भारतीय इकॉनमी पर पड़ने वाले प्रभाव और उससे जुड़ा जो डर भारत में फैल रहा है वह मुझे बेबुनियाद लगता है. SVB में जिन स्टार्टअप का भारतीय फंड जमा था वह पूरी तरह सुरक्षित है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
Srinath Sridharan, Independent markets commentator. Media columnist. Board member. Corporate & Startup Advisor / Mentor. 
US के 16वें सबसे बड़े बैंक यानी सिलिकॉन वैली बैंक (SVB) के गिरने से भारतीय इकॉनमी पर पड़ने वाले प्रभाव और उससे जुड़ा जो डर भारत में फैल रहा है वह मुझे बेबुनियाद लगता है. भारतीय स्टार्टअप जिनका फंड SVB में था, पूरी तरह सुरक्षित हैं. भारतीय बैंकिंग सेक्टर भी इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ा है. जिनकी इन्वेस्टमेंट से भारतीय स्टार्ट-अप्स को आकार मिला है उन भारतीय प्राइवेट इन्वेस्टर्स के लिए यह एक सीख है कि ज्यादा ब्याज के लालच में उन्हें अपना सारा पैसा एक ही इकाई में जमा नहीं करना चाहिए और अपनी इन्वेस्टमेंट में अच्छी तरह से विविधता बनाकर रखनी चाहिए.
भारतीय फाइनेंशियल संस्थान
भारतीय फाइनेंशियल संस्थानों के लिए सबक ये है कि, उन्हें अपने रिस्क मैनेजमेंट फ्रेमवर्क में सुधार करें और एसेट लायबिलिटी मैनेजमेंट (ALM) की रियल टाइम में जांच करते रहें. ब्याज दर में होने वाले उतार-चढ़ाव के साथ, ALM को पहले से ज्यादा मजबूत बनाने की आवश्यकता होती है. RBI (भारतीय रिजर्व बैंक) के सावधानी और दखल देने वाले नियम और रेगुलेशंस यहीं काम में आते हैं.
US के बैंक हो गए फेल
SVB पिछले चालीस सालों से बिजनेस में था और टेक्नोलॉजी फर्मों के साथ-साथ वेंचर कैपिटल इंडस्ट्री के लिए भी पहली पसंद का बैंक था. सिलिकन वैली के सबसे बड़े डिपॉजिट बैंक SVB के पास गिरने से ठीक पहले 209 बिलियन डॉलर्स की संपत्ति और 175 बिलियन डॉलर्स की जमा राशि थी. अमेरिकी इतिहास में यह दूसरी सबसे बड़ी बैंकिंग असफलता है और 2008 के ग्लोबल फाइनेंशियल संकट (GFC) के बाद से यह अमेरिकी बैंकिंग सिस्टम को पहला झटका है. अमेरिका में सिस्टमैटिकली इम्पोर्टेन्ट फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन (SIFI) के रूप में रैंक करने के लिए SVB पूरी तरह से बड़ा बैंक नहीं था. इंडिया बैंक पर नजर रखने वालों के लिए बता दूं कि, बैंकिंग के नजरिए से केवल स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI), HDFC बैंक और ICICI बैंक ही SIFI टैग में आ सकते हैं.
SVB के पास US ट्रेजरी और सरकार द्वारा समर्थित मॉर्गेज सिक्योरिटीज जैसे शानदार एसेट्स हैं, जिन्हें सुरक्षित दांव कहा जा सकता है. लेकिन जब US फेडरल ने ब्याज दरों में आक्रामक रूप से वृद्धि की, तो SVB होल्डिंग्स का मूल्य काफी कम हो गया था.
अमेरिका से पैदा हुए 2008 के वित्तीय संकट के बाद, अमेरिका में ब्याज दरें रुक गयी हैं. इस फैसले की वदौलत लोन सस्ते हुए और प्राइवेट इन्वेस्टमेंट कम्युनिटी ने स्टार्ट-अप्स में ज्यादा पैसे लगाए. बदले में इनमें से कई स्टार्टअप्स ने फ्लश ट्रेजरी पॉकेट्स के साथ SVB जैसे बैंकों में अपने पैसे जमा करवाए. लेकिन फिर मार्च 2022 में जो ब्याज दरें 0.25-0.50% के रेट पर स्थिर थीं वह बढ़कर 4.5-4.75% हो गईं. हाल ही में US फेडरल के चेयरमैन ने भी इशारा किया था कि ब्याज दरें 5.75% तक जा सकती हैं. इन बढ़ती ब्याज दरों ने बॉन्ड पर रिटर्न को कम कर दिया, और स्टार्टअप की फंडिंग साइकल को भी कम कर दिया. SVB अपने रिस्क मैनेजमेंट में असफल रहा - उन्होंने इतनी तेजी से काम नहीं किया कि बढ़ती ब्याज दर का रिस्क उठाया जा सके., SVB अपने खुद के कैश भंडार का उपयोग करके जितनी तेजी से भुगतान कर सकता था, उससे ज्यादा तेजी से SVB के जमाकर्ता अपने जमा पैसों को निकाल रहे थे. अपनी जिम्मेदारी को पूरा करने के लिए बैंक ने 1.8 बिलियन डॉलर का नुक्सान उठाते हुए अपने 21 बिलियन डॉलर की कीमत वाले अपने सिक्योरिटीज पोर्टफोलियो को बेच दिया. SVB द्वारा लिए गए इस फैसले की वजह से इतनी ही कीमत की कैपिटल इकट्ठा करने के लिए एक मांग शुरू हुई जिससे बाजार में घबराहट पैदा हो गयी और परेशान कस्टमर्स द्वारा अपनी जमा राशि को निकालने में और तेजी आई,
बैंकों का बिजनेस
बैंक में जमा पैसे निकालने की ऐसी भगदड़ किसी भी मार्केट में कभी भी हो सकती है. डिजिटल और सोशल मीडिया के इस जमाने में अफवाहों और कानाफूसी से बहुत ध्यान से निपटना चाहिए.
एक बैंक अपने ग्राहकों से जमा (लायबिलिटी) स्वीकार करता है और अन्य ग्राहकों को लोन (एसेट्स) देने के लिए जमा राशि का इस्तेमाल करता है. किसी भी जमा राशि का सरप्लस कहीं और इन्वेस्ट किया जाता है. किसी भी बैंक के सेफ में निवेश की न्यूनतम कानूनी मात्रा को तय करने के लिए बैंक के रेगुलेटर्स के पास नियम होते हैं. बैंकिंग का यह बिजनेस इस आधार पर काम करता है, कि सभी जमाकर्ता एक ही समय में अपनी जमा राशि वापस नहीं लेंगे. SVB के साथ जो हुआ वह क्लासिक बैंक रन का एक शानदार मामला है, जहां बहुत से जमाकर्ता एक ही समय में बैंक से अपना पैसा निकालते हैं. ऐसे मामले में बिना किसी गवर्नेंस समस्या वाला एक सही बैंक भी कुछ ही दिनों में दिवालिया हो सकता है. SVB की यह असफलता गवर्नेंस की असफलता नहीं थी. खराब ALM की वजह से SVB का दिवाला हो गया इसके पीछे कोई समस्या वजह नहीं थी.
1 ट्रिलियन डॉलर्स से अधिक की बैंक जमा राशि बीमाकृत नहीं है और यह अमेरिकी सरकार के सामने इस वक्त मौजूद एक बड़ा जोखिम है. फेडरल डिपॉजिट बीमा निगम द्वारा केवल 250,000 डॉलर्स तक की जमा राशि का ही बीमा किया जाता है. अगर हालत ऐसे ही रहे तो अमेरिकी बैंकिंग प्रणाली भविष्य में ऐसी बैंक-रन की चुनौतियों का सामना कैसे करेगी?
भारत पर नहीं पड़ा है कोई प्रभाव?
US फेडरल ने SVB संकट को बहुत जल्दी सुलझा दिया जिससे जमाकर्ताओं के पैसे बचे हैं. इसमें SVB के साथ भारतीय या भारतीय मूल की SaaS (सॉफ्टवेयर एज अ सर्विस) संस्थाओं के 600 गिने हुए फंडों में से लगभग 2.5 बिलियन डॉलर्स शामिल हैं, जबकि कुछ भारतीय स्टार्टअप्स के फंड SVB में बंधे हुए हैं. ये बातें चिंता का विषय नहीं होनी चाहिए.
