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आरोपों की बारिश से बचकर कब तक पद पर बनी रहेंगी SEBI प्रमुख माधबी पुरी बुच?
सेबी प्रमुख माधबी पुरी बुच के लिए अब आगे की राह बेहद मुश्किल हो गई है. जानकारों का मानना है कि उनसे इस्तीफा लिया जा सकता है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
बाजार नियामक सेबी (SEBI) की प्रमुख माधबी पुरी बुच चारों तरफ से घिर गई हैं. हिंडनबर्ग, कांग्रेस के बाद एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन डॉक्टर सुभाष चंद्रा ने भी बुच पर निशाना साधा है. ऐसे में अब उनके लिए पद पर बने रहना मुश्किल दिखाई पड़ता है. हिंडनबर्ग के आरोपों को सेबी और खुद बुच ने खारिज कर दिया था. लेकिन कांग्रेस और चंद्रा के आरोपों को आसानी से खारिज करना उनके लिए आसान नहीं होगा. साथ ही सरकार पर भी इस मुद्दे को लेकर दबाव बढ़ गया है. कांग्रेस ने प्रधानमंत्री मोदी पर भी उंगली उठाई है.
ICICI बैंक ने कही ये बात
वहीं, प्राइवेट सेक्टर के आईसीआईसीआई बैंक ने कांग्रेस के आरोपों पर बयान जारी किया है. बैंक का कहना है कि उसने माधवी पुरी बुच को अक्टूबर, 2013 में उनके रिटायरमेंट के बाद से कोई भी वेतन या ईएसओपी नहीं दिया है. कांग्रेस का आरोप है कि साल 2017 में सिक्योरिटी एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (सेबी) का सदस्य बनने वालीं बुच ने वेतन और अन्य पारिश्रमिक तौर पर ICICI बैंक से 16.8 करोड़ रुपए हासिल किए थे.
रिश्वत मांगने का भी लगा आरोप
जानकारों का मानना है कि गंभीर आरोपों का सामना कर रहीं माधबी पुरी बुच के लिए अब सेबी प्रमुख बने रहना मुश्किल हो गया है. यह मुद्दा केवल बुच तक ही सीमित नहीं रहा है. इससे सेबी की साख पर भी सवाल खड़ा हुआ है है, सरकार पर भी सवाल दागे जा रहे हैं. ऐसे में संभव है कि केंद्र माधवी पुरी बुच को पद छोड़ने के लिए कहे. एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन डॉक्टर सुभाष चंद्रा ने भी सेबी चीफ माधबी पुरी बुच पर गंभीर आरोप लगाए हैं. चंद्रा ने ZEE एंटरटेनमेंट और सोनी डील टूटने के लिए भी बुच को जिम्मेदार ठहराया है. इतना ही नहीं उन्होंने सेबी चीफ पर रिश्वत मांगने का भी आरोप लगाया है.
नियमों के उल्लंघन का आरोप
पिछले महीने अमेरिकी फर्म हिंडनबर्ग रिसर्च ने सेबी प्रमुख बुच पर अडानी समूह के साथ परोक्ष संबंधों के आरोप लगाए थे. रिपोर्ट में कहा गया था कि अडानी समूह के वित्तीय हेराफेरी मामले में इस्तेमाल किए गए विदेशी फंड में बुच और उनके पति की भी हिस्सेदारी थी. इसके बाद कांग्रेस ने बुच पर आरोपों का बम फोड़ा. पार्टी लीडर पवन खेड़ा ने दावा किया है कि SEBI चीफ एक साथ तीन जगहों से सैलरी ले रही थीं. उन्हें ICICI बैंक, ICICI बैंक प्रोडेंशियल और SEBI से एक साथ सैलरी मिल रही थी, जो सीधे तौर पर नियमों का उल्लंघन है. उन्होंने यह भी कहा कि सेबी शेयर मार्केट की नियामक संस्था है और उसके चेयरपर्सन की नियुक्ति प्रधानमंत्री और गृहमंत्री करते हैं. ऐसे में सवाल उनसे भी पूछा जाएगा.
लड़ाई में शामिल होने की अपील
अब एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन डॉक्टर सुभाष चंद्रा ने सेबी चीफ को कठघरे में खड़ा किया है. उनका कहना है कि सेबी के साथ मामला सुलझाने के लिए उनसे करोड़ों की रिश्वत मांगी गई थी. ये रिश्वत मनजीत सिंह नाम के शख्स ने माधबी पुरी बुच के लिए मांगी थी. सुभाष चंद्रा ने यह भी कहा कि वह बुच के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की संभावना तलाश रहे हैं, क्योंकि उन्हें सेबी प्रमुख के भ्रष्ट होने का यकीन है. इसके साथ ही उन्होंने अन्य कॉरपोरेट घरानों से भी अपनी लड़ाई में शामिल होने का आह्वान किया. जानकारों का मानना है कि भले ही कांग्रेस के आरोपों को विपक्षी आरोप कहकर नज़रंदाज किया जा सकता था, लेकिन सुभाष चंद्रा के आरोपों से बुच की मुश्किलें बढ़ गई हैं.
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