मालदीव के साथ भारत के संबंधों में पिछले कुछ समय में तनाव देखने को मिला है. इसकी वजह जहां पहले वहां के मंत्रियों के बयान बने उसके बाद मालदीव की चीन से बढ़ती नजदीकी भी बड़ी वजह बनी.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
मालदीव और भारत के बीच हाल ही में उभरे तनाव के बीच अब वहां की सरकार ने भारत सरकार को थैंक्स कहा है. मालदीव के वित्त मंत्री ने चीन से बढ़ती नजदीकी के बीच ये धन्यवाद भारत सरकार के द्वारा अति आवश्यक सेवाओं की आपूर्ति को बहाल रखने को लेकर कहा है. भारत मालदीव को कई तरह का सामान इनके एक्सपोर्ट पर बैन होने के बावजूद कर रहा है. उनके जवाब पर भारत सरकार ने भी अपना जवाब दिया है.
आखिर क्या कहा वित्त मंत्री ने?
मालदीव के वित्त मंत्री ने एक्स पर भारत को धन्यवाद अदा करते हुए लिखा है कि ‘मैं मालदीव के लिए भारत सरकार द्वारा अति आवश्यक वस्तुओं के एक्सपोर्ट को 2024 और 2025 के दौरान रिन्यू करने के लिए विदेश मंत्री एस जयशंकर का धन्यवाद अदा करता हूं. यह वास्तव में हम दोनों देशों के बीच लंबी मित्रता और द्विपक्षीय बिजनेस और कॉमर्स को और अधिक बढ़ाने की दोनों देशों की प्रतिबद्धता का प्रतीक है.
I sincerely thank EAM @DrSJaishankar and the Government of #India for the renewal of the quota to enable #Maldives to import essential commodities from India during the years 2024 and 2025.
— Moosa Zameer (@MoosaZameer) April 5, 2024
This is truly a gesture which signifies the longstanding friendship, and the strong…
विदेश मंत्री जयशंकर ने लिखा जवाब
मालदीव के वित्त मंत्री के इस पोस्ट पर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने लिखा कि ‘आपका स्वागत है, एफएम @MoosaZameer. भारत अपनी पड़ोसी फर्स्ट और SAGAR नीतियों के प्रति दृढ़ता से प्रतिबद्ध है.
You are welcome, FM @MoosaZameer.
— Dr. S. Jaishankar (Modi Ka Parivar) (@DrSJaishankar) April 6, 2024
India stands firmly committed to its Neighbourhood First and SAGAR policies. https://t.co/mKYOYu2aM9
बैन के बावजूद भारत कर रहा है एक्सपोर्ट
भारत सरकार ने देश में कुछ चीजों के दामों में होने वाले इजाफे के संकेत के बीच एक्सपोर्ट पर बैन लगाया हुआ है. इनमें प्याज, गेहूं, चावल से लेकर कई और प्रकार के दूसरे सामान मौजूद हैं. लेकिन बावजूद उसके भारत अपने कई मित्र देशों को इन सामानों को एक्सपोर्ट कर रहा है. मालदीव को भारत ने 124,218 मीट्रिक टन चावल, 109,162 टन गेहूं का आटा, 64,494 टन चीनी, 21,513 मीट्रिक टन आलू, 35,749 टन प्याज और 427.5 मिलियन अंडे के निर्यात की अनुमति दी है. भारत ने प्रत्येक पत्थर और नदी की रेत के 1 मिलियन टन के निर्यात की भी अनुमति दी है.
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नए नियमों के तहत क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) की प्रक्रिया में भी बदलाव किया गया है. इसका उद्देश्य ऑर्डर दर्ज करने और कीमत तय करने की प्रक्रिया को व्यवस्थित करना है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
बाजार नियामक सेबी ने क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) और डेरिवेटिव्स के सेटलमेंट से जुड़े नियमों में बदलाव किया है. नए नियमों के तहत एक्सपायरी वाले दिन डेरिवेटिव्स के सेटलमेंट प्राइस का निर्धारण कैश मार्केट में दोपहर 3 बजे से 3:30 बजे तक के कारोबार के वॉल्यूम वेटेड एवरेज प्राइस (VWAP) के आधार पर किया जाएगा. इसके अलावा क्लोजिंग ऑक्शन का समय, ऑर्डर दर्ज करने की प्रक्रिया और अधूरे ऑर्डर के निपटान के नियम भी बदले गए हैं. ज्यादातर बदलाव 7 दिसंबर, 2026 से लागू होंगे, जबकि अधूरे लिमिट और आइसबर्ग ऑर्डर से जुड़े नए प्रावधान 8 फरवरी, 2027 से प्रभावी होंगे.
VWAP के आधार पर तय होगा सेटलमेंट प्राइस
सेबी के नए नियमों के अनुसार, इंडेक्स डेरिवेटिव्स का सेटलमेंट प्राइस तय करने के लिए संबंधित इंडेक्स में शामिल शेयरों के दोपहर 3 बजे से 3:30 बजे तक के VWAP को आधार बनाया जाएगा. वहीं, शेयर डेरिवेटिव्स के मामले में संबंधित शेयर का इसी अवधि का VWAP इस्तेमाल होगा. इस गणना में सभी स्टॉक एक्सचेंजों पर हुए कारोबार को शामिल किया जाएगा.
VWAP यानी वॉल्यूम वेटेड एवरेज प्राइस एक ऐसा औसत भाव है, जिसमें अधिक मात्रा में कारोबार होने वाली कीमतों को ज्यादा महत्व दिया जाता है. एक्सचेंज और क्लियरिंग कॉरपोरेशन इस दौरान संबंधित शेयरों के औसत भाव और कारोबार की मात्रा की जानकारी उपलब्ध कराएंगे. साथ ही, बाजार के प्रतिभागियों को संभावित सेटलमेंट प्राइस के संकेत भी मिलते रहेंगे.
क्लोजिंग ऑक्शन सेशन की टाइमिंग में बदलाव
नए नियमों के तहत क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) की प्रक्रिया में भी बदलाव किया गया है. इसका उद्देश्य ऑर्डर दर्ज करने और कीमत तय करने की प्रक्रिया को व्यवस्थित करना है.
दोपहर 3:30 से 3:31 बजे तक रेफरेंस प्राइस की गणना की जाएगी और सामान्य कारोबार से CAS में बदलाव की प्रक्रिया पूरी होगी. इसके बाद 3:31 से 3:36 बजे तक निवेशक लिमिट और मार्केट, दोनों तरह के ऑर्डर दर्ज कर सकेंगे.
शाम 3:36 बजे के बाद ऑर्डर एंट्री बंद होने तक केवल लिमिट ऑर्डर दर्ज किए जा सकेंगे. इस अवधि में मार्केट ऑर्डर में बदलाव करने या उन्हें रद्द करने की अनुमति नहीं होगी. ऑर्डर दर्ज करने की प्रक्रिया शाम 3:38 से 3:40 बजे के बीच किसी भी समय बंद की जा सकती है.
इंडेक्स और शेयर डेरिवेटिव्स में ट्रेडिंग का समय क्या होगा?
नए प्रावधानों के तहत सामान्य कारोबारी दिनों में इंडेक्स डेरिवेटिव्स में ट्रेडिंग दोपहर 3:45 बजे तक जारी रहेगी. हालांकि, जिन इंडेक्स कॉन्ट्रैक्ट्स की एक्सपायरी उसी दिन होगी, उनमें कारोबार दोपहर 3:30 बजे बंद हो जाएगा.
शेयर डेरिवेटिव्स में एक्सपायरी वाले दिन भी ट्रेडिंग शाम 3:45 बजे तक जारी रह सकेगी. दूसरी ओर, कैश मार्केट का पोस्ट-क्लोजिंग सेशन शाम 3:50 से 4 बजे तक चलेगा. इस दौरान शेयरों के निर्धारित क्लोजिंग प्राइस पर सौदे किए जा सकेंगे.
अधूरे लिमिट और आइसबर्ग ऑर्डर के लिए क्या बदलेगा?
सामान्य कारोबारी सत्र में पूरे नहीं हो पाए लिमिट ऑर्डर को आम तौर पर CAS में आगे बढ़ाया जाएगा. हालांकि, स्टॉप-लॉस ऑर्डर और CAS के निर्धारित प्राइस बैंड से बाहर के ऑर्डर इस व्यवस्था में शामिल नहीं होंगे.
आइसबर्ग ऑर्डर ऐसे बड़े ऑर्डर होते हैं, जिनकी पूरी मात्रा एक साथ सार्वजनिक ऑर्डर बुक में दिखाई नहीं देती. नए नियमों के तहत निर्धारित प्राइस बैंड के भीतर ऐसे अधूरे ऑर्डर CAS में पूरी मात्रा दिखाने वाले लिमिट ऑर्डर में बदल जाएंगे. निवेशकों को मूल ऑर्डर दर्ज करते समय इस व्यवस्था से बाहर रहने का विकल्प भी मिलेगा.
इन ऑर्डर को प्राथमिकता देने का क्रम भी निर्धारित किया गया है. सामान्य कारोबारी सत्र से आगे बढ़ाए गए दूसरे लिमिट ऑर्डर के बाद, लेकिन CAS में नए दर्ज किए गए लिमिट ऑर्डर से पहले इन्हें समय की प्राथमिकता मिलेगी. इन प्रावधानों को 8 फरवरी, 2027 से लागू किया जाएगा.
सेबी ने क्यों बदले क्लोजिंग ऑक्शन के नियम?
क्लोजिंग ऑक्शन सेशन की शुरुआत 3 अगस्त को हुई थी. इसके बाद बाजार के प्रतिभागियों ने कम लिक्विडिटी, कीमतों में अचानक उतार-चढ़ाव और सेटलमेंट प्राइस को लेकर चिंताएं जताई थीं. सेबी के परामर्श पत्र पर 20,000 से अधिक सुझाव मिले थे.
ट्रेडर्स और ब्रोकर्स ने बाजार के आखिरी 30 मिनट के VWAP के आधार पर सेटलमेंट प्राइस तय करने के विकल्प का समर्थन किया. उनका तर्क था कि बाजार के प्रतिभागी इस व्यवस्था से पहले से परिचित हैं और इसे समझना तथा लागू करना अपेक्षाकृत आसान है.
सेबी ने सामान्य कारोबारी सत्र और ऑक्शन को मिलाकर सेटलमेंट प्राइस तय करने के विकल्प पर भी विचार किया था. हालांकि, अंतिम व्यवस्था में 30 मिनट के VWAP को चुना गया. इसके अलावा, रेफरेंस प्राइस से एक फीसदी के दायरे से बाहर रखे गए लिमिट ऑर्डर को रद्द करने पर रोक लगाने का प्रस्ताव अंतिम सर्कुलर में शामिल नहीं किया गया है.
भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को जोरदार तेजी देखने को मिली. सेंसेक्स 1,533.72 अंक चढ़कर 74,315.61 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 में 374.65 अंक की बढ़त दर्ज की गई और यह 22,997.35 पर पहुंच गया.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को जोरदार तेजी देखने को मिली. बीएसई सेंसेक्स 1,533.72 अंक यानी 2.11 फीसदी चढ़कर 74,315.61 पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 50 में 374.65 अंक यानी 1.66 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई और यह 22,997.35 पर पहुंच गया. आईटी, बैंकिंग और ऑटो शेयरों में खरीदारी से बाजार को सहारा मिला. वहीं, शुक्रवार सुबह GIFT निफ्टी में तेजी ने घरेलू बाजार की सकारात्मक शुरुआत के संकेत दिए. दूसरी ओर, कई कंपनियों के तिमाही नतीजे और कॉरपोरेट अपडेट आज के कारोबार में शेयरों की दिशा तय कर सकते हैं. रिलायंस इंडस्ट्रीज, विप्रो, टेक महिंद्रा, HDFC लाइफ इंश्योरेंस और पर्सिस्टेंट सिस्टम्स समेत कई शेयर निवेशकों के रडार पर रहेंगे.
सेंसेक्स और निफ्टी में कितनी आई तेजी?
गुरुवार, 15 अक्टूबर को बीएसई सेंसेक्स 1,533.72 अंक की बढ़त के साथ 74,315.61 पर बंद हुआ. कारोबार के दौरान यह 74,330.29 के स्तर तक पहुंच गया था. वहीं, एनएसई निफ्टी 50 में 374.65 अंक की तेजी आई और यह 22,997.35 पर बंद हुआ. कारोबार के दौरान निफ्टी ने 23,000 का स्तर भी पार किया.
बड़े शेयरों में खरीदारी से बाजार को मजबूती मिली, लेकिन व्यापक बाजार का प्रदर्शन मिला-जुला रहा. निफ्टी मिडकैप 100 में 0.36 फीसदी और निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 1.31 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई. इससे संकेत मिलता है कि तेजी के बावजूद सभी श्रेणियों के शेयरों में एक जैसी खरीदारी नहीं हुई.
GIFT निफ्टी से आज क्या मिल रहे हैं संकेत?
शुक्रवार, 16 अक्टूबर की सुबह GIFT निफ्टी में बढ़त देखने को मिली. सुबह के शुरुआती अपडेट में यह 23,084 के आसपास कारोबार कर रहा था. इससे घरेलू बाजार में सकारात्मक शुरुआत की उम्मीद बनी. हालांकि, GIFT निफ्टी का स्तर लगातार बदलता रहता है और बाजार खुलने तक इसमें उतार-चढ़ाव संभव है.
आज बाजार की दिशा पर वैश्विक संकेतों, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों का असर भी रहेगा. गुरुवार की तेजी के बाद निवेशक यह देखेंगे कि खरीदारी का रुझान बरकरार रहता है या ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली शुरू होती है.
आज इन शेयरों में दिख सकती है हलचल
रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों पर निवेशकों की नजर रहेगी. कंपनी के तिमाही नतीजों और प्रबंधन की टिप्पणी से तेल एवं गैस, रिटेल और डिजिटल कारोबार की स्थिति का आकलन किया जाएगा. इन कारोबारों का प्रदर्शन और आगे की योजनाएं शेयर की चाल को प्रभावित कर सकती हैं.
आईटी कंपनी विप्रो के शेयरों में तिमाही नतीजों के बाद हलचल रह सकती है. कंपनी ने दूसरी तिमाही में 24,753 करोड़ रुपये का राजस्व दर्ज किया. हालांकि, शुद्ध लाभ तिमाही आधार पर 4.5 फीसदी घटकर 3,200 करोड़ रुपये रहा. ऐसे में निवेशक कंपनी की डील बुकिंग, नए कारोबार और आगे के राजस्व अनुमान पर ध्यान देंगे.
टेक महिंद्रा के शेयर भी फोकस में रह सकते हैं. कंपनी ने जुलाई-सितंबर तिमाही में 1,585.6 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया, जो पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 32.7 फीसदी अधिक है. इस दौरान राजस्व में भी 15.6 फीसदी की वृद्धि हुई. कंपनी ने वित्त वर्ष 2027 के लिए अपना ऑपरेटिंग मार्जिन लक्ष्य बरकरार रखा है. मजबूत नतीजों के बाद निवेशकों की प्रतिक्रिया शेयर की दिशा तय कर सकती है.
HDFC लाइफ इंश्योरेंस के शेयरों में भी गतिविधि देखने को मिल सकती है. कंपनी ने दूसरी तिमाही में 522 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया, जो पिछले साल की समान अवधि से 16.5 फीसदी अधिक है. नेट प्रीमियम आय 15.8 फीसदी बढ़कर 21,856 करोड़ रुपये रही. निवेशक प्रीमियम वृद्धि, नए कारोबार और बीमा क्षेत्र की मांग से जुड़े संकेतों पर नजर रखेंगे.
जियो फाइनेंशियल सर्विसेज के शेयरों में कंपनी के वित्तीय सेवा कारोबार से जुड़े अपडेट के आधार पर हलचल रह सकती है. निवेशक कर्ज वितरण, वित्तीय सेवाओं के विस्तार और कंपनी की आय में वृद्धि की संभावनाओं का आकलन करेंगे. कारोबार में विस्तार और मुनाफे की स्थिति से जुड़े संकेत शेयर के लिए अहम होंगे.
पर्सिस्टेंट सिस्टम्स के शेयरों में भी उतार-चढ़ाव संभव है. कंपनी का दूसरी तिमाही का राजस्व सालाना आधार पर 30.3 फीसदी बढ़कर 4,663.9 करोड़ रुपये रहा. हालांकि, शुद्ध लाभ 25.4 फीसदी घटकर 351.5 करोड़ रुपये पर आ गया. राजस्व में मजबूत वृद्धि के बावजूद मुनाफे में गिरावट निवेशकों का ध्यान खींच सकती है. अब बाजार की नजर कंपनी के मार्जिन और आगे की वृद्धि पर रहेगी.
एंजेल वन के शेयरों में तिमाही प्रदर्शन के आधार पर हलचल रह सकती है. कंपनी ने दूसरी तिमाही में 335 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया, जबकि पिछले साल की समान अवधि में यह 211.7 करोड़ रुपये था. इस दौरान राजस्व 18.7 फीसदी बढ़कर 1,427 करोड़ रुपये रहा. ब्रोकिंग कारोबार की वृद्धि और बाजार में निवेशकों की सक्रियता इसके शेयरों के लिए महत्वपूर्ण होगी.
आईआईएफएल फाइनेंस के शेयरों पर भी नजर रहेगी. कंपनी का दूसरी तिमाही का समेकित शुद्ध लाभ सालाना आधार पर 103.7 फीसदी बढ़कर 766.4 करोड़ रुपये रहा. नेट इंटरेस्ट इनकम भी 50.2 फीसदी बढ़कर 2,160.7 करोड़ रुपये पर पहुंच गई. निवेशक कंपनी की आय वृद्धि, कर्ज वितरण और कर्ज की गुणवत्ता से जुड़े संकेतों पर ध्यान देंगे.
इन कंपनियों के तिमाही नतीजों पर भी रहेगी नजर
शुक्रवार को पंजाब नेशनल बैंक (PNB), एलटीएम, बजाज हाउसिंग फाइनेंस, क्रॉम्पटन ग्रीव्स कंज्यूमर इलेक्ट्रिकल्स, डीएलएफ, फेडरल बैंक, ओबेरॉय रियल्टी, टाटा कम्युनिकेशंस, तेजस नेटवर्क्स, शॉपर्स स्टॉप और उज्जीवन स्मॉल फाइनेंस बैंक समेत कई कंपनियों के तिमाही नतीजों पर निवेशकों की नजर रहेगी.
इन कंपनियों के नतीजों में राजस्व, मुनाफे, मार्जिन और प्रबंधन के भविष्य के अनुमान महत्वपूर्ण होंगे. उम्मीद से बेहतर नतीजे शेयरों को सहारा दे सकते हैं, जबकि कमजोर प्रदर्शन या भविष्य को लेकर सतर्क टिप्पणी दबाव बढ़ा सकती है.
बाजार के लिए आज कौन से फैक्टर अहम?
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, गुरुवार की तेजी के बाद शुक्रवार को निफ्टी के 23,000 के स्तर के आसपास कारोबार पर निवेशकों की नजर रहेगी. आईटी और बैंकिंग शेयरों में खरीदारी जारी रहने से बाजार को समर्थन मिल सकता है. इसके अलावा, कंपनियों के तिमाही नतीजे और घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी भी अहम भूमिका निभा सकती है.
दूसरी ओर, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली और वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता से दबाव बन सकता है. ऐसे में निवेशकों के लिए केवल शुरुआती तेजी के आधार पर बाजार की दिशा का अनुमान लगाना पर्याप्त नहीं होगा. शेयरों में कारोबार की मात्रा, तिमाही नतीजों और खरीदारी की निरंतरता पर नजर रखना महत्वपूर्ण रहेगा.
(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)
400 से अधिक बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का आकलन, विशेषज्ञों के मुताबिक बेहतर कनेक्टिविटी से रियल एस्टेट, निर्माण उपकरण और निजी निवेश को मिल सकते हैं नए अवसर
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
केंद्र सरकार की पीएम गतिशक्ति पहल के तहत 20.23 लाख करोड़ रुपये की लागत वाली बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को समीक्षा के दायरे में लाया गया है. इनमें से 400 परियोजनाओं का नेटवर्क प्लानिंग ग्रुप (एनपीजी) मंजूरी के लिए आकलन कर चुका है. इन परियोजनाओं में सड़क, रेलवे और अन्य बुनियादी ढांचा क्षेत्र शामिल हैं. सरकार की इस पहल का उद्देश्य विभिन्न क्षेत्रों की परियोजनाओं की योजना को एकीकृत करना, सरकारी विभागों के बीच समन्वय बढ़ाना और लॉजिस्टिक्स की लागत कम करना है.