एक, वे अपने धन का उपयोग कर सकते हैं क्योंकि US फेडरल सुनिश्चित करेगा कि बैंकिंग चलती रहे. दूसरा, SVB की ट्रेजरी इन्वेस्टमेंट्स में भारतीय इकाइयों का हिस्सा उनकी अपनी लिक्विडिटी इन्वेस्टमेंट्स से बहुत कम है. तीसरा, इन संस्थाओं के फंड पर अब सख्त और बेहतर रिस्क मैनेजमेंट सुनिश्चित करने के लिए उनके बोर्ड द्वारा पूछताछ की जाएगी. चौथा, एक्सिस बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक, आईसीआईसीआई बैंक सहित अन्य भारतीय बैंकों ने GIFT सिटी में अपनी शाखाओं का उपयोग करते हुए इन स्टार्टअप्स के SVB खातों को अपनी शाखा में ट्रान्सफर करने के लिए प्रोडक्शन-माइग्रेशन ऑपरेशन की शुरुआत की है.
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भारत ने FY26 में IPO की संख्या के मामले में वैश्विक स्तर पर अपनी शीर्ष स्थिति बरकरार रखी. वहीं, फंड जुटाने के मामले में भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा बाजार रहा.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत ने वित्त वर्ष 2025-26 में IPO के मामले में एक बार फिर दुनिया में अपनी बादशाहत कायम रखी है. भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) की FY26 की वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत IPO की संख्या के मामले में दुनिया का सबसे बड़ा बाजार रहा. हालांकि, जुटाई गई रकम के लिहाज से भारत तीसरे स्थान पर रहा. SEBI के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में देश के प्राइमरी मार्केट से कुल 13.6 लाख करोड़ रुपये की पूंजी जुटाई गई. यह पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 4.4 फीसदी कम है. हालांकि, IPO, फॉलो-ऑन पब्लिक ऑफर (FPO) और राइट्स इश्यू के जरिए पब्लिक इक्विटी फंडरेजिंग 11.7 फीसदी बढ़कर 2.3 लाख करोड़ रुपये पहुंच गई.
IPO से 1.9 लाख करोड़ रुपये जुटाए
FY26 में IPO और FPO के जरिए कुल फंड जुटाने की राशि करीब 1.9 लाख करोड़ रुपये रही, जो पिछले साल के लगभग बराबर है. इस दौरान नई लिस्टेड कंपनियों की संख्या 320 से बढ़कर 366 हो गई. इससे प्राइमरी इक्विटी मार्केट में मजबूत गतिविधि का संकेत मिलता है. मेनबोर्ड IPO के जरिए कंपनियों ने FY26 में 1.8 लाख करोड़ रुपये जुटाए, जो पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले 8.9 फीसदी अधिक है.
Preferential Issues से 1.48 लाख करोड़ रुपये जुटे
प्राइमरी मार्केट में कंपनियों ने पूंजी जुटाने के लिए अन्य रास्तों का भी इस्तेमाल किया. वित्त वर्ष 2025-26 में Preferential Issues के जरिए 1,48,219 करोड़ रुपये जुटाए गए. इसमें सालाना आधार पर 76.3 फीसदी की बढ़ोतरी हुई. वहीं, 36 Qualified Institutional Placements (QIPs) के जरिए 67,853 करोड़ रुपये जुटाए गए. FY25 में 91 QIPs के जरिए 1,35,597 करोड़ रुपये जुटाए गए थे.
SME कंपनियों की भी रही मजबूत भागीदारी
SME सेगमेंट में भी प्राइमरी मार्केट की गतिविधियां मजबूत रहीं. FY26 में कुल 257 कंपनियां SME प्लेटफॉर्म पर लिस्ट हुईं और इनके जरिए 11,587 करोड़ रुपये जुटाए गए. यह पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 18.1 फीसदी अधिक है.
SEBI ने किए कई बड़े बदलाव
SEBI के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने कहा कि साल के दौरान प्राइमरी इक्विटी मार्केट ने अपनी मजबूती और गतिशीलता बरकरार रखी. भू-राजनीतिक संघर्ष, व्यापारिक तनाव, पूंजी प्रवाह में उतार-चढ़ाव और तेजी से हो रहे तकनीकी बदलावों के बावजूद बाजार लचीला बना रहा.
पूंजी जुटाने की प्रक्रिया को आसान बनाने और निवेशकों की सुरक्षा मजबूत करने के लिए SEBI ने कई कदम उठाए. इनमें न्यूनतम पब्लिक ऑफर फ्रेमवर्क में बदलाव प्रमुख रहा. इसके तहत पब्लिक फ्लोट की जरूरतों को इश्यू के आकार के अनुरूप किया गया. इसके अलावा, बड़े इश्यू जारी करने वाली कंपनियों के लिए अनिवार्य 25 फीसदी न्यूनतम पब्लिक शेयरहोल्डिंग हासिल करने की समयसीमा बढ़ाकर 10 साल कर दी गई.
SEBI ने न्यू-एज कंपनियों के संस्थापकों को IPO से पहले दिए गए Employee Stock Option Plans (ESOPs) को बनाए रखने की भी अनुमति दी. नियामक के मुताबिक, इससे कंपनियों में लंबे समय के प्रोत्साहन और सार्वजनिक शेयरधारकों के हितों के बीच संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी.
डेट मार्केट से जुटाई गई सबसे ज्यादा पूंजी
FY26 में प्राइमरी मार्केट से पूंजी जुटाने में डेट इश्यू सबसे बड़ा हिस्सा रहा. हालांकि, डेट इश्यू के जरिए जुटाई गई रकम 8.4 फीसदी घटकर 9,11,078 करोड़ रुपये रह गई. इसमें प्राइवेट प्लेसमेंट की हिस्सेदारी 98.8 फीसदी रही. वहीं, पब्लिक डेट इश्यू 39.2 फीसदी बढ़कर 11,343 करोड़ रुपये पहुंच गए.
म्युनिसिपल बॉन्ड और AIF में भी बढ़ी गतिविधि
वित्त वर्ष के दौरान 14 म्युनिसिपल बॉन्ड इश्यू के जरिए 1,756 करोड़ रुपये जुटाए गए. SEBI ने क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों को पारंपरिक Probability of Default मॉडल के साथ Expected Loss आधारित रेटिंग स्केल अपनाने की अनुमति दी, ताकि शहरी बुनियादी ढांचे से जुड़े प्रोजेक्ट्स के लिए म्युनिसिपल बॉन्ड को बढ़ावा दिया जा सके. वहीं, Alternative Investment Fund (AIF) इंडस्ट्री का भी विस्तार जारी रहा. 31 मार्च 2026 तक रजिस्टर्ड AIF की संख्या बढ़कर 1,829 हो गई, जो एक साल पहले 1,526 थी. इस दौरान AIF में कुल कमिटमेंट 25.6 फीसदी बढ़कर 16,94,262 करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले साल 13,49,051 करोड़ रुपये था.
SEBI चेयरमैन ने कहा कि नियामक की सोच अब 'Resilience by Design' की दिशा में आगे बढ़ रही है. इसके तहत बेहतर रेगुलेशन, AI आधारित निगरानी, पुराने नियमों के आधुनिकीकरण और बाजार प्रतिभागियों के लिए प्रक्रियाओं को आसान बनाने पर जोर दिया जा रहा है.
SBI के मजबूत तिमाही नतीजे ऐसे समय में आए हैं जब बैंकिंग सेक्टर में ब्याज दरों, डिपॉजिट लागत और क्रेडिट ग्रोथ पर बाजार की नजर बनी हुई है. बेहतर मुनाफे, मजबूत NII और बढ़ते लोन कारोबार से बैंक की वित्तीय स्थिति को मजबूती मिली है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में मजबूत प्रदर्शन किया है. बैंक का स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 10% बढ़कर ₹21,121 करोड़ पहुंच गया, जो बाजार के ₹19,052 करोड़ के अनुमान से काफी अधिक है. इस दौरान बैंक की नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) भी 15% बढ़कर ₹46,992 करोड़ हो गई. मजबूत तिमाही नतीजों के बीच SBI के शेयर में करीब 3% की तेजी देखने को मिली.
