EaseMyTrip के सीईओ निशांत पिट्टी ने कर्ज में डूबी Go First को लेकर क्यों बदला मन?

गो फर्स्ट एयरलाइन के विमानों ने आखिरी उड़ान पिछले साल मई में भरी थी, उसके बाद से वो जमीन पर खड़े हैं.

Last Modified:
Monday, 27 May, 2024
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गो फर्स्ट एयरलाइन (Go First Airline) के विमान पिछले एक साल से जमीन पर खड़े हैं. कर्ज के बोझ में दबी इस एयरलाइन को खरीदने के लिए ईजमाईट्रिप (EaseMyTrip) के को-फाउंडर और CEO निशांत पिट्टी (Nishant Pitti) ने दिलचस्पी दिखाई थी. लेकिन अब उन्होंने अपने कदम वापस खींच लिए हैं. पिट्टी के अपना मन बदलने से गो फर्स्ट के विमानों को फिर से हवा में उड़ते देखने की आस टूट गई है. मालदीव विवाद के दौरान सुर्खियों में आए पिट्टी का कहना है कि सावधानीपूर्वक विचार करने के बाद उन्होंने Go First की बोली से हटने का फैसला किया है.

अजय सिंह के साथ लगाई थी बोली
निशांत पिट्टी के मेजॉरिटी स्टेक वाली कंपनी 'बिजी बी' ने कुछ वक्त पहले गो फर्स्ट में हिस्सेदारी खरीदने की इच्छा दिखाई थी. इसके लिए फरवरी 2024 में कंपनी ने स्पाइसजेट एयरलाइन के MD और चेयरमैन अजय सिंह के साथ मिलकर बोली लगाई थी. लेकिन अब निशांत पिट्टी इस डील से पीछे हट गए हैं. हालांकि, अभी ये स्पष्ट नहीं है कि क्या अजय सिंह अकेले गो फर्स्ट को खरीदने की कोशिश करेंगे या फिर निशांत की तरह उन्होंने भी आगे नहीं बढ़ने का निर्णय लिया है. बता दें कि बिजी बी एयरवेज प्राइवेट लिमिटेड निशांत पिट्टी और अजय सिंह का एक जॉइंट वेंचर है.

इस वजह से पीछे खींचे कदम
एक्सपर्ट्स का मानना है कि निशांत पिट्टी ने एविएशन सेक्टर में बढ़ती प्रतियोगिता के चलते यह निर्णय लिया है. इंडिगो, एयर इंडिया, स्पाइसजेट और अकासा एयर जैसी कंपनियां पहले से ही मौजूद हैं. इंडिगो देश की नंबर वन एयरलाइन है. टाटा समूह के हाथों में आने के बाद से एयर इंडिया भी लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रही है. दिवंगत निवेशक राकेश झुनझुनवाला की एयरलाइन अकासा एयर ने थोड़े समय में काफी कुछ हासिल किया है. स्पाइसजेट भले ही तमाम संकटों में उलझी हो, लेकिन उड़ान भर रही है. इसके अलावा, जेट एयरवेज भी पुन: वापसी की कोशिश में है. ऐसे में Go First के लिए मजबूती से पैर जमाना उतना आसान नहीं होगा. एक्सपर्ट्स के अनुसार, उड़ान शुरू करने के बाद भी गो फर्स्ट के लिए बड़े पैमाने पर नकदी की जरूरत होगी, यानी ईंधन की तरफ उसमें लगातार पैसा लगाना होगा, इसके बाद ही कहीं जाकर प्रॉफिट की संभावना बनेगी. इसलिए पुट्टी ने कदम पीछे खींचने में ही भलाई समझी है. 

54 विमानों का रजिस्ट्रेशन रद्द  
संकट में घिरी गो फर्स्ट के खिलाफ एविएशन रेगुलेटर डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) ने बड़ा कदम उठाते हुए 1 मई को उसके 54 विमानों का रजिस्ट्रेशन कैंसिल कर दिया था. दरअसल, 26 अप्रैल को दिल्ली हाई कोर्ट ने गो फर्स्ट की ओर से लीज पर लिए गए विमानों को डी-रजिस्ट्रेशन करने के लिए कहा था. इसके बाद DGCA ने यह कार्रवाई की. पेमब्रोक एविएशन, एक्सिपिटर इनवेस्टमेंट्स एयरक्राफ्ट्स 2 लिमिटेड, EOS एविएशन और SMBC एविएशन ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर उन विमानों को रिलीज करने की मांग की थी, जो उन्होंने गो फर्स्ट को लीज पर दिए गए थे. बता दें कि एयरलाइन इस समय दिवालिया प्रक्रिया के गुजर रही है.

एयरलाइन पर भारी भरकम है कर्जा 
गो फर्स्ट ने पिछले साल 2 मई को बताया था कि वो 3, 4 और 5 मई की अपनी सभी फ्लाइट कैंसिल कर रही है. इसके बाद से गो फर्स्ट से विमान आज तक उड़ान नहीं भर पाए हैं. गो फर्स्ट को 6,521 करोड़ रुपए का कर्जा चुकाना है. सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया को एयरलाइन से सबसे ज्यादा 1,987 करोड़ रुपए लेना है. बैंक ऑफ बड़ौदा का 1,430 करोड़ रुपए, डॉयचे बैंक का 1,320 करोड़ रुपए और IDBI बैंक का एयरलाइन पर 58 करोड़ रुपए बकाया है. एयरलाइन ने दावा किया था कि इंजनों की सप्लाई नहीं होने के चलते उसकी स्थिति खराब होती गई. 

वाडिया समूह की है गो फर्स्ट  
Go फर्स्ट वाडिया ग्रुप की बजट एयरलाइन है. 29 अप्रैल 2004 को गो फर्स्ट की शुरुआत हुई थी. इस एयरलाइन के बेड़े में 59 विमान शामिल हैं. गो फर्स्ट 35 डेस्टिनेशन के लिए फ्लाइट ऑपरेट करती थी. इसमें से 27 घरेलू और 8 अंतर्राष्ट्रीय डेस्टिनेशन शामिल थे. एयरलाइन ने साल 2021 में अपने ब्रैंडनेम  को Go Air से बदलकर गो फर्स्ट कर दिया था. 


AI से ट्रैफिक मैनेजमेंट तक, परिवहन क्षेत्र में बदल रही तकनीक की तस्वीर; एक्सपो में दिखे नए समाधान

ANPR कैमरे, बैरियरलेस टोलिंग और रियल-टाइम मॉनिटरिंग जैसे समाधानों पर रहा फोकस, 300 से ज्यादा ब्रांड ने प्रदर्शित की परिवहन क्षेत्र की तकनीक

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Tuesday, 13 October, 2026
Last Modified:
Tuesday, 13 October, 2026
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हाईवे पर वाहनों की पहचान से लेकर ट्रैफिक की निगरानी और बिना बैरियर टोल वसूली तक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ऑटोमेशन परिवहन क्षेत्र में बदलाव ला रहे हैं. इन तकनीकों से जुड़े समाधानों की झलक नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित ट्रांसपोर्ट + ट्रैफिक इंफ्राटेक एक्सपो 2026 में देखने को मिली. 7 और 8 अक्टूबर को आयोजित इस एक्सपो में 300 से ज्यादा ब्रांड ने हिस्सा लिया. प्रदर्शनी में AI आधारित ट्रैफिक मैनेजमेंट, ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR), मल्टीलेन फ्री फ्लो (MLFF) टोलिंग और सड़क सुरक्षा से जुड़े समाधान प्रमुख रहे.

एक्सपो के 14वें संस्करण के साथ रोड इंफ्राटेक एक्सपो, पार्किंग इंफ्राटेक एक्सपो और आईटीएस इंडिया कांग्रेस 2026 भी आयोजित किए गए. 6,500 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्र में फैली इस प्रदर्शनी में 28 से ज्यादा नए प्रतिभागियों ने भी अपने उत्पाद और तकनीकें पेश कीं.

वाहनों की पहचान से लेकर ट्रैफिक निगरानी तक AI का इस्तेमाल

प्रदर्शनी में पेश किए गए समाधानों में AI आधारित वीडियो एनालिटिक्स, ANPR कैमरे और रियल-टाइम घटना पहचान प्रणाली शामिल रहीं. इन तकनीकों के जरिए वाहनों की पहचान, यातायात की निगरानी और सड़क पर होने वाली घटनाओं का पता लगाने में मदद मिल सकती है.

इसके अलावा, कंपनियों ने कनेक्टेड वाहनों, सार्वजनिक परिवहन, ऊर्जा दक्ष प्रणालियों और सौर ऊर्जा आधारित समाधानों को भी प्रदर्शित किया. परिवहन बुनियादी ढांचे में बिजली आपूर्ति बाधित होने जैसी समस्याओं से निपटने के लिए भी तकनीकी समाधान पेश किए गए.

कंपनियों ने दिखाए ANPR और स्मार्ट टोलिंग से जुड़े उत्पाद

आदित्य इंफोटेक ने एसटीक्यूसी प्रमाणित उत्पादों की रेंज के साथ CP Plus के सर्विलांस कैमरे प्रदर्शित किए. वहीं, विजप्रो कंसलटेक ने रिकॉन ग्लोबल शटर कैमरा पेश किया. कंपनी के मुताबिक, यह AI आधारित ANPR तकनीक और Zebra के FXR90 RFID रीडर को एकीकृत करके वाहनों की पहचान में मदद करता है.

समृद्धि ऑटोमेशंस ने ANPR, मल्टीलेन फ्री फ्लो टोलिंग, कमांड सेंटर और घटना पहचान प्रणालियों से जुड़े समाधान प्रदर्शित किए. नेत्राबिट नेटवर्क्स ने हाईवे यूपीएस समाधान पेश किए, जो बिजली आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम के बुनियादी ढांचे को चालू रखने में मदद करते हैं.

काटालाइन लिमिटेड, न्यूटेक वीडियो सिस्टम्स, गो आईपी ग्लोबल सर्विसेज और प्रमा इंडिया ने भी सड़क मार्किंग, सुरक्षा प्रणालियों, एलईडी वीडियो वॉल, वैरिएबल मैसेज साइन, ऑटोमेटेड बैरियर, RFID रीडर और ANPR तकनीक से जुड़े उत्पाद प्रदर्शित किए.