पीएम गतिशक्ति पहल के पांच साल पूरे होने के मौके पर विशेषज्ञों ने इसे भारत में बुनियादी ढांचे की योजना बनाने के तरीके में महत्वपूर्ण बदलाव बताया है. उनके मुताबिक, डिजिटल तकनीक और विभिन्न विभागों के आंकड़ों को एक साझा मंच पर लाने से परियोजनाओं की योजना, कनेक्टिविटी और क्रियान्वयन में सुधार की संभावनाएं बढ़ी हैं. हालांकि, विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि इस पहल का वास्तविक लाभ तभी मिलेगा, जब परियोजनाएं समय पर और बेहतर गुणवत्ता के साथ पूरी होंगी तथा उनका फायदा छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचेगा.
बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की एकीकृत योजना पर जोर
पीएम गतिशक्ति की शुरुआत 13 अक्टूबर 2021 को हुई थी. इसके तहत विभिन्न क्षेत्रों की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की योजना और विकास को एक साझा ढांचे में लाने पर जोर दिया गया है. इस पहल के अंतर्गत 500 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश वाली लॉजिस्टिक्स और कनेक्टिविटी संबंधी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का नेटवर्क प्लानिंग ग्रुप आकलन करता है.
एनपीजी परियोजनाओं की योजना का मूल्यांकन पीएम गतिशक्ति के निर्धारित सिद्धांतों के आधार पर करता है. इसका उद्देश्य सरकारी विभागों और बुनियादी ढांचा क्षेत्रों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना है, ताकि परियोजनाओं की योजना और क्रियान्वयन में समन्वय बढ़ाया जा सके. हालांकि, 20.23 लाख करोड़ रुपये की परियोजनाओं को समीक्षा के दायरे में शामिल किए जाने का अर्थ यह नहीं है कि सभी परियोजनाओं को अंतिम मंजूरी या वित्तीय स्वीकृति मिल चुकी है.
डिजिटल प्लेटफॉर्म पर 1,800 से अधिक डेटा लेयर
पीएम गतिशक्ति के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर 1,800 से अधिक डेटा लेयर एकीकृत की गई हैं. इसमें 58 केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों के साथ सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का डेटा शामिल है.
इस प्लेटफॉर्म पर भूमि रिकॉर्ड, बंदरगाहों, जंगलों, स्कूलों, रेलवे स्टेशनों, जल निकायों, दूरसंचार टावरों और राजमार्गों से संबंधित जानकारी उपलब्ध है. इसके अलावा, इस पहल के तहत 65 से अधिक सॉफ्टवेयर मॉड्यूल और टूल विकसित किए गए हैं तथा 100 से अधिक मोबाइल और वेब एप्लिकेशन तैयार किए गए हैं.
इन डिजिटल संसाधनों का उद्देश्य विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के आंकड़ों को एक साझा ढांचे में उपलब्ध कराना है, जिससे परियोजनाओं की योजना बनाते समय संभावित बाधाओं का आकलन किया जा सके और बेहतर फैसले लिए जा सकें.
निर्माण उपकरण उद्योग के लिए बढ़ सकते हैं अवसर
ऐसीई-ऐक्शन कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट लिमिटेड के सीईओ (क्रेन्स) मनीष माथुर ने कहा, “प्रधानमंत्री गतिशक्ति के पांच साल पूरे होना भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास की यात्रा में एक अहम पड़ाव है. इस सरकारी पहल से विकास परियोजनाओं की बेहतर योजना बनाने और सड़क, रेलवे व परिवहन के दूसरे साधनों को आपस में जोड़ने में मदद मिली है. इससे दूर-दराज के इलाकों तक पहुंच आसान हुई है और परियोजनाओं के काम में आने वाली रुकावटों को दूर करने में मदद मिली है. अलग-अलग विभागों के बीच बेहतर तालमेल, जमीन अधिग्रहण में तेजी और मंजूरी की प्रक्रिया आसान होने से परियोजनाओं को आगे बढ़ाना आसान हुआ है. साथ ही, पर्यावरण पर पड़ने वाले असर को कम करने की दिशा में भी काम किया गया है. ये सभी प्रयास इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास बेहतर और सतत तरीके से करने के लिए जरूरी हैं.
“हमें मंजूरी के लिए अनुशंसित 20.23 लाख करोड़ रुपये की लागत वाली 400 परियोजनाओं से काफी उम्मीदें हैं. ये परियोजनाएं देश में इंफ्रास्ट्रक्चर विकास की बड़ी संभावनाओं और निर्माण कार्यों में इस्तेमाल होने वाली मशीनों की इंडस्ट्री के लिए नए अवसरों का संकेत देती हैं. सड़क, रेलवे, लॉजिस्टिक्स और दूसरे क्षेत्रों में परियोजनाओं का काम तेज होने के साथ क्रेन, मिट्टी की खुदाई करने वाली मशीनों और सामान उठाने व एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने वाले उपकरणों की मांग बढ़ने की उम्मीद है.
“यह निर्माण मशीनों की इंडस्ट्री के लिए देश की विकास योजनाओं में योगदान देने का एक बड़ा अवसर है. भरोसेमंद, आधुनिक तकनीक से लैस और भारत में बने उपकरणों की मदद से इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को आगे बढ़ाया जा सकता है. साथ ही, इससे 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में भी मदद मिलेगी.”
परियोजनाओं के क्रियान्वयन और तकनीक पर ध्यान जरूरी
रोडिक कंसल्टेंट्स में रोड्स एंड हाईवेज के असिस्टेंट वाइस प्रेसिडेंट अविषेक भारद्वाज ने कहा, “पिछले पांच वर्षों में प्रधानमंत्री गतिशक्ति ने भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर की योजना बनाने के तरीके में बड़ा बदलाव किया है. इसके तहत अलग-अलग क्षेत्रों की जानकारी, इंफ्रास्ट्रक्चर नेटवर्क और सरकारी विभागों के बीच तालमेल को एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाया गया है. साथ ही, इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी परियोजनाओं पर बेहतर तालमेल के साथ काम करने और सही जानकारी के आधार पर फैसले लेने में मदद मिल रही है.
“नेटवर्क प्लानिंग ग्रुप की ओर से करीब 20.23 लाख करोड़ रुपये की लागत वाली 400 से अधिक इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं का मूल्यांकन किया जाना इस योजना के दायरे को दिखाता है. अब जरूरत इस बात की है कि योजना बनाने के दौरान मिलने वाले फायदों को जमीन पर भी उतारा जाए. इसके लिए परियोजनाओं की तैयारी बेहतर करनी होगी, अलग-अलग सरकारी विभागों के बीच तालमेल बढ़ाना होगा और काम को समय पर और सही तरीके से पूरा करने पर ध्यान देना होगा.
“रोडिक कंसल्टेंट्स जैसी इंजीनियरिंग सलाह देने वाली कंपनियों के लिए यह बदलाव तकनीक के बढ़ते महत्व को दिखाता है. इंजीनियरिंग के अनुभव के साथ डिजिटल तकनीक और आंकड़ों का इस्तेमाल करके परियोजनाओं की बेहतर योजना बनाई जा सकती है. रोडिक में हम तकनीक की मदद से परियोजनाओं की स्थिति पर नजर रखने, काम की प्रगति की जानकारी जुटाने, संभावित समस्याओं को समय रहते पहचानने और बेहतर फैसले लेने पर ध्यान देते हैं.
“हमारा मानना है कि भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर का अगला दौर केवल निवेश बढ़ने से तय नहीं होगा. यह भी उतना ही जरूरी होगा कि योजना बनाने, इंजीनियरिंग, तकनीक और परियोजनाओं के प्रबंधन के बीच बेहतर तालमेल हो. इससे परियोजनाओं को अधिक कुशलता और बेहतर गुणवत्ता के साथ पूरा करने में मदद मिलेगी. साथ ही, इंफ्रास्ट्रक्चर को भविष्य की जरूरतों और चुनौतियों के लिए तैयार बनाने पर भी ध्यान दिया जा सकेगा.”
निवेशकों के लिए बढ़ सकती है जमीन और विकास परियोजनाओं में संभावनाएं
भारत वेल्थ ग्रुप के सीईओ साहिल मार्शल ने कहा, “पीएम गतिशक्ति के पांच साल ने भारत में योजना बनाने के तरीके को बदल दिया है. अब निर्माण शुरू होने से कई साल पहले ही बुनियादी ढांचे की मैपिंग एक साथ की जा रही है और इसे देखा जा सकता है. इससे निवेशकों को जमीन के मामले में वह भरोसा मिल रहा है, जो पहले उनके पास नहीं था. उन्हें यह स्पष्टता मिल रही है कि विकास किस दिशा में आगे बढ़ेगा.
“सार्वजनिक पूंजीगत व्यय लगातार भारत के सबसे मजबूत आर्थिक विकास कारकों में से एक है. इससे रोजगार पैदा होता है, लॉजिस्टिक्स की लागत कम होती है और जहां-जहां बुनियादी ढांचा पहुंचता है, वहां जमीन के मूल्य में बढ़ोतरी होती है. जब सरकार पूंजी निवेश के साथ आगे बढ़ती है, तो निजी निवेशक भी भरोसे के साथ निवेश करते हैं.
“अयोध्या इसका उदाहरण है. तीन साल से भी कम समय में हवाई अड्डे, पुनर्विकसित रेलवे स्टेशन और बेहतर सड़कों ने वहां की अर्थव्यवस्था को बदल दिया है. मुझे गर्व है कि भारत वेल्थ ग्रुप वहां जमीन में निवेश करने वाले सबसे सक्रिय निवेशकों में रहा है. हमारी तकनीक इन योजनाओं के साथ भूमि उपयोग की मंजूरियों और रजिस्ट्री के आंकड़ों का विश्लेषण करती है, ताकि बाजार में कीमत बढ़ने से पहले ही संभावित मूल्य की पहचान की जा सके. इसी तरह सरकारी नीतियां निवेशकों और जमीन मालिकों, दोनों के लिए निजी अवसर पैदा करती हैं.
“20.23 लाख करोड़ रुपये की नई मंजूरी के लिए अनुशंसित परियोजनाएं देशभर में इसी तरह के अवसर पैदा कर सकती हैं. हालांकि, यह तभी संभव होगा, जब विकास का लाभ जमीनी स्तर तक पहुंचे, छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों के जमीन मालिकों तक पहुंचे और भारत के केवल बड़े महानगरों के बजाय पूरे देश को निवेश के लिए तैयार बनाया जाए.”