अनुमान से बेहतर रहा SBI का मुनाफा
SBI ने बताया कि जून 2026 को समाप्त तिमाही में उसका स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट ₹21,121 करोड़ रहा, जबकि पिछले साल की समान तिमाही में यह ₹19,160 करोड़ था. यानी बैंक के मुनाफे में सालाना आधार पर करीब 10% की बढ़ोतरी हुई.
बैंक की नेट इंटरेस्ट इनकम भी मजबूत रही. पहली तिमाही में NII 15% बढ़कर ₹46,992 करोड़ पहुंच गई, जबकि बाजार का अनुमान ₹46,214 करोड़ था. वहीं, बैंक का ऑपरेटिंग प्रॉफिट 10% बढ़कर ₹33,529 करोड़ रहा.
NIM में भी सुधार
SBI का घरेलू नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) पहली तिमाही में 3% रहा. इसमें पिछली तिमाही की तुलना में 7 बेसिस पॉइंट का सुधार हुआ. वहीं, पूरे बैंक का NIM क्रमिक आधार पर 5 बेसिस पॉइंट बढ़कर 2.86% हो गया. मार्जिन में यह सुधार इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि फंडिंग कॉस्ट और टर्म डिपॉजिट की री-प्राइसिंग से बैंक की लाभप्रदता पर दबाव की आशंका जताई जा रही थी.
SBI का कुल बिजनेस ₹110 लाख करोड़ के पार
बैंक ने बताया कि जून तिमाही के दौरान उसका कुल बिजनेस **₹110 लाख करोड़ के पार** पहुंच गया. इसमें डिपॉजिट ₹60 लाख करोड़ से अधिक और एडवांसेज यानी लोन ₹50 लाख करोड़ से ज्यादा रहे.
बैंक के कुल एडवांसेज में सालाना आधार पर 19% की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि घरेलू एडवांसेज 18.15% बढ़े. विदेशी कार्यालयों के एडवांसेज में रुपये के लिहाज से 21% और डॉलर के लिहाज से 10% की वृद्धि हुई.
रिटेल से कॉरपोरेट तक सभी सेगमेंट में ग्रोथ
SBI ने बताया कि रिटेल, कृषि, SME और कॉरपोरेट लोन समेत उसके सभी प्रमुख सेगमेंट में मजबूत वृद्धि दर्ज की गई. RAM यानी Retail, Agriculture और MSME एडवांसेज में सालाना आधार पर 18.20% की बढ़ोतरी हुई और सभी प्रमुख सेगमेंट में डबल डिजिट ग्रोथ रही. कृषि एडवांसेज में सबसे ज्यादा 25% की वृद्धि हुई. इसके बाद SME एडवांसेज 22% बढ़े. रिटेल पर्सनल एडवांसेज में 15% और कॉरपोरेट एडवांसेज में 18% की बढ़ोतरी दर्ज की गई.
SBI के मजबूत तिमाही नतीजे ऐसे समय में आए हैं जब बैंकिंग सेक्टर में ब्याज दरों, डिपॉजिट लागत और क्रेडिट ग्रोथ पर बाजार की नजर बनी हुई है. बेहतर मुनाफे, मजबूत NII और बढ़ते लोन कारोबार से बैंक की वित्तीय स्थिति को मजबूती मिली है.
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड भारत सरकार की ओर से जारी किए जाने वाले गोल्ड-आधारित निवेश साधन हैं. इन्हें भारतीय रिजर्व बैंक जारी करता है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) 2020-21 Series-XI में निवेश करने वालों के लिए बड़ी खबर है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने इस सीरीज के बॉन्ड की समय से पहले रिडेम्प्शन कीमत ₹14,564 प्रति यूनिट तय की है. यह कीमत 7 अगस्त 2026 से लागू होगी. जिन निवेशकों ने इस सीरीज को ऑनलाइन ₹4,862 प्रति ग्राम की शुरुआती कीमत पर खरीदा था, उन्हें मौजूदा रिडेम्प्शन कीमत पर करीब 199.55% का प्राइस रिटर्न मिला है. इसमें SGB पर मिलने वाला 2.5% सालाना ब्याज शामिल नहीं है.
7 अगस्त से कर सकेंगे समय से पहले रिडीम
RBI के मुताबिक, SGB 2020-21 Series-XI के निवेशक 7 अगस्त 2026 से अपने बॉन्ड की समय से पहले रिडेम्प्शन करा सकते हैं. 8 और 9 अगस्त को अवकाश होने के कारण रिडेम्प्शन के लिए 7 अगस्त की तारीख तय की गई है.
नियमों के तहत SGB जारी होने के पांच साल पूरे होने के बाद ब्याज भुगतान की तारीख पर समय से पहले रिडेम्प्शन की सुविधा मिलती है. इस सीरीज के लिए अब रिडेम्प्शन कीमत ₹14,564 प्रति यूनिट निर्धारित की गई है.
कैसे तय हुई ₹14,564 की रिडेम्प्शन कीमत?
RBI ने बताया कि रिडेम्प्शन कीमत 4, 5 और 6 अगस्त 2026 के दौरान 999 शुद्धता वाले सोने के औसत बंद भाव के आधार पर तय की गई है. इसके लिए इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) की ओर से जारी सोने की कीमतों को आधार बनाया गया है.
₹4,862 से ₹14,564 पहुंची कीमत
SGB 2020-21 Series-XI में ऑनलाइन खरीदने वाले निवेशकों के लिए शुरुआती इश्यू प्राइस ₹4,862 प्रति ग्राम था. अब रिडेम्प्शन कीमत ₹14,564 प्रति यूनिट होने से प्रति यूनिट ₹9,702 का अंतर बनता है. यानी शुरुआती कीमत के मुकाबले करीब 199.55% का प्राइस रिटर्न मिला है.
मसलन, अगर किसी निवेशक ने उस समय ₹1 लाख का निवेश किया था, तो सिर्फ बॉन्ड की कीमत में बढ़ोतरी के आधार पर उसका मूल्य करीब ₹2.99 लाख हो गया है. इसके अलावा निवेशक को पूरे निवेश अवधि में मिलने वाला 2.5% सालाना ब्याज भी अलग से प्राप्त हुआ होगा. ऑफलाइन खरीदने वाले निवेशकों के लिए शुरुआती इश्यू प्राइस ₹4,912 प्रति ग्राम था. ऑनलाइन आवेदन करने वालों को उस समय ₹50 प्रति ग्राम की छूट मिली थी.
SGB पर मिलता है 2.5% सालाना ब्याज
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड में निवेशकों को शुरुआती निवेश राशि पर 2.50% सालाना तय ब्याज मिलता है. यह ब्याज हर छह महीने में निवेशक के बैंक खाते में जमा किया जाता है. मैच्योरिटी के समय आखिरी ब्याज मूल राशि के साथ दिया जाता है. इसका मतलब है कि निवेशकों का कुल रिटर्न सिर्फ सोने की कीमत में हुई बढ़ोतरी तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें निवेश अवधि के दौरान ब्याज से भी अतिरिक्त कमाई हुई है.
क्या है सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड?
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड भारत सरकार की ओर से जारी किए जाने वाले गोल्ड-आधारित निवेश साधन हैं. इन्हें भारतीय रिजर्व बैंक जारी करता है. इसमें निवेशक को फिजिकल सोना खरीदकर रखने की जरूरत नहीं होती. निवेश सोने के ग्राम के हिसाब से किया जाता है और मैच्योरिटी या रिडेम्प्शन के समय राशि नकद में मिलती है.
कितना निवेश किया जा सकता है?
SGB में न्यूनतम निवेश एक ग्राम सोने के बराबर किया जा सकता है. एक वित्त वर्ष में व्यक्तिगत निवेशकों और हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) के लिए अधिकतम निवेश सीमा 4 किलोग्राम है. वहीं, ट्रस्ट और अन्य पात्र संस्थाएं एक वित्त वर्ष में अधिकतम 20 किलोग्राम तक निवेश कर सकती हैं.