स्मार्ट परिवहन और विकसित भारत 2047 पर चर्चा

एक्सपो के साथ आयोजित आईटीएस इंडिया कांग्रेस 2026 की थीम 'कनेक्टेड, इंटीग्रेटेड एंड इंटेलिजेंट मोबिलिटी फॉर विकसित भारत 2047' थी. इसमें AI आधारित ट्रैफिक प्रबंधन, डिजिटल प्रवर्तन, बैरियरलेस टोलिंग, कनेक्टेड मोबिलिटी, पीएम गति शक्ति के तहत मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स और इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम के मानकों जैसे विषयों पर चर्चा हुई.

उद्घाटन सत्र में सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के अपर सचिव महमूद अहमद ने कहा कि विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को हासिल करने में परिवहन और कनेक्टिविटी की अहम भूमिका है. उन्होंने स्मार्ट, एकीकृत और सुगम परिवहन व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया.

मेसे फ्रैंकफर्ट एशिया होल्डिंग्स लिमिटेड के कार्यकारी निदेशक राज मानेक ने परिवहन क्षेत्र में बुद्धिमान और एकीकृत बुनियादी ढांचे की बढ़ती भूमिका को रेखांकित किया. आईटीएस इंडिया कांग्रेस के अध्यक्ष अखिलेश श्रीवास्तव ने भी बुद्धिमान परिवहन प्रणालियों के विकास के लिए सरकार और उद्योग के बीच संवाद को महत्वपूर्ण बताया.

यह एंगल पहले वाले संस्करण से अलग है, क्योंकि इसमें आयोजन की खबर देने के बजाय परिवहन क्षेत्र में इस्तेमाल हो रही तकनीकों और उनके संभावित उपयोग को प्रमुखता दी गई है. हालांकि, यदि इसे आज प्रकाशित करना है, तो वास्तविक तकनीकी घोषणाओं या किसी खास उत्पाद की नई उपलब्धि की पुष्टि किए बिना उसे नई घोषणा के रूप में पेश नहीं करना चाहिए.


भारत में बनेगा पहला AI-पायलटेड फाइटर विमान, Flying Wedge ने पेश किया FWD Supreme का प्रोटोटाइप

नई दिल्ली में हुआ अनावरण, 1,500 किमी से अधिक रेंज और AI आधारित स्वायत्त लड़ाकू अभियानों के लिए विकसित किया जा रहा विमान; कंपनी का लक्ष्य भारत में ही डिजाइन और निर्माण करना

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Tuesday, 13 October, 2026
Last Modified:
Tuesday, 13 October, 2026
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भारत की डिफेंस और एयरोस्पेस इंडस्ट्री में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित तकनीक को बढ़ावा देने की दिशा में Flying Wedge Defence & Aerospace (FWDA) ने अपना FWD Supreme कार्यक्रम पेश किया है. कंपनी ने मंगलवार को नई दिल्ली के ली मेरिडियन होटल में आयोजित कार्यक्रम में भारत के पहले AI-पायलटेड फाइटर एयरक्राफ्ट प्रोग्राम का पूर्ण आकार का स्थिर प्रोटोटाइप प्रदर्शित किया. कंपनी के मुताबिक, इस कार्यक्रम का उद्देश्य AI आधारित स्वायत्त लड़ाकू विमान विकसित करना और भारत की घरेलू एयरोस्पेस निर्माण क्षमताओं को मजबूत करना है.

दुनियाभर में रक्षा क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्वायत्त विमानों और लड़ाकू अभियानों के नए तरीकों पर जोर बढ़ रहा है. ऐसे में FWD Supreme को भारत की इसी दिशा में एक पहल के रूप में पेश किया गया है. कार्यक्रम में रक्षा खरीद महानिदेशक (DG Acquisition) ए. अनबरासु (IAS), वेपन सिस्टम्स के महानिदेशक एयर मार्शल प्रेम कुमार, पश्चिमी कमान के चीफ ऑफ स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल पुनीत आहूजा और ADG Acquisition Tech मेजर जनरल तरुण अग्रवाल शामिल हुए. SketchPixel के CEO और KEYDEF के निदेशक मिगुएल अब्रू भी कार्यक्रम में मौजूद रहे.

स्वायत्त लड़ाकू अभियानों के लिए विकसित होगा विमान

कार्यक्रम में प्रदर्शित FWD Supreme Heavy एक टन श्रेणी का विमान है, जिसे स्वायत्त लड़ाकू अभियानों के लिए विकसित करने की योजना है. कंपनी के अनुसार, इसे खुफिया जानकारी जुटाने, निगरानी और टोही (ISR), हमले तथा अन्य लड़ाकू विमानों के साथ मिलकर अभियान चलाने जैसे विभिन्न कार्यों के लिए कॉन्फिगर किया जा सकता है.

FWDA के सुहास तेजस्कंदा ने कहा कि FWD Supreme भारतीय डिजाइन, इंजीनियरिंग और विनिर्माण के जरिए उन्नत रक्षा क्षमताएं विकसित करने की कंपनी की प्रतिबद्धता को दर्शाता है. उन्होंने कहा कि कंपनी का लक्ष्य AI-पायलटेड लड़ाकू विमानों की एक पूरी श्रृंखला विकसित करना है, जो परिचालन जरूरतों को पूरा करने के साथ किफायती भी हो.

उन्होंने बताया कि 'ऑपरेशन ट्रिपल सेवन' के माध्यम से कंपनी अंतरराष्ट्रीय साझेदारों को भारत के नेतृत्व वाले विकास और विनिर्माण कार्यक्रम से जोड़ना चाहती है. इससे देश की स्वदेशी एयरोस्पेस क्षमताओं को मजबूत करने में मदद मिलेगी.

सुहास तेजस्कंदा ने यह भी कहा कि FWD Supreme Lite विमान टैक्सी ट्रायल यानी जमीन पर अपने इंजन और नियंत्रण प्रणालियों के परीक्षण के चरण को पार कर चुका है और अपनी पहली उड़ान के लिए तैयार हो रहा है.

'मेक इन इंडिया' और आत्मनिर्भरता पर जोर

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि और रक्षा खरीद महानिदेशक ए. अनबरासु ने विमान के अनावरण पर बधाई देते हुए कहा कि भारतीय रक्षा क्षेत्र तेजी से आगे बढ़ रहा है. उन्होंने रूस-यूक्रेन युद्ध और मध्य पूर्व में जारी संघर्ष का उल्लेख करते हुए कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में रक्षा तैयारियों का महत्व बढ़ गया है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने 'JAI' का मंत्र दिया है, जिसका अर्थ जॉइंटनेस, आत्मनिर्भरता और नवाचार है. यह भारतीय रक्षा क्षेत्र की प्रगति का आधार होना चाहिए. उन्होंने कहा कि सभी संबंधित पक्षों को मिलकर काम करना होगा और नवाचार से प्रेरित 'मेक इन इंडिया' तथा 'मेड इन इंडिया' की दिशा में आगे बढ़ना होगा.

अनबरासु ने जोधपुर में आयोजित तरंग शक्ति अभ्यास का उल्लेख करते हुए कहा कि आज युद्ध के लिए तैयारी केवल उपलब्ध रक्षा प्लेटफॉर्म की संख्या पर निर्भर नहीं करती. यह इस बात पर भी निर्भर करती है कि कोई देश कितनी प्रभावी ढंग से जानकारी जुटाता है, उसे समझता है, तकनीक विकसित करता है और विभिन्न क्षमताओं को एकीकृत करता है.

उन्होंने कहा कि जो देश इन सभी क्षमताओं को एक साथ जोड़ सकते हैं, उन्हें अधिक संख्या में प्लेटफॉर्म रखने वाले देशों के मुकाबले भी रणनीतिक बढ़त मिल सकती है. उनके मुताबिक, FWD Supreme जैसे कार्यक्रम भारत में ही उन्नत रक्षा प्रणालियों के विकास और निर्माण की दिशा में सरकार की नीति के अनुरूप हैं.

AI आधारित विमानों के समूह से लड़ाई की रणनीति बदलने का लक्ष्य

FWD Supreme कार्यक्रम के केंद्र में FWDA की 'मोबिंग डॉक्ट्रिन' है. यह हवाई युद्ध की ऐसी अवधारणा है, जिसमें AI-पायलटेड विमान एक समन्वित समूह के रूप में काम करेंगे. पारंपरिक मॉडल में सीमित संख्या में महंगे और उच्च क्षमता वाले विमानों पर निर्भरता रहती है. इसके विपरीत, इस अवधारणा में कई स्वायत्त विमान एक समूह या झुंड की तरह काम करते हुए जानकारी साझा करेंगे और वास्तविक समय में समन्वित निर्णय लेंगे.

कंपनी का लक्ष्य बड़ी संख्या में नेटवर्क से जुड़े सक्षम विमानों को तैनात करके हवाई युद्ध की लागत और उसके आर्थिक समीकरण को बदलना है. इस रणनीति के तहत मिशन को जारी रखते हुए कुछ विमानों के नुकसान को सहन करने और संख्या, स्वायत्तता तथा समन्वय के जरिए परिचालन बढ़त हासिल करने की परिकल्पना की गई है.

FWD Supreme की प्रमुख तकनीकी विशेषताएं

कंपनी की ओर से जारी शुरुआती तकनीकी विवरण के मुताबिक, FWD Supreme कार्यक्रम के पहले चरण में 1,500 किलोग्राम से अधिक वजन श्रेणी के AI आधारित स्वायत्त लड़ाकू विमान विकसित करने की योजना है. इसके प्रमुख तकनीकी विवरण इस प्रकार हैं:

-विमान का प्रकार: AI आधारित स्वायत्त लड़ाकू विमान.
-वजन श्रेणी: 1,500 किलोग्राम से अधिक.
-पेलोड क्षमता: लगभग 350 किलोग्राम.
-प्रोपल्शन: 5 किलो न्यूटन (kN).
-अधिकतम गति: उच्च सबसोनिक गति, लगभग मैक 0.8 से 0.85.
-क्रूज गति: लगभग 500 से 600 किलोमीटर प्रति घंटा.
- रेंज: 1,500 किलोमीटर से अधिक.
- उड़ान की अवधि: दो घंटे से अधिक.
-संचार प्रणाली: सैटेलाइट कम्युनिकेशन (SATCOM).
-डिजाइन: फ्लाइंग-विंग कॉन्फिगरेशन और आंतरिक वेपन बे.
-अनुमानित आकार: लगभग 10×10 मीटर.

आगे तकनीक विकास और परीक्षण पर रहेगा फोकस

कंपनी के मुताबिक, FWD Supreme कार्यक्रम का अगला चरण तकनीक विकास, परीक्षण और विभिन्न प्रणालियों के एकीकरण पर केंद्रित होगा. इसके साथ ही Supreme श्रेणी के अन्य विमानों को विकसित करने की दिशा में भी काम किया जाएगा.

