क्या Adani Group पर होगा एक और हमला? ग्रुप क्यों बना आसान टारगेट?

हिंडनबर्ग ने दावा किया कि उन्होंने रिपोर्ट प्रकाशित करने से पहले अडानी ग्रुप से संबंधित उपकरणों को बाजारों में शॉर्ट कर दिया था.

Last Modified:
Tuesday, 29 August, 2023
Adani

Palak Shah, The writer is author of the book: The Market Mafia - Chronicle of India’s High-Tech Stock Market Scandal & The Cabal That Went Scot-Free.

राजनीति और व्यापार का रिश्ता आमतौर पर काफी गहरा होता है. ग्लोबल स्तर की बात करें तो प्रमुख राजनैतिक पार्टियों के करीब रहने वाले राजनैतिक घराने आमतौर पर ज्यादा असुरक्षित होते हैं, खासकर जब चुनाव पास होते हैं. भारत में 1980 और 90 के दशक में आमतौर पर ग्लोबल स्तर की साजिशों और क्षेत्रीय मीडिया के लक्ष्य पर रिलायंस इंडस्ट्रीज हुआ करती थी. इस वक्त जैसी परिस्थितियां हैं, लगता है अब अडानी ग्रुप (Adani Group) की बारी है. अडानी से ज्यादा इस वक्त भारत में हिंडनबर्ग (Hindenburg) के नाम को पहचान मिल चुकी है, खासकर अगर आप कुछ आरोपों की बदौलत किसी कंपनी को 125 बिलयन डॉलर्स का नुक्सान पहुंचा पाएं तो पहचान बन ही जाती है. सूत्रों का कहना है कि भारत में स्टॉक मार्केट से संबंधित जांच करने वाली एजेंसियों को पता चला है कि एक संस्था है, जिसे OCCRP (Organised Crime and Corruption Reporting Project) कहा जाता है. यह संस्था स्टॉक मार्केट शॉर्ट सेलर George Soros से संबंधित है और यह संस्था और अडानी ग्रुप को लेकर कई रिपोर्ट्स की प्लानिंग कर रही थी. 

एक और हिंडनबर्ग रिपोर्ट?
स्टॉक-मार्केट में शॉर्ट-सेलर के लिए टाइमिंग बहुत ही महत्त्वपूर्ण होती है और हिंडनबर्ग ने दावा किया था कि उन्होंने रिपोर्ट प्रकाशित करने से पहले ही अडानी ग्रुप से संबंधित उपकरणों को विदेशी बाजारों में शॉर्ट कर दिया था. आपको बता दें कि हिंडनबर्ग द्वारा रिपोर्ट ऐसे वक्त पर प्रकाशित की गई थी जब अडानी ग्रुप का 20,000 करोड़ का विशालकाय FPO (फॉलो-ऑन पब्लिक ऑफर) आने वाले था. ठीक इसी तरह OCCRP भी एक ऐसे वक्त पर रिपोर्ट जारी करने का प्लान कर रही है जब सुप्रीम कोर्ट द्वारा अडानी-हिंडनबर्ग मामले की SEBI की जांच के संबंध में किसी निर्णय पर पहुंच सकती है. 

OCCRP और George Soros एवं Rockefeller Brothers फंड का संबंध
George Soros मोदी से नफरत करता है और जब अडानी ग्रुप पर हिंडनबर्ग द्वारा रिपोर्ट प्रकाशित की गई तो George Soros काफी आनंदित हुआ था. एक इकॉनोमिक फोरम के दौरान George Soros ने सरेआम कहा था कि अडानी ग्रुप पर किया गया हमला, सरकार पर मोदी की पकड़ को कम करेगा. लेकिन क्या आप जानते हैं कि 1929 में अमेरिकी मार्केट के क्रैश के पीछे मौजूद ग्लोबल फाइनेंसर Rockefeller, George Soros और OCCRP का आपस में क्या संबंध है? 

क्या है OCCRP?
OCCRP अपने आपको एक जांचकर्ता रिपोर्टिंग प्लेटफार्म कहता है जिसे 24 नॉन-प्रॉफिट जांच केन्द्रों द्वारा मिलकर बनाया गया है और ये 24 प्लेटफॉर्म यूरोप, अफ्रीका, एशिया और लैटिन अमेरिका में फैले हुए हैं. आपकी जानकारी के लिए बता दें की OCCRP के एक संस्थागत डोनर George Soros की ओपन सोसाइटी फाउंडेशन भी है. OCCRP के संस्थागत डोनर्स में फोर्ड फाउंडेशन, Rockefeller Brother फंड और ओक फाउंडेशन भी शामिल हैं. George Soros की ही तरह फोर्ड फाउंडेशन पर लेफ्टविंग समाजवादी लोगों का नियंत्रण है. इसके साथ ही OCCRP की आधिकारिक वेबसाइट की मानें तो भारत में उसके प्रमुख एसोसिएट्स में से एक का नाम Anand Mangnale है, जो OCCRP से जुड़ने से पहले NewsClick.in में काम करते थे. Newsclick को चीन से फंड प्राप्त वेबसाइट माना जाता है. 

क्या है OCCRP का प्लान? 
OCCRP का दावा है कि वह ग्लोबल जांचकर्ताओं का नेटवर्क है. फिलहाल ग्लोबल जर्नलिस्टों का यह नेटवर्क बहुत से भारतीय मीडिया घरानों और ग्लोबल जर्नलिस्टों से ऐसी रिपोर्ट्स प्रकाशित करने के बारे में बातचीत कर रहा है, जो इस नेटवर्क के अनुसार अडानी ग्रुप को लेकर इसने खोजी हैं. मामले से जुड़े लोगों की मानें तो OCCRP का ध्यान भी उन अडानी ग्रुप RPTs (रिलेटेड पार्टी ट्रांजेक्शन) पर ही है जो हिंडनबर्ग रिपोर्ट में उल्लेखित की गई हैं.   

हिंडनबर्ग रिपोर्ट जैसी ही होगी OCCRP की रिपोर्ट?
मामले से जुड़े लोगों की मानें तो OCCRP की प्लानिंग पूरी तरह से ओवर-इनवॉइसिंग से संन्बंधित है और यह तब हुआ था जब UPA की अध्यक्षता वाली सरकार सत्ता में हुआ करती थी. इसके अलावा इस रिपोर्ट में अडानी ग्रुप के फाउंडर गौतम अदानी के बड़े भाई विनोद अडानी से संबंधित ट्रांजेक्शन भी शामिल हो सकती हैं. आपको बता दें कि ये वही ट्रांजेक्शन हैं जिनके बारे में हिंडनबर्ग रिसर्च द्वारा प्राकशित रिपोर्ट में बताया गया था. 