आंकड़ों के मुताबिक, FY26 में 102 विदेशी कंपनियों ने भारत में रजिस्ट्रेशन कराया, जबकि 84 कंपनियों ने अपना कारोबार बंद किया. इससे पहले लगातार चार वित्त वर्षों में बंद होने वाली विदेशी कंपनियों की संख्या नए रजिस्ट्रेशन से ज्यादा रही थी.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत के बढ़ते बाजार और कारोबारी संभावनाओं पर विदेशी कंपनियों का भरोसा मजबूत होता दिख रहा है. वित्त वर्ष 2025-26 में पांच साल में पहली बार भारत में नई रजिस्टर्ड विदेशी कंपनियों की संख्या कारोबार बंद करने वाली कंपनियों से अधिक रही. कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय (MCA) की ओर से संसद में पेश आंकड़ों के मुताबिक, FY26 में 102 विदेशी कंपनियों ने भारत में रजिस्ट्रेशन कराया, जबकि 84 कंपनियों ने अपना कारोबार बंद किया. इससे पहले लगातार चार वित्त वर्षों में बंद होने वाली विदेशी कंपनियों की संख्या नए रजिस्ट्रेशन से ज्यादा रही थी.
पांच साल में पहली बार बदला ट्रेंड
केंद्रीय वित्त एवं कॉर्पोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में एक सवाल के लिखित जवाब में यह जानकारी दी. आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2021-22 में 74 विदेशी कंपनियों ने भारत में रजिस्ट्रेशन कराया था, जबकि 104 कंपनियों ने कारोबार बंद किया. 2022-23 में 51 विदेशी कंपनियां रजिस्टर्ड हुईं और 63 कंपनियों ने अपना कारोबार बंद किया.
इसी तरह 2023-24 में 66 नई विदेशी कंपनियों ने रजिस्ट्रेशन कराया, जबकि 68 कंपनियां बंद हुईं. 2024-25 में 59 विदेशी कंपनियां भारत में रजिस्टर्ड हुईं और 63 ने अपना कारोबार बंद किया. हालांकि, वित्त वर्ष 2025-26 में पहली बार तस्वीर बदली. इस दौरान 102 विदेशी कंपनियां रजिस्टर्ड हुईं, जबकि 84 कंपनियों ने अपना कारोबार बंद किया.
भारतीय सब्सिडियरीज में भी मजबूत बढ़ोतरी
विदेशी होल्डिंग वाली भारतीय सहायक कंपनियों के मामले में भी रजिस्ट्रेशन का आंकड़ा मजबूत रहा. वित्त वर्ष 2021-22 में 1,829 नई भारतीय सब्सिडियरीज रजिस्टर्ड हुई थीं और 300 कंपनियां बंद हुईं. 2022-23 में 1,832 नई सब्सिडियरीज रजिस्टर्ड हुईं, जबकि 134 बंद हुईं.
वित्त वर्ष 2023-24 में 2,112 नई भारतीय सब्सिडियरीज रजिस्टर्ड हुईं और 242 कंपनियों ने कारोबार बंद किया. 2024-25 में 2,013 नई सब्सिडियरीज के रजिस्ट्रेशन के मुकाबले 253 कंपनियां बंद हुईं. वहीं, FY26 में 2,191 नई भारतीय सब्सिडियरीज रजिस्टर्ड हुईं, जबकि 294 कंपनियों ने अपना कारोबार बंद किया.
भारत में 3,313 विदेशी कंपनियां सक्रिय
सरकार के अनुसार, **30 जुलाई 2026 तक भारत में 3,313 विदेशी कंपनियां** अपने कारोबारी परिचालन चला रही थीं. इसके अलावा 19,881 ऐसी भारतीय कंपनियां हैं, जिनकी होल्डिंग या पैरेंट कंपनी विदेश में स्थित है. ये आंकड़े ऐसे समय में सामने आए हैं जब भारत का घरेलू बाजार तेजी से विस्तार कर रहा है और वैश्विक कंपनियां अपनी सप्लाई चेन और निवेश रणनीतियों में भारत की भूमिका बढ़ा रही हैं.
विदेशी कंपनियों के बंद होने की वजह क्या है?
सरकार ने स्पष्ट किया कि किसी विदेशी कंपनी का भारत में कारोबार शुरू करना या बंद करना उसका व्यावसायिक फैसला होता है. इसके पीछे कंपनी की कारोबारी व्यवहार्यता, सेक्टर से जुड़ी रणनीति, वैश्विक प्राथमिकताएं, पूंजी आवंटन और अलग-अलग बाजारों में मौजूदगी जैसे कई कारण हो सकते हैं.
सरकार ने अलग-अलग कंपनियों के कारोबार बंद करने की वजहों का कोई विस्तृत आंकड़ा उपलब्ध नहीं कराया है. साथ ही, विदेशी कंपनियों और उनकी भारतीय सब्सिडियरीज में काम करने वाले भारतीय नागरिकों की संख्या का डेटा भी मंत्रालय के पास उपलब्ध नहीं है.
विदेशी निवेश के लिए भारत की बढ़ती अहमियत
FY26 के आंकड़ों में विदेशी कंपनियों के नए रजिस्ट्रेशन का बंद होने वाली कंपनियों से आगे निकलना भारत के कारोबारी माहौल में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत देता है. हालांकि, सिर्फ कंपनी रजिस्ट्रेशन के आंकड़ों के आधार पर विदेशी निवेश में बढ़ोतरी का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा, लेकिन यह जरूर दिखता है कि वित्त वर्ष 2025-26 में भारत आने वाली विदेशी कंपनियों की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है.
जुलाई में सबसे ज्यादा मांग दोपहिया वाहनों की रही. इनकी बिक्री पिछले साल के 14.18 लाख से बढ़कर 18.18 लाख यूनिट हो गई, यानी सालाना आधार पर 28.25% की बढ़ोतरी दर्ज की गई.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
जुलाई 2026 भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार के लिए शानदार महीना रहा. देश में इस दौरान कुल 25.91 लाख वाहनों की खुदरा बिक्री हुई, जो जुलाई 2025 के 20.58 लाख के मुकाबले 25.89% अधिक है. फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (FADA) के आंकड़ों के मुताबिक, यह जुलाई महीने में अब तक की सबसे ज्यादा वाहन बिक्री है. खास बात यह रही कि CNG, हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक वाहनों की संयुक्त हिस्सेदारी पेट्रोल वाहनों के लगभग बराबर पहुंच गई.
दोपहिया वाहनों ने संभाली बिक्री की कमान
जुलाई में सबसे ज्यादा मांग दोपहिया वाहनों की रही. इनकी बिक्री पिछले साल के 14.18 लाख से बढ़कर 18.18 लाख यूनिट हो गई, यानी सालाना आधार पर 28.25% की बढ़ोतरी दर्ज की गई. यात्री वाहनों की बिक्री भी 19.13% बढ़ी. जुलाई 2025 में 3.50 लाख कारें बिकी थीं, जबकि इस साल यह आंकड़ा बढ़कर 4.17 लाख यूनिट हो गया. वहीं, तिपहिया वाहनों की बिक्री 16.16% बढ़कर 1.34 लाख यूनिट और कमर्शियल वाहनों की बिक्री 24.04% बढ़कर करीब 1 लाख यूनिट हो गई.
पेट्रोल की पकड़ कमजोर, वैकल्पिक ईंधन की हिस्सेदारी बढ़ी
जुलाई के आंकड़ों में सबसे बड़ा बदलाव वाहन ईंधन की पसंद में देखने को मिला. CNG वाहनों की हिस्सेदारी 24.67%, हाइब्रिड की 8.02% और इलेक्ट्रिक वाहनों की 7.90% रही. तीनों को मिलाकर इनकी हिस्सेदारी 40.59% हो गई, जबकि पेट्रोल वाहनों की हिस्सेदारी 41.68% रही.
यानी पेट्रोल और इन वैकल्पिक पावरट्रेन के बीच का अंतर महज 1.09 प्रतिशत अंक रह गया है. पिछले साल यह अंतर 13.21 प्रतिशत अंक था. यह बदलाव बताता है कि भारतीय ग्राहक अब सिर्फ पेट्रोल और डीजल वाहनों पर निर्भर नहीं हैं और कम रनिंग कॉस्ट तथा नई तकनीक वाले विकल्पों की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं.
