अमेरिकी फर्म वारबर्ग पिंकस की सहायक कंपनी ने भारती एयरटेल में अपनी कुछ हिस्सेदारी खुले बाजार में बेच दी है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
शेयर बाजार (Stock Market) जब 3 जुलाई यानी सोमवार को खुलेगा, तो एयरटेल (Airtel) के शेयरों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है. इसकी वजह है अमेरिका की वैश्विक इक्विटी फर्म वारबर्ग पिंकस (Warburg Pincus) द्वारा उठाया गया एक कदम. दरअसल, इस कंपनी ने भारती एयरटेल (Bharti Airtel) में अपनी कुछ हिस्सेदारी बेच दी है. वारबर्ग पिंकस ने ओपन मार्केट में इस दिग्गज टेलीकॉम कंपनी ने 1649 करोड़ रुपए के शेयर बेचे हैं. आमतौर पर इस तरह के फैसलों का संबंधित कंपनी के शेयरों पर असर पड़ने की संभावना बढ़ जाती है.
इतनी % है हिस्सेदारी
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, Warburg Pincus की सहयोगी कंपनी लियोन मीडो इनवेस्टमेंट (Lion Meadow Investment) ने ये सौदा किया है. लियोन मीडो ने 1.90 करोड़ शेयरों की 1,649.20 करोड़ रुपए में बिक्री की है, जो एयरटेल में इसकी 0.32 फीसदी हिस्सेदारी के बराबर है. Airtel के इन शेयरों को एक दूसरी अमेरिकी कंपनी ने खरीदा है. यूएस की वित्तीय सेवाएं मुहैया कराने वाली कंपनी कैपिटल ग्रुप के फंड्स और सहयोगियों ने लियोन मीडो से इन शेयरों को खरीदा है.
स्टॉक पर ओवरवेट रेटिंग
एयरटेल के शेयरों पर इस डील का कुछ न कुछ असर देखने को मिल सकता है. वैसे, बता दें कि एयरटेल द्वारा चौथी तिमाही के नतीजे जारी करने के बाद ब्रोकरेज फर्म मॉर्गन स्टैनली (Morgan Stanley) ने एयरटेल स्टॉक पर ओवरवेट की रेटिंग प्रदान की थी. उसने कहा था कि 4G और पोस्टपेड ग्राहकों की संख्या में मजबूती नजर आ रही है. नतीजों की बात करें, तो भारती एयरटेल ने अपने कंसोलिडेट रिवेन्यू में इजाफा दर्शाया था. कंपनी ने सालाना आधार पर इसमें करीब 14.3% की बात कही थी. वहीं, कंपनी का नेट प्रॉफिट 3006 करोड़ रुपए रहा था.
ऐसा रहा है शेयर का हाल
एयरटेल के शेयर इस हफ्ते करीब 3% ऊपर चढ़े हैं. शुक्रवार को यह 0.89% की बढ़त के साथ 880 रुपए पर बंद हुए थे. इसके पिछले रिकॉर्ड की बात करें, तो बीते 5 कारोबारी सत्रों में इसने 4.12% और एक महीने में 6.29% का रिटर्न दिया है. जबकि एक साल में यह आंकड़ा 30.67% पहुंच गया है. पिछले साल 14 जुलाई को एयरटेल का शेयर 628.75 रुपए पर था, जो इसका 52 वीक का का निचला स्तर है. फिलहाल, इसका 52 हफ्तों का उच्च स्तर 888.75 रुपए है, जिसके ये बेहद करीब पहुंच गया है.
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) के अंतरिम आंकड़ों के मुताबिक, 13 जुलाई तक शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह 16.40 फीसदी बढ़कर 6.51 लाख करोड़ रुपये हो गया.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
वित्त वर्ष 2026-27 की शुरुआत सरकार के लिए राजस्व के मोर्चे पर बेहद मजबूत रही है. 13 जुलाई तक शुद्ध प्रत्यक्ष कर (Direct Tax) संग्रह 16.4 फीसदी बढ़कर 6.51 लाख करोड़ रुपये से अधिक पहुंच गया है. इस बढ़ोतरी में सबसे बड़ा योगदान कॉरपोरेट टैक्स का रहा, जिसमें 22 फीसदी की तेज वृद्धि दर्ज की गई. साथ ही व्यक्तिगत आयकर और अन्य गैर-कॉरपोरेट टैक्स संग्रह में भी दोहरे अंकों की बढ़ोतरी देखने को मिली है. विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत कॉरपोरेट मुनाफा, बेहतर टैक्स अनुपालन और औपचारिक अर्थव्यवस्था के विस्तार से सरकार को अपने वार्षिक कर संग्रह लक्ष्य तक पहुंचने में मदद मिलेगी.
कॉरपोरेट टैक्स बना सबसे बड़ा सहारा
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) के अंतरिम आंकड़ों के मुताबिक, 13 जुलाई तक शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह 16.40 फीसदी बढ़कर 6.51 लाख करोड़ रुपये हो गया. इसमें शुद्ध कॉरपोरेट टैक्स संग्रह 22 फीसदी बढ़कर 2.40 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया, जो कुल बढ़ोतरी का सबसे बड़ा कारण रहा. वहीं सकल कॉरपोरेट टैक्स संग्रह 3.35 लाख करोड़ रुपये दर्ज किया गया, जो कंपनियों की मजबूत आय और बेहतर टैक्स भुगतान को दर्शाता है.
गैर-कॉरपोरेट टैक्स में भी दोहरे अंक की बढ़त
शुद्ध गैर-कॉरपोरेट टैक्स संग्रह 11.66 फीसदी बढ़कर 3.85 लाख करोड़ रुपये हो गया. इसमें व्यक्तिगत आयकर, हिंदू अविभाजित परिवार (HUF), फर्म, व्यक्तियों के संघ (AOP), व्यक्तियों के समूह (BOI), स्थानीय निकाय और आर्टिफिशियल ज्यूरिडिकल पर्सन्स द्वारा चुकाए गए कर शामिल हैं. सकल गैर-कॉरपोरेट टैक्स संग्रह करीब 4.12 लाख करोड़ रुपये रहा. इससे संकेत मिलता है कि व्यक्तिगत आयकर संग्रह और टैक्स अनुपालन दोनों मजबूत बने हुए हैं.
सकल टैक्स कलेक्शन 7.74 लाख करोड़ रुपये के करीब
सरकार के मुताबिक, 13 जुलाई तक सकल प्रत्यक्ष कर संग्रह 16.11 फीसदी बढ़कर 7.74 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया. इसी अवधि में करदाताओं को 1.22 लाख करोड़ रुपये का रिफंड जारी किया गया, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 14.57 फीसदी अधिक है.