FWDA ने 'ऑपरेशन ट्रिपल सेवन' के तहत अंतरराष्ट्रीय एयरोस्पेस और विनिर्माण साझेदारियां विकसित करने की योजना बनाई है. इसका उद्देश्य उन्नत लड़ाकू विमानन के लिए भारत के नेतृत्व में एक ऐसा इकोसिस्टम तैयार करना है, जिसमें डिजाइन, तकनीकी विकास और विनिर्माण की क्षमताएं देश में विकसित हों.

हालांकि, कार्यक्रम के तहत विमान की पहली उड़ान, परीक्षण और परिचालन तैनाती की विस्तृत समयसीमा अभी घोषित नहीं की गई है. ऐसे में FWD Supreme की वास्तविक परिचालन क्षमताओं और रक्षा क्षेत्र में इसके संभावित योगदान का आकलन आगे होने वाले परीक्षणों और तकनीकी विकास के आधार पर किया जा सकेगा.


$100 मिलियन के फाइटर जेट से 20-30 गुना सस्ता हो सकता है Flying Wedge का AI विमान, Lite वेरिएंट में 90% स्वदेशी सामग्री

Flying Wedge Defence के फाउंडर और CEO सुहास तेजस्कंदा ने बिजनेसवर्ल्ड से बातचीत में बताया कि 3-5 मिलियन डॉलर की लागत वाले AI-पावर्ड एयरक्राफ्ट से हवाई युद्ध की लागत घटाने में मदद मिल सकती है. कंपनी की योजना मानवरहित विमानों को एक समूह के रूप में संचालित करने की तकनीक विकसित करने की है.

रितु राणा by
Published - Tuesday, 13 October, 2026
Last Modified:
Tuesday, 13 October, 2026
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भारत की रक्षा और एयरोस्पेस इंडस्ट्री में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित लड़ाकू विमानों की दिशा में एक नई पहल सामने आई है. Flying Wedge Defence & Aerospace (FWDA) ने 13 अक्टूबर को नई दिल्ली में अपने AI-पायलटेड फाइटर एयरक्राफ्ट प्रोग्राम FWD Supreme का पूर्ण आकार का स्थिर प्रोटोटाइप पेश किया. कंपनी का दावा है कि इस तरह के स्वायत्त विमान भविष्य में हवाई युद्ध की रणनीति के साथ-साथ रक्षा अभियानों की लागत को भी बदल सकते हैं.

बिजनेसवर्ल्ड से बातचीत में Flying Wedge के फाउंडर और CEO सुहास तेजस्कंदा ने कहा कि मौजूदा रक्षा बाजार में महंगे लड़ाकू विमानों और छोटे, किफायती ड्रोन के बीच एक बड़ा अंतर है. कंपनी अपने AI-पावर्ड विमानों के जरिए इसी अंतर को भरने की कोशिश कर रही है. उनके मुताबिक, जहां पारंपरिक फाइटर जेट की कीमत करीब 100 मिलियन डॉलर तक हो सकती है, वहीं कंपनी 3-4 मिलियन डॉलर की लागत वाले प्लेटफॉर्म विकसित करने पर काम कर रही है.

महंगे फाइटर जेट और छोटे ड्रोन के बीच की खाई भरने का लक्ष्य
सुहास तेजस्कंदा ने कहा कि भारत में बड़ी संख्या में ड्रोन निर्माता अच्छा काम कर रहे हैं और इस इंडस्ट्री में नए प्लेयर्स भी आ रहे हैं. हालांकि, बड़े रक्षा प्लेटफॉर्म की बात करें तो करीब 100 मिलियन डॉलर की कीमत वाले फाइटर जेट खरीदे जा रहे हैं. ऐसे में महंगे लड़ाकू विमानों और छोटे, किफायती प्लेटफॉर्म के बीच एक बड़ा अंतर मौजूद है.

उन्होंने कहा कि टैक्टिकल फाइटर एयरक्राफ्ट इस अंतर को भर सकते हैं. युद्ध के दौरान किसी महंगे लड़ाकू विमान का नुकसान किसी भी देश के लिए काफी महंगा साबित हो सकता है. पश्चिम एशिया में हुए संघर्षों का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि महंगे सैन्य विमान और ड्रोन फोर्स मल्टीप्लायर के रूप में काम कर सकते हैं. भविष्य में इन्हें कोलैबोरेटिव कॉम्बैट एयरक्राफ्ट के तौर पर भी इस्तेमाल किया जा सकता है.

कंपनी का लक्ष्य ऐसे प्लेटफॉर्म विकसित करना है, जिन्हें अपेक्षाकृत कम लागत पर तैयार किया जा सके और जरूरत के मुताबिक बड़ी संख्या में तैनात किया जा सके. इससे महंगे विमानों पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय अलग-अलग क्षमताओं वाले विमानों का एक समन्वित बेड़ा तैयार करने का विकल्प मिल सकता है.

पायलट के बिना काम करने के लिए AI तकनीक
सुहास तेजस्कंदा के मुताबिक, इस AI-पावर्ड विमान की एक प्रमुख विशेषता यह है कि इसे उड़ाने के लिए विमान में पायलट की जरूरत नहीं होती. इसके अलावा, इसे ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन से कोई व्यक्ति लगातार नियंत्रित करे, इसकी भी आवश्यकता नहीं होती. विमान में मौजूद कंप्यूटर सिस्टम परिस्थितियों का आकलन करके स्वायत्त रूप से निर्णय लेने के लिए विकसित किया जा रहा है.

इस तकनीक का उद्देश्य विमान को बदलती परिस्थितियों को समझने और उनके अनुसार काम करने में सक्षम बनाना है. इससे सैन्य अभियानों में मानवीय जोखिम कम करने और ऑपरेशन की लागत घटाने में मदद मिल सकती है. हालांकि, ऐसे स्वायत्त विमानों की वास्तविक परिचालन क्षमता, निर्णय लेने की सीमाएं और सुरक्षा संबंधी आवश्यकताएं परीक्षण तथा तकनीकी सत्यापन के बाद ही स्पष्ट होंगी.

'मोबिंग डॉक्ट्रिन' से एक साथ काम करेंगे कई मानवरहित विमान
Flying Wedge ने अपने विमानों के संचालन के लिए 'मोबिंग डॉक्ट्रिन' की अवधारणा विकसित की है. इसके तहत कई मानवरहित एयरक्राफ्ट एक मानव-संचालित विमान के साथ मिलकर काम कर सकते हैं. सुहास तेजस्कंदा के मुताबिक, 15 से 20 मानवरहित एयरक्राफ्ट एक मानव-संचालित विमान को रणनीतिक सहयोग और सुरक्षा देने के लिए इस्तेमाल किए जा सकते हैं.

इस अवधारणा में विमान अलग-अलग काम करने के बजाय एक समन्वित समूह के रूप में काम करेंगे. वे मिशन की जरूरत के मुताबिक जानकारी साझा कर सकते हैं और अलग-अलग भूमिकाएं निभा सकते हैं. इससे कम लागत वाले कई विमानों को एक साथ तैनात करके सैन्य अभियानों की क्षमता बढ़ाने की संभावना बनती है.

कंपनी की ओर से पेश की गई इस अवधारणा का उद्देश्य केवल एक विमान की क्षमता बढ़ाना नहीं, बल्कि कई विमानों को एक साथ काम करने वाले नेटवर्क के रूप में विकसित करना है.

पारंपरिक फाइटर जेट से 20-30 गुना कम हो सकती है लागत
रक्षा खर्च पर संभावित असर के बारे में बात करते हुए सुहास तेजस्कंदा ने कहा कि करीब 100 मिलियन डॉलर के पारंपरिक फाइटर जेट की तुलना में 3 मिलियन डॉलर की लागत वाला विमान काफी किफायती हो सकता है.

उन्होंने कहा कि यदि ऐसे विमान में महंगे हथियार और अत्याधुनिक सेंसर भी शामिल किए जाएं, तब भी इसकी लागत 5 मिलियन डॉलर से अधिक नहीं होनी चाहिए. इस अनुमान के आधार पर ऐसे प्लेटफॉर्म की लागत पारंपरिक महंगे लड़ाकू विमान की तुलना में लगभग 20 से 30 गुना तक कम हो सकती है.

कंपनी के इस अनुमान के मुताबिक, कम लागत वाले विमानों को बड़ी संख्या में तैनात करने से भारत को सीमित रक्षा बजट में अपनी हवाई युद्ध क्षमता बढ़ाने का विकल्प मिल सकता है. हालांकि, वास्तविक लागत का आकलन विमान के अंतिम डिजाइन, हथियारों, सेंसर, रखरखाव और उत्पादन की संख्या के आधार पर करना होगा.

लाइट वेरिएंट में 90% तक स्वदेशी सामग्री
मेक इन इंडिया और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के बारे में सुहास तेजस्कंदा ने कहा कि स्वदेशी तकनीक विकसित करना और देश में ही निर्माण करना इस क्षेत्र के लिए बेहद अहम है.

उन्होंने बताया कि कंपनी के लाइट वेरिएंट में करीब 90% स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा है. वहीं, 1.5 टन क्षमता वाले हेवी वेरिएंट में फिलहाल लगभग 65% स्वदेशी सामग्री है. उनके मुताबिक, इसमें स्वदेशी इंजन शामिल किए जाने के बाद घरेलू सामग्री की हिस्सेदारी बढ़कर करीब 85% तक पहुंच सकती है.

इससे भारत की रक्षा विनिर्माण क्षमता को मजबूत करने और विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है. हालांकि, स्वदेशी सामग्री की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए इंजन, इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य महत्वपूर्ण प्रणालियों का घरेलू स्तर पर विकास अहम होगा.

FWD Supreme के अगले चरण में परीक्षण और तकनीकी विकास
FWD Supreme के अनावरण के दौरान कंपनी ने बताया कि कार्यक्रम के अगले चरण में तकनीक के विकास, परीक्षण और विभिन्न प्रणालियों के एकीकरण पर ध्यान दिया जाएगा. इसके साथ ही Supreme परिवार के अन्य विमानों को विकसित करने की योजना भी है.

कंपनी के मुताबिक, FWD Supreme Heavy एक टन श्रेणी का विमान है, जिसे स्वायत्त लड़ाकू अभियानों के लिए विकसित किया जा रहा है. इसे खुफिया जानकारी जुटाने, निगरानी और टोही (ISR), हमले तथा अन्य विमानों के साथ मिलकर काम करने वाले अभियानों के लिए कॉन्फिगर करने की योजना है.