EV की बिक्री ने बनाया नया रिकॉर्ड
इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग में भी तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई. जुलाई में कुल 3,27,901 इलेक्ट्रिक वाहन बिके. इससे कुल ऑटो बाजार में EV की हिस्सेदारी बढ़कर करीब 12.7% हो गई, जो पिछले साल 9.6% थी. इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की हिस्सेदारी भी 7.65% से बढ़कर 11.24% हो गई. इससे साफ है कि खासकर दोपहिया सेगमेंट में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी तेजी से मुख्यधारा का हिस्सा बन रही है.
GST 2.0 और आसान फाइनेंस से मिला सपोर्ट
ऑटो डीलर्स के मुताबिक, बिक्री में इस तेज उछाल के पीछे कई वजहें हैं. GST 2.0 के बाद कुछ वाहनों की खरीद पहले की तुलना में अधिक किफायती हुई है. इसके अलावा बैंकों और फाइनेंस कंपनियों से आसान लोन की उपलब्धता और आगामी त्योहारी सीजन ने भी ग्राहकों की खरीदारी को बढ़ावा दिया है.
कुल मिलाकर जुलाई के आंकड़े भारतीय ऑटो बाजार में मजबूत मांग और बदलती ग्राहक पसंद की तस्वीर पेश करते हैं. एक ओर कुल वाहन बिक्री रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची है, वहीं दूसरी ओर CNG, हाइब्रिड और EV जैसे विकल्प पेट्रोल वाहनों के करीब पहुंच रहे हैं. अगर यह ट्रेंड आगे भी जारी रहता है, तो आने वाले त्योहारी सीजन में ऑटो बाजार नए रिकॉर्ड बना सकता है.
भारत के लिए SACU के साथ व्यापार समझौता अफ्रीकी बाजारों में पहुंच बढ़ाने के साथ-साथ महत्वपूर्ण खनिजों और अन्य रणनीतिक क्षेत्रों में आपूर्ति श्रृंखला मजबूत करने के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत और दक्षिण अफ्रीका ने प्रस्तावित भारत-दक्षिणी अफ्रीकी सीमा शुल्क संघ (India-SACU) तरजीही व्यापार समझौते (PTA) पर बातचीत तेज करने की दिशा में कदम बढ़ाया है. वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने दक्षिण अफ्रीका के व्यापार मंत्री पार्क्स ताऊ के साथ बैठक में व्यापार समझौते के साथ महत्वपूर्ण खनिजों, फार्मास्युटिकल्स और विनिर्माण क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की. यह बैठक गुरुवार को जयपुर में आयोजित ब्रिक्स 2026 ट्रेड मिनिस्टर्स मीटिंग (2026 BRICS Trade Ministers' Meeting) से इतर हुई. गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बताया कि दोनों पक्षों ने India-SACU PTA के लिए टर्म्स ऑफ रेफरेंस (ToRs) पर हस्ताक्षर और वार्ता को जल्द पूरा करने की जरूरत पर चर्चा की.
Met with Mr. Parks Tau, Minister of Trade, Industry and Competition of South Africa, on the sidelines of the #BRICS2026 Trade Ministers' Meeting.
— Piyush Goyal (@PiyushGoyal) August 6, 2026
We discussed the signing of ToRs for India-SACU PTA and early conclusion of negotiations, strengthening the India-South Africa trade… pic.twitter.com/7EyBHjsn80
2008 से अटकी है ट्रेड डील
भारत और SACU के बीच PTA पर बातचीत 2008 में शुरू हुई थी, लेकिन बाजार पहुंच और कुछ संवेदनशील क्षेत्रों को लेकर मतभेदों के कारण यह प्रक्रिया लंबे समय से अटकी हुई थी. अब दोनों पक्ष व्यापारिक साझेदारी में विविधता लाने और रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं.
खास तौर पर महत्वपूर्ण खनिजों, फार्मास्युटिकल्स और औद्योगिक विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ाने की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं. प्रस्तावित समझौते से दोनों पक्षों के कारोबारियों को बेहतर बाजार पहुंच मिलने और भारत तथा SACU सदस्य देशों के बीच व्यापार बढ़ने की उम्मीद है.
इन 5 देशों का समूह है SACU
दक्षिणी अफ़्रीकी कस्टम यूनियन (SACU) में दक्षिण अफ्रीका के अलावा बोत्सवाना, इस्वातिनी, लेसोथो और नामीबिया शामिल हैं. यह अफ्रीका का सबसे पुराना सीमा शुल्क संघ है और क्षेत्रीय व्यापार में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है.
भारत के लिए SACU के साथ व्यापार समझौता अफ्रीकी बाजारों में पहुंच बढ़ाने के साथ-साथ महत्वपूर्ण खनिजों और अन्य रणनीतिक क्षेत्रों में आपूर्ति श्रृंखला मजबूत करने के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है.
BRICS बैठक में आर्थिक सहयोग पर जोर
भारत अपनी BRICS अध्यक्षता के तहत जयपुर में ब्रिक्स 2026 ट्रेड मिनिस्टर्स मीटिंग की मेजबानी कर रहा है. बैठक में सदस्य देशों के बीच व्यापार और आर्थिक सहयोग बढ़ाने, नवाचार को प्रोत्साहित करने, मजबूत और लचीली सप्लाई चेन विकसित करने तथा टिकाऊ औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने पर चर्चा हो रही है.
पीयूष गोयल और पार्क्स ताऊ के बीच हुई बातचीत को BRICS साझेदार देशों के साथ भारत के व्यापक आर्थिक जुड़ाव के हिस्से के तौर पर देखा जा रहा है. भारत रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने और भविष्य की आर्थिक वृद्धि के लिए नए व्यापारिक अवसर तलाशने पर जोर दे रहा है.
सरकार के मुताबिक, डार्क पैटर्न के तहत 13 तरह की प्रतिबंधित डिजिटल डिजाइन प्रथाओं की पहचान की गई है. इनमें ड्रिप प्राइसिंग, बास्केट स्नीकिंग, सब्सक्रिप्शन ट्रैप, फर्जी जल्दबाजी, कन्फर्म शेमिंग और ट्रिक क्वेश्चन जैसी तकनीकें शामिल हैं.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
ऑनलाइन ग्राहकों को गुमराह करने या उनकी पसंद को प्रभावित करने वाले भ्रामक डिजिटल डिजाइन के खिलाफ सरकार ने कार्रवाई तेज कर दी है. केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने IndiGo, Zepto, FirstCry, Physics Wallah और SpiceJet समेत 9 डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ‘डार्क पैटर्न’ के इस्तेमाल को लेकर जुर्माना लगाया है. इन प्लेटफॉर्म को उपभोक्ताओं को प्रभावित करने वाली भ्रामक डिजाइन सुविधाओं को हटाने का भी निर्देश दिया गया है.
सरकार ने राज्यसभा में बताया कि 'प्रीवेंशन एंड रेगुलेशन ऑफ डार्क पैटर्न्स गाइडलाइन्स, 2023' के तहत कार्रवाई को मजबूत किया गया है. इसका उद्देश्य ऑनलाइन बाजार में अनुचित व्यापारिक गतिविधियों से उपभोक्ताओं की सुरक्षा करना और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पारदर्शिता बढ़ाना है.
13 तरह के डार्क पैटर्न की पहचान
सरकार के मुताबिक, डार्क पैटर्न के तहत 13 तरह की प्रतिबंधित डिजिटल डिजाइन प्रथाओं की पहचान की गई है. इनमें ड्रिप प्राइसिंग, बास्केट स्नीकिंग, सब्सक्रिप्शन ट्रैप, फर्जी जल्दबाजी, कन्फर्म शेमिंग और ट्रिक क्वेश्चन जैसी तकनीकें शामिल हैं. उपभोक्ता मामलों के विभाग ने डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ऐसी प्रथाओं के खिलाफ कार्रवाई तेज की है. जून 2025 में CCPA ने ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म को एडवाइजरी जारी कर अपनी सेवाओं का सेल्फ-ऑडिट करने और डार्क पैटर्न की पहचान कर उन्हें हटाने का निर्देश दिया था. इसके बाद नियमों का उल्लंघन करने वाले प्लेटफॉर्म से करीब ₹20 लाख का जुर्माना वसूला जा चुका है.
