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आखिर FTA पर क्यों मुहर लगाना चाहते हैं Bharat और UK, किस तरह मिलेगा फायदा?

FTA के अमल में आने से ब्रिटेन के लिए अपनी प्रीमियम कारें, व्हिस्की और अन्य सेवाओं के लिए भारत जैसे बड़े बाजार तक पहुंच आसान हो जाएगी.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

भारत और ब्रिटेन अपने व्यापारिक रिश्ते को मजबूत बनाने के लिए मुक्त व्यापार समझौता (FTA) करना चाहते हैं. 2022 की शुरुआत में दोनों देशों के बीच FTA को लेकर वार्ता शुरू हुई थी. पिछले साल यानी 2023 के अंत तक इस पर मुहर लगने की संभावना भी जताई जा रही थी, लेकिन ऐसा हो नहीं पाया. अब माना जा रहा है कि 2024 में इस पर सहमति बन सकती है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ब्रिटिश प्रधानमंत्री ऋषि सुनक मार्च 2024 के अंत में एफटीए को अंतिम रूप देने के इच्छुक हैं. चलिए जानते हैं कि आखिर FTA क्या है और इससे दोनों देशों को क्या फायदा होगा?

क्या है फ्री ट्रेड एग्रीमेंट?
फ्री ट्रेड एग्रीमेंट दो या फिर इससे ज्यादा देशों के बीच उत्पादों और सेवाओं के आयात-निर्यात में आने वालीं रुकावटों को कम करने के लिए किया जाना वाले समझौता होता है. फ्री ट्रेड एग्रीमेंट में कोटा, टैरिफ, सब्सिडी या फिर ऐसे प्रतिबंधों को कम किया जाता है, जो सीमा पार वस्तुओं-सेवाओं को लाने- ले जाने को सीमित कर सकते हैं. जैसा कि इसका नाम है, फ्री ट्रेड एग्रीमेंट दोनों देशों के बीच मुक्त व्यापार की अनुमति देता है. इस एग्रीमेंट में सेवाएं, निवेश, सामान, बौद्धिक संपदा, प्रतिस्पर्धा, सरकारी खरीद और अन्य क्षेत्रों को शामिल किया जा सकता है. सीधे शब्दों में कहें तो ये एग्रीमेंट दोनों देशों के बीच व्यवसाय को बढ़ावा देने की राह में आने वालीं सभी बाधाओं को हटा देगा.

इस तरह मिलेगा फायदा
फ्री ट्रेड एग्रीमेंट से भारत के एक्सपोर्ट सेक्टर में तेजी आएगी. इसके अलावा, देश के लेबर इंसेंटिव सेक्टर जैसे प्रोसेस्ड एग्रो, लेदर, टेक्सटाइल और ज्वेलरी प्रोडक्ट्स को भी बढ़ावा मिलेगा और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे. एक रिपोर्ट बताती है कि भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापार 2021-22 में 17.5 अरब डॉलर था. 2022-23 में यह बढ़कर 20.42 अरब डॉलर हो गया. भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापार अधिकतम सर्विस सेक्टर पर निर्भर करता है, जो कि कुल ट्रेड का 70% हिस्सा है. भारत यूके का 12वां सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है. जबकि UK भारत का 7वां सबसे बड़ा निर्यातक देश है. ऐसे में दोनों देश इस एग्रीमेंट के जरिए व्यापार में आने वालीं परेशानियों को दूर करके आर्थिक विकास में तेजी लाना चाहते हैं. एक्सपर्ट्स मानते हैं कि फ्री ट्रेड एग्रीमेंट भारत और ब्रिटेन के लिए महत्वपूर्ण है. भारत ने भूटान, नेपाल, थाईलैंड, सिंगापुर, जापान और मलेशिया आदि देशों से फ्री ट्रेड एग्रीमेंट किए हुए हैं.

ये भी पढ़ें - 2024 की शुरुआत में हो सकते हैं इन देशों के साथ व्‍यापारिक समझौते, अंतिम चरण में है बातचीत 

ऐसा है दोनों देशों का कारोबार
FTA अमल में आने से जहां ब्रिटेन के लिए बड़ा निर्यातक देश बन सकता है. वहीं, ब्रिटेन को अपनी प्रीमियम कारें, व्हिस्की और अन्य सेवाओं के लिए भारत जैसे बड़े बाजार में पहुंच आसान हो जाएगी. कन्फेडरेशन ऑफ ब्रिटिश इंडस्ट्री (CBI) के अनुसार, एफटीए से द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाने में मदद मिलेगी. इसके अमल में आने से 2035 तक भारत के साथ ब्रिटेन का व्यापार 28 बिलियन पाउंड प्रति वर्ष तक बढ़ा सकता है. ब्रिटेन, भारत से मुख्य तौर पर कपड़े, रत्न, आभूषण, इंजीनियरिंग सामान, पेट्रोलियम, पेट्रो रसायन उत्पाद के साथ-साथ परिवहन उपकरण, मसाले, मशीनरी, फार्मास्युटिकल्स और समुद्री उत्पाद खरीदता है. जबकि भारत ब्रिटेन से बहुमूल्य रत्न, धातु, अयस्क, इंजीनियरिंग आइटम्स, इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पाद, रसायन आदि मंगवाता है. 

स्कॉच व्हिस्की की बढ़ेगी डिमांड
भारत में ब्रिटेन की स्कॉच व्हिस्की की काफी डिमांड है. यही वजह है कि फ्रांस को पछाड़ते हुए भारत ब्रिटेन की स्कॉच व्हिस्की का सबसे बड़ा बाजार बन गया है. आंकड़े बताते हैं कि भारत का वर्ष 2022 में ब्रिटेन से स्कॉच व्हिस्की का आयात 60 प्रतिशत बढ़ गया था. स्कॉच व्हिस्की संगठन (SWA) की तरफ से पिछले साल जारी आंकड़ों के अनुसार, ब्रिटेन की स्कॉच व्हिस्की का भारत में आयात बढ़ रहा है. 2021 के मुकाबले 2022 में इसमें 60 प्रतिशत ज्यादा की वृद्धि हुई और उसने इस मामले में फ्रांस को भी पीछे छोड़ दिया है. भारत ने पिछले साल स्कॉच की 700 मिली वाली 21 करोड़ 90 लाख बोतल आयात कीं, जबकि फ्रांस ने 20 करोड़ पांच लाख बोतल मंगवाईं. यदि पिछले एक दशक की बात करें, तो भारत के स्कॉच बाजार में 200 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है.

इम्पोर्ट ड्यूटी में मिलेगी राहत 
भारत और ब्रिटेन के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को लेकर चल रही बातचीत में व्हिस्की का आयात एक अहम मुद्दा है. फिलहाल, भारत में स्कॉच व्हिस्की के आयात पर 150 प्रतिशत टैरिफ लगता है. यदि ये डील फाइनल होती है, तो इसका सबसे ज्यादा फायदा ब्रिटेन की व्हिस्की कंपनियों को मिलेगा. स्कॉच व्हिस्की संगठन का मानना है कि FTA से उन्हें अगले पांच सालों में एक अरब पाउंड की अतिरिक्त ग्रोथ मिल सकती है. यही वजह है कि स्कॉच व्हिस्की संगठन जल्द से जल्द FTA पर मुहर लगते देखना चाहता है. ब्रिटिश सरकार भी जानती है कि भारत का लगातार विकसित होता बाजार उसकी आर्थिक सेहत को फायदा पहुंचा सकता है, इसलिए ऋषि सुनक इसी साल मार्च के अंत तक FAT को फाइनल करना चाहते हैं.


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