में सेबी का होल-टाइम सदस्य बनी थीं. उसके बाद उन्होंने अपनी एक प्रॉपर्टी किराए पर दी थी. 2018-19 के दौरान उन्हें इससे 7 लाख रुपए किराया मिला.2019-20 में 36 लाख और इस साल किराए की रकम बढ़कर 46 लाख रुपए हो गई.
आरोप बेबुनियाद
इसके जवाब में वोकहार्ट ने कहा कि कांग्रेस के आरोप बेबुनियाद हैं. उसके खिलाफ चल रही सेबी की जांच से इस मामले का कोई संबंध नहीं है. कंपनी ने कहा कि उसने सभी कानूनों का पालन किया है और वो हर कानून का पूरा ध्यान रखती है. हालांकि, वोकहार्ट ने यह स्पष्ट नहीं किया कि क्या सेबी प्रमुख ने उसे कोई प्रॉपर्टी किराए पर दी थी या नहीं. यदि कंपनी सीधे शब्दों में कहती कि उसने बच से कोई प्रॉपर्टी रेंट पर नहीं ली और इस संबंध में सबूत पेश करती तो आरोपों की धार अपने-आप कुंद हो जाती.
कई मामलों में जांच
कांग्रेस लीडर पवन खेड़ा का कहना है कि बुच ने जिस कंपनी को अपनी पॉपर्टी किराए पर दी, उसका नाम कैरोल इंफो सर्विस है, जो वोकहार्ट का हिस्सा है. वोकहार्ट वही कंपनी है, जिसके खिलाफ कई मामलों की जांच बाजार नियामक सेबी कर रहा है. इसमें 2023 के दौरान इनसाइडर ट्रेडिंग का मामला भी शामिल है. गौरतलब है कि हिंडनबर्ग की रिपोर्ट के बाद से अब तक सेबी चीफ माधबी पुरी बुच को लेकर कई खुलासे हो चुके हैं. उनके अपने कर्मचारी भी उनकी कार्यशैली से नाखुश हैं.
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