जियो ने अपने टैरिफ के दामों में 12 से 25% तक इजाफा किया है.बढ़ी हुई दरें 3 जुलाई से लागू हो चुकी हैं. पहले जियो का सबसे सस्ता बेस प्लान पहले 155 रुपये का था लेकिन अब 189 रुपये का हो चुका है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
इससे पहले जब कभी भी टेलीकॉम कंपनियां जब कभी भी मोबाइल टैरिफ के दामों में इजाफा करती थी तो यूजर की ओर से कोई खास विरोध नहीं हुआ करता था लेकिन इस बार ज्यादा ही विरोध देखने को मिल रहा है. सोशल मीडिया पर इस बार जहां बॉयकॉट जियो ट्रेंड कर रहा है वहीं दूसरी ओर लोग देश के अपने नेटवर्क BSNL की घर वापसी चाह रहे हैं. इन दोनों पोस्ट पर 40000 से ज्यादा पोस्ट हो चुके हैं.
अब तक हो चुके हैं इतने पोस्ट
मोबाइल रिचार्ज के दामों में सबसे पहले इजाफा जियो की ओर से किया गया था. जियो के बाद वोडाफोन और एयरटेल की ओर से भी इजाफा कर दिया गया. मोबाइल टैरिफ के दामों में हुए इस इजाफे ने यूजरों को नाराज कर दिया है. इसी का नतीजा है कि BSNL_की_घर_वापसी ट्रेंड कर रहा है. इस पोस्ट में खबर लिखे जाने तक 44 हजार से ज्यादा लोग अब तक पोस्ट कर चुके हैं. वहीं सोशल मीडिया पर #BoycottJio भी ट्रेंड कर रहा है. इस पर अब तक 36 हजार पोस्ट हो चुके हैं.
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आखिर क्या कह रहे हैं लोग?
#BoycottJio में जहां लोग BSNL में स्विच करने को लेकर ट्वीट कर रहे हैं वहीं दूसरी जियो का विरोध कर रहे हैं. सोशल मीडिया पर एक यूजर हंसराज मीना टमाटर और पोर्ट टू बीएसएनएल की फोटो के साथ खड़े लोगों की तस्वीर ट्वीट करते हुए लिखते हैं कि जिसके भाव बढ़ जाते हैं उसे लोग छोड़ देते हैं. इसी तरह HYC Arshad नाम के एक यूजर ने बीएसएनएल के सिम और पोर्ट रिक्वेस्ट स्वीकार किए जाने के मैसेज की तस्वीर ट्वीट करते हुए लिखा है कि ‘आज ही मैने Jio से बीएसएनएल में पोर्ट कराया भाड़ में जाए airtel jio और vi सबसे सस्ता और सबसे अच्छा हमारा BSNL है सभी लोग से निवेदन है की अपने sim को BSNL में पोर्ट करवाए मैने तो करा लिया अब आपकी बारी ✊ #PortToBSNL #SupportBSNL’.
इतना इजाफा किया है तीनों कंपनियों ने
मोबाइल टैरिफ के दामों की शुरुआत करने वाली कंपनी जियो ने अपने दामों में 12 से 25 प्रतिशत तक इजाफा कर दिया है.बढ़ी हुई दरें 3 जुलाई से लागू हो चुकी हैं. जियो का सबसे सस्ता बेस प्लान पहले 155 रुपये का था लेकिन अब 189 रुपये का हो चुका है. इसी तरह एयरटेल और वोडाफोन ने भी अपने दामों में इजाफा कर दिया है. एयरटेल ने 11 से 21 प्रतिशत तक इजाफा कर दिया है वहीं वोडाफोन ने 10 से 21 फीसदी तक इजाफा कर दिया है. कंपनियों ने मोबाइल टैरिफ के दामों में इजाफा करने के पीछे जो कारण दिए हैं उनमें मोबाइल कॉल की क्वॉलिटी से लेकर उसका विस्तार शामिल है.
Ind-Ra का नया अनुमान मई में जारी किए गए 6.7 प्रतिशत के पूर्वानुमान से थोड़ा अधिक है. हालांकि, एजेंसी ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष से पैदा हुई अनिश्चितता चालू वित्त वर्ष में महंगाई और आर्थिक वृद्धि के लिए बड़ा जोखिम बनी हुई है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च (Ind-Ra) ने वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) में भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 6.8 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है. एजेंसी के मुताबिक, ईंधन और खाद्य महंगाई में बढ़ोतरी, रुपये की कमजोरी और एल नीनो के कारण कृषि उत्पादन पर पड़ने वाला संभावित असर आर्थिक वृद्धि के लिए प्रमुख जोखिम बन सकते हैं.
Ind-Ra का नया अनुमान मई में जारी किए गए 6.7 प्रतिशत के पूर्वानुमान से थोड़ा अधिक है. हालांकि, एजेंसी ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष से पैदा हुई अनिश्चितता चालू वित्त वर्ष में महंगाई और आर्थिक वृद्धि के लिए बड़ा जोखिम बनी हुई है.
तिमाही आधार पर कैसी रहेगी GDP ग्रोथ?
रेटिंग एजेंसी के अनुसार, अप्रैल-जून तिमाही में GDP ग्रोथ 6.9 प्रतिशत, जुलाई-सितंबर तिमाही में 6.6 प्रतिशत, अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में 6.7 प्रतिशत और जनवरी-मार्च तिमाही में 6.9 प्रतिशत रह सकती है. इसकी तुलना में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने इन्हीं तिमाहियों के लिए क्रमशः 7 प्रतिशत, 6.4 प्रतिशत, 6.5 प्रतिशत और 6.8 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान लगाया है.
कच्चे तेल के अनुमान में राहत
Ind-Ra ने FY27 के लिए औसत कच्चे तेल की कीमत का अनुमान घटाकर 85 डॉलर प्रति बैरल कर दिया है, जो मई में 95 डॉलर प्रति बैरल था. एजेंसी का मानना है कि कच्चे तेल की कम कीमतों से भारत के व्यापार घाटे और चालू खाते के घाटे को कम करने में मदद मिल सकती है. हालांकि, मौसम से जुड़े जोखिमों के कारण खाद्य महंगाई बढ़ने की आशंका है, जिससे आर्थिक वृद्धि को मिलने वाला फायदा सीमित हो सकता है.
Ind-Ra के मुख्य अर्थशास्त्री और पब्लिक फाइनेंस प्रमुख देवेंद्र पंत ने कहा कि FY27 की जून तिमाही में भारतीय बास्केट के कच्चे तेल की औसत कीमत 101.31 डॉलर प्रति बैरल रही, जबकि अप्रैल-जुलाई 2026 के दौरान यह 96.49 डॉलर प्रति बैरल थी. उन्होंने कहा कि पूरे साल के लिए कच्चे तेल की कम कीमत का अनुमान अर्थव्यवस्था को सहारा दे सकता है, लेकिन एल नीनो का महंगाई पर असर इस सकारात्मक प्रभाव को सीमित कर सकता है.
रुपये पर बना रह सकता है दबाव
रेटिंग एजेंसी ने FY27 में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये की औसत विनिमय दर 93.98 रुपये रहने का अनुमान लगाया है. इससे पहले एजेंसी ने 94.28 रुपये प्रति डॉलर का अनुमान जताया था. नया अनुमान साल-दर-साल रुपये में करीब 6.4 प्रतिशत की गिरावट को दर्शाता है और इससे संकेत मिलता है कि भारतीय मुद्रा पर दबाव बना रह सकता है.
Ind-Ra ने विदेशी मुद्रा अनिवासी (बैंक) जमा यानी FCNR(B) और बाहरी वाणिज्यिक उधारी यानी ECB के जरिए 70 अरब डॉलर के पूंजी प्रवाह का अनुमान लगाया है. एजेंसी का मानना है कि ये प्रवाह चालू वित्त वर्ष के दौरान भारत की बाहरी वित्तीय स्थिति को सहारा दे सकते हैं.
महंगाई और चालू खाते का घाटा बढ़ने का अनुमान
Ind-Ra के अनुसार, FY27 में खुदरा महंगाई औसतन 4.9 प्रतिशत रह सकती है, जबकि FY26 में यह 2 प्रतिशत थी. एजेंसी ने कहा कि एल नीनो के कारण कृषि उत्पादन प्रभावित होने की स्थिति में खाद्य महंगाई बढ़ सकती है.
वहीं, चालू खाते का घाटा FY26 के 0.6 प्रतिशत से बढ़कर FY27 में GDP के 1.5 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है. यह स्थिति कच्चे तेल की कम कीमतों से आयात बिल में मिलने वाली राहत के बावजूद देखने को मिल सकती है.
राजकोषीय घाटे के लक्ष्य पर भी चुनौती
Ind-Ra ने कहा कि सरकार के FY27 के लिए GDP के 4.3 प्रतिशत राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को हासिल करना भी चुनौतीपूर्ण बना रह सकता है. तरलीकृत पेट्रोलियम गैस यानी LPG और उर्वरक सब्सिडी पर अधिक खर्च से सरकारी वित्त पर अतिरिक्त दबाव पड़ने की संभावना है.
देवेंद्र पंत के अनुसार, प्रत्यक्ष कर संग्रह और गैर-कर राजस्व में मजबूत वृद्धि सरकार को अपने राजकोषीय लक्ष्य के करीब पहुंचने में मदद कर सकती है. हालांकि, अप्रत्यक्ष कर संग्रह कमजोर रहने पर राजकोषीय समेकन पर अतिरिक्त दबाव बन सकता है.