सवाल तो दिए पर सबूत नहीं
लेकिन भारतीय मार्केट रेगुलेटर SEBI ने भी हिंडनबर्ग द्वारा उठाये गए सवालों की जांच की थी और ऐसे 6000 ट्रांजेक्शन थे जिनके बारे में रिपोर्ट में सवाल उठाए गए थे. SEBI के MMPS नियमों के अनुसार प्रमोटर्स के पास एक लिस्टेड कंपनी का 75% से ज्यादा हिस्सा मौजूद नहीं होना चाहिए और बाकी का हिस्सा पब्लिक होना चाहिए. हिंडनबर्ग का आरोप था की गौतम अडानी ने SEBI के MMPS नियमों को FPI का इस्तेमाल करते हुए तोड़ा और अदानी ग्रुप से संबंधित लाभान्वित होने वाले फंड पर भी सवाल खड़े किये गए थे. लेकिन SEBI तो बहुत दूर खुद हिंडनबर्ग की रिपोर्ट में यह नहीं बताया गया है गौतम अडानी द्वारा FPI का इस्तेमाल कैसे किया जा रहा था? साथ ही सुप्रीम कोर्ट द्वारा बनाई गई कमिटी, जिसे यह चेक करना चाहिए था कि क्या मार्केट रेगुलेटर के रूप में कहीं SEBI तो फेल नहीं हुआ? उस कमिटी का यह कहना है कि लिस्टेड कंपनियों में MPS नियमों का इतिहास काफी विचित्र रहा है और इनमें लगातार काफी बार कई बदलाव होते रहे हैं. 

कीमत का मैनीपुलेशन
हिंडनबर्ग की तरह ही OCCRP की रिपोर्ट भी यह दावा कर सकती है कि अडानी ग्रुप के स्टॉक को मैनिपुलेट किया गया था और इसके लिए FPI का इस्तेमाल करते हुए विनोद अडानी से संबंधित RPTs का भी इस्तेमाल किया गया था. अगर इस बारे में भी हिंडनबर्ग रिपोर्ट की तरह ही बिना किसी सबूत के बस दावे भर कर दी जाएं तो यह भी एक तरह से पुराना और घिसा-पिटा तरीका ही हो जाएगा. हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि जब से हिंडनबर्ग रिपोर्ट सामने आई है और पिछले 8-9 महीनों के दौरान अडानी ग्रुप के स्टॉक के आस पास जारी इस नौटंकी की बदौलत अडानी ग्रुप द्वारा की गई त्रंजेक्षणों पर सवाल करते हुए स्टॉक मार्केटों ने निर्णय लिया कि वह अडानी ग्रुप के शेयरों की कीमत दोबारा से तय करेंगे और इसके बाद ही अदानी ग्रुप के शेयर फरवरी के बाद से जारी अपने घाटे से अब बेहतर [प्रदर्शन करते हुए नजर आ रहे हैं. 
 

यह भी पढ़ें: Reliance AGM 2023: रिलायंस रिटेल के IPO पर आखिर क्या बोले अंबानी


दमदार नतीजों के बाद बजाज ऑटो का बड़ा फैसला, डिविडेंड के साथ बायबैक का ऐलान

बजाज ऑटो के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने FY26 के लिए 150 रुपये प्रति शेयर डिविडेंड की सिफारिश की है. यह 10 रुपये फेस वैल्यू वाले शेयर पर 1500 प्रतिशत डिविडेंड के बराबर है.

Last Modified:
Thursday, 07 May, 2026
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देश की प्रमुख ऑटो कंपनी बजाज ऑटो (Bajaj Auto) ने वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही के शानदार नतीजों के साथ निवेशकों के लिए बड़ा ऐलान किया है. कंपनी ने 150 रुपये प्रति शेयर डिविडेंड देने और 12,000 रुपये प्रति शेयर के भाव पर बड़ा बायबैक लाने की घोषणा की है. कंपनी के मजबूत नतीजों और शेयरधारकों को मिलने वाले फायदे के बाद बाजार में भी उत्साह देखने को मिला और बजाज ऑटो के शेयरों में तेजी दर्ज की गई.

150 रुपये प्रति शेयर डिविडेंड का ऐलान

बजाज ऑटो के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने FY26 के लिए 150 रुपये प्रति शेयर डिविडेंड की सिफारिश की है. यह 10 रुपये फेस वैल्यू वाले शेयर पर 1500 प्रतिशत डिविडेंड के बराबर है. कंपनी ने 29 मई 2026 को रिकॉर्ड डेट तय की है, यानी इस तारीख तक जिन निवेशकों के नाम कंपनी के रिकॉर्ड में होंगे, उन्हें डिविडेंड का लाभ मिलेगा. अगर आगामी AGM में शेयरधारकों की मंजूरी मिल जाती है, तो डिविडेंड की राशि 24 जुलाई 2026 के आसपास निवेशकों के खातों में ट्रांसफर की जाएगी.

5,633 करोड़ रुपये का बड़ा बायबैक

कंपनी ने पिछले दो वर्षों में दूसरी बार शेयर बायबैक का ऐलान किया है. बजाज ऑटो करीब 5,633 करोड़ रुपये के शेयर वापस खरीदेगी. बायबैक प्राइस 12,000 रुपये प्रति शेयर तय किया गया है, जो BSE पर पिछले बंद भाव से लगभग 16 प्रतिशत अधिक है. कंपनी कुल 46.9 लाख शेयर खरीदेगी, जो उसकी कुल इक्विटी का करीब 1.68 प्रतिशत हिस्सा है. कंपनी के अनुसार डिविडेंड और बायबैक को मिलाकर कुल 9,825 करोड़ रुपये शेयरधारकों को लौटाए जाएंगे, जो FY26 के कुल प्रॉफिट आफ्टर टैक्स के लगभग बराबर है.

चौथी तिमाही में मुनाफे में जोरदार उछाल

जनवरी-मार्च 2026 तिमाही में बजाज ऑटो का स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट 34 प्रतिशत बढ़कर 2,746 करोड़ रुपये हो गया. पिछले साल इसी अवधि में कंपनी का मुनाफा 2,049 करोड़ रुपये था. वहीं, कंपनी का कंसोलिडेटेड प्रॉफिट बढ़कर 3,492 करोड़ रुपये पहुंच गया, जो एक साल पहले 1,801 करोड़ रुपये था. कंपनी ने कहा कि रिकॉर्ड वाहन बिक्री और विदेशी मुद्रा से हुए फायदे ने नतीजों को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाई.

राजस्व और EBITDA में भी मजबूत बढ़त

Q4 FY26 में कंपनी का स्टैंडअलोन रेवेन्यू 32 प्रतिशत बढ़कर 16,005 करोड़ रुपये हो गया. पिछले साल इसी तिमाही में यह 12,148 करोड़ रुपये था. वहीं, EBITDA 35.6 प्रतिशत बढ़कर 3,322 करोड़ रुपये पहुंच गया. कंपनी का EBITDA मार्जिन भी बढ़कर 20.8 प्रतिशत हो गया, जो पिछले साल 20.2 प्रतिशत था. हालांकि, कंपनी का कुल खर्च भी बढ़कर 15,390 करोड़ रुपये तक पहुंच गया.

वाहन बिक्री में शानदार प्रदर्शन

चौथी तिमाही में बजाज ऑटो की कुल वाहन बिक्री 24 प्रतिशत बढ़कर 13.71 लाख यूनिट हो गई. टू-व्हीलर बिक्री 24 प्रतिशत बढ़कर 11.66 लाख यूनिट रही, जबकि कमर्शियल व्हीकल बिक्री 28 प्रतिशत बढ़कर 2.04 लाख यूनिट पहुंच गई. घरेलू बाजार में भी कंपनी की बिक्री मजबूत रही और दोनों सेगमेंट में दो अंकों की वृद्धि दर्ज की गई.