शेयर बाजार की तेजी से STT कलेक्शन में उछाल
सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) संग्रह में सबसे तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई. 13 जुलाई तक STT कलेक्शन 47.85 फीसदी बढ़कर 26,429 करोड़ रुपये हो गया. यह शेयर बाजार में बढ़ती ट्रेडिंग गतिविधियों और ऊंचे कारोबार मूल्य का संकेत है.
सरकार ने रखा है ₹26.97 लाख करोड़ का लक्ष्य
केंद्रीय बजट में सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए प्रत्यक्ष कर संग्रह का लक्ष्य 26.97 लाख करोड़ रुपये तय किया है, जो पिछले वित्त वर्ष के 23.40 लाख करोड़ रुपये के मुकाबले लगभग 15 फीसदी अधिक है. शुरुआती आंकड़े बताते हैं कि सरकार लक्ष्य की दिशा में मजबूत शुरुआत कर चुकी है.
विशेषज्ञों ने बताए मजबूत संकेत
डेलॉयट इंडिया के पार्टनर रोहिंटन सिधवा के मुताबिक, मौजूदा आंकड़े संकेत देते हैं कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक आर्थिक सुस्ती का भारतीय कंपनियों की आय पर बड़ा असर नहीं पड़ा है और कॉरपोरेट मुनाफा मजबूत बना हुआ है.
ईवाई इंडिया के टैक्स पार्टनर जयेश सांघवी का कहना है कि कॉरपोरेट टैक्स और अग्रिम कर भुगतान में मजबूत वृद्धि देखने को मिल रही है. साथ ही व्यक्तिगत आयकर संग्रह में भी मजबूती बनी हुई है, जो बेहतर टैक्स अनुपालन और अर्थव्यवस्था के तेजी से औपचारिक होने का संकेत देती है.
प्राइस वॉटरहाउस एंड कंपनी LLP के पार्टनर हितेश साहनी के अनुसार, 22 फीसदी से अधिक की कॉरपोरेट टैक्स वृद्धि कंपनियों की मजबूत लाभप्रदता और बेहतर अनुपालन को दर्शाती है. उन्होंने कहा कि अब तक का शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह बजट अनुमान का करीब 19.5 फीसदी हासिल कर चुका है, जबकि गैर-कॉरपोरेट टैक्स संग्रह अपने वार्षिक लक्ष्य का लगभग 27.6 फीसदी छू चुका है. इससे साफ है कि चालू वित्त वर्ष में प्रत्यक्ष कर संग्रह की रफ्तार फिलहाल मजबूत बनी हुई है.
CETA लागू होने के साथ ही भारत के अधिकांश निर्यात उत्पादों को ब्रिटेन में बिना कस्टम ड्यूटी के प्रवेश मिलेगा. टेक्सटाइल, रेडीमेड गारमेंट, लेदर, समुद्री उत्पाद, हैंडीक्राफ्ट और इंजीनियरिंग उत्पादों को इसका सबसे अधिक लाभ मिलने की उम्मीद है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत और ब्रिटेन के बीच हुआ व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (CETA) आज यानी 15 जुलाई 2026 से लागू हो गया है. इस ऐतिहासिक समझौते के तहत भारतीय उत्पादों को ब्रिटेन के बाजार में 99 फीसदी तक ड्यूटी-फ्री पहुंच मिलेगी, जबकि भारत में आयात होने वाली कई ब्रिटिश वस्तुओं, खासकर प्रीमियम कारों और शराब पर कस्टम ड्यूटी चरणबद्ध तरीके से कम होगी. सरकार का मानना है कि इससे द्विपक्षीय व्यापार, निवेश और रोजगार को नई रफ्तार मिलेगी.
भारतीय निर्यात को मिलेगा बड़ा फायदा
CETA लागू होने के साथ ही भारत के अधिकांश निर्यात उत्पादों को ब्रिटेन में बिना कस्टम ड्यूटी के प्रवेश मिलेगा. टेक्सटाइल, रेडीमेड गारमेंट, लेदर, फुटवियर, प्रोसेस्ड फूड, समुद्री उत्पाद, हैंडीक्राफ्ट और इंजीनियरिंग उत्पाद जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों को इसका सबसे अधिक लाभ मिलने की उम्मीद है. इससे भारतीय निर्यातकों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी और ब्रिटेन में उनकी बाजार हिस्सेदारी मजबूत होगी.
विदेशी कारों पर घटेगा आयात शुल्क
इस समझौते के तहत भारत ने पहली बार किसी मुक्त व्यापार समझौते में पूरी तरह निर्मित (CBU) विदेशी पैसेंजर कारों और ट्रकों पर आयात शुल्क में बड़ी कटौती पर सहमति दी है. ब्रिटेन से आयात होने वाली कारों पर 110 फीसदी कस्टम ड्यूटी को चरणबद्ध तरीके से घटाकर 10 फीसदी किया जाएगा. पेट्रोल और डीजल वाहनों पर यह राहत जल्द लागू होगी, जबकि इलेक्ट्रिक, हाइब्रिड और हाइड्रोजन वाहनों को यह छूट समझौते के छठे वर्ष से मिलेगी.
प्रीमियम विदेशी शराब होगी सस्ती
समझौते का असर प्रीमियम विदेशी शराब की कीमतों पर भी दिखेगा. स्कॉच व्हिस्की, जिन, रम, वोदका, बॉर्बन और टकीला जैसी शराब पर आयात शुल्क पहले वर्ष में 150 फीसदी से घटाकर 110 फीसदी किया जाएगा. अगले 10 वर्षों में यह शुल्क क्रमशः कम होकर 75 फीसदी तक आ जाएगा, जबकि स्कॉच व्हिस्की पर टैक्स 40 फीसदी तक लाया जाएगा. हालांकि, यह लाभ केवल निर्धारित न्यूनतम आयात मूल्य (Minimum Import Price) वाले उत्पादों को ही मिलेगा.
IT और सर्विस सेक्टर को भी बड़ी राहत
CETA के तहत भारतीय IT और सर्विस सेक्टर को भी महत्वपूर्ण लाभ मिलेगा. 'डबल कंट्रीब्यूशन कन्वेंशन' के तहत ब्रिटेन में अस्थायी तौर पर काम करने वाले भारतीय पेशेवरों और उनकी कंपनियों को पांच वर्षों तक सामाजिक सुरक्षा अंशदान (Social Security Contribution) से छूट मिलेगी. इससे TCS, Infosys, Wipro, HCLTech जैसी कंपनियों की लागत घटेगी और उनकी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी.