FWDA के CEO सुहास तेजस्कंदा ने कहा कि FWD Supreme भारतीय डिजाइन, इंजीनियरिंग और विनिर्माण के माध्यम से उन्नत रक्षा क्षमताएं विकसित करने की कंपनी की प्रतिबद्धता को दर्शाता है. उन्होंने यह भी बताया कि FWD Supreme Lite टैक्सी ट्रायल पूरा कर चुका है और अपनी पहली उड़ान की तैयारी कर रहा है.

कंपनी 'ऑपरेशन ट्रिपल सेवन' के तहत अंतरराष्ट्रीय एयरोस्पेस और विनिर्माण साझेदारियां विकसित करने की भी योजना बना रही है. इसका उद्देश्य भारत के नेतृत्व में उन्नत लड़ाकू विमानन के विकास और निर्माण का इकोसिस्टम तैयार करना है.

कुल मिलाकर, FWD Supreme कार्यक्रम का फोकस AI आधारित स्वायत्त विमान, कम लागत वाले रक्षा प्लेटफॉर्म और एक साथ काम करने वाले मानवरहित विमानों की अवधारणा पर है. इसकी व्यावहारिक सफलता आने वाले समय में परीक्षण, तकनीकी प्रदर्शन, उत्पादन लागत और रक्षा अभियानों में इसके वास्तविक उपयोग पर निर्भर करेगी.
 

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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Tuesday, 13 October, 2026
Last Modified:
Tuesday, 13 October, 2026
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10 मिनट में घर तक सामान पहुंचाने वाली क्विक कॉमर्स कंपनियों Blinkit, Swiggy Instamart और Amazon Now के लिए आने वाले दिनों में खाद्य सुरक्षा से जुड़े नियम सख्त हो सकते हैं. भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर बिकने वाले खाद्य पदार्थों की जानकारी, उनकी स्टोरेज व्यवस्था और उत्पादों से जुड़े दावों की निगरानी बढ़ाने पर विचार कर रहा है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रस्तावित बदलावों का उद्देश्य उपभोक्ताओं को खाद्य उत्पादों के बारे में सही जानकारी उपलब्ध कराना और सुरक्षा मानकों के उल्लंघन पर रोक लगाना है.

FSSAI के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) राजित पुनहानी के मुताबिक, नियामक इन कंपनियों के लिए नियमों को सख्त बनाने और उनकी जवाबदेही तय करने की दिशा में काम कर रहा है. हालांकि, प्रस्तावित बदलावों को लेकर अंतिम नियमों की स्थिति स्पष्ट होना अभी बाकी है.

ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर दिखानी पड़ सकती है पूरी जानकारी

प्रस्तावित नियमों के तहत क्विक कॉमर्स और ऑनलाइन ग्रॉसरी प्लेटफॉर्म पर खाद्य उत्पादों की लिस्टिंग में मैन्युफैक्चरिंग डेट, एक्सपायरी डेट और बैच नंबर जैसी जानकारियां दिखाना जरूरी हो सकता है. इससे ग्राहकों को खरीदारी से पहले उत्पाद की गुणवत्ता और उसकी उपयोग अवधि के बारे में जानकारी मिल सकेगी.

इसके अलावा, अगर किसी उत्पाद को लेकर भ्रामक दावा किया जाता है, तो ऐसे मामलों में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी भी तय की जा सकती है. इससे कंपनियों को अपने प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध खाद्य उत्पादों की जानकारी और उनसे जुड़े दावों की निगरानी अधिक सावधानी से करनी पड़ सकती है.

डार्क स्टोर और डार्क किचन की बढ़ सकती है जांच

FSSAI खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए डार्क स्टोर की जांच बढ़ाने पर भी विचार कर रहा है. क्विक कॉमर्स कंपनियां इन स्टोर का इस्तेमाल सामान को नजदीकी इलाकों में रखने और कम समय में ग्राहकों तक पहुंचाने के लिए करती हैं.

जांच के दौरान यह देखा जा सकता है कि खाद्य पदार्थों को निर्धारित तापमान और सुरक्षित परिस्थितियों में रखा जा रहा है या नहीं. इसमें फ्रोजन फूड यानी जमे हुए खाद्य पदार्थों के भंडारण पर भी ध्यान दिया जा सकता है. वहीं, डार्क किचन की तस्वीर और पता उपलब्ध कराना अनिवार्य करने के प्रस्ताव पर भी विचार हो रहा है. डार्क किचन ऐसे स्थान होते हैं, जहां डिलीवरी के लिए खाना तैयार किया जाता है, लेकिन ग्राहकों के बैठकर खाने की व्यवस्था नहीं होती. इस कदम से खाद्य पदार्थ तैयार करने वाली जगहों की पहचान और उनकी निगरानी आसान हो सकती है.

Blinkit, Instamart और Amazon पर पहले भी हुई कार्रवाई

खाद्य सुरक्षा नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए FSSAI ने पिछले कुछ महीनों में जांच और नियामकीय कार्रवाई तेज की है. रिपोर्ट के मुताबिक, Blinkit, Swiggy Instamart, Flipkart और Amazon के भारतीय कारोबार को अलग-अलग मामलों में कार्रवाई का सामना करना पड़ा है. इन मामलों में उत्पादों की गलत ब्रांडिंग, प्रतिबंधित वस्तुओं की बिक्री और वैध लाइसेंस से संबंधित गड़बड़ियां शामिल हैं.

जुलाई में FSSAI की जांच के बाद Swiggy Instamart ने कहा था कि वह नियामक की ओर से चिह्नित उत्पादों की लिस्टिंग की समीक्षा कर रहा है और मामले को सुलझाने के लिए अधिकारियों के संपर्क में है. वहीं, Amazon ने कहा कि उसका प्लेटफॉर्म एक ऑनलाइन मार्केटप्लेस है, जहां स्वतंत्र विक्रेता अपने उत्पाद बेचते हैं. कंपनी के प्रवक्ता के मुताबिक, नियमों का पालन नहीं करने वाले उत्पादों को हटाया जाता है और संबंधित उत्पाद को प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया था.

खाद्य कंपनियां, होटल और रेस्टोरेंट भी निगरानी के दायरे में

FSSAI की सख्ती केवल क्विक कॉमर्स कंपनियों तक सीमित नहीं है. खाद्य उत्पाद बनाने वाली कंपनियों, होटलों और रेस्टोरेंट की गतिविधियां भी नियामक की निगरानी में हैं. उत्पादों की लेबलिंग, विज्ञापनों में किए जाने वाले दावों, बच्चों के लिए बनाए जाने वाले उत्पादों की मार्केटिंग और खाद्य पदार्थों के भंडारण जैसे पहलुओं की जांच की जा रही है.

रिपोर्ट के अनुसार, Nestle India, PepsiCo और Dabur India जैसी कंपनियों के साथ JW Marriott जैसे होटल संचालकों को भी नियमों के उल्लंघन से जुड़े मामलों में जवाब देना पड़ा है.

कुल मिलाकर, FSSAI के प्रस्तावित कदम ऑनलाइन खाद्य कारोबार में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ा सकते हैं. यदि नए नियम लागू होते हैं, तो क्विक कॉमर्स कंपनियों को उत्पादों की जानकारी, खाद्य पदार्थों के भंडारण और सुरक्षा मानकों के अनुपालन पर अधिक ध्यान देना होगा. इससे ग्राहकों को खरीदारी के समय बेहतर जानकारी मिलने और खाद्य सुरक्षा से जुड़े जोखिमों को कम करने में मदद मिल सकती है.


RBL बैंक के मुनाफे में 170% का उछाल, दूसरी तिमाही में ₹482 करोड़ पर पहुंचा प्रॉफिट

नेट इंटरेस्ट इनकम में 37% की बढ़ोतरी, एडवांस 42% और जमा राशि 34% बढ़ी; एसेट क्वालिटी में भी सुधार

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Tuesday, 13 October, 2026
Last Modified:
Tuesday, 13 October, 2026
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आरबीएल (RBL) बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में शानदार प्रदर्शन किया है. बैंक का शुद्ध मुनाफा (Net Profit) सालाना आधार पर 170% बढ़कर ₹482 करोड़ पर पहुंच गया. पिछले साल की समान तिमाही में बैंक का मुनाफा इससे काफी कम था. बैंक ने 12 अक्टूबर 2026 को अपने वित्तीय नतीजों की घोषणा की. मुनाफे में इस बढ़ोतरी के पीछे ब्याज आय में वृद्धि, कर्ज वितरण में तेजी और परिचालन लाभ में सुधार प्रमुख कारण रहे.

नेट इंटरेस्ट इनकम में 37% की बढ़ोतरी

बैंक की शुद्ध ब्याज आय (Net Interest Income) सालाना आधार पर 37% बढ़कर ₹2,131 करोड़ हो गई. वहीं, शुद्ध ब्याज मार्जिन (Net Interest Margin) बढ़कर 4.61% पर पहुंच गया, जो पिछले साल की समान तिमाही में 4.51% था.

बैंक का परिचालन मुनाफा (Operating Profit) 92% बढ़कर ₹1,396 करोड़ हो गया. इस दौरान कुल शुद्ध आय (Net Total Income) 29% बढ़कर ₹3,208 करोड़ रही. अन्य आय में 16% की वृद्धि हुई और यह ₹1,077 करोड़ पर पहुंच गई. इसमें मुख्य शुल्क आय (Core Fee Income) का योगदान रहा, जो 12% बढ़कर ₹1,040 करोड़ हो गई.

बैंक का परिचालन खर्च 3% बढ़कर ₹1,812 करोड़ रहा. हालांकि, आय के मुकाबले खर्च के अनुपात यानी कॉस्ट-टू-इनकम रेशियो में सुधार हुआ. यह वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही के 70.67% से घटकर 56.48% पर आ गया.

कर्ज वितरण और जमा राशि में तेजी

30 सितंबर 2026 तक RBL बैंक का शुद्ध एडवांस यानी वितरित कर्ज सालाना आधार पर 42% बढ़कर ₹1.42 लाख करोड़ हो गया. वहीं, कुल जमा राशि 34% की बढ़ोतरी के साथ ₹1.56 लाख करोड़ पर पहुंच गई.

रिटेल एडवांस 32% बढ़कर ₹79,465 करोड़ रहा. इसमें सुरक्षित रिटेल कर्ज (Secured Retail Advances) 52% बढ़कर ₹51,933 करोड़ हो गया. दूसरी ओर, असुरक्षित रिटेल कर्ज (Unsecured Retail Advances) में 6% की वृद्धि हुई और यह ₹27,532 करोड़ पर पहुंच गया. थोक कर्ज (Wholesale Advances) 56% बढ़कर ₹62,849 करोड़ रहा, जबकि कमर्शियल बैंकिंग एडवांस में 47% की बढ़ोतरी दर्ज की गई.