बेहतर कनेक्टिविटी से रियल एस्टेट को मिल सकता है बढ़ावा
अल्फा कॉर्प डेवलपमेंट लिमिटेड के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर और सीएफओ संतोष अग्रवाल ने कहा, “पीएम गतिशक्ति पहल देश में इंफ्रास्ट्रक्चर का एक ऐसा नेटवर्क तैयार करने की दिशा में अहम कदम है, जो भारत के शहरी और आर्थिक विकास को आगे बढ़ाने में मदद करेगा. करीब 20.23 लाख करोड़ रुपये की लागत वाली 400 से अधिक इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं का मूल्यांकन इस बात को दिखाता है कि अब बेहतर योजना बनाने, परिवहन के विभिन्न साधनों के बीच कनेक्टिविटी और परियोजनाओं को सही तरीके से पूरा करने पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है.
“रियल एस्टेट सेक्टर के लिए बेहतर कनेक्टिविटी और इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास नए क्षेत्रों तक पहुंच आसान बना सकता है. इससे रेजिडेंशियल और कमर्शियल इलाकों के विस्तार को बढ़ावा मिलेगा और निवेश के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं. इन परियोजनाओं को समय पर पूरा करना जरूरी है, ताकि इंफ्रास्ट्रक्चर पर किए जा रहे निवेश से लंबे समय तक क्षेत्रीय विकास हो और रियल एस्टेट सेक्टर को भी लगातार आगे बढ़ने में मदद मिले.”
एम3एम इंडिया के प्रेसिडेंट रॉबिन मंगला ने कहा, “पीएम गतिशक्ति पहल के तहत इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास में तेजी लाने पर दिया जा रहा जोर भारत के रियल एस्टेट सेक्टर को बड़ा बढ़ावा दे सकता है. बेहतर कनेक्टिविटी, परिवहन नेटवर्क और इंफ्रास्ट्रक्चर की एकीकृत योजना से तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्रों का आकर्षण बढ़ सकता है. इससे रेजिडेंशियल, कमर्शियल और इंडस्ट्रियल प्रोजेक्ट्स के लिए नए अवसर खुलेंगे.
“रियल एस्टेट सेक्टर के लिए बेहतर कनेक्टिविटी रोजगार के प्रमुख केंद्रों तक पहुंच आसान बना सकती है, शहरों के योजनाबद्ध विस्तार में मदद कर सकती है और मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर की संभावनाओं वाले क्षेत्रों में निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ा सकती है. जैसे-जैसे अलग-अलग क्षेत्रों में कनेक्टिविटी बेहतर होगी, डेवलपर्स नए बाजारों में विस्तार के अवसर तलाश सकेंगे. वहीं, कारोबारियों को लोगों और सामान की आवाजाही अधिक आसान और बेहतर बनाने में मदद मिलेगी.
“इंफ्रास्ट्रक्चर पर आधारित यह विकास रियल एस्टेट की मांग बढ़ाने, रोजगार के नए अवसर पैदा करने और देश की आर्थिक तरक्की में योगदान देने में अहम भूमिका निभा सकता है.”
बेंगलुरु के बाहरी इलाकों में आवासीय विकास की संभावना
संजीविनी ग्रुप के मैनेजिंग डायरेक्टर सुरेश एच. ए. ने कहा, “पीएम गतिशक्ति के तहत देशभर में 20.23 लाख करोड़ रुपये की 400 से अधिक परियोजनाओं को मंजूरी की सिफारिश शहरी परिवहन और शहरों के आसपास के इलाकों के विकास को नई गति देगी. इससे आवास क्षेत्र को भी फायदा होगा.
“बेंगलुरु को भी इन परियोजनाओं से काफी लाभ मिल सकता है. शहर में बुनियादी ढांचे से जुड़ी कई बाधाओं के कारण विकास की संभावनाओं का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है. उपनगरीय रेल नेटवर्क, बाहरी रिंग रोड और आईटी कॉरिडोर को जोड़ने वाले एक्सप्रेसवे जैसी परियोजनाओं को प्राथमिकता मिलने से शहर के बाहरी इलाकों में नए आवासीय क्षेत्र विकसित होंगे.
“इससे डेवलपर्स को किफायती और बेहतर सुविधाओं वाली एकीकृत टाउनशिप विकसित करने का अवसर मिलेगा. साथ ही, शहर के मध्य हिस्सों में ट्रैफिक का दबाव कम होगा और लोगों को बेहतर कनेक्टिविटी के साथ अच्छी जीवनशैली का विकल्प मिलेगा.”
धोलेरा जैसे नए आर्थिक केंद्रों को मिल सकती है गति
आईजी ग्रुप के मैनेजिंग डायरेक्टर ललित परिहार ने कहा, “पीएम गतिशक्ति के तहत इन बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को मंजूरी की सिफारिश धोलेरा एसआईआर जैसे नए स्मार्ट शहरों के विकास को गति देगी. हाई-स्पीड रेल, मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क और एक्सप्रेसवे को बेहतर तरीके से जोड़ने से माल की आवाजाही आसान होगी और विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा मिलेगा.
“धोलेरा के लिए इसका मतलब सिर्फ बेहतर सड़कों तक सीमित नहीं है, बल्कि औद्योगिक जमीन की मांग बढ़ने, नई विनिर्माण इकाइयां स्थापित होने और कामगारों के लिए आवास की जरूरत बढ़ने के रूप में भी सामने आएगा. इससे धोलेरा का विकास एक आधुनिक शहर की परिकल्पना से आगे बढ़कर भारत के प्रमुख और बेहतर कनेक्टिविटी वाले आर्थिक केंद्र के रूप में हो सकेगा.”
परियोजनाओं को समय पर पूरा करना अहम
विशेषज्ञों के विचारों से स्पष्ट है कि पीएम गतिशक्ति का असर केवल परिवहन और निर्माण क्षेत्र तक सीमित नहीं रहने की संभावना है. बेहतर कनेक्टिविटी से निर्माण उपकरणों की मांग, जमीन में निवेश, औद्योगिक गतिविधियों, आवासीय विकास और नए आर्थिक केंद्रों के विस्तार को भी गति मिल सकती है.
हालांकि, इन संभावनाओं को वास्तविक आर्थिक लाभ में बदलने के लिए परियोजनाओं की तैयारी, विभागों के बीच समन्वय, तकनीक के प्रभावी इस्तेमाल और समयबद्ध क्रियान्वयन पर ध्यान देना जरूरी होगा. विशेषज्ञों के मुताबिक, इस पहल की सफलता का आकलन केवल परियोजनाओं की संख्या या निवेश के अनुमान से नहीं, बल्कि इस बात से भी होगा कि बेहतर बुनियादी ढांचे का लाभ छोटे शहरों, ग्रामीण क्षेत्रों, कारोबारियों और आम लोगों तक कितना पहुंचता है.
तीसरी तिमाही में Havas का नेट रेवेन्यू 703 मिलियन यूरो रहा, पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 7.2% की बढ़ोतरी
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
विज्ञापन और मार्केटिंग क्षेत्र की कंपनी Havas ने 2026 की तीसरी तिमाही में भारत में सकारात्मक प्रदर्शन जारी रखा. हालांकि, एशिया-प्रशांत और अफ्रीका क्षेत्र में कंपनी की ऑर्गेनिक नेट रेवेन्यू ग्रोथ सालाना आधार पर 6.7% घट गई. कंपनी के मुताबिक, चीन में कारोबार की सुस्ती और मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव का असर इस क्षेत्र के प्रदर्शन पर पड़ा.
कंपनी ने बताया कि 2026 के पहले नौ महीनों में भी भारत में उसका प्रदर्शन सकारात्मक रहा. इससे क्षेत्र के अन्य बाजारों में आई कमजोरी के असर को कुछ हद तक कम करने में मदद मिली. हालांकि, Havas ने भारत के लिए अलग से विकास दर के आंकड़े जारी नहीं किए.
तीसरी तिमाही में रेवेन्यू 7.2% बढ़ा
Havas ने 2026 की तीसरी तिमाही में 703 मिलियन यूरो का नेट रेवेन्यू दर्ज किया, जो पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 7.2% अधिक है. कंपनी के अनुसार, इस दौरान उसके मीडिया और क्रिएटिव डिवीजन ने समूह के प्रदर्शन को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई.
पहले नौ महीनों के दौरान एशिया-प्रशांत और अफ्रीका क्षेत्र में ऑर्गेनिक ग्रोथ 5.5% गिर गई. कंपनी ने बताया कि क्षेत्र में आई इस गिरावट का करीब आधा हिस्सा मध्य पूर्व में कारोबार की कमजोरी से जुड़ा था, जबकि शेष गिरावट मुख्य रूप से चीन में सुस्त गतिविधियों के कारण रही. इसके बावजूद, कंपनी के मुताबिक भारत में इस अवधि के दौरान प्रदर्शन सकारात्मक बना रहा.
उत्तरी अमेरिका में सबसे ज्यादा ग्रोथ
क्षेत्रीय प्रदर्शन की बात करें तो तीसरी तिमाही में उत्तरी अमेरिका Havas का सबसे मजबूत बाजार रहा. यहां ऑर्गेनिक ग्रोथ 7.5% दर्ज की गई. कंपनी ने इसका श्रेय मीडिया और क्रिएटिव, दोनों डिवीजन के प्रदर्शन को दिया. यूरोप में कंपनी की ऑर्गेनिक ग्रोथ 1.7% रही, जबकि लैटिन अमेरिका में तिमाही के दौरान 4.3% की गिरावट दर्ज की गई.
मध्य पूर्व और चीन की सुस्ती का असर
Havas के नतीजे बताते हैं कि अलग-अलग बाजारों में कारोबार की स्थिति एक जैसी नहीं रही. जहां भारत और उत्तरी अमेरिका में प्रदर्शन सकारात्मक रहा, वहीं चीन में सुस्त गतिविधियों और मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव ने एशिया-प्रशांत और अफ्रीका क्षेत्र के नतीजों पर दबाव डाला. कंपनी ने भारत के लिए अलग से रेवेन्यू या ग्रोथ के आंकड़े साझा नहीं किए हैं. ऐसे में देश में कारोबार की बढ़ोतरी की सटीक दर का आकलन उपलब्ध जानकारी के आधार पर नहीं किया जा सकता.
अमेरिका के शीर्ष राजनयिक अपने सबसे बड़े ग्राहक से संबंध मजबूत करने के लिए दिल्ली को दरकिनार कर रहे हैं.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
पलक शाह
ग्राहक ही सर्वोपरि है
रिलायंस के पास वह है, जिसकी वाशिंगटन को जरूरत है
पहली बार अमेरिका के विदेश मंत्री भारत आ रहे हैं, लेकिन नई दिल्ली नहीं जाएंगे. विदेश विभाग ने 13 अक्टूबर को बताया कि मार्को रुबियो 17 से 22 अक्टूबर के बीच भारत दौरे पर मुंबई और जामनगर जाएंगे. प्रकाशित कार्यक्रम में राजधानी में किसी बैठक का जिक्र नहीं है.