इससे पहले RBI ने भी FY27 के लिए भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान 6.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 6.7 प्रतिशत कर दिया था. केंद्रीय बैंक ने घरेलू आर्थिक गतिविधियों में मजबूती का हवाला देते हुए चालू वित्त वर्ष के लिए अपेक्षाकृत मजबूत वृद्धि का अनुमान बरकरार रखा है.
रक्षाबंधन पर ₹25 हजार करोड़ के राखी कारोबार का अनुमान, उपहार और अन्य उत्पादों को मिलाकर व्यापार ₹30 हजार करोड़ के पार पहुंचने की उम्मीद
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
रक्षाबंधन के मौके पर इस बार बाजारों में स्वदेशी राखियों की चमक और बढ़ गई है. पारंपरिक डिजाइन के साथ-साथ ‘विकसित भारत’, ‘मोदी गारंटी’, ‘ब्रह्मोस’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसी थीम वाली राखियां लोगों को खूब पसंद आ रही हैं. कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) का अनुमान है कि इस वर्ष देशभर में केवल राखियों का कारोबार करीब ₹25 हजार करोड़ तक पहुंच सकता है, जबकि मिठाई, उपहार, कपड़े और अन्य त्योहार संबंधी उत्पादों को मिलाकर कुल व्यापार ₹30 हजार करोड़ से अधिक होने की संभावना है.
कैट के राष्ट्रीय महामंत्री और सांसद प्रवीन खंडेलवाल ने कहा कि इस वर्ष रक्षाबंधन का पर्व भाई-बहन के प्रेम के साथ-साथ आत्मनिर्भर भारत, स्वदेशी उत्पादों और राष्ट्रभावना के उत्सव के रूप में भी उभरकर सामने आया है. उनके अनुसार, पिछले वर्ष देशभर में करीब ₹17 हजार करोड़ का राखी कारोबार हुआ था, जबकि 2023 में यह आंकड़ा लगभग ₹12 हजार करोड़ था.
‘वोकल फॉर लोकल’ का दिख रहा असर
प्रवीन खंडेलवाल ने कहा कि भारतीय उत्पादों के प्रति उपभोक्ताओं का बढ़ता भरोसा और ‘वोकल फॉर लोकल’, ‘लोकल फॉर ग्लोबल’ तथा ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसे अभियानों का असर इस बार राखी बाजार में साफ दिखाई दे रहा है.
उन्होंने बताया कि पारंपरिक राखियों के अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जनकल्याणकारी योजनाओं, राष्ट्रीय उपलब्धियों और विकसित भारत के संकल्प से प्रेरित राखियों की मांग तेजी से बढ़ी है. बाजार में ‘विकसित भारत राखी’, ‘मोदी गारंटी राखी’, ‘ब्रह्मोस राखी’, ‘आत्मनिर्भर भारत राखी’, ‘वोकल फॉर लोकल राखी’, ‘भारत गौरव राखी’, ‘नारी वंदन राखी’, ‘लखपति दीदी राखी’, ‘नमामि गंगे राखी’, ‘राष्ट्र रक्षा सूत्र राखी’ और ‘अमृतकाल राखी’ खास तौर पर लोगों का ध्यान आकर्षित कर रही हैं.
युवाओं और बच्चों में ‘ब्रह्मोस’ राखी का क्रेज
कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बी.सी. भरतिया ने कहा कि इन राखियों के जरिए बहनें सिर्फ रक्षा सूत्र नहीं बांध रही हैं, बल्कि राष्ट्र निर्माण, महिला सशक्तिकरण, स्वदेशी अभियान, पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति अपनी भावनाएं भी व्यक्त कर रही हैं. उन्होंने कहा कि युवाओं और बच्चों के बीच ‘ब्रह्मोस राखी’, ‘राष्ट्र रक्षा सूत्र राखी’ और ‘विकसित भारत राखी’ को लेकर खास उत्साह देखने को मिल रहा है.
अलग-अलग राज्यों की राखियों को भी मिल रही पहचान
देश के विभिन्न हिस्सों की कला, संस्कृति और स्थानीय उत्पादों से जुड़ी राखियां भी बाजार में अपनी अलग पहचान बना रही हैं. नागपुर की खादी राखी, जयपुर की सांगानेरी कला राखी, पुणे की सीड या बीज राखी, असम की चाय पत्ती राखी, कोलकाता की जूट राखी, मुंबई की सिल्क राखी, बिहार की मधुबनी राखी, बेंगलुरु की पुष्प राखी और जनजातीय हस्तकला से बनी बांस की राखियां उपभोक्ताओं को खूब पसंद आ रही हैं.
कैट का कहना है कि इन उत्पादों की बढ़ती मांग से छोटे कारीगरों, हस्तशिल्प से जुड़े लोगों, महिला उद्यमियों, स्वयं सहायता समूहों और स्थानीय कारोबारियों को बड़ा बाजार मिल रहा है.
चीनी राखियों की मांग लगभग न के बराबर
कैट के मुताबिक, इस वर्ष भी बाजारों में चीनी राखियों की मांग नहीं के बराबर है. व्यापारियों और उपभोक्ताओं का रुझान पूरी तरह भारतीय निर्मित राखियों की ओर है, जिससे स्वदेशी उत्पादों और स्थानीय उद्योगों को मजबूती मिल रही है.
कैट के राष्ट्रीय चेयरमैन बृजमोहन अग्रवाल ने देशभर के व्यापारियों और उपभोक्ताओं से अपील की कि रक्षाबंधन के साथ-साथ आगामी त्योहारों में भी भारतीय उत्पादों को प्राथमिकता दी जाए और ‘स्वदेशी अपनाओ, भारत बढ़ाओ’ अभियान को मजबूत बनाया जाए.
प्रवीन खंडेलवाल ने कहा कि कैट विभिन्न शहरों में विशेष स्वदेशी मेले भी आयोजित करने की तैयारी कर रहा है, जहां महिला उद्यमियों, स्वयं सहायता समूहों और स्थानीय कारीगरों द्वारा तैयार राखियों और अन्य उत्पादों की बिक्री की जाएगी. खंडेलवाल ने कहा, “आज स्वदेशी राखी केवल एक उत्पाद नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत, विकसित भारत और राष्ट्र गौरव का प्रतीक बन चुकी है.”
शीर्ष अदालत ने Aptel के आदेश में दखल देने से किया इनकार. कर्नाटक की बिजली कंपनियों को झटका, अब तीन महीने में होगा मामले का अंतिम निपटारा
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
अडानी पावर (Adani Power) को ₹1,005 करोड़ के भुगतान विवाद में सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. शीर्ष अदालत ने कर्नाटक की बिजली वितरण कंपनियों यानी डिस्कॉम की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें अडानी पावर की ओर से जारी चालान और भुगतान आदेश पर रोक लगाने की मांग की गई थी. सुप्रीम कोर्ट ने विद्युत अपीलीय न्यायाधिकरण (Aptel) के फैसले में हस्तक्षेप से इनकार करते हुए मामले में तीन महीने के भीतर अंतिम फैसला सुनाने का निर्देश दिया है.
₹1,005 करोड़ के चालान को लेकर पहुंचा था मामला
विवाद बिजली खरीद से जुड़े बकाया भुगतान का है. अडानी पावर ने एक सरकारी पोर्टल पर करीब ₹1,005 करोड़ का चालान अपलोड किया था, जिसके खिलाफ कर्नाटक की बिजली वितरण कंपनियां अदालत पहुंची थीं.
जस्टिस पीएस नरसिम्हा की अध्यक्षता वाली पीठ ने Aptel के उस आदेश में दखल देने से इनकार कर दिया, जिसमें चालान पर रोक लगाने की मांग खारिज की गई थी. Aptel ने केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग यानी CERC के उस आदेश को भी बरकरार रखा था, जिसमें डिस्कॉम को अडानी पावर की ओर से दावा की गई राशि का भुगतान करने का निर्देश दिया गया था.
2023 के CERC आदेश से शुरू हुआ विवाद
दरअसल, CERC ने 2023 में कर्नाटक डिस्कॉम को अंतर राशि का भुगतान वहन लागत और लेट पेमेंट सरचार्ज के साथ करने के लिए उत्तरदायी ठहराया था. भुगतान छह किस्तों में किया जाना था. आदेश में यह भी कहा गया था कि तय शर्तों का पालन नहीं होने पर बिजली उत्पादक लेट पेमेंट सरचार्ज का हकदार होगा. इसके बाद अडानी पावर ने डिस्कॉम पर आदेश का पालन नहीं करने का आरोप लगाते हुए आयोग का रुख किया.
डिस्कॉम ने कहा- कोई बकाया नहीं
कर्नाटक की बिजली कंपनियों ने अपनी याचिका में दावा किया कि उनके ऊपर अडानी पावर का कोई बकाया नहीं है. उन्होंने तर्क दिया कि Aptel ने मामले के गुण-दोष पर विचार किए बिना CERC के आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया.
डिस्कॉम ने यह भी कहा कि विवादित राशि का भुगतान करने से उनकी वित्तीय स्थिति पर असर पड़ सकता है और अन्य जरूरी खर्चों को पूरा करना मुश्किल हो सकता है. कंपनियों ने बिजली आपूर्ति में संभावित बाधा और उपभोक्ताओं पर पड़ने वाले असर का भी हवाला दिया.
तीन महीने में आएगा अंतिम फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक डिस्कॉम की याचिका खारिज करते हुए Aptel को मामले में तीन महीने के भीतर अंतिम आदेश सुनाने का निर्देश दिया है. फिलहाल इस फैसले को अडानी पावर के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, जबकि भुगतान विवाद पर अंतिम फैसला अब अपीलीय न्यायाधिकरण करेगा.