जमा राशि में मजबूत वृद्धि के बावजूद बैंक का करंट अकाउंट और सेविंग अकाउंट (CASA) अनुपात घटकर 27.2% रह गया. हालांकि, CASA जमा सालाना आधार पर 14% बढ़कर ₹42,526 करोड़ हो गई. ₹3 करोड़ से कम की जमा राशि वाली श्रेणी में जमा 16% बढ़कर ₹68,877 करोड़ रही. इसका कुल जमा राशि में हिस्सा 44% था.

RBL बैंक के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी आर. सुब्रमण्यकुमार ने कहा कि तिमाही के दौरान बैंक की परिसंपत्तियों और देनदारियों, दोनों में वृद्धि दर्ज की गई. उन्होंने बताया कि विदेशी मुद्रा में गैर-निवासी जमा (FCNR Deposits) जुटाने से बैंक की फंडिंग स्थिति मजबूत हुई है. इससे भविष्य में कारोबार बढ़ाने के लिए बैंक को अतिरिक्त लचीलापन मिला है.

एसेट क्वालिटी में सुधार, NPA घटा

RBL बैंक की एसेट क्वालिटी में भी सुधार हुआ है. वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में बैंक का ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (GNPA) अनुपात घटकर 1.02% रह गया, जबकि एक साल पहले इसी अवधि में यह 2.32% था.

इसी तरह, नेट नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (NNPA) अनुपात भी 0.57% से घटकर 0.29% पर आ गया. तकनीकी राइट-ऑफ सहित प्रोविजन कवरेज रेशियो 95.31% रहा.

हालांकि, इस दौरान क्रेडिट कॉस्ट में बढ़ोतरी हुई. यह पिछले साल की समान तिमाही के ₹503 करोड़ से बढ़कर ₹771 करोड़ हो गई. क्रेडिट कॉस्ट रेशियो भी 0.54% से बढ़कर 0.63% पर पहुंच गया.

कैपिटल एडिक्वेसी रेशियो में गिरावट

सितंबर 2026 के अंत में बैंक का कुल कैपिटल एडिक्वेसी रेशियो 30.1% रहा, जो जून 2026 के अंत में 33.3% था. इसी अवधि में कॉमन इक्विटी टियर-1 (CET1) अनुपात भी 32.2% से घटकर 29% पर आ गया. वहीं, तिमाही के दौरान बैंक का औसत लिक्विडिटी कवरेज रेशियो 148% रहा.

कुल मिलाकर, RBL बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में मुनाफे, ब्याज आय और कर्ज वितरण के मोर्चे पर मजबूत वृद्धि दर्ज की. साथ ही, बैंक के खराब कर्ज के अनुपात में कमी आई है. हालांकि, क्रेडिट कॉस्ट में बढ़ोतरी और कैपिटल एडिक्वेसी रेशियो में गिरावट पर भी नजर रहेगी.

 


भारत में 49.6 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले, अब घटेगी रफ्तार! रोजगार और कम कमाई बनी चुनौती

विश्व बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक, 2011 से 2023 के बीच भारत में करीब 49.6 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले. इसके बावजूद ग्रामीण इलाकों में गरीबी की दर शहरी क्षेत्रों से दोगुने से ज्यादा है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Tuesday, 13 October, 2026
Last Modified:
Tuesday, 13 October, 2026
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भारत में पिछले एक दशक में गरीबी कम करने के मोर्चे पर बड़ी प्रगति हुई है, लेकिन आगे इस रफ्तार को बनाए रखना आसान नहीं होगा. विश्व बैंक की अक्टूबर 2026 की गरीबी और समानता रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 4.20 डॉलर प्रतिदिन की आय सीमा के आधार पर गरीबी दर 2026 में अनुमानित 14.2 फीसदी से घटकर 2028 तक 12.1 फीसदी पर आ सकती है. हालांकि, रोजगार की गुणवत्ता, कम आय और ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी की अधिकता अब भी बड़ी चुनौतियां हैं.

2011 से 2023 के बीच गरीबी में बड़ी गिरावट

विश्व बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक, निम्न मध्यम आय वाले देशों के लिए निर्धारित गरीबी रेखा के नीचे रहने वाली भारत की आबादी का हिस्सा 2011 में 57.7 फीसदी था. यह 2023 में घटकर 16.1 फीसदी रह गया. इस दौरान करीब 49.6 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले.

अत्यंत गरीबी के मोर्चे पर भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है. क्रय शक्ति समता (PPP) के आधार पर 3 डॉलर प्रतिदिन की अंतरराष्ट्रीय गरीबी रेखा के अनुसार, भारत में अत्यंत गरीब आबादी का हिस्सा 2011 के 27.1 फीसदी से घटकर 2023 में 2.6 फीसदी रह गया.

हालांकि, ऊंची आय सीमा के आधार पर तस्वीर अब भी चिंताजनक है. रिपोर्ट के अनुसार, 2023 में भारत की करीब 80 फीसदी आबादी 8.30 डॉलर प्रतिदिन की उच्च मध्यम आय वाले देशों की गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन कर रही थी.

रोजगार और सरकारी योजनाओं से मिली मदद

विश्व बैंक ने गरीबी में कमी के पीछे कई प्रमुख कारण बताए हैं. इनमें लोगों के उपभोग खर्च में बढ़ोतरी, रोजगार के अवसरों का विस्तार, महिलाओं की रोजगार में बढ़ती भागीदारी और खाद्य सब्सिडी समेत सामाजिक सहायता योजनाओं का विस्तार शामिल है.

बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस के मुताबिक, ई-कॉमर्स और क्विक कॉमर्स सेवाओं के विस्तार से बड़ी संख्या में रोजगार पैदा हुए हैं. हालांकि, इन क्षेत्रों में मिलने वाले ज्यादातर काम कम कौशल वाले हैं. इसके अलावा, मुफ्त खाद्यान्न और सामाजिक सहायता योजनाओं से लोगों को राहत मिली है. इससे उनके पास गैर-खाद्य वस्तुओं पर खर्च करने के लिए अधिक पैसा बचा है.

ग्रामीण भारत में अब भी ज्यादा गरीबी

गरीबी में कमी के बावजूद ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच बड़ा अंतर बना हुआ है. रिपोर्ट के अनुसार, 2023 में ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी दर 19.3 फीसदी थी, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 8.6 फीसदी रही.

उत्तर प्रदेश से पश्चिम बंगाल तक फैले राज्यों में गरीब आबादी का बड़ा हिस्सा केंद्रित है. इन राज्यों की हिस्सेदारी देश की कुल गरीब आबादी में करीब 57 फीसदी थी.

बच्चों और कम शिक्षित लोगों में भी गरीबी की दर अधिक पाई गई. 0 से 14 वर्ष की उम्र के करीब 21.8 फीसदी लोग 4.20 डॉलर प्रतिदिन की आय सीमा से नीचे जीवनयापन कर रहे थे. वहीं, 15 से 64 वर्ष की उम्र के लोगों में यह दर 14.4 फीसदी थी.

शिक्षा के स्तर के आधार पर भी बड़ा अंतर सामने आया. 16 वर्ष या उससे अधिक उम्र के ऐसे लोगों में गरीबी दर 21.3 फीसदी थी, जिन्होंने कोई औपचारिक शिक्षा नहीं ली थी. इसके मुकाबले उच्च शिक्षा या माध्यमिक शिक्षा के बाद की पढ़ाई करने वाले लोगों में यह दर 7.4 फीसदी थी.

रोजगार बढ़े, लेकिन कमाई में नहीं हुआ खास सुधार

रिपोर्ट के अनुसार, 2017 से 2023 के बीच भारत में रोजगार पाने वाले लोगों की संख्या करीब 13.4 करोड़ बढ़ी. यह कामकाजी उम्र की आबादी में हुई बढ़ोतरी से लगभग दोगुनी थी. इस वृद्धि में ग्रामीण महिलाओं का वेतन वाले कामों में शामिल होना और परिवार में कमाने वाले सदस्यों की संख्या बढ़ना अहम रहा.

हालांकि, रोजगार की संख्या बढ़ने का फायदा वास्तविक कमाई में बड़े सुधार के रूप में नहीं दिखा. रिपोर्ट के मुताबिक, वास्तविक कमाई लगभग पहले के स्तर पर बनी रही. इसकी एक वजह यह है कि रोजगार के ज्यादातर नए अवसर ऐसे क्षेत्रों में पैदा हुए, जहां उत्पादकता अपेक्षाकृत कम है.

युवाओं में बेरोजगारी भी चिंता का विषय बनी हुई है. वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही में युवाओं की बेरोजगारी दर 14.6 फीसदी थी, जो वित्त वर्ष 2027 की इसी तिमाही में बढ़कर 15.9 फीसदी हो गई. ग्रामीण युवा महिलाओं में यह वृद्धि खास तौर पर देखी गई.

टिकाऊ गरीबी उन्मूलन के लिए जरूरी हैं बेहतर रोजगार

मदन सबनवीस के मुताबिक, गरीबी में लगातार और टिकाऊ कमी लाने के लिए अधिक रोजगार पैदा करना जरूरी है. उनका कहना है कि जब लोगों के पास काम नहीं होता, तो उन्हें नकद सहायता और अन्य सरकारी मदद पर निर्भर रहना पड़ता है. ऐसी सहायता लंबे समय तक जारी रखना आर्थिक रूप से कितना टिकाऊ होगा, यह भी एक अहम सवाल है.

उन्होंने आगाह किया कि यदि लोगों को मिलने वाली सहायता बंद हो जाती है और उनके पास स्थायी आय का स्रोत नहीं होता, तो वे दोबारा गरीबी के दायरे में आ सकते हैं.

गरीबी के आकलन में भी हो सकती है चुनौती

विश्व बैंक ने यह भी स्पष्ट किया कि गरीबी के ताजा अनुमानों में जीवन स्तर में वास्तविक सुधार के साथ-साथ मापने के तरीकों में बदलाव का असर भी शामिल हो सकता है. इसके अलावा, सर्वेक्षणों में अमीर परिवारों के उपभोग का पूरा आकलन नहीं हो पाने के कारण आय और उपभोग की असमानता वास्तविक स्तर से कम दिखाई दे सकती है.