संवेदनशील क्षेत्रों को रखा गया सुरक्षित
समझौते में भारत ने सेब, अखरोट, गोल्ड बार और स्मार्टफोन जैसे संवेदनशील उत्पादों को टैरिफ रियायतों से बाहर रखा है, ताकि घरेलू उद्योगों पर प्रतिकूल असर न पड़े. साथ ही भारत ने दवाओं से जुड़े पेटेंट नियमों में बदलाव की ब्रिटेन की मांग स्वीकार नहीं की, जिससे जरूरत पड़ने पर सस्ती जेनेरिक दवाओं के उत्पादन का अधिकार सुरक्षित रहेगा.
व्यापार और निवेश को मिलेगी नई गति
विशेषज्ञों का मानना है कि CETA केवल टैरिफ घटाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, तकनीक, सेवाओं और रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगा. सरकार का लक्ष्य है कि इस समझौते के जरिए आने वाले वर्षों में भारत-ब्रिटेन द्विपक्षीय व्यापार में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हो और भारतीय कंपनियों को वैश्विक बाजारों में अधिक प्रतिस्पर्धी बनने का अवसर मिले.
आंकड़ों के अनुसार, निफ्टी प्राइवेट बैंक इंडेक्स अब तक करीब 17 फीसदी चढ़ चुका है, जो निफ्टी 50, निफ्टी बैंक और निफ्टी PSU बैंक इंडेक्स तीनों से बेहतर है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
वित्त वर्ष 2027 में बैंकिंग सेक्टर की तस्वीर बदलती नजर आ रही है. निजी बैंकों के शेयरों ने सरकारी बैंकों के मुकाबले शानदार प्रदर्शन करते हुए निवेशकों को बेहतर रिटर्न दिया है. निफ्टी प्राइवेट बैंक इंडेक्स अब तक करीब 17 फीसदी चढ़ चुका है, जो निफ्टी 50, निफ्टी बैंक और निफ्टी PSU बैंक इंडेक्स तीनों से बेहतर है. विशेषज्ञों का मानना है कि RBI के नीतिगत कदम, मजबूत फंडिंग, बेहतर एसेट क्वालिटी और नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) में सुधार की उम्मीद ने निजी बैंकिंग शेयरों में नई जान फूंक दी है.
निफ्टी प्राइवेट बैंक इंडेक्स ने सभी प्रमुख इंडेक्स को पछाड़ा
ऐस इक्विटी के आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2027 में अब तक निफ्टी प्राइवेट बैंक इंडेक्स में करीब 17 फीसदी की तेजी दर्ज की गई है. इसके मुकाबले निफ्टी 50 में 8.4 फीसदी, निफ्टी बैंक इंडेक्स में 15.6 फीसदी और निफ्टी PSU बैंक इंडेक्स में केवल 7.5 फीसदी की बढ़त देखने को मिली. इससे साफ है कि इस वित्त वर्ष में निजी बैंक निवेशकों की पहली पसंद बनकर उभरे हैं.
RBI के फैसलों से मिला बड़ा सहारा
विश्लेषकों के मुताबिक, RBI की ओर से FCNR(B) जमा और External Commercial Borrowing (ECB) से जुड़े राहत उपायों ने निजी बैंकों के लिए फंडिंग आसान बनाई है. इससे बैंकों पर जमा जुटाने का दबाव कम होगा और फंडिंग की लागत घटेगी. साथ ही बेहतर एसेट क्वालिटी और ट्रेजरी से होने वाली आय भी निजी बैंकों के प्रदर्शन को मजबूती दे रही है.
क्यों निजी बैंकों पर बुलिश हैं ब्रोकरेज?
कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज (KIE) का कहना है कि बड़े निजी बैंकों के लिए दो प्रमुख सकारात्मक कारक हैं. पहला, जमा जुटाने की प्रतिस्पर्धा कम होने से नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) पर दबाव घट सकता है. दूसरा, FCNR(B) जमा में बढ़ोतरी से पूरे बैंकिंग सिस्टम में लिक्विडिटी बढ़ेगी और फंडिंग लागत कम होगी. चूंकि निजी बैंकों की फंडिंग संरचना अधिक विविध है, इसलिए उन्हें इसका अपेक्षाकृत ज्यादा फायदा मिलने की उम्मीद है.
सरकारी बैंकों पर बढ़ रही फंडिंग लागत
विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी बैंक अब ऋण वृद्धि बनाए रखने के लिए अधिक ब्याज दर वाली सावधि जमा (Term Deposits) पर निर्भर हो रहे हैं. इससे उनकी फंडिंग लागत बढ़ सकती है और कम लागत वाली CASA जमा का फायदा धीरे-धीरे कम हो सकता है. यही वजह है कि फिलहाल निजी बैंक सरकारी बैंकों की तुलना में बेहतर स्थिति में दिखाई दे रहे हैं.
इन बैंकिंग शेयरों ने दिया सबसे ज्यादा रिटर्न
वित्त वर्ष 2027 में निजी क्षेत्र के बंधन बैंक, यस बैंक, IDFC First Bank, इंडसइंड बैंक और RBL बैंक के शेयरों में 50 फीसदी तक की तेजी देखने को मिली है. वहीं सरकारी बैंकों में बैंक ऑफ महाराष्ट्र, पंजाब एंड सिंध बैंक और यूको बैंक के शेयरों में अधिकतम 35 फीसदी तक की बढ़त दर्ज की गई.
FCNR(B) में बढ़ी विदेशी पूंजी की आवक
RBI ने 5 जून की मौद्रिक नीति समीक्षा में FCNR(B) जमा और पात्र ECB पर रियायती फॉरेक्स स्वैप सुविधा की घोषणा की थी. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसके बाद से बैंकिंग सिस्टम में करीब 8 अरब डॉलर की FCNR(B) जमा आ चुकी है. इनमें अकेले SBI ने 1.5 अरब डॉलर से अधिक जुटाए हैं, जबकि अधिकांश सरकारी बैंक इन जमाओं पर 6-6.5 फीसदी और छोटे निजी बैंक 7.5 फीसदी तक ब्याज दे रहे हैं.
विशेषज्ञों का मानना है कि वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में बैंकिंग सेक्टर के मार्जिन पर कुछ दबाव दिख सकता है, लेकिन निजी बैंक यह संकेत देंगे कि नेट इंटरेस्ट मार्जिन का सबसे कमजोर दौर अब पीछे छूट चुका है. दूसरी तिमाही से फंडिंग लागत में सुधार और RBI की नीतियों का असर निजी बैंकों के प्रदर्शन को और मजबूत कर सकता है. वहीं, सरकारी बैंकों के लिए बेहतर नतीजे वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में देखने को मिल सकते हैं.