पेटीएम में करीब 1.92 करोड़ शेयरों की ₹2,949 करोड़ की ब्लॉक डील हुई है. रेजिलिएंट एसेट मैनेजमेंट बीवी को संभावित विक्रेता बताया जा रहा है. डील की खबर के बाद पेटीएम के शेयर में करीब 2 फीसदी की गिरावट आई.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
पेटीएम (Paytm) की मूल कंपनी वन97 कम्युनिकेशंस के शेयरों में मंगलवार को दबाव देखने को मिला. कंपनी के करीब 1.92 करोड़ शेयरों की बड़ी ब्लॉक डील हुई, जिसकी कुल कीमत करीब ₹2,949 करोड़ बताई जा रही है. इस सौदे में पेटीएम के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी विजय शेखर शर्मा से पूरी तरह जुड़ी कंपनी रेजिलिएंट एसेट मैनेजमेंट बीवी को संभावित विक्रेता बताया जा रहा है.
डील के बाद पेटीएम के शेयर करीब 2 फीसदी तक गिरकर ₹1,557 के आसपास पहुंच गए. ब्लॉक डील में शेयरों के लिए ₹1,535.10 प्रति शेयर का न्यूनतम मूल्य तय किया गया था, जो पेटीएम के पिछले बंद भाव ₹1,580.20 से करीब 3 फीसदी कम है.
₹2,949 करोड़ की बेस डील, 4.98% तक हिस्सेदारी बेचने का विकल्प
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, रेजिलिएंट एसेट मैनेजमेंट बीवी की ओर से करीब 1.92 करोड़ शेयर बेचने की पेशकश की गई थी. यह पेटीएम की कुल हिस्सेदारी का करीब 3 फीसदी है. ₹1,535.10 प्रति शेयर के न्यूनतम मूल्य के आधार पर इस सौदे का मूल्य करीब ₹2,949 करोड़ है.
इस सौदे में 1.27 करोड़ अतिरिक्त शेयर बेचने का विकल्प भी शामिल है. अगर इस विकल्प का पूरी तरह इस्तेमाल किया जाता है, तो कुल 3.19 करोड़ शेयर बेचे जा सकते हैं. ऐसे में पेटीएम की करीब 4.98 फीसदी हिस्सेदारी का सौदा होगा और इसकी कुल कीमत करीब ₹4,895 करोड़ तक पहुंच सकती है.
कौन है रेजिलिएंट एसेट मैनेजमेंट?
रेजिलिएंट एसेट मैनेजमेंट बीवी नीदरलैंड्स स्थित कंपनी है, जिसका पूरा स्वामित्व पेटीएम के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी विजय शेखर शर्मा के पास है. पेटीएम की ओर से की गई पूर्व सूचना के मुताबिक, रेजिलिएंट ने एंटफिन से पेटीएम में करीब 10.20 फीसदी हिस्सेदारी हासिल की थी.
यह हिस्सेदारी एंटफिन को जारी किए गए वैकल्पिक रूप से परिवर्तनीय डिबेंचर के बदले हासिल की गई थी. इस सौदे के तहत रेजिलिएंट को शेयरों का स्वामित्व और मतदान अधिकार मिले थे, जबकि एंटफिन के पास शेयरों का आर्थिक मूल्य बना रहा. 30 जून 2026 तक विजय शेखर शर्मा के पास व्यक्तिगत रूप से पेटीएम में 9 फीसदी से अधिक हिस्सेदारी थी.
पेटीएम को नहीं मिलेगा ब्लॉक डील का पैसा
यह सौदा पूरी तरह द्वितीयक बाजार का लेनदेन है. इसका मतलब है कि शेयरों की बिक्री से मिलने वाला पैसा पेटीएम के खाते में नहीं जाएगा, बल्कि शेयर बेचने वाले मौजूदा शेयरधारक को मिलेगा. इस सौदे के लिए गोल्डमैन सैक्स इंडिया सिक्योरिटीज प्राइवेट लिमिटेड प्लेसमेंट एजेंट है. शेयरों की बिक्री भारतीय शेयर बाजारों के स्क्रीन-आधारित कारोबार मंच के जरिए एक या उससे अधिक लेनदेन में की जाएगी. सौदे की शर्तों के मुताबिक, बिक्री पूरी होने के बाद विक्रेता पर 90 दिनों तक आगे शेयर बेचने की रोक रहेगी.
पेटीएम के शेयर में क्यों आई गिरावट?
ब्लॉक डील के लिए तय ₹1,535.10 का न्यूनतम मूल्य पेटीएम के पिछले बंद भाव ₹1,580.20 से करीब 3 फीसदी कम था. आमतौर पर बड़ी हिस्सेदारी की बिक्री और बाजार में अतिरिक्त शेयरों की उपलब्धता से निवेशकों की धारणा पर दबाव पड़ सकता है. यही वजह है कि मंगलवार को पेटीएम के शेयर में शुरुआती कारोबार में गिरावट देखने को मिली.
एक साल में 35% से ज्यादा चढ़ा पेटीएम का शेयर
हालिया दबाव के बावजूद पेटीएम के शेयर ने इस साल अच्छा प्रदर्शन किया है. पिछले एक सप्ताह में शेयर करीब 1 फीसदी कमजोर हुआ है, जबकि एक महीने में इसमें 17 फीसदी से अधिक की तेजी आई है. 2026 में अब तक पेटीएम का शेयर 22 फीसदी से ज्यादा चढ़ चुका है.
मार्च में ₹930.60 के 52-सप्ताह के निचले स्तर पर पहुंचने के बाद शेयर में तेज रिकवरी हुई और यह पिछले सप्ताह ₹1,657.60 के 52-सप्ताह के उच्च स्तर तक पहुंच गया था. इस तरह निचले स्तर से शेयर में करीब 78 फीसदी की तेजी आई.
एक साल की अवधि में पेटीएम के शेयर ने करीब 35 फीसदी और तीन साल में करीब 84 फीसदी का रिटर्न दिया है. हालांकि, शेयर अभी भी 2021 के आईपीओ मूल्य से नीचे कारोबार कर रहा है. कंपनी का बाजार पूंजीकरण ₹1.01 लाख करोड़ से अधिक है.
इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम के तहत मंजूर परियोजनाओं से ₹82,243 करोड़ के उत्पादन और करीब 10,000 नौकरियों के सृजन की उम्मीद
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
देश में इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स के घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ECMS) के तहत 31 और आवेदनों को मंजूरी दी है. इन परियोजनाओं में कुल ₹7,877 करोड़ का निवेश प्रस्तावित है. इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी सचिव एस. कृष्णन ने सोमवार को इसकी जानकारी दी.
इन नई मंजूरियों के साथ योजना के तहत स्वीकृत कुल निवेश अब सरकार के शुरुआती लक्ष्य से भी आगे निकल गया है. सरकार का उद्देश्य देश में इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण का मजबूत आधार तैयार करना और आयातित कंपोनेंट्स पर निर्भरता कम करना है.
कैमरा मॉड्यूल से लेकर दुर्लभ मृदा चुंबक तक
नई मंजूर की गई परियोजनाओं में कैमरा और डिस्प्ले मॉड्यूल, एनोड सामग्री, उपकरण आवरण, कनेक्टर, ट्रांसड्यूसर, दुर्लभ-मृदा स्थायी चुंबक, प्रकाशीय ट्रांसीवर, स्पीकर, माइक्रोफोन और रिले जैसे इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स शामिल हैं. इसके अलावा इलेक्ट्रोलाइट योजक, एंटीना, धातु-लेपित फिल्म, कॉइल, फिल्टर, कैपेसिटर और धातु परिरक्षण आवरण जैसे कंपोनेंट्स से जुड़ी परियोजनाओं को भी मंजूरी दी गई है. एस. कृष्णन के मुताबिक, कॉपर-क्लैड लैमिनेट से जुड़ा निवेश भी बढ़ाया गया है. इस परियोजना के लिए पहले ही एक आवेदन को मंजूरी दी जा चुकी थी.
10 राज्यों में लगेंगी परियोजनाएं
सरकार के मुताबिक, नई मंजूर की गई परियोजनाएं देश के 10 राज्यों में स्थापित की जाएंगी. इनसे करीब ₹82,243 करोड़ का उत्पादन होने और लगभग 10,000 प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है. नई मंजूरियों के बाद इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम के तहत अब तक कुल 106 आवेदनों को मंजूरी मिल चुकी है. ये परियोजनाएं करीब 30 अलग-अलग उत्पाद श्रेणियों और 15 राज्यों में फैली हुई हैं.
₹59,350 करोड़ के लक्ष्य से आगे निकला निवेश
सरकार के अनुसार, ईसीएमएस के तहत स्वीकृत परियोजनाओं में अब तक कुल ₹69,548 करोड़ का निवेश शामिल है. यह योजना के लिए तय किए गए शुरुआती ₹59,350 करोड़ के निवेश लक्ष्य से काफी अधिक है. सरकार ने 2030 तक देश में सालाना इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन को 500 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है. इसके लिए घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ महत्वपूर्ण कंपोनेंट्स के आयात पर निर्भरता कम करने पर जोर दिया जा रहा है.
भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन पकड़ रहा रफ्तार
एस. कृष्णन ने कहा कि जिन परियोजनाओं को मंजूरी मिल चुकी है, उन्हें जमीन पर उतारने और विनिर्माण इकाइयां स्थापित करने की गति यह संकेत देती है कि भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन तेजी पकड़ रहा है.