इस तरह, भारत ने गरीबी घटाने में बड़ी उपलब्धि हासिल की है, लेकिन आगे की चुनौती केवल गरीबी रेखा से लोगों को ऊपर लाने तक सीमित नहीं है. स्थायी रोजगार, बेहतर वेतन, कौशल विकास और ग्रामीण क्षेत्रों में आय के अवसर बढ़ाना गरीबी में लंबे समय तक कमी बनाए रखने के लिए अहम होगा


रुपये को सहारा देने वाले RBI के नए नियमों पर बैंकों को राहत की मांग, 20% कैश जमा की जगह शुल्क लगाने का प्रस्ताव

विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव सौदों पर 20% नकद जमा की अनिवार्यता और 20 लाख डॉलर की सीमा को लेकर बैंकों ने RBI से नियमों में बदलाव की मांग की है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Tuesday, 13 October, 2026
Last Modified:
Tuesday, 13 October, 2026
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भारतीय बैंकों ने विदेशी मुद्रा से जुड़े नए नियमों में राहत के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) का रुख किया है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, बैंकों ने कुछ करेंसी डेरिवेटिव सौदों पर 20% नकद जमा करने की अनिवार्यता के बदले वैकल्पिक व्यवस्था लागू करने का प्रस्ताव दिया है. इसके साथ ही उन्होंने 20 लाख डॉलर की सीमा हटाने और विदेशी मुद्रा में लिए गए कर्ज के ब्याज भुगतान की हेजिंग पर नियमों की स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है.

RBI ने 10 अक्टूबर को रुपये पर दबाव कम करने के उद्देश्य से ये उपाय घोषित किए थे. ऊंची तेल कीमतों और विदेशी पूंजी की निकासी के बीच कंपनियों की ओर से भविष्य में डॉलर खरीदने की बढ़ती मांग रुपये पर दबाव डाल रही थी.

20% कैश जमा के बदले सीधे शुल्क का प्रस्ताव

नए नियमों के तहत बैंकों को चालू खाते से जुड़े जोखिमों की हेजिंग के लिए किए जाने वाले कुछ विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव सौदों के अनुमानित मूल मूल्य (नॉशनल वैल्यू) का 20% नकद जमा के रूप में अलग रखना होगा.

बैंकों ने उद्योग संगठन फॉरेन एक्सचेंज डीलर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (FEDAI) के माध्यम से इस व्यवस्था में बदलाव का प्रस्ताव दिया है. वे चाहते हैं कि नकद जमा की अनिवार्यता के बजाय कंपनियों से एक निश्चित शुल्क लिया जाए, जो फॉरवर्ड डॉलर या अन्य डेरिवेटिव के जरिए हेजिंग करती हैं.

बैंकों का तर्क है कि सीधे शुल्क से हेजिंग की लागत तो बढ़ेगी, लेकिन उनकी ट्रेजरी गतिविधियों में नकदी नहीं फंसेगी. इस अतिरिक्त लागत का बोझ कंपनियों पर भी पड़ सकता है, क्योंकि बैंक इसे अपने कॉरपोरेट ग्राहकों से वसूल सकते हैं.

20 लाख डॉलर की सीमा हटाने की मांग

बैंकों ने 20 लाख डॉलर की उस सीमा को हटाने की भी मांग की है, जिसके ऊपर संबंधित सौदों पर नकद जमा की शर्त लागू होती है. उनका कहना है कि कंपनियां बड़े हेजिंग सौदों को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर इस सीमा से बचने की कोशिश कर सकती हैं.

ऐसे मामलों की निगरानी करना बैंकों के लिए मुश्किल हो सकता है. रॉयटर्स के मुताबिक, बैंक अधिकारियों ने कहा कि कई छोटे सौदों के जरिए नियमों से बचने की कोशिश की पहचान करना आसान नहीं होगा. इसलिए बैंक इस सीमा को लागू करने के तरीके पर भी स्पष्टता चाहते हैं.

विदेशी मुद्रा कर्ज के ब्याज भुगतान पर भी स्पष्टीकरण मांगा

बैंकों ने RBI से यह भी स्पष्ट करने को कहा है कि विदेशी मुद्रा में लिए गए कर्ज पर ब्याज भुगतान के जोखिम से बचाव के लिए किए गए हेजिंग सौदे भी नए नियमों के दायरे में आएंगे या नहीं.

नियमों में विदेशी कर्ज के मूलधन के भुगतान से जुड़ी हेजिंग को शामिल नहीं किया गया है. हालांकि, ब्याज भुगतान के लिए की जाने वाली हेजिंग पर स्थिति स्पष्ट नहीं होने के कारण बैंक केंद्रीय बैंक से मार्गदर्शन चाहते हैं.

रुपये को स्थिर करने के लिए RBI के कदम

RBI के नए उपायों का उद्देश्य कुछ प्रकार की करेंसी हेजिंग को महंगा बनाकर कंपनियों की फॉरवर्ड डॉलर की मांग कम करना और रुपये पर दबाव घटाना है. केंद्रीय बैंक की घोषणा के बाद सोमवार को रुपये में करीब 1% की मजबूती दर्ज की गई.

इसके अलावा, RBI ने तीन सरकारी तेल विपणन कंपनियों को केंद्रीय बैंक के जरिए सीधे डॉलर खरीदने की सुविधा देने के लिए एक विशेष व्यवस्था भी शुरू की है. इससे इन कंपनियों की डॉलर खरीद का कुछ हिस्सा हाजिर विदेशी मुद्रा बाजार से हटाया जा सकेगा. बैंकों की मांग पर RBI का फैसला अहम होगा, क्योंकि इससे कंपनियों के लिए मुद्रा जोखिम से बचाव की लागत और बैंकों की नकदी प्रबंधन व्यवस्था प्रभावित हो सकती है.

 


IMF ने बढ़ाया भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान, FY27 और FY28 में 7% वृद्धि की उम्मीद

घरेलू मांग और सेवा क्षेत्र की मजबूती से भारत की अर्थव्यवस्था को सहारा मिलने का अनुमान है. IMF ने वित्त वर्ष 2027 के लिए ग्रोथ का अनुमान 6.4% से बढ़ाकर 7% किया, जबकि वैश्विक स्तर पर पश्चिम एशिया संघर्ष और महंगाई का जोखिम बरकरार है.

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Published - Tuesday, 13 October, 2026
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Tuesday, 13 October, 2026
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अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भारत की आर्थिक वृद्धि को लेकर अपना अनुमान बढ़ा दिया है. ताजा वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2027 और 2028 में भारत की GDP ग्रोथ 7% रहने की उम्मीद है. पहले FY27 के लिए 6.4% और FY28 के लिए 6.7% वृद्धि का अनुमान था. IMF के इस आकलन को घरेलू मांग और सेवा क्षेत्र के बेहतर प्रदर्शन से समर्थन मिला है. इससे पहले भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अक्टूबर की मौद्रिक नीति समीक्षा में FY27 के लिए ग्रोथ अनुमान बढ़ाकर 7.1% किया था. विश्व बैंक ने भी पिछले सप्ताह इसी वित्त वर्ष के लिए 7.1% वृद्धि का अनुमान जताया था.

घरेलू मांग और सेवा क्षेत्र से सहारा

IMF के अनुसार, भारत की आर्थिक रफ्तार मजबूत बनी हुई है. बड़े घरेलू बाजार, अनुकूल जनसांख्यिकीय स्थिति और लगातार हो रहे संरचनात्मक सुधारों से भी विकास की संभावनाओं को बल मिल रहा है. घरेलू मांग और सेवा क्षेत्र की मजबूती आर्थिक गतिविधियों को सहारा दे सकती है.

वैश्विक ग्रोथ के अनुमान में मामूली बढ़ोतरी

IMF ने 2026 के लिए वैश्विक अर्थव्यवस्था की विकास दर का अनुमान 3% से बढ़ाकर 3.1% किया है. हालांकि, 2027 के लिए इसे 3.4% पर बरकरार रखा गया है. 2026 में विकसित अर्थव्यवस्थाओं की ग्रोथ 2.1% रहने का अनुमान है, जो पहले 1.7% था. इसके उलट, उभरती और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के लिए अनुमान 3.8% से घटाकर 3.7% कर दिया गया है.

देशों की बात करें तो जर्मनी की ग्रोथ का अनुमान 0.7% से बढ़ाकर 1.3% और ब्रिटेन का 1% से बढ़ाकर 1.3% किया गया है. चीन के लिए 2026 और 2027 के अनुमान क्रमशः 4.5% और 4% हैं. वहीं, 2026 में ब्राजील की अर्थव्यवस्था 2.2% और रूस की 0.9% बढ़ने का अनुमान है.

पश्चिम एशिया संघर्ष से महंगाई का खतरा

IMF ने चेताया है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष से ऊर्जा उत्पादन और आपूर्ति प्रभावित हो सकती है. तनाव लंबा खिंचने पर महंगाई बढ़ने और वैश्विक आर्थिक विकास धीमा पड़ने का जोखिम है.

रिपोर्ट के मुताबिक, बहरीन, इराक, कुवैत और कतर की अर्थव्यवस्थाओं पर ऊर्जा उत्पादन और ढुलाई में रुकावटों का गंभीर असर पड़ सकता है. इन देशों में 2026 के दौरान आर्थिक संकुचन का अनुमान है. सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था के लिए भी अनुमान कमजोर हुआ है. जुलाई में 1.7% वृद्धि की उम्मीद के मुकाबले अब 3.3% गिरावट का अनुमान जताया गया है.

IMF की मुख्य अर्थशास्त्री सिलवाना टेनरेरो के अनुसार, पश्चिम एशिया में तनाव लंबा चलने से महंगाई बढ़ सकती है और ग्रोथ पर दबाव पड़ सकता है. सरकारों की कमजोर वित्तीय स्थिति, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से मिलने वाले संभावित लाभ को लेकर अनिश्चितता और गंभीर मौसमी घटनाएं भी वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए जोखिम हैं.

नीति-निर्माताओं के सामने दोहरी चुनौती

IMF के मुताबिक, संकट का असर देशों पर उनकी ऊर्जा निर्भरता और संघर्ष से दूरी के आधार पर अलग-अलग हो सकता है. ऐसे में सरकारों को महंगाई, कर्ज और वित्तीय जोखिमों से निपटने के साथ बुनियादी ढांचे, कौशल विकास और प्रतिस्पर्धा को मजबूत करने पर भी ध्यान देना होगा.

भारत के लिए बढ़ा हुआ ग्रोथ अनुमान घरेलू अर्थव्यवस्था की मजबूती का संकेत है, लेकिन वैश्विक ऊर्जा संकट और भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं आगे भी आर्थिक प्रदर्शन को प्रभावित कर सकती हैं.