BSE सेंसेक्स 561.46 अंक यानी 0.72 फीसदी गिरकर 77,054.94 पर बंद हुआ, जबकि NSE निफ्टी 50 इंडेक्स 158.95 अंक यानी 0.66 फीसदी टूटकर 24,052.05 के स्तर पर आ गया.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
मंगलवार को पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और रुपये में कमजोरी के कारण घरेलू शेयर बाजार दबाव में रहा. सेंसेक्स 561 अंक और निफ्टी 159 अंक की गिरावट के साथ बंद हुए, जबकि रुपया 22 मई के बाद पहली बार डॉलर के मुकाबले 96 के पार पहुंच गया. अब बुधवार के कारोबारी सत्र में निवेशकों की नजर वैश्विक संकेतों, कच्चे तेल की चाल, विदेशी निवेशकों (FII) की गतिविधियों, जून तिमाही के नतीजों और कई कंपनियों के बड़े कॉरपोरेट ऐलानों पर रहेगी.
कल कैसा था बाजार का हाल
कल यानी 14 जुलाई को बाजार में पूरे दिन बिकवाली का दबाव देखने को मिला. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स 561.46 अंक यानी 0.72 फीसदी गिरकर 77,054.94 पर बंद हुआ, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) निफ्टी 50 इंडेक्स 158.95 अंक यानी 0.66 फीसदी टूटकर 24,052.05 के स्तर पर आ गया. सेंसेक्स के 30 में से 24 शेयर लाल निशान में बंद हुए. HCL Tech, Bajaj Finserv, SBI, Mahindra & Mahindra, IndiGo, Larsen & Toubro, Kotak Mahindra Bank और ITC जैसे शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई. दूसरी ओर Bharti Airtel, Sun Pharma, TCS, Tata Steel और Adani Ports ने बाजार को कुछ सहारा दिया.
ब्रॉडर मार्केट भी दबाव में रहा. निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में भी गिरावट दर्ज की गई. सेक्टोरल इंडेक्स में रियल्टी, पीएसयू बैंक और ऑटो शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली देखने को मिली, जबकि फार्मा सेक्टर अपेक्षाकृत मजबूत रहा.
रुपया और कच्चा तेल बढ़ाएंगे बाजार की चिंता
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि, मंगलवार को भारतीय रुपया 54 पैसे टूटकर 96.22 प्रति डॉलर पर बंद हुआ. यह 22 मई के बाद पहली बार 96 के स्तर से नीचे फिसला है. वहीं ब्रेंट क्रूड की कीमतें 87 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी हुई हैं. ऊंचे कच्चे तेल के दाम भारत जैसे आयातक देश के लिए महंगाई, चालू खाते के घाटे (CAD) और कंपनियों की लागत बढ़ा सकते हैं. इसलिए आज निवेशकों की नजर तेल की कीमतों और डॉलर इंडेक्स पर भी रहेगी.
आज किन शेयरों पर रहेगी नजर?
विशेषज्ञों के अनुसार, आज के कारोबार में कई कंपनियों के बड़े कॉरपोरेट ऐलान शेयरों की चाल तय कर सकते हैं. Hero MotoCorp ने Ather Energy में ₹1,000 करोड़ तक अतिरिक्त निवेश को मंजूरी दी है. Biocon में Mylan ने ₹3,678 करोड़ की ब्लॉक डील के जरिए अपनी पूरी 5.64% हिस्सेदारी बेच दी है. Tata Power ने ₹1,500 करोड़ के NCD जारी किए हैं, जबकि Delhivery की सहायक कंपनी को RBI से NBFC-ND के लिए सैद्धांतिक मंजूरी मिली है.
इसके अलावा Belrise Industries के QIP, Kirloskar Brothers को मिले ₹149.59 करोड़ के ऑर्डर, Sigma Advanced Systems के ब्रिटिश कंपनी के अधिग्रहण, PDS की रणनीतिक साझेदारी और Easy Trip Planners के झारखंड सरकार के साथ हुए समझौते पर भी निवेशकों की नजर रहेगी.
तिमाही नतीजे भी तय करेंगे बाजार की दिशा
आज पहली तिमाही (Q1 FY27) के कई अहम नतीजे भी आने वाले हैं. HDFC Life Insurance, HDFC AMC, ICICI Lombard, ICICI Prudential Life Insurance, Union Bank of India, Angel One, Groww, HDB Financial Services, MRPL और Network18 जैसी कंपनियों के वित्तीय नतीजों पर बाजार की खास नजर रहेगी. इन कंपनियों के मुनाफे, मार्जिन और भविष्य के आउटलुक के आधार पर संबंधित शेयरों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है.
FII-DII और वैश्विक संकेत भी रहेंगे अहम
आज के कारोबार में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) और घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) की खरीद-बिक्री के आंकड़े भी निवेशकों की रणनीति तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे. इसके अलावा एशियाई बाजारों की शुरुआत, अमेरिकी बाजारों का रुख, डॉलर इंडेक्स और बॉन्ड यील्ड जैसे वैश्विक संकेत भी घरेलू बाजार की दिशा तय करेंगे.
कुल मिलाकर, मंगलवार की बड़ी गिरावट के बाद आज का कारोबारी सत्र काफी अहम माना जा रहा है. यदि वैश्विक संकेतों में सुधार होता है और कंपनियों के तिमाही नतीजे उम्मीद से बेहतर रहते हैं, तो बाजार में रिकवरी देखने को मिल सकती है. वहीं, यदि कच्चे तेल की कीमतों और भू-राजनीतिक तनाव में और बढ़ोतरी होती है, तो बाजार पर दबाव बना रह सकता है.
(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)
जून 2026 में देश की थोक महंगाई (Wholesale Price Index-WPI) बढ़कर 9.87 फीसदी हो गई. वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, मई में यह दर 9.68 फीसदी थी.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
देश में महंगाई का दबाव लगातार बढ़ता दिख रहा है. खुदरा महंगाई (CPI) के बाद अब जून 2026 में थोक महंगाई (WPI) भी बढ़कर 9.87 फीसदी पर पहुंच गई है, जो मई में 9.68 फीसदी थी. खाद्य वस्तुओं, खनिज तेल, बेसिक मेटल और रसायन उत्पादों की कीमतों में तेजी इसकी प्रमुख वजह रही. विशेषज्ञों का मानना है कि उत्पादन लागत में बढ़ोतरी का असर आने वाले महीनों में उपभोक्ताओं की जेब पर भी पड़ सकता है.