जामनगर कोई राजनयिक शहर नहीं है. यह मुकेश अंबानी का रिफाइनरी शहर है, जहां दुनिया का सबसे बड़ा एकल-स्थल रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स स्थित है. यहां प्रतिदिन करीब 14 लाख बैरल तेल का प्रसंस्करण होता है. विदेश विभाग ने इस जगह को चुनने की वजह नहीं बताई है. हालांकि, इसकी खास वजह समझने के लिए ज्यादा कुछ कहने की जरूरत नहीं है. कुछ दिन पहले ही एलन मस्क ने अंबानी को भारत का असली बॉस बताया था.
कूटनीतिक भाषा को हटाकर देखें तो गणित आसान है
रिलायंस 20 साल के अनुबंधों के तहत अमेरिका से एथेन खरीदती है. वह अमेरिका के बाहर वेनेजुएला के कच्चे तेल की सबसे बड़ी खरीदार बन गई है. यह वह तेल है, जिसकी आपूर्ति मादुरो की गिरफ्तारी के बाद से अमेरिकी नियंत्रण में रही है. ट्रंप ने टेक्सास में 300 अरब डॉलर की एक रिफाइनरी परियोजना में रिलायंस को निवेशक बताया था, जिस पर अभी निर्माण शुरू नहीं हुआ है. अब आपूर्तिकर्ता अपने ग्राहक से मिलने आ रहा है और उसे दो चीजें चाहिए: अमेरिका महाद्वीप से ज्यादा तेल की आपूर्ति और रूस से कम तेल की खरीद, साथ ही ट्रंप द्वारा घोषित रिफाइनरी परियोजना को आकार देना.
ग्राहक: रूसी तेल से वेनेजुएला के तेल की ओर
केप्लर के आंकड़ों के मुताबिक, 2024 और 2025 के बड़े हिस्से में रिलायंस दुनिया की रूसी कच्चे तेल की सबसे बड़ी खरीदार थी. रोसनेफ्ट के साथ उसके दीर्घकालिक समझौते के तहत प्रतिदिन 5 लाख बैरल तक तेल खरीदा जा सकता था.
अक्टूबर 2025 में रोसनेफ्ट और लुकोइल पर अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद रिलायंस ने अपनी निर्यात रिफाइनरी में रूसी तेल का इस्तेमाल बंद कर दिया. हालांकि, घरेलू बाजार के लिए इस्तेमाल होने वाले संयंत्र में उसने उन रूसी विक्रेताओं से तेल खरीदना जारी रखा, जिन पर प्रतिबंध नहीं थे. फरवरी 2026 से प्रतिदिन करीब 1.5 लाख बैरल तेल खरीदने की योजना थी.
वाशिंगटन जिस बदलाव की उम्मीद कर रहा है, वह पहले ही शुरू हो चुका है. अमेरिका द्वारा निकोलस मादुरो को पकड़े जाने के बाद 2026 की शुरुआत में रिलायंस को वेनेजुएला से सीधे कच्चा तेल खरीदने के लिए अमेरिकी सामान्य लाइसेंस मिला. केप्लर के अनुमान के मुताबिक, अक्टूबर में भारत का वेनेजुएला से तेल आयात करीब 4.65 लाख बैरल प्रतिदिन रहा, जो सात साल का उच्चतम स्तर है. इस तेल की हर खेप जामनगर को सेवा देने वाले बंदरगाह सिक्का पहुंच रही है.
अमेरिका के साथ ऊर्जा संबंध कच्चे तेल से कहीं आगे तक फैले हैं. 2017 से रिलायंस अपने बहुत बड़े एथेन वाहक जहाजों के बेड़े के जरिए अमेरिका से भारत में एथेन ला रही है. इसके लिए 20 साल के आपूर्ति समझौते हैं. इस तरह वह अमेरिका से एथेन की सबसे बड़ी आयातक बन गई है. पेट्रोकेमिकल कच्चे माल के मामले में रिलायंस रूस पर नहीं, बल्कि अमेरिका पर निर्भर है.
समयसीमा: 18 अक्टूबर
रुबियो ऐसे समय भारत पहुंच रहे हैं, जब अमेरिका की एक कानूनी समयसीमा कुछ ही दिन पहले तय हुई है. इसके तहत सभी भारतीय वस्तुओं पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाया जा सकता है. ट्रंप ने 18 सितंबर को ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट पर हस्ताक्षर किए थे. यह कानून रूस से कच्चा तेल या गैस खरीदने वाले पांच सबसे बड़े खरीदारों के खिलाफ 30 दिनों के भीतर कार्रवाई का निर्देश देता है.
किसी देश पर यह कानून तभी लागू होगा, जब वह 18 अक्टूबर या उसके बाद रूस से ऊर्जा उत्पादों की नई खरीद करेगा. अनौपचारिक रैंकिंग के अनुसार, रूस के कच्चे तेल के खरीदारों में भारत दूसरे स्थान पर है, जबकि चीन पहले स्थान पर है. 12 अक्टूबर तक अमेरिकी प्रशासन ने न तो लक्षित देशों की सूची प्रकाशित की थी, न ही टैरिफ की दर या किसी छूट की जानकारी दी थी.
अभी तक किसी ने यह सवाल भी नहीं उठाया है कि अमेरिका-रूस डीजल समझौते का क्या होगा. हालांकि, नीतिगत मामलों पर नजर रखने वालों का कहना है कि डीजल समझौते से भारत को स्वतः छूट नहीं मिलती. अधिकतम यह भारत को अपना पक्ष रखने का आधार दे सकता है, छूट की गारंटी नहीं.
अमेरिकी वित्त विभाग ने 9 अक्टूबर को एक अस्थायी लाइसेंस जारी किया, जिसके तहत रूसी डीजल को 7 अप्रैल, 2027 तक बेचा और आयात किया जा सकता है. इसमें अमेरिका में आयात भी शामिल है. ट्रंप ने कहा था कि रूस 3 लाख टन से अधिक डीजल की आपूर्ति करेगा. इसके बाद नवंबर में 5 लाख टन और फिर 10 लाख टन डीजल की आपूर्ति की जाएगी.
भारत पर यह नियम क्यों लागू नहीं होता: यह लाइसेंस डीजल यानी रिफाइंड उत्पाद से संबंधित है. ग्राहम एक्ट के तहत टैरिफ का आकलन केवल कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की खरीद के आधार पर होता है, डीजल जैसे रिफाइंड उत्पादों के आधार पर नहीं. भारत की चिंता कच्चे तेल की खरीद से जुड़ी है. अमेरिकी प्रशासन ने अभी तक भारत को छूट देने पर अंतिम फैसला नहीं किया है.
बचाव का रास्ता: अमेरिकी राष्ट्रपति कांग्रेस को यह प्रमाणित करने के बाद किसी भी शुल्क से छूट दे सकते हैं कि ऐसा करना अमेरिका के राष्ट्रीय हित में है. कुछ विश्लेषकों को उम्मीद है कि भारत को ऐसी छूट मिल सकती है. इसकी एक वजह यह है कि भारत की कच्चे तेल की खरीद पर अभी दंडात्मक कार्रवाई करने से डीजल की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है. इससे उस बाजार पर असर पड़ेगा, जिसे व्हाइट हाउस शांत रखने की कोशिश कर रहा है.
फरवरी में भारत पर टैरिफ 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया था. इसकी एक वजह यह संकेत भी था कि भारत रूसी कच्चे तेल की खरीद बंद कर देगा. हालांकि, द्विपक्षीय व्यापार समझौता अब भी अटका हुआ है. ऐसे में रिलायंस के कच्चे तेल की खरीद के विकल्प भारत के लिए बातचीत का सबसे स्पष्ट आधार बन गए हैं. रूस से आने वाली हर खेप, जिसे वेनेजुएला या अमेरिकी तेल से बदला जाता है, वह सबूत है जिसे नई दिल्ली बातचीत की मेज पर रख सकती है.
300 अरब डॉलर की रिफाइनरी, जिसकी किसी ने पुष्टि नहीं की
मार्च 2026 में ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर टेक्सास के पोर्ट ऑफ ब्राउन्सविले में अमेरिका फर्स्ट रिफाइनिंग द्वारा रिफाइनरी स्थापित करने की घोषणा की थी. उन्होंने निवेश के लिए रिलायंस को धन्यवाद देते हुए इसे 300 अरब डॉलर का सौदा बताया था. रिलायंस ने इसमें अपनी भूमिका या निवेश के पैमाने की औपचारिक पुष्टि नहीं की है.
यह सुर्खियों में बताई गई रकम निर्माण लागत नहीं है. परियोजना विकसित करने वाली कंपनी के अनुसार, इसमें अगले करीब 20 वर्षों में 125 अरब डॉलर का अमेरिकी शेल कच्चा तेल खरीदना और 175 अरब डॉलर का ईंधन उत्पादन शामिल है. परियोजना की डेवलपर कंपनी एलिमेंट फ्यूल्स ने इससे पहले निर्माण लागत 3 से 4 अरब डॉलर बताई थी.
इस सौदे के साथ राजनीतिक विवाद भी जुड़ा है. प्रोपब्लिका ने जून में रिपोर्ट दी थी कि डोनाल्ड ट्रंप जूनियर की इस परियोजना में हिस्सेदारी थी और उन्होंने निवेश से पहले नवंबर 2025 में भारत में अनंत अंबानी से मुलाकात की थी. व्हाइट हाउस ने प्रोपब्लिका से कहा था कि हितों के टकराव का कोई मामला नहीं था. रिलायंस ने भी कहा था कि उसे कोई विशेष तरजीह नहीं मिली.
दौरे की योजना से परिचित लोगों का कहना है कि वाशिंगटन चाहता है कि रिलायंस ब्राउन्सविले परियोजना में अपने निवेश की एक निश्चित रकम बताए. अमेरिका में इस तरह के बड़े निवेश की घोषणा पहले एस्सार भी कर चुका है. जामनगर का दौरा इस मुद्दे को उठाने के लिए स्वाभाविक जगह है.
बीच की कड़ी
योजना से परिचित लोगों के मुताबिक, जामनगर दौरे की व्यवस्था एमपीएच होल्डिंग के चेयरमैन अंशुमान मिश्रा ने की है. मिश्रा की तस्वीरें पहले भी मुकेश अंबानी, एलन मस्क और डोनाल्ड ट्रंप के साथ आयोजनों में सामने आ चुकी हैं.