सेंसेक्स में 547 अंक की गिरावट के बाद आज कैसी रहेगी बाजार की चाल? इन शेयरों में दिखेगी हलचल

भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को भारी बिकवाली देखने को मिली. सेंसेक्स 547 अंक टूटकर बंद हुआ, जबकि निफ्टी में भी 157 अंकों की गिरावट दर्ज की गई.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Tuesday, 13 October, 2026
Last Modified:
Tuesday, 13 October, 2026
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भारतीय शेयर बाजार मंगलवार, 13 अक्टूबर को कई घरेलू और वैश्विक संकेतों के बीच कारोबार करेगा. सोमवार को बाजार में शुरुआती तेजी के बावजूद आखिरी घंटों में बिकवाली हावी रही. आज गिफ्ट निफ्टी में तेजी से बाजार को शुरुआती सहारा मिलने की उम्मीद है, लेकिन वैश्विक बाजारों में कमजोरी और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण निवेशकों की सतर्कता बनी रह सकती है. इसके अलावा, सितंबर में खुदरा महंगाई बढ़कर 5.54 फीसदी पहुंचने से भी बाजार की धारणा प्रभावित हो सकती है. ऐसे में निवेशकों की नजर गिफ्ट निफ्टी, एशियाई बाजारों, कच्चे तेल, विदेशी निवेशकों के रुख और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर रहेगी. 

गिफ्ट निफ्टी में तेजी, क्या आज हरे निशान में खुलेगा बाजार?

मंगलवार सुबह गिफ्ट निफ्टी करीब 22,423 के स्तर पर कारोबार कर रहा था. यह पिछले संदर्भ स्तर से करीब 40-50 अंक ऊपर था. इससे भारतीय शेयर बाजार में सकारात्मक शुरुआत के संकेत मिले. हालांकि, शुरुआती संकेतों के बावजूद बाजार में तेजी टिकेगी या नहीं, यह वैश्विक बाजारों के रुख और घरेलू निवेशकों की खरीदारी पर निर्भर करेगा.  बाजार के लिए चिंता की बात यह है कि एशियाई बाजारों में मंगलवार सुबह तेज गिरावट देखने को मिली. वहीं, अमेरिकी बाजारों में सोमवार को मिला-जुला कारोबार रहा. पश्चिम एशिया में तनाव, महंगे कच्चे तेल और महंगाई से जुड़ी चिंताओं के कारण बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है.

कल शेयर बाजार में क्या हुआ था?

सोमवार, 12 अक्टूबर को भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ बंद हुआ. कारोबार की शुरुआत में सेंसेक्स करीब 400 अंक चढ़ा था, लेकिन बाद में बिकवाली बढ़ने से बाजार की बढ़त खत्म हो गई. बीएसई का सेंसेक्स 547.65 अंक यानी 0.76 फीसदी गिरकर 71,924.68 पर बंद हुआ. कारोबार के दौरान यह अपने दिन के उच्चतम स्तर से करीब 950 अंक नीचे आ गया. वहीं, एनएसई का निफ्टी 50 भी 157.10 अंक यानी 0.70 फीसदी फिसलकर 22,363.35 पर बंद हुआ.

सेंसेक्स के 30 शेयरों में से केवल 7 शेयर बढ़त के साथ बंद हुए, जबकि 23 में गिरावट दर्ज की गई. निफ्टी 50 के 13 शेयरों में तेजी रही, 36 शेयर गिरावट के साथ बंद हुए और एक शेयर में कोई बदलाव नहीं हुआ.

पश्चिम एशिया में तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली बाजार पर दबाव डालने वाले प्रमुख कारक रहे. आईटी और एफएमसीजी शेयरों में कमजोरी ने भी प्रमुख सूचकांकों की गिरावट में योगदान दिया.

एशियाई बाजारों में गिरावट, कोस्पी और निक्केई दबाव में

मंगलवार सुबह एशियाई बाजारों में बिकवाली देखने को मिली. दक्षिण कोरिया का कोस्पी शुरुआती कारोबार में करीब 4.3 फीसदी गिर गया, जबकि जापान का निक्केई 225 करीब 2.3 फीसदी नीचे कारोबार करता दिखा. दक्षिण कोरिया के कोस्डैक में भी तेज गिरावट दर्ज की गई.

अमेरिकी टेक शेयरों में कमजोरी का असर एशियाई बाजारों पर भी दिखाई दिया. जापान और दक्षिण कोरिया की कई टेक्नोलॉजी तथा सेमीकंडक्टर कंपनियों के शेयरों में बिकवाली देखने को मिली. क्षेत्रीय बाजारों में कमजोरी के बीच भारतीय निवेशक भी सतर्क रह सकते हैं. 

कच्चे तेल की कीमतें और बढ़ती महंगाई बनी चिंता

कच्चे तेल की कीमतें भारतीय शेयर बाजार के लिए अहम जोखिम बनी हुई हैं. सोमवार को ब्रेंट क्रूड करीब 1.8 फीसदी बढ़कर 106.65 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया था. मंगलवार सुबह इसमें कुछ नरमी आई और ब्रेंट क्रूड करीब 106.10 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता दिखा.

भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है. ऐसे में तेल की कीमतें ऊंची रहने से आयात बिल बढ़ सकता है, रुपये पर दबाव पड़ सकता है और कंपनियों की लागत में इजाफा हो सकता है. इससे महंगाई और ब्याज दरों को लेकर चिंताएं भी बढ़ सकती हैं. महंगाई के मोर्चे पर भी बाजार के लिए संकेत उत्साहजनक नहीं हैं. भारत में सितंबर की खुदरा महंगाई दर बढ़कर 5.54 फीसदी हो गई, जो अगस्त में 4.83 फीसदी थी. महंगाई में इस बढ़ोतरी से रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति और ब्याज दरों को लेकर निवेशकों की चिंताएं बढ़ सकती हैं.

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, भारतीय शेयर बाजार इस समय एक अहम मोड़ पर है. हालिया रिकवरी के बाद निवेशकों को आगे खरीदारी की उम्मीद थी, लेकिन कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों की बिकवाली के कारण बाजार में तेजी को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है. विशेषज्ञों ने विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली को बाजार के लिए बड़ी चिंता बताया. उनके मुताबिक, केवल एक या दो कारोबारी सत्रों में तेजी आने से बाजार में ट्रेंड बदलने की पुष्टि नहीं की जा सकती.

आज किन शेयरों पर रहेगी नजर?

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, मंगलवार, 13 अक्टूबर को HCL टेक्नोलॉजीज, RBL बैंक, ICICI प्रूडेंशियल AMC, IRCON इंटरनेशनल और नजारा टेक्नोलॉजीज समेत कई शेयर फोकस में रह सकते हैं. HCL टेक्नोलॉजीज ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में 5,132 करोड़ रुपये का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट दर्ज किया, जो पिछले साल की समान तिमाही से 21.2 फीसदी अधिक है. कंपनी ने 12 रुपये प्रति शेयर के अंतरिम डिविडेंड की घोषणा की है और AI कंपनी Anthropic के साथ साझेदारी भी की है. RBL बैंक का सितंबर तिमाही का नेट प्रॉफिट तीन गुना से अधिक बढ़कर 481.7 करोड़ रुपये रहा. वहीं, ICICI प्रूडेंशियल AMC ने मुनाफे में 6.1 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की और 30 रुपये प्रति शेयर के अंतरिम डिविडेंड का ऐलान किया. IRCON इंटरनेशनल को ईस्ट सेंट्रल रेलवे से 862.46 करोड़ रुपये का EPC कॉन्ट्रैक्ट मिला है. नजारा टेक्नोलॉजीज में वरिष्ठ प्रबंधन स्तर पर हुए बदलावों के कारण भी निवेशकों की नजर रह सकती है. इन कंपनियों से जुड़े नतीजों और घोषणाओं के आधार पर शेयरों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है. 

(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)
 

 


भारत का असली बॉस, JIO ने IPO का आकार घटाकर ₹30,000 करोड़ किया

JIO के इश्यू का आकार करीब ₹37,000 करोड़ से घटकर ₹30,000 करोड़ रह गया है, वैल्यूएशन ₹10.3 लाख करोड़ और ग्रे-मार्केट प्रीमियम ₹50 पर आ गया है. मस्क के चार दिनों तक चले हमले में रिलायंस ग्रुप के प्रमुख को ‘प्रधानमंत्री अंबानी’ कहे जाने के बाद, भारत का अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ बनने की तैयारी में लगा यह इश्यू हुंडई से आगे निकलने के लिए संघर्ष कर रहा है.

Last Modified:
Monday, 12 October, 2026
BWHindia

पलक शाह

एंकर निवेशक निभा रहे हैं अहम भूमिका, वैश्विक फंड छूट की मांग कर रहे हैं. भारत के सबसे बड़े सार्वजनिक निर्गम (IPO) का आकार घटा दिया गया है. हालांकि, इसकी कीमत अपने सबसे करीबी प्रतिद्वंद्वी से कम नहीं रखी जा रही है.

सौदे से परिचित लोगों के अनुसार, जियो प्लेटफॉर्म्स (JIO) 21 अक्टूबर को अपना इश्यू खुलने पर आम निवेशकों से करीब ₹26,000 करोड़ जुटाएगी. बैंकरों को ₹36,000-38,000 करोड़ जुटाए जाने की उम्मीद थी, जबकि पहले की रिपोर्टों में इश्यू का आकार ₹37,700 करोड़ बताया गया था. इस आकार के साथ यह भारत का अब तक का सबसे बड़ा IPO बन सकता था. इश्यू के आकार में ₹6,000 करोड़ से ₹7,000 करोड़ तक की कटौती की गई है, जो कुल इश्यू का करीब 20% है.

कर्मचारी और शेयरधारक कोटे को जोड़ने के बाद कुल राशि लगभग ₹30,200 करोड़ या करीब 3.1 अरब डॉलर बैठती है. यह आंकड़ा सोच-समझकर चुना गया है. इससे जियो यह दावा कर सकती है कि उसका इश्यू अक्टूबर 2024 में आए हुंडई मोटर इंडिया के ₹27,870 करोड़ के आईपीओ से थोड़ा बड़ा है, जिसे भारत का सबसे बड़ा आईपीओ बताया गया था.

हालांकि, डॉलर में तस्वीर अलग है. हुंडई ने करीब 3.3 अरब डॉलर जुटाए थे. डॉलर के मुकाबले रुपया करीब ₹97 पर होने के कारण जियो का तथाकथित रिकॉर्ड इससे कम रह जाता है. वैश्विक निवेशकों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले पैमाने पर भारत का सबसे बड़ा आईपीओ उस इश्यू से छोटा है, जिसे पीछे छोड़ने का वह दावा कर रहा है.