खुदरा महंगाई के बाद WPI में भी उछाल
थोक महंगाई के आंकड़े ऐसे समय आए हैं, जब एक दिन पहले जारी आंकड़ों में खुदरा महंगाई (CPI) भी बढ़कर 4.38 फीसदी हो गई थी. जून 2026 में देश की थोक महंगाई बढ़कर 9.87 फीसदी हो गई. वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, मई में यह दर 9.68 फीसदी थी. खाद्य वस्तुओं, मिनरल ऑयल, बेसिक मेटल और केमिकल उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी के चलते लगातार दूसरे महीने WPI महंगाई में तेजी दर्ज की गई है. वहीं, कंज्यूमर फूड प्राइस इंडेक्स (CFPI) के आधार पर खाद्य महंगाई 5.32 फीसदी दर्ज की गई, जो मई के 4.78 फीसदी से अधिक है. इससे साफ है कि खाने-पीने की वस्तुओं की कीमतों पर दबाव लगातार बना हुआ है.
खाद्य वस्तुओं और कच्चे माल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी
जून में प्राथमिक वस्तुओं (Primary Articles) की महंगाई 4.99 फीसदी से बढ़कर 7 फीसदी हो गई. खाद्य वस्तुओं की महंगाई भी 3.60 फीसदी से बढ़कर 5.49 फीसदी पर पहुंच गई, जबकि गैर-खाद्य वस्तुओं की महंगाई बढ़कर 11.07 फीसदी हो गई. WPI फूड इंडेक्स भी 4.49 फीसदी से बढ़कर 6.14 फीसदी दर्ज किया गया, जो कृषि और खाद्य उत्पादों की बढ़ती लागत को दर्शाता है.
ईंधन महंगा, बिजली में राहत
ईंधन एवं बिजली श्रेणी की महंगाई जून में 27.41 फीसदी रही. हालांकि यह मई के 30.33 फीसदी से कुछ कम है, लेकिन अब भी काफी ऊंचे स्तर पर बनी हुई है. मिनरल ऑयल की महंगाई 46.48 फीसदी रही, जबकि कच्चे पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस की महंगाई घटकर 34.75 फीसदी रह गई. दूसरी ओर, बिजली की कीमतों में 0.76 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई.
मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में लागत का दबाव बरकरार
जून में विनिर्मित उत्पादों (Manufactured Products) की महंगाई 7.48 फीसदी पर स्थिर रही. हालांकि, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के भीतर खाद्य उत्पादों और टेक्सटाइल की कीमतों में तेजी देखी गई. बेसिक मेटल और केमिकल सेक्टर में भी लागत का दबाव बना रहा.
विशेषज्ञों के अनुसार, खाद्य वस्तुओं और प्राथमिक उत्पादों की कीमतों में तेजी के कारण थोक महंगाई बढ़ी है. उनका कहना है कि यदि कच्चे माल और कृषि उत्पादों की कीमतों में जल्द राहत नहीं मिलती, तो इसका असर खुदरा महंगाई और कंपनियों के मुनाफे दोनों पर पड़ सकता है. जून में WPI उम्मीद से अधिक बढ़ी है. उनके अनुसार, जुलाई में भी खाद्य महंगाई का दबाव बना रह सकता है, हालांकि वैश्विक कमोडिटी कीमतों में कुछ नरमी राहत दे सकती है. उन्होंने जुलाई में WPI महंगाई करीब 9 फीसदी रहने का अनुमान जताया है.
SBI Funds Management ने IPO का प्राइस बैंड ₹545 से ₹574 प्रति शेयर तय किया है. यह पूरी तरह ऑफर फॉर सेल (OFS) आधारित इश्यू है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
देश की सबसे बड़ी एसेट मैनेजमेंट कंपनी (AMC) SBI Funds Management का ₹9,795 करोड़ का IPO मंगलवार से निवेशकों के लिए खुल गया है. इश्यू खुलने से पहले ही कंपनी ने एंकर निवेशकों से ₹2,663 करोड़ जुटाकर मजबूत शुरुआत की है. वहीं, ग्रे मार्केट में शेयर करीब 16-17 फीसदी प्रीमियम पर कारोबार कर रहा है, जिससे शानदार लिस्टिंग की उम्मीदें बढ़ गई हैं. ब्लैकरॉक, गोल्डमैन सैक्स, LIC और HDFC Mutual Fund जैसे दिग्गज संस्थागत निवेशकों की भागीदारी ने भी इस IPO को बाजार का सबसे चर्चित इश्यू बना दिया है. बता दें, कंपनी का यह इश्यू 16 जुलाई तक सब्सक्रिप्शन के लिए उपलब्ध रहेगा.
GMP क्या बता रहा है?
IPO खुलने के बाद भी SBI Funds Management के शेयर ग्रे मार्केट में मजबूत प्रीमियम पर कारोबार कर रहे हैं. सुबह करीब 9:30 बजे कंपनी का ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) ₹93 दर्ज किया गया, जिससे शेयर का संभावित लिस्टिंग भाव करीब ₹667 आंका जा रहा है. यह इश्यू प्राइस ₹574 के मुकाबले लगभग 16.20 फीसदी अधिक है. मौजूदा GMP के आधार पर एक लॉट पर निवेशकों को करीब ₹2,400 का संभावित लिस्टिंग गेन मिल सकता है.
ब्रोकरेज फर्मों ने क्या दी सलाह?
लगभग सभी प्रमुख ब्रोकरेज हाउस इस IPO को लेकर सकारात्मक नजर आ रहे हैं.
1. आनंद राठी ने SBI की मजबूत ब्रांड वैल्यू, Amundi की साझेदारी और व्यापक डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क के आधार पर 'Subscribe' की सलाह दी है.
2. अरिहंत कैपिटल ने 12.51 लाख करोड़ रुपये के AUM और मजबूत मुनाफे को देखते हुए लंबी अवधि के लिए निवेश की सिफारिश की है.
एंकर निवेशकों का जबरदस्त भरोसा
कंपनी ने IPO खुलने से पहले 129 फंड्स को 4.64 करोड़ इक्विटी शेयर ₹574 प्रति शेयर के हिसाब से आवंटित किए. एंकर बुक में BlackRock, Goldman Sachs Asset Management, Fidelity, GIC, Abu Dhabi Investment Authority, Norges Bank और Capital World Investors जैसे वैश्विक निवेशकों के अलावा LIC, HDFC Mutual Fund, ICICI Prudential Mutual Fund, Nippon India Mutual Fund और HDFC Life जैसे घरेलू संस्थानों ने भी निवेश किया.