वह दोनों पक्षों के लिए नए नहीं हैं. फाइनेंशियल टाइम्स ने उन्हें पूर्व बैंकर और अंबानी के विश्वासपात्र के रूप में वर्णित किया है, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय मामलों में अंबानी को सलाह दी. हिंदुस्तान टाइम्स ने उन्हें ऐसे व्यक्ति के रूप में पेश किया है, जो वित्त, रणनीतिक परामर्श और मीडिया के क्षेत्र में लंदन, लॉस एंजिलिस और मुंबई के बीच काम करते हैं और जिनके जेरेड कुशनर से भी संबंध हैं.
ट्रंप प्रशासन तक उनकी पहुंच सार्वजनिक है. अगस्त 2025 में जब ट्रंप ने डोनाल्ड ट्रंप जूनियर के साथ एक प्रकाशन गृह के सह-संस्थापक सर्जियो गोर को भारत में अमेरिकी राजदूत नामित किया था, तब मिश्रा ने इस चयन की सराहना की और गोर को अपना मित्र बताया था.
वह उस जगह पर हैं, जहां भारतीय पूंजी और ट्रंप का वाशिंगटन एक-दूसरे से मिलते हैं. अंबानी परिवार इस संपर्क को मजबूत करने के लिए वर्षों से काम कर रहा है.
मुकेश और नीता अंबानी को जनवरी 2025 में ट्रंप के शपथ ग्रहण समारोह में मंच के पास सीट मिली थी और वे उससे एक रात पहले आयोजित कैंडललाइट डिनर में भी शामिल हुए थे. मई 2025 में अंबानी ट्रंप के सम्मान में कतर के अमीर द्वारा आयोजित राजकीय रात्रिभोज में शामिल होने के लिए दोहा गए थे. द न्यू रिपब्लिक ने प्रोपब्लिका का हवाला देते हुए रिपोर्ट दी थी कि रिलायंस की एक इकाई ने 2024 में ट्रंप ऑर्गनाइजेशन को एक ऐसी परियोजना के लिए 1 करोड़ डॉलर का विकास शुल्क दिया था, जिसकी कभी घोषणा नहीं हुई.
बातचीत की मेज पर दो मांगें
इन लोगों के मुताबिक, जामनगर दौरे का एजेंडा दो मांगों तक सीमित है. पहली, ग्राहम एक्ट के तहत टैरिफ लागू होने से पहले रिलायंस रूसी कच्चे तेल से दूरी बढ़ाकर वेनेजुएला के तेल की खरीद बढ़ाए. दूसरी, कंपनी अमेरिका में बड़े और स्पष्ट निवेश की घोषणा करे. ब्राउन्सविले परियोजना इसके लिए सबसे स्वाभाविक विकल्प है.
दौरे में वंतारा शामिल नहीं
दौरे से संबंधित आंतरिक निर्देशों में कहा गया है कि रुबियो को जामनगर स्थित वंतारा नहीं ले जाया जाना चाहिए. वंतारा अंबानी परिवार का पशु बचाव और वन्यजीव केंद्र है. योजना से परिचित लोगों ने यह जानकारी दी.
यह निर्देश प्रोपब्लिका की उस रिपोर्ट के बाद आया है, जिसमें बताया गया था कि डोनाल्ड ट्रंप जूनियर ने नवंबर 2025 में भारत दौरे के दौरान अनंत अंबानी के साथ परिवार के निजी चिड़ियाघर का दौरा किया था. यह यात्रा टेक्सास की रिफाइनरी परियोजना की घोषणा से कई महीने पहले हुई थी.
मुंबई में जयशंकर से मुलाकात
कार्यक्रम की जानकारी रखने वाले लोगों के अनुसार, विदेश मंत्री एस. जयशंकर मुंबई में रुबियो से मुलाकात करेंगे. विदेश मंत्रालय ने अभी तक इस बैठक की घोषणा नहीं की है. नई दिल्ली के लिए बातचीत का मुख्य मुद्दा अटका हुआ व्यापार समझौता और 100 प्रतिशत टैरिफ का खतरा है. रिलायंस के कच्चे तेल की खरीद से जुड़े फैसले भारत का सबसे मजबूत पक्ष हैं. वहीं, रुबियो ऐसे समय आ रहे हैं, जब अमेरिका खुद भी रूस से ईंधन खरीद रहा है. इससे जयशंकर के साथ बैठक में भारत की स्थिति मजबूत होती है.
नई दिल्ली व्यापार समझौता चाहती है. वाशिंगटन को कच्चे तेल की आपूर्ति और एक रिफाइनरी चाहिए. रिलायंस के पास दोनों हैं. यही वजह है कि दुनिया का सबसे शक्तिशाली राजनयिक सौराष्ट्र के एक रिफाइनरी शहर की यात्रा कर रहा है.
पलक शाह, BW रिपोर्टर्स
(BW रिपोर्टर्स पलक शाह एक अनुभवी खोजी पत्रकार और The Market Mafia: Chronicle of India’s High-Tech Stock Market Scandal & The Cabal That Went Scot-Free की लेखिका हैं. यह एक तीखा खुलासा है, जिसने भारत के वित्तीय बाजारों के छिपे हुए पक्ष को सामने लाया. मुंबई में करीब दो दशकों की जमीनी रिपोर्टिंग के साथ पलक ने पैसे, सत्ता और नियमन के बीच के गठजोड़ की गहराई से पड़ताल करने वाले पत्रकार के रूप में पहचान बनाई है. उनके लेख भारत के प्रतिष्ठित वित्तीय दैनिकों, जिनमें The Economic Times, Business Standard, The Financial Express और The Hindu Business Line शामिल हैं, में प्रकाशित हुए हैं.
19 वर्ष की उम्र में अपराध रिपोर्टिंग की ओर आकर्षित हुईं पलक ने जल्द ही महसूस किया कि 1980 के दशक के मुंबई के गैंग युद्धों की जगह अब कॉरपोरेट टावरों में चलने वाली सफेदपोश योजनाओं ने ले ली है. इस समझ ने उन्हें वित्तीय पत्रकारिता की ओर मोड़ा, जहां उन्होंने भारत की ‘व्हाइट मनी’ अर्थव्यवस्था की जटिल गतिविधियों को समझने में वर्षों बिताए हैं. शेयर बाजार में हेरफेर से लेकर नियामकीय खामियों तक, उनका काम हाई फाइनेंस की चमकदार सतह के पीछे छिपे उन समूहों को सामने लाता है जो पर्दे के पीछे से फैसलों को प्रभावित करते हैं. सच्चाई सामने लाने का उनका जुनून और उन कड़ियों को जोड़ने की क्षमता, जिन्हें दूसरे नजरअंदाज कर देते हैं, उन्हें एक मजबूत पत्रकार बनाती है, जो यथास्थिति को चुनौती देने और उन खिलाड़ियों को बेनकाब करने से नहीं डरतीं जो खुद को कानून से ऊपर समझते हैं.)
पर्सनलाइज्ड स्किनकेयर स्टार्टअप फंडिंग का इस्तेमाल क्लिनिकल टीम के विस्तार, डायग्नोसिस तकनीक को मजबूत करने और स्किन व हेयर केयर उत्पादों की रेंज बढ़ाने में करेगा.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
बेंगलुरु स्थित पर्सनलाइज्ड प्रिस्क्रिप्शन स्किनकेयर स्टार्टअप फॉर्मियल लैब्स (Formial Labs) ने प्री-सीड फंडिंग राउंड में 2.88 करोड़ रुपये जुटाए हैं. इस फंडिंग राउंड का नेतृत्व जीरोपर्ल वीसी (Zeropearl VC) ने किया. इसमें OZiva की संस्थापक और Giga Capital से जुड़ी आरती गिल, सोशल अल्फा में पार्टनरशिप्स के डायरेक्टर अरविंद राधाकृष्णन और डॉक्टर सुशील सेल्वराजन, अशोक रे चौधरी, शेखर नीमा तथा दीप्ति ठाकुर ने भी निवेश किया.
कंपनी इस पूंजी का इस्तेमाल अपनी क्लिनिकल टीम और परामर्श सेवाओं की क्षमता बढ़ाने, बीमारी की पहचान और व्यक्तिगत जरूरतों के अनुरूप उपचार तय करने वाली तकनीक को मजबूत करने तथा त्वचा और बालों की देखभाल से जुड़े उत्पादों की रेंज का विस्तार करने में करेगी. इसके अलावा, कंपनी अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म, त्वचा रोग विशेषज्ञों के क्लीनिक और फार्मेसी पार्टनर्स के जरिए वितरण नेटवर्क बढ़ाने की योजना बना रही है.
त्वचा और बालों की समस्याओं के लिए कस्टमाइज्ड फॉर्मूलेशन
जीत पटेल द्वारा स्थापित फॉर्मियल लैब्स त्वचा संबंधी अलग-अलग समस्याओं के लिए व्यक्तिगत जरूरतों के अनुरूप स्किनकेयर फॉर्मूलेशन तैयार करती है. इनमें मुंहासे, पिगमेंटेशन, त्वचा पर निशान और बढ़ती उम्र के लक्षण जैसी समस्याएं शामिल हैं.
कंपनी अपने फॉर्मूलेशन तैयार करने की प्रक्रिया को डिजिटल परामर्श और क्लिनिकल समीक्षा के साथ जोड़ती है. इसके जरिए मरीजों की जरूरतों के अनुसार उपचार योजनाओं में बदलाव किया जाता है. कंपनी का मॉडल प्रिस्क्रिप्शन आधारित स्किनकेयर और लगातार मरीजों की देखभाल पर केंद्रित है.
5,000 से अधिक फॉर्मूलेशन का वितरण
कंपनी के मुताबिक, वह अब तक 87 से अधिक स्टॉक कीपिंग यूनिट्स (SKUs) के तहत 5,000 से अधिक फॉर्मूलेशन वितरित कर चुकी है. कंपनी ने महीने-दर-महीने 40 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज करने की जानकारी दी है. उसके कुल कारोबार में दोबारा खरीदारी करने वाले ग्राहकों की हिस्सेदारी 40 प्रतिशत है.
फॉर्मियल लैब्स ने दो पीयर-रिव्यूड क्लिनिकल अध्ययन भी किए हैं. इनमें उसके एक फॉर्मूलेशन से जुड़ा रैंडमाइज्ड कंट्रोल्ड ट्रायल भी शामिल है. कंपनी के परिचालन में उसकी अपनी बेस व्हीकल टेक्नोलॉजी और गुणवत्ता सुनिश्चित करने की प्रक्रियाएं भी शामिल हैं. इसके अलावा, कंपनी के पास फार्मेसी और टेलीहेल्थ सेवाओं के लिए LegitScript सर्टिफिकेशन हैं.