ईसीएमएस के तहत लगातार नई परियोजनाओं को मंजूरी मिलने से देश में इलेक्ट्रॉनिक्स आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने, घरेलू मूल्यवर्धन बढ़ाने और वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण में भारत की हिस्सेदारी बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है.
एशिया-प्रशांत मीडिया बिक्री और विपणन की प्रबंध निदेशक सुनीता राजन जनवरी 2021 में ब्लूमबर्ग मीडिया से जुड़ी थीं, अगली पारी को लेकर अभी जानकारी नहीं
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
ब्लूमबर्ग मीडिया की एशिया-प्रशांत मीडिया बिक्री और विपणन की प्रबंध निदेशक सुनीता राजन पांच साल से अधिक समय बाद कंपनी से विदा लेने की तैयारी में हैं. घटनाक्रम से जुड़े सूत्रों ने यह जानकारी दी है. हालांकि, उनकी अगली पेशेवर पारी और ब्लूमबर्ग मीडिया में उनका आखिरी कार्यदिवस अभी स्पष्ट नहीं है. कंपनी की ओर से भी इस संबंध में आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है.
सिंगापुर में स्थित सुनीता राजन जनवरी 2021 में ब्लूमबर्ग मीडिया से जुड़ी थीं. अपनी मौजूदा भूमिका में वह कंपनी के वैश्विक मीडिया मंचों के लिए विज्ञापन आय और ग्राहक विपणन की जिम्मेदारी संभाल रही थीं. इसमें डिजिटल उत्पाद, ब्लूमबर्ग टेलीविजन, ब्लूमबर्ग रेडियो, ब्लूमबर्ग लाइव कार्यक्रम और ब्लूमबर्ग बिजनेसवीक तथा ब्लूमबर्ग ग्रीन जैसे मुद्रित प्रकाशन शामिल हैं.
एशिया-प्रशांत में बिक्री और विपणन की जिम्मेदारी
ब्लूमबर्ग मीडिया में राजन की जिम्मेदारियों में एशिया-प्रशांत क्षेत्र की बिक्री और विपणन टीमों की निगरानी भी शामिल थी. उन्होंने विभिन्न मीडिया मंचों पर व्यावसायिक पहलों को आगे बढ़ाने और पूरे क्षेत्र में रणनीतिक विपणन सेवाओं के विस्तार पर काम किया.
उनकी भूमिका में नए कारोबारी अवसरों की पहचान करना और ब्रांडों को ब्लूमबर्ग मीडिया के कारोबारी नेताओं तथा निर्णय लेने वाले प्रमुख दर्शकों तक पहुंचाने में मदद करना भी शामिल था.
तीन दशक से ज्यादा का मीडिया बिक्री अनुभव
सुनीता राजन को एशिया-प्रशांत क्षेत्र के अनुभवी मीडिया बिक्री और व्यावसायिक नेतृत्वकर्ताओं में गिना जाता है. उनका करियर तीन दशक से अधिक का है. ब्लूमबर्ग मीडिया से पहले वह सीएनएन इंटरनेशनल कमर्शियल, बीबीसी वर्ल्डवाइड, चैनल वी और स्टार टीवी जैसी प्रमुख मीडिया कंपनियों में अहम भूमिकाएं निभा चुकी हैं.
ब्लूमबर्ग मीडिया में शामिल होने से पहले राजन ने करीब छह साल सीएनएन इंटरनेशनल कमर्शियल के साथ काम किया. मार्च 2015 में वह विज्ञापन बिक्री की उपाध्यक्ष के तौर पर सीएनएन से जुड़ी थीं और जुलाई 2016 में उन्हें विज्ञापन बिक्री की वरिष्ठ उपाध्यक्ष बनाया गया.
सीएनएन में उन्होंने एशिया-प्रशांत क्षेत्र के लिए विज्ञापन बिक्री और विपणन साझेदारियों का नेतृत्व किया. इस दौरान उन्होंने हांगकांग, सिंगापुर, टोक्यो, नई दिल्ली और मुंबई में मौजूद टीमों के साथ काम किया और रणनीतिक ग्राहक संबंधों तथा ब्रांड साझेदारियों की जिम्मेदारी संभाली.
बीबीसी वर्ल्डवाइड के साथ 16 साल से ज्यादा का जुड़ाव
सीएनएन से पहले सुनीता राजन का बीबीसी वर्ल्डवाइड एशिया के साथ 16 साल से अधिक का जुड़ाव रहा. उनकी आखिरी भूमिका एशिया और ऑस्ट्रेलिया-न्यूजीलैंड के लिए विज्ञापन बिक्री की कार्यकारी उपाध्यक्ष की थी. इस पद पर वह बीबीसी वर्ल्ड न्यूज, बीबीसी डॉट कॉम, लोनली प्लैनेट और बीबीसी की अन्य व्यावसायिक संपत्तियों से विज्ञापन आय बढ़ाने की जिम्मेदारी संभाल रही थीं.
बीबीसी में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने बीबीसी विज्ञापन एशिया की वरिष्ठ उपाध्यक्ष और एशिया के लिए उप प्रसारण समय बिक्री निदेशक जैसे पदों पर भी काम किया. उन्होंने बीबीसी की आंतरिक विज्ञापन बिक्री व्यवस्था को विकसित करने और एशिया में कंपनी के व्यावसायिक विस्तार में अहम भूमिका निभाई.
चैनल वी और स्टार टीवी से शुरू हुआ सफर
अपने करियर के शुरुआती दौर में राजन ने न्यूजकॉर्प इंटरनेशनल के चैनल वी में विपणन निदेशक और क्षेत्रीय बिक्री प्रबंधक के तौर पर काम किया. भारत में चैनल वी की शुरुआत और विस्तार के शुरुआती दौर में उन्होंने विज्ञापन, उपभोक्ता विपणन, व्यापार विपणन, वितरण और जमीनी प्रचार जैसे क्षेत्रों में काम किया.
इससे पहले वह हांगकांग और भारत में स्टार टीवी के बिक्री विभाग से भी जुड़ी थीं. उन्होंने एशिया में उपग्रह टेलीविजन के शुरुआती विस्तार के दौर में स्टार टीवी के साथ काम किया.
सुनीता राजन ने अपने करियर की शुरुआत मीडिया कंसेशनायर लिमिटेड से विज्ञापन बिक्री के क्षेत्र में की थी, जहां वह भारत में टाइम और फॉर्च्यून जैसी अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं का प्रतिनिधित्व करती थीं. फिलहाल ब्लूमबर्ग मीडिया में राजन के उत्तराधिकारी को लेकर भी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है. उनकी अगली पेशेवर पारी को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है.
जून के 5.5% से घटकर 5.1% हुई बेरोजगारी दर, ग्रामीण इलाकों में 4.5% और शहरी क्षेत्रों में 6.7% रही दर
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
देश में रोजगार के मोर्चे पर जुलाई में राहत की खबर सामने आई है. 15 साल और उससे अधिक उम्र की आबादी के बीच बेरोजगारी दर जून 2026 के 5.5% से घटकर जुलाई में 5.1% रह गई. यानी एक महीने में बेरोजगारी दर में 0.4 प्रतिशत अंक की कमी दर्ज की गई. राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) की ओर से जारी पीरियॉडिक लेबर फोर्स सर्वे (PLFS) की जुलाई 2026 की मासिक रिपोर्ट के मुताबिक, ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की स्थिति में खास सुधार हुआ है, जबकि शहरी बेरोजगारी दर में मामूली बढ़ोतरी हुई.
ग्रामीण बेरोजगारी दर 4.5% पर आई
जुलाई में ग्रामीण इलाकों की बेरोजगारी दर जून के 5% से घटकर 4.5% रह गई. इसके उलट शहरी क्षेत्रों में बेरोजगारी दर जून के 6.6% से मामूली बढ़कर 6.7% हो गई. सालाना आधार पर देखें तो जुलाई 2025 के मुकाबले कुल बेरोजगारी दर और ग्रामीण बेरोजगारी दर में खास बदलाव नहीं हुआ. हालांकि, शहरी बेरोजगारी दर में 0.5 प्रतिशत अंक की कमी आई है. जुलाई 2025 में शहरी बेरोजगारी दर 7.2% थी.
पुरुषों की बेरोजगारी दर में भी कमी
आंकड़ों के मुताबिक, 15 साल और उससे अधिक उम्र के पुरुषों की बेरोजगारी दर जून के 5.3% से घटकर जुलाई में 5% हो गई. जुलाई 2025 में यह दर 5.3% थी. ग्रामीण पुरुषों की बेरोजगारी दर भी जून के 4.9% से घटकर 4.6% हो गई. वहीं, शहरी पुरुषों में बेरोजगारी दर जून के मुकाबले लगभग स्थिर रही, लेकिन सालाना आधार पर इसमें अच्छी गिरावट दर्ज की गई. जुलाई 2025 में शहरी पुरुष बेरोजगारी दर 6.6% थी, जो जुलाई 2026 में घटकर 5.9% रह गई.
शहरी महिलाओं में बेरोजगारी बढ़ी
महिलाओं के आंकड़ों की तस्वीर कुछ मिली-जुली रही. 15 साल और उससे अधिक उम्र की महिलाओं की कुल और ग्रामीण बेरोजगारी दर जून के मुकाबले जुलाई में घटी, लेकिन दोनों दरें एक साल पहले के स्तर से ऊपर रहीं. शहरी महिलाओं में बेरोजगारी दर जून के 8.4% से बढ़कर जुलाई में 8.8% हो गई. जुलाई 2025 में यह 8.7% थी. यानी सालाना आधार पर शहरी महिला बेरोजगारी दर लगभग स्थिर रही.