पूरे साल में शानदार प्रदर्शन

पूरे वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी का कंसोलिडेटेड प्रॉफिट बढ़कर 10,574 करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले वित्त वर्ष में 7,324 करोड़ रुपये था. वहीं कुल रेवेन्यू बढ़कर 62,905 करोड़ रुपये पहुंच गया. FY26 में कंपनी की कुल वाहन बिक्री 10 प्रतिशत बढ़कर 51.17 लाख यूनिट रही.

शेयर बाजार में दिखा असर

मजबूत तिमाही नतीजों, बड़े डिविडेंड और बायबैक ऐलान के बाद बजाज ऑटो के शेयरों में तेजी देखने को मिली. BSE पर कंपनी का शेयर करीब 2.5 प्रतिशत की बढ़त के साथ 10,572 रुपये के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया. बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनी के मजबूत फंडामेंटल और शेयरधारकों को लगातार बेहतर रिटर्न देने की रणनीति निवेशकों का भरोसा और मजबूत कर सकती है.

 


Paytm के शेयरों में 7% से ज्यादा उछाल, पहली बार पूरे साल मुनाफे में आई कंपनी

मार्च तिमाही में कंपनी की कुल आय सालाना आधार पर 18.4 प्रतिशत बढ़कर 2,264 करोड़ रुपये हो गई. वहीं EBITDA भी अब पॉजिटिव हो गया है.

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Thursday, 07 May, 2026
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डिजिटल पेमेंट और फिनटेक कंपनी पेटीएम (Paytm) की पैरेंट कंपनी One 97 Communications के शेयरों में गुरुवार को जबरदस्त तेजी देखने को मिली. कंपनी के मजबूत तिमाही नतीजों और पहली बार पूरे वित्त वर्ष में मुनाफे में आने के बाद निवेशकों का भरोसा बढ़ा है. कारोबार के दौरान खबर लिखे जाने तक पेटीएम का शेयर 7.11 प्रतिशत तक उछलकर 1,189.60 रुपये के स्तर पर पहुंच गया. विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनी के बिजनेस मॉडल में सुधार और फाइनेंशियल सर्विसेज से बढ़ती कमाई आने वाले समय में स्टॉक को और मजबूती दे सकती है.

एक साल में 34% चढ़ा शेयर

पिछले एक साल में पेटीएम के शेयरों में करीब 34 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई है. खास बात यह रही कि इस दौरान Nifty 50 इंडेक्स लगभग सपाट रहा, जबकि पेटीएम ने बाजार से बेहतर प्रदर्शन किया. कंपनी का मार्केट कैप भी बढ़कर 74 हजार करोड़ रुपये से अधिक पहुंच गया है, जो निवेशकों के बढ़ते भरोसे को दर्शाता है.

चौथी तिमाही में 184 करोड़ रुपये का मुनाफा

कंपनी ने वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में 184 करोड़ रुपये का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है. पिछले साल इसी तिमाही में कंपनी को 540 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था. इस तरह कंपनी ने एक साल में घाटे से मुनाफे तक का बड़ा बदलाव दिखाया है. पेटीएम के मुताबिक, ऑपरेटिंग परफॉर्मेंस में सुधार और फाइनेंशियल सर्विसेज बिजनेस की मजबूत ग्रोथ इसकी प्रमुख वजह रही.

पहली बार पूरे साल रही फायदे में

वित्त वर्ष 2026 पेटीएम के लिए ऐतिहासिक रहा, क्योंकि कंपनी पहली बार पूरे साल मुनाफे में रही. पूरे वित्त वर्ष में कंपनी का प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) 552 करोड़ रुपये दर्ज किया गया. यह कंपनी के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है, खासकर ऐसे समय में जब पिछले साल आरबीआई की कार्रवाई के बाद कंपनी को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा था.

रेवेन्यू और EBITDA में मजबूत सुधार

मार्च तिमाही में कंपनी की कुल आय सालाना आधार पर 18.4 प्रतिशत बढ़कर 2,264 करोड़ रुपये हो गई. वहीं EBITDA भी अब पॉजिटिव हो गया है. पिछले साल जहां EBITDA 88 करोड़ रुपये के नुकसान में था, वहीं इस बार यह 132 करोड़ रुपये के मुनाफे में पहुंच गया. EBITDA मार्जिन 5 प्रतिशत रहा. कंपनी का कहना है कि लागत नियंत्रण और बेहतर ऑपरेटिंग एफिशिएंसी की वजह से यह सुधार संभव हो पाया है.

UPI और लोन बिजनेस बना ग्रोथ इंजन

पेटीएम के पेमेंट और लेंडिंग बिजनेस में भी मजबूत बढ़ोतरी दर्ज की गई. कंपनी के कन्ज्यूमर यूपीआई ग्रोस ट्रांजेक्शन  वैल्यू में सालाना आधार पर 46 प्रतिशत की वृद्धि हुई. इसके अलावा, हर महीने ट्रांजैक्शन करने वाले यूजर्स की संख्या बढ़कर 7.7 करोड़ तक पहुंच गई. इससे साफ संकेत मिलता है कि पेटीएम के प्लेटफॉर्म पर यूजर एक्टिविटी लगातार बढ़ रही है. फाइनेंशियल सर्विसेज से कंपनी की आय 37 प्रतिशत बढ़कर 750 करोड़ रुपये हो गई, जबकि पेमेंट सर्विसेज से 1,265 करोड़ रुपये का रेवेन्यू हासिल हुआ.

कंट्रीब्यूशन प्रॉफिट और मार्जिन में बढ़त

कंपनी का कंट्रीब्यूशन प्रॉफिट बढ़कर 1,254 करोड़ रुपये हो गया है. वहीं कंट्रीब्यूशन मार्जिन बढ़कर 55 प्रतिशत पहुंच गया. इसका मतलब है कि कंपनी अब अपने बिजनेस मॉडल से बेहतर कमाई कर रही है और बढ़ते स्केल का फायदा मिल रहा है.

RBI संकट के बाद वापसी के संकेत

पेटीएम के लिए पिछला एक साल चुनौतीपूर्ण रहा था. पेटीएम पेमेंट बैंक पर आरबीआई की कार्रवाई के बाद कंपनी के कई ऑपरेशंस प्रभावित हुए थे. हालांकि अब कंपनी पार्टनर-बेस्ड मॉडल के जरिए यूपीआई और पेमेंट सेवाएं चला रही है. नए मॉडल के तहत कंपनी धीरे-धीरे अपने कारोबार को स्थिर करने और दोबारा तेजी से विस्तार करने की दिशा में आगे बढ़ रही है. ताजा नतीजों से संकेत मिल रहा है कि पेटीएम अब मुश्किल दौर से बाहर निकलती दिखाई दे रही है और बाजार का भरोसा फिर मजबूत हो रहा है.
 


AU स्मॉल फाइनेंस बैंक में बढ़ेगी कोटक महिंद्रा की हिस्सेदारी, RBI से निवेश की मंजूरी

RBI की मंजूरी के बाद कोटक महिंद्रा बैंक का AU स्मॉल फाइनेंस बैंक में निवेश भारतीय बैंकिंग सेक्टर में एक अहम रणनीतिक कदम माना जा रहा है.