क्लिनिकल सेवाओं और तकनीक के विस्तार की योजना
जीरोपर्ल वीसी के संस्थापक और मैनेजिंग पार्टनर बिपिन शाह ने कहा कि फर्म ने फॉर्मियल लैब्स में उसके क्लिनिकल दृष्टिकोण, प्रिस्क्रिप्शन आधारित फॉर्मूलेशन और मरीजों की निरंतर देखभाल पर ध्यान देने के कारण निवेश किया है. उन्होंने कंपनी के कारोबार में बार-बार खरीदारी करने वाले ग्राहकों की हिस्सेदारी को भी निवेश का एक महत्वपूर्ण आधार बताया.
फंडिंग के जरिए फॉर्मियल लैब्स अपनी क्लिनिकल और तकनीकी क्षमताओं को मजबूत करने के साथ भारत में व्यक्तिगत जरूरतों के अनुरूप प्रिस्क्रिप्शन स्किनकेयर की पहुंच बढ़ाना चाहती है. कंपनी की योजना त्वचा और बालों के उपचार से जुड़ी अपनी सेवाओं का विस्तार करने की है.
ऑडियंस मेजरमेंट, मीडिया ट्रेडिंग में बदलाव और कनेक्टेड टीवी जैसे मुद्दों पर होगा फोकस, विज्ञापन एजेंसियों और इंडस्ट्री के अन्य हितधारकों के बीच सहयोग बढ़ाने की पहल
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
विज्ञापन एजेंसियों के राष्ट्रीय संगठन एडवर्टाइजिंग एजेंसिज एसोसिएशन ऑफ इंडिया (AAAI) ने 2026-27 के एजेंडे के तहत नई मीडिया काउंसिल गठित की है. ओम्निकॉम मीडिया इंडिया के सीईओ कार्तिक शर्मा को इसकी अध्यक्षता सौंपी गई है. इस काउंसिल का उद्देश्य मीडिया कारोबार से जुड़े प्रमुख मुद्दों पर चर्चा के लिए साझा मंच तैयार करना और इंडस्ट्री के भविष्य से जुड़े फैसलों में सदस्य एजेंसियों की भागीदारी बढ़ाना है.
नई काउंसिल में बड़े मीडिया नेटवर्क, स्वतंत्र एजेंसियों और क्षेत्रीय कारोबार से जुड़ी एजेंसियों को एक साथ लाने की योजना है. इसके तहत ऑडियंस रिसर्च और मेजरमेंट, पारदर्शिता और जवाबदेही, मीडिया ट्रेडिंग के बदलते तौर-तरीकों, प्रतिभाओं के विकास तथा मीडिया प्लानिंग और बाइंग पर तकनीक के प्रभाव जैसे मुद्दों पर चर्चा की जाएगी.
CTV और क्रॉस-स्क्रीन मेजरमेंट पर रहेगा जोर
मीडिया काउंसिल विज्ञापनदाताओं, मीडिया मालिकों, रिसर्च संस्थानों और इंडस्ट्री के अन्य हितधारकों के साथ संवाद को बढ़ावा देगी. बदलते ऑडियंस व्यवहार, नए मीडिया प्लेटफॉर्म और ग्राहकों की बदलती अपेक्षाओं के अनुरूप एजेंसियों को तैयार करने के लिए ज्ञान और अनुभव साझा करने पर भी जोर रहेगा.
काउंसिल के अध्यक्ष कार्तिक शर्मा ने कहा कि वह अगली पीढ़ी के नेताओं के साथ काम करने को लेकर उत्साहित हैं. उनके मुताबिक, अनुभवी लोगों, उद्यमशील सोच और विविध नजरियों को एक मंच पर लाने से भारतीय विज्ञापन जगत के लिए अधिक मजबूत और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप मीडिया इकोसिस्टम तैयार करने में मदद मिल सकती है.
शर्मा ने बताया कि काउंसिल भारत में स्थानीय और वैश्विक ज्ञान साझेदारियों के माध्यम से बेहतर प्रशिक्षण और सीखने के अवसर उपलब्ध कराने पर काम करेगी. इसके अलावा, इंडस्ट्री में सहयोग और विचारों के आदान-प्रदान के लिए एक प्रमुख वार्षिक मंच विकसित करने तथा नए विषयों पर व्यावहारिक दिशा-निर्देश तैयार करने की योजना है. इनमें कनेक्टेड टीवी (CTV) और क्रॉस-स्क्रीन मेजरमेंट भी शामिल हैं.
मीडिया क्षेत्र में 30 साल से अधिक का अनुभव
कार्तिक शर्मा ओम्निकॉम मीडिया इंडिया के सीईओ हैं, जो ओम्निकॉम ग्रुप का हिस्सा है. उन्हें मीडिया रणनीति, कम्युनिकेशन प्लानिंग, बिहेवियरल इकोनॉमिक्स, एनालिटिक्स और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में 30 साल से अधिक का अनुभव है.
वह AAAI के बोर्ड और BARC की डिसिप्लिनरी कमेटी के सदस्य हैं. इसके अलावा, वह मीडिया रिसर्च यूजर्स काउंसिल इंडिया (MRUCI) के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स में भी शामिल हैं. इससे पहले वह TAM मीडिया रिसर्च और इंडियन रीडरशिप सर्वे में महत्वपूर्ण पदों पर काम कर चुके हैं. उन्हें 2026 में IAA मीडिया इन्फ्लुएंसर ऑफ द ईयर और 2025 में e4m इन्फ्लुएंसर ऑफ द ईयर के सम्मान से नवाजा गया था.
इंडस्ट्री में विचार-विमर्श और सीखने का मंच बनेगी काउंसिल
AAAI के अध्यक्ष डॉ. संदीप गोयल ने कहा कि मीडिया काउंसिल को इंडस्ट्री के साझा मंच और सीखने के केंद्र के रूप में विकसित किया जाना चाहिए. यहां विज्ञापन जगत के मीडिया विशेषज्ञ नए विचारों पर चर्चा कर सकेंगे, प्रचलित तौर-तरीकों की समीक्षा कर सकेंगे और अपने अनुभवों से मिली सीख अगली पीढ़ी के स्टोरीटेलर्स तथा ब्रांड निर्माण से जुड़े पेशेवरों तक पहुंचा सकेंगे.
शहान ने कहा कि मुनाफे में चल रहे स्टार्ट-अप्स के लिए वेंचर कैपिटल जुटाना मुश्किल हो रहा है, क्योंकि उन्हें निवेशकों की अपेक्षाओं के अनुरूप अपने मौजूदा परिचालन ढांचे में बदलाव करने में चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
शहान सूद ने JAFCO Asia में साढ़े तीन साल काम करने के बाद अपनी भूमिका छोड़ दी है. इस दौरान उन्होंने जापानी वेंचर कैपिटल फर्म की भारत में उपस्थिति स्थापित करने में मदद की. वह जुलाई 2022 में भारत में फर्म के पहले कर्मचारी और इसकी वैश्विक निवेश टीम के पांचवें सदस्य के रूप में शामिल हुए थे.
अपने कार्यकाल के दौरान सूद ने निवेश के अवसर तलाशने, उचित जांच-पड़ताल, नियुक्तियों, टीम निर्माण, समुदाय के साथ जुड़ाव, विचार नेतृत्व और सीमित भागीदारों के साथ संबंधों सहित विभिन्न क्षेत्रों में काम किया. उन्होंने भारत में JAFCO Asia का ब्रांड स्थापित करने और भारत तथा जापान के बीच निवेश संबंधों को मजबूत करने में भूमिका निभाई.
फर्म छोड़ने के बाद सूद तीन क्षेत्रों में काम कर रहे हैं: कॉरपोरेट कंपनियों के लिए बिजनेस डेवलपमेंट, फैमिली ऑफिस के लिए एडवाइजरी और मुनाफे में चल रहे स्टार्ट-अप्स को परिचालन संबंधी सहायता.
कॉरपोरेट क्षेत्र में वह विभिन्न सेक्टरों में बिजनेस डेवलपमेंट के जरिए कंपनियों के लिए राजस्व बढ़ाने में मदद कर रहे हैं. फिलहाल वह रक्षा और इंजीनियरिंग, खरीद एवं निर्माण (EPC) क्षेत्र की उन कंपनियों को सहयोग दे रहे हैं, जिनके पास करीब 4,100 करोड़ रुपये के सक्रिय ऑर्डर हैं.
भारत में फैमिली ऑफिस का इकोसिस्टम विकसित होने के साथ सूद चुनिंदा फैमिली ऑफिस के साथ भी काम कर रहे हैं. उन्होंने करीब 100 फैमिली ऑफिस के साथ बातचीत की है, ताकि उनकी निवेश प्राथमिकताओं, सीधे निवेश में रुचि और फंड ऑफ फंड्स में निवेश को लेकर बदलती दिलचस्पी को समझा जा सके. वह चुनिंदा फैमिली ऑफिस को बिना किसी शुल्क के सलाह दे रहे हैं.
उनका तीसरा प्रमुख क्षेत्र मुनाफे में चल रहे स्टार्ट-अप्स को अपने परिचालन को मजबूत करने और फंड जुटाने तथा संभावित शुरुआती सार्वजनिक निर्गम (IPO) की तैयारी में मदद करना है. वेंचर कैपिटल, इन्वेस्टमेंट बैंकिंग और ट्रेंड एनालिसिस के अपने अनुभव के आधार पर सूद संस्थापकों के साथ काम कर रहे हैं, ताकि वे अपने कारोबारी ढांचे को सुव्यवस्थित कर सकें और निवेशकों के लिए बेहतर तैयारी कर सकें.
उन्होंने कहा कि मुनाफे में चल रहे स्टार्ट-अप्स के लिए वेंचर कैपिटल जुटाना मुश्किल हो रहा है, क्योंकि उन्हें निवेशकों की अपेक्षाओं के अनुरूप अपने मौजूदा परिचालन ढांचे में बदलाव करने में चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. उनकी एडवाइजरी का उद्देश्य ऐसे कारोबारों को वेंचर कैपिटल फंडिंग और शेयर बाजार में लिस्टिंग, दोनों के लिए तैयार करने में मदद करना है.
सूद का यह कदम JAFCO Asia में उनके दूसरे वर्ष के चुनौतीपूर्ण रहने के बाद आया है, जिसे उन्होंने सीखने का एक महत्वपूर्ण अनुभव बताया. उन्होंने कहा कि मुश्किल दौर में किसी निवेशक के चरित्र की परीक्षा होती है और पेशेवर रूप से बाहर निकलना भी किसी व्यक्ति की यात्रा का एक महत्वपूर्ण पैमाना है.