श्रम बाजार में बढ़ी भागीदारी
बेरोजगारी दर में गिरावट के साथ जुलाई में श्रम बाजार में लोगों की भागीदारी भी बढ़ी. 15 साल और उससे अधिक उम्र के लोगों की कुल श्रम बल भागीदारी दर (LFPR) जून के 54.4% से बढ़कर जुलाई में 55.4% हो गई. ग्रामीण क्षेत्रों में LFPR में ज्यादा बढ़ोतरी हुई और यह 56.6% से बढ़कर 58% हो गई. वहीं, शहरी LFPR 50.1% से मामूली बढ़कर 50.4% रही.
सालाना आधार पर भी कुल LFPR में सुधार हुआ है. जुलाई 2025 में यह 54.9% थी, जो जुलाई 2026 में बढ़कर 55.4% हो गई. ग्रामीण LFPR भी 56.9% से बढ़कर 58% हो गई, जबकि शहरी LFPR 50.7% से घटकर 50.4% रही.
महिलाओं की श्रम भागीदारी में तेज उछाल
जुलाई में महिलाओं की श्रम बाजार में भागीदारी में खास सुधार देखने को मिला. कुल महिला LFPR जून के 32.7% से बढ़कर जुलाई में 34.4% हो गई. ग्रामीण महिलाओं की LFPR 36.6% से बढ़कर 38.8% पर पहुंच गई, जबकि शहरी महिलाओं की LFPR 24.8% से बढ़कर 25.3% रही.
सालाना आधार पर कुल महिला LFPR जुलाई 2025 के 33.3% से बढ़कर जुलाई 2026 में 34.4% हो गई. ग्रामीण महिलाओं की LFPR में 1.9 प्रतिशत अंक का इजाफा हुआ और यह 36.9% से बढ़कर 38.8% हो गई. हालांकि, शहरी महिलाओं की LFPR 25.8% से घटकर 25.3% रही.
ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की रफ्तार बढ़ी
जुलाई में वर्कर पॉपुलेशन रेशियो (WPR) यानी काम करने वाली आबादी के अनुपात में भी सुधार दर्ज किया गया. कुल WPR जून के 51.4% से बढ़कर जुलाई में 52.5% हो गया. ग्रामीण क्षेत्रों में इसमें सबसे ज्यादा सुधार हुआ और WPR 53.8% से बढ़कर 55.4% हो गया. शहरी क्षेत्रों में यह 46.8% से मामूली बढ़कर 47% रहा.
ग्रामीण महिलाओं के रोजगार अनुपात में भी तेज बढ़ोतरी हुई. जून में ग्रामीण महिला WPR 34.7% थी, जो जुलाई में बढ़कर 37.2% हो गई. यानी एक महीने में 2.5 प्रतिशत अंक का इजाफा हुआ. शहरी महिलाओं का WPR भी 22.7% से बढ़कर 23.1% रहा.
सालाना आधार पर कुल WPR जुलाई 2025 के 52% से बढ़कर जुलाई 2026 में 52.5% हो गया. ग्रामीण WPR भी 54.4% से बढ़कर 55.4% पहुंच गया, जबकि शहरी WPR 47% पर स्थिर रहा.
3.71 लाख लोगों से जुटाए गए आंकड़े
जुलाई 2026 का PLFS बुलेटिन इस सीरीज की 16वीं मासिक रिपोर्ट है. जुलाई के आंकड़े देशभर में कुल 3,71,021 लोगों से जुटाई गई जानकारी पर आधारित हैं. आंकड़ों में बेरोजगारी दर में कमी के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में श्रम भागीदारी और रोजगार अनुपात में सुधार दिखाई देता है, जो देश के रोजगार बाजार के लिए सकारात्मक संकेत माना जा सकता है.
सोमवार को सेंसेक्स 281.09 अंक यानी 0.36% गिरकर 77,728.16 अंक पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 78.35 अंक यानी 0.32% की गिरावट के साथ 24,287.65 अंक पर बंद हुआ.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को भारी बिकवाली के चलते गिरावट देखने को मिली. पश्चिम एशिया में जारी तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बीच कारोबार के दौरान बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE Sensex) 500 अंक से अधिक फिसल गया, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (Nifty 50) भी 24,300 के स्तर से नीचे चला गया. हालांकि, कारोबार के अंत में गिरावट कुछ कम हुई. सेंसेक्स 281.09 अंक यानी 0.36% गिरकर 77,728.16 अंक पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 78.35 अंक यानी 0.32% की गिरावट के साथ 24,287.65 अंक पर बंद हुआ. सेंसेक्स में लगातार दूसरे कारोबारी सत्र गिरावट रही, जबकि निफ्टी लगातार पांचवें दिन कमजोर होकर बंद हुआ.
IT शेयरों पर सबसे ज्यादा दबाव
सेंसेक्स के 30 में से 23 शेयर गिरावट के साथ बंद हुए. IT शेयरों में सबसे ज्यादा दबाव देखने को मिला. इंफोसिस का शेयर 2.66% गिरकर 1,138 रुपये पर बंद हुआ, जबकि HCL Technologies में 2.53%, सन फार्मा में 2.20%, TCS में 1.87% और टेक महिंद्रा में 1.77% की गिरावट रही. इसके अलावा ITC, ट्रेंट, NTPC, हिंदुस्तान यूनिलीवर, भारती एयरटेल, M&M और बजाज फिनसर्व के शेयर भी गिरावट के साथ बंद हुए.
वहीं, कुछ प्रमुख शेयरों में खरीदारी देखने को मिली. टाटा स्टील का शेयर 1.47% चढ़कर 186.10 रुपये पर पहुंच गया. एक्सिस बैंक में 1.03%, रिलायंस इंडस्ट्रीज में 0.80%, BEL में 0.49%, HDFC बैंक में 0.36%, L&T में 0.33% और बजाज फाइनेंस में 0.21% की तेजी रही. ब्रॉडर मार्केट में निफ्टी मिडकैप इंडेक्स 0.05% और निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स 0.36% की बढ़त के साथ बंद हुए. सेक्टोरल इंडेक्स में निफ्टी IT करीब 2% गिरकर सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला सेक्टर रहा, जबकि निफ्टी मेटल और निफ्टी रियल्टी में सबसे ज्यादा मजबूती रही.
रुपये में भी कमजोरी
विदेशी बाजारों में दबाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बीच रुपये में भी कमजोरी रही. रुपया डॉलर के मुकाबले करीब 0.2% कमजोर होकर 95.61 के स्तर पर कारोबार कर रहा था. पिछले कारोबारी सत्र में यह 95.4250 के स्तर पर बंद हुआ था.
कमजोर बाजार में Gujarat Cotex अपर सर्किट में
कमजोर बाजार के बीच सूरत की डायवर्सिफाइड बिजनेस वाली कंपनी Gujarat Cotex Limited का शेयर निवेशकों के फोकस में रहा. कंपनी का शेयर 5% के अपर सर्किट में बंद हुआ. कंपनी के नए बिजनेस वर्टिकल शुरू करने के प्रस्ताव के बाद इस शेयर पर भी बाजार की नजर बनी हुई है.
आज इन शेयरों पर रखें नजर
आज कई अहम कॉरपोरेट अपडेट्स के चलते Paytm, Nelco, Netweb Technologies, IIFL Finance, Jyoti CNC Automation, PNB Housing Finance, Manipal Health Enterprises, LEAP India, RPP Infra Projects और Kesar India समेत कई शेयरों में हलचल देखने को मिल सकती है. Paytm की प्रमोटर इकाई Resilient Asset Management B.V. करीब 4.98% हिस्सेदारी बेच सकती है और इसके लिए 1,535.10 रुपये प्रति शेयर का फ्लोर प्राइस तय किए जाने की खबर है. Nelco ने Elveo के साथ सैटेलाइट कनेक्टिविटी और IoT सेवाओं के लिए रणनीतिक साझेदारी की है और Lunar Holdco के CCDs में करीब 166 करोड़ रुपये का निवेश किया है. Netweb Technologies ने करीब 1,200 करोड़ रुपये जुटाने के लिए QIP शुरू किया है, जिसका फ्लोर प्राइस 4,885.90 रुपये प्रति शेयर रखा गया है.
IIFL Finance के लिए भी सकारात्मक खबर है. Fitch Ratings ने कंपनी की लॉन्ग-टर्म इश्यूअर डिफॉल्ट रेटिंग को ‘B+’ से बढ़ाकर ‘BB-’ कर दिया है और आउटलुक Stable रखा है. वहीं, Jyoti CNC Automation के 1,020.65 करोड़ रुपये के कैपिटल निवेश प्रस्ताव को मंजूरी मिली है. PNB Housing Finance के शेयरधारकों ने 10,000 करोड़ रुपये तक के NCD जारी कर रकम जुटाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है. Manipal Health Enterprises ने 130 करोड़ रुपये में बेंगलुरु के Kinder Hospital का कारोबार और संबंधित संपत्तियां खरीदने के लिए समझौता किया है.
इसके अलावा Government of Singapore ने LEAP India में करीब 0.5% हिस्सेदारी खरीदी है, जबकि RPP Infra Projects में Diva Projects ने करीब 1.7% हिस्सेदारी बढ़ाई है. Kesar India में Minerva Ventures Fund ने करीब 3.76% हिस्सेदारी खरीदी है. ByteDance ने AI मॉडल में कॉपीराइट सुरक्षा मजबूत करने के लिए Motion Picture Association के साथ समझौता किया है. वहीं, Philips India के Personal Health कारोबार को FY27 में 1,000 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व हासिल होने की उम्मीद है. इन सभी कॉरपोरेट अपडेट्स के चलते आज संबंधित शेयरों पर निवेशकों की खास नजर रह सकती है.