Last Modified:
Thursday, 07 May, 2026
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भारत के प्राइवेट बैंकिंग सेक्टर में एक बड़ा निवेश सौदा सामने आया है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने कोटक महिंद्रा बैंक को AU स्मॉल फाइनेंस बैंक में 9.99 प्रतिशत तक हिस्सेदारी खरीदने की मंजूरी दे दी है. इस फैसले को बैंकिंग सेक्टर में रणनीतिक विस्तार और निवेश के रूप में देखा जा रहा है.

एक्सचेंज फाइलिंग में दी गई जानकारी

AU स्मॉल फाइनेंस बैंक ने एक्सचेंज फाइलिंग में बताया कि आरबीआई ने कोटक महिंद्रा बैंक, उसकी सहयोगी कंपनियों, म्यूचुअल फंड्स और संबंधित स्कीम्स को बैंक में अधिकतम 9.99 प्रतिशत हिस्सेदारी या वोटिंग राइट्स हासिल करने की अनुमति दी है. बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम स्मॉल फाइनेंस बैंकिंग स्पेस में कोटक महिंद्रा की मौजूदगी को और मजबूत करेगा.

पहले से मौजूद है कोटक समूह की हिस्सेदारी

मार्च 2026 तिमाही के शेयरहोल्डिंग पैटर्न के अनुसार, कोटक समूह का कोटक फ्लेक्सीकैप फंड पहले से ही AU स्मॉल फाइनेंस बैंक में 1.60 प्रतिशत हिस्सेदारी रखता है. इसके अलावा बैंक में कई बड़े संस्थागत निवेशकों की भी मजबूत भागीदारी है. इनमें एचडीएफसी म्युचुअल फंड, निप्पोन लाइफ इंडिया, इन्वेस्को म्युचुअल फंड और डीएसपी मिडकैप फंड जैसे प्रमुख निवेशक शामिल हैं. बीमा क्षेत्र से एसबीआई लाइफ इन्श्योरेंस और एचडीएफसी लाइफ इन्श्योरेंस की भी बैंक में हिस्सेदारी है.

निवेशकों का भरोसा मजबूत

ट्रेंडलाइन (Trendlyne) के आंकड़ों के मुताबिक, AU स्मॉल फाइनेंस बैंक में प्रमोटर्स की हिस्सेदारी 22.8 प्रतिशत है, जबकि विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) के पास 37.3 प्रतिशत हिस्सेदारी मौजूद है. इसके अलावा म्यूचुअल फंड्स की हिस्सेदारी 23.2 प्रतिशत और पब्लिक शेयरहोल्डिंग 8.1 प्रतिशत है. यह आंकड़े दिखाते हैं कि बैंक पर घरेलू और विदेशी निवेशकों का भरोसा लगातार मजबूत बना हुआ है.

शेयर बाजार में दिखा असर

इस खबर का असर शेयर बाजार में भी देखने को मिला. गुरुवार सुबह कारोबार के दौरान कोटक महिंद्रा बैंक के शेयरों में करीब 1 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई और स्टॉक मजबूत बढ़त के साथ कारोबार करता दिखा.

वहीं AU स्मॉल फाइनेंस बैंक के शेयरों में भी लगभग 0.68 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई. बाजार विश्लेषकों के अनुसार यह निवेश दोनों बैंकों के लिए दीर्घकालिक रूप से फायदेमंद साबित हो सकता है.

स्मॉल फाइनेंस बैंकिंग सेक्टर में बढ़ेगी प्रतिस्पर्धा

विशेषज्ञों का मानना है कि इस निवेश से स्मॉल फाइनेंस बैंकिंग सेक्टर में प्रतिस्पर्धा और तेज हो सकती है. साथ ही यह संकेत भी मिलता है कि बड़े निजी बैंक अब तेजी से उभरते स्मॉल फाइनेंस बैंकिंग बाजार में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहते हैं.

आरबीआई की मंजूरी के बाद कोटक महिंद्रा बैंक का AU स्मॉल फाइनेंस बैंक में निवेश भारतीय बैंकिंग सेक्टर में एक अहम रणनीतिक कदम माना जा रहा है. आने वाले समय में यह साझेदारी दोनों संस्थानों के विकास और विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है.


भारत का निर्यात बना नई ताकत, 863 अरब डॉलर के पार पहुंचा विदेशी व्यापार

निर्यात वृद्धि में सबसे बड़ा योगदान सेवा क्षेत्र का रहा है. सेवा निर्यात 2024-25 में 387.55 अरब डॉलर से बढ़कर 2025-26 में 421.32 अरब डॉलर तक पहुंच गया है, जो 8.71 प्रतिशत की वृद्धि है.

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Thursday, 07 May, 2026
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वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बावजूद भारत ने वित्त वर्ष 2026 में निर्यात के मोर्चे पर ऐतिहासिक प्रदर्शन किया है. देश का कुल माल और सेवाओं का निर्यात बढ़कर 863.11 अरब डॉलर तक पहुंच गया है. यह पिछले वर्ष की तुलना में 4.59 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है और भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती को उजागर करता है.

रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा कुल निर्यात

वाणिज्य मंत्रालय के संशोधित आंकड़ों के अनुसार भारत का कुल निर्यात वित्त वर्ष 2024-25 के 825.26 अरब डॉलर से बढ़कर 2025-26 में 863.11 अरब डॉलर हो गया है. यह अब तक का सबसे उच्च स्तर है. रुपये के हिसाब से यह आंकड़ा लगभग 81.42 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जो भारत के वैश्विक व्यापार में बढ़ते प्रभाव को दर्शाता है.

हर मिनट 15 करोड़ रुपये का निर्यात

सरकारी डेटा के अनुसार भारत ने पिछले वित्त वर्ष में औसतन हर मिनट 15.50 करोड़ रुपये से अधिक का निर्यात किया. इसके अलावा हर दिन लगभग 22,325 करोड़ रुपये का निर्यात हुआ और हर 24 घंटे में करीब 930 करोड़ रुपये का व्यापार दर्ज किया गया. यह आंकड़े देश की मजबूत होती निर्यात क्षमता और वैश्विक बाजार में बढ़ती हिस्सेदारी को दर्शाते हैं.

वस्तु निर्यात में हल्की बढ़त

रिपोर्ट के अनुसार वस्तु यानी गुड्स निर्यात 437.70 अरब डॉलर से बढ़कर 441.78 अरब डॉलर हो गया है. यह 0.93 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है. वैश्विक अनिश्चितताओं और व्यापारिक चुनौतियों के बावजूद भारत का माल निर्यात लगातार स्थिर गति से आगे बढ़ता रहा है और कुल निर्यात में अहम योगदान देता रहा है.

सेवा निर्यात बना सबसे मजबूत क्षेत्र

निर्यात वृद्धि में सबसे बड़ा योगदान सेवा क्षेत्र का रहा है. सेवा निर्यात 2024-25 में 387.55 अरब डॉलर से बढ़कर 2025-26 में 421.32 अरब डॉलर तक पहुंच गया है, जो 8.71 प्रतिशत की वृद्धि है. यह अब तक का सबसे उच्च स्तर है. विशेषज्ञों के अनुसार IT सेवाएं, बिजनेस सॉल्यूशंस और प्रोफेशनल एक्सपर्टीज की बढ़ती वैश्विक मांग ने इस क्षेत्र को मजबूत बनाया है.