Zepto पर ₹7 लाख का जुर्माना
जुर्माना झेलने वाली कंपनियों में Zepto Marketplace भी शामिल है. CCPA ने पाया कि प्लेटफॉर्म पर शुरुआत में कम कीमत दिखाई गई, लेकिन भुगतान के समय हैंडलिंग चार्ज और सदस्यता शुल्क जोड़ दिया गया. नियामक ने अतिरिक्त हैंडलिंग चार्ज को ड्रिप प्राइसिंग और बिना स्पष्ट सहमति के सदस्यता प्लान जोड़ने को बास्केट स्नीकिंग माना. इसके लिए Zepto पर ₹7 लाख का जुर्माना लगाया गया.
Physics Wallah पर ₹5 लाख की कार्रवाई
Physics Wallah पर CCPA ने ₹5 लाख का जुर्माना लगाया. यह कार्रवाई PW Foundation के लिए पहले से चुने गए ₹10 के डोनेशन विकल्प को लेकर की गई. नियामक ने डोनेशन बनाए रखने के लिए भावनात्मक तरीके से प्रेरित करने वाले संदेशों और मुफ्त कोर्स का इस्तेमाल करने से पहले व्यक्तिगत जानकारी अनिवार्य रूप से लेने पर भी आपत्ति जताई. सरकार के अनुसार, कंपनी ने जुर्माना जमा कर दिया है और संबंधित प्रथाओं को बंद कर दिया है.
IndiGo के ऐप में बदला गया मैसेज
CCPA ने यात्रा सुरक्षा से जुड़े ऑप्ट-आउट विकल्प को लेकर IndiGo के मोबाइल ऐप में भी हस्तक्षेप किया. शिकायतों के बाद कंपनी को अपने पुराने संदेश “No I will take risk” को बदलकर अधिक तटस्थ विकल्प “No, I will not add to the trip” करने का निर्देश दिया गया. इसी तरह BookMyShow को अपने BookASmile कार्यक्रम के लिए पहले से चुने गए ₹1 के योगदान विकल्प को हटाने का निर्देश दिया गया. CCPA ने इसे भी बास्केट स्नीकिंग की श्रेणी में माना.
FirstCry, PharmEasy समेत अन्य प्लेटफॉर्म पर भी कार्रवाई
सरकार के मुताबिक, CCPA ने FirstCry, PharmEasy, McAfee, SpiceJet और कोचिंग प्लेटफॉर्म Anuj Jindal के खिलाफ भी कार्रवाई की है. इन कंपनियों को छिपे हुए शुल्क, जबरन सब्सक्रिप्शन, भ्रामक काउंटडाउन टाइमर और उपयोगकर्ताओं को प्रभावित करने वाले सब्सक्रिप्शन रिन्यूअल विकल्प जैसी प्रथाओं को बंद करने के निर्देश दिए गए हैं. CCPA की यह कार्रवाई तेजी से बढ़ते डिजिटल बाजार में उपभोक्ताओं को भ्रामक डिजाइन और अनुचित व्यापारिक प्रथाओं से बचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है.
कंपनी के निदेशक मंडल ने ₹1 के फेस वैल्यू वाले प्रत्येक शेयर पर ₹90.5 के फाइनल डिविडेंड की भी सिफारिश की है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
प्रमुख खाद्य उत्पाद (FMCG) कंपनी ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में मजबूत प्रदर्शन किया है. कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 14.1% बढ़कर ₹593 करोड़ पहुंच गया. वहीं, कंसोलिडेटेड बिक्री 9.5% बढ़कर ₹4,964 करोड़ हो गई. कंपनी के मुताबिक, इनोवेशन, ब्रांड में बढ़ा निवेश और घरेलू मांग में सुधार से तिमाही प्रदर्शन को मजबूती मिली.
मुनाफे की रफ्तार बिक्री से ज्यादा
ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज ने 30 जून 2026 को समाप्त तिमाही के नतीजे गुरुवार को जारी किए. इस दौरान कंपनी का मुनाफा 14.1% बढ़ा, जबकि बिक्री में 9.5% की वृद्धि दर्ज की गई. स्टैंडअलोन आधार पर कंपनी की बिक्री करीब 10% बढ़ी, जो उसके विभिन्न प्रोडक्ट सेगमेंट में मांग मजबूत रहने का संकेत है. कंपनी के निदेशक मंडल ने ₹1 के फेस वैल्यू वाले प्रत्येक शेयर पर ₹90.5 के फाइनल डिविडेंड की भी सिफारिश की है.
मांग और ब्रांड निवेश से मिली मजबूती
ब्रिटानिया के सीईओ और मैनेजिंग डायरेक्टर रक्षित हरगेव ने कहा कि तिमाही की शुरुआत पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच हुई, जिससे घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कारोबार में ईंधन और शिपमेंट लागत में तेज बढ़ोतरी हुई. इसके बावजूद कंपनी ने इन चुनौतियों के बीच बेहतर तरीके से कारोबार को संभाला और वॉल्यूम के साथ-साथ वैल्यू ग्रोथ भी दर्ज की. उन्होंने कहा कि पिछले साल की समान अवधि की तुलना में कंपनी के मुनाफे में डबल डिजिट ग्रोथ रही, जो टॉपलाइन ग्रोथ से आगे रही. कंपनी की ज्यादातर प्रमुख प्रोडक्ट कैटेगरी में तिमाही-दर-तिमाही मांग में सुधार देखने को मिला.
कंपनी ने बताया कि तिमाही के अंत तक रेवेन्यू ग्रोथ मिड-टीन्स में पहुंच गई थी. इसमें ई-कॉमर्स के तेजी से विस्तार, जनरल ट्रेड में मजबूत प्रदर्शन और विज्ञापन, इन्फ्लुएंसर तथा प्रमोशनल कैंपेन पर बढ़े खर्च की अहम भूमिका रही.
Marie Gold और NutriChoice जैसे ब्रांड पर फोकस
ब्रिटानिया ने अपने प्रमुख ब्रांड्स को मजबूत करने के लिए कई मार्केटिंग कैंपेन भी चलाए. Tea Day के दौरान Marie Gold, Health Day पर NutriChoice और Mother's Day के मौके पर Little Hearts को प्रमोट किया गया.
तमिलनाडु में Milk Bikis के Thirukkural कैंपेन जैसे क्षेत्रीय अभियानों के जरिए कंपनी ने स्थानीय उपभोक्ताओं के साथ जुड़ाव बढ़ाने की कोशिश की. इसके अलावा Dubai Kunafa Croissant जैसे नए प्रोडक्ट्स कंपनी की इनोवेशन-आधारित रणनीति का हिस्सा रहे.
इंटरनेशनल कारोबार में सुधार
ब्रिटानिया ने बताया कि तिमाही के आखिरी हिस्से में सप्लाई चेन से जुड़ी बाधाएं कम होने के साथ उसके अंतरराष्ट्रीय कारोबार में भी क्रमिक सुधार हुआ. हालांकि, कंपनी पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक घटनाक्रम और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव पर करीबी नजर बनाए हुए है. कंपनी के मुताबिक, इन घटनाक्रमों का असर उसके विदेशी कारोबार के साथ-साथ घरेलू स्तर पर इनपुट कॉस्ट पर भी पड़ सकता है.
आगे इनोवेशन और कॉस्ट एफिशिएंसी पर जोर
ब्रिटानिया ने कहा कि घरेलू मांग के माहौल में सुधार के बीच उसका फोकस टिकाऊ रेवेन्यू ग्रोथ पर बना हुआ है. कंपनी नए प्रोडक्ट्स और इनोवेशन के जरिए ग्रोथ बढ़ाने के साथ ब्रांड में निवेश जारी रखेगी. इसके अलावा, मार्जिन को अनुशासित तरीके से मैनेज करने और कॉस्ट एफिशिएंसी बढ़ाने के लिए कंपनी की ओर से कई कदम उठाए जा रहे हैं.