सबसे बड़े आवंटन में HDFC Mutual Fund और ICICI Prudential Mutual Fund को ₹200-200 करोड़ के शेयर मिले, जबकि GIC, Capital World Investors और LIC को ₹180-180 करोड़ का आवंटन किया गया.
प्राइस बैंड और कंपनी की वैल्यूएशन
SBI Funds Management ने IPO का प्राइस बैंड ₹545 से ₹574 प्रति शेयर तय किया है. यह पूरी तरह ऑफर फॉर सेल (OFS) आधारित इश्यू है, जिसके जरिए भारतीय स्टेट बैंक (SBI) और Amundi India Holding अपनी हिस्सेदारी बेच रहे हैं.
अपर प्राइस बैंड के आधार पर कंपनी का वैल्यूएशन करीब ₹1.2 लाख करोड़ बैठता है. लिस्टिंग के बाद SBI की हिस्सेदारी 61.76 फीसदी से घटकर 55.46 फीसदी रह जाएगी, जबकि Amundi की हिस्सेदारी 32.56 फीसदी होगी.
देश की सबसे बड़ी AMC
31 मार्च 2026 तक SBI Funds Management का क्वार्टरली एवरेज एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (QAAUM) ₹12.51 लाख करोड़ था, जो इसे 15.3 फीसदी बाजार हिस्सेदारी के साथ भारत की सबसे बड़ी एसेट मैनेजमेंट कंपनी बनाता है.
1987 में स्थापित यह कंपनी देश की सबसे पुरानी AMC में भी शामिल है. SBI के 23,000 से अधिक शाखाओं के नेटवर्क, 9.6 करोड़ से ज्यादा YONO यूजर्स और वैश्विक पार्टनर Amundi के सहयोग ने कंपनी की विकास यात्रा को मजबूत बनाया है. मार्च 2023 से दिसंबर 2025 के बीच कंपनी के रिटेल इक्विटी एसेट्स में 36.5 फीसदी की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई, जबकि SIP के जरिए आने वाला मासिक निवेश लगभग दोगुना होकर ₹3,960 करोड़ तक पहुंच गया.
तमिलनाडु सरकार ने बिजली क्षेत्र में बड़े सुधार की दिशा में कदम बढ़ाते हुए ₹15,312 करोड़ के निवेश का रोडमैप तैयार किया है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
तमिलनाडु सरकार ने राज्य की बिजली व्यवस्था को अधिक मजबूत, भरोसेमंद और भविष्य के लिए तैयार बनाने के उद्देश्य से ₹15,312 करोड़ के बड़े निवेश की घोषणा की है. इस योजना के तहत बिजली ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क को आधुनिक बनाया जाएगा, नए सबस्टेशन स्थापित होंगे और ग्रीन एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर का तेजी से विस्तार किया जाएगा. सरकार का दावा है कि इससे बिजली आपूर्ति बेहतर होगी, लागत घटेगी और ऊर्जा क्षेत्र को दीर्घकालिक मजबूती मिलेगी.
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, तमिलनाडु सरकार के अतिरिक्त मुख्य सचिव और TNPDCL के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक जे. राधाकृष्णन ने कहा कि सरकार का लक्ष्य बिजली आपूर्ति को अधिक विश्वसनीय बनाना, वितरण प्रणाली को आधुनिक करना, लागत घटाना और नवीकरणीय ऊर्जा के इस्तेमाल को तेज करना है.
231 नए सबस्टेशन, पुराने नेटवर्क का होगा आधुनिकीकरण
सरकार की योजना के तहत 121 निर्माणाधीन सबस्टेशन पूरे किए जाएंगे, जबकि 231 नए सबस्टेशन स्थापित किए जाएंगे. इसके अलावा ट्रांसफॉर्मर, ट्रांसमिशन लाइन और वितरण नेटवर्क का बड़े पैमाने पर उन्नयन किया जाएगा. पुराने बिजली ढांचे के आधुनिकीकरण पर ₹8,318 करोड़ खर्च किए जाएंगे, जिससे ग्रिड की क्षमता और विश्वसनीयता बढ़ेगी.
बैटरी स्टोरेज और स्मार्ट ग्रिड पर रहेगा फोकस
तमिलनाडु सरकार बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS), पंप्ड स्टोरेज प्रोजेक्ट (PSP), स्मार्ट ग्रिड और डिजिटल तकनीकों के विकास पर भी तेजी से काम करेगी. इस दिशा में रिसर्च और नई तकनीकों के विकास के लिए आईआईटी मद्रास के साथ समझौता भी किया गया है.
बिजली खरीद की नई रणनीति से होगी बचत
सरकार बिजली खरीद की रणनीति में भी बदलाव कर रही है. अब महंगी शॉर्ट-टर्म खरीद और बिजली एक्सचेंज पर निर्भरता कम की जाएगी. इसकी जगह लंबी अवधि के बिजली खरीद समझौतों, राउंड-द-क्लॉक रिन्यूएबल पावर, फर्म एंड डिस्पैचेबल रिन्यूएबल एनर्जी (FDRE) और स्टोरेज आधारित बिजली को प्राथमिकता दी जाएगी.
सरकार का अनुमान है कि 8.91 रुपये प्रति यूनिट की औसत लागत वाली बाजार से खरीदी जाने वाली बिजली के बजाय 6.63 रुपये प्रति यूनिट की दीर्घकालिक खरीद से गर्मियों के दौरान हर महीने करीब ₹215 करोड़ की बचत हो सकती है.
ग्रीन एनर्जी हब बनने की तैयारी
सरकार के मुताबिक, नई ग्रीन पावर कंपनी TNGECL अगले पांच वर्षों में राज्य में नवीकरणीय ऊर्जा, बैटरी स्टोरेज, पंप्ड स्टोरेज, ग्रीन हाइड्रोजन, रिन्यूएबल एनर्जी पार्क और ग्रीन एनर्जी जोन विकसित करने का प्रमुख माध्यम बनेगी. इसके साथ ही निजी निवेश, नई तकनीकों और उद्योगों के साथ साझेदारी को भी बढ़ावा दिया जाएगा.
वाणिज्य मंत्रालय के जारी आंकड़ों के मुताबिक, जून में भारत का व्यापार घाटा बढ़कर 30.43 अरब डॉलर हो गया, जो मई के 28.21 अरब डॉलर से अधिक है. एक साल पहले जून 2025 में यह आंकड़ा 19.10 अरब डॉलर था.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
जून 2026 में भारत का व्यापार घाटा (Trade Deficit) बढ़कर 30.43 अरब डॉलर पर पहुंच गया, जो पिछले पांच महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है. कच्चे तेल, इलेक्ट्रॉनिक्स और सोने के आयात में तेज बढ़ोतरी के चलते आयात 31% उछल गया. हालांकि, इंजीनियरिंग और इलेक्ट्रॉनिक सामान की मजबूत मांग के दम पर निर्यात में भी वृद्धि दर्ज की गई. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहीं तो चालू खाते के घाटे (CAD) पर दबाव बढ़ सकता है.