अर्थव्यवस्था की मजबूती का संकेत

विशेषज्ञों का मानना है कि निर्यात में यह वृद्धि भारत की वैश्विक बाजार में बढ़ती हिस्सेदारी और आर्थिक स्थिरता का संकेत है. वैश्विक चुनौतियों के बावजूद यह प्रदर्शन दिखाता है कि भारत की अर्थव्यवस्था लगातार मजबूत हो रही है और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में उसकी स्थिति और सशक्त बन रही है.

वित्त वर्ष 2026 में भारत का रिकॉर्ड निर्यात यह दर्शाता है कि देश तेजी से वैश्विक व्यापार में अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है. माल और सेवाओं दोनों क्षेत्रों में हुई वृद्धि ने भारतीय अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया है और भविष्य के लिए सकारात्मक संकेत दिए हैं.
 


खनिज अधिकार कर मामले में केंद्र-राज्य आमने-सामने, 20 मई को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

यह मामला 25 जुलाई 2024 को आए सुप्रीम कोर्ट की नौ न्यायाधीशों की संविधान पीठ के फैसले से शुरू हुआ था. 8:1 के बहुमत से दिए गए इस फैसले में कहा गया कि राज्यों के पास खनिज अधिकारों पर कर लगाने की विधायी क्षमता है.

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Thursday, 07 May, 2026
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भारत का सुप्रीम कोर्ट 20 मई को खनिज अधिकारों पर कर लगाने के राज्यों के विधायी अधिकार से जुड़े कई याचिकाओं पर सुनवाई करेगा. यह मामला तब सामने आया जब केंद्र सरकार ने अदालत को बताया कि इस विषय पर उसकी क्यूरेटिव याचिका अभी लंबित है. यह विवाद पिछले साल आए एक ऐतिहासिक फैसले से जुड़ा है, जिसमें राज्यों को खनिज युक्त भूमि और खनिज अधिकारों पर कर लगाने का अधिकार मान्यता दी गई थी.

संविधान पीठ के फैसले से शुरू हुआ विवाद

यह मामला 25 जुलाई 2024 को आए सुप्रीम कोर्ट की नौ न्यायाधीशों की संविधान पीठ के फैसले से शुरू हुआ था. 8:1 के बहुमत से दिए गए इस फैसले में कहा गया कि राज्यों के पास खनिज अधिकारों पर कर लगाने की विधायी क्षमता है.

अदालत ने स्पष्ट किया था कि संविधान की यूनियन लिस्ट की एंट्री 54 के तहत संसद को खनिज भूमि और खनिज अधिकारों पर कर लगाने का एकमात्र अधिकार प्राप्त नहीं है.

केंद्र सरकार की क्यूरेटिव याचिका लंबित

इस फैसले के बाद सितंबर 2024 में पुनर्विचार याचिकाएं खारिज कर दी गई थीं. इसके बाद केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में क्यूरेटिव याचिका दाखिल कर फैसले पर पुनर्विचार की मांग की है. सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत से अनुरोध किया कि इस मामले की सुनवाई तब तक न की जाए जब तक क्यूरेटिव याचिका पर निर्णय नहीं हो जाता.

कुछ वकीलों ने इस अनुरोध का समर्थन करते हुए सुनवाई टालने की बात कही, जबकि राज्यों की ओर से पेश वकीलों ने देरी का विरोध किया और कहा कि पुनर्विचार याचिकाएं पहले ही खारिज हो चुकी हैं.

2005 से जुड़े बकाया वसूली के आदेश

14 अगस्त 2024 के एक अन्य फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने खनिज संपन्न राज्यों को खनिज अधिकारों और खनिज युक्त भूमि से संबंधित रॉयल्टी और टैक्स की वसूली की अनुमति दी थी. यह वसूली 1 अप्रैल 2005 से बकाया राशि पर लागू होगी और इसे 1 अप्रैल 2026 से शुरू होकर 12 वर्षों में चरणबद्ध तरीके से वसूला जाएगा.

ब्याज और जुर्माने पर राहत

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि 25 जुलाई 2024 से पहले की अवधि के लिए उठाए गए किसी भी कर या मांग पर ब्याज या जुर्माना नहीं लगाया जाएगा. यह निर्णय लंबे समय से चले आ रहे कानूनी अनिश्चितता को ध्यान में रखते हुए दिया गया था.

केंद्र और राज्यों के बीच जारी कानूनी टकराव

यह मामला केंद्र और राज्यों के बीच अधिकार क्षेत्र को लेकर चल रहे लंबे कानूनी संघर्ष को दर्शाता है. अब सभी की नजरें 20 मई की सुप्रीम कोर्ट सुनवाई पर टिकी हैं, जिससे इस विवाद की दिशा तय हो सकती है.
 


अमेरिका-ईरान शांति वार्ता की अनिश्चितता से कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, बाजार सतर्क

निवेशकों ने अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते की संभावना और समय-सीमा का पुनर्मूल्यांकन किया, जिससे पश्चिम एशिया से आपूर्ति बाधित होने की चिंताओं में बदलाव देखने को मिला.

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Thursday, 07 May, 2026
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वैश्विक बाजारों में गुरुवार को शुरुआती कारोबार के दौरान कच्चे तेल की कीमतों में तेजी दर्ज की गई. यह उछाल उस गिरावट के बाद आया है, जिसमें पिछले सत्र में कीमतें 7 प्रतिशत से अधिक गिर गई थीं. निवेशकों ने अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते की संभावना और समय-सीमा का पुनर्मूल्यांकन किया, जिससे पश्चिम एशिया से आपूर्ति बाधित होने की चिंताओं में बदलाव देखने को मिला.

ब्रेंट और WTI क्रूड में बढ़ोतरी

ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 88 सेंट यानी 0.9 प्रतिशत बढ़कर 102.15 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया. वहीं अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड 1.12 डॉलर यानी 1.2 प्रतिशत बढ़कर 96.20 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था.

पिछली गिरावट के बाद रिकवरी

यह रिकवरी बुधवार को हुई तेज गिरावट के बाद देखने को मिली, जब दोनों बेंचमार्क दो सप्ताह के निचले स्तर पर पहुंच गए थे. उस समय बाजारों में यह उम्मीद थी कि कूटनीतिक प्रयासों से पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष समाप्त हो सकता है.

हालांकि, बाद में बाजार की धारणा बदल गई जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि तेहरान के साथ आमने-सामने बातचीत के लिए “अभी समय नहीं है”, जिससे संकेत मिला कि वार्ता अभी भी अस्थिर स्थिति में है.

ईरान की प्रतिक्रिया और वार्ता की स्थिति

इसी बीच, एक वरिष्ठ ईरानी सांसद ने कथित तौर पर अमेरिकी प्रस्ताव को “समझौते का ठोस ढांचा” नहीं बल्कि केवल एक “इच्छा सूची” बताया. अमेरिकी मीडिया आउटलेट एक्सियोस की रिपोर्ट के अनुसार, वॉशिंगटन ने ईरान से अगले 48 घंटों के भीतर संभावित समझौते से जुड़े कई प्रमुख बिंदुओं पर जवाब मांगा है. रिपोर्ट में कहा गया है कि दोनों पक्ष संघर्ष शुरू होने के बाद से अब तक किसी भी समय की तुलना में समझौते के सबसे करीब हैं.