फर्म के नए नाम JIF Capital में बदलाव के दौरान सूद ने भारत में निवेश की जिम्मेदारी सुप्रिया को सौंप दी है. सूद ने कहा कि वह उचित समय पर अपने अगले कदमों के बारे में और जानकारी साझा करेंगे
भारत का पहला 10 लाख करोड़ रुपये के मूल्यांकन वाला आईपीओ लिस्टिंग के करीब है. ऐसे में बाजार के कुछ खिलाड़ी इस बात पर दांव लगा रहे हैं कि मूल कंपनी रिलायंस, उसकी सहायक कंपनी जियो से बेहतर प्रदर्शन करेगी. प्रॉस्पेक्टस से पता चलता है कि इस दांव के पीछे क्या वजह है और यह दांव चर्चा के मुकाबले लगाना कितना मुश्किल है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
पलक शाह
जियो प्लेटफॉर्म्स के 30,000 करोड़ रुपये के आईपीओ के खुलने में एक सप्ताह बाकी है. मुंबई और अहमदाबाद के डीलिंग रूम में एक ट्रेड की चर्चा बार-बार हो रही है: रिलायंस में लॉन्ग पोजीशन और जियो में शॉर्ट पोजीशन.
इसका विचार सरल है. 1,119 रुपये के इश्यू प्राइस पर जियो में रिलायंस की लगभग 65 प्रतिशत हिस्सेदारी का मूल्य करीब 6.6 लाख करोड़ रुपये है, जो रिलायंस के 15.84 लाख करोड़ रुपये के बाजार मूल्य का लगभग 42 प्रतिशत है. भारत में होल्डिंग कंपनियों के शेयर आमतौर पर उन सूचीबद्ध कंपनियों के मुकाबले डिस्काउंट पर कारोबार करते हैं, जिनमें उनकी हिस्सेदारी होती है. इस जोड़ी पर दांव लगाने वाले ट्रेडरों को उम्मीद है कि जियो की लिस्टिंग से रिलायंस के शेयर सस्ते या जियो के शेयर महंगे नजर आएंगे और दोनों के मूल्यांकन के बीच का अंतर रिलायंस के पक्ष में कम होगा.
यह दांव लगाना मुश्किल क्यों है
जियो में शॉर्ट पोजीशन लेना सुनने में जितना आसान लगता है, वास्तव में उतना है नहीं. भारत में बिना शेयर उधार लिए शॉर्ट सेलिंग की अनुमति नहीं है और किसी नए सूचीबद्ध शेयर में कई महीनों तक फ्यूचर्स और ऑप्शंस उपलब्ध नहीं होते. व्यावहारिक रूप से, लिस्टिंग के दिन जियो में शॉर्ट पोजीशन लेने का मतलब आईपीओ में मिले शेयरों को तेजी से बेचना या इंट्राडे ट्रेडिंग करना है, न कि बड़ी शॉर्ट पोजीशन बनाए रखना.
कौन बेच सकता है और कब
2020 के निवेशकों के जल्द बाहर निकलने की चर्चाओं के सामने भी प्रॉस्पेक्टस एक बाधा है. रिलायंस के अलावा अन्य निवेशकों के पास आईपीओ से पहले मौजूद शेयरों पर आवंटन की तारीख से छह महीने की लॉक-इन अवधि लागू है. इसमें केवल कुछ पंजीकृत वेंचर और वैकल्पिक निवेश फंडों को छूट दी गई है. इश्यू में लगभग 8,000 करोड़ रुपये का निवेश करने वाले एंकर निवेशक अपने आधे शेयर 30 दिन बाद और बाकी शेयर 90 दिन बाद बेच सकते हैं.
इसलिए शेयरों की आपूर्ति की पहली लहर, जो कीमत पर दबाव डाल सकती है, शुरुआती दिनों में आईपीओ पाने वाले निवेशकों से और नवंबर के आखिरी हिस्से से एंकर निवेशकों से आने की संभावना है. पहले सप्ताह में सिल्वर लेक या मुबाडाला जैसे निवेशकों की ओर से बिक्री की उम्मीद नहीं है.
कोई सुरक्षा कवच नहीं
इस इश्यू में कीमत को सहारा देने की कोई व्यवस्था भी नहीं है. जियो के प्रॉस्पेक्टस में स्पष्ट रूप से कहा गया है, “इस इश्यू के तहत कोई ग्रीन शू विकल्प नहीं है.” यह वह व्यवस्था होती है, जिसके तहत बैंकर गिरती हुई लिस्टिंग कीमत को सहारा देने के लिए शेयर खरीद सकते हैं. इसके अभाव में कारोबार के शुरुआती दिनों में कीमत पूरी तरह मांग पर निर्भर करेगी.
इससे घरेलू वेल्थ मैनेजरों पर ध्यान केंद्रित हो गया है, जो अमीर ग्राहकों के बीच इस इश्यू का प्रचार कर रहे हैं. ग्रे मार्केट प्रीमियम लगभग 50 रुपये है, जो इश्यू प्राइस से 5 प्रतिशत से भी कम अधिक है. इससे संकेत मिलता है कि फिलहाल बाजार को लिस्टिंग के दिन शेयर में बड़ी तेजी की उम्मीद नहीं है.
किन बातों पर नजर रखें
28 अक्टूबर को होने वाली लिस्टिंग से पता चलेगा कि यह ट्रेड सफल होता है या नहीं. अगर जियो अपनी कीमत बनाए रखता है और रिलायंस के शेयरों का मूल्यांकन बढ़ता है, तो लॉन्ग-शॉर्ट ट्रेड करने वाले निवेशकों को फायदा होगा. अगर पहले सप्ताह में जियो गिरता है और रिलायंस अपनी कीमत बनाए रखता है, तब भी यह दांव सफल रहेगा. दोनों ही स्थितियों में, स्टॉक एक्सचेंजों के बल्क और ब्लॉक डील के आंकड़ों से पता चलेगा कि शुरुआती कुछ दिनों में किसने शेयर बेचे.
पलक शाह, BW रिपोर्टर्स
(BW रिपोर्टर्स पलक शाह एक अनुभवी खोजी पत्रकार और The Market Mafia: Chronicle of India’s High-Tech Stock Market Scandal & The Cabal That Went Scot-Free की लेखिका हैं. यह एक तीखा खुलासा है, जिसने भारत के वित्तीय बाजारों के छिपे हुए पक्ष को सामने लाया. मुंबई में करीब दो दशकों की जमीनी रिपोर्टिंग के साथ पलक ने पैसे, सत्ता और नियमन के बीच के गठजोड़ की गहराई से पड़ताल करने वाले पत्रकार के रूप में पहचान बनाई है. उनके लेख भारत के प्रतिष्ठित वित्तीय दैनिकों, जिनमें The Economic Times, Business Standard, The Financial Express और The Hindu Business Line शामिल हैं, में प्रकाशित हुए हैं.
19 वर्ष की उम्र में अपराध रिपोर्टिंग की ओर आकर्षित हुईं पलक ने जल्द ही महसूस किया कि 1980 के दशक के मुंबई के गैंग युद्धों की जगह अब कॉरपोरेट टावरों में चलने वाली सफेदपोश योजनाओं ने ले ली है. इस समझ ने उन्हें वित्तीय पत्रकारिता की ओर मोड़ा, जहां उन्होंने भारत की ‘व्हाइट मनी’ अर्थव्यवस्था की जटिल गतिविधियों को समझने में वर्षों बिताए हैं. शेयर बाजार में हेरफेर से लेकर नियामकीय खामियों तक, उनका काम हाई फाइनेंस की चमकदार सतह के पीछे छिपे उन समूहों को सामने लाता है जो पर्दे के पीछे से फैसलों को प्रभावित करते हैं. सच्चाई सामने लाने का उनका जुनून और उन कड़ियों को जोड़ने की क्षमता, जिन्हें दूसरे नजरअंदाज कर देते हैं, उन्हें एक मजबूत पत्रकार बनाती है, जो यथास्थिति को चुनौती देने और उन खिलाड़ियों को बेनकाब करने से नहीं डरतीं जो खुद को कानून से ऊपर समझते हैं.)
आयात में 8% की बढ़ोतरी के बावजूद घटा व्यापार घाटा, चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में वस्तु निर्यात 18.51% बढ़कर 259.89 अरब डॉलर हुआ.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत के निर्यात में सितंबर में मजबूत बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिससे देश का व्यापार घाटा कम करने में मदद मिली. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर 2026 में भारत का वस्तु निर्यात सालाना आधार पर 23 प्रतिशत बढ़कर 44.4 अरब डॉलर पर पहुंच गया. इस दौरान आयात 8 प्रतिशत बढ़कर 74.61 अरब डॉलर रहा. निर्यात में आयात के मुकाबले अधिक वृद्धि के कारण देश का व्यापार घाटा घटकर 30.21 अरब डॉलर रह गया, जबकि सितंबर 2025 में यह 33 अरब डॉलर था. इस तरह सालाना आधार पर व्यापार घाटे में 2.79 अरब डॉलर की कमी आई है.
पहली छमाही में निर्यात 18.51% बढ़ा
चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही यानी अप्रैल से सितंबर के दौरान भी निर्यात में बढ़ोतरी का रुझान बना रहा. इस अवधि में भारत का वस्तु निर्यात 18.51 प्रतिशत बढ़कर 259.89 अरब डॉलर हो गया. वहीं, आयात 16.31 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 437.53 अरब डॉलर पर पहुंच गया.
अप्रैल से सितंबर के बीच निर्यात और आयात के बीच का अंतर यानी व्यापार घाटा 177.64 अरब डॉलर रहा. इस अवधि में निर्यात की वृद्धि दर आयात की तुलना में अधिक रही, हालांकि आयात का कुल मूल्य निर्यात से काफी ज्यादा बना हुआ है.
निर्यात में बढ़ोतरी का सिलसिला जारी
वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि देश के निर्यात में बढ़ोतरी का सिलसिला जारी है. सितंबर के आंकड़े ऐसे समय में आए हैं, जब वैश्विक व्यापार की परिस्थितियां और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मांग निर्यात प्रदर्शन को प्रभावित करने वाले अहम कारक बने हुए हैं.
क्या होता है व्यापार घाटा?
जब किसी देश का आयात उसके निर्यात से अधिक होता है, तो दोनों के बीच के अंतर को व्यापार घाटा कहा जाता है. सितंबर 2026 में भारत ने 74.61 अरब डॉलर का वस्तु आयात किया, जबकि निर्यात से 44.4 अरब डॉलर की कमाई हुई. इस तरह आयात और निर्यात के बीच 30.21 अरब डॉलर का अंतर रहा, जिसे देश का व्यापार घाटा कहा जाता है.