वाणिज्य मंत्रालय के जारी आंकड़ों के मुताबिक, जून में भारत का व्यापार घाटा बढ़कर 30.43 अरब डॉलर हो गया, जो मई के 28.21 अरब डॉलर से अधिक है. एक साल पहले जून 2025 में यह आंकड़ा 19.10 अरब डॉलर था. इस दौरान वस्तु आयात (Merchandise Imports) 31% बढ़कर 70.84 अरब डॉलर पहुंच गया, जबकि निर्यात 16% बढ़कर 40.41 अरब डॉलर रहा.
कच्चा तेल, इलेक्ट्रॉनिक्स और सोने के आयात ने बढ़ाया दबाव
जून में भारत का कच्चे तेल का आयात 40% बढ़कर 19.33 अरब डॉलर हो गया. वहीं इलेक्ट्रॉनिक सामान का आयात 59% बढ़कर 13.36 अरब डॉलर और सोने का आयात 7% बढ़कर 1.97 अरब डॉलर पर पहुंच गया. वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल के अनुसार, इन वस्तुओं की ऊंची कीमतें और बढ़ती मांग आयात बढ़ने की प्रमुख वजह रहीं.
सरकार द्वारा कच्चे कपास के आयात पर शुल्क में छूट दिए जाने के बाद इसका आयात लगभग तीन गुना बढ़ गया. वहीं उर्वरक (Fertilizer) का आयात भी जून में तीन गुना बढ़कर 2.30 अरब डॉलर हो गया.
निर्यात में भी रही मजबूत बढ़ोतरी
आयात में तेज बढ़ोतरी के बावजूद भारत का निर्यात मजबूत बना रहा. जून में इंजीनियरिंग सामान का निर्यात 21% बढ़कर 11.48 अरब डॉलर हो गया. इलेक्ट्रॉनिक सामान का निर्यात 19% बढ़कर 4.93 अरब डॉलर और पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात 9% बढ़कर 4.87 अरब डॉलर रहा.
पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद इस क्षेत्र में भारत का निर्यात 7% बढ़कर 5 अरब डॉलर पहुंच गया. अमेरिका भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाजार बना रहा, हालांकि वहां निर्यात मामूली घटकर 8.17 अरब डॉलर रह गया.
सेवा क्षेत्र से मिली राहत
वाणिज्य मंत्रालय के शुरुआती अनुमान के अनुसार, जून में सेवा निर्यात 3% बढ़कर 33.03 अरब डॉलर रहा, जबकि सेवा आयात 13% बढ़कर 17.92 अरब डॉलर पहुंच गया. इससे सेवा क्षेत्र में भारत को 15.11 अरब डॉलर का व्यापार अधिशेष (Trade Surplus) मिला. अंतिम आंकड़े भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) इस महीने के अंत में जारी करेगा.
चीन से आयात में बड़ा उछाल
जून में चीन से भारत का आयात 40% बढ़कर 13.34 अरब डॉलर हो गया, जिससे वह भारत का सबसे बड़ा आयात स्रोत बना रहा. वहीं चीन को भारत का निर्यात भी करीब 32% बढ़कर 1.81 अरब डॉलर पहुंच गया.
पहली तिमाही में भी बढ़ा व्यापार घाटा
वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में भारत का कुल वस्तु निर्यात 16% बढ़कर 129.32 अरब डॉलर रहा, जबकि आयात 20% बढ़कर 216.18 अरब डॉलर पहुंच गया. इस दौरान देश का व्यापार घाटा 86.86 अरब डॉलर दर्ज किया गया.
विशेषज्ञों का मानना है कि चालू वित्त वर्ष में भारत का चालू खाते का घाटा (Current Account Deficit) जीडीपी के कम से कम 1% तक पहुंच सकता है. जून में व्यापार घाटा बढ़ने की सबसे बड़ी वजह कच्चे तेल और इलेक्ट्रॉनिक्स का बढ़ा हुआ आयात है. उनका कहना है कि फिलहाल निर्यात मजबूत बना हुआ है, लेकिन अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें ऊंची रहती हैं तो चालू खाते के घाटे पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है. हालांकि, RBI के विदेशी मुद्रा प्रबंधन उपाय इस जोखिम को कुछ हद तक कम करने में मदद कर सकते हैं.
इस सौदे के बाद कंपनी की कुल नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता 9.3 गीगावाट तक पहुंच जाएगी और वह देश की सबसे बड़ी रिन्यूएबल एनर्जी कंपनियों में शामिल हो जाएगी.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
आदित्य बिड़ला ग्रुप ने रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में अब तक की सबसे बड़ी डील्स में से एक पर मुहर लगा दी है. दरअसल, ग्रुप की कंपनी Aditya Birla Renewables ने 17,200 करोड़ रुपये (करीब 1.8 अरब डॉलर) में Sprng Energy के अधिग्रहण का ऐलान किया है. इस सौदे के बाद कंपनी की कुल नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता 9.3 गीगावाट तक पहुंच जाएगी और वह देश की सबसे बड़ी रिन्यूएबल एनर्जी कंपनियों में शामिल हो जाएगी. जानकारों के अनुसार, इस डील से इस सेक्टर में पहले से मजबूत मौजूदगी रखने वाले अडानी ग्रुप और रिलायंस इंडस्ट्रीज को भी कड़ी चुनौती मिल सकती है.
9.3 गीगावाट तक पहुंच जाएगी क्षमता
इस अधिग्रहण के बाद Aditya Birla Renewables की कुल रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता बढ़कर करीब 9.3 गीगावाट-पीक (GWp) हो जाएगी. इसमें 3.3 गीगावाट की चालू परियोजनाएं और 1.7 गीगावाट निर्माणाधीन परियोजनाएं शामिल हैं. कंपनी का लक्ष्य आने वाले वर्षों में अपनी क्षमता बढ़ाकर 20 गीगावाट-पीक से अधिक करना है.