आपूर्ति में देरी की आशंका

विशेषज्ञों के अनुसार, यदि जल्द ही शांति समझौता भी हो जाता है, तो पश्चिम एशिया से कच्चे तेल की आपूर्ति सामान्य होने में कई सप्ताह लग सकते हैं. इस दौरान वैश्विक रिफाइनर और ऊर्जा कंपनियां मांग पूरी करने के लिए अपने भंडार का उपयोग करती रहेंगी.

अमेरिकी भंडार में गिरावट से समर्थन

कीमतों को अतिरिक्त समर्थन तब मिला जब अमेरिकी सरकार के बुधवार को जारी आंकड़ों में कच्चे तेल और ईंधन के भंडार में फिर गिरावट दर्ज की गई. यूएस एनर्जी इंफॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन (EIA) ने बताया कि ईरान संकट से जुड़ी आपूर्ति बाधाओं की भरपाई के प्रयासों के कारण भंडार लगातार कम हो रहा है.

वैश्विक घटनाओं पर भी नजर

निवेशक अब पश्चिम एशिया के बाहर की भू-राजनीतिक घटनाओं पर भी नजर बनाए हुए हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की अगले सप्ताह होने वाली बैठक भी वैश्विक बाजार धारणा और मांग के अनुमान को प्रभावित कर सकती है.

 


भारत के रक्षा निर्यात में FY2017 से 25 गुना वृद्धि, घरेलू उत्पादन रिकॉर्ड स्तर पर: रिपोर्ट

रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2025 में भारत का रक्षा उत्पादन रिकॉर्ड 1.54 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो FY2015 की तुलना में तीन गुना से अधिक है.

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Thursday, 07 May, 2026
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भारत के रक्षा क्षेत्र ने पिछले एक दशक में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है. घरेलू उत्पादन और रक्षा निर्यात में तेज़ बढ़ोतरी के साथ देश आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है. यह जानकारी रुबिक्स डेटा साइंसेज़ की एक रिपोर्ट में सामने आई है.

रक्षा उत्पादन रिकॉर्ड स्तर पर

रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2025 में भारत का रक्षा उत्पादन रिकॉर्ड 1.54 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो FY2015 की तुलना में तीन गुना से अधिक है. सरकार ने FY2029 तक रक्षा उत्पादन को बढ़ाकर 3 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया है. वहीं, रक्षा बजट भी बढ़कर FY2027 में 7.85 लाख करोड़ रुपये हो गया, जो कुल केंद्रीय बजट का 14.67 प्रतिशत है.

घरेलू कंपनियों को बढ़ावा

रिपोर्ट में कहा गया है कि इस वृद्धि का प्रमुख कारण घरेलू खरीद को बढ़ावा देने वाली सरकारी नीतियां हैं. FY2025 में रक्षा मंत्रालय ने 2.09 लाख करोड़ रुपये के 193 अनुबंध किए, जिनमें 92 प्रतिशत अनुबंध संख्या के आधार पर और 81 प्रतिशत मूल्य के आधार पर भारतीय कंपनियों को दिए गए. वर्तमान में देश की लगभग 65 प्रतिशत रक्षा आवश्यकताओं का उत्पादन भारत में ही हो रहा है, जबकि एक दशक पहले रक्षा क्षेत्र आयात पर काफी निर्भर था.

रक्षा निर्यात में बड़ी छलांग

भारत के रक्षा निर्यात में भी मजबूत वृद्धि दर्ज की गई है. FY2026 में रक्षा निर्यात 38,400 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 63 प्रतिशत अधिक है और FY2017 के मुकाबले 25 गुना वृद्धि दर्शाता है. भारत अब 80 से अधिक देशों को रक्षा उपकरण निर्यात कर रहा है, जिनमें ब्रह्मोस मिसाइल और आकाश वायु रक्षा प्रणाली जैसे अत्याधुनिक सिस्टम शामिल हैं. सरकार ने FY2029 तक रक्षा निर्यात को 50,000 करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है.

आयात में विविधता की रणनीति

हालांकि भारत अभी भी दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा हथियार आयातक बना हुआ है, लेकिन अब वह अपने आपूर्तिकर्ता देशों में विविधता ला रहा है. रूस की हिस्सेदारी में गिरावट आई है, जबकि फ्रांस और इज़राइल की मौजूदगी बढ़ी है. FY2026 में भारत ने 71 अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य के 55 रक्षा खरीद प्रस्तावों को मंजूरी दी.

निजी क्षेत्र और स्टार्टअप्स की भागीदारी

रिपोर्ट में निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी को भी रेखांकित किया गया है. वर्तमान में 16,000 से अधिक MSME और 1,000 से ज्यादा रक्षा स्टार्टअप इस क्षेत्र में योगदान दे रहे हैं. हालांकि, रिपोर्ट ने कुछ चुनौतियों की ओर भी ध्यान दिलाया है, जिनमें महत्वपूर्ण आयातों पर निर्भरता, सीमित अनुसंधान एवं विकास (R&D) निवेश और सप्लाई चेन संबंधी कमजोरियां शामिल हैं.

आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ता भारत

कुल मिलाकर, रिपोर्ट संकेत देती है कि भारत का रक्षा क्षेत्र निरंतर सरकारी नीतियों और बढ़ती औद्योगिक क्षमता के समर्थन से आत्मनिर्भरता की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ रहा है.
 


पश्चिम एशिया संकट से बढ़ा आर्थिक दबाव, फिर भी मजबूत बनी हुई है भारत की अर्थव्यवस्था: रिपोर्ट

तेल की बढ़ती कीमतें, सप्लाई चेन में रुकावट और विदेशी निवेश में उतार-चढ़ाव के बीच घरेलू मांग और मजबूत वित्तीय सिस्टम भारत को दे रहे सहारा.

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Thursday, 07 May, 2026
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पश्चिम एशिया में जारी तनाव और युद्ध का असर अब वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ-साथ भारत पर भी साफ दिखाई देने लगा है. कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों, व्यापारिक मार्गों में बाधा और विदेशी निवेश में अस्थिरता ने भारतीय अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ाया है. हालांकि इन चुनौतियों के बावजूद भारत की आर्थिक स्थिति अपेक्षाकृत मजबूत बनी हुई है. वित्त मंत्रालय और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) का मानना है कि मजबूत घरेलू मांग, स्थिर बैंकिंग व्यवस्था और सरकार की नीतिगत तैयारियों ने अर्थव्यवस्था को बड़े झटकों से बचाए रखा है.

ऊर्जा और व्यापार पर बढ़ा दबाव

इसके बावजूद वित्त मंत्रालय की ताजा रिपोर्ट कहती है कि भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत है, भले ही थोड़ी हिली हुई है. इसकी वजह है देश के अंदर मजबूत मांग, स्थिर वित्तीय सिस्टम और सरकार की नीतियां, जो झटकों को संभाल रही हैं.