जब जुलाई में AI बूम का सबसे बड़ा दांव धराशायी हुआ, तो कुछ समय के लिए उसके पीछे की पूरी "आर्किटेक्चर" सामने आ गई. भारत में जांच के दायरे में रही फर्म जेन स्ट्रीट के पास चिप्स, कंप्यूटिंग, डेटा सेंटर्स और मॉडल्स में हिस्सेदारी थी. यह शेयरों में मार्केट मेकर भी थी और उस सबसे बड़े फंड में भी इसका पैसा लगा हुआ था जो धराशायी हो गया. फंड के पतन के 12 दिन बाद जेन स्ट्रीट ने 14.6 अरब डॉलर जुटाए और फिर चुप्पी साध ली. क्या जेन स्ट्रीट के AI ट्रेड और उसके मामले में कोई पैटर्न है?
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
पलक शाह
भारत जेन स्ट्रीट को इसलिए जानता है क्योंकि सेबी ने कहा था कि उसने बाजारों में हेरफेर किया. जुलाई के AI क्रैश ने एक झलक दी कि जब यह फर्म भारत के नियामकीय माइक्रोस्कोप के बाहर काम करती है तो उसका स्वरूप कैसा दिखता है. जुलाई के AI ब्लो-अप की अनकही कहानी.
जुलाई 2025 में नियामक ने इसे भारतीय बाजारों से प्रतिबंधित कर दिया और 4,843.57 करोड़ रुपये करीब 560 मिलियन डॉलर, वापस जमा कराने का आदेश दिया. सेबी के इतिहास में यह इस तरह का सबसे बड़ा आदेश था. आरोप था कि इसने एक्सपायरी के दिनों में इंडेक्स स्तरों में हेरफेर किया. जेन स्ट्रीट ने अपने काम को "बेसिक इंडेक्स आर्बिट्राज" बताया: न्यूट्रल, मैकेनिकल और किसी भी चीज पर कोई राय नहीं. इसने पैसा जमा कर दिया, प्रतिबंध हटा लिया गया और इसकी अपील सितंबर से सिक्योरिटीज अपीलेट ट्रिब्यूनल के सामने बिना सुने पड़ी है.
न्यूट्रैलिटी का यह दावा अब कोई तकनीकी मुद्दा या साइड डिटेल नहीं है. यही पूरा मामला है और यही मुख्य कारण है कि दुनिया भर के नियामक इस तरह की फर्मों को इतना बड़ा बनने, गोपनीय बने रहने और ऑर्डर बुक के इतने करीब रहने की अनुमति देते हैं. इसलिए यह समझना जरूरी है कि जेन स्ट्रीट बाकी जगहों पर क्या कर रही थी.
भारत में सेबी का मामला यह सवाल उठाता है कि क्या जेन स्ट्रीट ऑर्डर बुक के भीतर बैठकर और उसके आसपास ट्रेडिंग करते हुए भी न्यूट्रल रह सकती है. AI ब्लो-अप एक अलग लेकिन जुड़ा हुआ सवाल उठाता है: क्या वही फर्म केवल एक मार्केट मेकर हो सकती है, जब वह एक साथ उन कंपनियों के आसपास निवेशक, लेंडर, को-इन्वेस्टर और बिडर भी हो, जिनके शेयरों में वह मार्केट बनाती है?
इंस्ट्रूमेंट्स अलग हैं. सवाल वही है: मार्केट-मेकिंग कहां खत्म होती है और आर्थिक एक्सपोजर कहां शुरू होता है?
मशीन के अंदर जेन स्ट्रीट
यह वॉल स्ट्रीट की सबसे बड़ी प्रॉप ट्रेडिंग फर्मों में से एक है. इसके कोई बाहरी क्लाइंट नहीं हैं, कोई लिस्टेड शेयर नहीं है और इसकी सार्वजनिक आवाज लगभग नहीं के बराबर है. इसने 2025 में ट्रेडिंग से 39.6 अरब डॉलर कमाए, उन बैंकों के ट्रेडिंग आर्म्स से भी ज्यादा, जिनसे यह प्रतिस्पर्धा करती है और अकेले 2026 की पहली तिमाही में 16.1 अरब डॉलर का रेवेन्यू और 10.3 अरब डॉलर का मुनाफा कमाया. और करीब दो वर्षों में इसने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को चलाने वाली मशीनरी की लगभग हर परत में पोजीशन ली है.
AI बनने से पहले उसे जिन चीजों की जरूरत होती है, वहीं से शुरुआत कीजिए.
उसे चिप्स चाहिए. जेन स्ट्रीट ने MatX में 500 मिलियन डॉलर के निवेश का सह-नेतृत्व किया, जो Nvidia को चुनौती देने वाले प्रोसेसर डिजाइन करने वाला एक स्टार्ट-अप है.
उसे कंप्यूटिंग पावर चाहिए. जेन स्ट्रीट के पास CoreWeave की करीब 7 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जो सबसे बड़ी लिस्टेड AI इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों में से एक है, और अप्रैल में इसने स्टॉक में 1 अरब डॉलर और लगाए.
उस कंप्यूटिंग पावर को बनाने के लिए कर्ज चाहिए. जेन स्ट्रीट CoreWeave के सबसे बड़े लेंडर्स में से एक भी है, रिपोर्ट के मुताबिक एक सिंगल फाइनेंसिंग फैसिलिटी में कमिटेड फंडिंग का करीब 35 प्रतिशत, जो केवल Anthropic से पीछे है और इसके साथ कई अरब डॉलर की क्लाउड कैपेसिटी कमिटेड है.
उसे डेटा सेंटर्स चाहिए. जेन स्ट्रीट ने Fluidstack में 1 अरब डॉलर के निवेश का सह-नेतृत्व किया, जिसमें कंपनी का वैल्यूएशन 18 अरब डॉलर था, जो उसी साल की शुरुआत में कंपनी की कीमत से दोगुने से भी ज्यादा था. Fluidstack का सबसे बड़ा ग्राहक Anthropic है, जिसके साथ कस्टम फैसिलिटीज बनाने के लिए कथित तौर पर दसियों अरब डॉलर का समझौता है.
और उसे मॉडल्स चाहिए. जेन स्ट्रीट के पास Anthropic में हिस्सेदारी है, जिसे उसने दो राउंड में खरीदा था. Bloomberg के मुताबिक, 2025 की एक तिमाही में प्राइवेट निवेशों ने इसके ट्रेडिंग रेवेन्यू में करीब 830 मिलियन डॉलर का योगदान दिया, कुल का करीब 12 प्रतिशत, जिसमें Anthropic का हिस्सा भारी था.
जेन स्ट्रीट AI बूम के आसपास सिर्फ ट्रेडिंग नहीं कर रही थी. उसने उस पूरी मशीनरी में निवेश किया था जिसने इस बूम को संभव बनाया. चिप कंपनी, कंप्यूटिंग कंपनी, कंप्यूटिंग कंपनी को कर्ज देने वाली संस्था, डेटा-सेंटर कंपनी और मॉडल कंपनी.
फिर खुद बाजार भी है
BW द्वारा जेन स्ट्रीट की अपनी तिमाही फाइलिंग्स के विश्लेषण, जिसमें 2025 की शुरुआत से CoreWeave, Bloom Energy, SanDisk, IREN, Core Scientific और Nebius शामिल हैं, से पता चलता है कि फर्म हर एक में मौजूद थी. लगभग हर तिमाही में यह तीन अलग-अलग लाइनें फाइल करती है: शेयर, कीमत बढ़ने पर लाभ देने वाली पोजीशन और कीमत गिरने पर लाभ देने वाली पोजीशन. तीनों एक साथ.
30 जून को तस्वीर ऐसी थी, जो पतन से पहले Leopold Aschenbrenner के अंतिम स्नैपशॉट की भी तारीख थी.
उनकी दूसरी सबसे बड़ी होल्डिंग SanDisk में 5.67 अरब डॉलर की थी. उसी तारीख को, उसी स्टॉक में, जेन स्ट्रीट ने 2.6 अरब डॉलर के शेयर, 8.1 अरब डॉलर की अपसाइड पोजीशन और 14.6 अरब डॉलर की डाउनसाइड पोजीशन रिपोर्ट की. इन तीनों को जोड़ें तो एक ही कंपनी में जेन स्ट्रीट की बुक करीब 25 अरब डॉलर की थी, Aschenbrenner के पूरे फंड से भी बड़ी.
यहां चीजों को जरूरत से ज्यादा पढ़ लेने का बड़ा प्रलोभन है. लेकिन हम इससे बचेंगे. जेन स्ट्रीट क्या कहेगी? एक ही नाम में शेयर, कॉल्स और पुट्स को एक साथ रखना किसी बड़े ऑप्शंस मार्केट-मेकिंग डेस्क का सामान्य परिणाम है. यह इन्वेंट्री और हेजिंग है, किसी के खिलाफ लगाया गया दांव नहीं.
लेकिन इसकी संरचना ही पूरी कहानी की संरचना है. तिमाही के आखिरी दिन, उस फंड की सबसे बड़ी सिंगल स्टॉक पोजीशन जो धराशायी होने वाला था, और उस फर्म की सबसे बड़ी डाउनसाइड बुक जो उस स्टॉक की कीमतें कोट कर रही थी, एक ही कंपनी में थी.
एक और पोजीशन थी
जून में Wall Street Journal ने रिपोर्ट किया कि जेन स्ट्रीट के निवेशों में अब Aschenbrenner का फंड भी शामिल था.