इसका लक्ष्य कृषि अवशेष, पशुओं के गोबर, नगर निकायों के जैविक कचरे और अन्य बायोमास संसाधनों को स्वच्छ ईंधन और जैविक खाद में बदलकर कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) को भारत के ऊर्जा मिश्रण का प्रमुख हिस्सा बनाना है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
केंद्र सरकार ने देश में स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए 23,731 करोड़ रुपये की GOBARdhan (नेशनल सर्कुलर बायोएनर्जी) योजना को मंजूरी दे दी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इस योजना को स्वीकृति दी. इसका उद्देश्य कृषि अवशेष, गोबर, नगर निकायों के जैविक कचरे और अन्य बायोमास से कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) का उत्पादन बढ़ाना, ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करना और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा करना है. यह योजना वित्त वर्ष 2026-27 से 2035-36 तक लागू रहेगी.
स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को मिलेगा बढ़ावा
इस योजना के तहत घरेलू CBG उत्पादन को लगभग 10 गुना तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है. इसके लिए सुनिश्चित मांग, स्थिर मूल्य, पूंजीगत सहायता, पाइपलाइन अवसंरचना, आसान ऋण और नई तकनीकों के विकास पर जोर दिया जाएगा. सरकार का मानना है कि इससे देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी, आयातित जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता घटेगी और सर्कुलर बायोइकोनॉमी को बढ़ावा मिलेगा.
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय इस योजना को लागू करेगा. इसके तहत पहले से चल रही कई योजनाओं को एकीकृत किया गया है, जिनमें SATAT (सस्टेनेबल अल्टरनेटिव टुवर्ड्स अफोर्डेबल ट्रांसपोर्टेशन), जैविक खाद के लिए मार्केट डेवलपमेंट असिस्टेंस योजना, बायोमास एग्रीगेशन मशीनरी योजना, पाइपलाइन अवसंरचना विकास योजना और राष्ट्रीय बायोएनर्जी कार्यक्रम के तहत दी जाने वाली वित्तीय सहायता शामिल हैं. सरकार के अनुसार, पूर्व की योजनाओं के तहत 200 से अधिक CBG संयंत्र पहले ही शुरू किए जा चुके हैं.
योजना के छह प्रमुख घटक
योजना के तहत सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) कंपनियों के लिए CBG की खरीद सुनिश्चित की जाएगी ताकि वे अनिवार्य ब्लेंडिंग लक्ष्य पूरा कर सकें. सरकार ने CBG ब्लेंडिंग दायित्व वित्त वर्ष 2026-27 में 3%, 2027-28 में 4% और 2028-29 से 5% तय किया है. यह लक्ष्य परिवहन और घरेलू गैस दोनों क्षेत्रों पर लागू होगा.
सरकार ने CBG का प्रशासनिक मूल्य 2,110 रुपये प्रति MMBTU (मेट्रिक मिलियन ब्रिटिश थर्मल यूनिट) तय किया है, जिससे उत्पादकों को दीर्घकालिक राजस्व का भरोसा मिलेगा और निवेशकों का विश्वास बढ़ेगा.
ग्रीनफील्ड परियोजनाओं को स्थापित CBG क्षमता के प्रति टन प्रतिदिन पर अधिकतम 2 करोड़ रुपये तक की पूंजीगत सहायता मिलेगी. क्षमता विस्तार करने वाली ब्राउनफील्ड परियोजनाओं को भी इस सहायता का लाभ मिलेगा. इसके अलावा फीडस्टॉक संग्रहण, जैविक खाद प्रसंस्करण और पाइपलाइन कनेक्टिविटी के लिए भी वित्तीय सहायता दी जाएगी. योजना के तहत क्लस्टर आधारित और स्वतंत्र पाइपलाइन नेटवर्क विकसित किए जाएंगे, जो CBG संयंत्रों को ट्रंक पाइपलाइन और सिटी गैस नेटवर्क से जोड़ेंगे.
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा सहारा
योजना में CBG उत्पादन से जुड़े सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) के लिए विशेष क्रेडिट गारंटी तंत्र का भी प्रावधान किया गया है. इससे छोटे डेवलपर्स, सहकारी समितियों और महिला उद्यमियों के लिए वित्त जुटाना आसान होगा.
इसके अलावा CBG इकोसिस्टम चैलेंज फंड बनाया जाएगा, जिसके जरिए फीडस्टॉक मैपिंग, जिला स्तरीय योजना, नई तकनीकों को अपनाने, जैविक खाद के मूल्यवर्धन, क्षमता निर्माण और जागरूकता कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया जाएगा.
सरकार का मानना है कि इस योजना से किसानों, फीडस्टॉक आपूर्तिकर्ताओं और ग्रामीण उद्यमियों के लिए आय के नए स्रोत तैयार होंगे. साथ ही वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन को बढ़ावा मिलेगा, ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी आएगी और जैविक खेती को भी मजबूती मिलेगी. सरकार को उम्मीद है कि एकीकृत नीति ढांचे और दीर्घकालिक प्रोत्साहनों के जरिए GOBARdhan योजना बायोएनर्जी क्षेत्र में निजी निवेश को बढ़ाएगी और भारत के स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन के साथ ग्रामीण आर्थिक विकास को नई गति देगी.
अगस्त में श्रीपद शेंदे अपने नेतृत्व के एक और वर्ष का जश्न मना रहे हैं. बैंकिंग, ब्रांडिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), बिजनेस एक्सीलेंस और कॉर्पोरेट स्ट्रैटेजी तक फैला उनका तीन दशकों का सफर भारत के वित्तीय सेवा उद्योग के उल्लेखनीय विकास को दर्शाता है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं और बीमा (BFSI) उद्योग में मार्केटिंग अब केवल ब्रांड कैंपेन और विज्ञापन तक सीमित नहीं रह गई है. आज यह ग्राहक अनुभव, तकनीक, डेटा, बिजनेस स्ट्रैटेजी और संगठनात्मक बदलाव के केंद्र में है. बहुत कम ऐसे नेता हैं जो इस बदलाव को श्रीपद शेंदे की तरह व्यापक रूप से प्रस्तुत करते हैं. श्रीपद शेंदे IDFC FIRST Bank में चीफ मार्केटिंग ऑफिसर (CMO) और बिजनेस एक्सीलेंस एवं कॉर्पोरेट स्ट्रैटेजी के प्रमुख हैं.
तीन दशकों से अधिक लंबे करियर में शेंदे ने एक ऐसा नेतृत्व विकसित किया है, जिसमें मार्केटिंग, कॉर्पोरेट स्ट्रैटेजी, डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन, बिजनेस एक्सीलेंस और वित्तीय समावेशन का अनूठा मेल देखने को मिलता है. ICICI Bank में प्रीमियम बैंकिंग सेवाओं को आकार देने से लेकर Nokia Mobile Payment Services में भारत के शुरुआती डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम में योगदान देने और आज देश के सबसे तेजी से बढ़ते निजी बैंकों में से एक IDFC FIRST Bank में रणनीतिक बदलाव का नेतृत्व करने तक, उनका करियर भारत के वित्तीय सेवा उद्योग के बदलते स्वरूप का प्रतिबिंब है.
इस अगस्त के महीने में उनके नेतृत्व के एक और वर्ष का जश्न मनाते हुए यह कहना उचित होगा कि उनका पेशेवर सफर केवल पदों का नहीं, बल्कि निरंतर स्वयं को नए रूप में ढालने का रहा है. हर चरण में उन्होंने अपनी भूमिका का दायरा बढ़ाया है, मार्केटर से रणनीतिकार, संचार विशेषज्ञ से परिवर्तनकारी नेता और ब्रांड संरक्षक से संगठनात्मक उत्कृष्टता के वास्तुकार तक.
ब्रांड से आगे की सोच
श्रीपद शेंदे की सफलता पारंपरिक मार्केटिंग अधिकारियों की तरह नहीं रही. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत HDFC Bank और Tata AIG से की. इसके बाद उन्होंने ICICI Bank में एक दशक से अधिक समय बिताया, जहां उन्होंने प्रोडक्ट मैनेजमेंट, मार्केटिंग और प्रिविलेज बैंकिंग में कई नेतृत्वकारी भूमिकाएं निभाईं. उनकी जिम्मेदारियों में SME बिजनेस की मार्केटिंग का नेतृत्व करने से लेकर प्रिविलेज बैंकिंग ग्रुप के प्रोडक्ट और मार्केटिंग प्रमुख तक की भूमिकाएं शामिल रहीं. इससे उन्हें रिटेल बैंकिंग, संपन्न ग्राहकों, SME बैंकिंग और बड़े स्तर पर वित्तीय सेवाओं की मार्केटिंग का व्यापक अनुभव मिला.