पश्चिम एशिया संकट का सबसे बड़ा असर भारत के ऊर्जा आयात और व्यापार पर पड़ रहा है. भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा तेल और गैस आयात करता है और मिडिल ईस्ट इस आपूर्ति का प्रमुख केंद्र है. तनाव बढ़ने से न केवल तेल महंगा हुआ है, बल्कि शिपिंग लागत और सप्लाई चेन पर भी असर पड़ा है.

विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार बढ़ती भू-राजनीतिक अनिश्चितता से निर्यात, आयात और उत्पादन लागत प्रभावित हो सकती है. कई उद्योगों को कच्चे माल की उपलब्धता और समय पर शिपमेंट को लेकर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है.

महंगाई और ग्रोथ पर बढ़ा जोखिम

कच्चे तेल की कीमतें हाल के दिनों में 110 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई हैं, जिससे भारत का आयात बिल बढ़ने की आशंका है. तेल महंगा होने का सीधा असर महंगाई पर पड़ता है, क्योंकि परिवहन से लेकर उत्पादन तक लगभग हर क्षेत्र में लागत बढ़ जाती है.

RBI ने भी चेतावनी दी है कि महंगे कच्चे माल और सप्लाई में बाधा आर्थिक विकास की रफ्तार को धीमा कर सकती है. हालांकि सरकार फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतों को स्थिर रखने की कोशिश कर रही है, लेकिन लंबे समय तक ऐसा करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है.

विदेशी निवेश में उतार-चढ़ाव

वैश्विक अनिश्चितता का असर विदेशी निवेश पर भी दिखाई दे रहा है. 2026 के शुरुआती महीनों में विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजारों से करीब 1.8 लाख करोड़ रुपये निकाले हैं. इससे शेयर बाजार और रुपये पर दबाव बढ़ा है.

हालांकि घरेलू निवेशकों ने इस दौरान बाजार को स्थिर बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई है. म्यूचुअल फंड और रिटेल निवेशकों की लगातार भागीदारी ने बाजार में भरोसा बनाए रखा.

क्यों मजबूत मानी जा रही है भारतीय अर्थव्यवस्था?

विशेषज्ञों के अनुसार भारत की अर्थव्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत उसकी घरेलू मांग है. देश की 60 फीसदी से ज्यादा आर्थिक गतिविधियां घरेलू खपत पर आधारित हैं, जिससे बाहरी झटकों का असर सीमित रहता है.

इसके अलावा बैंकिंग सेक्टर की स्थिति मजबूत है, कंपनियों की बैलेंस शीट पहले से बेहतर हुई है और भारत का विदेशी मुद्रा भंडार करीब 697 अरब डॉलर के स्तर पर बना हुआ है. सेवाओं का निर्यात भी अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रहा है.

संकट को अवसर में बदलने की चुनौती

अर्थशास्त्रियों का मानना है कि मौजूदा संकट भारत के लिए एक बड़ा सबक भी है. देश को ऊर्जा आयात पर निर्भरता कम करने, सप्लाई चेन को मजबूत बनाने और नवीकरणीय ऊर्जा के इस्तेमाल को तेज करने की जरूरत है.

सरकार पहले से ही ग्रीन एनर्जी, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है. आने वाले समय में यही कदम भारत को वैश्विक झटकों से ज्यादा सुरक्षित बना सकते हैं.

आगे कैसी रहेगी अर्थव्यवस्था की चाल?

फिलहाल भारत की अर्थव्यवस्था दबाव में जरूर है, लेकिन उसकी बुनियादी स्थिति मजबूत मानी जा रही है. घरेलू मांग, सरकारी निवेश और वित्तीय स्थिरता ने अर्थव्यवस्था को सहारा दिया है. हालांकि पश्चिम एशिया का संकट अगर लंबा खिंचता है तो महंगाई, व्यापार और विकास दर पर असर और गहरा हो सकता है. ऐसे में सरकार और केंद्रीय बैंक के अगले कदम भारतीय अर्थव्यवस्था की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे.
 

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भारत-वियतनाम रिश्तों को मिली नई उड़ान, 2030 तक 25 अरब डॉलर व्यापार का लक्ष्य तय

पीएम नरेंद्र मोदी और वियतनाम के राष्ट्रपति तो लाम की बैठक में रक्षा, डिजिटल पेमेंट, फार्मा और दुर्लभ खनिज समेत 18 अहम समझौतों पर सहमति बनी है.

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Thursday, 07 May, 2026
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भारत और वियतनाम ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाई देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वियतनाम के राष्ट्रपति तो लाम के बीच नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में हुई उच्चस्तरीय वार्ता के बाद दोनों देशों ने अपने रिश्तों को “उन्नत व्यापक रणनीतिक साझेदारी” के स्तर तक ले जाने का फैसला किया. इस दौरान 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 25 अरब डॉलर तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया गया. साथ ही रक्षा, डिजिटल भुगतान, फार्मा, शिक्षा, बैंकिंग, दुर्लभ खनिज और संस्कृति समेत कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी.

18 समझौतों पर हस्ताक्षर, डिजिटल और फार्मा सहयोग को बढ़ावा

भारत और वियतनाम के बीच कुल 18 समझौतों की घोषणा की गई. इनमें दवा नियामक संस्थाओं के बीच हुआ करार खास रहा, जिससे वियतनाम में भारतीय दवाओं की उपलब्धता बढ़ेगी. इसके अलावा दोनों देशों ने डिजिटल भुगतान प्रणाली को जोड़ने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया. भारत के यूपीआई और वियतनाम की भुगतान प्रणाली को जल्द एकीकृत करने की योजना है, जिससे दोनों देशों के बीच वित्तीय लेनदेन आसान होगा.

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत से वियतनाम को कृषि, मत्स्य और पशु उत्पादों का निर्यात अब और आसान होगा. उन्होंने यह भी कहा कि जल्द ही वियतनाम के लोग भारतीय अंगूर और अनार का स्वाद चख सकेंगे.

रक्षा साझेदारी में तेजी, ब्रह्मोस मिसाइल पर चर्चा

बैठक के दौरान रक्षा सहयोग प्रमुख मुद्दों में शामिल रहा. दोनों देशों के बीच ब्रह्मोस मिसाइल खरीद को लेकर चर्चा हुई, जिसकी संभावित कीमत करीब 62.9 करोड़ डॉलर बताई जा रही है. इस सौदे में प्रशिक्षण और लॉजिस्टिक सहायता भी शामिल हो सकती है.

प्रधानमंत्री मोदी ने वियतनाम को सुखोई-30 लड़ाकू विमानों और किलो श्रेणी की पनडुब्बियों के रखरखाव, मरम्मत और संचालन में भारत की ओर से सहयोग की पेशकश की. भारत पहले भी वियतनाम को तेज रफ्तार नौकाओं, पनडुब्बी बैटरियों और नौसेना जहाजों के विकास के लिए 50 करोड़ डॉलर की ऋण सहायता देने की घोषणा कर चुका है.

दक्षिण चीन सागर और क्षेत्रीय सुरक्षा पर भी चर्चा

भारत और वियतनाम के बीच हुई प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता में दक्षिण चीन सागर की स्थिति और क्षेत्रीय सुरक्षा पर भी विस्तार से चर्चा हुई. दोनों नेताओं ने क्षेत्र में शांति, स्थिरता, कानून व्यवस्था और समृद्धि बनाए रखने के लिए मिलकर काम करने पर सहमति जताई.