इस तरह फर्म उस इकोसिस्टम के अंदर थी जिस पर वह दांव लगा रहा था, और उस व्हीकल के अंदर भी जो लीवरेज्ड दांव लगा रहा था. जेन स्ट्रीट के पास Anthropic था; उसके पास Anthropic में करीब 5 अरब डॉलर थे. इसके पास CoreWeave था; CoreWeave उसकी सबसे बड़ी होल्डिंग्स में से एक थी. इसने CoreWeave को कर्ज दिया था. दोनों ने MatX में साथ निवेश किया और Fluidstack में भी साथ निवेश किया. यह उसके सबसे बड़े स्टॉक्स में मार्केट बनाती थी. और 29 जुलाई को, जब उसका लीवरेज टूट गया और बैंक खरीदार की तलाश में जुट गए, तो जेन स्ट्रीट उन फर्मों में शामिल थी जो बचे हुए एसेट्स के लिए बोली लगा रही थीं.
एक ही ट्रेड के आसपास छह पोजीशन
दो स्पष्टीकरण महत्वपूर्ण हैं और फर्म दोनों की हकदार है. कहीं भी यह रिपोर्ट नहीं हुआ है कि जेन स्ट्रीट Aschenbrenner को कर्ज दे रही थी, उसकी फाइनेंसिंग Goldman Sachs, JPMorgan और Bank of America से आई थी. और जेन स्ट्रीट कोई फाउंडिंग बैकर भी नहीं थी. यह तब आई जब फंड पहले ही 1,000 प्रतिशत से अधिक रिटर्न दे चुका था और यह Citadel से नीलामी हार गई. मौजूदा रिकॉर्ड के अनुसार, जेन स्ट्रीट ने यह ट्रेड बनाया नहीं था. यह उस ट्रेड में शामिल हुई जो पहले से चल रहा था.
अब पैटर्न
भारतीय नियामक इस संरचना को पहले देख चुके हैं. उन्होंने इस पर एक आदेश भी लिखा है.
SEBI की जुलाई 2025 की फाइंडिंग्स से उनके मैकेनिक्स को हटा दें तो एक आरोप बचता है और वह यह नहीं है कि जेन स्ट्रीट ने आक्रामक तरीके से ट्रेड किया, कोई राय ली या किस्मत से जीत गई. आरोप यह है कि फर्म एक बाजार में इतनी बड़ी हो गई थी कि उसकी अपनी खरीद और बिक्री उस इंडेक्स को प्रभावित कर सकती थी, जो तय करता था कि उसके ऑप्शंस कितना भुगतान करेंगे.
यहीं SEBI के आदेश की असली धार है: जेन स्ट्रीट के पास Calls थे. इसके पास Puts थे. और इसके पास अंतर्निहित बैंक शेयरों की इतनी बड़ी मात्रा थी कि वह उस संख्या को प्रभावित कर सके, जिसके आधार पर ये कॉन्ट्रैक्ट्स सेटल होते थे. नियामक ने इसे हेरफेर कहा. जेन स्ट्रीट ने इसे हेजिंग कहा.
अब इसे फाइलिंग्स के सामने रखिए
भारत में SEBI ने Bank Nifty कॉम्प्लेक्स में जेन स्ट्रीट की पोजीशंस को इतना बड़ा माना कि वे इंडेक्स को प्रभावित कर सकती थीं. AI ट्रेड में, जून के आखिरी दिन एक ही स्टॉक — SanDisk में इसकी बुक उस पूरे 20 अरब डॉलर के फंड से भी बड़ी थी, जिसके पतन ने चार हफ्ते बाद वैश्विक बाजारों को हिला दिया. प्रतिबंध से पहले इस तरह की प्रॉप फर्म्स भारत के इंडेक्स-ऑप्शंस वॉल्यूम का करीब आधा हिस्सा थीं. AI इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े नामों में इसकी तीन तरफ की बुक्स उन कंपनियों के मुकाबले दसियों अरब डॉलर तक पहुंचती हैं, जिनके बारे में ज्यादातर निवेशकों ने दो साल पहले सुना भी नहीं था.
जेन स्ट्रीट के बारे में समझने वाली यही बात है, और इसका किसी एक ट्रेड से कोई संबंध नहीं है.
इस पैमाने पर कोई फर्म बाजार की केवल एक प्रतिभागी नहीं रह जाती, बल्कि बाजार की स्थितियों में से एक बन जाती है. जब आप एसेट के मालिक हों, एसेट को फाइनेंस करें, एसेट की कीमत कोट करें और एसेट के सबसे बड़े लीवरेज्ड खरीदार को फंड भी करें, तो आप बाजार में केवल पोजीशन नहीं ले रहे होते. आप उस चीज का हिस्सा बन जाते हैं, जो खुद बाजार है.
अब तक जेन स्ट्रीट पर यह आरोप नहीं है कि उसने AI ट्रेड में किसी चीज में हेरफेर किया, और सार्वजनिक रिकॉर्ड में भी ऐसा कोई संकेत नहीं है. BW इस तरह की समानता नहीं खींच रहा है.
लेकिन एक समानता स्पष्ट है, इसका तरीका. दो महाद्वीप, दो एसेट क्लास, एक ही हस्ताक्षर: हर तरफ मौजूद, आकार में प्रभावशाली और किसी भी पक्ष पर पूरी तरह न्यूट्रल नहीं. SEBI जिस बात पर मुकदमा लड़ रहा है, वह केवल भारत की एक घटना नहीं है. यह उस तरीके का सवाल है, जिससे यह फर्म किसी बाजार में खड़ी होती है, और जुलाई ने इसे दशक के सबसे बड़े कैपिटल साइकिल में बिल्कुल उसी तरह खड़ा दिखाया.
मुंबई का ट्रिब्यूनल 2023 और 2024 के 18 एक्सपायरी दिनों पर फैसला देगा. AI क्रैश से संकेत मिलता है कि सवाल इससे कहीं बड़ा है.
हर तरफ मौजूद रहने से आपको क्या मिलता है
इसका जवाब 14 अगस्त को मिला, जब Reuters ने रिपोर्ट किया कि जेन स्ट्रीट को जुलाई में करीब 15 अरब डॉलर का नुकसान हुआ, लगभग एक दशक में इसका पहला घाटे वाला महीना. नुकसान Aschenbrenner के फंड में इसकी हिस्सेदारी और एशियाई इक्विटी बाजारों में गलत दिशा में गए दांवों से हुआ.
15 अरब डॉलर किसी भी ट्रेडिंग फर्म द्वारा घोषित अब तक के सबसे बड़े मासिक नुकसानों में से एक है.
लेकिन तथ्य यह है कि फर्म ने इस साल के पहले आठ महीनों में अब भी 40 अरब डॉलर से ज्यादा का नेट ट्रेडिंग रेवेन्यू कमाया है, जो 2025 के पूरे रिकॉर्ड वर्ष से भी ज्यादा है. फायर सेल के 12 दिन बाद इसने बाजार से 14.6 अरब डॉलर मांगे और मिल गए. और फंड के मामले में, जेन स्ट्रीट का अपना कहना है कि इस पतन के बाद भी साल के लिए उसकी हिस्सेदारी लगभग फ्लैट रही. निवेश की पूरी अवधि में, उसका कहना है कि वह अब भी फायदे में है.
इसे आपको फिर पढ़ना चाहिए. Archegos के बाद सबसे शानदार हेज फंड पतनों में से एक- चार हफ्तों में 67 प्रतिशत की गिरावट, 16 अरब डॉलर के पोर्टफोलियो की रातोंरात डिस्काउंट पर नीलामी और उसमें पैसा लगाने वाला निवेशक साल के अंत तक अब भी ब्रेक-ईवन से बेहतर स्थिति में है और पूरे निवेश की अवधि में फायदे में है.
हर तरफ मौजूद रहने से आपको यही मिलता है. इम्यूनिटी नहीं, बल्कि उससे ज्यादा उपयोगी चीज: अनुपात. तब तबाही पूरे साल में सिर्फ एक खराब महीना बन जाती है.
उस ट्रेड में बाकी सभी के लिए जुलाई अंतिम साबित हुआ. Aschenbrenner ने चार हफ्तों में अपने फंड का दो-तिहाई हिस्सा खो दिया. जिन रिटेल निवेशकों ने उसकी फाइलिंग्स ट्रैक कीं और उसकी पोजीशंस कॉपी कीं, उनके पास वापस लौटने के लिए Anthropic में कोई निजी हिस्सेदारी नहीं थी, कोई लोन रीपेमेंट लगातार नहीं आ रहा था, कोई ऐसा मार्केट-मेकिंग डेस्क नहीं था जो ऊपर जाने और नीचे आने दोनों रास्तों में कमाई कर रहा हो. उनके पास एक पोजीशन थी, एक दिशा थी और मौजूद रहने के लिए कोई दूसरा पक्ष नहीं था.
यह एक असाधारण असमानता है और शायद सबसे शक्तिशाली आर्किटेक्चर भी.
एक फर्म उस 25 वर्षीय व्यक्ति के आसपास छह पोजीशंस तक कैसे पहुंच जाती है, जिसे उसने कभी नौकरी पर भी नहीं रखा?
किसी कॉन्ट्रैक्ट के जरिए नहीं, बल्कि एक ऐसे नेटवर्क के जरिए जो एक दशक से सार्वजनिक है.