160 अरब डॉलर से घटकर ₹10.3 लाख करोड़ का वैल्यूएशन

जियो के शेयर का इश्यू प्राइस ₹1,119 तय किया गया है. इससे कंपनी का वैल्यूएशन करीब ₹10.3 लाख करोड़ या लगभग 106 अरब डॉलर बैठता है.

एक समय जियो का वैल्यूएशन 160 अरब डॉलर तक बताया जा रहा था. पिछले सप्ताह तक बाजार की रिपोर्टों में कहा जा रहा था कि जियो, भारती एयरटेल की तुलना में प्रीमियम वैल्यूएशन की मांग करेगी. लेकिन रोडशो से परिचित लोगों के अनुसार, वैश्विक फंडों ने एयरटेल की तुलना में करीब 30% की छूट की मांग की. उन्होंने बैंकरों से कहा कि वे जियो के लिए अधिक कीमत चुकाने के बजाय रिलायंस के शेयर खरीदना पसंद करेंगे. कारोबार शुरू होने से पहले ही वैल्यूएशन में करीब 54 अरब डॉलर की कमी आ चुकी है.

ग्रे मार्केट में भी उत्साह ठंडा पड़ गया है. पहले की रिपोर्टों में ग्रे-मार्केट प्रीमियम करीब ₹160 बताया गया था. अब यह लगभग ₹50 रह गया है, जो इश्यू प्राइस से 5% से भी कम अधिक है.

एंकर निवेशकों के भरोसे आईपीओ

₹26,000 करोड़ के इश्यू में से करीब ₹8,000 करोड़, यानी लगभग एक-तिहाई हिस्सा, सार्वजनिक निर्गम खुलने से पहले एंकर निवेशकों को आवंटित किया जाएगा. संस्थागत निवेशकों से बाकी बुक में केवल करीब ₹5,000 करोड़ की राशि है.

पहले दिन से ही करीब एक-तिहाई राशि के लिए प्रतिबद्धता मिलने के कारण सब्सक्रिप्शन के आंकड़े अच्छे दिखाई देंगे, चाहे खुदरा निवेशक कैसी भी प्रतिक्रिया दें. शेयरधारक कोटे के तहत रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरधारकों के लिए आरक्षित हिस्सेदारी से भी इश्यू को खरीदारों का एक अतिरिक्त समूह मिल जाता है.

2020 के निवेशकों को फिर नुकसान

2020 में जियो में 20.3 अरब डॉलर का निवेश करने वाले 13 वैश्विक निवेशकों को कम कीमत के कारण एक बार फिर सबसे अधिक नुकसान हो रहा है. इनमें मेटा, गूगल, सऊदी अरब का पीआईएफ, केकेआर, सिल्वर लेक, विस्टा, मुबाडाला, एडीआईए, टीपीजी, जनरल अटलांटिक, एल कैटरटन, इंटेल कैपिटल और क्वालकॉम शामिल हैं.

जियो के ड्राफ्ट प्रॉस्पेक्टस में दिए गए आवंटन के विश्लेषण के अनुसार, ₹1,119 प्रति शेयर की कीमत पर उनकी हिस्सेदारी का मूल्य करीब 34 अरब डॉलर है. छह वर्षों में यह उनके निवेश का 1.67 गुना है, यानी डॉलर में सालाना करीब 8.7% का रिटर्न.

केकेआर, पीआईएफ, सिल्वर लेक और विस्टा जैसे फंडों ने ₹549 प्रति शेयर की कीमत पर निवेश किया था. उनके लिए सालाना रिटर्न करीब 7.6% है. रुपये में ₹549 का निवेश लगभग दोगुना होकर ₹1,119 हो गया है. लेकिन डॉलर के मुकाबले रुपया करीब ₹75 से गिरकर ₹97 पर आ गया है, जिससे उनके डॉलर में मिलने वाले रिटर्न में करीब 10 अरब डॉलर की कमी आई है. वहीं, ₹488 प्रति शेयर की कीमत पर निवेश करने वाले मेटा और गूगल का सालाना रिटर्न करीब 9.5-10% है.

रिलायंस की स्थिति इससे बिल्कुल अलग है. उसके अधिकांश शेयर ₹10 की कीमत पर हासिल किए गए थे. कम की गई कीमत पर भी उसकी हिस्सेदारी का मूल्य करीब ₹6.6 लाख करोड़ या लगभग 69 अरब डॉलर है.

जन्मदिन के करीब इश्यू बंद, बुधवार को होगी लिस्टिंग

यह इश्यू बुधवार, 21 अक्टूबर से शुक्रवार, 23 अक्टूबर तक खुला रहेगा. इश्यू बंद होने का दिन मुकेश अंबानी के जुड़वां बच्चों आकाश और ईशा का 35वां जन्मदिन है. आकाश रिलायंस जियो इन्फोकॉम के चेयरमैन हैं. शेयरों की लिस्टिंग बुधवार, 28 अक्टूबर को होने की संभावना है.

उस समय तक ऑर्डर बुक की स्थिति कैसी रहती है, इसी पर निर्भर करेगा कि जश्न मनाने की कोई वजह होगी या नहीं.

मस्क का चार दिनों तक हमला

इश्यू के आकार में कटौती ऐसे समय हुई है, जब जियो का रोडशो जारी रहने के दौरान एलन मस्क ने लगातार चार दिनों तक एक्स पर मुकेश अंबानी को निशाना बनाया.

7 अक्टूबर को मस्क ने लिखा कि स्टारलिंक को “कुछ उद्योगपतियों द्वारा भारतीय लोगों पर अपनी एकाधिकारवादी पकड़ बनाए रखने के लिए रोका जा रहा है.” उन्होंने इसे “भारत के लोगों के खिलाफ अपराध” बताया. अगले दिन उन्होंने उस व्यक्ति का नाम लिया, जिसका वह जिक्र कर रहे थे. उन्होंने पूछा, “क्या अंबानी भारत के असली बॉस हैं?”

शुक्रवार को उन्होंने ‘प्रधानमंत्री अंबानी’ के नाम एक काल्पनिक खुला पत्र पोस्ट किया. इसमें लिखा था, “यह न समझ पाने के लिए कृपया मेरी विनम्र माफी स्वीकार करें कि आप ही भारत के असली बॉस हैं.” उन्होंने अंबानी पर “भारत के महान लोगों का एकाधिकारवादी शोषण जारी रखने” को प्राथमिकता देने का आरोप लगाया. इसके बाद उन्होंने पूछा, “क्या फिर भी आप स्टारलिंक को प्रतिस्पर्धा करने की अनुमति देने पर विचार करेंगे?”

शनिवार को उन्होंने किफायती कीमतों का वादा किया और कहा, “अंबानी का मुनाफा कम होगा, लेकिन उनका कारोबार बंद नहीं होने वाला.” जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी इस बहस में शामिल हुए, तो मस्क ने जवाब दिया, “यह वाकई चिंताजनक है.”

सरकार ने इन आरोपों को खारिज कर दिया है. संचार मंत्रालय ने अपने सैटेलाइट नियमों को “निष्पक्ष और गैर-भेदभावपूर्ण” बताया और आरोपों को “निराधार और गलत धारणा पर आधारित” करार दिया. मंत्रालय ने कहा कि जियो के अपने सैटेलाइट कारोबार सहित लाइसेंस प्राप्त तीनों ऑपरेटर एक ही सुरक्षा मंजूरी का इंतजार कर रहे हैं. दूरसंचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि भारत “किसी भी क्षेत्र में एकाधिकार की अनुमति नहीं देता.” रिलायंस ने इस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं की है.

किसी भी निवेशक ने यह नहीं कहा है कि इन पोस्ट से उनका निवेश संबंधी फैसला बदला है. लेकिन लगातार चार दिनों तक, जब जियो के बैंकर वैश्विक फंडों से कंपनी के बाजार में दबदबे के लिए अधिक कीमत चुकाने को कह रहे थे, तब दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति एक्स पर सवाल उठा रहे थे कि यह दबदबा हासिल कैसे किया गया.

इसका क्या मतलब है

जियो के आईपीओ की योजना एक बड़े बयान के रूप में बनाई गई थी: भारत की सबसे बड़ी कंपनी, देश के सबसे बड़े आईपीओ के साथ और ऐसा वैल्यूएशन जो वैश्विक टेक कंपनियों को टक्कर दे सके. लेकिन अब बाजार में जो इश्यू आ रहा है, उसका आकार छोटा है, कीमत कम है, ग्रे-मार्केट प्रीमियम सीमित है और बुक को बड़े पैमाने पर एंकर निवेशकों का समर्थन मिला हुआ है.

जियो रुपये के लिहाज से सबसे बड़े आईपीओ का रिकॉर्ड बनाने का दावा अब भी कर सकती है. लेकिन जिन वैश्विक निवेशकों से उसके वैल्यूएशन को मान्यता मिलने की उम्मीद थी, उन्होंने इसके बजाय वैल्यूएशन को नीचे धकेल दिया है.

नोट: रिटर्न शुल्क और करों से पहले के सकल रिटर्न हैं. इनकी गणना जियो प्लेटफॉर्म्स के ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (19 जून, 2026) और ईसीबी की डॉलर/रुपया विनिमय दरों के आधार पर की गई है. डॉलर से जुड़े आंकड़ों के लिए ₹96.73 प्रति डॉलर की दर का इस्तेमाल किया गया है.

पलक शाह, BW रिपोर्टर्स

(पलक शाह एक अनुभवी खोजी पत्रकार हैं और The Market Mafia: Chronicle of India’s High-Tech Stock Market Scandal & The Cabal That Went Scot-Free के लेखक हैं. लगभग दो दशकों के अनुभव के साथ, उन्होंने मुंबई में जमीनी रिपोर्टिंग करते हुए पैसे, ताकत और नियमों के गठजोड़ को उजागर किया है. उनके लेख The Economic Times, Business Standard, The Financial Express और The Hindu Business Line जैसे प्रमुख प्रकाशनों में प्रकाशित हुए हैं. 19 साल की उम्र में अपराध पत्रकारिता से शुरुआत करने वाले पलक ने जल्द ही समझ लिया कि 1980 के दशक के गैंगवार अब कॉरपोरेट अपराध में बदल चुके हैं. इसी ने उन्हें वित्तीय पत्रकारिता की ओर मोड़ा, जहां उन्होंने बाजार हेरफेर और सिस्टम की खामियों को उजागर किया.)