प्रधानमंत्री मोदी ने वियतनाम को भारत की “एक्ट ईस्ट पॉलिसी” और “विजन ओशन” का अहम स्तंभ बताया. उन्होंने कहा कि दोनों देशों के रिश्ते अब केवल सांस्कृतिक और आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि सुरक्षा, आपूर्ति श्रृंखला और सामरिक साझेदारी के नए आयाम भी स्थापित करेंगे.

व्यापार और निवेश को मिलेगी नई गति

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पिछले एक दशक में भारत और वियतनाम के बीच व्यापार दोगुना होकर 16 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है. अब दोनों देशों ने इसे 2030 तक 25 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य रखा है. साथ ही भारत-आसियान व्यापार समझौते को इस साल के अंत तक उन्नत करने पर भी सहमति बनी है.

दोनों देशों ने केंद्रीय बैंकों के बीच सहयोग बढ़ाने, राज्यों और शहरों के स्तर पर साझेदारी मजबूत करने और निवेश को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया. विशेषज्ञों का मानना है कि यह साझेदारी आने वाले वर्षों में हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की रणनीतिक स्थिति को और मजबूत करेगी.
 


कल बाजार में दिखी जोरदार तेजी, आज इन बड़े शेयरों और ग्लोबल संकेतों पर रहेगी नजर

बुधवार को BSE सेंसेक्स 940.73 अंक की मजबूती के साथ 77,958.52 अंक पर बंद हुआ, जबकि NSE  निफ्टी 298.15 अंक की बढ़त के साथ 24,330.95 अंक पर पहुंच गया था.

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Thursday, 07 May, 2026
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पश्चिम एशिया में तनाव कम होने और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के संकेतों के बीच बुधवार को घरेलू शेयर बाजार में शानदार तेजी देखने को मिली थी. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE)
सेंसेक्स 940.73 अंक यानी 1.22 फीसदी की मजबूती के साथ 77,958.52 अंक पर बंद हुआ, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE)  निफ्टी 298.15 अंक यानी 1.24 फीसदी की बढ़त के साथ 24,330.95 अंक पर पहुंच गया था. बैंकिंग, ऑटो और एविएशन शेयरों में जोरदार खरीदारी से निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ था. अब गुरुवार को बाजार की नजर वैश्विक संकेतों, अमेरिका और एशियाई बाजारों के रुख, क्रूड ऑयल की चाल और कई बड़ी कंपनियों के मार्च तिमाही नतीजों पर रहेगी. 

इन शेयरों ने दिखाई दमदार तेजी

सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 21 शेयर बढ़त के साथ बंद हुए. सबसे ज्यादा तेजी इंडिगो के शेयर में देखने को मिली, जो 6.73 फीसदी चढ़ा. इसके अलावा ट्रेंट, एशियन पेंट्स, एसबीआई, एक्सिस बैंक, एचडीएफसी बैंक, महिंद्रा एंड महिंद्रा, बजाज फाइनेंस, मारुति और बजाज फिनसर्व के शेयरों में भी 2 फीसदी से ज्यादा की तेजी दर्ज की गई.

दूसरी ओर रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर में सबसे ज्यादा 1.79 फीसदी की गिरावट रही. इसके अलावा पावरग्रिड, एनटीपीसी, लार्सन एंड टुब्रो, एचसीएल टेक और टाइटन के शेयर भी दबाव में रहे.

मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी खरीदारी

बाजार की तेजी केवल बड़े शेयरों तक सीमित नहीं रही. व्यापक बाजार यानी ब्रॉडर मार्केट में भी खरीदारी का माहौल देखने को मिला. निफ्टी मिडकैप इंडेक्स 1.76 फीसदी और निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स 1.93 फीसदी मजबूत होकर बंद हुए. सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो निफ्टी पीएसयू बैंक, निफ्टी प्राइवेट बैंक, निफ्टी बैंक और निफ्टी रियल्टी इंडेक्स में अच्छी तेजी रही. हालांकि एफएमसीजी सेक्टर अपेक्षाकृत कमजोर रहा.

कच्चे तेल में गिरावट से बाजार को मिला सहारा

बाजार में तेजी की एक बड़ी वजह कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट भी रही. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज स्ट्रेट में चल रहे “प्रोजेक्ट फ्रीडम” को फिलहाल रोकने की घोषणा की है. यह परियोजना जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए शुरू की गई थी. ट्रंप के मुताबिक, अमेरिका फिलहाल इस बात का आकलन कर रहा है कि ईरान के साथ किसी संभावित समझौते की गुंजाइश बन सकती है या नहीं. इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतों में करीब 7 फीसदी की गिरावट आई और यह 102 डॉलर प्रति बैरल के आसपास ट्रेड करता दिखा. कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से भारतीय बाजार को राहत मिली, क्योंकि इससे आयात लागत और महंगाई के दबाव में कमी आने की उम्मीद बढ़ी है.

विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में तनाव कम होने और क्रूड ऑयल की कीमतों में गिरावट ने निवेशकों की धारणा को मजबूत किया है. बैंकिंग, ऑटो और एविएशन शेयरों में आई खरीदारी ने बाजार को ऊंचे स्तर पर बंद होने में मदद की. आने वाले दिनों में वैश्विक संकेत और कच्चे तेल की चाल बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे.

आज इन शेयरों पर रखें नजर

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, आज भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत मजबूत संकेतों के साथ होने की उम्मीद है और निवेशकों की नजर कई बड़े शेयरों पर रहेगी. GIFT निफ्टी में बढ़त और वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों के बीच Paytm की पैरेंट कंपनी One97 Communications, Bajaj Auto, Meesho, Aditya Birla Real Estate, South Indian Bank, Indian Bank, Mahindra Lifespaces, Larsen & Toubro (L&T), Deepak Fertilizers और Newgen Software Technologies जैसे शेयर फोकस में रह सकते हैं. Paytm ने मार्च तिमाही में घाटे से निकलकर 184 करोड़ रुपये का मुनाफा दर्ज किया है, जबकि Bajaj Auto का शुद्ध लाभ दोगुने से ज्यादा बढ़ा है. Meesho का घाटा घटा है और Aditya Birla Real Estate भी नुकसान से मुनाफे में आई है. South Indian Bank के मजबूत नतीजे और Indian Bank की पूंजी जुटाने की योजना भी निवेशकों का ध्यान खींच सकती है. वहीं Mahindra Lifespaces ने मुंबई में बड़ा प्रीमियम प्रोजेक्ट लॉन्च किया है और L&T को JSW Steel से 10,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का बड़ा ऑर्डर मिला है. Deepak Fertilizers ने अधिग्रहण के जरिए अपने कारोबार का विस्तार किया है, जबकि Newgen Software को अंतरराष्ट्रीय ऑर्डर मिला है. इसके अलावा आज BSE, MRF, Britannia, Biocon, Lupin, Dabur, Bharat Forge, Pidilite और अन्य कई कंपनियां मार्च तिमाही के नतीजे जारी करेंगी, जिससे बाजार में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है.

(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)