कर्ज और इक्विटी के मिश्रण से होगी फंडिंग
कंपनी के मुताबिक, इस अधिग्रहण के लिए फंडिंग Grasim Industries और BlackRock समर्थित Global Infrastructure Partners द्वारा प्रबंधित फंड्स के जरिए कर्ज और इक्विटी के मिश्रण से की जाएगी. Shell Overseas को मिलने वाली अंतिम राशि का निर्धारण कर्ज, नकदी और अन्य वित्तीय समायोजनों के बाद किया जाएगा.
साल के अंत तक पूरी हो सकती है डील
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह अधिग्रहण आवश्यक नियामकीय मंजूरियों और अन्य औपचारिकताओं के अधीन है. कंपनी को उम्मीद है कि सभी मंजूरियां मिलने के बाद यह सौदा 2026 के अंत तक पूरा हो जाएगा.
क्या होगा इस डील का फायदा?
इस अधिग्रहण के जरिए Aditya Birla Renewables के कमर्शियल एवं इंडस्ट्रियल (C&I) कारोबार को Sprng Energy के यूटिलिटी-स्केल सोलर, विंड और हाइब्रिड प्रोजेक्ट्स के साथ जोड़ा जाएगा. इससे परियोजनाओं के विकास, इंजीनियरिंग, खरीद, निर्माण और एसेट मैनेजमेंट में बेहतर तालमेल बनेगा और परिचालन क्षमता बढ़ेगी.
आदित्य बिड़ला समूह के चेयरमैन कुमार मंगलम बिड़ला ने कहा कि समूह ने हमेशा दीर्घकालिक दृष्टिकोण के साथ वैश्विक स्तर के कारोबार खड़े किए हैं और भारत के ऊर्जा परिवर्तन (Energy Transition) को भी उसी सोच के साथ देखता है. उनके मुताबिक यह अधिग्रहण देश के स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्य को गति देने के साथ आर्थिक विकास को भी मजबूती देगा.
ग्रुप के निदेशक आर्यमान विक्रम बिड़ला ने इसे कंपनी के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया. वहीं ABREL के बिजनेस हेड जयंत दुआ ने कहा कि दोनों कंपनियों के एकीकरण से परिचालन दक्षता बढ़ेगी और भविष्य की परियोजनाओं के निष्पादन में तेजी आएगी.
जनवरी 2025 से लागू नई CPI श्रृंखला के तहत यह पहला मौका है, जब खुदरा महंगाई RBI के 4% के लक्ष्य से ऊपर पहुंची है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
जून में खुदरा महंगाई (Retail Inflation) बढ़कर 4.38% पर पहुंच गई है, जो भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 4% के लक्ष्य से ऊपर है. नई उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) श्रृंखला लागू होने के बाद यह पहली बार है जब महंगाई केंद्रीय बैंक के लक्ष्य से आगे निकली है. ईंधन की बढ़ती कीमतों, परिवहन लागत और खाद्य महंगाई में तेजी इसकी प्रमुख वजह रही. हालांकि, अर्थशास्त्रियों का मानना है कि अगस्त की मौद्रिक नीति बैठक में RBI फिलहाल ब्याज दरों में बढ़ोतरी नहीं करेगा.
इतनी बढ़ गई महंगाई
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) के जारी आंकड़ों के मुताबिक, मई में 3.93% रही खुदरा महंगाई जून में बढ़कर 4.38% हो गई. जनवरी 2025 से लागू नई CPI श्रृंखला के तहत यह पहला मौका है, जब खुदरा महंगाई RBI के 4% के लक्ष्य से ऊपर पहुंची है. बढ़ती ईंधन कीमतों के कारण परिवहन, खाद्य और रेस्तरां सेवाओं की लागत में इजाफा हुआ, जिससे महंगाई दर में तेजी आई.
खाद्य महंगाई ने बढ़ाया दबाव
उपभोक्ता खाद्य मूल्य सूचकांक (CFPI) के आधार पर जून में खाद्य महंगाई बढ़कर 5.32% हो गई, जो मई में 4.78% थी. अदरक की कीमतों में 50.41% और टमाटर में 31.92% की बढ़ोतरी ने खाद्य महंगाई को ऊपर पहुंचाया. खाद्य एवं पेय पदार्थों की महंगाई भी 5.05% रही, जो नई CPI श्रृंखला में पहली बार 5% के पार पहुंची है.
ईंधन महंगा होने से बढ़ी परिवहन और सेवाओं की लागत
मई के मध्य में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हुई बढ़ोतरी का पूरा असर जून के आंकड़ों में देखने को मिला. परिवहन क्षेत्र में महंगाई मई के 1.75% से बढ़कर जून में 4.31% हो गई. वहीं रेस्तरां और होटल सेवाओं में महंगाई 6.91% तथा पान एवं तंबाकू श्रेणी में 6.89% दर्ज की गई.
ग्रामीण इलाकों में महंगाई ज्यादा
जून में ग्रामीण क्षेत्रों की खुदरा महंगाई 4.74% रही, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 3.92% दर्ज की गई. इससे साफ है कि महंगाई का असर गांवों में शहरों की तुलना में अधिक देखने को मिला.
क्या बढ़ेगी ब्याज दर?
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि 5 अगस्त को होने वाली RBI की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक में रेपो रेट में बढ़ोतरी की संभावना फिलहाल कम है. इक्रा की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर का कहना है कि अप्रैल के मुकाबले वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से दरें बढ़ाने का दबाव कम हुआ है. हालांकि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और मानसून की स्थिति पर RBI की नजर बनी रहेगी.
किन राज्यों में सबसे ज्यादा महंगाई?
राज्यों की बात करें तो जून में सबसे अधिक खुदरा महंगाई तेलंगाना में 6.36% दर्ज की गई. इसके बाद आंध्र प्रदेश (5.39%), तमिलनाडु (5.24%), ओडिशा (5.15%) और मध्य प्रदेश (5.09%) का स्थान रहा. विशेषज्ञों के मुताबिक, इन राज्यों में खाद्य वस्तुओं की ऊंची कीमतें महंगाई बढ़ने की प्रमुख वजह रहीं.
आगे क्या है अनुमान?
DBS Bank, ICRA, Crisil और बैंक ऑफ बड़ौदा समेत कई संस्थानों का मानना है कि आने वाले महीनों में महंगाई पर दबाव बना रह सकता है. क्रिसिल ने पूरे वित्त वर्ष 2026-27 के लिए औसत खुदरा महंगाई 5.1% रहने का अनुमान जताया है, जबकि इक्रा का अनुमान है कि जुलाई में खुदरा महंगाई बढ़कर करीब 4.6% तक पहुंच सकती है. पश्चिम एशिया में जारी तनाव, कच्चे तेल की कीमतें और खाद्य वस्तुओं के दाम आगे महंगाई की दिशा तय करेंगे.