Ashe MarCom के मैनेजिंग डायरेक्टर के रूप में उनके उद्यमशील अनुभव ने उनके दृष्टिकोण को और व्यापक बनाया. इसके बाद उन्होंने Nokia Mobile Payment Services में मार्केटिंग निदेशक के रूप में कार्य किया, उस समय जब भारत में मोबाइल आधारित वित्तीय सेवाओं का उदय हो रहा था. इस अनुभव ने उन्हें फिनटेक के मुख्यधारा में आने से पहले ही डिजिटल इकोसिस्टम की गहरी समझ प्रदान की.
जब उन्होंने 2018 में IDFC FIRST Bank जॉइन किया, तब IDFC Bank और Capital First के विलय के बाद संस्थान एक बड़े परिवर्तन के दौर से गुजर रहा था. केवल मार्केटिंग तक सीमित रहने के बजाय उन्होंने धीरे-धीरे बिजनेस एक्सीलेंस और कॉर्पोरेट स्ट्रैटेजी जैसी व्यापक जिम्मेदारियां संभालीं और बाद में बैंक के चीफ मार्केटिंग ऑफिसर बनाए गए.
मार्केटिंग लीडर से ट्रांसफॉर्मेशन एग्जीक्यूटिव तक
श्रीपद शेंदे के नेतृत्व की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि उन्होंने केवल मार्केटिंग तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि पूरे संगठन के परिवर्तन का नेतृत्व किया. IDFC FIRST Bank में उनकी जिम्मेदारियां मार्केटिंग, कॉर्पोरेट स्ट्रैटेजी और बिजनेस एक्सीलेंस तक फैली हुई हैं. डिजिटल-फर्स्ट अर्थव्यवस्था में यही क्षेत्र तय करते हैं कि कोई वित्तीय संस्था किस तरह प्रतिस्पर्धा करेगी.
उनका काम इस व्यापक बदलाव को दर्शाता है कि आज केवल ग्राहक जोड़ना ही पर्याप्त नहीं है. प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त अब संगठनात्मक फुर्ती, प्रक्रिया उत्कृष्टता, तकनीक अपनाने और लगातार बेहतर ग्राहक अनुभव पर निर्भर करती है.
AI आधारित ग्राहक जुड़ाव, परिचालन उत्कृष्टता और रणनीतिक नवाचार पर बैंक का बढ़ता जोर भी इसी सोच को दर्शाता है. बिजनेस एक्सीलेंस और कॉर्पोरेट स्ट्रैटेजी में उनके नेतृत्व में कई पहलें तकनीक को ग्राहक-केंद्रित सोच के साथ जोड़ने पर केंद्रित रही हैं, न कि केवल डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन तक.
AI आधारित बैंकिंग के समर्थक
जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस दुनिया भर में वित्तीय सेवाओं को बदल रहा है, तब श्रीपद शेंदे उन बैंकिंग नेताओं में शामिल हैं जो केवल तकनीक के प्रदर्शन के बजाय AI के व्यावहारिक उपयोग की वकालत करते हैं.
इसका एक उदाहरण IDFC FIRST Bank द्वारा अमिताभ बच्चन के साथ भारत का पहला AI आधारित इंटरैक्टिव होलोग्राफिक बैंकिंग अनुभव शुरू करना है. इसका उद्देश्य बैंक शाखाओं में ग्राहकों को अधिक आकर्षक और आधुनिक अनुभव देना था. इस पहल के लॉन्च के दौरान शेंदे ने इसे नवाचार के जरिए बैंकिंग को "सरल, तेज और अधिक आकर्षक" बनाने का प्रयास बताया.
यह पहल इस व्यापक बदलाव को भी दर्शाती है कि अब ग्राहक अनुभव केवल शाखाओं या मोबाइल ऐप से तय नहीं होता, बल्कि इस बात से तय होता है कि तकनीक हर संपर्क बिंदु पर ग्राहकों को कितना व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकती है.
यही सोच IDFC FIRST Bank की ग्राहक-प्रथम रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है.
व्यवसाय से आगे वित्तीय समावेशन
तकनीक उनके पूरे करियर का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है, लेकिन श्रीपद शेंडे लगातार यह कहते रहे हैं कि वित्तीय नवाचार सभी के लिए सुलभ होना चाहिए. वह IDFC First Academy से भी जुड़े रहे हैं, जो बैंक की वित्तीय साक्षरता पहल है और जिसका उद्देश्य पूरे भारत में वित्तीय जागरूकता बढ़ाना है. विभिन्न साक्षात्कारों में उन्होंने देश में वित्तीय साक्षरता की बड़ी कमी की ओर ध्यान दिलाते हुए कहा है कि वित्तीय शिक्षा केवल कुछ लोगों का विशेषाधिकार नहीं होनी चाहिए.
उन्होंने इस पहल के बारे में कहा था, "हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि वित्तीय साक्षरता केवल कुछ लोगों का विशेषाधिकार न होकर सभी का अधिकार बने." यह सोच उनके नेतृत्व का एक महत्वपूर्ण पहलू दर्शाती है कि बैंकिंग की वास्तविक सफलता तब होती है जब ग्राहक सही वित्तीय निर्णय लेने के लिए सक्षम बनें.
प्रभाव के आधार पर मिली पहचान
अपने करियर के शुरुआती दौर में भी श्रीपद शेंडे को ऐसी पहलों के लिए पहचान मिली, जिनमें व्यावसायिक विकास के साथ सामाजिक प्रभाव भी शामिल था. ICICI Bank की Emerging India पहल, जिससे वह जुड़े थे, को लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में स्थान मिला और बैंकिंग जगत के दिग्गज के. वी. कामथ ने इसकी सराहना की. इसके अलावा वित्तीय समावेशन की एक पहल, जिसके जरिए 10 लाख से अधिक लोगों को औपचारिक बैंकिंग प्रणाली से जोड़ा गया, उसे भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर डॉ. सी. रंगराजन ने भी सराहा. ये उपलब्धियां उनके पूरे करियर में एक समान पैटर्न को दर्शाती हैं, व्यावसायिक लक्ष्यों के साथ व्यापक सामाजिक विकास को जोड़ना.
लगातार बदलते दौर में नेतृत्व
आधुनिक CMO की भूमिका अब पूरी तरह बदल चुकी है. आज मार्केटिंग लीडर्स से अपेक्षा की जाती है कि वे प्रोडक्ट स्ट्रैटेजी, ग्राहक अनुभव, तकनीक अपनाने, डेटा गवर्नेंस और संगठनात्मक परिवर्तन जैसे क्षेत्रों में भी नेतृत्व करें.
श्रीपद शेंडे का करियर इसी बदलाव का उदाहरण है. उनका सफर पारंपरिक बैंकिंग, डिजिटल पेमेंट, फिनटेक, कॉर्पोरेट स्ट्रैटेजी, AI आधारित नवाचार और संगठनात्मक उत्कृष्टता तक फैला है, ऐसे सभी क्षेत्र जो आज आधुनिक वित्तीय संस्थानों में एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं. उनका करियर यह दिखाता है कि मार्केटिंग नेतृत्व का भविष्य केवल ब्रांड बनाने में नहीं, बल्कि ऐसे संस्थान बनाने में है जो बदलाव के साथ खुद को ढाल सकें, नवाचार कर सकें और दीर्घकालिक मूल्य सृजित कर सकें.
रीमा भादुड़ी, BW रिपोर्टर्स
(लेखिका BW Businessworld में सीनियर एडिटोरियल लीड हैं. वह मुख्य रूप से मार्केटिंग, विज्ञापन, एक्सपीरिएंशियल मार्केटिंग और रिटेल पर लिखती हैं तथा BW Marketing World वर्टिकल को भी कवर करती हैं.)