2014 में इफेक्टिव अल्ट्रूइज्म मूवमेंट , जो प्रतिभाशाली युवाओं को बहुत बड़ी रकम कमाने और फिर उसे दान करने के लिए प्रेरित करता है, ने एक युवा गणितज्ञ को जेन स्ट्रीट की ओर निर्देशित किया. उसका नाम Sam Bankman-Fried था; करियर संगठन 80,000 Hours ने इसे अपनी वेबसाइट पर केस स्टडी के रूप में प्रकाशित किया था. Caroline Ellison, जो बाद में उसके ट्रेडिंग आर्म को चलाने वाली थीं, ने भी अपना करियर वहीं से शुरू किया. 2022 में Bankman-Fried की Alameda ने Modulo Capital को 400 मिलियन डॉलर दिए, जो दो पूर्व जेन स्ट्रीट ट्रेडर्स द्वारा स्थापित एक बिल्कुल नया फंड था. यह निवेश उस बहामास कॉम्प्लेक्स से हुआ जहां FTX के कर्मचारी रहते थे. Alameda इसका एकमात्र निवेशक था. पारंपरिक संस्थानों ने इसे खारिज कर दिया था.
इसलिए सवाल "किसी युवा और अज्ञात व्यक्ति को अरबों कौन देता है?" का जवाब चार साल पहले ही मौजूद था.
Aschenbrenner भी उसी दुनिया से आया था, बस एक पीढ़ी बाद. उसने Columbia के इफेक्टिव अल्ट्रूइज्म चैप्टर की सह-स्थापना की, 19 साल की उम्र में वैलेडिक्टोरियन के रूप में ग्रेजुएट हुआ और फरवरी 2022 में Bankman-Fried के FTX Future Fund में शामिल हुआ , 10 नवंबर को इस्तीफा दे दिया, FTX के दिवालियापन के लिए आवेदन करने से एक दिन पहले. जब एस्टेट ने मार्च 2024 में FTX की Anthropic हिस्सेदारी के दो-तिहाई हिस्से को 884 मिलियन डॉलर में बेचा, तो खरीदारों में से एक जेन स्ट्रीट थी.
इन दो फर्मों के बीच कोई सीधा तार नहीं है, और यही असली बात है. इन्हें जोड़ता है लोगों की एक पाइपलाइन, एक साझा विश्वास और ऐसे एसेट्स जिनके मालिक दोनों पहले से थे.
फिर आता है आखिरी मोड़
12 अगस्त को, लिक्विडेशन के 12 दिन बाद, जेन स्ट्रीट ने 14.6 अरब डॉलर का नया कर्ज जुटाया 1.2 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा, जिसमें उसने अपने करीब 11.1 अरब डॉलर के पुराने कर्ज को क्लियर किया, जिसमें एक टर्म लोन और नोट्स की एक ट्रांच शामिल थी, जो इन घटनाओं से काफी पहले की थी.
यह रीफाइनेंसिंग पतन की वजह से नहीं हुई थी; इतने बड़े सौदे को दो हफ्तों में तैयार नहीं किया जाता. लेकिन घटनाक्रम फिर भी उल्लेखनीय है. जब दुनिया एक 25 वर्षीय व्यक्ति के लीवरेज्ड AI दांव को सार्वजनिक रूप से टूटते देख रही थी, जेन स्ट्रीट चुपचाप अपनी बैलेंस शीट को रिस्ट्रक्चर कर रही थी और अपनी अधिक फाइनेंसिंग को प्राइवेट लेंडर्स की ओर ले जा रही थी, जिनमें बातचीत में Pimco का नाम भी सामने आया.
कम क्रेडिटर्स. कम सार्वजनिक खुलासा. एक ऐसी बैलेंस शीट जिसे बाहर से देखना ज्यादा मुश्किल हो.
तीन में से दो रेटिंग एजेंसियों ने नए पेपर को जंक रेटिंग दी. तीसरी, Fitch, ने 24 जुलाई को फर्म को इन्वेस्टमेंट ग्रेड में अपग्रेड किया, फायर सेल से पांच दिन पहले और उसी CoreWeave लोन को बेचने की प्रक्रिया के बीच, जिसे खरीदारों को आकर्षित करने के लिए काफी अधिक आकर्षक बनाना पड़ा. किसी ने किसी गलत काम का आरोप नहीं लगाया है. घटनाक्रम बस घटनाक्रम है.
और देखिए कि क्या अब भी दिखाई देता है. वे तिमाही फाइलिंग्स अमेरिकी लिस्टेड शेयरों को कवर करती हैं और कुछ नहीं. Anthropic की हिस्सेदारी नहीं. CoreWeave का लोन नहीं. MatX या Fluidstack नहीं. Aschenbrenner के फंड में जेन स्ट्रीट ने जो भी रकम लगाई, उसका एक रुपया भी नहीं.
जुलाई की एक सुबह, एक मार्जिन कॉल ने वह काम किया जो कोई नियामकीय आदेश नहीं कर पाया था. उसने इस फर्म के आसपास की पूरी आर्किटेक्चर को रोशन कर दिया, वे एसेट्स जिनकी वह मालिक थी, वे कंपनियां जिन्हें उसने फाइनेंस किया, वे स्टॉक्स जिनमें वह कीमतें बनाती थी, वह फंड जिसे उसने बैक किया था और जब वह फंड खत्म हुआ तो उसके बचे हुए हिस्से खरीदने में उसकी दिलचस्पी.
फिर जब रोशनी आगे बढ़ गई, जेन स्ट्रीट ने 15 अरब डॉलर का नुकसान बताया, 14.6 अरब डॉलर जुटाए और अपने अधिक कर्ज को प्राइवेट हाथों में ले गई, जहां अगली बार उसका खुलासा करना भी जरूरी नहीं होगा क्योंकि वह प्राइवेट लेंडर PIMCO से आया है.
SEBI ने भारत के भीतर जेन स्ट्रीट को उजागर किया. AI क्रैश ने भारत के बाहर जेन स्ट्रीट के पैमाने को उजागर किया.
लेकिन जेन स्ट्रीट ने यह सुनिश्चित कर लिया है कि दूसरी तस्वीर को देखना और मुश्किल हो जाए.
पलक शाह, BW रिपोर्टर्स
(पलक शाह एक अनुभवी खोजी पत्रकार हैं और The Market Mafia: Chronicle of India’s High-Tech Stock Market Scandal & The Cabal That Went Scot-Free के लेखक हैं. लगभग दो दशकों के अनुभव के साथ, उन्होंने मुंबई में जमीनी रिपोर्टिंग करते हुए पैसे, ताकत और नियमों के गठजोड़ को उजागर किया है. उनके लेख The Economic Times, Business Standard, The Financial Express और The Hindu Business Line जैसे प्रमुख प्रकाशनों में प्रकाशित हुए हैं. 19 साल की उम्र में अपराध पत्रकारिता से शुरुआत करने वाले पलक ने जल्द ही समझ लिया कि 1980 के दशक के गैंगवार अब कॉरपोरेट अपराध में बदल चुके हैं. इसी ने उन्हें वित्तीय पत्रकारिता की ओर मोड़ा, जहां उन्होंने बाजार हेरफेर और सिस्टम की खामियों को उजागर किया.)
हिंद महासागर क्षेत्र में निगरानी क्षमता बढ़ाने के लिए रक्षा मंत्रालय ने जनरल एटॉमिक्स के साथ किया समझौता
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
रक्षा मंत्रालय (MoD) ने भारतीय नौसेना की समुद्री निगरानी और खुफिया क्षमता को मजबूत करने के लिए बड़ा कदम उठाया है. मंत्रालय ने जनरल एटॉमिक्स एरोनॉटिकल सिस्टम्स इंक. (GA-ASI) के साथ दो MQ-9B सी गार्जियन हाई-एल्टीट्यूड लॉन्ग-एंड्योरेंस (HALE) रिमोटली पायलटेड एयरक्राफ्ट सिस्टम्स (RPAS) को लीज पर लेने के लिए करीब ₹1,943 करोड़ का करार किया है.
यह करार 30 महीने की अवधि के लिए किया गया है. समझौते पर 17 अगस्त 2026 को नई दिल्ली स्थित कर्तव्य भवन-2 में हस्ताक्षर किए गए. इस दौरान रक्षा विभाग के अतिरिक्त सचिव और महानिदेशक (अधिग्रहण) ए. अनबरासु भी मौजूद रहे.
समुद्र में लंबी दूरी तक होगी निगरानी
MQ-9B सी गार्जियन सिस्टम अत्याधुनिक सेंसर, सिस्टम और पेलोड से लैस हैं. इन्हें बड़े समुद्री क्षेत्रों में लगातार इंटेलिजेंस, सर्विलांस और रिकॉनिसेंस (ISR) मिशन को अंजाम देने के लिए डिजाइन किया गया है.
इन ड्रोन के शामिल होने से भारतीय नौसेना की मैरिटाइम डोमेन अवेयरनेस (MDA) क्षमता को मजबूती मिलने की उम्मीद है. खासतौर पर हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री गतिविधियों पर लगातार नजर रखने में यह सिस्टम अहम भूमिका निभाएगा.
संदिग्ध गतिविधियों को ट्रैक करने में मिलेगी मदद
लीज पर लिए जा रहे ये विमान नौसेना को विशाल समुद्री क्षेत्रों में गतिविधियों की निगरानी करने, संदिग्ध हलचलों का पता लगाने, उन्हें ट्रैक करने और क्षेत्र में उभरती किसी भी स्थिति पर तेजी से प्रतिक्रिया देने में मदद करेंगे.
यह समझौता भारतीय नौसेना की निगरानी क्षमताओं को और मजबूत करने तथा भारत के व्यापक समुद्री सुरक्षा क्षेत्र में उसकी ऑपरेशनल अवेयरनेस बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.